वार सत (महला 3), Vaar Satt (Mahalla 3) Path in Hindi Gurbani online


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बिलावलु महला ३ वार सत घरु १०
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

आदित वारि आदि पुरखु है सोई ॥ आपे वरतै अवरु न कोई ॥ ओति पोति जगु रहिआ परोई ॥ आपे करता करै सु होई ॥ नामि रते सदा सुखु होई ॥ गुरमुखि विरला बूझै कोई ॥१॥

हिरदै जपनी जपउ गुणतासा ॥ हरि अगम अगोचरु अपर्मपर सुआमी जन पगि लगि धिआवउ होइ दासनि दासा ॥१॥ रहाउ ॥

सोमवारि सचि रहिआ समाइ ॥ तिस की कीमति कही न जाइ ॥ आखि आखि रहे सभि लिव लाइ ॥ जिसु देवै तिसु पलै पाइ ॥ अगम अगोचरु लखिआ न जाइ ॥ गुर कै सबदि हरि रहिआ समाइ ॥२॥

मंगलि माइआ मोहु उपाइआ ॥ आपे सिरि सिरि धंधै लाइआ ॥ आपि बुझाए सोई बूझै ॥ गुर कै सबदि दरु घरु सूझै ॥ प्रेम भगति करे लिव लाइ ॥ हउमै ममता सबदि जलाइ ॥३॥

बुधवारि आपे बुधि सारु ॥ गुरमुखि करणी सबदु वीचारु ॥ नामि रते मनु निरमलु होइ ॥ हरि गुण गावै हउमै मलु खोइ ॥ दरि सचै सद सोभा पाए ॥ नामि रते गुर सबदि सुहाए ॥४॥

लाहा नामु पाए गुर दुआरि ॥ आपे देवै देवणहारु ॥ जो देवै तिस कउ बलि जाईऐ ॥ गुर परसादी आपु गवाईऐ ॥ नानक नामु रखहु उर धारि ॥ देवणहारे कउ जैकारु ॥५॥

वीरवारि वीर भरमि भुलाए ॥ प्रेत भूत सभि दूजै लाए ॥ आपि उपाए करि वेखै वेका ॥ सभना करते तेरी टेका ॥ जीअ जंत तेरी सरणाई ॥ सो मिलै जिसु लैहि मिलाई ॥६॥

सुक्रवारि प्रभु रहिआ समाई ॥ आपि उपाइ सभ कीमति पाई ॥ गुरमुखि होवै सु करै बीचारु ॥ सचु संजमु करणी है कार ॥ वरतु नेमु निताप्रति पूजा ॥ बिनु बूझे सभु भाउ है दूजा ॥७॥

छनिछरवारि सउण सासत बीचारु ॥ हउमै मेरा भरमै संसारु ॥ मनमुखु अंधा दूजै भाइ ॥ जम दरि बाधा चोटा खाइ ॥ गुर परसादी सदा सुखु पाए ॥ सचु करणी साचि लिव लाए ॥८॥

सतिगुरु सेवहि से वडभागी ॥ हउमै मारि सचि लिव लागी ॥ तेरै रंगि राते सहजि सुभाइ ॥ तू सुखदाता लैहि मिलाइ ॥ एकस ते दूजा नाही कोइ ॥ गुरमुखि बूझै सोझी होइ ॥९॥

पंद्रह थितीं तै सत वार ॥ माहा रुती आवहि वार वार ॥ दिनसु रैणि तिवै संसारु ॥ आवा गउणु कीआ करतारि ॥ निहचलु साचु रहिआ कल धारि ॥ नानक गुरमुखि बूझै को सबदु वीचारि ॥१०॥१॥

बिलावलु महला ३ ॥

आदि पुरखु आपे स्रिसटि साजे ॥ जीअ जंत माइआ मोहि पाजे ॥ दूजै भाइ परपंचि लागे ॥ आवहि जावहि मरहि अभागे ॥ सतिगुरि भेटिऐ सोझी पाइ ॥ परपंचु चूकै सचि समाइ ॥१॥

जा कै मसतकि लिखिआ लेखु ॥ ता कै मनि वसिआ प्रभु एकु ॥१॥ रहाउ ॥

स्रिसटि उपाइ आपे सभु वेखै ॥ कोइ न मेटै तेरै लेखै ॥ सिध साधिक जे को कहै कहाए ॥ भरमे भूला आवै जाए ॥ सतिगुरु सेवै सो जनु बूझै ॥ हउमै मारे ता दरु सूझै ॥२॥

एकसु ते सभु दूजा हूआ ॥ एको वरतै अवरु न बीआ ॥ दूजे ते जे एको जाणै ॥ गुर कै सबदि हरि दरि नीसाणै ॥ सतिगुरु भेटे ता एको पाए ॥ विचहु दूजा ठाकि रहाए ॥३॥

जिस दा साहिबु डाढा होइ ॥ तिस नो मारि न साकै कोइ ॥ साहिब की सेवकु रहै सरणाई ॥ आपे बखसे दे वडिआई ॥ तिस ते ऊपरि नाही कोइ ॥ कउणु डरै डरु किस का होइ ॥४॥

गुरमती सांति वसै सरीर ॥ सबदु चीन्हि फिरि लगै न पीर ॥ आवै न जाइ ना दुखु पाए ॥ नामे राते सहजि समाए ॥ नानक गुरमुखि वेखै हदूरि ॥ मेरा प्रभु सद रहिआ भरपूरि ॥५॥

इकि सेवक इकि भरमि भुलाए ॥ आपे करे हरि आपि कराए ॥ एको वरतै अवरु न कोइ ॥ मनि रोसु कीजै जे दूजा होइ ॥ सतिगुरु सेवे करणी सारी ॥ दरि साचै साचे वीचारी ॥६॥

थिती वार सभि सबदि सुहाए ॥ सतिगुरु सेवे ता फलु पाए ॥ थिती वार सभि आवहि जाहि ॥ गुर सबदु निहचलु सदा सचि समाहि ॥ थिती वार ता जा सचि राते ॥ बिनु नावै सभि भरमहि काचे ॥७॥

मनमुख मरहि मरि बिगती जाहि ॥ एकु न चेतहि दूजै लोभाहि ॥ अचेत पिंडी अगिआन अंधारु ॥ बिनु सबदै किउ पाए पारु ॥ आपि उपाए उपावणहारु ॥ आपे कीतोनु गुर वीचारु ॥८॥

बहुते भेख करहि भेखधारी ॥ भवि भवि भरमहि काची सारी ॥ ऐथै सुखु न आगै होइ ॥ मनमुख मुए अपणा जनमु खोइ ॥ सतिगुरु सेवे भरमु चुकाए ॥ घर ही अंदरि सचु महलु पाए ॥९॥

आपे पूरा करे सु होइ ॥ एहि थिती वार दूजा दोइ ॥ सतिगुर बाझहु अंधु गुबारु ॥ थिती वार सेवहि मुगध गवार ॥ नानक गुरमुखि बूझै सोझी पाइ ॥ इकतु नामि सदा रहिआ समाइ ॥१०॥२॥


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