Pt 6 - गुरू रामदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 6 - Guru Ramdas ji (Mahalla 4) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


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(राग गूजरी -- SGGS 494) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गूजरी महला ४ घरु ३ ॥
माई बाप पुत्र सभि हरि के कीए ॥ सभना कउ सनबंधु हरि करि दीए ॥१॥

हमरा जोरु सभु रहिओ मेरे बीर ॥ हरि का तनु मनु सभु हरि कै वसि है सरीर ॥१॥ रहाउ ॥

भगत जना कउ सरधा आपि हरि लाई ॥ विचे ग्रिसत उदास रहाई ॥२॥

जब अंतरि प्रीति हरि सिउ बनि आई ॥ तब जो किछु करे सु मेरे हरि प्रभ भाई ॥३॥

जितु कारै कमि हम हरि लाए ॥ सो हम करह जु आपि कराए ॥४॥

जिन की भगति मेरे प्रभ भाई ॥ ते जन नानक राम नाम लिव लाई ॥५॥१॥७॥१६॥

(राग गूजरी -- SGGS 506) गूजरी महला ४ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि बिनु जीअरा रहि न सकै जिउ बालकु खीर अधारी ॥ अगम अगोचर प्रभु गुरमुखि पाईऐ अपुने सतिगुर कै बलिहारी ॥१॥

मन रे हरि कीरति तरु तारी ॥ गुरमुखि नामु अम्रित जलु पाईऐ जिन कउ क्रिपा तुमारी ॥ रहाउ ॥ सनक सनंदन नारद मुनि सेवहि अनदिनु जपत रहहि बनवारी ॥ सरणागति प्रहलाद जन आए तिन की पैज सवारी ॥२॥

अलख निरंजनु एको वरतै एका जोति मुरारी ॥ सभि जाचिक तू एको दाता मागहि हाथ पसारी ॥३॥

भगत जना की ऊतम बाणी गावहि अकथ कथा नित निआरी ॥ सफल जनमु भइआ तिन केरा आपि तरे कुल तारी ॥४॥

मनमुख दुबिधा दुरमति बिआपे जिन अंतरि मोह गुबारी ॥ संत जना की कथा न भावै ओइ डूबे सणु परवारी ॥५॥

निंदकु निंदा करि मलु धोवै ओहु मलभखु माइआधारी ॥ संत जना की निंदा विआपे ना उरवारि न पारी ॥६॥

एहु परपंचु खेलु कीआ सभु करतै हरि करतै सभ कल धारी ॥ हरि एको सूतु वरतै जुग अंतरि सूतु खिंचै एकंकारी ॥७॥

रसनि रसनि रसि गावहि हरि गुण रसना हरि रसु धारी ॥ नानक हरि बिनु अवरु न मागउ हरि रस प्रीति पिआरी ॥८॥१॥७॥

(राग देवगंधारी -- SGGS 527) ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
रागु देवगंधारी महला ४ घरु १ ॥
सेवक जन बने ठाकुर लिव लागे ॥ जो तुमरा जसु कहते गुरमति तिन मुख भाग सभागे ॥१॥ रहाउ ॥

टूटे माइआ के बंधन फाहे हरि राम नाम लिव लागे ॥ हमरा मनु मोहिओ गुर मोहनि हम बिसम भई मुखि लागे ॥१॥

सगली रैणि सोई अंधिआरी गुर किंचत किरपा जागे ॥ जन नानक के प्रभ सुंदर सुआमी मोहि तुम सरि अवरु न लागे ॥२॥१॥

(राग देवगंधारी -- SGGS 527) देवगंधारी ॥
मेरो सुंदरु कहहु मिलै कितु गली ॥ हरि के संत बतावहु मारगु हम पीछै लागि चली ॥१॥ रहाउ ॥

प्रिअ के बचन सुखाने हीअरै इह चाल बनी है भली ॥ लटुरी मधुरी ठाकुर भाई ओह सुंदरि हरि ढुलि मिली ॥१॥

एको प्रिउ सखीआ सभ प्रिअ की जो भावै पिर सा भली ॥ नानकु गरीबु किआ करै बिचारा हरि भावै तितु राहि चली ॥२॥२॥

(राग देवगंधारी -- SGGS 527) देवगंधारी ॥
मेरे मन मुखि हरि हरि हरि बोलीऐ ॥ गुरमुखि रंगि चलूलै राती हरि प्रेम भीनी चोलीऐ ॥१॥ रहाउ ॥

हउ फिरउ दिवानी आवल बावल तिसु कारणि हरि ढोलीऐ ॥ कोई मेलै मेरा प्रीतमु पिआरा हम तिस की गुल गोलीऐ ॥१॥

सतिगुरु पुरखु मनावहु अपुना हरि अम्रितु पी झोलीऐ ॥ गुर प्रसादि जन नानक पाइआ हरि लाधा देह टोलीऐ ॥२॥३॥

