Pt 8 - राग मारू - बाणी शब्द, Part 8 - Raag Maru - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1080) मारू महला ५ ॥
प्रभ समरथ सरब सुख दाना ॥ सिमरउ नामु होहु मिहरवाना ॥ हरि दाता जीअ जंत भेखारी जनु बांछै जाचंगना ॥१॥

मागउ जन धूरि परम गति पावउ ॥ जनम जनम की मैलु मिटावउ ॥ दीरघ रोग मिटहि हरि अउखधि हरि निरमलि रापै मंगना ॥२॥

स्रवणी सुणउ बिमल जसु सुआमी ॥ एका ओट तजउ बिखु कामी ॥ निवि निवि पाइ लगउ दास तेरे करि सुक्रितु नाही संगना ॥३॥

रसना गुण गावै हरि तेरे ॥ मिटहि कमाते अवगुण मेरे ॥ सिमरि सिमरि सुआमी मनु जीवै पंच दूत तजि तंगना ॥४॥

चरन कमल जपि बोहिथि चरीऐ ॥ संतसंगि मिलि सागरु तरीऐ ॥ अरचा बंदन हरि समत निवासी बाहुड़ि जोनि न नंगना ॥५॥

दास दासन को करि लेहु गोपाला ॥ क्रिपा निधान दीन दइआला ॥ सखा सहाई पूरन परमेसुर मिलु कदे न होवी भंगना ॥६॥

मनु तनु अरपि धरी हरि आगै ॥ जनम जनम का सोइआ जागै ॥ जिस का सा सोई प्रतिपालकु हति तिआगी हउमै हंतना ॥७॥

जलि थलि पूरन अंतरजामी ॥ घटि घटि रविआ अछल सुआमी ॥ भरम भीति खोई गुरि पूरै एकु रविआ सरबंगना ॥८॥

जत कत पेखउ प्रभ सुख सागर ॥ हरि तोटि भंडार नाही रतनागर ॥ अगह अगाह किछु मिति नही पाईऐ सो बूझै जिसु किरपंगना ॥९॥

छाती सीतल मनु तनु ठंढा ॥ जनम मरण की मिटवी डंझा ॥ करु गहि काढि लीए प्रभि अपुनै अमिओ धारि द्रिसटंगना ॥१०॥

एको एकु रविआ सभ ठाई ॥ तिसु बिनु दूजा कोई नाही ॥ आदि मधि अंति प्रभु रविआ त्रिसन बुझी भरमंगना ॥११॥

गुरु परमेसरु गुरु गोबिंदु ॥ गुरु करता गुरु सद बखसंदु ॥ गुर जपु जापि जपत फलु पाइआ गिआन दीपकु संत संगना ॥१२॥

जो पेखा सो सभु किछु सुआमी ॥ जो सुनणा सो प्रभ की बानी ॥ जो कीनो सो तुमहि कराइओ सरणि सहाई संतह तना ॥१३॥

जाचकु जाचै तुमहि अराधै ॥ पतित पावन पूरन प्रभ साधै ॥ एको दानु सरब सुख गुण निधि आन मंगन निहकिंचना ॥१४॥

काइआ पात्रु प्रभु करणैहारा ॥ लगी लागि संत संगारा ॥ निरमल सोइ बणी हरि बाणी मनु नामि मजीठै रंगना ॥१५॥

सोलह कला स्मपूरन फलिआ ॥ अनत कला होइ ठाकुरु चड़िआ ॥ अनद बिनोद हरि नामि सुख नानक अम्रित रसु हरि भुंचना ॥१६॥२॥९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1081) मारू सोलहे महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
तू साहिबु हउ सेवकु कीता ॥ जीउ पिंडु सभु तेरा दीता ॥ करन करावन सभु तूहै तूहै है नाही किछु असाड़ा ॥१॥

तुमहि पठाए ता जग महि आए ॥ जो तुधु भाणा से करम कमाए ॥ तुझ ते बाहरि किछू न होआ ता भी नाही किछु काड़ा ॥२॥

ऊहा हुकमु तुमारा सुणीऐ ॥ ईहा हरि जसु तेरा भणीऐ ॥ आपे लेख अलेखै आपे तुम सिउ नाही किछु झाड़ा ॥३॥

तू पिता सभि बारिक थारे ॥ जिउ खेलावहि तिउ खेलणहारे ॥ उझड़ मारगु सभु तुम ही कीना चलै नाही को वेपाड़ा ॥४॥

इकि बैसाइ रखे ग्रिह अंतरि ॥ इकि पठाए देस दिसंतरि ॥ इक ही कउ घासु इक ही कउ राजा इन महि कहीऐ किआ कूड़ा ॥५॥

