Chaupai (Akal Ustat),
ਚਉਪਈ (ਅਕਾਲ ਉਸਤਤ),
चउपयी (अकाल उसतत)


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Gurbani LangMeanings
ਪੰਜਾਬੀ ---
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ੴ ਸਤਿਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

ikOankaar satigur prasaadh ||

ਅਕਾਲ ਉਸਤਤ ॥

अकाल उसतत ॥

akaal usatat ||

ਸ੍ਰੀ ਭਗਉਤੀ ਜੀ ਸਹਾਇ ॥

स्री भगउती जी सहाइ ॥

sree bhagautee jee sahai ||

ਉਤਾਰ ਖਾਸੇ ਦਸਖਤ ਕਾ ॥ ਪਾਤਿਸਾਹੀ ੧੦ ॥

उतार खासे दसखत का ॥ पातिसाही १० ॥

autaar khaase dhasakhat kaa || paatisaahee 10 ||


ਅਕਾਲ ਪੁਰਖ ਕੀ ਰਛਾ ਹਮਨੈ ॥

अकाल पुरख की रछा हमनै ॥

akaal purakh kee rachhaa hamanai ||

ਸਰਬ ਲੋਹ ਦੀ ਰਛਿਆ ਹਮਨੈ ॥

सरब लोह दी रछिआ हमनै ॥

sarab loh dhee rachhiaa hamanai ||

ਸਰਬ ਕਾਲ ਜੀ ਦੀ ਰਛਿਆ ਹਮਨੈ ॥

सरब काल जी दी रछिआ हमनै ॥

sarab kaal jee dhee rachhiaa hamanai ||

ਸਰਬ ਲੋਹ ਜੀ ਦੀ ਸਦਾ ਰਛਿਆ ਹਮਨੈ ॥

सरब लोह जी दी सदा रछिआ हमनै ॥

sarab loh jee dhee sadhaa rachhiaa hamanai ||


ਆਗੈ ਲਿਖਾਰੀ ਕੇ ਦਸਤਖਤ ॥ ਤ੍ਵ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ਚਉਪਈ ॥

