Pt 3, Akal Ustat (P:10),
ਅਕਾਲ ਉਸਤਤ (ਪਾਤਸਾਹੀ 10),
अकाल उसतत (पातसाही 10)


200+ ਗੁਰਬਾਣੀ (ਪੰਜਾਬੀ) 200+ गुरबाणी (हिंदी) 200+ Gurbani (Eng) Sundar Gutka Sahib (Download PDF) Daily Updates


Gurbani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
हिंदी ---
English ---
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ਸਰਬ ਸਿੰਮ੍ਰਿਤਨ ਸਰਬ ਸਾਸਤ੍ਰਨ ਸਰਬ ਬੇਦ ਬਿਚਾਰ ॥

सरब सिंमृतन सरब सासत्रन सरब बेद बिचार ॥

sarab si(n)mritan sarab saasatran sarab bedh bichaar ||

ਦੁਸਟ ਹਰਤਾ ਬਿਸ੍ਵ ਭਰਤਾ ਆਦਿ ਰੂਪ ਅਪਾਰ ॥

दुसट हरता बिस्व भरता आदि रूप अपार ॥

dhusaT harataa bisavai bharataa aadh roop apaar ||

ਦੁਸਟ ਦੰਡਣ ਪੁਸਟ ਖੰਡਣ ਆਦਿ ਦੇਵ ਅਖੰਡ ॥

दुसट दंडण पुसट खंडण आदि देव अखंड ॥

dhusaT dha(n)ddan pusaT kha(n)ddan aadh dhev akha(n)dd ||

ਭੂਮ ਅਕਾਸ ਜਲੇ ਥਲੇ ਮਹਿ ਜਪਤ ਜਾਪ ਅਮੰਡ ॥੧੬॥੧੯੬॥

भूम अकास जले थले महि जपत जाप अमंड ॥१६॥१९६॥

bhoom akaas jale thale meh japat jaap ama(n)dd ||16||196||


ਸ੍ਰਿਸਟਾਚਾਰ ਬਿਚਾਰ ਜੇਤੇ ਜਾਨੀਐ ਸਬਚਾਰ ॥

सृसटाचार बिचार जेते जानीऐ सबचार ॥

sirasaTaachaar bichaar jete jaaneeaai sabachaar ||

ਆਦਿ ਦੇਵ ਅਪਾਰ ਸ੍ਰੀ ਪਤਿ ਦੁਸਟ ਪੁਸਟ ਪ੍ਰਹਾਰ ॥

आदि देव अपार स्री पति दुसट पुसट प्रहार ॥

aadh dhev apaar sree pat dhusaT pusaT prahaar ||

ਅੰਨ ਦਾਤਾ ਗਿਆਨ ਗਿਆਤਾ ਸਰਬ ਮਾਨ ਮਹਿੰਦ੍ਰ ॥

अंन दाता गिआन गिआता सरब मान महिंद्र ॥

a(n)n dhaataa giaan giaataa sarab maan mahi(n)dhr ||

ਬੇਦ ਬਿਆਸ ਕਰੇ ਕਈ ਦਿਨ ਕੋਟਿ ਇੰਦ੍ਰ ਉਪਿੰਦ੍ਰ ॥੧੭॥੧੯੭॥

बेद बिआस करे कई दिन कोटि इंद्र उपिंद्र ॥१७॥१९७॥

bedh biaas kare kiee dhin koT i(n)dhr upi(n)dhr ||17||197||


ਜਨਮ ਜਾਤਾ ਕਰਮ ਗਿਆਤਾ ਧਰਮ ਚਾਰ ਬਿਚਾਰ ॥

जनम जाता करम गिआता धरम चार बिचार ॥

janam jaataa karam giaataa dharam chaar bichaar ||

ਬੇਦ ਭੇਵ ਨ ਪਾਵਈ ਸਿਵ ਰੁਦ੍ਰ ਔਰ ਮੁਖਚਾਰ ॥

बेद भेव न पावई सिव रुद्र और मुखचार ॥

bedh bhev na paaviee siv rudhr aauar mukhachaar ||

ਕੋਟਿ ਇੰਦ੍ਰ ਉਪਿੰਦ੍ਰ ਬਿਆਸ ਸਨਕ ਸਨਤ ਕੁਮਾਰ ॥

कोटि इंद्र उपिंद्र बिआस सनक सनत कुमार ॥

koT i(n)dhr upi(n)dhr biaas sanak sanat kumaar ||

ਗਾਇ ਗਾਇ ਥਕੇ ਸਭੈ ਗੁਨ ਚੱਕ੍ਰਤ ਭੇ ਮੁਖਚਾਰ ॥੧੮॥੧੯੮॥

गाइ गाइ थके सभै गुन चक्क्रत भे मुखचार ॥१८॥१९८॥

gai gai thake sabhai gun cha'krat bhe mukhachaar ||18||198||


ਆਦਿ ਅੰਤ ਨ ਮਧ ਜਾ ਕੋ ਭੂਤ ਭੱਬ ਭਵਾਨ ॥

आदि अंत न मध जा को भूत भब्ब भवान ॥

aadh a(n)t na madh jaa ko bhoot bha'b bhavaan ||

ਸਤਿ ਦੁਆਪਰ ਤ੍ਰਿਤੀਆ ਕਲਿਜੁਗ ਚਤ੍ਰ ਕਾਲ ਪ੍ਰਧਾਨ ॥

सति दुआपर तृतीआ कलिजुग चत्र काल प्रधान ॥

sat dhuaapar tirateeaa kalijug chatr kaal pradhaan ||

ਧਿਆਇ ਧਿਆਇ ਥਕੇ ਮਹਾ ਮੁਨਿ ਗਾਇ ਗੰਧ੍ਰਬ ਅਪਾਰ ॥

धिआइ धिआइ थके महा मुनि गाइ गंध्रब अपार ॥

dhiaai dhiaai thake mahaa mun gai ga(n)dhrab apaar ||

ਹਾਰਿ ਹਾਰਿ ਥਕੇ ਸਭੈ ਨਹੀਂ ਪਾਈਐ ਤਿਹ ਪਾਰ ॥੧੯॥੧੯੯॥

हारि हारि थके सभै नहीं पाईऐ तिह पार ॥१९॥१९९॥

haar haar thake sabhai nahee(n) paieeaai teh paar ||19||199||


ਨਾਰਦ ਆਦਿਕ ਬੇਦ ਬਿਆਸਕ ਮੁਨਿ ਮਹਾਨ ਅਨੰਤ ॥

नारद आदिक बेद बिआसक मुनि महान अनंत ॥

naaradh aadhik bedh biaasak mun mahaan ana(n)t ||

ਧਿਆਇ ਧਿਆਇ ਥਕੇ ਸਭੈ ਕਰ ਕੋਟਿ ਕਸਟ ਦੁਰੰਤ ॥

धिआइ धिआइ थके सभै कर कोटि कसट दुरंत ॥

dhiaai dhiaai thake sabhai kar koT kasaT dhura(n)t ||

ਗਾਇ ਗਾਇ ਥਕੇ ਗੰਧ੍ਰਬ ਨਾਚ ਅਪੱਛਰ ਅਪਾਰ ॥

गाइ गाइ थके गंध्रब नाच अपच्छर अपार ॥

gai gai thake ga(n)dhrab naach apa'chhar apaar ||

ਸੋਧਿ ਸੋਧਿ ਥਕੇ ਮਹਾ ਸੁਰ ਪਾਇਓ ਨਹਿ ਪਾਰ ॥੨੦॥੨੦੦॥

सोधि सोधि थके महा सुर पाइओ नहि पार ॥२०॥२००॥

sodh sodh thake mahaa sur paio neh paar ||20||200||


ਤ੍ਵ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਦੋਹਰਾ ॥

त्व प्रसादि ॥ दोहरा ॥

tavai prasaadh || dhoharaa ||

ਏਕ ਸਮੈ ਸ੍ਰੀ ਆਤਮਾ ਉਚਰਿਓ ਮਤਿ ਸਿਉ ਬੈਨ ॥

एक समै स्री आतमा उचरिओ मति सिउ बैन ॥

ek samai sree aatamaa uchario mat siau bain ||

ਸਬ ਪ੍ਰਤਾਪ ਜਗਦੀਸ ਕੋ ਕਹੋ ਸਕਲ ਬਿਧਿ ਤੈਨ ॥੧॥੨੦੧॥

सब प्रताप जगदीस को कहो सकल बिधि तैन ॥१॥२०१॥

sab prataap jagadhees ko kaho sakal bidh tain ||1||201||


ਕੋ ਆਤਮਾ ਸਰੂਪ ਹੈ ਕਹਾ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਕੋ ਬਿਚਾਰ ॥

को आतमा सरूप है कहा सृसटि को बिचार ॥

ko aatamaa saroop hai kahaa sirasaT ko bichaar ||

ਕਉਨ ਧਰਮ ਕੋ ਕਰਮ ਹੈ ਕਹੋ ਸਕਲ ਬਿਸਥਾਰ ॥੨॥੨੦੨॥

कउन धरम को करम है कहो सकल बिसथार ॥२॥२०२॥

kaun dharam ko karam hai kaho sakal bisathaar ||2||202||


ਦੋਹਰਾ ॥ ਕਹ ਜੀਤਬ ਕਹ ਮਰਨ ਹੈ ਕਵਨ ਸੁਰਗ ਕਹ ਨਰਕ ॥

दोहरा ॥ कह जीतब कह मरन है कवन सुरग कह नरक ॥

dhoharaa || keh jeetab keh maran hai kavan surag keh narak ||

ਕੋ ਸੁਘੜਾ ਕੋ ਮੂੜਤਾ ਕਹਾ ਤਰਕ ਅਵਤਰਕ ॥੩॥੨੦੩॥

को सुघड़ा को मूड़ता कहा तरक अवतरक ॥३॥२०३॥

ko sughaRaa ko mooRataa kahaa tarak avatarak ||3||203||


ਦੋਹਰਾ ॥ ਕੋ ਨਿੰਦਾ ਜਸ ਹੈ ਕਵਨ ਕਵਨ ਪਾਪ ਕਹ ਧਰਮ ॥

दोहरा ॥ को निंदा जस है कवन कवन पाप कह धरम ॥

dhoharaa || ko ni(n)dhaa jas hai kavan kavan paap keh dharam ||

ਕਵਨ ਜੋਗ ਕੋ ਭੋਗ ਹੈ ਕਵਨ ਕਰਮ ਅਪਕਰਮ ॥੪॥੨੦੪॥

कवन जोग को भोग है कवन करम अपकरम ॥४॥२०४॥

kavan jog ko bhog hai kavan karam apakaram ||4||204||


ਦੋਹਰਾ ॥ ਕਹੋ ਸੁ ਸ੍ਰਮ ਕਾ ਸੋ ਕਹੈ ਦਮ ਕੋ ਕਹਾ ਕਹੰਤ ॥

दोहरा ॥ कहो सु स्रम का सो कहै दम को कहा कहंत ॥

dhoharaa || kaho su sram kaa so kahai dham ko kahaa kaha(n)t ||

ਕੋ ਸੂਰਾ ਦਾਤਾ ਕਵਨ ਕਹੋ ਤੰਤ ਕੋ ਮੰਤ ॥੫॥੨੦੫॥

को सूरा दाता कवन कहो तंत को मंत ॥५॥२०५॥

ko sooraa dhaataa kavan kaho ta(n)t ko ma(n)t ||5||205||


ਦੋਹਰਾ ॥ ਕਹਾ ਰੰਕ ਰਾਜਾ ਕਵਨ ਹਰਖ ਸੋਗ ਹੈ ਕਵਨ ॥

दोहरा ॥ कहा रंक राजा कवन हरख सोग है कवन ॥

dhoharaa || kahaa ra(n)k raajaa kavan harakh sog hai kavan ||

ਕੋ ਰੋਗੀ ਰਾਗੀ ਕਵਨ ਕਹੋ ਤੱਤ ਮੁਹਿ ਤਵਨ ॥੬॥੨੦੬॥

को रोगी रागी कवन कहो तत्त मुहि तवन ॥६॥२०६॥

ko rogee raagee kavan kaho ta't muh tavan ||6||206||


ਦੋਹਰਾ ॥ ਕਵਨ ਰਿਸਟ ਕੋ ਪੁਸਟ ਹੈ ਕਹਾ ਸ੍ਰਿਸਟ ਕੋ ਚਾਰ ॥

दोहरा ॥ कवन रिसट को पुसट है कहा सृसट को चार ॥

dhoharaa || kavan risaT ko pusaT hai kahaa sirasaT ko chaar ||

ਕਵਨ ਸ੍ਰਿਸਟ ਕੋ ਭ੍ਰਿਸਟ ਹੈ ਕਹੋ ਸਕਲ ਬਿਸਥਾਰ ॥੭॥੨੦੭॥

कवन सृसट को भृसट है कहो सकल बिसथार ॥७॥२०७॥

kavan sirasaT ko bhirasaT hai kaho sakal bisathaar ||7||207||


ਦੋਹਰਾ ॥ ਕਹਾ ਭਰਮ ਕੋ ਕਰਮ ਹੈ ਕਹਾ ਭਰਮ ਕੋ ਨਾਸ ॥

दोहरा ॥ कहा भरम को करम है कहा भरम को नास ॥

dhoharaa || kahaa bharam ko karam hai kahaa bharam ko naas ||

ਕਹਾ ਚਿਤਨ ਕੀ ਚੇਸਟਾ ਕਹਾ ਅਚੇਤ ਪ੍ਰਕਾਸ ॥੮॥੨੦੮॥

कहा चितन की चेसटा कहा अचेत प्रकास ॥८॥२०८॥

kahaa chitan kee chesaTaa kahaa achet prakaas ||8||208||


ਦੋਹਰਾ ॥ ਕਹਾ ਨੇਮ ਸੰਜਮ ਕਹਾ ਕਹਾ ਗਿਆਨ ਅਗਿਆਨ ॥

दोहरा ॥ कहा नेम संजम कहा कहा गिआन अगिआन ॥

dhoharaa || kahaa nem sa(n)jam kahaa kahaa giaan agiaan ||

ਕੋ ਰੋਗੀ ਸੋਗੀ ਕਵਨ ਕਹਾ ਧਰਮ ਕੀ ਹਾਨ ॥੯॥੨੦੯॥

को रोगी सोगी कवन कहा धरम की हान ॥९॥२०९॥

ko rogee sogee kavan kahaa dharam kee haan ||9||209||


ਦੋਹਰਾ ॥ ਕੋ ਸੂਰਾ ਸੁੰਦਰ ਕਵਨ ਕਹਾ ਜੋਗ ਕੋ ਸਾਰ ॥

दोहरा ॥ को सूरा सुँदर कवन कहा जोग को सार ॥

dhoharaa || ko sooraa su(n)dhar kavan kahaa jog ko saar ||

ਕੋ ਦਾਤਾ ਗਿਆਨੀ ਕਵਨ ਕਹੋ ਬਿਚਾਰ ਅਬਿਚਾਰ ॥੧੦॥੨੧੦॥

को दाता गिआनी कवन कहो बिचार अबिचार ॥१०॥२१०॥

ko dhaataa giaanee kavan kaho bichaar abichaar ||10||210||


ਤ੍ਵ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਦੀਰਘ ਤ੍ਰਿਭੰਗੀ ਛੰਦ ॥

त्व प्रसादि ॥ दीरघ तृभंगी छंद ॥

tavai prasaadh || dheeragh tirabha(n)gee chha(n)dh ||


ਦੁਰਜਨ ਦਲ ਦੰਡਣ ਅਸੁਰ ਬਿਹੰਡਣ ਦੁਸਟ ਨਿਕੰਦਣਿ ਆਦਿ ਬ੍ਰਿਤੇ ॥

दुरजन दल दंडण असुर बिहंडण दुसट निकंदणि आदि बृते ॥

dhurajan dhal dha(n)ddan asur biha(n)ddan dhusaT nika(n)dhan aadh birate ||

ਚਛਰਾਸੁਰ ਮਾਰਣਿ ਪਤਿਤ ਉਧਾਰਣਿ ਨਰਕ ਨਿਵਾਰਣਿ ਗੂੜ੍ਹ ਗਤੇ ॥

चछरासुर मारणि पतित उधारणि नरक निवारणि गूड़्ह गते ॥

chachharaasur maaran patit udhaaran narak nivaaran gooRh gate ||

ਅਛੈ ਅਖੰਡੇ ਤੇਜ ਪ੍ਰਚੰਡੇ ਖੰਡ ਉਦੰਡੇ ਅਲਖ ਮਤੇ ॥

अछै अखंडे तेज प्रचंडे खंड उदंडे अलख मते ॥

achhai akha(n)dde tej pracha(n)dde kha(n)dd udha(n)dde alakh mate ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਰੰਮ ਕਪਰਦਨ ਛੱਤ੍ਰ ਛਿਤੇ ॥੧॥੨੧੧॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन रंम कपरदन छत्त्र छिते ॥१॥२११॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan ra(n)m kaparadhan chha'tr chhite ||1||211||