कवन सु मुकती कवन सु नरका ॥ कवनु सैसारी कवनु सु भगता ॥ कवन सु दाना कवनु सु होछा कवन सु सुरता कवनु जड़ा ॥६॥

हुकमे मुकती हुकमे नरका ॥ हुकमि सैसारी हुकमे भगता ॥ हुकमे होछा हुकमे दाना दूजा नाही अवरु धड़ा ॥७॥

सागरु कीना अति तुम भारा ॥ इकि खड़े रसातलि करि मनमुख गावारा ॥ इकना पारि लंघावहि आपे सतिगुरु जिन का सचु बेड़ा ॥८॥

कउतकु कालु इहु हुकमि पठाइआ ॥ जीअ जंत ओपाइ समाइआ ॥ वेखै विगसै सभि रंग माणे रचनु कीना इकु आखाड़ा ॥९॥

वडा साहिबु वडी नाई ॥ वड दातारु वडी जिसु जाई ॥ अगम अगोचरु बेअंत अतोला है नाही किछु आहाड़ा ॥१०॥

कीमति कोइ न जाणै दूजा ॥ आपे आपि निरंजन पूजा ॥ आपि सु गिआनी आपि धिआनी आपि सतवंता अति गाड़ा ॥११॥

केतड़िआ दिन गुपतु कहाइआ ॥ केतड़िआ दिन सुंनि समाइआ ॥ केतड़िआ दिन धुंधूकारा आपे करता परगटड़ा ॥१२॥

आपे सकती सबलु कहाइआ ॥ आपे सूरा अमरु चलाइआ ॥ आपे सिव वरताईअनु अंतरि आपे सीतलु ठारु गड़ा ॥१३॥

जिसहि निवाजे गुरमुखि साजे ॥ नामु वसै तिसु अनहद वाजे ॥ तिस ही सुखु तिस ही ठकुराई तिसहि न आवै जमु नेड़ा ॥१४॥

कीमति कागद कही न जाई ॥ कहु नानक बेअंत गुसाई ॥ आदि मधि अंति प्रभु सोई हाथि तिसै कै नेबेड़ा ॥१५॥

तिसहि सरीकु नाही रे कोई ॥ किस ही बुतै जबाबु न होई ॥ नानक का प्रभु आपे आपे करि करि वेखै चोज खड़ा ॥१६॥१॥१०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1082) मारू महला ५ ॥
अचुत पारब्रहम परमेसुर अंतरजामी ॥ मधुसूदन दामोदर सुआमी ॥ रिखीकेस गोवरधन धारी मुरली मनोहर हरि रंगा ॥१॥

मोहन माधव क्रिस्न मुरारे ॥ जगदीसुर हरि जीउ असुर संघारे ॥ जगजीवन अबिनासी ठाकुर घट घट वासी है संगा ॥२॥

धरणीधर ईस नरसिंघ नाराइण ॥ दाड़ा अग्रे प्रिथमि धराइण ॥ बावन रूपु कीआ तुधु करते सभ ही सेती है चंगा ॥३॥

स्री रामचंद जिसु रूपु न रेखिआ ॥ बनवाली चक्रपाणि दरसि अनूपिआ ॥ सहस नेत्र मूरति है सहसा इकु दाता सभ है मंगा ॥४॥

भगति वछलु अनाथह नाथे ॥ गोपी नाथु सगल है साथे ॥ बासुदेव निरंजन दाते बरनि न साकउ गुण अंगा ॥५॥

मुकंद मनोहर लखमी नाराइण ॥ द्रोपती लजा निवारि उधारण ॥ कमलाकंत करहि कंतूहल अनद बिनोदी निहसंगा ॥६॥

अमोघ दरसन आजूनी स्मभउ ॥ अकाल मूरति जिसु कदे नाही खउ ॥ अबिनासी अबिगत अगोचर सभु किछु तुझ ही है लगा ॥७॥

स्रीरंग बैकुंठ के वासी ॥ मछु कछु कूरमु आगिआ अउतरासी ॥ केसव चलत करहि निराले कीता लोड़हि सो होइगा ॥८॥

निराहारी निरवैरु समाइआ ॥ धारि खेलु चतुरभुजु कहाइआ ॥ सावल सुंदर रूप बणावहि बेणु सुनत सभ मोहैगा ॥९॥

बनमाला बिभूखन कमल नैन ॥ सुंदर कुंडल मुकट बैन ॥ संख चक्र गदा है धारी महा सारथी सतसंगा ॥१०॥

पीत पीत्मबर त्रिभवण धणी ॥ जगंनाथु गोपालु मुखि भणी ॥ सारिंगधर भगवान बीठुला मै गणत न आवै सरबंगा ॥११॥

