चउबोले (महला 5), Chaubole (Mahalla 5) Path in Hindi Gurbani online


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चउबोले महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

समन जउ इस प्रेम की दम क्यिहु होती साट ॥ रावन हुते सु रंक नहि जिनि सिर दीने काटि ॥१॥

प्रीति प्रेम तनु खचि रहिआ बीचु न राई होत ॥ चरन कमल मनु बेधिओ बूझनु सुरति संजोग ॥२॥

सागर मेर उदिआन बन नव खंड बसुधा भरम ॥ मूसन प्रेम पिरम कै गनउ एक करि करम ॥३॥

मूसन मसकर प्रेम की रही जु अ्मबरु छाइ ॥ बीधे बांधे कमल महि भवर रहे लपटाइ ॥४॥

जप तप संजम हरख सुख मान महत अरु गरब ॥ मूसन निमखक प्रेम परि वारि वारि देंउ सरब ॥५॥

मूसन मरमु न जानई मरत हिरत संसार ॥ प्रेम पिरम न बेधिओ उरझिओ मिथ बिउहार ॥६॥

घबु दबु जब जारीऐ बिछुरत प्रेम बिहाल ॥ मूसन तब ही मूसीऐ बिसरत पुरख दइआल ॥७॥

जा को प्रेम सुआउ है चरन चितव मन माहि ॥ नानक बिरही ब्रहम के आन न कतहू जाहि ॥८॥

लख घाटीं ऊंचौ घनो चंचल चीत बिहाल ॥ नीच कीच निम्रित घनी करनी कमल जमाल ॥९॥

कमल नैन अंजन सिआम चंद्र बदन चित चार ॥ मूसन मगन मरम सिउ खंड खंड करि हार ॥१०॥

मगनु भइओ प्रिअ प्रेम सिउ सूध न सिमरत अंग ॥ प्रगटि भइओ सभ लोअ महि नानक अधम पतंग ॥११॥


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