Pt 17 - गुरू नानक देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 17 - Guru Nanak Dev ji (Mahalla 1) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग मारू काफी -- SGGS 1014) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मारू काफी महला १ घरु २ ॥
आवउ वंञउ डुमणी किती मित्र करेउ ॥ सा धन ढोई न लहै वाढी किउ धीरेउ ॥१॥

मैडा मनु रता आपनड़े पिर नालि ॥ हउ घोलि घुमाई खंनीऐ कीती हिक भोरी नदरि निहालि ॥१॥ रहाउ ॥

पेईअड़ै डोहागणी साहुरड़ै किउ जाउ ॥ मै गलि अउगण मुठड़ी बिनु पिर झूरि मराउ ॥२॥

पेईअड़ै पिरु समला साहुरड़ै घरि वासु ॥ सुखि सवंधि सोहागणी पिरु पाइआ गुणतासु ॥३॥

लेफु निहाली पट की कापड़ु अंगि बणाइ ॥ पिरु मुती डोहागणी तिन डुखी रैणि विहाइ ॥४॥

किती चखउ साडड़े किती वेस करेउ ॥ पिर बिनु जोबनु बादि गइअमु वाढी झूरेदी झूरेउ ॥५॥

सचे संदा सदड़ा सुणीऐ गुर वीचारि ॥ सचे सचा बैहणा नदरी नदरि पिआरि ॥६॥

गिआनी अंजनु सच का डेखै डेखणहारु ॥ गुरमुखि बूझै जाणीऐ हउमै गरबु निवारि ॥७॥

तउ भावनि तउ जेहीआ मू जेहीआ कितीआह ॥ नानक नाहु न वीछुड़ै तिन सचै रतड़ीआह ॥८॥१॥९॥

(राग मारू -- SGGS 1015) मारू महला १ ॥
ना भैणा भरजाईआ ना से ससुड़ीआह ॥ सचा साकु न तुटई गुरु मेले सहीआह ॥१॥

बलिहारी गुर आपणे सद बलिहारै जाउ ॥ गुर बिनु एता भवि थकी गुरि पिरु मेलिमु दितमु मिलाइ ॥१॥ रहाउ ॥

फुफी नानी मासीआ देर जेठानड़ीआह ॥ आवनि वंञनि ना रहनि पूर भरे पहीआह ॥२॥

मामे तै मामाणीआ भाइर बाप न माउ ॥ साथ लडे तिन नाठीआ भीड़ घणी दरीआउ ॥३॥

साचउ रंगि रंगावलो सखी हमारो कंतु ॥ सचि विछोड़ा ना थीऐ सो सहु रंगि रवंतु ॥४॥

सभे रुती चंगीआ जितु सचे सिउ नेहु ॥ सा धन कंतु पछाणिआ सुखि सुती निसि डेहु ॥५॥

पतणि कूके पातणी वंञहु ध्रुकि विलाड़ि ॥ पारि पवंदड़े डिठु मै सतिगुर बोहिथि चाड़ि ॥६॥

हिकनी लदिआ हिकि लदि गए हिकि भारे भर नालि ॥ जिनी सचु वणंजिआ से सचे प्रभ नालि ॥७॥

ना हम चंगे आखीअह बुरा न दिसै कोइ ॥ नानक हउमै मारीऐ सचे जेहड़ा सोइ ॥८॥२॥१०॥

(राग मारू -- SGGS 1015) मारू महला १ ॥
ना जाणा मूरखु है कोई ना जाणा सिआणा ॥ सदा साहिब कै रंगे राता अनदिनु नामु वखाणा ॥१॥

बाबा मूरखु हा नावै बलि जाउ ॥ तू करता तू दाना बीना तेरै नामि तराउ ॥१॥ रहाउ ॥

मूरखु सिआणा एकु है एक जोति दुइ नाउ ॥ मूरखा सिरि मूरखु है जि मंने नाही नाउ ॥२॥

गुर दुआरै नाउ पाईऐ बिनु सतिगुर पलै न पाइ ॥ सतिगुर कै भाणै मनि वसै ता अहिनिसि रहै लिव लाइ ॥३॥

राजं रंगं रूपं मालं जोबनु ते जूआरी ॥ हुकमी बाधे पासै खेलहि चउपड़ि एका सारी ॥४॥

जगि चतुरु सिआणा भरमि भुलाणा नाउ पंडित पड़हि गावारी ॥ नाउ विसारहि बेदु समालहि बिखु भूले लेखारी ॥५॥

कलर खेती तरवर कंठे बागा पहिरहि कजलु झरै ॥ एहु संसारु तिसै की कोठी जो पैसै सो गरबि जरै ॥६॥

रयति राजे कहा सबाए दुहु अंतरि सो जासी ॥ कहत नानकु गुर सचे की पउड़ी रहसी अलखु निवासी ॥७॥३॥११॥