निहकंटकु निहकेवलु कहीऐ ॥ धनंजै जलि थलि है महीऐ ॥ मिरत लोक पइआल समीपत असथिर थानु जिसु है अभगा ॥१२॥

पतित पावन दुख भै भंजनु ॥ अहंकार निवारणु है भव खंडनु ॥ भगती तोखित दीन क्रिपाला गुणे न कित ही है भिगा ॥१३॥

निरंकारु अछल अडोलो ॥ जोति सरूपी सभु जगु मउलो ॥ सो मिलै जिसु आपि मिलाए आपहु कोइ न पावैगा ॥१४॥

आपे गोपी आपे काना ॥ आपे गऊ चरावै बाना ॥ आपि उपावहि आपि खपावहि तुधु लेपु नही इकु तिलु रंगा ॥१५॥

एक जीह गुण कवन बखानै ॥ सहस फनी सेख अंतु न जानै ॥ नवतन नाम जपै दिनु राती इकु गुणु नाही प्रभ कहि संगा ॥१६॥

ओट गही जगत पित सरणाइआ ॥ भै भइआनक जमदूत दुतर है माइआ ॥ होहु क्रिपाल इछा करि राखहु साध संतन कै संगि संगा ॥१७॥

द्रिसटिमान है सगल मिथेना ॥ इकु मागउ दानु गोबिद संत रेना ॥ मसतकि लाइ परम पदु पावउ जिसु प्रापति सो पावैगा ॥१८॥

जिन कउ क्रिपा करी सुखदाते ॥ तिन साधू चरण लै रिदै पराते ॥ सगल नाम निधानु तिन पाइआ अनहद सबद मनि वाजंगा ॥१९॥

किरतम नाम कथे तेरे जिहबा ॥ सति नामु तेरा परा पूरबला ॥ कहु नानक भगत पए सरणाई देहु दरसु मनि रंगु लगा ॥२०॥

तेरी गति मिति तूहै जाणहि ॥ तू आपे कथहि तै आपि वखाणहि ॥ नानक दासु दासन को करीअहु हरि भावै दासा राखु संगा ॥२१॥२॥११॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1083) मारू महला ५ ॥
अलह अगम खुदाई बंदे ॥ छोडि खिआल दुनीआ के धंधे ॥ होइ पै खाक फकीर मुसाफरु इहु दरवेसु कबूलु दरा ॥१॥

सचु निवाज यकीन मुसला ॥ मनसा मारि निवारिहु आसा ॥ देह मसीति मनु मउलाणा कलम खुदाई पाकु खरा ॥२॥

सरा सरीअति ले कमावहु ॥ तरीकति तरक खोजि टोलावहु ॥ मारफति मनु मारहु अबदाला मिलहु हकीकति जितु फिरि न मरा ॥३॥

कुराणु कतेब दिल माहि कमाही ॥ दस अउरात रखहु बद राही ॥ पंच मरद सिदकि ले बाधहु खैरि सबूरी कबूल परा ॥४॥

मका मिहर रोजा पै खाका ॥ भिसतु पीर लफज कमाइ अंदाजा ॥ हूर नूर मुसकु खुदाइआ बंदगी अलह आला हुजरा ॥५॥

सचु कमावै सोई काजी ॥ जो दिलु सोधै सोई हाजी ॥ सो मुला मलऊन निवारै सो दरवेसु जिसु सिफति धरा ॥६॥

सभे वखत सभे करि वेला ॥ खालकु यादि दिलै महि मउला ॥ तसबी यादि करहु दस मरदनु सुंनति सीलु बंधानि बरा ॥७॥

दिल महि जानहु सभ फिलहाला ॥ खिलखाना बिरादर हमू जंजाला ॥ मीर मलक उमरे फानाइआ एक मुकाम खुदाइ दरा ॥८॥

अवलि सिफति दूजी साबूरी ॥ तीजै हलेमी चउथै खैरी ॥ पंजवै पंजे इकतु मुकामै एहि पंजि वखत तेरे अपरपरा ॥९॥

सगली जानि करहु मउदीफा ॥ बद अमल छोडि करहु हथि कूजा ॥ खुदाइ एकु बुझि देवहु बांगां बुरगू बरखुरदार खरा ॥१०॥

हकु हलालु बखोरहु खाणा ॥ दिल दरीआउ धोवहु मैलाणा ॥ पीरु पछाणै भिसती सोई अजराईलु न दोज ठरा ॥११॥

काइआ किरदार अउरत यकीना ॥ रंग तमासे माणि हकीना ॥ नापाक पाकु करि हदूरि हदीसा साबत सूरति दसतार सिरा ॥१२॥

