अंजुली (महला 5), Anjuli (Mahalla 5) Path in Hindi Gurbani online


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मारू अंजुली महला ५ घरु ७
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

संजोगु विजोगु धुरहु ही हूआ ॥ पंच धातु करि पुतला कीआ ॥ साहै कै फुरमाइअड़ै जी देही विचि जीउ आइ पइआ ॥१॥

जिथै अगनि भखै भड़हारे ॥ ऊरध मुख महा गुबारे ॥ सासि सासि समाले सोई ओथै खसमि छडाइ लइआ ॥२॥

विचहु गरभै निकलि आइआ ॥ खसमु विसारि दुनी चितु लाइआ ॥ आवै जाइ भवाईऐ जोनी रहणु न कितही थाइ भइआ ॥३॥

मिहरवानि रखि लइअनु आपे ॥ जीअ जंत सभि तिस के थापे ॥ जनमु पदारथु जिणि चलिआ नानक आइआ सो परवाणु थिआ ॥४॥१॥३१॥

मारू महला ५ ॥
वैदो न वाई भैणो न भाई एको सहाई रामु हे ॥१॥ कीता जिसो होवै पापां मलो धोवै सो सिमरहु परधानु हे ॥२॥ घटि घटे वासी सरब निवासी असथिरु जा का थानु हे ॥३॥ आवै न जावै संगे समावै पूरन जा का कामु हे ॥४॥ भगत जना का राखणहारा ॥ संत जीवहि जपि प्रान अधारा ॥ करन कारन समरथु सुआमी नानकु तिसु कुरबानु हे ॥५॥२॥३२॥


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