ਆਸੁਰਿ ਬਿਹੰਡਣਿ ਦੁਸਟ ਨਿਕੰਦਣਿ ਪੁਸਟ ਉਦੰਡਣਿ ਰੂਪ ਅਤੇ ॥

आसुरि बिहंडणि दुसट निकंदणि पुसट उदंडणि रूप अते ॥

aasur biha(n)ddan dhusaT nika(n)dhan pusaT udha(n)ddan roop ate ||

ਚੰਡਾਸੁਰ ਚੰਡਣਿ ਮੁੰਡ ਬਿਹੰਡਣਿ ਧੂਮ੍ਰ ਬਿਧੁੰਸਣਿ ਮਹਿਖ ਮਤੇ ॥

चंडासुर चंडणि मुँड बिहंडणि धूम्र बिधुँसणि महिख मते ॥

cha(n)ddaasur cha(n)ddan mu(n)dd biha(n)ddan dhoomr bidhu(n)san mahikh mate ||

ਦਾਨਵੀਂ ਪ੍ਰਹਾਰਣਿ ਨਰਕ ਨਿਵਾਰਣਿ ਅਧਿਮ ਉਧਾਰਣਿ ਉਰਧ ਅਧੇ ॥

दानवीं प्रहारणि नरक निवारणि अधिम उधारणि उरध अधे ॥

dhaanavee(n) prahaaran narak nivaaran adhim udhaaran uradh adhe ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਰੰਮ ਕਪਰਦਨ ਆਦਿ ਬ੍ਰਿਤੇ ॥੨॥੨੧੨॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन रंम कपरदन आदि बृते ॥२॥२१२॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan ra(n)m kaparadhan aadh birate ||2||212||


ਡਾਵਰੂ ਡਵੰਕੈ ਬਬਰ ਬਵੰਕੈ ਭੁਜਾ ਫਰੰਕੈ ਤੇਜ ਬਰੰ ॥

डावरू डवंकै बबर बवंकै भुजा फरंकै तेज बरं ॥

ddaavaroo ddava(n)kai babar bava(n)kai bhujaa fara(n)kai tej bara(n) ||

ਲੰਕੁੜੀਆ ਫਾਧੈ ਆਯੁਧ ਬਾਂਧੈ ਸੈਨ ਬਿਮਰਦਨ ਕਾਲ ਅਸੁਰੰ ॥

लंकुड़ीआ फाधै आयुध बाँधै सैन बिमरदन काल असुरं ॥

la(n)kuReeaa faadhai aayudh baa(n)dhai sain bimaradhan kaal asura(n) ||

ਅਸਟਾਯੁਧ ਚਮਕੈ ਭੂਖਣ ਦਮਕੈ ਅਤਿਸਿਤ ਝਮਕੈ ਫੁੰਕ ਫਣੰ ॥

असटायुध चमकै भूखण दमकै अतिसित झमकै फुँक फणं ॥

asaTaayudh chamakai bhookhan dhamakai atisit jhamakai fu(n)k fana(n) ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਰੰਮ ਕਪਰਦਨ ਦੈਤ ਜਿਣੰ ॥੩॥੨੧੩॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन रंम कपरदन दैत जिणं ॥३॥२१३॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan ra(n)m kaparadhan dhait jina(n) ||3||213||


ਚੰਡਾਸੁਰ ਚੰਡਣ ਮੁੰਡ ਬਿਮੁੰਡਣ ਖੰਡ ਅਖੰਡਣ ਖੂਨ ਖਿਤੇ ॥

चंडासुर चंडण मुँड बिमुँडण खंड अखंडण खून खिते ॥

cha(n)ddaasur cha(n)ddan mu(n)dd bimu(n)ddan kha(n)dd akha(n)ddan khoon khite ||

ਦਾਮਨੀ ਦਮੰਕਣਿ ਧੁਜਾ ਫਰੰਕਣਿ ਫਣੀ ਫੁੰਕਾਰਣਿ ਜੋਧ ਜਿਤੇ ॥

दामनी दमंकणि धुजा फरंकणि फणी फुँकारणि जोध जिते ॥

dhaamanee dhama(n)kan dhujaa fara(n)kan fanee fu(n)kaaran jodh jite ||

ਸਰ ਧਾਰ ਬਿਬਰਖਣਿ ਦੁਸਟ ਪ੍ਰਕਰਖਣਿ ਪੁਸਟ ਪ੍ਰਹਰਖਣਿ ਦੁਸ਼ਟ ਮਥੇ ॥

सर धार बिबरखणि दुसट प्रकरखणि पुसट प्रहरखणि दुशट मथे ॥

sar dhaar bibarakhan dhusaT prakarakhan pusaT praharakhan dhushaT mathe ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਭੂਮ ਅਕਾਸ ਤਲ ਉਰਧ ਅਧੇ ॥੪॥੨੧੪॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन भूम अकास तल उरध अधे ॥४॥२१४॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan bhoom akaas tal uradh adhe ||4||214||


ਦਾਮਨੀ ਪ੍ਰਹਾਸਨਿ ਸੁ ਛਬਿ ਨਿਵਾਸਨਿ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਪ੍ਰਕਾਸਨਿ ਗੂੜ੍ਹ ਗਤੇ ॥

दामनी प्रहासनि सु छबि निवासनि सृसटि प्रकासनि गूड़्ह गते ॥

dhaamanee prahaasan su chhab nivaasan sirasaT prakaasan gooRh gate ||

ਰਕਤਾਸੁਰ ਆਚਨ ਜੁਧ ਪ੍ਰਮਾਚਨ ਨ੍ਰਿਦੈ ਨਰਾਚਨ ਧਰਮ ਬ੍ਰਿਤੇ ॥

रकतासुर आचन जुध प्रमाचन नृदै नराचन धरम बृते ॥

rakataasur aachan judh pramaachan niradhai naraachan dharam birate ||

ਸ੍ਰੋਣੰਤ ਅਚਿੰਤੀ ਅਨਲ ਬਿਵੰਤੀ ਜੋਗ ਜਯੰਤੀ ਖੜਗ ਧਰੇ ॥

स्रोणंत अचिंती अनल बिवंती जोग जयंती खड़ग धरे ॥

srona(n)t achi(n)tee anal biva(n)tee jog jaya(n)tee khaRag dhare ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਪਾਪ ਬਿਨਾਸਨ ਧਰਮ ਕਰੇ ॥੫॥੨੧੫॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन पाप बिनासन धरम करे ॥५॥२१५॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan paap binaasan dharam kare ||5||215||


ਅਘ ਓਘ ਨਿਵਾਰਣਿ ਦੁਸਟ ਪ੍ਰਜਾਰਣਿ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਉਬਾਰਣਿ ਸੱੁਧ ਮਤੇ ॥

अघ ओघ निवारणि दुसट प्रजारणि सृसटि उबारणि सु्ुध मते ॥

agh ogh nivaaran dhusaT prajaaran sirasaT ubaaran sa'udh mate ||

ਫਣੀਅਰ ਫੁੰਕਾਰਣਿ ਬਾਘ ਬੁਕਾਰਣਿ ਸਸਤ੍ਰ ਪ੍ਰਹਾਰਣਿ ਸਾਧ ਮਤੇ ॥

फणीअर फुँकारणि बाघ बुकारणि ससत्र प्रहारणि साध मते ॥

faneear fu(n)kaaran baagh bukaaran sasatr prahaaran saadh mate ||

ਸੈਹਥੀ ਸਨਾਹਨਿ ਅਸਟ ਪ੍ਰਬਾਹਨਿ ਬੋਲ ਨਿਬਾਹਨਿ ਤੇਜ ਅਤੁਲੰ ॥

सैहथी सनाहनि असट प्रबाहनि बोल निबाहनि तेज अतुलं ॥

saihathee sanaahan asaT prabaahan bol nibaahan tej atula(n) ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਭੂਮਿ ਅਕਾਸ ਪਤਾਲ ਜਲੰ ॥੬॥੨੧੬॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन भूमि अकास पताल जलं ॥६॥२१६॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan bhoom akaas pataal jala(n) ||6||216||


ਚਾਚਰ ਚਮਕਾਰਨ ਚਿਛੁਰ ਹਾਰਨ ਧੂਮ ਧੁਕਾਰਨ ਦ੍ਰਪ ਮਥੇ ॥

चाचर चमकारन चिछुर हारन धूम धुकारन द्रप मथे ॥

chaachar chamakaaran chichhur haaran dhoom dhukaaran dhrap mathe ||

ਦਾੜ੍ਹੀ ਪ੍ਰਦੰਤੇ ਜੋਗ ਜਯੰਤੇ ਮਨੁਜ ਮਥੰਤੇ ਗੂੜ੍ਹ ਕਥੇ ॥

दाड़्ही प्रदंते जोग जयंते मनुज मथंते गूड़्ह कथे ॥

dhaaRhee pradha(n)te jog jaya(n)te manuj matha(n)te gooRh kathe ||

ਕਰਮ ਪ੍ਰਣਾਸਣਿ ਚੰਦ ਪ੍ਰਕਾਸਣਿ ਸੂਰਜ ਪ੍ਰਤੇਜਣਿ ਅਸਟ ਭੁਜੇ ॥

करम प्रणासणि चंद प्रकासणि सूरज प्रतेजणि असट भुजे ॥

karam pranaasan cha(n)dh prakaasan sooraj pratejan asaT bhuje ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਭਰਮ ਬਿਨਾਸਨ ਧਰਮ ਧੁਜੇ ॥੭॥੨੧੭॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन भरम बिनासन धरम धुजे ॥७॥२१७॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan bharam binaasan dharam dhuje ||7||217||


ਘੁੰਘਰੂ ਘਮੰਕਣਿ ਸਸਤ੍ਰ ਝਮੰਕਣਿ ਫਣੀਅਰ ਫੁੰਕਾਰਣਿ ਧਰਮ ਧੁਜੇ ॥

घुँघरू घमंकणि ससत्र झमंकणि फणीअर फुँकारणि धरम धुजे ॥

ghu(n)gharoo ghama(n)kan sasatr jhama(n)kan faneear fu(n)kaaran dharam dhuje ||

ਅਸ ਟਾਟ ਪ੍ਰਹਾਸਨ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਨਿਵਾਸਨ ਦੁਸਟ ਪ੍ਰਨਾਸਨ ਚੱਕ੍ਰ ਗਤੇ ॥

अस टाट प्रहासन सृसटि निवासन दुसट प्रनासन चक्क्र गते ॥

as TaaT prahaasan sirasaT nivaasan dhusaT pranaasan cha'kr gate ||

ਕੇਸਰੀ ਪ੍ਰਵਾਹੇ ਸੱੁਧ ਸਨਾਹੇ ਅਗਮ ਅਥਾਹੇ ਏਕ ਬ੍ਰਿਤੇ ॥

केसरी प्रवाहे सु्ुध सनाहे अगम अथाहे एक बृते ॥

kesaree pravaahe sa'udh sanaahe agam athaahe ek birate ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਆਦਿ ਕੁਮਾਰਿ ਅਗਾਧ ਬ੍ਰਿਤੇ ॥੮॥੨੧੮॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन आदि कुमारि अगाध बृते ॥८॥२१८॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan aadh kumaar agaadh birate ||8||218||


ਸੁਰ ਨਰ ਮੁਨਿ ਬੰਦਨ ਦੁਸਟਿ ਨਿਕੰਦਨਿ ਭ੍ਰਿਸਟਿ ਬਿਨਾਸਨ ਮ੍ਰਿਤ ਮਥੇ ॥

सुर नर मुनि बंदन दुसटि निकंदनि भृसटि बिनासन मृत मथे ॥

sur nar mun ba(n)dhan dhusaT nika(n)dhan bhirasaT binaasan mirat mathe ||

ਕਾਵਰੂ ਕੁਮਾਰੇ ਅਧਮ ਉਧਾਰੇ ਨਰਕ ਨਿਵਾਰੇ ਆਦਿ ਕਥੇ ॥

कावरू कुमारे अधम उधारे नरक निवारे आदि कथे ॥

kaavaroo kumaare adham udhaare narak nivaare aadh kathe ||

ਕਿੰਕਣੀ ਪ੍ਰਸੋਹਣਿ ਸੁਰ ਨਰ ਮੋਹਣਿ ਸਿੰਘਾਰੋਹਣਿ ਬਿਤਲ ਤਲੇ ॥

किंकणी प्रसोहणि सुर नर मोहणि सिंघारोहणि बितल तले ॥

ki(n)kanee prasohan sur nar mohan si(n)ghaarohan bital tale ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਸਭ ਠੌਰ ਨਿਵਾਸਨ ਬਾਇ ਪਤਾਲ ਅਕਾਸ ਅਨਲੇ ॥੯॥੨੧੯॥