मुसलमाणु मोम दिलि होवै ॥ अंतर की मलु दिल ते धोवै ॥ दुनीआ रंग न आवै नेड़ै जिउ कुसम पाटु घिउ पाकु हरा ॥१३॥

जा कउ मिहर मिहर मिहरवाना ॥ सोई मरदु मरदु मरदाना ॥ सोई सेखु मसाइकु हाजी सो बंदा जिसु नजरि नरा ॥१४॥

कुदरति कादर करण करीमा ॥ सिफति मुहबति अथाह रहीमा ॥ हकु हुकमु सचु खुदाइआ बुझि नानक बंदि खलास तरा ॥१५॥३॥१२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1084) मारू महला ५ ॥
पारब्रहम सभ ऊच बिराजे ॥ आपे थापि उथापे साजे ॥ प्रभ की सरणि गहत सुखु पाईऐ किछु भउ न विआपै बाल का ॥१॥

गरभ अगनि महि जिनहि उबारिआ ॥ रकत किरम महि नही संघारिआ ॥ अपना सिमरनु दे प्रतिपालिआ ओहु सगल घटा का मालका ॥२॥

चरण कमल सरणाई आइआ ॥ साधसंगि है हरि जसु गाइआ ॥ जनम मरण सभि दूख निवारे जपि हरि हरि भउ नही काल का ॥३॥

समरथ अकथ अगोचर देवा ॥ जीअ जंत सभि ता की सेवा ॥ अंडज जेरज सेतज उतभुज बहु परकारी पालका ॥४॥

तिसहि परापति होइ निधाना ॥ राम नाम रसु अंतरि माना ॥ करु गहि लीने अंध कूप ते विरले केई सालका ॥५॥

आदि अंति मधि प्रभु सोई ॥ आपे करता करे सु होई ॥ भ्रमु भउ मिटिआ साधसंग ते दालिद न कोई घालका ॥६॥

ऊतम बाणी गाउ गोपाला ॥ साधसंगति की मंगहु रवाला ॥ बासन मेटि निबासन होईऐ कलमल सगले जालका ॥७॥

संता की इह रीति निराली ॥ पारब्रहमु करि देखहि नाली ॥ सासि सासि आराधनि हरि हरि किउ सिमरत कीजै आलका ॥८॥

जह देखा तह अंतरजामी ॥ निमख न विसरहु प्रभ मेरे सुआमी ॥ सिमरि सिमरि जीवहि तेरे दासा बनि जलि पूरन थालका ॥९॥

तती वाउ न ता कउ लागै ॥ सिमरत नामु अनदिनु जागै ॥ अनद बिनोद करे हरि सिमरनु तिसु माइआ संगि न तालका ॥१०॥

रोग सोग दूख तिसु नाही ॥ साधसंगि हरि कीरतनु गाही ॥ आपणा नामु देहि प्रभ प्रीतम सुणि बेनंती खालका ॥११॥

नाम रतनु तेरा है पिआरे ॥ रंगि रते तेरै दास अपारे ॥ तेरै रंगि रते तुधु जेहे विरले केई भालका ॥१२॥

तिन की धूड़ि मांगै मनु मेरा ॥ जिन विसरहि नाही काहू बेरा ॥ तिन कै संगि परम पदु पाई सदा संगी हरि नालका ॥१३॥

साजनु मीतु पिआरा सोई ॥ एकु द्रिड़ाए दुरमति खोई ॥ कामु क्रोधु अहंकारु तजाए तिसु जन कउ उपदेसु निरमालका ॥१४॥

तुधु विणु नाही कोई मेरा ॥ गुरि पकड़ाए प्रभ के पैरा ॥ हउ बलिहारी सतिगुर पूरे जिनि खंडिआ भरमु अनालका ॥१५॥

सासि सासि प्रभु बिसरै नाही ॥ आठ पहर हरि हरि कउ धिआई ॥ नानक संत तेरै रंगि राते तू समरथु वडालका ॥१६॥४॥१३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1085) मारू महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
चरन कमल हिरदै नित धारी ॥ गुरु पूरा खिनु खिनु नमसकारी ॥ तनु मनु अरपि धरी सभु आगै जग महि नामु सुहावणा ॥१॥

सो ठाकुरु किउ मनहु विसारे ॥ जीउ पिंडु दे साजि सवारे ॥ सासि गरासि समाले करता कीता अपणा पावणा ॥२॥

जा ते बिरथा कोऊ नाही ॥ आठ पहर हरि रखु मन माही ॥ साधसंगि भजु अचुत सुआमी दरगह सोभा पावणा ॥३॥

