रक्ख्या दे शबद, Rakhya Dey Shabad (Mahalla 5) Path in Hindi Gurbani online


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सिर मसतक रखया पारब्रहमं हसत काया रखया परमेस्वरह ॥ आतम रखया गोपाल सुआमी धन चरन रखया जगदीस्वरह ॥ सरब रखया गुर दयालह भै दूख बिनासनह ॥ भगति वछल अनाथ नाथे सरनि नानक पुरख अचुतह ॥५२॥

घोर दुखयं अनिक हतयं जनम दारिद्रं महा बिखयादं ॥ मिटंत सगल सिमरंत हरि नाम नानक जैसे पावक कासट भसमं करोति ॥१८॥

सोरठि महला ५ ॥
गुर का सबदु रखवारे ॥ चउकी चउगिरद हमारे ॥ राम नामि मनु लागा ॥ जमु लजाय करि भागा ॥१॥

प्रभ जी तू मेरो सुखदाता ॥ बंधन काटि करे मनु निरमलु पूरन पुरखु बिधाता ॥ रहाउ ॥

नानक प्रभु अबिनासी ॥ ता की सेव न बिरथी जासी ॥ अनद करह तेरे दासा ॥ जपि पूरन होयी आसा ॥२॥४॥६८॥

बिलावलु महला ५ ॥
ताती वाउ न लगयी पारब्रहम सरणाई ॥ चउगिरद हमारै राम कार दुखु लगै न भाई ॥१॥

सतिगुरु पूरा भेट्या जिनि बनत बणाई ॥ राम नामु अउखधु दिया एका लिव लाई ॥१॥ रहाउ ॥

राखि लीए तिनि रखनहारि सभ ब्याधि मिटाई ॥ कहु नानक किरपा भई प्रभ भए सहाई ॥२॥१५॥७९॥

सलोकु ॥
जह साधू गोबिद भजनु कीरतनु नानक नीत ॥ णा हउ णा तूं णह छुटह निकटि न जाईअहु दूत ॥१॥

सलोक म ५ ॥
मन मह चितवउ चितवनी उदमु करउ उठि नीत ॥ हरि कीरतन का आहरो हरि देहु नानक के मीत ॥१॥


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