आगै लिखारी के दसतखत ॥ त्व प्रसादि चउपई ॥

aagai likhaaree ke dhasatakhat || tavai prasaadh chaupiee ||


ਪ੍ਰਣਵੋ ਆਦਿ ਏਕੰਕਾਰਾ ॥

प्रणवो आदि एकंकारा ॥

pranavo aadh eka(n)kaaraa ||

ਜਲ ਥਲ ਮਹੀਅਲ ਕੀਓ ਪਸਾਰਾ ॥

जल थल महीअल कीओ पसारा ॥

jal thal maheeal keeo pasaaraa ||

ਆਦਿ ਪੁਰਖ ਅਬਿਗਤ ਅਬਿਨਾਸੀ ॥

आदि पुरख अबिगत अबिनासी ॥

aadh purakh abigat abinaasee ||

ਲੋਕ ਚੱਤੁ੍ਰ ਦਸ ਜੋਤਿ ਪ੍ਰਕਾਸੀ ॥੧॥

लोक चत्तु्र दस जोति प्रकासी ॥१॥

lok cha'tur dhas jot prakaasee ||1||


ਹਸਤ ਕੀਟ ਕੇ ਬੀਚ ਸਮਾਨਾ ॥

हसत कीट के बीच समाना ॥

hasat keeT ke beech samaanaa ||

ਰਾਵ ਰੰਕ ਜਿਹ ਇਕ ਸਰ ਜਾਨਾ ॥

राव रंक जिह इक सर जाना ॥

raav ra(n)k jeh ik sar jaanaa ||

ਅਦ੍ਵੈ ਅਲਖ ਪੁਰਖ ਅਬਿਗਾਮੀ ॥

अद्वै अलख पुरख अबिगामी ॥

adhavai alakh purakh abigaamee ||

ਸਭ ਘਟ ਘਟ ਕੇ ਅੰਤਰਜਾਮੀ ॥੨॥

सभ घट घट के अंतरजामी ॥२॥

sabh ghaT ghaT ke a(n)tarajaamee ||2||


ਅਲਖ ਰੂਪ ਅਛੈ ਅਨਭੇਖਾ ॥

अलख रूप अछै अनभेखा ॥

alakh roop achhai anabhekhaa ||

ਰਾਗ ਰੰਗ ਜਿਹ ਰੂਪ ਨ ਰੇਖਾ ॥

राग रंग जिह रूप न रेखा ॥

raag ra(n)g jeh roop na rekhaa ||

ਬਰਨ ਚਿਹਨ ਸਭਹੂੰ ਤੇ ਨਿਆਰਾ ॥

बरन चिहन सभहूँ ते निआरा ॥

baran chihan sabhahoo(n) te niaaraa ||

ਆਦ ਪੁਰਖ ਅਦ੍ਵੈ ਅਬਿਕਾਰਾ ॥੩॥

आद पुरख अद्वै अबिकारा ॥३॥

aadh purakh adhavai abikaaraa ||3||


ਬਰਨ ਚਿਹਨ ਜਿਹ ਜਾਤ ਨ ਪਾਤਾ ॥

बरन चिहन जिह जात न पाता ॥

baran chihan jeh jaat na paataa ||

ਸੱਤ੍ਰ ਮਿੱਤ੍ਰ ਜਿਹ ਤਾਤ ਨ ਮਾਤਾ ॥

सत्त्र मित्त्र जिह तात न माता ॥

sa'tr mi'tr jeh taat na maataa ||

ਸਭ ਤੇ ਦੂਰਿ ਸਭਨ ਤੇ ਨੇਰਾ ॥

सभ ते दूरि सभन ते नेरा ॥

sabh te dhoor sabhan te neraa ||

ਜਲ ਥਲ ਮਹੀਅਲ ਜਾਹਿ ਬਸੇਰਾ ॥੪॥

जल थल महीअल जाहि बसेरा ॥४॥

jal thal maheeal jaeh baseraa ||4||


ਅਨਹਦ ਰੂਪ ਅਨਾਹਦ ਬਾਨੀ ॥

अनहद रूप अनाहद बानी ॥

anahadh roop anaahadh baanee ||

ਚਰਨ ਸਰਨ ਜਿਹ ਬਸਤ ਭਵਾਨੀ ॥

चरन सरन जिह बसत भवानी ॥

charan saran jeh basat bhavaanee ||

ਬ੍ਰਹਮਾ ਬਿਸਨ ਅੰਤੁ ਨਹੀ ਪਾਇਓ ॥

ब्रहमा बिसन अंतु नही पाइओ ॥

brahamaa bisan a(n)t nahee paio ||

ਨੇਤ ਨੇਤ ਮੁਖਚਾਰ ਬਤਾਇਓ ॥੫॥

नेत नेत मुखचार बताइओ ॥५॥

net net mukhachaar bataio ||5||


ਕੋਟਿ ਇੰਦ੍ਰ ਉਪਇੰਦ੍ਰ ਬਨਾਏ ॥

कोटि इंद्र उपइंद्र बनाए ॥

koT i(n)dhr upi(n)dhr banaae ||

ਬ੍ਰਹਮਾ ਰੁਦ੍ਰ ਉਪਾਇ ਖਪਾਏ ॥

ब्रहमा रुद्र उपाइ खपाए ॥

brahamaa rudhr upai khapaae ||

ਲੋਕ ਚੱਤ੍ਰ ਦਸ ਖੇਲ ਰਚਾਇਓ ॥

लोक चत्त्र दस खेल रचाइओ ॥

lok cha'tr dhas khel rachaio ||

ਬਹੁਰ ਆਪ ਹੀ ਬੀਚ ਮਿਲਾਇਓ ॥੬॥

बहुर आप ही बीच मिलाइओ ॥६॥

bahur aap hee beech milaio ||6||


ਦਾਨਵ ਦੇਵ ਫਨਿੰਦ ਅਪਾਰਾ ॥

दानव देव फनिंद अपारा ॥

dhaanav dhev fani(n)dh apaaraa ||

ਗੰਧ੍ਰਬ ਜੱਛ ਰਚੈ ਸੁਭ ਚਾਰਾ ॥

गंध्रब जच्छ रचै सुभ चारा ॥

ga(n)dhrab ja'chh rachai subh chaaraa ||

ਭੂਤ ਭਵਿੱਖ ਭਵਾਨ ਕਹਾਨੀ ॥

भूत भविक्ख भवान कहानी ॥

bhoot bhavi'kh bhavaan kahaanee ||

ਘਟ ਘਟ ਕੇ ਪਟ ਪਟ ਕੀ ਜਾਨੀ ॥੭॥

घट घट के पट पट की जानी ॥७॥

ghaT ghaT ke paT paT kee jaanee ||7||


ਤਾਤ ਮਾਤ ਜਿਹ ਜਾਤ ਨ ਪਾਤਾ ॥

तात मात जिह जात न पाता ॥

taat maat jeh jaat na paataa ||

ਏਕ ਰੰਗ ਕਾਹੂ ਨਹੀ ਰਾਤਾ ॥

एक रंग काहू नही राता ॥

ek ra(n)g kaahoo nahee raataa ||

ਸਰਬ ਜੋਤ ਕੇ ਬੀਚ ਸਮਾਨਾ ॥

सरब जोत के बीच समाना ॥

sarab jot ke beech samaanaa ||

ਸਭਹੂੰ ਸਰਬ ਠੌਰ ਪਹਿਚਾਨਾ ॥੮॥

सभहूँ सरब ठौर पहिचाना ॥८॥

sabhahoo(n) sarab Thauar pahichaanaa ||8||


ਕਾਲ ਰਹਤ ਅਨ ਕਾਲ ਸਰੂਪਾ ॥

काल रहत अन काल सरूपा ॥

kaal rahat an kaal saroopaa ||

ਅਲਖ ਪੁਰਖ ਅਬਗਤ ਅਵਧੂਤਾ ॥

अलख पुरख अबगत अवधूता ॥

alakh purakh abagat avadhootaa ||

ਜਾਤ ਪਾਤ ਜਿਹ ਚਿਹਨ ਨ ਬਰਨਾ ॥

जात पात जिह चिहन न बरना ॥

jaat paat jeh chihan na baranaa ||

ਅਬਗਤ ਦੇਵ ਅਛੈ ਅਨ ਭਰਮਾ ॥੯॥

अबगत देव अछै अन भरमा ॥९॥

abagat dhev achhai an bharamaa ||9||


ਸਭ ਕੋ ਕਾਲ ਸਭਨ ਕੋ ਕਰਤਾ ॥

सभ को काल सभन को करता ॥

sabh ko kaal sabhan ko karataa ||

ਰੋਗ ਸੋਗ ਦੋਖਨ ਕੋ ਹਰਤਾ ॥

रोग सोग दोखन को हरता ॥

rog sog dhokhan ko harataa ||

ਏਕ ਚਿੱਤ ਜਿਹ ਇਕ ਛਿਨ ਧਿਆਇਓ ॥

एक चित्त जिह इक छिन धिआइओ ॥

ek chi't jeh ik chhin dhiaaio ||

ਕਾਲ ਫਾਸ ਕੇ ਬੀਚ ਨ ਆਇਓ ॥੧੦॥

काल फास के बीच न आइओ ॥१०॥

kaal faas ke beech na aaio ||10||



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