चारि पदारथ असट दसा सिधि ॥ नामु निधानु सहज सुखु नउ निधि ॥ सरब कलिआण जे मन महि चाहहि मिलि साधू सुआमी रावणा ॥४॥

सासत सिम्रिति बेद वखाणी ॥ जनमु पदारथु जीतु पराणी ॥ कामु क्रोधु निंदा परहरीऐ हरि रसना नानक गावणा ॥५॥

जिसु रूपु न रेखिआ कुलु नही जाती ॥ पूरन पूरि रहिआ दिनु राती ॥ जो जो जपै सोई वडभागी बहुड़ि न जोनी पावणा ॥६॥

जिस नो बिसरै पुरखु बिधाता ॥ जलता फिरै रहै नित ताता ॥ अकिरतघणै कउ रखै न कोई नरक घोर महि पावणा ॥७॥

जीउ प्राण तनु धनु जिनि साजिआ ॥ मात गरभ महि राखि निवाजिआ ॥ तिस सिउ प्रीति छाडि अन राता काहू सिरै न लावणा ॥८॥

धारि अनुग्रहु सुआमी मेरे ॥ घटि घटि वसहि सभन कै नेरे ॥ हाथि हमारै कछूऐ नाही जिसु जणाइहि तिसै जणावणा ॥९॥

जा कै मसतकि धुरि लिखि पाइआ ॥ तिस ही पुरख न विआपै माइआ ॥ नानक दास सदा सरणाई दूसर लवै न लावणा ॥१०॥

आगिआ दूख सूख सभि कीने ॥ अम्रित नामु बिरलै ही चीने ॥ ता की कीमति कहणु न जाई जत कत ओही समावणा ॥११॥

सोई भगतु सोई वड दाता ॥ सोई पूरन पुरखु बिधाता ॥ बाल सहाई सोई तेरा जो तेरै मनि भावणा ॥१२॥

मिरतु दूख सूख लिखि पाए ॥ तिलु नही बधहि घटहि न घटाए ॥ सोई होइ जि करते भावै कहि कै आपु वञावणा ॥१३॥

अंध कूप ते सेई काढे ॥ जनम जनम के टूटे गांढे ॥ किरपा धारि रखे करि अपुने मिलि साधू गोबिंदु धिआवणा ॥१४॥