जै जै होसी सभ ठौर निवासन बाइ पताल अकास अनले ॥९॥२१९॥

jai jai hosee sabh Thauar nivaasan bai pataal akaas anale ||9||219||


ਸੰਕਟੀ ਨਿਵਾਰਨਿ ਅਧਮ ਉਧਾਰਨਿ ਤੇਜ ਪ੍ਰਕਰਖਣਿ ਤੁੰਦ ਤਬੇ ॥

संकटी निवारनि अधम उधारनि तेज प्रकरखणि तुँद तबे ॥

sa(n)kaTee nivaaran adham udhaaran tej prakarakhan tu(n)dh tabe ||

ਦੁਖ ਦੋਖ ਦਹੰਤੀ ਜ੍ਵਾਲ ਜਯੰਤੀ ਆਦਿ ਅਨਾਦਿ ਅਗਾਧਿ ਅਛੇ ॥

दुख दोख दहंती ज्वाल जयंती आदि अनादि अगाधि अछे ॥

dhukh dhokh dhaha(n)tee javaiaal jaya(n)tee aadh anaadh agaadh achhe ||

ਸੁਧਤਾ ਸਮਰਪਣਿ ਤਰਕ ਬਿਤਰਕਣਿ ਤਪਤ ਪ੍ਰਤਾਪਣਿ ਜਪਤ ਜਿਵੇ ॥

सुधता समरपणि तरक बितरकणि तपत प्रतापणि जपत जिवे ॥

sudhataa samarapan tarak bitarakan tapat prataapan japat jive ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਸਸਤ੍ਰ ਪ੍ਰਕਰਖਣਿ ਆਦਿ ਅਨੀਲ ਅਗਾਧ ਅਭੇ ॥੧੦॥੨੨੦॥

जै जै होसी ससत्र प्रकरखणि आदि अनील अगाध अभे ॥१०॥२२०॥

jai jai hosee sasatr prakarakhan aadh aneel agaadh abhe ||10||220||


ਚੰਚਲਾ ਚਖੰਗੀ ਅਲਕ ਭੁਜੰਗੀ ਤੁੰਦ ਤੁਰੰਗਣਿ ਤਿੱਛ ਸਰੇ ॥

चंचला चखंगी अलक भुजंगी तुँद तुरंगणि तिच्छ सरे ॥

cha(n)chalaa chakha(n)gee alak bhuja(n)gee tu(n)dh tura(n)gan ti'chh sare ||

ਕਰ ਕਸਾ ਕੁਠਾਰੇ ਨਰਕ ਨਿਵਾਰੇ ਅਧਮ ਉਧਾਰੇ ਤੂਰ ਭੁਜੇ ॥

कर कसा कुठारे नरक निवारे अधम उधारे तूर भुजे ॥

kar kasaa kuThaare narak nivaare adham udhaare toor bhuje ||

ਦਾਮਨੀ ਦਮੰਕੇ ਕੇਹਰ ਲੰਕੇ ਆਦਿ ਅਤੰਕੇ ਕ੍ਰੂਰ ਕਥੇ ॥

दामनी दमंके केहर लंके आदि अतंके क्रूर कथे ॥

dhaamanee dhama(n)ke kehar la(n)ke aadh ata(n)ke kraoor kathe ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਰਕਤਾਸੁਰ ਖੰਡਣਿ ਸੁੰਭ ਚਕ੍ਰਤਨਿ ਸੁੰਭ ਮਥੇ ॥੧੧॥੨੨੧॥

जै जै होसी रकतासुर खंडणि सुँभ चक्रतनि सुँभ मथे ॥११॥२२१॥

jai jai hosee rakataasur kha(n)ddan su(n)bh chakratan su(n)bh mathe ||11||221||


ਬਾਰਜ ਬਿਲੋਚਨਿ ਬ੍ਰਿਤਨ ਬਿਮੋਚਨਿ ਸੋਚ ਬਿਸੋਚਨਿ ਕਉਚ ਕਸੇ ॥

बारज बिलोचनि बृतन बिमोचनि सोच बिसोचनि कउच कसे ॥

baaraj bilochan biratan bimochan soch bisochan kauch kase ||

ਦਾਮਨੀ ਪ੍ਰਹਾਸੇ ਸੁਕ ਸਰ ਨਾਸੇ ਸ ੁਬ੍ਰਿਤ ਸੁਬਾਸੇ ਦੁਸਟ ਗ੍ਰਸੇ ॥

दामनी प्रहासे सुक सर नासे स ुबृत सुबासे दुसट ग्रसे ॥

dhaamanee prahaase suk sar naase s ubirat subaase dhusaT grase ||

ਚੰਚਲਾ ਪ੍ਰਅੰਗੀ ਬੇਦ ਪ੍ਰਸੰਗੀ ਤੇਜ ਤੁਰੰਗੀ ਖੰਡ ਅਸੁਰੰ ॥

चंचला प्रअंगी बेद प्रसंगी तेज तुरंगी खंड असुरं ॥

cha(n)chalaa pra(n)gee bedh prasa(n)gee tej tura(n)gee kha(n)dd asura(n) ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਆਦਿ ਅਨਾਦਿ ਅਗਾਧ ਉਰਧੰ ॥੧੨॥੨੨੨॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन आदि अनादि अगाध उरधं ॥१२॥२२२॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan aadh anaadh agaadh uradha(n) ||12||222||


ਘੰਟਕਾ ਬਿਰਾਜੈ ਰੁਣ ਝੁਣ ਬਾਜੈ ਭ੍ਰਮ ਭੈ ਭਾਜੈ ਸੁਨਤ ਸੁਰੰ ॥

घंटका बिराजै रुण झुण बाजै भ्रम भै भाजै सुनत सुरं ॥

gha(n)Takaa biraajai run jhun baajai bhram bhai bhaajai sunat sura(n) ||

ਕੋਕਲ ਸੁਨ ਲਾਜੈ ਕਿਲਬਿਖ ਭਾਜੈ ਸੁਖ ਉਪਰਾਜੈ ਮਧ ਉਰੰ ॥

कोकल सुन लाजै किलबिख भाजै सुख उपराजै मध उरं ॥

kokal sun laajai kilabikh bhaajai sukh uparaajai madh ura(n) ||

ਦੁਰਜਨ ਦਲ ਦੱਝੈ ਮਨ ਤਨ ਰਿੱਝੈ ਸਭੈ ਨ ਭੱਜੈ ਰੋਹ ਰਣੰ ॥

दुरजन दल दज्झै मन तन रिज्झै सभै न भज्जै रोह रणं ॥

dhurajan dhal dha'jhai man tan ri'jhai sabhai na bha'jai roh rana(n) ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਚੰਡ ਚਕ੍ਰਤਨ ਆਦਿ ਗੁਰੰ ॥੧੩॥੨੨੩॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन चंड चक्रतन आदि गुरं ॥१३॥२२३॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan cha(n)dd chakratan aadh gura(n) ||13||223||


ਚਾਚਰੀ ਪ੍ਰਜੋਧਨ ਦੁਸਟ ਬਿਰੋਧਨ ਰੋਸ ਅਰੋਧਨ ਕ੍ਰੂਰ ਬ੍ਰਿਤੇ ॥

चाचरी प्रजोधन दुसट बिरोधन रोस अरोधन क्रूर बृते ॥

chaacharee prajodhan dhusaT birodhan ros arodhan kraoor birate ||

ਧੂਮ੍ਰਾਛ ਬਿਧੁੰਸਨ ਪ੍ਰਲੈ ਪ੍ਰਜੁੰਸਨ ਜਗ ਬਿਧੁੰਸਨ ਸੁਧ ਮਤੇ ॥

धूम्राछ बिधुँसन प्रलै प्रजुँसन जग बिधुँसन सुध मते ॥

dhoomraachh bidhu(n)san pralai praju(n)san jag bidhu(n)san sudh mate ||

ਜਾਲਪਾ ਜਯੰਤੀ ਸਤ੍ਰ ਮਥੰਤੀ ਦੁਸਟ ਪ੍ਰਦਾਹਨ ਗਾੜ੍ਹ ਮਤੇ ॥

जालपा जयंती सत्र मथंती दुसट प्रदाहन गाड़्ह मते ॥

jaalapaa jaya(n)tee satr matha(n)tee dhusaT pradhaahan gaaRh mate ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਆਦਿ ਜੁਗਾਦਿ ਅਗਾਧਿ ਗਤੇ ॥੧੪॥੨੨੪॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन आदि जुगादि अगाधि गते ॥१४॥२२४॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan aadh jugaadh agaadh gate ||14||224||


ਖਤ੍ਰੀਆਣਿ ਖਤੰਗੀ ਅਭੈ ਅਭੰਗੀ ਆਦਿ ਅਨੰਗੀ ਅਗਾਧਿ ਗਤੇ ॥

खत्रीआणि खतंगी अभै अभंगी आदि अनंगी अगाधि गते ॥

khatreeaan khata(n)gee abhai abha(n)gee aadh ana(n)gee agaadh gate ||

ਬ੍ਰਿੜਲਾਛ ਬਿਹੰਡਣਿ ਚੱਛਰ ਦੰਡਣਿ ਤੇਜ ਪ੍ਰਚੰਡਣਿ ਆਦਿ ਬ੍ਰਿਤੇ ॥

बृड़लाछ बिहंडणि चच्छर दंडणि तेज प्रचंडणि आदि बृते ॥

biraRalaachh biha(n)ddan cha'chhar dha(n)ddan tej pracha(n)ddan aadh birate ||

ਸੁਰ ਨਰ ਪ੍ਰਤਿਪਾਰਣਿ ਪਤਿਤ ਉਧਾਰਣਿ ਦੁਸਟ ਨਿਵਾਰਣਿ ਦੋਖ ਹਰੇ ॥

सुर नर प्रतिपारणि पतित उधारणि दुसट निवारणि दोख हरे ॥

sur nar pratipaaran patit udhaaran dhusaT nivaaran dhokh hare ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨਿ ਬਿਸ੍ਵ ਬਿਧੁੰਸਨਿ ਸ੍ਰਿਸਟਿ ਕਰੇ ॥੧੫॥੨੨੫॥

जै जै होसी महिखासुर मरदनि बिस्व बिधुँसनि सृसटि करे ॥१५॥२२५॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan bisavai bidhu(n)san sirasaT kare ||15||225||


ਦਾਮਨੀ ਪ੍ਰਕਾਸੇ ਉਨਤਨ ਨਾਸੇ ਜੋਤਿ ਪ੍ਰਕਾਸੇ ਅਤੁਲ ਬਲੇ ॥

दामनी प्रकासे उनतन नासे जोति प्रकासे अतुल बले ॥

dhaamanee prakaase unatan naase jot prakaase atul bale ||

ਦਾਨਵੀ ਪ੍ਰਕਰਖਣਿ ਸਰ ਵਰ ਵਰਖਣਿ ਦੁਸਟ ਪ੍ਰਧਰਖਣਿ ਬਿਤਲ ਤਲੇ ॥

दानवी प्रकरखणि सर वर वरखणि दुसट प्रधरखणि बितल तले ॥

dhaanavee prakarakhan sar var varakhan dhusaT pradharakhan bital tale ||

ਅਸਟਾਇਧ ਬਾਹਣਿ ਬੋਲ ਨਿਬਾਹਣਿ ਸੰਤ ਪਨਾਹਣਿ ਗੂੜ੍ਹ ਗਤੇ ॥

असटाइध बाहणि बोल निबाहणि संत पनाहणि गूड़्ह गते ॥

asaTaidh baahan bol nibaahan sa(n)t panaahan gooRh gate ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨਿ ਆਦਿ ਅਨਾਦਿ ਅਗਾਧਿ ਬ੍ਰਿਤੇ ॥੧੬॥੨੨੬॥

जै जै होसी महिखासुर मरदनि आदि अनादि अगाधि बृते ॥१६॥२२६॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan aadh anaadh agaadh birate ||16||226||


ਦੁਖ ਦੋਖ ਪੱ੍ਰਭਛਣਿ ਸੇਵਕ ਰੱਛਣਿ ਸੰਤ ਪ੍ਰੱਤਛਣਿ ਸੁੱਧ ਸਰੇ ॥

दुख दोख प्््रभछणि सेवक रच्छणि संत प्रत्तछणि सुद्ध सरे ॥

dhukh dhokh pa'rabhachhan sevak ra'chhan sa(n)t pra'tachhan su'dh sare ||

ਸਾਰੰਗ ਸਨਾਹੇ ਦੁਸਟ ਪ੍ਰਦਾਹੇ ਅਰਿ ਦਲ ਗਾਹੇ ਦੋਖ ਹਰੇ ॥

सारंग सनाहे दुसट प्रदाहे अरि दल गाहे दोख हरे ॥

saara(n)g sanaahe dhusaT pradhaahe ar dhal gaahe dhokh hare ||

ਗੰਜਨ ਗੁਮਾਨੇ ਅਤੁਲ ਪ੍ਰਵਾਨੇ ਸੰਤ ਜਮਾਨੇ ਆਦਿ ਅੰਤੇ ॥

गंजन गुमाने अतुल प्रवाने संत जमाने आदि अंते ॥

ga(n)jan gumaane atul pravaane sa(n)t jamaane aadh a(n)te ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਸਾਧ ਪ੍ਰਦੱਛਣ ਦੁਸਟ ਹੰਤੇ ॥੧੭॥੨੨੭॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन साध प्रदच्छण दुसट हंते ॥१७॥२२७॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan saadh pradha'chhan dhusaT ha(n)te ||17||227||


ਕਾਰਣ ਕਰੀਲੀ ਗਰਬ ਗਹੀਲੀ ਜੋਤਿ ਜਤੀਲੀ ਤੁੰਦ ਮਤੇ ॥

कारण करीली गरब गहीली जोति जतीली तुँद मते ॥

kaaran kareelee garab gaheelee jot jateelee tu(n)dh mate ||

ਅਸਟਾਇਧ ਚਮਕਣਿ ਸਸਤ੍ਰ ਝਮਕਣਿ ਦਾਮਨਿ ਦਮਕਣਿ ਆਦਿ ਬ੍ਰਿਤੇ ॥

असटाइध चमकणि ससत्र झमकणि दामनि दमकणि आदि बृते ॥

asaTaidh chamakan sasatr jhamakan dhaaman dhamakan aadh birate ||

ਡੁਕਡੁਕੀ ਦਮੰਕੈ ਬਾਘ ਬਬੰਕੈ ਭੁਜਾ ਫਰੰਕੈ ਸੱੁਧ ਗਤੇ ॥

डुकडुकी दमंकै बाघ बबंकै भुजा फरंकै सु्ुध गते ॥

ddukaddukee dhama(n)kai baagh baba(n)kai bhujaa fara(n)kai sa'udh gate ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਆਦਿ ਜੁਗਾਦਿ ਅਨਾਦਿ ਮਤੇ ॥੧੮॥੨੨੮॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन आदि जुगादि अनादि मते ॥१८॥२२८॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan aadh jugaadh anaadh mate ||18||228||