(राग मारू -- SGGS 1020) मारू सोलहे महला १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
साचा सचु सोई अवरु न कोई ॥ जिनि सिरजी तिन ही फुनि गोई ॥ जिउ भावै तिउ राखहु रहणा तुम सिउ किआ मुकराई हे ॥१॥

आपि उपाए आपि खपाए ॥ आपे सिरि सिरि धंधै लाए ॥ आपे वीचारी गुणकारी आपे मारगि लाई हे ॥२॥

आपे दाना आपे बीना ॥ आपे आपु उपाइ पतीना ॥ आपे पउणु पाणी बैसंतरु आपे मेलि मिलाई हे ॥३॥

आपे ससि सूरा पूरो पूरा ॥ आपे गिआनि धिआनि गुरु सूरा ॥ कालु जालु जमु जोहि न साकै साचे सिउ लिव लाई हे ॥४॥

आपे पुरखु आपे ही नारी ॥ आपे पासा आपे सारी ॥ आपे पिड़ बाधी जगु खेलै आपे कीमति पाई हे ॥५॥

आपे भवरु फुलु फलु तरवरु ॥ आपे जलु थलु सागरु सरवरु ॥ आपे मछु कछु करणीकरु तेरा रूपु न लखणा जाई हे ॥६॥

आपे दिनसु आपे ही रैणी ॥ आपि पतीजै गुर की बैणी ॥ आदि जुगादि अनाहदि अनदिनु घटि घटि सबदु रजाई हे ॥७॥

आपे रतनु अनूपु अमोलो ॥ आपे परखे पूरा तोलो ॥ आपे किस ही कसि बखसे आपे दे लै भाई हे ॥८॥

आपे धनखु आपे सरबाणा ॥ आपे सुघड़ु सरूपु सिआणा ॥ कहता बकता सुणता सोई आपे बणत बणाई हे ॥९॥

पउणु गुरू पाणी पित जाता ॥ उदर संजोगी धरती माता ॥ रैणि दिनसु दुइ दाई दाइआ जगु खेलै खेलाई हे ॥१०॥

आपे मछुली आपे जाला ॥ आपे गऊ आपे रखवाला ॥ सरब जीआ जगि जोति तुमारी जैसी प्रभि फुरमाई हे ॥११॥

आपे जोगी आपे भोगी ॥ आपे रसीआ परम संजोगी ॥ आपे वेबाणी निरंकारी निरभउ ताड़ी लाई हे ॥१२॥

खाणी बाणी तुझहि समाणी ॥ जो दीसै सभ आवण जाणी ॥ सेई साह सचे वापारी सतिगुरि बूझ बुझाई हे ॥१३॥

सबदु बुझाए सतिगुरु पूरा ॥ सरब कला साचे भरपूरा ॥ अफरिओ वेपरवाहु सदा तू ना तिसु तिलु न तमाई हे ॥१४॥

कालु बिकालु भए देवाने ॥ सबदु सहज रसु अंतरि माने ॥ आपे मुकति त्रिपति वरदाता भगति भाइ मनि भाई हे ॥१५॥

आपि निरालमु गुर गम गिआना ॥ जो दीसै तुझ माहि समाना ॥ नानकु नीचु भिखिआ दरि जाचै मै दीजै नामु वडाई हे ॥१६॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1021) मारू महला १ ॥
आपे धरती धउलु अकासं ॥ आपे साचे गुण परगासं ॥ जती सती संतोखी आपे आपे कार कमाई हे ॥१॥

जिसु करणा सो करि करि वेखै ॥ कोइ न मेटै साचे लेखै ॥ आपे करे कराए आपे आपे दे वडिआई हे ॥२॥

पंच चोर चंचल चितु चालहि ॥ पर घर जोहहि घरु नही भालहि ॥ काइआ नगरु ढहै ढहि ढेरी बिनु सबदै पति जाई हे ॥३॥

गुर ते बूझै त्रिभवणु सूझै ॥ मनसा मारि मनै सिउ लूझै ॥ जो तुधु सेवहि से तुध ही जेहे निरभउ बाल सखाई हे ॥४॥

आपे सुरगु मछु पइआला ॥ आपे जोति सरूपी बाला ॥ जटा बिकट बिकराल सरूपी रूपु न रेखिआ काई हे ॥५॥

बेद कतेबी भेदु न जाता ॥ ना तिसु मात पिता सुत भ्राता ॥ सगले सैल उपाइ समाए अलखु न लखणा जाई हे ॥६॥

करि करि थाकी मीत घनेरे ॥ कोइ न काटै अवगुण मेरे ॥ सुरि नर नाथु साहिबु सभना सिरि भाइ मिलै भउ जाई हे ॥७॥

भूले चूके मारगि पावहि ॥ आपि भुलाइ तूहै समझावहि ॥ बिनु नावै मै अवरु न दीसै नावहु गति मिति पाई हे ॥८॥

गंगा जमुना केल केदारा ॥ कासी कांती पुरी दुआरा ॥ गंगा सागरु बेणी संगमु अठसठि अंकि समाई हे ॥९॥