तेरी कीमति कहणु न जाई ॥ अचरज रूपु वडी वडिआई ॥ भगति दानु मंगै जनु तेरा नानक बलि बलि जावणा ॥१५॥१॥१४॥२२॥२४॥२॥१४॥६२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1086) मारू वार महला ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1086) सलोकु मः १ ॥
विणु गाहक गुणु वेचीऐ तउ गुणु सहघो जाइ ॥ गुण का गाहकु जे मिलै तउ गुणु लाख विकाइ ॥ गुण ते गुण मिलि पाईऐ जे सतिगुर माहि समाइ ॥ मोलि अमोलु न पाईऐ वणजि न लीजै हाटि ॥ नानक पूरा तोलु है कबहु न होवै घाटि ॥१॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1087) मः ४ ॥
नाम विहूणे भरमसहि आवहि जावहि नीत ॥ इकि बांधे इकि ढीलिआ इकि सुखीए हरि प्रीति ॥ नानक सचा मंनि लै सचु करणी सचु रीति ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1087) पउड़ी ॥
गुर ते गिआनु पाइआ अति खड़गु करारा ॥ दूजा भ्रमु गड़ु कटिआ मोहु लोभु अहंकारा ॥ हरि का नामु मनि वसिआ गुर सबदि वीचारा ॥ सच संजमि मति ऊतमा हरि लगा पिआरा ॥ सभु सचो सचु वरतदा सचु सिरजणहारा ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1087) सलोकु मः ३ ॥
केदारा रागा विचि जाणीऐ भाई सबदे करे पिआरु ॥ सतसंगति सिउ मिलदो रहै सचे धरे पिआरु ॥ विचहु मलु कटे आपणी कुला का करे उधारु ॥ गुणा की रासि संग्रहै अवगण कढै विडारि ॥ नानक मिलिआ सो जाणीऐ गुरू न छोडै आपणा दूजै न धरे पिआरु ॥१॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1087) मः ४ ॥
सागरु देखउ डरि मरउ भै तेरै डरु नाहि ॥ गुर कै सबदि संतोखीआ नानक बिगसा नाइ ॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 1087) मः ४ ॥
चड़ि बोहिथै चालसउ सागरु लहरी देइ ॥ ठाक न सचै बोहिथै जे गुरु धीरक देइ ॥ तितु दरि जाइ उतारीआ गुरु दिसै सावधानु ॥ नानक नदरी पाईऐ दरगह चलै मानु ॥३॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1087) पउड़ी ॥
निहकंटक राजु भुंचि तू गुरमुखि सचु कमाई ॥ सचै तखति बैठा निआउ करि सतसंगति मेलि मिलाई ॥ सचा उपदेसु हरि जापणा हरि सिउ बणि आई ॥ ऐथै सुखदाता मनि वसै अंति होइ सखाई ॥ हरि सिउ प्रीति ऊपजी गुरि सोझी पाई ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1087) सलोकु मः १ ॥
भूली भूली मै फिरी पाधरु कहै न कोइ ॥ पूछहु जाइ सिआणिआ दुखु काटै मेरा कोइ ॥ सतिगुरु साचा मनि वसै साजनु उत ही ठाइ ॥ नानक मनु त्रिपतासीऐ सिफती साचै नाइ ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1087) मः ३ ॥
आपे करणी कार आपि आपे करे रजाइ ॥ आपे किस ही बखसि लए आपे कार कमाइ ॥ नानक चानणु गुर मिले दुख बिखु जाली नाइ ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1087) पउड़ी ॥
माइआ वेखि न भुलु तू मनमुख मूरखा ॥ चलदिआ नालि न चलई सभु झूठु दरबु लखा ॥ अगिआनी अंधु न बूझई सिर ऊपरि जम खड़गु कलखा ॥ गुर परसादी उबरे जिन हरि रसु चखा ॥ आपि कराए करे आपि आपे हरि रखा ॥३॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1088) सलोकु मः ३ ॥
जिना गुरु नही भेटिआ भै की नाही बिंद ॥ आवणु जावणु दुखु घणा कदे न चूकै चिंद ॥ कापड़ जिवै पछोड़ीऐ घड़ी मुहत घड़ीआलु ॥ नानक सचे नाम बिनु सिरहु न चुकै जंजालु ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1088) मः ३ ॥
त्रिभवण ढूढी सजणा हउमै बुरी जगति ॥ ना झुरु हीअड़े सचु चउ नानक सचो सचु ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1088) पउड़ी ॥
गुरमुखि आपे बखसिओनु हरि नामि समाणे ॥ आपे भगती लाइओनु गुर सबदि नीसाणे ॥ सनमुख सदा सोहणे सचै दरि जाणे ॥ ऐथै ओथै मुकति है जिन राम पछाणे ॥ धंनु धंनु से जन जिन हरि सेविआ तिन हउ कुरबाणे ॥४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1088) सलोकु मः १ ॥
महल कुचजी मड़वड़ी काली मनहु कसुध ॥ जे गुण होवनि ता पिरु रवै नानक अवगुण मुंध ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1088) मः १ ॥
साचु सील सचु संजमी सा पूरी परवारि ॥ नानक अहिनिसि सदा भली पिर कै हेति पिआरि ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1088) पउड़ी ॥
आपणा आपु पछाणिआ नामु निधानु पाइआ ॥ किरपा करि कै आपणी गुर सबदि मिलाइआ ॥ गुर की बाणी निरमली हरि रसु पीआइआ ॥ हरि रसु जिनी चाखिआ अन रस ठाकि रहाइआ ॥ हरि रसु पी सदा त्रिपति भए फिरि त्रिसना भुख गवाइआ ॥५॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1088) सलोकु मः ३ ॥
