पटी (महला 3), Patti (Mahalla 3) Path in Hindi Gurbani online


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रागु आसा महला ३ पटी
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

अयो अंङै सभु जगु आइआ काखै घंङै कालु भइआ ॥ रीरी लली पाप कमाणे पड़ि अवगण गुण वीसरिआ ॥१॥

मन ऐसा लेखा तूं की पड़िआ ॥ लेखा देणा तेरै सिरि रहिआ ॥१॥ रहाउ ॥

सिधंङाइऐ सिमरहि नाही नंनै ना तुधु नामु लइआ ॥ छछै छीजहि अहिनिसि मूड़े किउ छूटहि जमि पाकड़िआ ॥२॥

बबै बूझहि नाही मूड़े भरमि भुले तेरा जनमु गइआ ॥ अणहोदा नाउ धराइओ पाधा अवरा का भारु तुधु लइआ ॥३॥

जजै जोति हिरि लई तेरी मूड़े अंति गइआ पछुतावहिगा ॥ एकु सबदु तूं चीनहि नाही फिरि फिरि जूनी आवहिगा ॥४॥

तुधु सिरि लिखिआ सो पड़ु पंडित अवरा नो न सिखालि बिखिआ ॥ पहिला फाहा पइआ पाधे पिछो दे गलि चाटड़िआ ॥५॥

ससै संजमु गइओ मूड़े एकु दानु तुधु कुथाइ लइआ ॥ साई पुत्री जजमान की सा तेरी एतु धानि खाधै तेरा जनमु गइआ ॥६॥

ममै मति हिरि लई तेरी मूड़े हउमै वडा रोगु पइआ ॥ अंतर आतमै ब्रहमु न चीन्हिआ माइआ का मुहताजु भइआ ॥७॥

ककै कामि क्रोधि भरमिओहु मूड़े ममता लागे तुधु हरि विसरिआ ॥ पड़हि गुणहि तूं बहुतु पुकारहि विणु बूझे तूं डूबि मुआ ॥८॥

ततै तामसि जलिओहु मूड़े थथै थान भरिसटु होआ ॥ घघै घरि घरि फिरहि तूं मूड़े ददै दानु न तुधु लइआ ॥९॥

पपै पारि न पवही मूड़े परपंचि तूं पलचि रहिआ ॥ सचै आपि खुआइओहु मूड़े इहु सिरि तेरै लेखु पइआ ॥१०॥

भभै भवजलि डुबोहु मूड़े माइआ विचि गलतानु भइआ ॥ गुर परसादी एको जाणै एक घड़ी महि पारि पइआ ॥११॥

ववै वारी आईआ मूड़े वासुदेउ तुधु वीसरिआ ॥ एह वेला न लहसहि मूड़े फिरि तूं जम कै वसि पइआ ॥१२॥

झझै कदे न झूरहि मूड़े सतिगुर का उपदेसु सुणि तूं विखा ॥ सतिगुर बाझहु गुरु नही कोई निगुरे का है नाउ बुरा ॥१३॥

धधै धावत वरजि रखु मूड़े अंतरि तेरै निधानु पइआ ॥ गुरमुखि होवहि ता हरि रसु पीवहि जुगा जुगंतरि खाहि पइआ ॥१४॥

गगै गोबिदु चिति करि मूड़े गली किनै न पाइआ ॥ गुर के चरन हिरदै वसाइ मूड़े पिछले गुनह सभ बखसि लइआ ॥१५॥

हाहै हरि कथा बूझु तूं मूड़े ता सदा सुखु होई ॥ मनमुखि पड़हि तेता दुखु लागै विणु सतिगुर मुकति न होई ॥१६॥

रारै रामु चिति करि मूड़े हिरदै जिन्ह कै रवि रहिआ ॥ गुर परसादी जिन्ही रामु पछाता निरगुण रामु तिन्ही बूझि लहिआ ॥१७॥

तेरा अंतु न जाई लखिआ अकथु न जाई हरि कथिआ ॥ नानक जिन्ह कउ सतिगुरु मिलिआ तिन्ह का लेखा निबड़िआ ॥१८॥१॥२॥


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