(राग देवगंधारी -- SGGS 527) देवगंधारी ॥
अब हम चली ठाकुर पहि हारि ॥ जब हम सरणि प्रभू की आई राखु प्रभू भावै मारि ॥१॥ रहाउ ॥

लोकन की चतुराई उपमा ते बैसंतरि जारि ॥ कोई भला कहउ भावै बुरा कहउ हम तनु दीओ है ढारि ॥१॥

जो आवत सरणि ठाकुर प्रभु तुमरी तिसु राखहु किरपा धारि ॥ जन नानक सरणि तुमारी हरि जीउ राखहु लाज मुरारि ॥२॥४॥

(राग देवगंधारी -- SGGS 528) देवगंधारी ॥
हरि गुण गावै हउ तिसु बलिहारी ॥ देखि देखि जीवा साध गुर दरसनु जिसु हिरदै नामु मुरारी ॥१॥ रहाउ ॥

तुम पवित्र पावन पुरख प्रभ सुआमी हम किउ करि मिलह जूठारी ॥ हमरै जीइ होरु मुखि होरु होत है हम करमहीण कूड़िआरी ॥१॥

हमरी मुद्र नामु हरि सुआमी रिद अंतरि दुसट दुसटारी ॥ जिउ भावै तिउ राखहु सुआमी जन नानक सरणि तुम्हारी ॥२॥५॥

(राग देवगंधारी -- SGGS 528) देवगंधारी ॥
हरि के नाम बिना सुंदरि है नकटी ॥ जिउ बेसुआ के घरि पूतु जमतु है तिसु नामु परिओ है ध्रकटी ॥१॥ रहाउ ॥

जिन कै हिरदै नाहि हरि सुआमी ते बिगड़ रूप बेरकटी ॥ जिउ निगुरा बहु बाता जाणै ओहु हरि दरगह है भ्रसटी ॥१॥

जिन कउ दइआलु होआ मेरा सुआमी तिना साध जना पग चकटी ॥ नानक पतित पवित मिलि संगति गुर सतिगुर पाछै छुकटी ॥२॥६॥ छका १

(राग बिहागड़ा -- SGGS 537) रागु बिहागड़ा छंत महला ४ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि हरि नामु धिआईऐ मेरी जिंदुड़ीए गुरमुखि नामु अमोले राम ॥ हरि रसि बीधा हरि मनु पिआरा मनु हरि रसि नामि झकोले राम ॥ गुरमति मनु ठहराईऐ मेरी जिंदुड़ीए अनत न काहू डोले राम ॥ मन चिंदिअड़ा फलु पाइआ हरि प्रभु गुण नानक बाणी बोले राम ॥१॥

गुरमति मनि अम्रितु वुठड़ा मेरी जिंदुड़ीए मुखि अम्रित बैण अलाए राम ॥ अम्रित बाणी भगत जना की मेरी जिंदुड़ीए मनि सुणीऐ हरि लिव लाए राम ॥ चिरी विछुंना हरि प्रभु पाइआ गलि मिलिआ सहजि सुभाए राम ॥ जन नानक मनि अनदु भइआ है मेरी जिंदुड़ीए अनहत सबद वजाए राम ॥२॥

सखी सहेली मेरीआ मेरी जिंदुड़ीए कोई हरि प्रभु आणि मिलावै राम ॥ हउ मनु देवउ तिसु आपणा मेरी जिंदुड़ीए हरि प्रभ की हरि कथा सुणावै राम ॥ गुरमुखि सदा अराधि हरि मेरी जिंदुड़ीए मन चिंदिअड़ा फलु पावै राम ॥ नानक भजु हरि सरणागती मेरी जिंदुड़ीए वडभागी नामु धिआवै राम ॥३॥

करि किरपा प्रभ आइ मिलु मेरी जिंदुड़ीए गुरमति नामु परगासे राम ॥ हउ हरि बाझु उडीणीआ मेरी जिंदुड़ीए जिउ जल बिनु कमल उदासे राम ॥ गुरि पूरै मेलाइआ मेरी जिंदुड़ीए हरि सजणु हरि प्रभु पासे राम ॥ धनु धनु गुरू हरि दसिआ मेरी जिंदुड़ीए जन नानक नामि बिगासे राम ॥४॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 538) रागु बिहागड़ा महला ४ ॥
अम्रितु हरि हरि नामु है मेरी जिंदुड़ीए अम्रितु गुरमति पाए राम ॥ हउमै माइआ बिखु है मेरी जिंदुड़ीए हरि अम्रिति बिखु लहि जाए राम ॥ मनु सुका हरिआ होइआ मेरी जिंदुड़ीए हरि हरि नामु धिआए राम ॥ हरि भाग वडे लिखि पाइआ मेरी जिंदुड़ीए जन नानक नामि समाए राम ॥१॥

हरि सेती मनु बेधिआ मेरी जिंदुड़ीए जिउ बालक लगि दुध खीरे राम ॥ हरि बिनु सांति न पाईऐ मेरी जिंदुड़ीए जिउ चात्रिकु जल बिनु टेरे राम ॥ सतिगुर सरणी जाइ पउ मेरी जिंदुड़ीए गुण दसे हरि प्रभ केरे राम ॥ जन नानक हरि मेलाइआ मेरी जिंदुड़ीए घरि वाजे सबद घणेरे राम ॥२॥

मनमुखि हउमै विछुड़े मेरी जिंदुड़ीए बिखु बाधे हउमै जाले राम ॥ जिउ पंखी कपोति आपु बन्हाइआ मेरी जिंदुड़ीए तिउ मनमुख सभि वसि काले राम ॥ जो मोहि माइआ चितु लाइदे मेरी जिंदुड़ीए से मनमुख मूड़ बिताले राम ॥ जन त्राहि त्राहि सरणागती मेरी जिंदुड़ीए गुर नानक हरि रखवाले राम ॥३॥

हरि जन हरि लिव उबरे मेरी जिंदुड़ीए धुरि भाग वडे हरि पाइआ राम ॥ हरि हरि नामु पोतु है मेरी जिंदुड़ीए गुर खेवट सबदि तराइआ राम ॥ हरि हरि पुरखु दइआलु है मेरी जिंदुड़ीए गुर सतिगुर मीठ लगाइआ राम ॥ करि किरपा सुणि बेनती हरि हरि जन नानक नामु धिआइआ राम ॥४॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 539) बिहागड़ा महला ४ ॥
जगि सुक्रितु कीरति नामु है मेरी जिंदुड़ीए हरि कीरति हरि मनि धारे राम ॥ हरि हरि नामु पवितु है मेरी जिंदुड़ीए जपि हरि हरि नामु उधारे राम ॥ सभ किलविख पाप दुख कटिआ मेरी जिंदुड़ीए मलु गुरमुखि नामि उतारे राम ॥ वड पुंनी हरि धिआइआ जन नानक हम मूरख मुगध निसतारे राम ॥१॥

जो हरि नामु धिआइदे मेरी जिंदुड़ीए तिना पंचे वसगति आए राम ॥ अंतरि नव निधि नामु है मेरी जिंदुड़ीए गुरु सतिगुरु अलखु लखाए राम ॥ गुरि आसा मनसा पूरीआ मेरी जिंदुड़ीए हरि मिलिआ भुख सभ जाए राम ॥ धुरि मसतकि हरि प्रभि लिखिआ मेरी जिंदुड़ीए जन नानक हरि गुण गाए राम ॥२॥

हम पापी बलवंचीआ मेरी जिंदुड़ीए परद्रोही ठग माइआ राम ॥ वडभागी गुरु पाइआ मेरी जिंदुड़ीए गुरि पूरै गति मिति पाइआ राम ॥ गुरि अम्रितु हरि मुखि चोइआ मेरी जिंदुड़ीए फिरि मरदा बहुड़ि जीवाइआ राम ॥ जन नानक सतिगुर जो मिले मेरी जिंदुड़ीए तिन के सभ दुख गवाइआ राम ॥३॥

अति ऊतमु हरि नामु है मेरी जिंदुड़ीए जितु जपिऐ पाप गवाते राम ॥ पतित पवित्र गुरि हरि कीए मेरी जिंदुड़ीए चहु कुंडी चहु जुगि जाते राम ॥ हउमै मैलु सभ उतरी मेरी जिंदुड़ीए हरि अम्रिति हरि सरि नाते राम ॥ अपराधी पापी उधरे मेरी जिंदुड़ीए जन नानक खिनु हरि राते राम ॥४॥३॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 539) बिहागड़ा महला ४ ॥
हउ बलिहारी तिन्ह कउ मेरी जिंदुड़ीए जिन्ह हरि हरि नामु अधारो राम ॥ गुरि सतिगुरि नामु द्रिड़ाइआ मेरी जिंदुड़ीए बिखु भउजलु तारणहारो राम ॥ जिन इक मनि हरि धिआइआ मेरी जिंदुड़ीए तिन संत जना जैकारो राम ॥ नानक हरि जपि सुखु पाइआ मेरी जिंदुड़ीए सभि दूख निवारणहारो राम ॥१॥

सा रसना धनु धंनु है मेरी जिंदुड़ीए गुण गावै हरि प्रभ केरे राम ॥ ते स्रवन भले सोभनीक हहि मेरी जिंदुड़ीए हरि कीरतनु सुणहि हरि तेरे राम ॥ सो सीसु भला पवित्र पावनु है मेरी जिंदुड़ीए जो जाइ लगै गुर पैरे राम ॥ गुर विटहु नानकु वारिआ मेरी जिंदुड़ीए जिनि हरि हरि नामु चितेरे राम ॥२॥

ते नेत्र भले परवाणु हहि मेरी जिंदुड़ीए जो साधू सतिगुरु देखहि राम ॥ ते हसत पुनीत पवित्र हहि मेरी जिंदुड़ीए जो हरि जसु हरि हरि लेखहि राम ॥ तिसु जन के पग नित पूजीअहि मेरी जिंदुड़ीए जो मारगि धरम चलेसहि राम ॥ नानकु तिन विटहु वारिआ मेरी जिंदुड़ीए हरि सुणि हरि नामु मनेसहि राम ॥३॥

धरति पातालु आकासु है मेरी जिंदुड़ीए सभ हरि हरि नामु धिआवै राम ॥ पउणु पाणी बैसंतरो मेरी जिंदुड़ीए नित हरि हरि हरि जसु गावै राम ॥ वणु त्रिणु सभु आकारु है मेरी जिंदुड़ीए मुखि हरि हरि नामु धिआवै राम ॥ नानक ते हरि दरि पैन्हाइआ मेरी जिंदुड़ीए जो गुरमुखि भगति मनु लावै राम ॥४॥४॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 540) बिहागड़ा महला ४ ॥
जिन हरि हरि नामु न चेतिओ मेरी जिंदुड़ीए ते मनमुख मूड़ इआणे राम ॥ जो मोहि माइआ चितु लाइदे मेरी जिंदुड़ीए से अंति गए पछुताणे राम ॥ हरि दरगह ढोई ना लहन्हि मेरी जिंदुड़ीए जो मनमुख पापि लुभाणे राम ॥ जन नानक गुर मिलि उबरे मेरी जिंदुड़ीए हरि जपि हरि नामि समाणे राम ॥१॥

सभि जाइ मिलहु सतिगुरू कउ मेरी जिंदुड़ीए जो हरि हरि नामु द्रिड़ावै राम ॥ हरि जपदिआ खिनु ढिल न कीजई मेरी जिंदुड़ीए मतु कि जापै साहु आवै कि न आवै राम ॥ सा वेला सो मूरतु सा घड़ी सो मुहतु सफलु है मेरी जिंदुड़ीए जितु हरि मेरा चिति आवै राम ॥ जन नानक नामु धिआइआ मेरी जिंदुड़ीए जमकंकरु नेड़ि न आवै राम ॥२॥

हरि वेखै सुणै नित सभु किछु मेरी जिंदुड़ीए सो डरै जिनि पाप कमते राम ॥ जिसु अंतरु हिरदा सुधु है मेरी जिंदुड़ीए तिनि जनि सभि डर सुटि घते राम ॥ हरि निरभउ नामि पतीजिआ मेरी जिंदुड़ीए सभि झख मारनु दुसट कुपते राम ॥ गुरु पूरा नानकि सेविआ मेरी जिंदुड़ीए जिनि पैरी आणि सभि घते राम ॥३॥

सो ऐसा हरि नित सेवीऐ मेरी जिंदुड़ीए जो सभ दू साहिबु वडा राम ॥ जिन्ही इक मनि इकु अराधिआ मेरी जिंदुड़ीए तिना नाही किसै दी किछु चडा राम ॥ गुर सेविऐ हरि महलु पाइआ मेरी जिंदुड़ीए झख मारनु सभि निंदक घंडा राम ॥ जन नानक नामु धिआइआ मेरी जिंदुड़ीए धुरि मसतकि हरि लिखि छडा राम ॥४॥५॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 541) बिहागड़ा महला ४ ॥
सभि जीअ तेरे तूं वरतदा मेरे हरि प्रभ तूं जाणहि जो जीइ कमाईऐ राम ॥ हरि अंतरि बाहरि नालि है मेरी जिंदुड़ीए सभ वेखै मनि मुकराईऐ राम ॥ मनमुखा नो हरि दूरि है मेरी जिंदुड़ीए सभ बिरथी घाल गवाईऐ राम ॥ जन नानक गुरमुखि धिआइआ मेरी जिंदुड़ीए हरि हाजरु नदरी आईऐ राम ॥१॥

से भगत से सेवक मेरी जिंदुड़ीए जो प्रभ मेरे मनि भाणे राम ॥ से हरि दरगह पैनाइआ मेरी जिंदुड़ीए अहिनिसि साचि समाणे राम ॥ तिन कै संगि मलु उतरै मेरी जिंदुड़ीए रंगि राते नदरि नीसाणे राम ॥ नानक की प्रभ बेनती मेरी जिंदुड़ीए मिलि साधू संगि अघाणे राम ॥२॥

हे रसना जपि गोबिंदो मेरी जिंदुड़ीए जपि हरि हरि त्रिसना जाए राम ॥ जिसु दइआ करे मेरा पारब्रहमु मेरी जिंदुड़ीए तिसु मनि नामु वसाए राम ॥ जिसु भेटे पूरा सतिगुरू मेरी जिंदुड़ीए सो हरि धनु निधि पाए राम ॥ वडभागी संगति मिलै मेरी जिंदुड़ीए नानक हरि गुण गाए राम ॥३॥

थान थनंतरि रवि रहिआ मेरी जिंदुड़ीए पारब्रहमु प्रभु दाता राम ॥ ता का अंतु न पाईऐ मेरी जिंदुड़ीए पूरन पुरखु बिधाता राम ॥ सरब जीआ प्रतिपालदा मेरी जिंदुड़ीए जिउ बालक पित माता राम ॥ सहस सिआणप नह मिलै मेरी जिंदुड़ीए जन नानक गुरमुखि जाता राम ॥४॥६॥ छका १ ॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 548) बिहागड़े की वार महला ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 548) पउड़ी ॥
सभ तेरी तू सभस दा सभ तुधु उपाइआ ॥ सभना विचि तू वरतदा तू सभनी धिआइआ ॥ तिस दी तू भगति थाइ पाइहि जो तुधु मनि भाइआ ॥ जो हरि प्रभ भावै सो थीऐ सभि करनि तेरा कराइआ ॥ सलाहिहु हरि सभना ते वडा जो संत जनां की पैज रखदा आइआ ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 549) पउड़ी ॥
जीअ जंत सभि तेरिआ तू सभना रासि ॥ जिस नो तू देहि तिसु सभु किछु मिलै कोई होरु सरीकु नाही तुधु पासि ॥ तू इको दाता सभस दा हरि पहि अरदासि ॥ जिस दी तुधु भावै तिस दी तू मंनि लैहि सो जनु साबासि ॥ सभु तेरा चोजु वरतदा दुखु सुखु तुधु पासि ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 549) पउड़ी ॥
तेरी वडिआई तूहै जाणदा तुधु जेवडु अवरु न कोई ॥ तुधु जेवडु होरु सरीकु होवै ता आखीऐ तुधु जेवडु तूहै होई ॥ जिनि तू सेविआ तिनि सुखु पाइआ होरु तिस दी रीस करे किआ कोई ॥ तू भंनण घड़ण समरथु दातारु हहि तुधु अगै मंगण नो हथ जोड़ि खली सभ होई ॥ तुधु जेवडु दातारु मै कोई नदरि न आवई तुधु सभसै नो दानु दिता खंडी वरभंडी पाताली पुरई सभ लोई ॥३॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 550) पउड़ी ॥
जिस दै चिति वसिआ मेरा सुआमी तिस नो किउ अंदेसा किसै गलै दा लोड़ीऐ ॥ हरि सुखदाता सभना गला का तिस नो धिआइदिआ किव निमख घड़ी मुहु मोड़ीऐ ॥ जिनि हरि धिआइआ तिस नो सरब कलिआण होए नित संत जना की संगति जाइ बहीऐ मुहु जोड़ीऐ ॥ सभि दुख भुख रोग गए हरि सेवक के सभि जन के बंधन तोड़ीऐ ॥ हरि किरपा ते होआ हरि भगतु हरि भगत जना कै मुहि डिठै जगतु तरिआ सभु लोड़ीऐ ॥४॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 550) पउड़ी ॥
हरि आपे ठाकुरु सेवकु भगतु हरि आपे करे कराए ॥ हरि आपे वेखै विगसै आपे जितु भावै तितु लाए ॥ हरि इकना मारगि पाए आपे हरि इकना उझड़ि पाए ॥ हरि सचा साहिबु सचु तपावसु करि वेखै चलत सबाए ॥ गुर परसादि कहै जनु नानकु हरि सचे के गुण गाए ॥५॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 550) पउड़ी ॥
आपे धरती आपे है राहकु आपि जमाइ पीसावै ॥ आपि पकावै आपि भांडे देइ परोसै आपे ही बहि खावै ॥ आपे जलु आपे दे छिंगा आपे चुली भरावै ॥ आपे संगति सदि बहालै आपे विदा करावै ॥ जिस नो किरपालु होवै हरि आपे तिस नो हुकमु मनावै ॥६॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 551) मः ४ ॥
अंधे चानणु ता थीऐ जा सतिगुरु मिलै रजाइ ॥ बंधन तोड़ै सचि वसै अगिआनु अधेरा जाइ ॥ सभु किछु देखै तिसै का जिनि कीआ तनु साजि ॥ नानक सरणि करतार की करता राखै लाज ॥२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 551) पउड़ी ॥
जदहु आपे थाटु कीआ बहि करतै तदहु पुछि न सेवकु बीआ ॥ तदहु किआ को लेवै किआ को देवै जां अवरु न दूजा कीआ ॥ फिरि आपे जगतु उपाइआ करतै दानु सभना कउ दीआ ॥ आपे सेव बणाईअनु गुरमुखि आपे अम्रितु पीआ ॥ आपि निरंकार आकारु है आपे आपे करै सु थीआ ॥७॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 551) पउड़ी ॥
आपे वेद पुराण सभि सासत आपि कथै आपि भीजै ॥ आपे ही बहि पूजे करता आपि परपंचु करीजै ॥ आपि परविरति आपि निरविरती आपे अकथु कथीजै ॥ आपे पुंनु सभु आपि कराए आपि अलिपतु वरतीजै ॥ आपे सुखु दुखु देवै करता आपे बखस करीजै ॥८॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 552) पउड़ी ॥
आपे खाणी आपे बाणी आपे खंड वरभंड करे ॥ आपि समुंदु आपि है सागरु आपे ही विचि रतन धरे ॥ आपि लहाए करे जिसु किरपा जिस नो गुरमुखि करे हरे ॥ आपे भउजलु आपि है बोहिथा आपे खेवटु आपि तरे ॥ आपे करे कराए करता अवरु न दूजा तुझै सरे ॥९॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 552) पउड़ी ॥
आपे पारसु आपि धातु है आपि कीतोनु कंचनु ॥ आपे ठाकुरु सेवकु आपे आपे ही पाप खंडनु ॥ आपे सभि घट भोगवै सुआमी आपे ही सभु अंजनु ॥ आपि बिबेकु आपि सभु बेता आपे गुरमुखि भंजनु ॥ जनु नानकु सालाहि न रजै तुधु करते तू हरि सुखदाता वडनु ॥१०॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 552) सलोकु मः ४ ॥
बिनु सतिगुर सेवे जीअ के बंधना जेते करम कमाहि ॥ बिनु सतिगुर सेवे ठवर न पावही मरि जमहि आवहि जाहि ॥ बिनु सतिगुर सेवे फिका बोलणा नामु न वसै मनि आइ ॥ नानक बिनु सतिगुर सेवे जम पुरि बधे मारीअहि मुहि कालै उठि जाहि ॥१॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 552) पउड़ी ॥
आपे चाटसाल आपि है पाधा आपे चाटड़े पड़ण कउ आणे ॥ आपे पिता माता है आपे आपे बालक करे सिआणे ॥ इक थै पड़ि बुझै सभु आपे इक थै आपे करे इआणे ॥ इकना अंदरि महलि बुलाए जा आपि तेरै मनि सचे भाणे ॥ जिना आपे गुरमुखि दे वडिआई से जन सची दरगहि जाणे ॥११॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 553) पउड़ी ॥
आपे सुरि नर गण गंधरबा आपे खट दरसन की बाणी ॥ आपे सिव संकर महेसा आपे गुरमुखि अकथ कहाणी ॥ आपे जोगी आपे भोगी आपे संनिआसी फिरै बिबाणी ॥ आपै नालि गोसटि आपि उपदेसै आपे सुघड़ु सरूपु सिआणी ॥ आपणा चोजु करि वेखै आपे आपे सभना जीआ का है जाणी ॥१२॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 553) पउड़ी ॥
आपे तंतु परम तंतु सभु आपे आपे ठाकुरु दासु भइआ ॥ आपे दस अठ वरन उपाइअनु आपि ब्रहमु आपि राजु लइआ ॥ आपे मारे आपे छोडै आपे बखसे करे दइआ ॥ आपि अभुलु न भुलै कब ही सभु सचु तपावसु सचु थिआ ॥ आपे जिना बुझाए गुरमुखि तिन अंदरहु दूजा भरमु गइआ ॥१३॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 554) पउड़ी ॥
आपे अठसठि तीरथ करता आपि करे इसनानु ॥ आपे संजमि वरतै स्वामी आपि जपाइहि नामु ॥ आपि दइआलु होइ भउ खंडनु आपि करै सभु दानु ॥ जिस नो गुरमुखि आपि बुझाए सो सद ही दरगहि पाए मानु ॥ जिस दी पैज रखै हरि सुआमी सो सचा हरि जानु ॥१४॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 554) पउड़ी ॥
आपे भार अठारह बणसपति आपे ही फल लाए ॥ आपे माली आपि सभु सिंचै आपे ही मुहि पाए ॥ आपे करता आपे भुगता आपे देइ दिवाए ॥ आपे साहिबु आपे है राखा आपे रहिआ समाए ॥ जनु नानक वडिआई आखै हरि करते की जिस नो तिलु न तमाए ॥१५॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 554) पउड़ी ॥
जिस दा कीता सभु किछु होवै तिस नो परवाह नाही किसै केरी ॥ हरि जीउ तेरा दिता सभु को खावै सभ मुहताजी कढै तेरी ॥ जि तुध नो सालाहे सु सभु किछु पावै जिस नो किरपा निरंजन केरी ॥ सोई साहु सचा वणजारा जिनि वखरु लदिआ हरि नामु धनु तेरी ॥ सभि तिसै नो सालाहिहु संतहु जिनि दूजे भाव की मारि विडारी ढेरी ॥१६॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 555) पउड़ी ॥
जा आपि क्रिपालु होवै हरि सुआमी ता आपणां नाउ हरि आपि जपावै ॥ आपे सतिगुरु मेलि सुखु देवै आपणां सेवकु आपि हरि भावै ॥ आपणिआ सेवका की आपि पैज रखै आपणिआ भगता की पैरी पावै ॥ धरम राइ है हरि का कीआ हरि जन सेवक नेड़ि न आवै ॥ जो हरि का पिआरा सो सभना का पिआरा होर केती झखि झखि आवै जावै ॥१७॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 555) पउड़ी ॥
आपे सभ घट अंदरे आपे ही बाहरि ॥ आपे गुपतु वरतदा आपे ही जाहरि ॥ जुग छतीह गुबारु करि वरतिआ सुंनाहरि ॥ ओथै वेद पुरान न सासता आपे हरि नरहरि ॥ बैठा ताड़ी लाइ आपि सभ दू ही बाहरि ॥ आपणी मिति आपि जाणदा आपे ही गउहरु ॥१८॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 556) पउड़ी ॥
आपे दानां बीनिआ आपे परधानां ॥ आपे रूप दिखालदा आपे लाइ धिआनां ॥ आपे मोनी वरतदा आपे कथै गिआनां ॥ कउड़ा किसै न लगई सभना ही भाना ॥ उसतति बरनि न सकीऐ सद सद कुरबाना ॥१९॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 556) पउड़ी ॥
सभु किहु तेरै वसि है तू सचा साहु ॥ भगत रते रंगि एक कै पूरा वेसाहु ॥ अम्रितु भोजनु नामु हरि रजि रजि जन खाहु ॥ सभि पदारथ पाईअनि सिमरणु सचु लाहु ॥ संत पिआरे पारब्रहम नानक हरि अगम अगाहु ॥२०॥

(राग बिहागड़ा -- SGGS 556) पउड़ी ॥
आपे जंत उपाइअनु आपे आधारु ॥ आपे सूखमु भालीऐ आपे पासारु ॥ आपि इकाती होइ रहै आपे वड परवारु ॥ नानकु मंगै दानु हरि संता रेनारु ॥ होरु दातारु न सुझई तू देवणहारु ॥२१॥१॥ सुधु ॥

(राग वडहंसु -- SGGS 560) वडहंसु महला ४ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सेज एक एको प्रभु ठाकुरु ॥ गुरमुखि हरि रावे सुख सागरु ॥१॥

मै प्रभ मिलण प्रेम मनि आसा ॥ गुरु पूरा मेलावै मेरा प्रीतमु हउ वारि वारि आपणे गुरू कउ जासा ॥१॥ रहाउ ॥

मै अवगण भरपूरि सरीरे ॥ हउ किउ करि मिला अपणे प्रीतम पूरे ॥२॥

जिनि गुणवंती मेरा प्रीतमु पाइआ ॥ से मै गुण नाही हउ किउ मिला मेरी माइआ ॥३॥

हउ करि करि थाका उपाव बहुतेरे ॥ नानक गरीब राखहु हरि मेरे ॥४॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 561) वडहंसु महला ४ ॥
मेरा हरि प्रभु सुंदरु मै सार न जाणी ॥ हउ हरि प्रभ छोडि दूजै लोभाणी ॥१॥

हउ किउ करि पिर कउ मिलउ इआणी ॥ जो पिर भावै सा सोहागणि साई पिर कउ मिलै सिआणी ॥१॥ रहाउ ॥

मै विचि दोस हउ किउ करि पिरु पावा ॥ तेरे अनेक पिआरे हउ पिर चिति न आवा ॥२॥

जिनि पिरु राविआ सा भली सुहागणि ॥ से मै गुण नाही हउ किआ करी दुहागणि ॥३॥

नित सुहागणि सदा पिरु रावै ॥ मै करमहीण कब ही गलि लावै ॥४॥

तू पिरु गुणवंता हउ अउगुणिआरा ॥ मै निरगुण बखसि नानकु वेचारा ॥५॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 561) वडहंसु महला ४ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मै मनि वडी आस हरे किउ करि हरि दरसनु पावा ॥ हउ जाइ पुछा अपने सतगुरै गुर पुछि मनु मुगधु समझावा ॥ भूला मनु समझै गुर सबदी हरि हरि सदा धिआए ॥ नानक जिसु नदरि करे मेरा पिआरा सो हरि चरणी चितु लाए ॥१॥

हउ सभि वेस करी पिर कारणि जे हरि प्रभ साचे भावा ॥ सो पिरु पिआरा मै नदरि न देखै हउ किउ करि धीरजु पावा ॥ जिसु कारणि हउ सीगारु सीगारी सो पिरु रता मेरा अवरा ॥ नानक धनु धंनु धंनु सोहागणि जिनि पिरु राविअड़ा सचु सवरा ॥२॥

हउ जाइ पुछा सोहाग सुहागणि तुसी किउ पिरु पाइअड़ा प्रभु मेरा ॥ मै ऊपरि नदरि करी पिरि साचै मै छोडिअड़ा मेरा तेरा ॥ सभु मनु तनु जीउ करहु हरि प्रभ का इतु मारगि भैणे मिलीऐ ॥ आपनड़ा प्रभु नदरि करि देखै नानक जोति जोती रलीऐ ॥३॥

जो हरि प्रभ का मै देइ सनेहा तिसु मनु तनु अपणा देवा ॥ नित पखा फेरी सेव कमावा तिसु आगै पाणी ढोवां ॥ नित नित सेव करी हरि जन की जो हरि हरि कथा सुणाए ॥ धनु धंनु गुरू गुर सतिगुरु पूरा नानक मनि आस पुजाए ॥४॥

गुरु सजणु मेरा मेलि हरे जितु मिलि हरि नामु धिआवा ॥ गुर सतिगुर पासहु हरि गोसटि पूछां करि सांझी हरि गुण गावां ॥ गुण गावा नित नित सद हरि के मनु जीवै नामु सुणि तेरा ॥ नानक जितु वेला विसरै मेरा सुआमी तितु वेलै मरि जाइ जीउ मेरा ॥५॥

हरि वेखण कउ सभु कोई लोचै सो वेखै जिसु आपि विखाले ॥ जिस नो नदरि करे मेरा पिआरा सो हरि हरि सदा समाले ॥ सो हरि हरि नामु सदा सदा समाले जिसु सतगुरु पूरा मेरा मिलिआ ॥ नानक हरि जन हरि इके होए हरि जपि हरि सेती रलिआ ॥६॥१॥३॥

(राग वडहंसु -- SGGS 572) वडहंसु महला ४ छंत
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मेरै मनि मेरै मनि सतिगुरि प्रीति लगाई राम ॥ हरि हरि हरि हरि नामु मेरै मंनि वसाई राम ॥ हरि हरि नामु मेरै मंनि वसाई सभि दूख विसारणहारा ॥ वडभागी गुर दरसनु पाइआ धनु धनु सतिगुरू हमारा ॥ ऊठत बैठत सतिगुरु सेवह जितु सेविऐ सांति पाई ॥ मेरै मनि मेरै मनि सतिगुर प्रीति लगाई ॥१॥

हउ जीवा हउ जीवा सतिगुर देखि सरसे राम ॥ हरि नामो हरि नामु द्रिड़ाए जपि हरि हरि नामु विगसे राम ॥ जपि हरि हरि नामु कमल परगासे हरि नामु नवं निधि पाई ॥ हउमै रोगु गइआ दुखु लाथा हरि सहजि समाधि लगाई ॥ हरि नामु वडाई सतिगुर ते पाई सुखु सतिगुर देव मनु परसे ॥ हउ जीवा हउ जीवा सतिगुर देखि सरसे ॥२॥

कोई आणि कोई आणि मिलावै मेरा सतिगुरु पूरा राम ॥ हउ मनु तनु हउ मनु तनु देवा तिसु काटि सरीरा राम ॥ हउ मनु तनु काटि काटि तिसु देई जो सतिगुर बचन सुणाए ॥ मेरै मनि बैरागु भइआ बैरागी मिलि गुर दरसनि सुखु पाए ॥ हरि हरि क्रिपा करहु सुखदाते देहु सतिगुर चरन हम धूरा ॥ कोई आणि कोई आणि मिलावै मेरा सतिगुरु पूरा ॥३॥

गुर जेवडु गुर जेवडु दाता मै अवरु न कोई राम ॥ हरि दानो हरि दानु देवै हरि पुरखु निरंजनु सोई राम ॥ हरि हरि नामु जिनी आराधिआ तिन का दुखु भरमु भउ भागा ॥ सेवक भाइ मिले वडभागी जिन गुर चरनी मनु लागा ॥ कहु नानक हरि आपि मिलाए मिलि सतिगुर पुरख सुखु होई ॥ गुर जेवडु गुर जेवडु दाता मै अवरु न कोई ॥४॥१॥


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