Pt 16 - गुरू नानक देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 16 - Guru Nanak Dev ji (Mahalla 1) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग रामकली -- SGGS 952) मः १ ॥
सो अउधूती जो धूपै आपु ॥ भिखिआ भोजनु करै संतापु ॥ अउहठ पटण महि भीखिआ करै ॥ सो अउधूती सिव पुरि चड़ै ॥ बोलै गोरखु सति सरूपु ॥ परम तंत महि रेख न रूपु ॥३॥

(राग रामकली -- SGGS 952) मः १ ॥
सो उदासी जि पाले उदासु ॥ अरध उरध करे निरंजन वासु ॥ चंद सूरज की पाए गंढि ॥ तिसु उदासी का पड़ै न कंधु ॥ बोलै गोपी चंदु सति सरूपु ॥ परम तंत महि रेख न रूपु ॥४॥

(राग रामकली -- SGGS 952) मः १ ॥
सो पाखंडी जि काइआ पखाले ॥ काइआ की अगनि ब्रहमु परजाले ॥ सुपनै बिंदु न देई झरणा ॥ तिसु पाखंडी जरा न मरणा ॥ बोलै चरपटु सति सरूपु ॥ परम तंत महि रेख न रूपु ॥५॥

(राग रामकली -- SGGS 953) मः १ ॥
सो बैरागी जि उलटे ब्रहमु ॥ गगन मंडल महि रोपै थमु ॥ अहिनिसि अंतरि रहै धिआनि ॥ ते बैरागी सत समानि ॥ बोलै भरथरि सति सरूपु ॥ परम तंत महि रेख न रूपु ॥६॥

(राग रामकली -- SGGS 953) मः १ ॥
किउ मरै मंदा किउ जीवै जुगति ॥ कंन पड़ाइ किआ खाजै भुगति ॥ आसति नासति एको नाउ ॥ कउणु सु अखरु जितु रहै हिआउ ॥ धूप छाव जे सम करि सहै ॥ ता नानकु आखै गुरु को कहै ॥ छिअ वरतारे वरतहि पूत ॥ ना संसारी ना अउधूत ॥ निरंकारि जो रहै समाइ ॥ काहे भीखिआ मंगणि जाइ ॥७॥

(राग रामकली -- SGGS 953) मः १ ॥
नानकु आखै रे मना सुणीऐ सिख सही ॥ लेखा रबु मंगेसीआ बैठा कढि वही ॥ तलबा पउसनि आकीआ बाकी जिना रही ॥ अजराईलु फरेसता होसी आइ तई ॥ आवणु जाणु न सुझई भीड़ी गली फही ॥ कूड़ निखुटे नानका ओड़कि सचि रही ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 953) सलोकु मः १ ॥
सहंसर दान दे इंद्रु रोआइआ ॥ परस रामु रोवै घरि आइआ ॥ अजै सु रोवै भीखिआ खाइ ॥ ऐसी दरगह मिलै सजाइ ॥ रोवै रामु निकाला भइआ ॥ सीता लखमणु विछुड़ि गइआ ॥ रोवै दहसिरु लंक गवाइ ॥ जिनि सीता आदी डउरू वाइ ॥ रोवहि पांडव भए मजूर ॥ जिन कै सुआमी रहत हदूरि ॥ रोवै जनमेजा खुइ गइआ ॥ एकी कारणि पापी भइआ ॥ रोवहि सेख मसाइक पीर ॥ अंति कालि मतु लागै भीड़ ॥ रोवहि राजे कंन पड़ाइ ॥ घरि घरि मागहि भीखिआ जाइ ॥ रोवहि किरपन संचहि धनु जाइ ॥ पंडित रोवहि गिआनु गवाइ ॥ बाली रोवै नाहि भतारु ॥ नानक दुखीआ सभु संसारु ॥ मंने नाउ सोई जिणि जाइ ॥ अउरी करम न लेखै लाइ ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 955) सलोक मः १ ॥
सावणु राति अहाड़ु दिहु कामु क्रोधु दुइ खेत ॥ लबु वत्र दरोगु बीउ हाली राहकु हेत ॥ हलु बीचारु विकार मण हुकमी खटे खाइ ॥ नानक लेखै मंगिऐ अउतु जणेदा जाइ ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 955) मः १ ॥
भउ भुइ पवितु पाणी सतु संतोखु बलेद ॥ हलु हलेमी हाली चितु चेता वत्र वखत संजोगु ॥ नाउ बीजु बखसीस बोहल दुनीआ सगल दरोग ॥ नानक नदरी करमु होइ जावहि सगल विजोग ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 955) मः १ ॥
नानक इहु जीउ मछुली झीवरु त्रिसना कालु ॥ मनूआ अंधु न चेतई पड़ै अचिंता जालु ॥ नानक चितु अचेतु है चिंता बधा जाइ ॥ नदरि करे जे आपणी ता आपे लए मिलाइ ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 955) सलोक मः १ ॥
वेलि पिंञाइआ कति वुणाइआ ॥ कटि कुटि करि खु्मबि चड़ाइआ ॥ लोहा वढे दरजी पाड़े सूई धागा सीवै ॥ इउ पति पाटी सिफती सीपै नानक जीवत जीवै ॥ होइ पुराणा कपड़ु पाटै सूई धागा गंढै ॥ माहु पखु किहु चलै नाही घड़ी मुहतु किछु हंढै ॥ सचु पुराणा होवै नाही सीता कदे न पाटै ॥ नानक साहिबु सचो सचा तिचरु जापी जापै ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 956) मः १ ॥
सच की काती सचु सभु सारु ॥ घाड़त तिस की अपर अपार ॥ सबदे साण रखाई लाइ ॥ गुण की थेकै विचि समाइ ॥ तिस दा कुठा होवै सेखु ॥ लोहू लबु निकथा वेखु ॥ होइ हलालु लगै हकि जाइ ॥ नानक दरि दीदारि समाइ ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 956) मः १ ॥
कमरि कटारा बंकुड़ा बंके का असवारु ॥ गरबु न कीजै नानका मतु सिरि आवै भारु ॥३॥