ਚੱਛਰਾਸੁਰ ਮਾਰਣਿ ਨਰਕ ਨਿਵਾਰਣਿ ਪਤਿਤ ਉਧਾਰਣਿ ਏਕ ਭਟੇ ॥

चच्छरासुर मारणि नरक निवारणि पतित उधारणि एक भटे ॥

cha'chharaasur maaran narak nivaaran patit udhaaran ek bhaTe ||

ਪਾਪਾਨ ਬਿਹੰਡਣਿ ਦੁਸਟ ਪ੍ਰਚੰਡਣਿ ਖੰਡ ਅਖੰਡਣਿ ਕਾਲ ਕਟੇ ॥

पापान बिहंडणि दुसट प्रचंडणि खंड अखंडणि काल कटे ॥

paapaan biha(n)ddan dhusaT pracha(n)ddan kha(n)dd akha(n)ddan kaal kaTe ||

ਚੰਦ੍ਰਾਨਨ ਚਾਰੈ ਨਰਕ ਨਿਵਾਰੈ ਪਤਿਤ ਉਧਾਰੈ ਮੁੰਡ ਮਥੇ ॥

चंद्रानन चारै नरक निवारै पतित उधारै मुँड मथे ॥

cha(n)dhraanan chaarai narak nivaarai patit udhaarai mu(n)dd mathe ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਧੂਮ੍ਰ ਬਿਧੁੰਸਨਿ ਆਦਿ ਕਥੇ ॥੧੯॥੨੨੯॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन धूम्र बिधुँसनि आदि कथे ॥१९॥२२९॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan dhoomr bidhu(n)san aadh kathe ||19||229||


ਰਕਤਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਚੰਡ ਚਕਰਦਨ ਦਾਨਵ ਅਰਦਨ ਬਿੜਾਲ ਬਧੇ ॥