पिर खुसीए धन रावीए धन उरि नामु सीगारु ॥ नानक धन आगै खड़ी सोभावंती नारि ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1088) मः १ ॥
ससुरै पेईऐ कंत की कंतु अगमु अथाहु ॥ नानक धंनु सोहागणी जो भावहि वेपरवाह ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1088) पउड़ी ॥
तखति राजा सो बहै जि तखतै लाइक होई ॥ जिनी सचु पछाणिआ सचु राजे सेई ॥ एहि भूपति राजे न आखीअहि दूजै भाइ दुखु होई ॥ कीता किआ सालाहीऐ जिसु जादे बिलम न होई ॥ निहचलु सचा एकु है गुरमुखि बूझै सु निहचलु होई ॥६॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1088) सलोकु मः ३ ॥
सभना का पिरु एकु है पिर बिनु खाली नाहि ॥ नानक से सोहागणी जि सतिगुर माहि समाहि ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1088) मः ३ ॥
मन के अधिक तरंग किउ दरि साहिब छुटीऐ ॥ जे राचै सच रंगि गूड़ै रंगि अपार कै ॥ नानक गुर परसादी छुटीऐ जे चितु लगै सचि ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1088) पउड़ी ॥
हरि का नामु अमोलु है किउ कीमति कीजै ॥ आपे स्रिसटि सभ साजीअनु आपे वरतीजै ॥ गुरमुखि सदा सलाहीऐ सचु कीमति कीजै ॥ गुर सबदी कमलु बिगासिआ इव हरि रसु पीजै ॥ आवण जाणा ठाकिआ सुखि सहजि सवीजै ॥७॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1089) सलोकु मः १ ॥
ना मैला ना धुंधला ना भगवा ना कचु ॥ नानक लालो लालु है सचै रता सचु ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1089) मः ३ ॥
सहजि वणसपति फुलु फलु भवरु वसै भै खंडि ॥ नानक तरवरु एकु है एको फुलु भिरंगु ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1089) पउड़ी ॥
जो जन लूझहि मनै सिउ से सूरे परधाना ॥ हरि सेती सदा मिलि रहे जिनी आपु पछाना ॥ गिआनीआ का इहु महतु है मन माहि समाना ॥ हरि जीउ का महलु पाइआ सचु लाइ धिआना ॥ जिन गुर परसादी मनु जीतिआ जगु तिनहि जिताना ॥८॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1089) सलोकु मः ३ ॥
जोगी होवा जगि भवा घरि घरि भीखिआ लेउ ॥ दरगह लेखा मंगीऐ किसु किसु उतरु देउ ॥ भिखिआ नामु संतोखु मड़ी सदा सचु है नालि ॥ भेखी हाथ न लधीआ सभ बधी जमकालि ॥ नानक गला झूठीआ सचा नामु समालि ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1089) मः ३ ॥
जितु दरि लेखा मंगीऐ सो दरु सेविहु न कोइ ॥ ऐसा सतिगुरु लोड़ि लहु जिसु जेवडु अवरु न कोइ ॥ तिसु सरणाई छूटीऐ लेखा मंगै न कोइ ॥ सचु द्रिड़ाए सचु द्रिड़ु सचा ओहु सबदु देइ ॥ हिरदै जिस दै सचु है तनु मनु भी सचा होइ ॥ नानक सचै हुकमि मंनिऐ सची वडिआई देइ ॥ सचे माहि समावसी जिस नो नदरि करेइ ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1089) पउड़ी ॥
सूरे एहि न आखीअहि अहंकारि मरहि दुखु पावहि ॥ अंधे आपु न पछाणनी दूजै पचि जावहि ॥ अति करोध सिउ लूझदे अगै पिछै दुखु पावहि ॥ हरि जीउ अहंकारु न भावई वेद कूकि सुणावहि ॥ अहंकारि मुए से विगती गए मरि जनमहि फिरि आवहि ॥९॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1089) सलोकु मः ३ ॥
कागउ होइ न ऊजला लोहे नाव न पारु ॥ पिरम पदारथु मंनि लै धंनु सवारणहारु ॥ हुकमु पछाणै ऊजला सिरि कासट लोहा पारि ॥ त्रिसना छोडै भै वसै नानक करणी सारु ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1089) मः ३ ॥
मारू मारण जो गए मारि न सकहि गवार ॥ नानक जे इहु मारीऐ गुर सबदी वीचारि ॥ एहु मनु मारिआ ना मरै जे लोचै सभु कोइ ॥ नानक मन ही कउ मनु मारसी जे सतिगुरु भेटै सोइ ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1090) पउड़ी ॥
दोवै तरफा उपाईओनु विचि सकति सिव वासा ॥ सकती किनै न पाइओ फिरि जनमि बिनासा ॥ गुरि सेविऐ साति पाईऐ जपि सास गिरासा ॥ सिम्रिति सासत सोधि देखु ऊतम हरि दासा ॥ नानक नाम बिना को थिरु नही नामे बलि जासा ॥१०॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1090) सलोकु मः ३ ॥
होवा पंडितु जोतकी वेद पड़ा मुखि चारि ॥ नव खंड मधे पूजीआ अपणै चजि वीचारि ॥ मतु सचा अखरु भुलि जाइ चउकै भिटै न कोइ ॥ झूठे चउके नानका सचा एको सोइ ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1090) मः ३ ॥