(राग रामकली -- SGGS 956) सलोकु मः १ ॥
सरवर हंस धुरे ही मेला खसमै एवै भाणा ॥ सरवर अंदरि हीरा मोती सो हंसा का खाणा ॥ बगुला कागु न रहई सरवरि जे होवै अति सिआणा ॥ ओना रिजकु न पइओ ओथै ओन्हा होरो खाणा ॥ सचि कमाणै सचो पाईऐ कूड़ै कूड़ा माणा ॥ नानक तिन कौ सतिगुरु मिलिआ जिना धुरे पैया परवाणा ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 956) मः १ ॥
साहिबु मेरा उजला जे को चिति करेइ ॥ नानक सोई सेवीऐ सदा सदा जो देइ ॥ नानक सोई सेवीऐ जितु सेविऐ दुखु जाइ ॥ अवगुण वंञनि गुण रवहि मनि सुखु वसै आइ ॥२॥

(राग मारू -- SGGS 989) रागु मारू महला १ घरु १ चउपदे
ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
सलोकु ॥
साजन तेरे चरन की होइ रहा सद धूरि ॥ नानक सरणि तुहारीआ पेखउ सदा हजूरि ॥१॥

सबद ॥ पिछहु राती सदड़ा नामु खसम का लेहि ॥ खेमे छत्र सराइचे दिसनि रथ पीड़े ॥ जिनी तेरा नामु धिआइआ तिन कउ सदि मिले ॥१॥

बाबा मै करमहीण कूड़िआर ॥ नामु न पाइआ तेरा अंधा भरमि भूला मनु मेरा ॥१॥ रहाउ ॥

साद कीते दुख परफुड़े पूरबि लिखे माइ ॥ सुख थोड़े दुख अगले दूखे दूखि विहाइ ॥२॥

विछुड़िआ का किआ वीछुड़ै मिलिआ का किआ मेलु ॥ साहिबु सो सालाहीऐ जिनि करि देखिआ खेलु ॥३॥

संजोगी मेलावड़ा इनि तनि कीते भोग ॥ विजोगी मिलि विछुड़े नानक भी संजोग ॥४॥१॥

(राग मारू -- SGGS 989) मारू महला १ ॥
मिलि मात पिता पिंडु कमाइआ ॥ तिनि करतै लेखु लिखाइआ ॥ लिखु दाति जोति वडिआई ॥ मिलि माइआ सुरति गवाई ॥१॥

मूरख मन काहे करसहि माणा ॥ उठि चलणा खसमै भाणा ॥१॥ रहाउ ॥

तजि साद सहज सुखु होई ॥ घर छडणे रहै न कोई ॥ किछु खाजै किछु धरि जाईऐ ॥ जे बाहुड़ि दुनीआ आईऐ ॥२॥