आपे सिध साधिकु वीचारी ॥ आपे राजनु पंचा कारी ॥ तखति बहै अदली प्रभु आपे भरमु भेदु भउ जाई हे ॥१०॥

आपे काजी आपे मुला ॥ आपि अभुलु न कबहू भुला ॥ आपे मिहर दइआपति दाता ना किसै को बैराई हे ॥११॥

जिसु बखसे तिसु दे वडिआई ॥ सभसै दाता तिलु न तमाई ॥ भरपुरि धारि रहिआ निहकेवलु गुपतु प्रगटु सभ ठाई हे ॥१२॥

किआ सालाही अगम अपारै ॥ साचे सिरजणहार मुरारै ॥ जिस नो नदरि करे तिसु मेले मेलि मिलै मेलाई हे ॥१३॥

ब्रहमा बिसनु महेसु दुआरै ॥ ऊभे सेवहि अलख अपारै ॥ होर केती दरि दीसै बिललादी मै गणत न आवै काई हे ॥१४॥

साची कीरति साची बाणी ॥ होर न दीसै बेद पुराणी ॥ पूंजी साचु सचे गुण गावा मै धर होर न काई हे ॥१५॥

जुगु जुगु साचा है भी होसी ॥ कउणु न मूआ कउणु न मरसी ॥ नानकु नीचु कहै बेनंती दरि देखहु लिव लाई हे ॥१६॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1022) मारू महला १ ॥
दूजी दुरमति अंनी बोली ॥ काम क्रोध की कची चोली ॥ घरि वरु सहजु न जाणै छोहरि बिनु पिर नीद न पाई हे ॥१॥

अंतरि अगनि जलै भड़कारे ॥ मनमुखु तके कुंडा चारे ॥ बिनु सतिगुर सेवे किउ सुखु पाईऐ साचे हाथि वडाई हे ॥२॥

कामु क्रोधु अहंकारु निवारे ॥ तसकर पंच सबदि संघारे ॥ गिआन खड़गु लै मन सिउ लूझै मनसा मनहि समाई हे ॥३॥

मा की रकतु पिता बिदु धारा ॥ मूरति सूरति करि आपारा ॥ जोति दाति जेती सभ तेरी तू करता सभ ठाई हे ॥४॥

तुझ ही कीआ जमण मरणा ॥ गुर ते समझ पड़ी किआ डरणा ॥ तू दइआलु दइआ करि देखहि दुखु दरदु सरीरहु जाई हे ॥५॥

निज घरि बैसि रहे भउ खाइआ ॥ धावत राखे ठाकि रहाइआ ॥ कमल बिगास हरे सर सुभर आतम रामु सखाई हे ॥६॥

मरणु लिखाइ मंडल महि आए ॥ किउ रहीऐ चलणा परथाए ॥ सचा अमरु सचे अमरा पुरि सो सचु मिलै वडाई हे ॥७॥

आपि उपाइआ जगतु सबाइआ ॥ जिनि सिरिआ तिनि धंधै लाइआ ॥ सचै ऊपरि अवर न दीसै साचे कीमति पाई हे ॥८॥

ऐथै गोइलड़ा दिन चारे ॥ खेलु तमासा धुंधूकारे ॥ बाजी खेलि गए बाजीगर जिउ निसि सुपनै भखलाई हे ॥९॥

तिन कउ तखति मिली वडिआई ॥ निरभउ मनि वसिआ लिव लाई ॥ खंडी ब्रहमंडी पाताली पुरीई त्रिभवण ताड़ी लाई हे ॥१०॥

साची नगरी तखतु सचावा ॥ गुरमुखि साचु मिलै सुखु पावा ॥ साचे साचै तखति वडाई हउमै गणत गवाई हे ॥११॥

गणत गणीऐ सहसा जीऐ ॥ किउ सुखु पावै दूऐ तीऐ ॥ निरमलु एकु निरंजनु दाता गुर पूरे ते पति पाई हे ॥१२॥

जुगि जुगि विरली गुरमुखि जाता ॥ साचा रवि रहिआ मनु राता ॥ तिस की ओट गही सुखु पाइआ मनि तनि मैलु न काई हे ॥१३॥

जीभ रसाइणि साचै राती ॥ हरि प्रभु संगी भउ न भराती ॥ स्रवण स्रोत रजे गुरबाणी जोती जोति मिलाई हे ॥१४॥

रखि रखि पैर धरे पउ धरणा ॥ जत कत देखउ तेरी सरणा ॥ दुखु सुखु देहि तूहै मनि भावहि तुझ ही सिउ बणि आई हे ॥१५॥

अंत कालि को बेली नाही ॥ गुरमुखि जाता तुधु सालाही ॥ नानक नामि रते बैरागी निज घरि ताड़ी लाई हे ॥१६॥३॥

(राग मारू -- SGGS 1023) मारू महला १ ॥
आदि जुगादी अपर अपारे ॥ आदि निरंजन खसम हमारे ॥ साचे जोग जुगति वीचारी साचे ताड़ी लाई हे ॥१॥

केतड़िआ जुग धुंधूकारै ॥ ताड़ी लाई सिरजणहारै ॥ सचु नामु सची वडिआई साचै तखति वडाई हे ॥२॥

सतजुगि सतु संतोखु सरीरा ॥ सति सति वरतै गहिर ग्मभीरा ॥ सचा साहिबु सचु परखै साचै हुकमि चलाई हे ॥३॥

सत संतोखी सतिगुरु पूरा ॥ गुर का सबदु मने सो सूरा ॥ साची दरगह साचु निवासा मानै हुकमु रजाई हे ॥४॥

सतजुगि साचु कहै सभु कोई ॥ सचि वरतै साचा सोई ॥ मनि मुखि साचु भरम भउ भंजनु गुरमुखि साचु सखाई हे ॥५॥

त्रेतै धरम कला इक चूकी ॥ तीनि चरण इक दुबिधा सूकी ॥ गुरमुखि होवै सु साचु वखाणै मनमुखि पचै अवाई हे ॥६॥

मनमुखि कदे न दरगह सीझै ॥ बिनु सबदै किउ अंतरु रीझै ॥ बाधे आवहि बाधे जावहि सोझी बूझ न काई हे ॥७॥

दइआ दुआपुरि अधी होई ॥ गुरमुखि विरला चीनै कोई ॥ दुइ पग धरमु धरे धरणीधर गुरमुखि साचु तिथाई हे ॥८॥

राजे धरमु करहि परथाए ॥ आसा बंधे दानु कराए ॥ राम नाम बिनु मुकति न होई थाके करम कमाई हे ॥९॥

करम धरम करि मुकति मंगाही ॥ मुकति पदारथु सबदि सलाही ॥ बिनु गुर सबदै मुकति न होई परपंचु करि भरमाई हे ॥१०॥

माइआ ममता छोडी न जाई ॥ से छूटे सचु कार कमाई ॥ अहिनिसि भगति रते वीचारी ठाकुर सिउ बणि आई हे ॥११॥

इकि जप तप करि करि तीरथ नावहि ॥ जिउ तुधु भावै तिवै चलावहि ॥ हठि निग्रहि अपतीजु न भीजै बिनु हरि गुर किनि पति पाई हे ॥१२॥

कली काल महि इक कल राखी ॥ बिनु गुर पूरे किनै न भाखी ॥ मनमुखि कूड़ु वरतै वरतारा बिनु सतिगुर भरमु न जाई हे ॥१३॥

सतिगुरु वेपरवाहु सिरंदा ॥ ना जम काणि न छंदा बंदा ॥ जो तिसु सेवे सो अबिनासी ना तिसु कालु संताई हे ॥१४॥

गुर महि आपु रखिआ करतारे ॥ गुरमुखि कोटि असंख उधारे ॥ सरब जीआ जगजीवनु दाता निरभउ मैलु न काई हे ॥१५॥

सगले जाचहि गुर भंडारी ॥ आपि निरंजनु अलख अपारी ॥ नानकु साचु कहै प्रभ जाचै मै दीजै साचु रजाई हे ॥१६॥४॥

(राग मारू -- SGGS 1024) मारू महला १ ॥
साचै मेले सबदि मिलाए ॥ जा तिसु भाणा सहजि समाए ॥ त्रिभवण जोति धरी परमेसरि अवरु न दूजा भाई हे ॥१॥

जिस के चाकर तिस की सेवा ॥ सबदि पतीजै अलख अभेवा ॥ भगता का गुणकारी करता बखसि लए वडिआई हे ॥२॥

देदे तोटि न आवै साचे ॥ लै लै मुकरि पउदे काचे ॥ मूलु न बूझहि साचि न रीझहि दूजै भरमि भुलाई हे ॥३॥

गुरमुखि जागि रहे दिन राती ॥ साचे की लिव गुरमति जाती ॥ मनमुख सोइ रहे से लूटे गुरमुखि साबतु भाई हे ॥४॥

कूड़े आवै कूड़े जावै ॥ कूड़े राती कूड़ु कमावै ॥ सबदि मिले से दरगह पैधे गुरमुखि सुरति समाई हे ॥५॥

कूड़ि मुठी ठगी ठगवाड़ी ॥ जिउ वाड़ी ओजाड़ि उजाड़ी ॥ नाम बिना किछु सादि न लागै हरि बिसरिऐ दुखु पाई हे ॥६॥

भोजनु साचु मिलै आघाई ॥ नाम रतनु साची वडिआई ॥ चीनै आपु पछाणै सोई जोती जोति मिलाई हे ॥७॥

नावहु भुली चोटा खाए ॥ बहुतु सिआणप भरमु न जाए ॥ पचि पचि मुए अचेत न चेतहि अजगरि भारि लदाई हे ॥८॥

बिनु बाद बिरोधहि कोई नाही ॥ मै देखालिहु तिसु सालाही ॥ मनु तनु अरपि मिलै जगजीवनु हरि सिउ बणत बणाई हे ॥९॥

प्रभ की गति मिति कोइ न पावै ॥ जे को वडा कहाइ वडाई खावै ॥ साचे साहिब तोटि न दाती सगली तिनहि उपाई हे ॥१०॥

वडी वडिआई वेपरवाहे ॥ आपि उपाए दानु समाहे ॥ आपि दइआलु दूरि नही दाता मिलिआ सहजि रजाई हे ॥११॥

इकि सोगी इकि रोगि विआपे ॥ जो किछु करे सु आपे आपे ॥ भगति भाउ गुर की मति पूरी अनहदि सबदि लखाई हे ॥१२॥

इकि नागे भूखे भवहि भवाए ॥ इकि हठु करि मरहि न कीमति पाए ॥ गति अविगत की सार न जाणै बूझै सबदु कमाई हे ॥१३॥

इकि तीरथि नावहि अंनु न खावहि ॥ इकि अगनि जलावहि देह खपावहि ॥ राम नाम बिनु मुकति न होई कितु बिधि पारि लंघाई हे ॥१४॥

गुरमति छोडहि उझड़ि जाई ॥ मनमुखि रामु न जपै अवाई ॥ पचि पचि बूडहि कूड़ु कमावहि कूड़ि कालु बैराई हे ॥१५॥

हुकमे आवै हुकमे जावै ॥ बूझै हुकमु सो साचि समावै ॥ नानक साचु मिलै मनि भावै गुरमुखि कार कमाई हे ॥१६॥५॥

(राग मारू -- SGGS 1025) मारू महला १ ॥
आपे करता पुरखु बिधाता ॥ जिनि आपे आपि उपाइ पछाता ॥ आपे सतिगुरु आपे सेवकु आपे स्रिसटि उपाई हे ॥१॥

आपे नेड़ै नाही दूरे ॥ बूझहि गुरमुखि से जन पूरे ॥ तिन की संगति अहिनिसि लाहा गुर संगति एह वडाई हे ॥२॥

जुगि जुगि संत भले प्रभ तेरे ॥ हरि गुण गावहि रसन रसेरे ॥ उसतति करहि परहरि दुखु दालदु जिन नाही चिंत पराई हे ॥३॥

ओइ जागत रहहि न सूते दीसहि ॥ संगति कुल तारे साचु परीसहि ॥ कलिमल मैलु नाही ते निरमल ओइ रहहि भगति लिव लाई हे ॥४॥

बूझहु हरि जन सतिगुर बाणी ॥ एहु जोबनु सासु है देह पुराणी ॥ आजु कालि मरि जाईऐ प्राणी हरि जपु जपि रिदै धिआई हे ॥५॥

छोडहु प्राणी कूड़ कबाड़ा ॥ कूड़ु मारे कालु उछाहाड़ा ॥ साकत कूड़ि पचहि मनि हउमै दुहु मारगि पचै पचाई हे ॥६॥

छोडिहु निंदा ताति पराई ॥ पड़ि पड़ि दझहि साति न आई ॥ मिलि सतसंगति नामु सलाहहु आतम रामु सखाई हे ॥७॥

छोडहु काम क्रोधु बुरिआई ॥ हउमै धंधु छोडहु ल्मपटाई ॥ सतिगुर सरणि परहु ता उबरहु इउ तरीऐ भवजलु भाई हे ॥८॥

आगै बिमल नदी अगनि बिखु झेला ॥ तिथै अवरु न कोई जीउ इकेला ॥ भड़ भड़ अगनि सागरु दे लहरी पड़ि दझहि मनमुख ताई हे ॥९॥

गुर पहि मुकति दानु दे भाणै ॥ जिनि पाइआ सोई बिधि जाणै ॥ जिन पाइआ तिन पूछहु भाई सुखु सतिगुर सेव कमाई हे ॥१०॥

गुर बिनु उरझि मरहि बेकारा ॥ जमु सिरि मारे करे खुआरा ॥ बाधे मुकति नाही नर निंदक डूबहि निंद पराई हे ॥११॥

बोलहु साचु पछाणहु अंदरि ॥ दूरि नाही देखहु करि नंदरि ॥ बिघनु नाही गुरमुखि तरु तारी इउ भवजलु पारि लंघाई हे ॥१२॥

देही अंदरि नामु निवासी ॥ आपे करता है अबिनासी ॥ ना जीउ मरै न मारिआ जाई करि देखै सबदि रजाई हे ॥१३॥

ओहु निरमलु है नाही अंधिआरा ॥ ओहु आपे तखति बहै सचिआरा ॥ साकत कूड़े बंधि भवाईअहि मरि जनमहि आई जाई हे ॥१४॥

गुर के सेवक सतिगुर पिआरे ॥ ओइ बैसहि तखति सु सबदु वीचारे ॥ ततु लहहि अंतरगति जाणहि सतसंगति साचु वडाई हे ॥१५॥

आपि तरै जनु पितरा तारे ॥ संगति मुकति सु पारि उतारे ॥ नानकु तिस का लाला गोला जिनि गुरमुखि हरि लिव लाई हे ॥१६॥६॥

(राग मारू -- SGGS 1026) मारू महला १ ॥
केते जुग वरते गुबारै ॥ ताड़ी लाई अपर अपारै ॥ धुंधूकारि निरालमु बैठा ना तदि धंधु पसारा हे ॥१॥

जुग छतीह तिनै वरताए ॥ जिउ तिसु भाणा तिवै चलाए ॥ तिसहि सरीकु न दीसै कोई आपे अपर अपारा हे ॥२॥

गुपते बूझहु जुग चतुआरे ॥ घटि घटि वरतै उदर मझारे ॥ जुगु जुगु एका एकी वरतै कोई बूझै गुर वीचारा हे ॥३॥

बिंदु रकतु मिलि पिंडु सरीआ ॥ पउणु पाणी अगनी मिलि जीआ ॥ आपे चोज करे रंग महली होर माइआ मोह पसारा हे ॥४॥

गरभ कुंडल महि उरध धिआनी ॥ आपे जाणै अंतरजामी ॥ सासि सासि सचु नामु समाले अंतरि उदर मझारा हे ॥५॥

चारि पदारथ लै जगि आइआ ॥ सिव सकती घरि वासा पाइआ ॥ एकु विसारे ता पिड़ हारे अंधुलै नामु विसारा हे ॥६॥

बालकु मरै बालक की लीला ॥ कहि कहि रोवहि बालु रंगीला ॥ जिस का सा सो तिन ही लीआ भूला रोवणहारा हे ॥७॥

भरि जोबनि मरि जाहि कि कीजै ॥ मेरा मेरा करि रोवीजै ॥ माइआ कारणि रोइ विगूचहि ध्रिगु जीवणु संसारा हे ॥८॥

काली हू फुनि धउले आए ॥ विणु नावै गथु गइआ गवाए ॥ दुरमति अंधुला बिनसि बिनासै मूठे रोइ पूकारा हे ॥९॥

आपु वीचारि न रोवै कोई ॥ सतिगुरु मिलै त सोझी होई ॥ बिनु गुर बजर कपाट न खूलहि सबदि मिलै निसतारा हे ॥१०॥

बिरधि भइआ तनु छीजै देही ॥ रामु न जपई अंति सनेही ॥ नामु विसारि चलै मुहि कालै दरगह झूठु खुआरा हे ॥११॥

नामु विसारि चलै कूड़िआरो ॥ आवत जात पड़ै सिरि छारो ॥ साहुरड़ै घरि वासु न पाए पेईअड़ै सिरि मारा हे ॥१२॥

खाजै पैझै रली करीजै ॥ बिनु अभ भगती बादि मरीजै ॥ सर अपसर की सार न जाणै जमु मारे किआ चारा हे ॥१३॥

परविरती नरविरति पछाणै ॥ गुर कै संगि सबदि घरु जाणै ॥ किस ही मंदा आखि न चलै सचि खरा सचिआरा हे ॥१४॥

साच बिना दरि सिझै न कोई ॥ साच सबदि पैझै पति होई ॥ आपे बखसि लए तिसु भावै हउमै गरबु निवारा हे ॥१५॥

गुर किरपा ते हुकमु पछाणै ॥ जुगह जुगंतर की बिधि जाणै ॥ नानक नामु जपहु तरु तारी सचु तारे तारणहारा हे ॥१६॥१॥७॥

(राग मारू -- SGGS 1027) मारू महला १ ॥
हरि सा मीतु नाही मै कोई ॥ जिनि तनु मनु दीआ सुरति समोई ॥ सरब जीआ प्रतिपालि समाले सो अंतरि दाना बीना हे ॥१॥

गुरु सरवरु हम हंस पिआरे ॥ सागर महि रतन लाल बहु सारे ॥ मोती माणक हीरा हरि जसु गावत मनु तनु भीना हे ॥२॥

हरि अगम अगाहु अगाधि निराला ॥ हरि अंतु न पाईऐ गुर गोपाला ॥ सतिगुर मति तारे तारणहारा मेलि लए रंगि लीना हे ॥३॥

सतिगुर बाझहु मुकति किनेही ॥ ओहु आदि जुगादी राम सनेही ॥ दरगह मुकति करे करि किरपा बखसे अवगुण कीना हे ॥४॥

सतिगुरु दाता मुकति कराए ॥ सभि रोग गवाए अम्रित रसु पाए ॥ जमु जागाति नाही करु लागै जिसु अगनि बुझी ठरु सीना हे ॥५॥

काइआ हंस प्रीति बहु धारी ॥ ओहु जोगी पुरखु ओह सुंदरि नारी ॥ अहिनिसि भोगै चोज बिनोदी उठि चलतै मता न कीना हे ॥६॥

स्रिसटि उपाइ रहे प्रभ छाजै ॥ पउण पाणी बैसंतरु गाजै ॥ मनूआ डोलै दूत संगति मिलि सो पाए जो किछु कीना हे ॥७॥

नामु विसारि दोख दुख सहीऐ ॥ हुकमु भइआ चलणा किउ रहीऐ ॥ नरक कूप महि गोते खावै जिउ जल ते बाहरि मीना हे ॥८॥

चउरासीह नरक साकतु भोगाईऐ ॥ जैसा कीचै तैसो पाईऐ ॥ सतिगुर बाझहु मुकति न होई किरति बाधा ग्रसि दीना हे ॥९॥

खंडे धार गली अति भीड़ी ॥ लेखा लीजै तिल जिउ पीड़ी ॥ मात पिता कलत्र सुत बेली नाही बिनु हरि रस मुकति न कीना हे ॥१०॥

मीत सखे केते जग माही ॥ बिनु गुर परमेसर कोई नाही ॥ गुर की सेवा मुकति पराइणि अनदिनु कीरतनु कीना हे ॥११॥

कूड़ु छोडि साचे कउ धावहु ॥ जो इछहु सोई फलु पावहु ॥ साच वखर के वापारी विरले लै लाहा सउदा कीना हे ॥१२॥

हरि हरि नामु वखरु लै चलहु ॥ दरसनु पावहु सहजि महलहु ॥ गुरमुखि खोजि लहहि जन पूरे इउ समदरसी चीना हे ॥१३॥

प्रभ बेअंत गुरमति को पावहि ॥ गुर कै सबदि मन कउ समझावहि ॥ सतिगुर की बाणी सति सति करि मानहु इउ आतम रामै लीना हे ॥१४॥

नारद सारद सेवक तेरे ॥ त्रिभवणि सेवक वडहु वडेरे ॥ सभ तेरी कुदरति तू सिरि सिरि दाता सभु तेरो कारणु कीना हे ॥१५॥

इकि दरि सेवहि दरदु वञाए ॥ ओइ दरगह पैधे सतिगुरू छडाए ॥ हउमै बंधन सतिगुरि तोड़े चितु चंचलु चलणि न दीना हे ॥१६॥

सतिगुर मिलहु चीनहु बिधि साई ॥ जितु प्रभु पावहु गणत न काई ॥ हउमै मारि करहु गुर सेवा जन नानक हरि रंगि भीना हे ॥१७॥२॥८॥

(राग मारू -- SGGS 1028) मारू महला १ ॥
असुर सघारण रामु हमारा ॥ घटि घटि रमईआ रामु पिआरा ॥ नाले अलखु न लखीऐ मूले गुरमुखि लिखु वीचारा हे ॥१॥

गुरमुखि साधू सरणि तुमारी ॥ करि किरपा प्रभि पारि उतारी ॥ अगनि पाणी सागरु अति गहरा गुरु सतिगुरु पारि उतारा हे ॥२॥

मनमुख अंधुले सोझी नाही ॥ आवहि जाहि मरहि मरि जाही ॥ पूरबि लिखिआ लेखु न मिटई जम दरि अंधु खुआरा हे ॥३॥

इकि आवहि जावहि घरि वासु न पावहि ॥ किरत के बाधे पाप कमावहि ॥ अंधुले सोझी बूझ न काई लोभु बुरा अहंकारा हे ॥४॥

पिर बिनु किआ तिसु धन सीगारा ॥ पर पिर राती खसमु विसारा ॥ जिउ बेसुआ पूत बापु को कहीऐ तिउ फोकट कार विकारा हे ॥५॥

प्रेत पिंजर महि दूख घनेरे ॥ नरकि पचहि अगिआन अंधेरे ॥ धरम राइ की बाकी लीजै जिनि हरि का नामु विसारा हे ॥६॥

सूरजु तपै अगनि बिखु झाला ॥ अपतु पसू मनमुखु बेताला ॥ आसा मनसा कूड़ु कमावहि रोगु बुरा बुरिआरा हे ॥७॥

मसतकि भारु कलर सिरि भारा ॥ किउ करि भवजलु लंघसि पारा ॥ सतिगुरु बोहिथु आदि जुगादी राम नामि निसतारा हे ॥८॥

पुत्र कलत्र जगि हेतु पिआरा ॥ माइआ मोहु पसरिआ पासारा ॥ जम के फाहे सतिगुरि तोड़े गुरमुखि ततु बीचारा हे ॥९॥

कूड़ि मुठी चालै बहु राही ॥ मनमुखु दाझै पड़ि पड़ि भाही ॥ अम्रित नामु गुरू वड दाणा नामु जपहु सुख सारा हे ॥१०॥

सतिगुरु तुठा सचु द्रिड़ाए ॥ सभि दुख मेटे मारगि पाए ॥ कंडा पाइ न गडई मूले जिसु सतिगुरु राखणहारा हे ॥११॥

खेहू खेह रलै तनु छीजै ॥ मनमुखु पाथरु सैलु न भीजै ॥ करण पलाव करे बहुतेरे नरकि सुरगि अवतारा हे ॥१२॥

माइआ बिखु भुइअंगम नाले ॥ इनि दुबिधा घर बहुते गाले ॥ सतिगुर बाझहु प्रीति न उपजै भगति रते पतीआरा हे ॥१३॥

साकत माइआ कउ बहु धावहि ॥ नामु विसारि कहा सुखु पावहि ॥ त्रिहु गुण अंतरि खपहि खपावहि नाही पारि उतारा हे ॥१४॥

कूकर सूकर कहीअहि कूड़िआरा ॥ भउकि मरहि भउ भउ भउ हारा ॥ मनि तनि झूठे कूड़ु कमावहि दुरमति दरगह हारा हे ॥१५॥

सतिगुरु मिलै त मनूआ टेकै ॥ राम नामु दे सरणि परेकै ॥ हरि धनु नामु अमोलकु देवै हरि जसु दरगह पिआरा हे ॥१६॥

राम नामु साधू सरणाई ॥ सतिगुर बचनी गति मिति पाई ॥ नानक हरि जपि हरि मन मेरे हरि मेले मेलणहारा हे ॥१७॥३॥९॥

(राग मारू -- SGGS 1030) मारू महला १ ॥
घरि रहु रे मन मुगध इआने ॥ रामु जपहु अंतरगति धिआने ॥ लालच छोडि रचहु अपर्मपरि इउ पावहु मुकति दुआरा हे ॥१॥

जिसु बिसरिऐ जमु जोहणि लागै ॥ सभि सुख जाहि दुखा फुनि आगै ॥ राम नामु जपि गुरमुखि जीअड़े एहु परम ततु वीचारा हे ॥२॥

हरि हरि नामु जपहु रसु मीठा ॥ गुरमुखि हरि रसु अंतरि डीठा ॥ अहिनिसि राम रहहु रंगि राते एहु जपु तपु संजमु सारा हे ॥३॥

राम नामु गुर बचनी बोलहु ॥ संत सभा महि इहु रसु टोलहु ॥ गुरमति खोजि लहहु घरु अपना बहुड़ि न गरभ मझारा हे ॥४॥

सचु तीरथि नावहु हरि गुण गावहु ॥ ततु वीचारहु हरि लिव लावहु ॥ अंत कालि जमु जोहि न साकै हरि बोलहु रामु पिआरा हे ॥५॥

सतिगुरु पुरखु दाता वड दाणा ॥ जिसु अंतरि साचु सु सबदि समाणा ॥ जिस कउ सतिगुरु मेलि मिलाए तिसु चूका जम भै भारा हे ॥६॥

पंच ततु मिलि काइआ कीनी ॥ तिस महि राम रतनु लै चीनी ॥ आतम रामु रामु है आतम हरि पाईऐ सबदि वीचारा हे ॥७॥

सत संतोखि रहहु जन भाई ॥ खिमा गहहु सतिगुर सरणाई ॥ आतमु चीनि परातमु चीनहु गुर संगति इहु निसतारा हे ॥८॥

साकत कूड़ कपट महि टेका ॥ अहिनिसि निंदा करहि अनेका ॥ बिनु सिमरन आवहि फुनि जावहि ग्रभ जोनी नरक मझारा हे ॥९॥

साकत जम की काणि न चूकै ॥ जम का डंडु न कबहू मूकै ॥ बाकी धरम राइ की लीजै सिरि अफरिओ भारु अफारा हे ॥१०॥

बिनु गुर साकतु कहहु को तरिआ ॥ हउमै करता भवजलि परिआ ॥ बिनु गुर पारु न पावै कोई हरि जपीऐ पारि उतारा हे ॥११॥

गुर की दाति न मेटै कोई ॥ जिसु बखसे तिसु तारे सोई ॥ जनम मरण दुखु नेड़ि न आवै मनि सो प्रभु अपर अपारा हे ॥१२॥

गुर ते भूले आवहु जावहु ॥ जनमि मरहु फुनि पाप कमावहु ॥ साकत मूड़ अचेत न चेतहि दुखु लागै ता रामु पुकारा हे ॥१३॥

सुखु दुखु पुरब जनम के कीए ॥ सो जाणै जिनि दातै दीए ॥ किस कउ दोसु देहि तू प्राणी सहु अपणा कीआ करारा हे ॥१४॥

हउमै ममता करदा आइआ ॥ आसा मनसा बंधि चलाइआ ॥ मेरी मेरी करत किआ ले चाले बिखु लादे छार बिकारा हे ॥१५॥

हरि की भगति करहु जन भाई ॥ अकथु कथहु मनु मनहि समाई ॥ उठि चलता ठाकि रखहु घरि अपुनै दुखु काटे काटणहारा हे ॥१६॥

हरि गुर पूरे की ओट पराती ॥ गुरमुखि हरि लिव गुरमुखि जाती ॥ नानक राम नामि मति ऊतम हरि बखसे पारि उतारा हे ॥१७॥४॥१०॥


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