रकतासुर मरदन चंड चकरदन दानव अरदन बिड़ाल बधे ॥

rakataasur maradhan cha(n)dd chakaradhan dhaanav aradhan biRaal badhe ||

ਸਰ ਧਾਰ ਬਿਬਰਖਣ ਦੁਰਜਨ ਧਰਖਣ ਅਤੁਲ ਅਮਰਖਣ ਧਰਮ ਧੁਜੇ ॥

सर धार बिबरखण दुरजन धरखण अतुल अमरखण धरम धुजे ॥

sar dhaar bibarakhan dhurajan dharakhan atul amarakhan dharam dhuje ||

ਧੂਮ੍ਰਾਛ ਬਿਧੁੰਸਨਿ ਸ੍ਰੋਣਤ ਚੁੰਸਨ ਸੁੰਭ ਨਪਾਤ ਨਿਸੁੰਭ ਮਥੇ ॥

धूम्राछ बिधुँसनि स्रोणत चुँसन सुँभ नपात निसुँभ मथे ॥

dhoomraachh bidhu(n)san sronat chu(n)san su(n)bh napaat nisu(n)bh mathe ||

ਜੈ ਜੈ ਹੋਸੀ ਮਹਿਖਾਸੁਰ ਮਰਦਨ ਆਦਿ ਅਨੀਲ ਅਗਾਧ ਕਥੇ ॥੨੦॥੨੩੦॥

जै जै होसी महिखासुर मरदन आदि अनील अगाध कथे ॥२०॥२३०॥

jai jai hosee mahikhaasur maradhan aadh aneel agaadh kathe ||20||230||


ਤ੍ਵ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

त्व प्रसादि ॥ पाधड़ी छंद ॥

tavai prasaadh || paadhaRee chha(n)dh ||


ਤੁਮ ਕਹੋ ਦੇਵ ਸਰਬੰ ਬਿਚਾਰ ॥

तुम कहो देव सरबं बिचार ॥

tum kaho dhev saraba(n) bichaar ||

ਜਿਮ ਕੀਓ ਆਪਿ ਕਰਤੇ ਪਸਾਰ ॥

जिम कीओ आपि करते पसार ॥

jim keeo aap karate pasaar ||

ਜੱਦਪਿ ਅਭੂਤ ਅਨਭੈ ਅਨੰਤ ॥

जद्दपि अभूत अनभै अनंत ॥

ja'dhap abhoot anabhai ana(n)t ||

ਤਉ ਕਹੋ ਜਥਾ ਮਤ ਤ੍ਰੈਣ ਤੰਤ ॥੧॥੨੩੧॥

तउ कहो जथा मत त्रैण तंत ॥१॥२३१॥

tau kaho jathaa mat train ta(n)t ||1||231||


ਕਰਤਾ ਕਰੀਮ ਕਾਦਰ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ॥

करता करीम कादर कृपाल ॥

karataa kareem kaadhar kirapaal ||

ਅਦ੍ਵੈ ਅਭੂਤ ਅਨਭੈ ਦਿਆਲ ॥

अद्वै अभूत अनभै दिआल ॥

adhavai abhoot anabhai dhiaal ||

ਦਾਤਾ ਦੁਰੰਤ ਦੁਖ ਦੋਖ ਰਹਤ ॥

दाता दुरंत दुख दोख रहत ॥

dhaataa dhura(n)t dhukh dhokh rahat ||

ਜਿਹ ਨੇਤਿ ਨੇਤਿ ਸਭ ਬੇਦ ਕਹਤ ॥੨॥੨੩੨॥

जिह नेति नेति सभ बेद कहत ॥२॥२३२॥

jeh net net sabh bedh kahat ||2||232||


ਕਈ ਊਚ ਨੀਚ ਕੀਨੋ ਬਨਾਉ ॥

कई ऊच नीच कीनो बनाउ ॥

kiee uooch neech keeno banaau ||

ਸਭ ਵਾਰ ਪਾਰ ਜਾ ਕੋ ਪ੍ਰਭਾਉ ॥

सभ वार पार जा को प्रभाउ ॥

sabh vaar paar jaa ko prabhaau ||

ਸਭ ਜੀਵ ਜੰਤ ਜਾਨੰਤ ਜਾਹਿ ॥

सभ जीव जंत जानंत जाहि ॥

sabh jeev ja(n)t jaana(n)t jaeh ||

ਮਨ ਮੂੜ ਕਿਉ ਨ ਸੇਵੰਤ ਤਾਹਿ ॥੩॥੨੩੩॥

मन मूड़ किउ न सेवंत ताहि ॥३॥२३३॥

man mooR kiau na seva(n)t taeh ||3||233||


ਕਈ ਮੂੜ੍ਹ ਪਾਤ੍ਰ ਪੂਜਾ ਕਰੰਤ ॥

कई मूड़्ह पात्र पूजा करंत ॥

kiee mooRh paatr poojaa kara(n)t ||

ਕਈ ਸਿੱਧ ਸਾਧੁ ਸੂਰਜ ਸਿਵੰਤ ॥

कई सिद्ध साधु सूरज सिवंत ॥

kiee si'dh saadh sooraj siva(n)t ||

ਕਈ ਪਲਟ ਸੂਰਜ ਸਿਜਦਾ ਕਰਾਇ ॥

कई पलट सूरज सिजदा कराइ ॥

kiee palaT sooraj sijadhaa karai ||

ਪ੍ਰਭ ਏਕ ਰੂਪ ਦ੍ਵੈ ਕੈ ਲਖਾਇ ॥੪॥੨੩੪॥

प्रभ एक रूप द्वै कै लखाइ ॥४॥२३४॥

prabh ek roop dhavai kai lakhai ||4||234||


ਅਨਛਿੱਜ ਤੇਜ ਅਨਭੈ ਪ੍ਰਕਾਸ ॥

अनछिज्ज तेज अनभै प्रकास ॥

anachhi'j tej anabhai prakaas ||

ਦਾਤਾ ਦੁਰੰਤ ਅਦ੍ਵੈ ਅਨਾਸ ॥

दाता दुरंत अद्वै अनास ॥

dhaataa dhura(n)t adhavai anaas ||

ਸਭ ਰੋਗ ਸੋਗ ਤੇ ਰਹਤ ਰੂਪ ॥

सभ रोग सोग ते रहत रूप ॥

sabh rog sog te rahat roop ||

ਅਨਭੈ ਅਕਾਲ ਅਛੈ ਸਰੂਪ ॥੫॥੨੩੫॥

अनभै अकाल अछै सरूप ॥५॥२३५॥

anabhai akaal achhai saroop ||5||235||


ਕਰੁਣਾ ਨਿਧਾਨ ਕਾਮਲ ਕ੍ਰਿਪਾਲ ॥

करुणा निधान कामल कृपाल ॥

karunaa nidhaan kaamal kirapaal ||

ਦੂਖ ਦੋਖ ਹਰਤ ਦਾਤਾ ਦਿਆਲ ॥

दूख दोख हरत दाता दिआल ॥

dhookh dhokh harat dhaataa dhiaal ||

ਅੰਜਨ ਬਿਹੀਨ ਅਨਭੰਜ ਨਾਥ ॥

अंजन बिहीन अनभंज नाथ ॥

a(n)jan biheen anabha(n)j naath ||

ਜਲ ਥਲ ਪ੍ਰਭਾਉ ਸਰਬਤ੍ਰ ਸਾਥ ॥੬॥੨੩੬॥

जल थल प्रभाउ सरबत्र साथ ॥६॥२३६॥

jal thal prabhaau sarabatr saath ||6||236||


ਜਿਹ ਜਾਤ ਪਾਤ ਨਹੀ ਭੇਦ ਭਰਮ ॥

जिह जात पात नही भेद भरम ॥

jeh jaat paat nahee bhedh bharam ||

ਜਿਹ ਰੰਗ ਰੂਪ ਨਹੀ ਏਕ ਧਰਮ ॥

जिह रंग रूप नही एक धरम ॥

jeh ra(n)g roop nahee ek dharam ||

ਜਿਹ ਸਤ੍ਰੁ ਮਿਤ੍ਰ ਦੋਊ ਏਕ ਸਾਰ ॥

जिह सत्रु मित्र दोऊ एक सार ॥

jeh satr mitr dhouoo ek saar ||

ਅੱਛੈ ਸਰੂਪ ਅਬਿਚਲ ਅਪਾਰ ॥੭॥੨੩੭॥

अच्छै सरूप अबिचल अपार ॥७॥२३७॥

a'chhai saroop abichal apaar ||7||237||


ਜਾਨੀ ਨ ਜਾਇ ਜਿਹ ਰੂਪ ਰੇਖ ॥

जानी न जाइ जिह रूप रेख ॥

jaanee na jai jeh roop rekh ||

ਕਹਿ ਬਾਸੁ ਤਾਸੁ ਕਹਿ ਕਉਨੁ ਭੇਖ ॥

कहि बासु तासु कहि कउनु भेख ॥

keh baas taas keh kaun bhekh ||

ਕਹਿ ਨਾਮ ਤਾਸ ਹੈ ਕਵਨ ਜਾਤ ॥

कहि नाम तास है कवन जात ॥

keh naam taas hai kavan jaat ||

ਜਿਹ ਸਤ੍ਰੁ ਮਿਤ੍ਰ ਨਹੀ ਪੁਤ੍ਰ ਭ੍ਰਾਤ ॥੮॥੨੩੮॥

जिह सत्रु मित्र नही पुत्र भ्रात ॥८॥२३८॥

jeh satr mitr nahee putr bhraat ||8||238||


ਕਰੁਣਾ ਨਿਧਾਨ ਕਾਰਣ ਸਰੂਪ ॥

करुणा निधान कारण सरूप ॥

karunaa nidhaan kaaran saroop ||

ਜਿਹ ਚਕ੍ਰ ਚਿਹਨ ਨਹੀ ਰੰਗ ਰੂਪ ॥

जिह चक्र चिहन नही रंग रूप ॥

jeh chakr chihan nahee ra(n)g roop ||

ਜਿਹ ਖੇਦ ਭੇਦ ਨਹੀ ਕਰਮ ਕਾਲ ॥

जिह खेद भेद नही करम काल ॥

jeh khedh bhedh nahee karam kaal ||

ਸਭ ਜੀਵ ਜੰਤ ਕੀ ਕਰਤ ਪਾਲ ॥੯॥੨੩੯॥

सभ जीव जंत की करत पाल ॥९॥२३९॥

sabh jeev ja(n)t kee karat paal ||9||239||


ਉਰਧੰ ਬਿਰਹਤ ਸੁਧੰ ਸਰੂਪ ॥

उरधं बिरहत सुधं सरूप ॥

auradha(n) birahat sudha(n) saroop ||

ਬੱੁਧੰ ਅਪਾਲ ਜੱੁਧੰ ਅਨੂਪ ॥

बु्ुधं अपाल जु्ुधं अनूप ॥

ba'udha(n) apaal ja'udha(n) anoop ||

ਜਿਹ ਰੂਪ ਰੇਖ ਨਹੀ ਰੰਗ ਰਾਗ ॥

जिह रूप रेख नही रंग राग ॥

jeh roop rekh nahee ra(n)g raag ||

ਅਨਛਿੱਜ ਤੇਜ ਅਨਭਿੱਜ ਅਦਾਗ ॥੧੦॥੨੪੦॥

अनछिज्ज तेज अनभिज्ज अदाग ॥१०॥२४०॥

anachhi'j tej anabhi'j adhaag ||10||240||


ਜਲ ਥਲ ਮਹੀਪ ਬਨ ਤਨ ਦੁਰੰਤ ॥

जल थल महीप बन तन दुरंत ॥

jal thal maheep ban tan dhura(n)t ||

ਜਿਹ ਨੇਤਿ ਨੇਤਿ ਨਿਸ ਦਿਨ ਉਚਰੰਤ ॥

जिह नेति नेति निस दिन उचरंत ॥

jeh net net nis dhin uchara(n)t ||

ਪਾਇਓ ਨ ਜਾਇ ਜਿਹ ਪੈਰ ਪਾਰ ॥

पाइओ न जाइ जिह पैर पार ॥

paio na jai jeh pair paar ||

ਦੀਨਾਨ ਦੋਖ ਦਹਿਤਾ ਉਦਾਰ ॥੧੧॥੨੪੧॥

दीनान दोख दहिता उदार ॥११॥२४१॥

dheenaan dhokh dhahitaa udhaar ||11||241||


ਕਈ ਕੋਟ ਇੰਦ੍ਰ ਜਿਹ ਪਾਨਿਹਾਰ ॥

कई कोट इंद्र जिह पानिहार ॥

kiee koT i(n)dhr jeh paanihaar ||

ਕਈ ਕੋਟਿ ਰੱਦ੍ਰ ਜੁਗੀਆ ਦੁਆਰ ॥

कई कोटि रद्द्र जुगीआ दुआर ॥

kiee koT ra'dhr jugeeaa dhuaar ||

ਕਈ ਬੇਦ ਬਿਆਸ ਬ੍ਰਹਮਾ ਅਨੰਤ ॥

कई बेद बिआस ब्रहमा अनंत ॥

kiee bedh biaas brahamaa ana(n)t ||

ਜਿਹ ਨੇਤ ਨੇਤ ਨਿਸ ਦਿਨ ਉਚਰੰਤ ॥੧੨॥੨੪੨॥

जिह नेत नेत निस दिन उचरंत ॥१२॥२४२॥

jeh net net nis dhin uchara(n)t ||12||242||


ਤ੍ਵ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਸ੍ਵੱਯੇ ॥

त्व प्रसादि ॥ स्वय्ये ॥

tavai prasaadh || savai'ye ||


ਦੀਨਨ ਕੀ ਪ੍ਰਤਿਪਾਲ ਕਰੈ ਨਿਤ ਸੰਤ ਉਬਾਰਿ ਗਨੀਮਨ ਗਾਰੈ ॥

दीनन की प्रतिपाल करै नित संत उबारि गनीमन गारै ॥

dheenan kee pratipaal karai nit sa(n)t ubaar ganeeman gaarai ||

ਪੱਛ ਪਸੂ ਨਗ ਨਾਗ ਨਰਾਧਪ ਸਰਬ ਸਮੈ ਸਭ ਕੋ ਪ੍ਰਤਿਪਾਰੈ ॥

पच्छ पसू नग नाग नराधप सरब समै सभ को प्रतिपारै ॥

pa'chh pasoo nag naag naraadhap sarab samai sabh ko pratipaarai ||

ਪੋਖਤ ਹੈ ਜਲ ਮੈ ਥਲ ਮੈ ਪਲ ਮੈ ਕਲਿ ਕੇ ਨਹੀਂ ਕਰਮ ਬਿਚਾਰੈ ॥

पोखत है जल मै थल मै पल मै कलि के नहीं करम बिचारै ॥

pokhat hai jal mai thal mai pal mai kal ke nahee(n) karam bichaarai ||

ਦੀਨ ਦਇਆਲ ਦਇਆ ਨਿਧਿ ਦੋਖਨ ਦੇਖਤ ਹੈ ਪਰੁ ਦੇਤ ਨ ਹਾਰੈ ॥੧॥੨੪੩॥

दीन दइआल दइआ निधि दोखन देखत है परु देत न हारै ॥१॥२४३॥

dheen dhiaal dhiaa nidh dhokhan dhekhat hai par dhet na haarai ||1||243||


ਦਾਹਤ ਹੈ ਦੁਖ ਦੋਖਨ ਕੌ ਦਲ ਦੁੱਜਨ ਕੇ ਪਲ ਮੈ ਦਲ ਡਾਰੈ ॥

दाहत है दुख दोखन कौ दल दुज्जन के पल मै दल डारै ॥

dhaahat hai dhukh dhokhan kau dhal dhu'jan ke pal mai dhal ddaarai ||

ਖੰਡ ਅਖੰਡ ਪ੍ਰਚੰਡ ਪਹਾਰਨ ਪੂਰਨ ਪ੍ਰੇਮ ਕੀ ਪ੍ਰੀਤ ਸੰਭਾਰੈ ॥

खंड अखंड प्रचंड पहारन पूरन प्रेम की प्रीत संभारै ॥

kha(n)dd akha(n)dd pracha(n)dd pahaaran pooran prem kee preet sa(n)bhaarai ||

ਪਾਰ ਨ ਪਾਇ ਸਕੈ ਪਦਮਾ ਪਤਿ ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਅਭੇਦ ਉਚਾਰੈ ॥