सजु काइआ पटु हढाए ॥ फुरमाइसि बहुतु चलाए ॥ करि सेज सुखाली सोवै ॥ हथी पउदी काहे रोवै ॥३॥

घर घुमणवाणी भाई ॥ पाप पथर तरणु न जाई ॥ भउ बेड़ा जीउ चड़ाऊ ॥ कहु नानक देवै काहू ॥४॥२॥

(राग मारू -- SGGS 990) मारू महला १ घरु १ ॥
करणी कागदु मनु मसवाणी बुरा भला दुइ लेख पए ॥ जिउ जिउ किरतु चलाए तिउ चलीऐ तउ गुण नाही अंतु हरे ॥१॥

चित चेतसि की नही बावरिआ ॥ हरि बिसरत तेरे गुण गलिआ ॥१॥ रहाउ ॥

जाली रैनि जालु दिनु हूआ जेती घड़ी फाही तेती ॥ रसि रसि चोग चुगहि नित फासहि छूटसि मूड़े कवन गुणी ॥२॥

काइआ आरणु मनु विचि लोहा पंच अगनि तितु लागि रही ॥ कोइले पाप पड़े तिसु ऊपरि मनु जलिआ संन्ही चिंत भई ॥३॥

भइआ मनूरु कंचनु फिरि होवै जे गुरु मिलै तिनेहा ॥ एकु नामु अम्रितु ओहु देवै तउ नानक त्रिसटसि देहा ॥४॥३॥

(राग मारू -- SGGS 990) मारू महला १ ॥
बिमल मझारि बससि निरमल जल पदमनि जावल रे ॥ पदमनि जावल जल रस संगति संगि दोख नही रे ॥१॥

दादर तू कबहि न जानसि रे ॥ भखसि सिबालु बससि निरमल जल अम्रितु न लखसि रे ॥१॥ रहाउ ॥

बसु जल नित न वसत अलीअल मेर चचा गुन रे ॥ चंद कुमुदनी दूरहु निवससि अनभउ कारनि रे ॥२॥

अम्रित खंडु दूधि मधु संचसि तू बन चातुर रे ॥ अपना आपु तू कबहु न छोडसि पिसन प्रीति जिउ रे ॥३॥

पंडित संगि वसहि जन मूरख आगम सास सुने ॥ अपना आपु तू कबहु न छोडसि सुआन पूछि जिउ रे ॥४॥

इकि पाखंडी नामि न राचहि इकि हरि हरि चरणी रे ॥ पूरबि लिखिआ पावसि नानक रसना नामु जपि रे ॥५॥४॥

(राग मारू -- SGGS 990) मारू महला १ ॥
सलोकु ॥
पतित पुनीत असंख होहि हरि चरनी मनु लाग ॥ अठसठि तीरथ नामु प्रभ नानक जिसु मसतकि भाग ॥१॥

सबदु ॥ सखी सहेली गरबि गहेली ॥ सुणि सह की इक बात सुहेली ॥१॥

जो मै बेदन सा किसु आखा माई ॥ हरि बिनु जीउ न रहै कैसे राखा माई ॥१॥ रहाउ ॥

हउ दोहागणि खरी रंञाणी ॥ गइआ सु जोबनु धन पछुताणी ॥२॥

तू दाना साहिबु सिरि मेरा ॥ खिजमति करी जनु बंदा तेरा ॥३॥

भणति नानकु अंदेसा एही ॥ बिनु दरसन कैसे रवउ सनेही ॥४॥५॥

(राग मारू -- SGGS 991) मारू महला १ ॥
मुल खरीदी लाला गोला मेरा नाउ सभागा ॥ गुर की बचनी हाटि बिकाना जितु लाइआ तितु लागा ॥१॥

तेरे लाले किआ चतुराई ॥ साहिब का हुकमु न करणा जाई ॥१॥ रहाउ ॥

मा लाली पिउ लाला मेरा हउ लाले का जाइआ ॥ लाली नाचै लाला गावै भगति करउ तेरी राइआ ॥२॥

पीअहि त पाणी आणी मीरा खाहि त पीसण जाउ ॥ पखा फेरी पैर मलोवा जपत रहा तेरा नाउ ॥३॥

लूण हरामी नानकु लाला बखसिहि तुधु वडिआई ॥ आदि जुगादि दइआपति दाता तुधु विणु मुकति न पाई ॥४॥६॥

(राग मारू -- SGGS 991) मारू महला १ ॥
कोई आखै भूतना को कहै बेताला ॥ कोई आखै आदमी नानकु वेचारा ॥१॥