आपि उपाए करे आपि आपे नदरि करेइ ॥ आपे दे वडिआईआ कहु नानक सचा सोइ ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1090) पउड़ी ॥
कंटकु कालु एकु है होरु कंटकु न सूझै ॥ अफरिओ जग महि वरतदा पापी सिउ लूझै ॥ गुर सबदी हरि भेदीऐ हरि जपि हरि बूझै ॥ सो हरि सरणाई छुटीऐ जो मन सिउ जूझै ॥ मनि वीचारि हरि जपु करे हरि दरगह सीझै ॥११॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1090) सलोकु मः १ ॥
हुकमि रजाई साखती दरगह सचु कबूलु ॥ साहिबु लेखा मंगसी दुनीआ देखि न भूलु ॥ दिल दरवानी जो करे दरवेसी दिलु रासि ॥ इसक मुहबति नानका लेखा करते पासि ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1090) मः १ ॥
अलगउ जोइ मधूकड़उ सारंगपाणि सबाइ ॥ हीरै हीरा बेधिआ नानक कंठि सुभाइ ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1090) पउड़ी ॥
मनमुख कालु विआपदा मोहि माइआ लागे ॥ खिन महि मारि पछाड़सी भाइ दूजै ठागे ॥ फिरि वेला हथि न आवई जम का डंडु लागे ॥ तिन जम डंडु न लगई जो हरि लिव जागे ॥ सभ तेरी तुधु छडावणी सभ तुधै लागे ॥१२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1090) सलोकु मः १ ॥
सरबे जोइ अगछमी दूखु घनेरो आथि ॥ कालरु लादसि सरु लाघणउ लाभु न पूंजी साथि ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1090) मः १ ॥
पूंजी साचउ नामु तू अखुटउ दरबु अपारु ॥ नानक वखरु निरमलउ धंनु साहु वापारु ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1090) मः १ ॥
पूरब प्रीति पिराणि लै मोटउ ठाकुरु माणि ॥ माथै ऊभै जमु मारसी नानक मेलणु नामि ॥३॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1090) पउड़ी ॥
आपे पिंडु सवारिओनु विचि नव निधि नामु ॥ इकि आपे भरमि भुलाइअनु तिन निहफल कामु ॥ इकनी गुरमुखि बुझिआ हरि आतम रामु ॥ इकनी सुणि कै मंनिआ हरि ऊतम कामु ॥ अंतरि हरि रंगु उपजिआ गाइआ हरि गुण नामु ॥१३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1090) सलोकु मः १ ॥
भोलतणि भै मनि वसै हेकै पाधर हीडु ॥ अति डाहपणि दुखु घणो तीने थाव भरीडु ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1091) मः १ ॥
मांदलु बेदि सि बाजणो घणो धड़ीऐ जोइ ॥ नानक नामु समालि तू बीजउ अवरु न कोइ ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1091) मः १ ॥
सागरु गुणी अथाहु किनि हाथाला देखीऐ ॥ वडा वेपरवाहु सतिगुरु मिलै त पारि पवा ॥ मझ भरि दुख बदुख ॥ नानक सचे नाम बिनु किसै न लथी भुख ॥३॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1091) पउड़ी ॥
जिनी अंदरु भालिआ गुर सबदि सुहावै ॥ जो इछनि सो पाइदे हरि नामु धिआवै ॥ जिस नो क्रिपा करे तिसु गुरु मिलै सो हरि गुण गावै ॥ धरम राइ तिन का मितु है जम मगि न पावै ॥ हरि नामु धिआवहि दिनसु राति हरि नामि समावै ॥१४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1091) सलोकु मः १ ॥
सुणीऐ एकु वखाणीऐ सुरगि मिरति पइआलि ॥ हुकमु न जाई मेटिआ जो लिखिआ सो नालि ॥ कउणु मूआ कउणु मारसी कउणु आवै कउणु जाइ ॥ कउणु रहसी नानका किस की सुरति समाइ ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1091) मः १ ॥
हउ मुआ मै मारिआ पउणु वहै दरीआउ ॥ त्रिसना थकी नानका जा मनु रता नाइ ॥ लोइण रते लोइणी कंनी सुरति समाइ ॥ जीभ रसाइणि चूनड़ी रती लाल लवाइ ॥ अंदरु मुसकि झकोलिआ कीमति कही न जाइ ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1091) पउड़ी ॥
इसु जुग महि नामु निधानु है नामो नालि चलै ॥ एहु अखुटु कदे न निखुटई खाइ खरचिउ पलै ॥ हरि जन नेड़ि न आवई जमकंकर जमकलै ॥ से साह सचे वणजारिआ जिन हरि धनु पलै ॥ हरि किरपा ते हरि पाईऐ जा आपि हरि घलै ॥१५॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 1091) सलोकु मः ३ ॥
मनमुख वापारै सार न जाणनी बिखु विहाझहि बिखु संग्रहहि बिख सिउ धरहि पिआरु ॥ बाहरहु पंडित सदाइदे मनहु मूरख गावार ॥ हरि सिउ चितु न लाइनी वादी धरनि पिआरु ॥ वादा कीआ करनि कहाणीआ कूड़ु बोलि करहि आहारु ॥ जग महि राम नामु हरि निरमला होरु मैला सभु आकारु ॥ नानक नामु न चेतनी होइ मैले मरहि गवार ॥१॥


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