पार न पाइ सकै पदमा पति बेद कतेब अभेद उचारै ॥

paar na pai sakai padhamaa pat bedh kateb abhedh uchaarai ||

ਰੋਜੀ ਹੀ ਰਾਜ ਬਿਲੋਕਤ ਰਾਜਕ ਰੋਖ ਰੂਹਾਨ ਕੀ ਰੋਜੀ ਨ ਟਾਰੈ ॥੨॥੨੪੪॥

रोजी ही राज बिलोकत राजक रोख रूहान की रोजी न टारै ॥२॥२४४॥

rojee hee raaj bilokat raajak rokh roohaan kee rojee na Taarai ||2||244||


ਕੀਟ ਪਤੰਗ ਕੁਰੰਗ ਭੁਜੰਗਮ ਭੂਤ ਭਵਿੱਖ ਭਵਾਨ ਬਨਾਏ ॥

कीट पतंग कुरंग भुजंगम भूत भविक्ख भवान बनाए ॥

keeT pata(n)g kura(n)g bhuja(n)gam bhoot bhavi'kh bhavaan banaae ||

ਦੇਵ ਅਦੇਵ ਖਪੇ ਅਹੰਮੇਵ ਨ ਭੇਵ ਲਖਿਓ ਭ੍ਰਮ ਸਿਉ ਭਰਮਾਏ ॥

देव अदेव खपे अहंमेव न भेव लखिओ भ्रम सिउ भरमाए ॥

dhev adhev khape aha(n)mev na bhev lakhio bhram siau bharamaae ||

ਬੇਦ ਪੁਰਾਨ ਕਤੇਬ ਕੁਰਾਨ ਹਸੇਬ ਥਕੇ ਕਰ ਹਾਥ ਨ ਆਏ ॥

बेद पुरान कतेब कुरान हसेब थके कर हाथ न आए ॥

bedh puraan kateb kuraan haseb thake kar haath na aae ||

ਪੂਰਨ ਪ੍ਰੇਮ ਪ੍ਰਭਾਉ ਬਿਨਾ ਪਤਿ ਸਿਉ ਕਿਨ ਸ੍ਰੀ ਪਦਮਾ ਪਤਿ ਪਾਏ ॥੩॥੨੪੫॥

पूरन प्रेम प्रभाउ बिना पति सिउ किन स्री पदमा पति पाए ॥३॥२४५॥

pooran prem prabhaau binaa pat siau kin sree padhamaa pat paae ||3||245||


ਆਦਿ ਅਨੰਤ ਅਗਾਧ ਅਦ੍ਵੈਖ ਸੁ ਭੂਤ ਭਵਿੱਖ ਭਵਾਨ ਅਭੈ ਹੈ ॥

आदि अनंत अगाध अद्वैख सु भूत भविक्ख भवान अभै है ॥

aadh ana(n)t agaadh adhavaikh su bhoot bhavi'kh bhavaan abhai hai ||

ਅੰਤਿ ਬਿਹੀਨ ਅਨਾਤਮ ਆਪ ਅਦਾਗ ਅਦੋਖ ਅਛਿੱਦ੍ਰ ਅਛੈ ਹੈ ॥

अंति बिहीन अनातम आप अदाग अदोख अछिद्द्र अछै है ॥

a(n)t biheen anaatam aap adhaag adhokh achhi'dhr achhai hai ||

ਲੋਗਨ ਕੇ ਕਰਤਾ ਹਰਤਾ ਜਲ ਮੈ ਥਲ ਮੈ ਭਰਤਾ ਪ੍ਰਭ ਵੈ ਹੈ ॥

लोगन के करता हरता जल मै थल मै भरता प्रभ वै है ॥

logan ke karataa harataa jal mai thal mai bharataa prabh vai hai ||

ਦੀਨ ਦਇਆਲ ਦਇਆ ਕਰ ਸ੍ਰੀ ਪਤਿ ਸੁੰਦਰ ਸ੍ਰੀ ਪਦਮਾ ਪਤਿ ਏਹੈ ॥੪॥੨੪੬॥

दीन दइआल दइआ कर स्री पति सुँदर स्री पदमा पति एहै ॥४॥२४६॥

dheen dhiaal dhiaa kar sree pat su(n)dhar sree padhamaa pat ehai ||4||246||


ਕਾਮ ਨ ਕ੍ਰੋਧ ਨ ਲੋਭ ਨ ਮੋਹ ਨ ਰੋਗ ਨ ਸੋਗ ਨ ਭੋਗ ਨ ਭੈ ਹੈ ॥

काम न क्रोध न लोभ न मोह न रोग न सोग न भोग न भै है ॥

kaam na krodh na lobh na moh na rog na sog na bhog na bhai hai ||

ਦੇਹ ਬਿਹੀਨ ਸਨੇਹ ਸਭੋ ਤਨ ਨੇਹ ਬਿਰਕਤ ਅਗੇਹ ਅਛੈ ਹੈ ॥

देह बिहीन सनेह सभो तन नेह बिरकत अगेह अछै है ॥

dheh biheen saneh sabho tan neh birakat ageh achhai hai ||

ਜਾਨ ਕੋ ਦੇਤ ਅਜਾਨ ਕੋ ਦੇਤ ਜਮੀਨ ਕੋ ਦੇਤ ਜਮਾਨ ਕੋ ਦੈ ਹੈ ॥

जान को देत अजान को देत जमीन को देत जमान को दै है ॥

jaan ko dhet ajaan ko dhet jameen ko dhet jamaan ko dhai hai ||

ਕਾਹੇ ਕੋ ਡੋਲਤ ਹੈ ਤੁਮਰੀ ਸੁਧ ਸੁੰਦਰ ਸ੍ਰੀ ਪਦਮਾ ਪਤਿ ਲੈਹੈ ॥੫॥੨੪੭॥

काहे को डोलत है तुमरी सुध सुँदर स्री पदमा पति लैहै ॥५॥२४७॥

kaahe ko ddolat hai tumaree sudh su(n)dhar sree padhamaa pat laihai ||5||247||


ਰੋਗਨ ਤੇ ਅਰ ਸੋਗਨ ਤੇ ਜਲ ਜੋਗਨ ਤੇ ਬਹੁ ਭਾਂਤਿ ਬਚਾਵੈ ॥

रोगन ते अर सोगन ते जल जोगन ते बहु भाँति बचावै ॥

rogan te ar sogan te jal jogan te bahu bhaa(n)t bachaavai ||

ਸੱਤ੍ਰ ਅਨੇਕ ਚਲਾਵਤ ਘਾਵ ਤਊ ਤਨ ਏਕੁ ਨ ਲਾਗਨ ਪਾਵੈ ॥

सत्त्र अनेक चलावत घाव तऊ तन एकु न लागन पावै ॥

sa'tr anek chalaavat ghaav tuoo tan ek na laagan paavai ||

ਰਾਖਤ ਹੈ ਅਪਨੋ ਕਰੁ ਦੈ ਕਰ ਪਾਪ ਸੰਬੂਹ ਨ ਭੇਟਨ ਪਾਵੈ ॥

राखत है अपनो करु दै कर पाप संबूह न भेटन पावै ॥

raakhat hai apano kar dhai kar paap sa(n)booh na bheTan paavai ||

ਔਰ ਕੀ ਬਾਤ ਕਹਾ ਕਹ ਤੋ ਸੌਂ ਸੁ ਪੇਟ ਹੀ ਕੇ ਪਟ ਬੀਚ ਬਚਾਵੈ ॥੬॥੨੪੮॥

और की बात कहा कह तो सौं सु पेट ही के पट बीच बचावै ॥६॥२४८॥

aauar kee baat kahaa keh to saua(n) su peT hee ke paT beech bachaavai ||6||248||


ਜੱਛ ਭੁਜੰਗ ਸੁ ਦਾਨਵ ਦੇਵ ਅਭੇਵ ਤੁਮੈ ਸਭ ਹੀ ਕਰਿ ਧਿਆਵੈਂ ॥

जच्छ भुजंग सु दानव देव अभेव तुमै सभ ही करि धिआवैं ॥

ja'chh bhuja(n)g su dhaanav dhev abhev tumai sabh hee kar dhiaavai(n) ||

ਭੂਮਿ ਅਕਾਸ ਪਤਾਲ ਰਸਾਤਲ ਜੱਛ ਭੁਜੰਗ ਸਭੈ ਸਿਰ ਨਿਆਵੈਂ ॥

भूमि अकास पताल रसातल जच्छ भुजंग सभै सिर निआवैं ॥

bhoom akaas pataal rasaatal ja'chh bhuja(n)g sabhai sir niaavai(n) ||

ਪਾਇ ਸਕੈ ਨਹੀ ਪਾਰ ਪ੍ਰਭਾ ਹੂ ਕੋ ਨੇਤ ਹੀ ਨੇਤਹ ਬੇਦ ਬਤਾਵੈਂ ॥

पाइ सकै नही पार प्रभा हू को नेत ही नेतह बेद बतावैं ॥

pai sakai nahee paar prabhaa hoo ko net hee neteh bedh bataavai(n) ||

ਖੋਜ ਥਕੇ ਸਭ ਹੀ ਖੁਜੀਆ ਸੁਰ ਹਾਰ ਪਰੇ ਹਰਿ ਹਾਥ ਨ ਆਵੈ ॥੭॥੨੪੯॥

खोज थके सभ ही खुजीआ सुर हार परे हरि हाथ न आवै ॥७॥२४९॥

khoj thake sabh hee khujeeaa sur haar pare har haath na aavai ||7||249||


ਨਾਰਦ ਸੇ ਚਤੁਰਾਨਨ ਸੇ ਰੁਮਨਾ ਰਿਖ ਸੇ ਸਭ ਹੂੰ ਮਿਲਿ ਗਾਇਓ ॥

नारद से चतुरानन से रुमना रिख से सभ हूँ मिलि गाइओ ॥

naaradh se chaturaanan se rumanaa rikh se sabh hoo(n) mil gaio ||

ਬੇਦ ਕਤੇਬ ਨ ਭੇਦ ਲਖਿਓ ਸਭ ਹਾਰ ਪਰੇ ਹਰਿ ਹਾਥਿ ਨ ਆਇਓ ॥

बेद कतेब न भेद लखिओ सभ हार परे हरि हाथि न आइओ ॥

bedh kateb na bhedh lakhio sabh haar pare har haath na aaio ||

ਪਾਇ ਸਕੈ ਨਹੀ ਪਾਰ ਉਮਾਪਤਿ ਸਿੱਧ ਸਨਾਥ ਸਨੰਤਨ ਧਿਆਇਓ ॥

पाइ सकै नही पार उमापति सिद्ध सनाथ सनंतन धिआइओ ॥

pai sakai nahee paar umaapat si'dh sanaath sana(n)tan dhiaaio ||

ਧਿਆਨ ਧਰੋ ਤਿਹ ਕੋ ਮਨ ਮੈਂ ਜਿਹ ਕੋ ਅਮਿਤੋਜਿ ਸਭੈ ਜਗੁ ਛਾਇਓ ॥੮॥੨੫੦॥

धिआन धरो तिह को मन मैं जिह को अमितोजि सभै जगु छाइओ ॥८॥२५०॥

dhiaan dharo teh ko man mai(n) jeh ko amitoj sabhai jag chhaio ||8||250||


ਬੇਦ ਪੁਰਾਨ ਕਤੇਬ ਕੁਰਾਨ ਅਭੇਦ ਨ੍ਰਿਪਾਨ ਸਭੈ ਪਚ ਹਾਰੇ ॥

बेद पुरान कतेब कुरान अभेद नृपान सभै पच हारे ॥

bedh puraan kateb kuraan abhedh nirapaan sabhai pach haare ||

ਭੇਦ ਨ ਪਾਇ ਸਕਿਓ ਅਨਭੇਦ ਕੋ ਖੇਦਤ ਹੈ ਅਨਛੇਦ ਪੁਕਾਰੇ ॥

भेद न पाइ सकिओ अनभेद को खेदत है अनछेद पुकारे ॥

bhedh na pai sakio anabhedh ko khedhat hai anachhedh pukaare ||

ਰਾਗ ਨ ਰੂਪ ਨ ਰੇਖ ਨ ਰੰਗ ਨ ਸਾਕ ਨ ਸੋਗ ਨ ਸੰਗਿ ਤਿਹਾਰੇ ॥

राग न रूप न रेख न रंग न साक न सोग न संगि तिहारे ॥

raag na roop na rekh na ra(n)g na saak na sog na sa(n)g tihaare ||

ਆਦਿ ਅਨਾਦਿ ਅਗਾਧ ਅਭੇਖ ਅਦ੍ਵੈਖ ਜਪਿਓ ਤਿਨ ਹੀ ਕੁਲ ਤਾਰੇ ॥੯॥੨੫੧॥

आदि अनादि अगाध अभेख अद्वैख जपिओ तिन ही कुल तारे ॥९॥२५१॥

aadh anaadh agaadh abhekh adhavaikh japio tin hee kul taare ||9||251||


ਤੀਰਥ ਕੋਟ ਕੀਏ ਇਸਨਾਨ ਦੀਏ ਬਹੁ ਦਾਨ ਮਹਾ ਬ੍ਰਤ ਧਾਰੇ ॥

तीरथ कोट कीए इसनान दीए बहु दान महा ब्रत धारे ॥

teerath koT ke'ee isanaan dhe'ee bahu dhaan mahaa brat dhaare ||

ਦੇਸ ਫਿਰਿਓ ਕਰ ਭੇਸ ਤਪੋਧਨ ਕੇਸ ਧਰੇ ਨ ਮਿਲੇ ਹਰਿ ਪਿਆਰੇ ॥

देस फिरिओ कर भेस तपोधन केस धरे न मिले हरि पिआरे ॥

dhes firio kar bhes tapodhan kes dhare na mile har piaare ||

ਆਸਨ ਕੋਟ ਕਰੇ ਅਸਟਾਂਗ ਧਰੇ ਬਹੁ ਨਿਆਸ ਕਰੇ ਮੁਖ ਕਾਰੇ ॥

आसन कोट करे असटाँग धरे बहु निआस करे मुख कारे ॥

aasan koT kare asaTaa(n)g dhare bahu niaas kare mukh kaare ||

ਦੀਨ ਦਇਆਲ ਅਕਾਲ ਭਜੇ ਬਿਨੁ ਅੰਤ ਕੋ ਅੰਤ ਕੇ ਧਾਮ ਸਿਧਾਰੇ ॥੧੦॥੨੫੨॥

दीन दइआल अकाल भजे बिनु अंत को अंत के धाम सिधारे ॥१०॥२५२॥

dheen dhiaal akaal bhaje bin a(n)t ko a(n)t ke dhaam sidhaare ||10||252||


ਤ੍ਵ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਕਬਿੱਤ ॥

त्व प्रसादि ॥ कबित्त ॥

tavai prasaadh || kabi't ||


ਅਤ੍ਰ ਕੇ ਚਲੱਯਾ ਛਿਤ ਛਤ੍ਰ ਕੇ ਧਰੱਯਾ ਛਤ੍ਰ ਧਾਰੀਓ ਕੇ ਛਲੱਯਾ ਮਹਾ ਸਤ੍ਰਨ ਕੇ ਸਾਲ ਹੈਂ ॥

अत्र के चलय्या छित छत्र के धरय्या छत्र धारीओ के छलय्या महा सत्रन के साल हैं ॥

atr ke chala'yaa chhit chhatr ke dhara'yaa chhatr dhaareeo ke chhala'yaa mahaa satran ke saal hai(n) ||

ਦਾਨ ਕੇ ਦਿਵੱਯਾ ਮਹਾ ਮਾਨ ਕੇ ਬਢੱਯਾ ਅਵਸਾਨ ਕੇ ਦਿਵੱਯਾ ਹੈਂ ਕਟੱਯਾ ਜਮ ਜਾਲ ਹੈਂ ॥

दान के दिवय्या महा मान के बढय्या अवसान के दिवय्या हैं कटय्या जम जाल हैं ॥

dhaan ke dhiva'yaa mahaa maan ke badda'yaa avasaan ke dhiva'yaa hai(n) kaTa'yaa jam jaal hai(n) ||

ਜੁੱਧ ਕੇ ਜਿਤੱਯਾ ਔ ਬਿਰੱੁਧ ਕੇ ਮਿਟੱਯਾ ਮਹਾਂ ਬੱੁਧਿ ਕੇ ਦਿਵੱਯਾ ਮਹਾਂ ਮਾਨਹੂੰ ਕੇ ਮਾਨ ਹੈਂ ॥

जुद्ध के जितय्या औ बिरु्ुध के मिटय्या महाँ बु्ुधि के दिवय्या महाँ मानहूँ के मान हैं ॥

ju'dh ke jita'yaa aau bira'udh ke miTa'yaa mahaa(n) ba'udh ke dhiva'yaa mahaa(n) maanahoo(n) ke maan hai(n) ||

ਗਿਆਨ ਹੂੰ ਕੇ ਗਿਆਤਾ ਮਹਾਂ ਬੁੱਧਿਤਾ ਕੇ ਦਾਤਾ ਦੇਵ ਕਾਲ ਹੂੰ ਕੇ ਕਾਲ ਮਹਾ ਕਾਲ ਹੂੰ ਕੇ ਕਾਲ ਹੈਂ ॥੧॥੨੫੩॥

गिआन हूँ के गिआता महाँ बुद्धिता के दाता देव काल हूँ के काल महा काल हूँ के काल हैं ॥१॥२५३॥

giaan hoo(n) ke giaataa mahaa(n) bu'dhitaa ke dhaataa dhev kaal hoo(n) ke kaal mahaa kaal hoo(n) ke kaal hai(n) ||1||253||


ਪੂਰਬੀ ਨ ਪਾਰ ਪਾਵੈਂ ਹਿੰਗੁਲਾ ਹਿਮਾਲੈ ਧਿਆਵੈਂ ਗੋਰ ਗਰਦੇਜੀ ਗੁਨ ਗਾਵੈਂ ਤੇਰੇ ਨਾਮ ਹੈਂ ॥

पूरबी न पार पावैं हिंगुला हिमालै धिआवैं गोर गरदेजी गुन गावैं तेरे नाम हैं ॥

poorabee na paar paavai(n) hi(n)gulaa himaalai dhiaavai(n) gor garadhejee gun gaavai(n) tere naam hai(n) ||

ਜੋਗੀ ਜੋਗ ਸਾਧੈ ਪਉਨ ਸਾਧਨਾ ਕਿਤੇਕ ਬਾਧੈ ਆਰਬ ਕੇ ਆਰਬੀ ਅਰਾਧੈਂ ਤੇਰੇ ਨਾਮ ਹੈਂ ॥

जोगी जोग साधै पउन साधना कितेक बाधै आरब के आरबी अराधैं तेरे नाम हैं ॥

jogee jog saadhai paun saadhanaa kitek baadhai aarab ke aarabee araadhai(n) tere naam hai(n) ||

ਫਰਾ ਕੇ ਫਿਰੰਗੀ ਮਾਨੈਂ ਕੰਧਾਰੀ ਕੁਰੇਸੀ ਜਾਨੈਂ ਪਛਮ ਕੇ ਪੱਛਮੀ ਪਛਾਨੈਂ ਨਿਜ ਕਾਮ ਹੈਂ ॥

फरा के फिरंगी मानैं कंधारी कुरेसी जानैं पछम के पच्छमी पछानैं निज काम हैं ॥

faraa ke fira(n)gee maanai(n) ka(n)dhaaree kuresee jaanai(n) pachham ke pa'chhamee pachhaanai(n) nij kaam hai(n) ||

ਮਰਹਟਾ ਮਘੇਲੇ ਤੇਰੀ ਮਨ ਸੋਂ ਤਪਸਿਆ ਕਰੈ ਦ੍ਰਿੜਵੈ ਤਿਲੰਗੀ ਪਹਚਾਨੇ ਧਰਮ ਧਾਮ ਹੈਂ ॥੨॥੨੫੪॥

मरहटा मघेले तेरी मन सों तपसिआ करै दृड़वै तिलंगी पहचाने धरम धाम हैं ॥२॥२५४॥

marahaTaa maghele teree man so(n) tapasiaa karai dhiraRavai tila(n)gee pahachaane dharam dhaam hai(n) ||2||254||


ਬੰਗ ਕੇ ਬੰਗਾਲੀ ਫਿਰਹੰਗ ਕੇ ਫਿਰੰਗਾਵਾਲੀ ਦਿਲੀ ਕੇ ਦਿਲਵਾਲੀ ਤੇਰੀ ਆਗਿਆ ਮੈ ਚਲਤ ਹੈਂ ॥

बंग के बंगाली फिरहंग के फिरंगावाली दिली के दिलवाली तेरी आगिआ मै चलत हैं ॥

ba(n)g ke ba(n)gaalee firaha(n)g ke fira(n)gaavaalee dhilee ke dhilavaalee teree aagiaa mai chalat hai(n) ||

ਰੋਹ ਕੇ ਰੁਹੇਲੇ ਮਾਘ ਦੇਸ ਕੇ ਮਘੇਲੇ ਬੀਰ ਬੰਗਸੀ ਬੁੰਦੇਲੇ ਪਾਪ ਪੁੰਜ ਕੋ ਮਲਤ ਹੈਂ ॥

रोह के रुहेले माघ देस के मघेले बीर बंगसी बुँदेले पाप पुँज को मलत हैं ॥

roh ke ruhele maagh dhes ke maghele beer ba(n)gasee bu(n)dhele paap pu(n)j ko malat hai(n) ||

ਗੋਖਾ ਗੁਨ ਗਾਵੈ ਚੀਨ ਮਚੀਨ ਕੇ ਸੀਸ ਨ੍ਯਾਵੈ ਤਿੱਬਤੀ ਧਿਆਇ ਦੋਖ ਦੇਹ ਕੋ ਦਲਤ ਹੈਂ ॥

गोखा गुन गावै चीन मचीन के सीस न्यावै तिब्बती धिआइ दोख देह को दलत हैं ॥

gokhaa gun gaavai cheen macheen ke sees nayaavai ti'batee dhiaai dhokh dheh ko dhalat hai(n) ||

ਜਿਨੈ ਤੋਹਿ ਧਿਆਇਓ ਤਿਨੈ ਪੂਰਨ ਪ੍ਰਤਾਪ ਪਾਇਓ ਸਰਬ ਧਨ ਧਾਮ ਫਲ ਫੂਲ ਸੋਂ ਫਲਤ ਹੈਂ ॥੩॥੨੫੫॥

जिनै तोहि धिआइओ तिनै पूरन प्रताप पाइओ सरब धन धाम फल फूल सों फलत हैं ॥३॥२५५॥

jinai toh dhiaaio tinai pooran prataap paio sarab dhan dhaam fal fool so(n) falat hai(n) ||3||255||


ਦੇਵ ਦੇਵਤਾਨ ਕੌ ਸੁਰੇਸ ਦਾਨਵਾਨ ਕੌ ਮਹੇਸ ਗੰਗ ਧਾਨ ਕੌ ਅਭੇਸ ਕਹੀਅਤੁ ਹੈਂ ॥

देव देवतान कौ सुरेस दानवान कौ महेस गंग धान कौ अभेस कहीअतु हैं ॥

dhev dhevataan kau sures dhaanavaan kau mahes ga(n)g dhaan kau abhes kaheeat hai(n) ||

ਰੰਗ ਮੈ ਰੰਗੀਨ ਰਾਗ ਰੂਪ ਮੈਂ ਪ੍ਰਬੀਨ ਔਰ ਕਾਹੂ ਪੈ ਨ ਦੀਨ ਸਾਧ ਅਧੀਨ ਕਹੀਅਤੁ ਹੈਂ ॥

रंग मै रंगीन राग रूप मैं प्रबीन और काहू पै न दीन साध अधीन कहीअतु हैं ॥

ra(n)g mai ra(n)geen raag roop mai(n) prabeen aauar kaahoo pai na dheen saadh adheen kaheeat hai(n) ||

ਪਾਈਐ ਨ ਪਾਰ ਤੇਜ ਪੁੰਜ ਮੈਂ ਅਪਾਰ ਸਰਬ ਬਿਦਿਆ ਕੇ ਉਦਾਰ ਹੈਂ ਅਪਾਰ ਕਹੀਅਤੁ ਹੈਂ ॥

पाईऐ न पार तेज पुँज मैं अपार सरब बिदिआ के उदार हैं अपार कहीअतु हैं ॥

paieeaai na paar tej pu(n)j mai(n) apaar sarab bidhiaa ke udhaar hai(n) apaar kaheeat hai(n) ||

ਹਾਥੀ ਕੀ ਪੁਕਾਰ ਪਲ ਪਾਛੈ ਪਹੁਚਤ ਤਾਹਿ ਚੀਟੀ ਕੀ ਚਿੰਘਾਰ ਪਹਿਲੇ ਹੀ ਸੁਨੀਅਤੁ ਹੈਂ ॥੪॥੨੫੬॥

हाथी की पुकार पल पाछै पहुचत ताहि चीटी की चिंघार पहिले ही सुनीअतु हैं ॥४॥२५६॥

haathee kee pukaar pal paachhai pahuchat taeh cheeTee kee chi(n)ghaar pahile hee suneeat hai(n) ||4||256||


ਕੇਤੇ ਇੰਦ੍ਰ ਦੁਆਰ ਕੇਤੇ ਬ੍ਰਹਮਾ ਮੁਖ ਚਾਰ ਕੇਤੇ ਕ੍ਰਿਸਨ ਅਵਤਾਰ ਕੇਤੇ ਰਾਮ ਕਹੀਅਤੁ ਹੈਂ ॥

केते इंद्र दुआर केते ब्रहमा मुख चार केते कृसन अवतार केते राम कहीअतु हैं ॥

kete i(n)dhr dhuaar kete brahamaa mukh chaar kete kirasan avataar kete raam kaheeat hai(n) ||

ਕੇਤੇ ਸਸਿ ਰਾਸੀ ਕੇਤੇ ਸੂਰਜ ਪ੍ਰਕਾਸੀ ਕੇਤੇ ਮੁੰਡੀਆ ਉਦਾਸੀ ਜੋਗ ਦੁਆਰ ਕਹੀਅਤੁ ਹੈਂ ॥

केते ससि रासी केते सूरज प्रकासी केते मुँडीआ उदासी जोग दुआर कहीअतु हैं ॥

kete sas raasee kete sooraj prakaasee kete mu(n)ddeeaa udhaasee jog dhuaar kaheeat hai(n) ||

ਕੇਤੇ ਮਹਾਦੀਨ ਕੇਤੇ ਬਿਆਸ ਸੇ ਪ੍ਰਬੀਨ ਕੇਤੇ ਕੁਮੇਰ ਕੁਲੀਨ ਕੇਤੇ ਜਛ ਕਹੀਅਤੁ ਹੈਂ ॥

केते महादीन केते बिआस से प्रबीन केते कुमेर कुलीन केते जछ कहीअतु हैं ॥

kete mahaadheen kete biaas se prabeen kete kumer kuleen kete jachh kaheeat hai(n) ||

ਕਰਤ ਹੈਂ ਬਿਚਾਰ ਪੈ ਨ ਪੂਰਨ ਕੋ ਪਾਵੈ ਪਾਰ ਤਾਹੀ ਤੇ ਅਪਾਰ ਨਿਰਾਧਾਰ ਲਹੀਅਤੁ ਹੈਂ ॥੫॥੨੫੭॥

करत हैं बिचार पै न पूरन को पावै पार ताही ते अपार निराधार लहीअतु हैं ॥५॥२५७॥

karat hai(n) bichaar pai na pooran ko paavai paar taahee te apaar niraadhaar laheeat hai(n) ||5||257||