भइआ दिवाना साह का नानकु बउराना ॥ हउ हरि बिनु अवरु न जाना ॥१॥ रहाउ ॥

तउ देवाना जाणीऐ जा भै देवाना होइ ॥ एकी साहिब बाहरा दूजा अवरु न जाणै कोइ ॥२॥

तउ देवाना जाणीऐ जा एका कार कमाइ ॥ हुकमु पछाणै खसम का दूजी अवर सिआणप काइ ॥३॥

तउ देवाना जाणीऐ जा साहिब धरे पिआरु ॥ मंदा जाणै आप कउ अवरु भला संसारु ॥४॥७॥

(राग मारू -- SGGS 991) मारू महला १ ॥
इहु धनु सरब रहिआ भरपूरि ॥ मनमुख फिरहि सि जाणहि दूरि ॥१॥

सो धनु वखरु नामु रिदै हमारै ॥ जिसु तू देहि तिसै निसतारै ॥१॥ रहाउ ॥

न इहु धनु जलै न तसकरु लै जाइ ॥ न इहु धनु डूबै न इसु धन कउ मिलै सजाइ ॥२॥

इसु धन की देखहु वडिआई ॥ सहजे माते अनदिनु जाई ॥३॥

इक बात अनूप सुनहु नर भाई ॥ इसु धन बिनु कहहु किनै परम गति पाई ॥४॥

भणति नानकु अकथ की कथा सुणाए ॥ सतिगुरु मिलै त इहु धनु पाए ॥५॥८॥

(राग मारू -- SGGS 991) मारू महला १ ॥
सूर सरु सोसि लै सोम सरु पोखि लै जुगति करि मरतु सु सनबंधु कीजै ॥ मीन की चपल सिउ जुगति मनु राखीऐ उडै नह हंसु नह कंधु छीजै ॥१॥

मूड़े काइचे भरमि भुला ॥ नह चीनिआ परमानंदु बैरागी ॥१॥ रहाउ ॥

अजर गहु जारि लै अमर गहु मारि लै भ्राति तजि छोडि तउ अपिउ पीजै ॥ मीन की चपल सिउ जुगति मनु राखीऐ उडै नह हंसु नह कंधु छीजै ॥२॥

भणति नानकु जनो रवै जे हरि मनो मन पवन सिउ अम्रितु पीजै ॥ मीन की चपल सिउ जुगति मनु राखीऐ उडै नह हंसु नह कंधु छीजै ॥३॥९॥

(राग मारू -- SGGS 992) मारू महला १ ॥
माइआ मुई न मनु मुआ सरु लहरी मै मतु ॥ बोहिथु जल सिरि तरि टिकै साचा वखरु जितु ॥ माणकु मन महि मनु मारसी सचि न लागै कतु ॥ राजा तखति टिकै गुणी भै पंचाइण रतु ॥१॥

बाबा साचा साहिबु दूरि न देखु ॥ सरब जोति जगजीवना सिरि सिरि साचा लेखु ॥१॥ रहाउ ॥

ब्रहमा बिसनु रिखी मुनी संकरु इंदु तपै भेखारी ॥ मानै हुकमु सोहै दरि साचै आकी मरहि अफारी ॥ जंगम जोध जती संनिआसी गुरि पूरै वीचारी ॥ बिनु सेवा फलु कबहु न पावसि सेवा करणी सारी ॥२॥

निधनिआ धनु निगुरिआ गुरु निमाणिआ तू माणु ॥ अंधुलै माणकु गुरु पकड़िआ निताणिआ तू ताणु ॥ होम जपा नही जाणिआ गुरमती साचु पछाणु ॥ नाम बिना नाही दरि ढोई झूठा आवण जाणु ॥३॥

साचा नामु सलाहीऐ साचे ते त्रिपति होइ ॥ गिआन रतनि मनु माजीऐ बहुड़ि न मैला होइ ॥ जब लगु साहिबु मनि वसै तब लगु बिघनु न होइ ॥ नानक सिरु दे छुटीऐ मनि तनि साचा सोइ ॥४॥१०॥

(राग मारू -- SGGS 992) मारू महला १ ॥
जोगी जुगति नामु निरमाइलु ता कै मैलु न राती ॥ प्रीतम नाथु सदा सचु संगे जनम मरण गति बीती ॥१॥

गुसाई तेरा कहा नामु कैसे जाती ॥ जा तउ भीतरि महलि बुलावहि पूछउ बात निरंती ॥१॥ रहाउ ॥

ब्रहमणु ब्रहम गिआन इसनानी हरि गुण पूजे पाती ॥ एको नामु एकु नाराइणु त्रिभवण एका जोती ॥२॥

जिहवा डंडी इहु घटु छाबा तोलउ नामु अजाची ॥ एको हाटु साहु सभना सिरि वणजारे इक भाती ॥३॥

दोवै सिरे सतिगुरू निबेड़े सो बूझै जिसु एक लिव लागी जीअहु रहै निभराती ॥ सबदु वसाए भरमु चुकाए सदा सेवकु दिनु राती ॥४॥

ऊपरि गगनु गगन परि गोरखु ता का अगमु गुरू पुनि वासी ॥ गुर बचनी बाहरि घरि एको नानकु भइआ उदासी ॥५॥११॥

(राग मारू -- SGGS 993) रागु मारू महला १ घरु ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
अहिनिसि जागै नीद न सोवै ॥ सो जाणै जिसु वेदन होवै ॥ प्रेम के कान लगे तन भीतरि वैदु कि जाणै कारी जीउ ॥१॥

जिस नो साचा सिफती लाए ॥ गुरमुखि विरले किसै बुझाए ॥ अम्रित की सार सोई जाणै जि अम्रित का वापारी जीउ ॥१॥ रहाउ ॥

पिर सेती धन प्रेमु रचाए ॥ गुर कै सबदि तथा चितु लाए ॥ सहज सेती धन खरी सुहेली त्रिसना तिखा निवारी जीउ ॥२॥

सहसा तोड़े भरमु चुकाए ॥ सहजे सिफती धणखु चड़ाए ॥ गुर कै सबदि मरै मनु मारे सुंदरि जोगाधारी जीउ ॥३॥

हउमै जलिआ मनहु विसारे ॥ जम पुरि वजहि खड़ग करारे ॥ अब कै कहिऐ नामु न मिलई तू सहु जीअड़े भारी जीउ ॥४॥

माइआ ममता पवहि खिआली ॥ जम पुरि फासहिगा जम जाली ॥ हेत के बंधन तोड़ि न साकहि ता जमु करे खुआरी जीउ ॥५॥

ना हउ करता ना मै कीआ ॥ अम्रितु नामु सतिगुरि दीआ ॥ जिसु तू देहि तिसै किआ चारा नानक सरणि तुमारी जीउ ॥६॥१॥१२॥

(राग मारू -- SGGS 1008) मारू असटपदीआ महला १ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
बेद पुराण कथे सुणे हारे मुनी अनेका ॥ अठसठि तीरथ बहु घणा भ्रमि थाके भेखा ॥ साचो साहिबु निरमलो मनि मानै एका ॥१॥

तू अजरावरु अमरु तू सभ चालणहारी ॥ नामु रसाइणु भाइ लै परहरि दुखु भारी ॥१॥ रहाउ ॥

हरि पड़ीऐ हरि बुझीऐ गुरमती नामि उधारा ॥ गुरि पूरै पूरी मति है पूरै सबदि बीचारा ॥ अठसठि तीरथ हरि नामु है किलविख काटणहारा ॥२॥

जलु बिलोवै जलु मथै ततु लोड़ै अंधु अगिआना ॥ गुरमती दधि मथीऐ अम्रितु पाईऐ नामु निधाना ॥ मनमुख ततु न जाणनी पसू माहि समाना ॥३॥

हउमै मेरा मरी मरु मरि जमै वारो वार ॥ गुर कै सबदे जे मरै फिरि मरै न दूजी वार ॥ गुरमती जगजीवनु मनि वसै सभि कुल उधारणहार ॥४॥

सचा वखरु नामु है सचा वापारा ॥ लाहा नामु संसारि है गुरमती वीचारा ॥ दूजै भाइ कार कमावणी नित तोटा सैसारा ॥५॥

साची संगति थानु सचु सचे घर बारा ॥ सचा भोजनु भाउ सचु सचु नामु अधारा ॥ सची बाणी संतोखिआ सचा सबदु वीचारा ॥६॥

रस भोगण पातिसाहीआ दुख सुख संघारा ॥ मोटा नाउ धराईऐ गलि अउगण भारा ॥ माणस दाति न होवई तू दाता सारा ॥७॥

अगम अगोचरु तू धणी अविगतु अपारा ॥ गुर सबदी दरु जोईऐ मुकते भंडारा ॥ नानक मेलु न चूकई साचे वापारा ॥८॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1009) मारू महला १ ॥
बिखु बोहिथा लादिआ दीआ समुंद मंझारि ॥ कंधी दिसि न आवई ना उरवारु न पारु ॥ वंझी हाथि न खेवटू जलु सागरु असरालु ॥१॥

बाबा जगु फाथा महा जालि ॥ गुर परसादी उबरे सचा नामु समालि ॥१॥ रहाउ ॥

सतिगुरू है बोहिथा सबदि लंघावणहारु ॥ तिथै पवणु न पावको ना जलु ना आकारु ॥ तिथै सचा सचि नाइ भवजल तारणहारु ॥२॥

गुरमुखि लंघे से पारि पए सचे सिउ लिव लाइ ॥ आवा गउणु निवारिआ जोती जोति मिलाइ ॥ गुरमती सहजु ऊपजै सचे रहै समाइ ॥३॥

सपु पिड़ाई पाईऐ बिखु अंतरि मनि रोसु ॥ पूरबि लिखिआ पाईऐ किस नो दीजै दोसु ॥ गुरमुखि गारड़ु जे सुणे मंने नाउ संतोसु ॥४॥

मागरमछु फहाईऐ कुंडी जालु वताइ ॥ दुरमति फाथा फाहीऐ फिरि फिरि पछोताइ ॥ जमण मरणु न सुझई किरतु न मेटिआ जाइ ॥५॥

हउमै बिखु पाइ जगतु उपाइआ सबदु वसै बिखु जाइ ॥ जरा जोहि न सकई सचि रहै लिव लाइ ॥ जीवन मुकतु सो आखीऐ जिसु विचहु हउमै जाइ ॥६॥

धंधै धावत जगु बाधिआ ना बूझै वीचारु ॥ जमण मरणु विसारिआ मनमुख मुगधु गवारु ॥ गुरि राखे से उबरे सचा सबदु वीचारि ॥७॥

सूहटु पिंजरि प्रेम कै बोलै बोलणहारु ॥ सचु चुगै अम्रितु पीऐ उडै त एका वार ॥ गुरि मिलिऐ खसमु पछाणीऐ कहु नानक मोख दुआरु ॥८॥२॥

(राग मारू -- SGGS 1010) मारू महला १ ॥
सबदि मरै ता मारि मरु भागो किसु पहि जाउ ॥ जिस कै डरि भै भागीऐ अम्रितु ता को नाउ ॥ मारहि राखहि एकु तू बीजउ नाही थाउ ॥१॥

बाबा मै कुचीलु काचउ मतिहीन ॥ नाम बिना को कछु नही गुरि पूरै पूरी मति कीन ॥१॥ रहाउ ॥

अवगणि सुभर गुण नही बिनु गुण किउ घरि जाउ ॥ सहजि सबदि सुखु ऊपजै बिनु भागा धनु नाहि ॥ जिन कै नामु न मनि वसै से बाधे दूख सहाहि ॥२॥

जिनी नामु विसारिआ से कितु आए संसारि ॥ आगै पाछै सुखु नही गाडे लादे छारु ॥ विछुड़िआ मेला नही दूखु घणो जम दुआरि ॥३॥

अगै किआ जाणा नाहि मै भूले तू समझाइ ॥ भूले मारगु जो दसे तिस कै लागउ पाइ ॥ गुर बिनु दाता को नही कीमति कहणु न जाइ ॥४॥

साजनु देखा ता गलि मिला साचु पठाइओ लेखु ॥ मुखि धिमाणै धन खड़ी गुरमुखि आखी देखु ॥ तुधु भावै तू मनि वसहि नदरी करमि विसेखु ॥५॥

भूख पिआसो जे भवै किआ तिसु मागउ देइ ॥ बीजउ सूझै को नही मनि तनि पूरनु देइ ॥ जिनि कीआ तिनि देखिआ आपि वडाई देइ ॥६॥

नगरी नाइकु नवतनो बालकु लील अनूपु ॥ नारि न पुरखु न पंखणू साचउ चतुरु सरूपु ॥ जो तिसु भावै सो थीऐ तू दीपकु तू धूपु ॥७॥

गीत साद चाखे सुणे बाद साद तनि रोगु ॥ सचु भावै साचउ चवै छूटै सोग विजोगु ॥ नानक नामु न वीसरै जो तिसु भावै सु होगु ॥८॥३॥

(राग मारू -- SGGS 1010) मारू महला १ ॥
साची कार कमावणी होरि लालच बादि ॥ इहु मनु साचै मोहिआ जिहवा सचि सादि ॥ बिनु नावै को रसु नही होरि चलहि बिखु लादि ॥१॥

ऐसा लाला मेरे लाल को सुणि खसम हमारे ॥ जिउ फुरमावहि तिउ चला सचु लाल पिआरे ॥१॥ रहाउ ॥

अनदिनु लाले चाकरी गोले सिरि मीरा ॥ गुर बचनी मनु वेचिआ सबदि मनु धीरा ॥ गुर पूरे साबासि है काटै मन पीरा ॥२॥

लाला गोला धणी को किआ कहउ वडिआईऐ ॥ भाणै बखसे पूरा धणी सचु कार कमाईऐ ॥ विछुड़िआ कउ मेलि लए गुर कउ बलि जाईऐ ॥३॥

लाले गोले मति खरी गुर की मति नीकी ॥ साची सुरति सुहावणी मनमुख मति फीकी ॥ मनु तनु तेरा तू प्रभू सचु धीरक धुर की ॥४॥

साचै बैसणु उठणा सचु भोजनु भाखिआ ॥ चिति सचै वितो सचा साचा रसु चाखिआ ॥ साचै घरि साचै रखे गुर बचनि सुभाखिआ ॥५॥

मनमुख कउ आलसु घणो फाथे ओजाड़ी ॥ फाथा चुगै नित चोगड़ी लगि बंधु विगाड़ी ॥ गुर परसादी मुकतु होइ साचे निज ताड़ी ॥६॥

अनहति लाला बेधिआ प्रभ हेति पिआरी ॥ बिनु साचे जीउ जलि बलउ झूठे वेकारी ॥ बादि कारा सभि छोडीआ साची तरु तारी ॥७॥

जिनी नामु विसारिआ तिना ठउर न ठाउ ॥ लालै लालचु तिआगिआ पाइआ हरि नाउ ॥ तू बखसहि ता मेलि लैहि नानक बलि जाउ ॥८॥४॥

(राग मारू -- SGGS 1011) मारू महला १ ॥
लालै गारबु छोडिआ गुर कै भै सहजि सुभाई ॥ लालै खसमु पछाणिआ वडी वडिआई ॥ खसमि मिलिऐ सुखु पाइआ कीमति कहणु न जाई ॥१॥

लाला गोला खसम का खसमै वडिआई ॥ गुर परसादी उबरे हरि की सरणाई ॥१॥ रहाउ ॥

लाले नो सिरि कार है धुरि खसमि फुरमाई ॥ लालै हुकमु पछाणिआ सदा रहै रजाई ॥ आपे मीरा बखसि लए वडी वडिआई ॥२॥

आपि सचा सभु सचु है गुर सबदि बुझाई ॥ तेरी सेवा सो करे जिस नो लैहि तू लाई ॥ बिनु सेवा किनै न पाइआ दूजै भरमि खुआई ॥३॥

सो किउ मनहु विसारीऐ नित देवै चड़ै सवाइआ ॥ जीउ पिंडु सभु तिस दा साहु तिनै विचि पाइआ ॥ जा क्रिपा करे ता सेवीऐ सेवि सचि समाइआ ॥४॥

लाला सो जीवतु मरै मरि विचहु आपु गवाए ॥ बंधन तूटहि मुकति होइ त्रिसना अगनि बुझाए ॥ सभ महि नामु निधानु है गुरमुखि को पाए ॥५॥

लाले विचि गुणु किछु नही लाला अवगणिआरु ॥ तुधु जेवडु दाता को नही तू बखसणहारु ॥ तेरा हुकमु लाला मंने एह करणी सारु ॥६॥

गुरु सागरु अम्रित सरु जो इछे सो फलु पाए ॥ नामु पदारथु अमरु है हिरदै मंनि वसाए ॥ गुर सेवा सदा सुखु है जिस नो हुकमु मनाए ॥७॥

सुइना रुपा सभ धातु है माटी रलि जाई ॥ बिनु नावै नालि न चलई सतिगुरि बूझ बुझाई ॥ नानक नामि रते से निरमले साचै रहे समाई ॥८॥५॥

(राग मारू -- SGGS 1012) मारू महला १ ॥
हुकमु भइआ रहणा नही धुरि फाटे चीरै ॥ एहु मनु अवगणि बाधिआ सहु देह सरीरै ॥ पूरै गुरि बखसाईअहि सभि गुनह फकीरै ॥१॥

किउ रहीऐ उठि चलणा बुझु सबद बीचारा ॥ जिसु तू मेलहि सो मिलै धुरि हुकमु अपारा ॥१॥ रहाउ ॥

जिउ तू राखहि तिउ रहा जो देहि सु खाउ ॥ जिउ तू चलावहि तिउ चला मुखि अम्रित नाउ ॥ मेरे ठाकुर हथि वडिआईआ मेलहि मनि चाउ ॥२॥

कीता किआ सालाहीऐ करि देखै सोई ॥ जिनि कीआ सो मनि वसै मै अवरु न कोई ॥ सो साचा सालाहीऐ साची पति होई ॥३॥

पंडितु पड़ि न पहुचई बहु आल जंजाला ॥ पाप पुंन दुइ संगमे खुधिआ जमकाला ॥ विछोड़ा भउ वीसरै पूरा रखवाला ॥४॥

जिन की लेखै पति पवै से पूरे भाई ॥ पूरे पूरी मति है सची वडिआई ॥ देदे तोटि न आवई लै लै थकि पाई ॥५॥

खार समुद्रु ढंढोलीऐ इकु मणीआ पावै ॥ दुइ दिन चारि सुहावणा माटी तिसु खावै ॥ गुरु सागरु सति सेवीऐ दे तोटि न आवै ॥६॥

मेरे प्रभ भावनि से ऊजले सभ मैलु भरीजै ॥ मैला ऊजलु ता थीऐ पारस संगि भीजै ॥ वंनी साचे लाल की किनि कीमति कीजै ॥७॥

भेखी हाथ न लभई तीरथि नही दाने ॥ पूछउ बेद पड़ंतिआ मूठी विणु माने ॥ नानक कीमति सो करे पूरा गुरु गिआने ॥८॥६॥

(राग मारू -- SGGS 1012) मारू महला १ ॥
मनमुखु लहरि घरु तजि विगूचै अवरा के घर हेरै ॥ ग्रिह धरमु गवाए सतिगुरु न भेटै दुरमति घूमन घेरै ॥ दिसंतरु भवै पाठ पड़ि थाका त्रिसना होइ वधेरै ॥ काची पिंडी सबदु न चीनै उदरु भरै जैसे ढोरै ॥१॥

बाबा ऐसी रवत रवै संनिआसी ॥ गुर कै सबदि एक लिव लागी तेरै नामि रते त्रिपतासी ॥१॥ रहाउ ॥

घोली गेरू रंगु चड़ाइआ वसत्र भेख भेखारी ॥ कापड़ फारि बनाई खिंथा झोली माइआधारी ॥ घरि घरि मागै जगु परबोधै मनि अंधै पति हारी ॥ भरमि भुलाणा सबदु न चीनै जूऐ बाजी हारी ॥२॥

अंतरि अगनि न गुर बिनु बूझै बाहरि पूअर तापै ॥ गुर सेवा बिनु भगति न होवी किउ करि चीनसि आपै ॥ निंदा करि करि नरक निवासी अंतरि आतम जापै ॥ अठसठि तीरथ भरमि विगूचहि किउ मलु धोपै पापै ॥३॥

छाणी खाकु बिभूत चड़ाई माइआ का मगु जोहै ॥ अंतरि बाहरि एकु न जाणै साचु कहे ते छोहै ॥ पाठु पड़ै मुखि झूठो बोलै निगुरे की मति ओहै ॥ नामु न जपई किउ सुखु पावै बिनु नावै किउ सोहै ॥४॥

मूंडु मुडाइ जटा सिख बाधी मोनि रहै अभिमाना ॥ मनूआ डोलै दह दिस धावै बिनु रत आतम गिआना ॥ अम्रितु छोडि महा बिखु पीवै माइआ का देवाना ॥ किरतु न मिटई हुकमु न बूझै पसूआ माहि समाना ॥५॥

हाथ कमंडलु कापड़ीआ मनि त्रिसना उपजी भारी ॥ इसत्री तजि करि कामि विआपिआ चितु लाइआ पर नारी ॥ सिख करे करि सबदु न चीनै ल्मपटु है बाजारी ॥ अंतरि बिखु बाहरि निभराती ता जमु करे खुआरी ॥६॥

सो संनिआसी जो सतिगुर सेवै विचहु आपु गवाए ॥ छादन भोजन की आस न करई अचिंतु मिलै सो पाए ॥ बकै न बोलै खिमा धनु संग्रहै तामसु नामि जलाए ