Chaupai Sahib,
ਚੌਪਈ ਸਾਹਿਬ,
चौपयी साहिब


200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates ADVERTISE HERE


Gurbani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
English ---
---

ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

ikOankaar satigur prasaadh ||

ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

पातिसाही १० ॥

paatisaahee 10 ||

ਕਬਿਯੋ ਬਾਚ ਬੇਨਤੀ ॥

कबियो बाच बेनती ॥

kabiyo baach benatee ||

ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||


ਹਮਰੀ ਕਰੋ ਹਾਥ ਦੈ ਰੱਛਾ ॥

हमरी करो हाथ दै रच्छा ॥

hamaree karo haath dhai ra'chhaa ||

ਪੂਰਨ ਹੋਇ ਚਿਤ ਕੀ ਇੱਛਾ ॥

पूरन होइ चित की इच्छा ॥

pooran hoi chit kee i'chhaa ||

ਤਵ ਚਰਨਨ ਮਨ ਰਹੈ ਹਮਾਰਾ ॥

तव चरनन मन रहै हमारा ॥

tav charanan man rahai hamaaraa ||

ਅਪਨਾ ਜਾਨ ਕਰੋ ਪ੍ਰਤਿਪਾਰਾ ॥੩੭੭॥

अपना जान करो प्रतिपारा ॥३७७॥

apanaa jaan karo pratipaaraa ||377||


ਹਮਰੇ ਦੁਸਟ ਸਭੈ ਤੁਮ ਘਾਵਹੁ ॥

हमरे दुसट सभै तुम घावहु ॥

hamare dhusaT sabhai tum ghaavahu ||

ਆਪੁ ਹਾਥ ਦੈ ਮੋਹਿ ਬਚਾਵਹੁ ॥

आपु हाथ दै मोहि बचावहु ॥

aap haath dhai moh bachaavahu ||

ਸੁਖੀ ਬਸੈ ਮੋਰੋ ਪਰਿਵਾਰਾ ॥

सुखी बसै मोरो परिवारा ॥

sukhee basai moro parivaaraa ||

ਸੇਵਕ ਸਿੱਖ ਸਭੈ ਕਰਤਾਰਾ ॥੩੭੮॥

सेवक सिक्ख सभै करतारा ॥३७८॥

sevak si'kh sabhai karataaraa ||378||


ਮੋ ਰੱਛਾ ਨਿਜ ਕਰ ਦੈ ਕਰਿਯੈ ॥

मो रच्छा निज कर दै करियै ॥

mo ra'chhaa nij kar dhai kariyai ||

ਸਭ ਬੈਰਨ ਕੋ ਆਜ ਸੰਘਰਿਯੈ ॥

सभ बैरन को आज संघरियै ॥

sabh bairan ko aaj sa(n)ghariyai ||

ਪੂਰਨ ਹੋਇ ਹਮਾਰੀ ਆਸਾ ॥

पूरन होइ हमारी आसा ॥

pooran hoi hamaaree aasaa ||

ਤੋਰ ਭਜਨ ਕੀ ਰਹੈ ਪਿਆਸਾ ॥੩੭੯॥

तोर भजन की रहै पिआसा ॥३७९॥

tor bhajan kee rahai piaasaa ||379||