ਪੂਰਨ ਅਵਤਾਰ ਨਿਰਾਧਾਰ ਹੈ ਨ ਪਾਰਾਵਾਰ ਪਾਈਐ ਨ ਪਾਰ ਪੈ ਅਪਾਰ ਕੈ ਬਖਾਨੀਐ ॥

पूरन अवतार निराधार है न पारावार पाईऐ न पार पै अपार कै बखानीऐ ॥

pooran avataar niraadhaar hai na paaraavaar paieeaai na paar pai apaar kai bakhaaneeaai ||

ਅਦ੍ਵੈ ਅਬਿਨਾਸੀ ਪਰਮ ਪੂਰਨ ਪ੍ਰਕਾਸੀ ਮਹਾ ਰੂਪ ਹੂੰ ਕੇ ਰਾਸੀ ਹੈਂ ਅਨਾਸੀ ਕੈ ਕੈ ਮਾਨੀਐ ॥

अद्वै अबिनासी परम पूरन प्रकासी महा रूप हूँ के रासी हैं अनासी कै कै मानीऐ ॥

adhavai abinaasee param pooran prakaasee mahaa roop hoo(n) ke raasee hai(n) anaasee kai kai maaneeaai ||

ਜੰਤ੍ਰ ਹੂੰ ਨ ਜਾਤ ਜਾ ਕੀ ਬਾਪ ਹੂੰ ਨ ਮਾਇ ਤਾ ਕੀ ਪੂਰਨ ਪ੍ਰਭਾ ਕੀ ਸੁ ਛਟਾ ਕੈ ਅਨੁਮਾਨੀਐ ॥

जंत्र हूँ न जात जा की बाप हूँ न माइ ता की पूरन प्रभा की सु छटा कै अनुमानीऐ ॥

ja(n)tr hoo(n) na jaat jaa kee baap hoo(n) na mai taa kee pooran prabhaa kee su chhaTaa kai anumaaneeaai ||

ਤੇਜ ਹੂੰ ਕੋ ਤੰਤ੍ਰ ਹੈਂ ਕਿ ਰਾਜਸੀ ਕੋ ਜੰਤ੍ਰ ਹੈਂ ਕਿ ਮੋਹਨੀ ਕੋ ਮੰਤ੍ਰ ਹੈਂ ਨਿਜੰਤ੍ਰ ਕੈ ਕੈ ਜਾਨੀਐ ॥੬॥੨੫੮॥

तेज हूँ को तंत्र हैं कि राजसी को जंत्र हैं कि मोहनी को मंत्र हैं निजंत्र कै कै जानीऐ ॥६॥२५८॥

tej hoo(n) ko ta(n)tr hai(n) k raajasee ko ja(n)tr hai(n) k mohanee ko ma(n)tr hai(n) nija(n)tr kai kai jaaneeaai ||6||258||


ਤੇਜ ਹੂੰ ਕੋ ਤਰੁ ਹੈਂ ਕਿ ਰਾਜਸੀ ਕੋ ਸਰੁ ਹੈਂ ਕਿ ਸੱੁਧਤਾ ਕੋ ਘਰੁ ਹੈਂ ਕਿ ਸਿੱਧਤਾ ਕੀ ਸਾਰੁ ਹੈਂ ॥

तेज हूँ को तरु हैं कि राजसी को सरु हैं कि सु्ुधता को घरु हैं कि सिद्धता की सारु हैं ॥

tej hoo(n) ko tar hai(n) k raajasee ko sar hai(n) k sa'udhataa ko ghar hai(n) k si'dhataa kee saar hai(n) ||

ਕਾਮਨਾ ਕੀ ਖਾਨ ਹੈਂ ਕਿ ਸਾਧਨਾ ਕੀ ਸਾਨ ਹੈਂ ਬਿਰਕਤਤਾ ਕੀ ਬਾਨ ਹੈਂ ਕਿ ਬੁੱਧਿ ਕੋ ਉਦਾਰ ਹੈਂ ॥

कामना की खान हैं कि साधना की सान हैं बिरकतता की बान हैं कि बुद्धि को उदार हैं ॥

kaamanaa kee khaan hai(n) k saadhanaa kee saan hai(n) birakatataa kee baan hai(n) k bu'dh ko udhaar hai(n) ||

ਸੁੰਦਰ ਸਰੂਪ ਹੈਂ ਕਿ ਭੂਪਨ ਕੋ ਭੂਪ ਹੈਂ ਕਿ ਰੂਪ ਹੂੰ ਕੋ ਰੂਪ ਹੈਂ ਕੁਮਤਿ ਕੋ ਪ੍ਰਹਾਰੁ ਹੈਂ ॥

सुँदर सरूप हैं कि भूपन को भूप हैं कि रूप हूँ को रूप हैं कुमति को प्रहारु हैं ॥

su(n)dhar saroop hai(n) k bhoopan ko bhoop hai(n) k roop hoo(n) ko roop hai(n) kumat ko prahaar hai(n) ||

ਦੀਨਨ ਕੋ ਦਾਤਾ ਹੈਂ ਗਨੀਮਨ ਕੋ ਗਾਰਕ ਹੈਂ ਸਾਧਨ ਕੋ ਰੱਛਕ ਹੈ ਗੁਨਨ ਕੋ ਪਹਾਰੁ ਹੈਂ ॥੭॥੨੫੯॥

दीनन को दाता हैं गनीमन को गारक हैं साधन को रच्छक है गुनन को पहारु हैं ॥७॥२५९॥

dheenan ko dhaataa hai(n) ganeeman ko gaarak hai(n) saadhan ko ra'chhak hai gunan ko pahaar hai(n) ||7||259||


ਸਿੱਧ ਕੋ ਸਰੂਪ ਹੈਂ ਕਿ ਬੁਧਿ ਕੋ ਬਿਭੂਤਿ ਹੈਂ ਕਿ ਕ੍ਰੁਧ ਕੋ ਅਭੂਤ ਹੈਂ ਕਿ ਅੱਛੈ ਅਬਿਨਾਸੀ ਹੈਂ ॥

सिद्ध को सरूप हैं कि बुधि को बिभूति हैं कि क्रुध को अभूत हैं कि अच्छै अबिनासी हैं ॥

si'dh ko saroop hai(n) k budh ko bibhoot hai(n) k krudh ko abhoot hai(n) k a'chhai abinaasee hai(n) ||

ਕਾਮ ਕੋ ਕੁਨਿੰਦਾ ਹੈਂ ਕਿ ਖੂਬੀ ਕੋ ਦਿਹੰਦਾ ਹੈਂ ਗਨੀਮ ਗਰਿੰਦਾ ਹੈਂ ਕਿ ਤੇਜ ਕੋ ਪ੍ਰਕਾਸੀ ਹੈਂ ॥

काम को कुनिंदा हैं कि खूबी को दिहंदा हैं गनीम गरिंदा हैं कि तेज को प्रकासी हैं ॥

kaam ko kuni(n)dhaa hai(n) k khoobee ko dhiha(n)dhaa hai(n) ganeem gari(n)dhaa hai(n) k tej ko prakaasee hai(n) ||

ਕਾਲ ਹੂੰ ਕੋ ਕਾਲ ਹੈਂ ਕਿ ਸਤ੍ਰਨ ਕੋ ਸਾਲ ਹੈਂ ਕਿ ਮਿਤ੍ਰਨ ਕੋ ਪੋਖਤ ਹੈਂ ਕਿ ਬ੍ਰਿਧਤਾ ਕੋ ਬਾਸੀ ਹੈਂ ॥

काल हूँ को काल हैं कि सत्रन को साल हैं कि मित्रन को पोखत हैं कि बृधता को बासी हैं ॥

kaal hoo(n) ko kaal hai(n) k satran ko saal hai(n) k mitran ko pokhat hai(n) k biradhataa ko baasee hai(n) ||

ਜੋਗ ਹੂੰ ਕੋ ਜੰਤ੍ਰ ਹੈਂ ਕਿ ਤੇਜ ਹੂੰ ਕੋ ਤੰਤ੍ਰ ਹੈਂ ਕਿ ਮੋਹਨੀ ਕੋ ਮੰਤ੍ਰ ਹੈਂ ਕਿ ਪੂਰਨ ਪ੍ਰਕਾਸੀ ਹੈਂ ॥੮॥੨੬੦॥

जोग हूँ को जंत्र हैं कि तेज हूँ को तंत्र हैं कि मोहनी को मंत्र हैं कि पूरन प्रकासी हैं ॥८॥२६०॥

jog hoo(n) ko ja(n)tr hai(n) k tej hoo(n) ko ta(n)tr hai(n) k mohanee ko ma(n)tr hai(n) k pooran prakaasee hai(n) ||8||260||


ਰੂਪ ਕੋ ਨਿਵਾਸ ਹੈਂ ਕਿ ਬੁੱਧਿ ਕੋ ਪ੍ਰਕਾਸ ਹੈਂ ਕਿ ਸਿੱਧਤਾ ਕੋ ਬਾਸ ਹੈਂ ਕਿ ਬੁੱਧਿ ਹੂੰ ਕੋ ਘਰੁ ਹੈਂ ॥

रूप को निवास हैं कि बुद्धि को प्रकास हैं कि सिद्धता को बास हैं कि बुद्धि हूँ को घरु हैं ॥

roop ko nivaas hai(n) k bu'dh ko prakaas hai(n) k si'dhataa ko baas hai(n) k bu'dh hoo(n) ko ghar hai(n) ||

ਦੇਵਨ ਕੋ ਦੇਵ ਹੈਂ ਨਿਰੰਜਨ ਅਭੇਵ ਹੈਂ ਅਦੇਵਨ ਕੋ ਦੇਵ ਹੈਂ ਕਿ ਸੁੱਧਤਾ ਕੋ ਸਰੁ ਹੈਂ ॥

देवन को देव हैं निरंजन अभेव हैं अदेवन को देव हैं कि सुद्धता को सरु हैं ॥

dhevan ko dhev hai(n) nira(n)jan abhev hai(n) adhevan ko dhev hai(n) k su'dhataa ko sar hai(n) ||

ਜਾਨ ਕੋ ਬਚੱਯਾ ਹੈਂ ਇਮਾਨ ਕੋ ਦਿਵੱਯਾ ਹੈਂ ਜਮ ਜਾਲ ਕੋ ਕੱਟਯਾ ਹੈਂ ਕਿ ਕਾਮਨਾ ਕੋ ਕਰੁ ਹੈਂ ॥

जान को बचय्या हैं इमान को दिवय्या हैं जम जाल को कट्टया हैं कि कामना को करु हैं ॥

jaan ko bacha'yaa hai(n) imaan ko dhiva'yaa hai(n) jam jaal ko ka'Tayaa hai(n) k kaamanaa ko kar hai(n) ||

ਤੇਜ ਕੋ ਪ੍ਰਚੰਡ ਹੈਂ ਅਖੰਡਣ ਕੋ ਖੰਡ ਹੈਂ ਮਹੀਪਨ ਕੋ ਮੰਡ ਹੈਂ ਕਿ ਇਸਤ੍ਰੀ ਹੈਂ ਨ ਨਰੁ ਹੈਂ ॥੯॥੨੬੧॥

तेज को प्रचंड हैं अखंडण को खंड हैं महीपन को मंड हैं कि इसत्री हैं न नरु हैं ॥९॥२६१॥

tej ko pracha(n)dd hai(n) akha(n)ddan ko kha(n)dd hai(n) maheepan ko ma(n)dd hai(n) k isatree hai(n) na nar hai(n) ||9||261||


ਬਿਸ੍ਵ ਕੋ ਭਰਨ ਹੈਂ ਕਿ ਅਪਦਾ ਕੋ ਹਰਨ ਹੈਂ ਕਿ ਸੁਖ ਕੋ ਕਰਨ ਹੈਂ ਕਿ ਤੇਜ ਕੋ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਹੈਂ ॥

बिस्व को भरन हैं कि अपदा को हरन हैं कि सुख को करन हैं कि तेज को प्रकाश हैं ॥

bisavai ko bharan hai(n) k apadhaa ko haran hai(n) k sukh ko karan hai(n) k tej ko prakaash hai(n) ||

ਪਾਈਐ ਨ ਪਾਰ ਪਾਰਾਵਾਰ ਹੂੰ ਕੋ ਪਾਰ ਜਾਂ ਕੋ ਕੀਜਤ ਬਿਚਾਰ ਸੁਬਿਚਾਰ ਕੋ ਨਿਵਾਸ ਹੈਂ ॥

पाईऐ न पार पारावार हूँ को पार जाँ को कीजत बिचार सुबिचार को निवास हैं ॥

paieeaai na paar paaraavaar hoo(n) ko paar jaa(n) ko keejat bichaar subichaar ko nivaas hai(n) ||

ਹਿੰਗੁਲਾ ਹਿਮਾਲੈ ਗਾਵੈ ਹਬਸੀ ਹੱਲਬੀ ਧਿਆਵੈ ਪੂਰਬੀ ਨ ਪਾਰ ਪਾਵੈ ਆਸਾ ਤੇ ਅਨਾਸ ਹੈਂ ॥

हिंगुला हिमालै गावै हबसी हल्लबी धिआवै पूरबी न पार पावै आसा ते अनास हैं ॥

hi(n)gulaa himaalai gaavai habasee ha'labee dhiaavai poorabee na paar paavai aasaa te anaas hai(n) ||

ਦੇਵਨ ਕੋ ਦੇਵ ਮਹਾਦੇਵ ਹੂੰ ਕੇ ਦੇਵ ਹੈਂ ਨਿਰੰਜਨ ਅਭੇਵ ਨਾਥ ਅਦ੍ਵੈ ਅਬਿਨਾਸ ਹੈਂ ॥੧੦॥੨੬੨॥

देवन को देव महादेव हूँ के देव हैं निरंजन अभेव नाथ अद्वै अबिनास हैं ॥१०॥२६२॥

dhevan ko dhev mahaadhev hoo(n) ke dhev hai(n) nira(n)jan abhev naath adhavai abinaas hai(n) ||10||262||


ਅੰਜਨ ਬਿਹੀਨ ਹੈਂ ਨਿਰੰਜਨ ਪ੍ਰਬੀਨ ਹੈਂ ਕਿ ਸੇਵਕ ਅਧੀਨ ਹੈ ਕਟੱਯਾ ਜਮ ਜਾਲ ਕੇ ॥

अंजन बिहीन हैं निरंजन प्रबीन हैं कि सेवक अधीन है कटय्या जम जाल के ॥

a(n)jan biheen hai(n) nira(n)jan prabeen hai(n) k sevak adheen hai kaTa'yaa jam jaal ke ||

ਦੇਵਨ ਕੇ ਦੇਵ ਮਹਾਦੇਵ ਹੂੰ ਕੇ ਦੇਵਨਾਥ ਭੂਮ ਕੇ ਭੁਜੱਯਾ ਹੈ ਮੁਹੱਯਾ ਮਹਾ ਬਾਲ ਕੇ ॥

देवन के देव महादेव हूँ के देवनाथ भूम के भुजय्या है मुहय्या महा बाल के ॥

dhevan ke dhev mahaadhev hoo(n) ke dhevanaath bhoom ke bhuja'yaa hai muha'yaa mahaa baal ke ||

ਰਾਜਨ ਕੇ ਰਾਜਾ ਮਹਾ ਸਾਜ ਹੂੰ ਕੇ ਸਾਜਾ ਮਹਾ ਜੋਗ ਹੂੰ ਕੇ ਜੋਗ ਹੈਂ ਧਰੱਯਾ ਦ੍ਰੁਮ ਛਾਲ ਕੇ ॥

राजन के राजा महा साज हूँ के साजा महा जोग हूँ के जोग हैं धरय्या द्रुम छाल के ॥

raajan ke raajaa mahaa saaj hoo(n) ke saajaa mahaa jog hoo(n) ke jog hai(n) dhara'yaa dhrum chhaal ke ||

ਕਾਮਨਾ ਕੇ ਕਰੁ ਹੈਂ ਕੁਬਿੱਧਿਤਾ ਕੋ ਹਰੁ ਹੈਂ ਕਿ ਸਿੱਧਤਾ ਕੇ ਸਾਥੀ ਹੈਂ ਕਿ ਕਾਲ ਹੈਂ ਕੁਚਾਲ ਕੇ ॥੧੧॥੨੬੩॥

कामना के करु हैं कुबिद्धिता को हरु हैं कि सिद्धता के साथी हैं कि काल हैं कुचाल के ॥११॥२६३॥

kaamanaa ke kar hai(n) kubi'dhitaa ko har hai(n) k si'dhataa ke saathee hai(n) k kaal hai(n) kuchaal ke ||11||263||


ਛੀਰ ਕੈਸੀ ਛੀਰਾਵਧ ਛਾਛ ਕੈਸੀ ਛੱਤ੍ਰਾਨੇਰ ਛਪਾਕਰ ਕੈਸੀ ਛਬਿ ਕਾਲਇੰਦ੍ਰੀ ਕੇ ਕੂਲ ਕੈ ॥

छीर कैसी छीरावध छाछ कैसी छत्त्रानेर छपाकर कैसी छबि कालइंद्री के कूल कै ॥

chheer kaisee chheeraavadh chhaachh kaisee chha'traaner chhapaakar kaisee chhab kaali(n)dhree ke kool kai ||

ਹੰਸਨੀ ਸੀ ਸੀਹਾਰੂਮ ਹੀਰਾ ਸੀ ਹੁਸੈਨਾਬਾਦ ਗੰਗਾ ਕੈਸੀ ਧਾਰ ਚਲੀ ਸਾਤੋ ਸਿੰਧ ਰੂਲ ਕੈ ॥

हंसनी सी सीहारूम हीरा सी हुसैनाबाद गंगा कैसी धार चली सातो सिंध रूल कै ॥

ha(n)sanee see seehaaroom heeraa see husainaabaadh ga(n)gaa kaisee dhaar chalee saato si(n)dh rool kai ||

ਪਾਰਾ ਸੀ ਪਲਾਊਗਢ ਰੂਪਾ ਕੈਸੀ ਰਾਮਪੁਰ ਸੋਰਾ ਸੀ ਸੁਰੰਗਾਬਾਦ ਨੀਕੈ ਰਹੀ ਝੂਲ ਕੈ ॥

पारा सी पलाऊगढ रूपा कैसी रामपुर सोरा सी सुरंगाबाद नीकै रही झूल कै ॥

paaraa see palaauoogadd roopaa kaisee raamapur soraa see sura(n)gaabaadh neekai rahee jhool kai ||

ਚੰਪਾ ਸੀ ਚੰਦੇਰੀ ਕੋਟ ਚਾਂਦਨੀ ਸੀ ਚਾਂਦਾਗੜ੍ਹ ਕੀਰਤਿ ਤਿਹਾਰੀ ਰਹੀ ਮਾਲਤੀ ਸੀ ਫੂਲ ਕੈ ॥੧੨॥੨੬੪॥

चंपा सी चंदेरी कोट चाँदनी सी चाँदागड़्ह कीरति तिहारी रही मालती सी फूल कै ॥१२॥२६४॥

cha(n)paa see cha(n)dheree koT chaa(n)dhanee see chaa(n)dhaagaRh keerat tihaaree rahee maalatee see fool kai ||12||264||


ਫਟਕ ਸੀ ਕੈਲਾਸ ਕਮਾਂਊਗੜ੍ਹ ਕਾਂਸੀਪੁਰ ਸੀਸਾ ਸੀ ਸੁਰੰਗਾਬਾਦਿ ਨੀਕੈ ਸੋਹੀਅਤੁ ਹੈ ॥

फटक सी कैलास कमाँऊगड़्ह काँसीपुर सीसा सी सुरंगाबादि नीकै सोहीअतु है ॥

faTak see kailaas kamaa(n)uoogaRh kaa(n)seepur seesaa see sura(n)gaabaadh neekai soheeat hai ||

ਹਿਮਾ ਸੀ ਹਿਮਾਲੈਹਰ ਹਾਰ ਸੀ ਹੱਲਬਾ ਨੇਰ ਹੰਸ ਕੈਸੀ ਹਾਜੀਪੁਰ ਦੇਖੇ ਮੋਹੀਅਤੁ ਹੈ ॥

हिमा सी हिमालैहर हार सी हल्लबा नेर हंस कैसी हाजीपुर देखे मोहीअतु है ॥

himaa see himaalaihar haar see ha'labaa ner ha(n)s kaisee haajeepur dhekhe moheeat hai ||

ਚੰਦਨ ਸੀ ਚੰਪਾਵਤੀ ਚੰਦ੍ਰਮਾ ਸੀ ਚੰਦ੍ਰਾਗਿਰ ਚਾਂਦਨੀ ਸੀ ਚਾਂਦਗੜ੍ਹ ਜੌਨ ਜੋਹੀਅਤੁ ਹੈ ॥

चंदन सी चंपावती चंद्रमा सी चंद्रागिर चाँदनी सी चाँदगड़्ह जौन जोहीअतु है ॥

cha(n)dhan see cha(n)paavatee cha(n)dhramaa see cha(n)dhraagir chaa(n)dhanee see chaa(n)dhagaRh jauan joheeat hai ||

ਗੰਗਾ ਸਮ ਗੰਗਧਾਰ ਬਕਾਨ ਸੀ ਬਲਿੰਦਾਵਾਦ ਕੀਰਤਿ ਤਿਹਾਰੀ ਕੀ ਉਜੀਆਰੀ ਸੋਹੀਅਤੁ ਹੈ ॥੧੩॥੨੬੫॥

गंगा सम गंगधार बकान सी बलिंदावाद कीरति तिहारी की उजीआरी सोहीअतु है ॥१३॥२६५॥

ga(n)gaa sam ga(n)gadhaar bakaan see bali(n)dhaavaadh keerat tihaaree kee ujeeaaree soheeat hai ||13||265||


ਫਰਾ ਸੀ ਫਿਰੰਗੀ ਫਰਾਸੀਸ ਕੇ ਦੁਰੰਗੀ ਮਕਰਾਨ ਕੇ ਮ੍ਰਿਦੰਗੀ ਤੇਰੇ ਗੀਤ ਗਾਈਅਤੁ ਹੈ ॥

फरा सी फिरंगी फरासीस के दुरंगी मकरान के मृदंगी तेरे गीत गाईअतु है ॥

faraa see fira(n)gee faraasees ke dhura(n)gee makaraan ke miradha(n)gee tere geet gaieeat hai ||

ਭਖਰੀ ਕੰਧਾਰੀ ਗੋਰ ਗਖਰੀ ਗਰਦੇਜਾ ਚਾਰੀ ਪਉਨ ਕੇ ਅਹਾਰੀ ਤੇਰੋ ਨਾਮੁ ਧਿਆਈਅਤੁ ਹੈ ॥

भखरी कंधारी गोर गखरी गरदेजा चारी पउन के अहारी तेरो नामु धिआईअतु है ॥

bhakharee ka(n)dhaaree gor gakharee garadhejaa chaaree paun ke ahaaree tero naam dhiaaieeat hai ||

ਪੂਰਬ ਪਲਾਊਂ ਕਾਮ ਰੂਪ ਔ ਕਮਾਊਂ ਸਰਬ ਠਉਰ ਮੈ ਬਿਰਾਜੈ ਜਹਾਂ ਜਹਾਂ ਜਾਈਅਤੁ ਹੈ ॥

पूरब पलाऊं काम रूप औ कमाऊं सरब ठउर मै बिराजै जहाँ जहाँ जाईअतु है ॥

poorab palaauoo(n) kaam roop aau kamaauoo(n) sarab Thaur mai biraajai jahaa(n) jahaa(n) jaieeat hai ||

ਪੂਰਨ ਪ੍ਰਤਾਪੀ ਜੰਤ੍ਰ ਮੰਤ੍ਰ ਤੇ ਅਤਾਪੀ ਨਾਥ ਕੀਰਤਿ ਤਿਹਾਰੀ ਕੋ ਨ ਪਾਰ ਪਾਈਅਤੁ ਹੈ ॥੧੪॥੨੬੬॥

पूरन प्रतापी जंत्र मंत्र ते अतापी नाथ कीरति तिहारी को न पार पाईअतु है ॥१४॥२६६॥

pooran prataapee ja(n)tr ma(n)tr te ataapee naath keerat tihaaree ko na paar paieeat hai ||14||266||


ਤ੍ਵ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥ ਪਾਧੜੀ ਛੰਦ ॥

त्व प्रसादि ॥ पाधड़ी छंद ॥

tavai prasaadh || paadhaRee chha(n)dh ||


ਅਦ੍ਵੈ ਅਨਾਸ ਆਸਨ ਅਡੋਲ ॥

अद्वै अनास आसन अडोल ॥

adhavai anaas aasan addol ||

ਅਦ੍ਵੈ ਅਨੰਤ ਉਪਮਾ ਅਤੋਲ ॥

अद्वै अनंत उपमा अतोल ॥

adhavai ana(n)t upamaa atol ||

ਅਛੈ ਸਰੂਪ ਅਬ੍ਯਕਤ ਨਾਥ ॥

अछै सरूप अब्यकत नाथ ॥

achhai saroop abayakat naath ||

ਆਜਾਨ ਬਾਹੁ ਸਰਬਾ ਪ੍ਰਮਾਥ ॥੧॥੨੬੭॥

आजान बाहु सरबा प्रमाथ ॥१॥२६७॥

aajaan baahu sarabaa pramaath ||1||267||


ਜਹ ਤਹ ਮਹੀਪ ਬਨ ਤਿਨ ਪ੍ਰਫੁਲ ॥

जह तह महीप बन तिन प्रफुल ॥

jeh teh maheep ban tin praful ||

ਸੋਭਾ ਬਸੰਤ ਜਹ ਤਹ ਪੱ੍ਰਡੁਲ ॥

सोभा बसंत जह तह प्््रडुल ॥

sobhaa basa(n)t jeh teh pa'raddul ||

ਬਨ ਤਨ ਦੁਰੰਤ ਖਗ ਮ੍ਰਿਗ ਮਹਾਨ ॥

बन तन दुरंत खग मृग महान ॥

ban tan dhura(n)t khag mirag mahaan ||

ਜਹ ਤਹ ਪ੍ਰਫੱੁਲ ਸੁੰਦਰ ਸੁਜਾਨ ॥੨॥੨੬੮॥

जह तह प्रफु्ुल सुँदर सुजान ॥२॥२६८॥

jeh teh prafa'ul su(n)dhar sujaan ||2||268||


ਫੁਲਤੰ ਪ੍ਰਫੁੱਲ ਲਹਿ ਲਹਿਤ ਮੌਰ ॥

फुलतं प्रफुल्ल लहि लहित मौर ॥

fulata(n) prafu'l leh lahit mauar ||

ਸਿਰ ਢੁਰਹਿ ਜਾਨ ਮਨ ਮਥਹਿ ਚੌਰ ॥

सिर ढुरहि जान मन मथहि चौर ॥

sir ddureh jaan man matheh chauar ||

ਕੁਦਰਤ ਕਮਾਲ ਰਾਜ਼ਕ ਰਹੀਮ ॥

कुदरत कमाल राज़क रहीम ॥

kudharat kamaal raazak raheem ||

ਕਰੁਣਾ ਨਿਧਾਨ ਕਾਮਲ ਕਰੀਮ ॥੩॥੨੬੯॥

करुणा निधान कामल करीम ॥३॥२६९॥

karunaa nidhaan kaamal kareem ||3||269||


ਜਂਹ ਤਂਹ ਬਿਲੋਕ ਤਂਹ ਤਂਹ ਪ੍ਰਸੋਹ ॥

जंह तंह बिलोक तंह तंह प्रसोह ॥

ja(n)h ta(n)h bilok ta(n)h ta(n)h prasoh ||

ਆਜਾਨੁ ਬਾਹੁ ਅਮਿਤੋਜ ਮੋਹ ॥

आजानु बाहु अमितोज मोह ॥

aajaan baahu amitoj moh ||

ਰੋਸੰ ਬਿਰਹਤ ਕਰਣਾ ਨਿਧਾਨ ॥

रोसं बिरहत करणा निधान ॥

rosa(n) birahat karanaa nidhaan ||

ਜਂਹ ਤਂਹ ਪ੍ਰਫੁੱਲ ਸੁੰਦਰ ਸੁਜਾਨ ॥੪॥੨੭੦॥

जंह तंह प्रफुल्ल सुँदर सुजान ॥४॥२७०॥

ja(n)h ta(n)h prafu'l su(n)dhar sujaan ||4||270||


ਬਨ ਤਿਨ ਮਹੀਪ ਜਲ ਥਲ ਮਹਾਨ ॥

बन तिन महीप जल थल महान ॥

ban tin maheep jal thal mahaan ||

ਜਂਹ ਤਂਹ ਪ੍ਰਸੋਹ ਕਰੁਣਾ ਨਿਧਾਨ ॥

जंह तंह प्रसोह करुणा निधान ॥

ja(n)h ta(n)h prasoh karunaa nidhaan ||

ਜਗਮਗਤ ਤੇਜ ਪੂਰਨ ਪ੍ਰਤਾਪ ॥

जगमगत तेज पूरन प्रताप ॥

jagamagat tej pooran prataap ||

ਅੰਬਰ ਜਿਮੀਨ ਜਿਹ ਜਪਤ ਜਾਪ ॥੫॥੨੭੧॥

अंबर जिमीन जिह जपत जाप ॥५॥२७१॥

a(n)bar jimeen jeh japat jaap ||5||271||


ਸਾਤੋ ਅਕਾਸ ਸਾਤੋ ਪਤਾਰ ॥

सातो अकास सातो पतार ॥

saato akaas saato pataar ||

ਬਿਥਰਿਓ ਅਦਿਸਟ ਜਿਹ ਕਰਮ ਜਾਰਿ ॥ ਉਸਤਤ ਸੰਪੂਰਣੰ ॥

बिथरिओ अदिसट जिह करम जारि ॥ उसतत संपूरणं ॥

bithario adhisaT jeh karam jaar || usatat sa(n)poorana(n) ||


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