ਤੁਮਹਿ ਛਾਡਿ ਕੋਈ ਅਵਰ ਨ ਧਿਯਾਊਂ ॥

तुमहि छाडि कोई अवर न धियाऊं ॥

tumeh chhaadd koiee avar na dhiyaauoo(n) ||

ਜੋ ਬਰ ਚਹੋਂ ਸੁ ਤੁਮ ਤੇ ਪਾਊਂ ॥

जो बर चहों सु तुम ते पाऊं ॥

jo bar chaho(n) su tum te paauoo(n) ||

ਸੇਵਕ ਸਿੱਖ ਹਮਾਰੇ ਤਾਰੀਅਹਿ ॥

सेवक सिक्ख हमारे तारीअहि ॥

sevak si'kh hamaare taare'eh ||

ਚੁਨਿ ਚੁਨਿ ਸਤ੍ਰ ਹਮਾਰੇ ਮਾਰੀਅਹਿ ॥੩੮੦॥

चुनि चुनि सत्र हमारे मारीअहि ॥३८०॥

chun chun satr hamaare maare'eh ||380||


ਆਪ ਹਾਥ ਦੈ ਮੁਝੈ ਉਬਰਿਯੈ ॥

आप हाथ दै मुझै उबरियै ॥

aap haath dhai mujhai ubariyai ||

ਮਰਨ ਕਾਲ ਕਾ ਤ੍ਰਾਸ ਨਿਵਰਿਯੈ ॥

मरन काल का त्रास निवरियै ॥

maran kaal kaa traas nivariyai ||

ਹੂਜੋ ਸਦਾ ਹਮਾਰੇ ਪੱਛਾ ॥

हूजो सदा हमारे पच्छा ॥

hoojo sadhaa hamaare pa'chhaa ||

ਸ੍ਰੀ ਅਸਿਧੁਜ ਜੂ ਕਰਿਯਹੁ ਰੱਛਾ ॥੩੮੧॥

स्री असिधुज जू करियहु रच्छा ॥३८१॥

sree asidhuj joo kariyahu ra'chhaa ||381||


ਰਾਖਿ ਲੇਹੁ ਮੁਹਿ ਰਾਖਨਹਾਰੇ ॥

राखि लेहु मुहि राखनहारे ॥

raakh leh muh raakhanahaare ||

ਸਾਹਿਬ ਸੰਤ ਸਹਾਇ ਪਿਯਾਰੇ ॥

साहिब संत सहाइ पियारे ॥

saahib sa(n)t sahai piyaare ||

ਦੀਨ ਬੰਧੁ ਦੁਸਟਨ ਕੇ ਹੰਤਾ ॥

दीन बंधु दुसटन के हंता ॥

dheen ba(n)dh dhusaTan ke ha(n)taa ||

ਤੁਮ ਹੋ ਪੁਰੀ ਚਤੁਰ ਦਸ ਕੰਤਾ ॥੩੮੨॥

तुम हो पुरी चतुर दस कंता ॥३८२॥

tum ho puree chatur dhas ka(n)taa ||382||


ਕਾਲ ਪਾਇ ਬ੍ਰਹਮਾ ਬਪੁ ਧਰਾ ॥

काल पाइ ब्रहमा बपु धरा ॥

kaal pai brahamaa bap dharaa ||

ਕਾਲ ਪਾਇ ਸਿਵਜੂ ਅਵਤਰਾ ॥

काल पाइ सिवजू अवतरा ॥

kaal pai sivajoo avataraa ||

ਕਾਲ ਪਾਇ ਕਰ ਬਿਸਨੁ ਪ੍ਰਕਾਸਾ ॥

काल पाइ कर बिसनु प्रकासा ॥

kaal pai kar bisan prakaasaa ||

ਸਕਲ ਕਾਲ ਕਾ ਕੀਆ ਤਮਾਸਾ ॥੩੮੩॥

सकल काल का कीआ तमासा ॥३८३॥

sakal kaal kaa keeaa tamaasaa ||383||


ਜਵਨ ਕਾਲ ਜੋਗੀ ਸਿਵ ਕੀਓ ॥

जवन काल जोगी सिव कीओ ॥

javan kaal jogee siv keeo ||

ਬੇਦ ਰਾਜ ਬ੍ਰਹਮਾ ਜੂ ਥੀਓ ॥

बेद राज ब्रहमा जू थीओ ॥

bedh raaj brahamaa joo theeo ||

ਜਵਨ ਕਾਲ ਸਭ ਲੋਕ ਸਵਾਰਾ ॥

जवन काल सभ लोक सवारा ॥

javan kaal sabh lok savaaraa ||

ਨਮਸਕਾਰ ਹੈ ਤਾਹਿ ਹਮਾਰਾ ॥੩੮੪॥

नमसकार है ताहि हमारा ॥३८४॥

namasakaar hai taeh hamaaraa ||384||


ਜਵਨ ਕਾਲ ਸਭ ਜਗਤ ਬਨਾਯੋ ॥

जवन काल सभ जगत बनायो ॥

javan kaal sabh jagat banaayo ||

ਦੇਵ ਦੈਤ ਜੱਛਨ ਉਪਜਾਯੋ ॥

देव दैत जच्छन उपजायो ॥

dhev dhait ja'chhan upajaayo ||

ਆਦਿ ਅੰਤਿ ਏਕੈ ਅਵਤਾਰਾ ॥

आदि अंति एकै अवतारा ॥

aadh a(n)t ekai avataaraa ||

ਸੋਈ ਗੁਰੂ ਸਮਝਿਯਹੁ ਹਮਾਰਾ ॥੩੮੫॥

सोई गुरू समझियहु हमारा ॥३८५॥

soiee guroo samajhiyahu hamaaraa ||385||


ਨਮਸਕਾਰ ਤਿਸ ਹੀ ਕੋ ਹਮਾਰੀ ॥

नमसकार तिस ही को हमारी ॥

namasakaar tis hee ko hamaaree ||

ਸਕਲ ਪ੍ਰਜਾ ਜਿਨ ਆਪ ਸਵਾਰੀ ॥

सकल प्रजा जिन आप सवारी ॥

sakal prajaa jin aap savaaree ||

ਸਿਵਕਨ ਕੋ ਸਿਵਗੁਨ ਸੁਖ ਦੀਓ ॥

सिवकन को सिवगुन सुख दीओ ॥

sivakan ko sivagun sukh dheeo ||

ਸਤੱ੍ਰੁਨ ਕੋ ਪਲ ਮੋ ਬਧ ਕੀਓ ॥੩੮੬॥

सत्््रुन को पल मो बध कीओ ॥३८६॥

sata'run ko pal mo badh keeo ||386||


ਘਟ ਘਟ ਕੇ ਅੰਤਰ ਕੀ ਜਾਨਤ ॥

घट घट के अंतर की जानत ॥

ghaT ghaT ke a(n)tar kee jaanat ||

ਭਲੇ ਬੁਰੇ ਕੀ ਪੀਰ ਪਛਾਨਤ ॥

भले बुरे की पीर पछानत ॥

bhale bure kee peer pachhaanat ||

ਚੀਟੀ ਤੇ ਕੁੰਚਰ ਅਸਥੂਲਾ ॥

चीटी ते कुँचर असथूला ॥

cheeTee te ku(n)char asathoolaa ||

ਸਭ ਪਰ ਕ੍ਰਿਪਾ ਦ੍ਰਿਸਟਿ ਕਰ ਫੂਲਾ ॥੩੮੭॥

सभ पर कृपा दृसटि कर फूला ॥३८७॥

sabh par kirapaa dhirasaT kar foolaa ||387||


ਸੰਤਨ ਦੁਖ ਪਾਏ ਤੇ ਦੁਖੀ ॥

संतन दुख पाए ते दुखी ॥

sa(n)tan dhukh paae te dhukhee ||

ਸੁਖ ਪਾਏ ਸਾਧੁਨ ਕੇ ਸੁਖੀ ॥

सुख पाए साधुन के सुखी ॥

sukh paae saadhun ke sukhee ||

ਏਕ ਏਕ ਕੀ ਪੀਰ ਪਛਾਨੈਂ ॥

एक एक की पीर पछानैं ॥

ek ek kee peer pachhaanai(n) ||

ਘਟ ਘਟ ਕੇ ਪਟ ਪਟ ਕੀ ਜਾਨੈਂ ॥੩੮੮॥

घट घट के पट पट की जानैं ॥३८८॥

ghaT ghaT ke paT paT kee jaanai(n) ||388||


ਜਬ ਉਦਕਰਖ ਕਰਾ ਕਰਤਾਰਾ ॥

जब उदकरख करा करतारा ॥

jab udhakarakh karaa karataaraa ||

ਪ੍ਰਜਾ ਧਰਤ ਤਬ ਦੇਹ ਅਪਾਰਾ ॥

प्रजा धरत तब देह अपारा ॥

prajaa dharat tab dheh apaaraa ||

ਜਬ ਆਕਰਖ ਕਰਤ ਹੋ ਕਬਹੂੰ ॥

जब आकरख करत हो कबहूँ ॥

jab aakarakh karat ho kabahoo(n) ||

ਤੁਮ ਮੈ ਮਿਲਤ ਦੇਹ ਧਰ ਸਭਹੂੰ ॥੩੮੯॥

तुम मै मिलत देह धर सभहूँ ॥३८९॥

tum mai milat dheh dhar sabhahoo(n) ||389||


ਜੇਤੇ ਬਦਨ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਸਭ ਧਾਰੈ ॥

जेते बदन सृसटि सभ धारै ॥

jete badhan sirasaT sabh dhaarai ||

ਆਪੁ ਆਪਨੀ ਬੂਝ ਉਚਾਰੈ ॥

आपु आपनी बूझ उचारै ॥

aap aapanee boojh uchaarai ||

ਤੁਮ ਸਭਹੀ ਤੇ ਰਹਤ ਨਿਰਾਲਮ ॥

तुम सभही ते रहत निरालम ॥

tum sabhahee te rahat niraalam ||

ਜਾਨਤ ਬੇਦ ਭੇਦ ਅਰ ਆਲਮ ॥੩੯੦॥

जानत बेद भेद अर आलम ॥३९०॥

jaanat bedh bhedh ar aalam ||390||


ਨਿਰੰਕਾਰ ਨ੍ਰਿਬਿਕਾਰ ਨਿਰਲੰਭ ॥

निरंकार नृबिकार निरलंभ ॥

nira(n)kaar nirabikaar nirala(n)bh ||

ਆਦਿ ਅਨੀਲ ਅਨਾਦਿ ਅਸੰਭ ॥

आदि अनील अनादि असंभ ॥

aadh aneel anaadh asa(n)bh ||

ਤਾ ਕਾ ਮੂੜ੍ਹ ਉਚਾਰਤ ਭੇਦਾ ॥

ता का मूड़्ह उचारत भेदा ॥

taa kaa mooRh uchaarat bhedhaa ||

ਜਾ ਕੋ ਭੇਵ ਨ ਪਾਵਤ ਬੇਦਾ ॥੩੯੧॥

जा को भेव न पावत बेदा ॥३९१॥

jaa ko bhev na paavat bedhaa ||391||


ਤਾ ਕੋ ਕਰਿ ਪਾਹਨ ਅਨੁਮਾਨਤ ॥

ता को करि पाहन अनुमानत ॥

taa ko kar paahan anumaanat ||

ਮਹਾ ਮੂੜ੍ਹ ਕਛੁ ਭੇਦ ਨ ਜਾਨਤ ॥

महा मूड़्ह कछु भेद न जानत ॥

mahaa mooRh kachh bhedh na jaanat ||

ਮਹਾਦੇਵ ਕੋ ਕਹਤ ਸਦਾ ਸਿਵ ॥

महादेव को कहत सदा सिव ॥

mahaadhev ko kahat sadhaa siv ||

ਨਿਰੰਕਾਰ ਕਾ ਚੀਨਤ ਨਹਿ ਭਿਵ ॥੩੯੨॥

निरंकार का चीनत नहि भिव ॥३९२॥

nira(n)kaar kaa cheenat neh bhiv ||392||


ਆਪੁ ਆਪਨੀ ਬੁਧਿ ਹੈ ਜੇਤੀ ॥

आपु आपनी बुधि है जेती ॥

aap aapanee budh hai jetee ||

ਬਰਨਤ ਭਿੰਨ ਭਿੰਨ ਤੁਹਿ ਤੇਤੀ ॥

बरनत भिंन भिंन तुहि तेती ॥

baranat bhi(n)n bhi(n)n tuh tetee ||

ਤੁਮਰਾ ਲਖਾ ਨ ਜਾਇ ਪਸਾਰਾ ॥

तुमरा लखा न जाइ पसारा ॥

tumaraa lakhaa na jai pasaaraa ||

ਕਿਹ ਬਿਧਿ ਸਜਾ ਪ੍ਰਥਮ ਸੰਸਾਰਾ ॥੩੯੩॥

किह बिधि सजा प्रथम संसारा ॥३९३॥

keh bidh sajaa pratham sa(n)saaraa ||393||


ਏਕੈ ਰੂਪ ਅਨੂਪ ਸਰੂਪਾ ॥

एकै रूप अनूप सरूपा ॥

ekai roop anoop saroopaa ||

ਰੰਕ ਭਯੋ ਰਾਵ ਕਹੀ ਭੂਪਾ ॥

रंक भयो राव कही भूपा ॥

ra(n)k bhayo raav kahee bhoopaa ||

ਅੰਡਜ ਜੇਰਜ ਸੇਤਜ ਕੀਨੀ ॥

अंडज जेरज सेतज कीनी ॥

a(n)ddaj jeraj setaj keenee ||

ਉਤਭੁਜ ਖਾਨਿ ਬਹੁਰ ਰਚਿ ਦੀਨੀ ॥੩੯੪॥

उतभुज खानि बहुर रचि दीनी ॥३९४॥

autabhuj khaan bahur rach dheenee ||394||


ਕਹੂੰ ਫੂਲ ਰਾਜਾ ਹ੍ਵੈ ਬੈਠਾ ॥

कहूँ फूल राजा ह्वै बैठा ॥

kahoo(n) fool raajaa havai baiThaa ||

ਕਹੂੰ ਸਿਮਟਿ ਭ੍ਯਿੋ ਸੰਕਰ ਇਕੈਠਾ ॥

कहूँ सिमटि भि्यो संकर इकैठा ॥

kahoo(n) simaT bhiyo sa(n)kar ikaiThaa ||

ਸਗਰੀ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਦਿਖਾਇ ਅਚੰਭਵ ॥

सगरी सृसटि दिखाइ अचंभव ॥

sagaree sirasaT dhikhai acha(n)bhav ||

ਆਦਿ ਜੁਗਾਦਿ ਸਰੂਪ ਸੁਯੰਭਵ ॥੩੯੫॥

आदि जुगादि सरूप सुयंभव ॥३९५॥

aadh jugaadh saroop suya(n)bhav ||395||


ਅਬ ਰੱਛਾ ਮੇਰੀ ਤੁਮ ਕਰੋ ॥

अब रच्छा मेरी तुम करो ॥

ab ra'chhaa meree tum karo ||

ਸਿੱਖ ਉਬਾਰਿ ਅਸਿੱਖ ਸੰਘਰੋ ॥

सिक्ख उबारि असिक्ख संघरो ॥

si'kh ubaar asi'kh sa(n)gharo ||

ਦੁਸ਼ਟ ਜਿਤੇ ਉਠਵਤ ਉਤਪਾਤਾ ॥

दुशट जिते उठवत उतपाता ॥

dhushaT jite uThavat utapaataa ||

ਸਕਲ ਮਲੇਛ ਕਰੋ ਰਣ ਘਾਤਾ ॥੩੯੬॥

सकल मलेछ करो रण घाता ॥३९६॥

sakal malechh karo ran ghaataa ||396||


ਜੇ ਅਸਿਧੁਜ ਤਵ ਸਰਨੀ ਪਰੇ ॥

जे असिधुज तव सरनी परे ॥

je asidhuj tav saranee pare ||

ਤਿਨ ਕੇ ਦੁਸ਼ਟ ਦੁਖਿਤ ਹ੍ਵੈ ਮਰੇ ॥

तिन के दुशट दुखित ह्वै मरे ॥

tin ke dhushaT dhukhit havai mare ||

ਪੁਰਖ ਜਵਨ ਪਗ ਪਰੇ ਤਿਹਾਰੇ ॥

पुरख जवन पग परे तिहारे ॥

purakh javan pag pare tihaare ||

ਤਿਨ ਕੇ ਤੁਮ ਸੰਕਟ ਸਭ ਟਾਰੇ ॥੩੯੭॥

तिन के तुम संकट सभ टारे ॥३९७॥

tin ke tum sa(n)kaT sabh Taare ||397||


ਜੋ ਕਲਿ ਕੋ ਇਕ ਬਾਰ ਧਿਐ ਹੈ ॥

जो कलि को इक बार धिऐ है ॥

jo kal ko ik baar dhiaai hai ||

ਤਾ ਕੇ ਕਾਲ ਨਿਕਟਿ ਨਹਿ ਐਹੈ ॥

ता के काल निकटि नहि ऐहै ॥

taa ke kaal nikaT neh aaihai ||

ਰੱਛਾ ਹੋਇ ਤਾਹਿ ਸਭ ਕਾਲਾ ॥

रच्छा होइ ताहि सभ काला ॥

ra'chhaa hoi taeh sabh kaalaa ||

ਦੁਸਟ ਅਰਿਸਟ ਟਰੇਂ ਤਤਕਾਲਾ ॥੩੯੮॥

दुसट अरिसट टरें ततकाला ॥३९८॥

dhusaT arisaT Tare(n) tatakaalaa ||398||


ਕ੍ਰਿਪਾ ਦ੍ਰਿਸਟਿ ਤਨ ਜਾਹਿ ਨਿਹਰਿਹੋ ॥

कृपा दृसटि तन जाहि निहरिहो ॥

kirapaa dhirasaT tan jaeh nihariho ||

ਤਾਕੇ ਤਾਪ ਤਨਕ ਮੋ ਹਰਿਹੋ ॥

ताके ताप तनक मो हरिहो ॥

taake taap tanak mo hariho ||

ਰਿੱਧਿ ਸਿੱਧਿ ਘਰ ਮੋ ਸਭ ਹੋਈ ॥

रिद्धि सिद्धि घर मो सभ होई ॥

ri'dh si'dh ghar mo sabh hoiee ||

ਦੁਸ਼ਟ ਛਾਹ ਛ੍ਵੈ ਸਕੈ ਨ ਕੋਈ ॥੩੯੯॥

दुशट छाह छ्वै सकै न कोई ॥३९९॥

dhushaT chhaeh chhavai sakai na koiee ||399||


ਏਕ ਬਾਰ ਜਿਨ ਤੁਮੈ ਸੰਭਾਰਾ ॥

एक बार जिन तुमै संभारा ॥

ek baar jin tumai sa(n)bhaaraa ||

ਕਾਲ ਫਾਸ ਤੇ ਤਾਹਿ ਉਬਾਰਾ ॥

काल फास ते ताहि उबारा ॥

kaal faas te taeh ubaaraa ||

ਜਿਨ ਨਰ ਨਾਮ ਤਿਹਾਰੋ ਕਹਾ ॥

जिन नर नाम तिहारो कहा ॥

jin nar naam tihaaro kahaa ||

ਦਾਰਿਦ ਦੁਸਟ ਦੋਖ ਤੇ ਰਹਾ ॥੪੦੦॥

दारिद दुसट दोख ते रहा ॥४००॥

dhaaridh dhusaT dhokh te rahaa ||400||


ਖੜਗ ਕੇਤ ਮੈ ਸਰਣਿ ਤਿਹਾਰੀ ॥

खड़ग केत मै सरणि तिहारी ॥

khaRag ket mai saran tihaaree ||

ਆਪ ਹਾਥ ਦੈ ਲੇਹੁ ਉਬਾਰੀ ॥

आप हाथ दै लेहु उबारी ॥

aap haath dhai leh ubaaree ||

ਸਰਬ ਠੌਰ ਮੋ ਹੋਹੁ ਸਹਾਈ ॥

सरब ठौर मो होहु सहाई ॥

sarab Thauar mo hoh sahaiee ||

ਦੁਸਟ ਦੋਖ ਤੇ ਲੇਹੁ ਬਚਾਈ ॥੪੦੧॥

दुसट दोख ते लेहु बचाई ॥४०१॥

dhusaT dhokh te leh bachaiee ||401||


ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰੀ ਹਮ ਪਰ ਜਗਮਾਤਾ ॥

कृपा करी हम पर जगमाता ॥

kirapaa karee ham par jagamaataa ||

ਗ੍ਰੰਥ ਕਰਾ ਪੂਰਨ ਸੁਭਰਾਤਾ ॥

ग्रंथ करा पूरन सुभराता ॥

gra(n)th karaa pooran subharaataa ||

ਕਿਲਬਿਖ ਸਕਲ ਦੇਹ ਕੋ ਹਰਤਾ ॥

किलबिख सकल देह को हरता ॥

kilabikh sakal dheh ko harataa ||

ਦੁਸਟ ਦੋਖਿਯਨ ਕੋ ਛੈ ਕਰਤਾ ॥੪੦੨॥

दुसट दोखियन को छै करता ॥४०२॥

dhusaT dhokhiyan ko chhai karataa ||402||


ਸ੍ਰੀ ਅਸਿਧੁਜ ਜਬ ਭਏ ਦਯਾਲਾ ॥

स्री असिधुज जब भए दयाला ॥

sree asidhuj jab bhe dhayaalaa ||

ਪੂਰਨ ਕਰਾ ਗ੍ਰੰਥ ਤਤਕਾਲਾ ॥

पूरन करा ग्रंथ ततकाला ॥

pooran karaa gra(n)th tatakaalaa ||

ਮਨ ਬਾਛਤ ਫਲ ਪਾਵੈ ਸੋਈ ॥

मन बाछत फल पावै सोई ॥

man baachhat fal paavai soiee ||

ਦੂਖ ਨ ਤਿਸੈ ਬਿਆਪਤ ਕੋਈ ॥੪੦੩॥

दूख न तिसै बिआपत कोई ॥४०३॥

dhookh na tisai biaapat koiee ||403||


ਅੜਿਲ ॥

अड़िल ॥

aRil ||

ਸੁਨੈ ਗੁੰਗ ਜੋ ਯਾਹਿ ਸੁ ਰਸਨਾ ਪਾਵਈ ॥

सुनै गुँग जो याहि सु रसना पावई ॥

sunai gu(n)g jo yaeh su rasanaa paaviee ||

ਸੁਨੈ ਮੂੜ ਚਿਤ ਲਾਇ ਚਤੁਰਤਾ ਆਵਈ ॥

सुनै मूड़ चित लाइ चतुरता आवई ॥

sunai mooR chit lai chaturataa aaviee ||

ਦੂਖ ਦਰਦ ਭੌ ਨਿਕਟ ਨ ਤਿਨ ਨਰ ਕੇ ਰਹੈ ॥

दूख दरद भौ निकट न तिन नर के रहै ॥

dhookh dharadh bhau nikaT na tin nar ke rahai ||

ਹੋ ਜੋ ਯਾ ਕੀ ਏਕ ਬਾਰ ਚੌਪਈ ਕੋ ਕਹੈ ॥੪੦੪॥

हो जो या की एक बार चौपई को कहै ॥४०४॥

ho jo yaa kee ek baar chauapiee ko kahai ||404||


ਚੌਪਈ ॥

चौपई ॥

chauapiee ||


ਸੰਬਤ ਸਤ੍ਰਹ ਸਹਸ ਭਣਿਜੈ ॥

संबत सत्रह सहस भणिजै ॥

sa(n)bat satreh sahas bhanijai ||

ਅਰਧ ਸਹਸ ਫੁਨਿ ਤੀਨਿ ਕਹਿਜੈ ॥

अरध सहस फुनि तीनि कहिजै ॥

aradh sahas fun teen kahijai ||

ਭਾਦ੍ਰਵ ਸੁਦੀ ਅਸਟਮੀ ਰਵਿ ਵਾਰਾ ॥

भाद्रव सुदी असटमी रवि वारा ॥

bhaadhrav sudhee asaTamee rav vaaraa ||

ਤੀਰ ਸਤੁਦ੍ਰਵ ਗ੍ਰੰਥ ਸੁਧਾਰਾ ॥੪੦੫॥

तीर सतुद्रव ग्रंथ सुधारा ॥४०५॥

teer satudhrav gra(n)th sudhaaraa ||405||


ਸ੍ਵੈਯਾ ॥

स्वैया ॥

savaiyaa ||

ਪਾਇ ਗਹੇ ਜਬ ਤੇ ਤੁਮਰੇ ਤਬ ਤੇ ਕੋਊ ਆਂਖ ਤਰੇ ਨਹੀ ਆਨਯੋ ॥

पाइ गहे जब ते तुमरे तब ते कोऊ आँख तरे नही आनयो ॥

pai gahe jab te tumare tab te kouoo aa(n)kh tare nahee aanayo ||

ਰਾਮ ਰਹੀਮ ਪੁਰਾਨ ਕੁਰਾਨ ਅਨੇਕ ਕਹੈਂ ਮਤ ਏਕ ਨ ਮਾਨਯੋ ॥

राम रहीम पुरान कुरान अनेक कहैं मत एक न मानयो ॥

raam raheem puraan kuraan anek kahai(n) mat ek na maanayo ||

ਸਿੰਮ੍ਰਿਤਿ ਸਾਸਤ੍ਰ ਬੇਦ ਸਭੈ ਬਹੁ ਭੇਦ ਕਹੈ ਹਮ ਏਕ ਨ ਜਾਨਯੋ ॥

सिंमृति सासत्र बेद सभै बहु भेद कहै हम एक न जानयो ॥

si(n)mirat saasatr bedh sabhai bahu bhedh kahai ham ek na jaanayo ||

ਸ੍ਰੀ ਅਸਿਪਾਨ ਕ੍ਰਿਪਾ ਤੁਮਰੀ ਕਰਿ ਮੈ ਨ ਕਹਯੋ ਸਭ ਤੋਹਿ ਬਖਾਨਯੋ ॥੮੬੩॥

स्री असिपान कृपा तुमरी करि मै न कहयो सभ तोहि बखानयो ॥८६३॥

sree asipaan kirapaa tumaree kar mai na kahayo sabh toh bakhaanayo ||863||


ਦੋਹਰਾ ॥

दोहरा ॥

dhoharaa ||

ਸਗਲ ਦੁਆਰ ਕਉ ਛਾਡਿ ਕੈ ਗਹਯੋ ਤੁਹਾਰੋ ਦੁਆਰ ॥

सगल दुआर कउ छाडि कै गहयो तुहारो दुआर ॥

sagal dhuaar kau chhaadd kai gahayo tuhaaro dhuaar ||

ਬਾਹਿ ਗਹੇ ਕੀ ਲਾਜ ਅਸਿ ਗੋਬਿੰਦ ਦਾਸ ਤੁਹਾਰ ॥੮੬੪॥

बाहि गहे की लाज असि गोबिंद दास तुहार ॥८६४॥

baeh gahe kee laaj as gobi(n)dh dhaas tuhaar ||864||



200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates ADVERTISE HERE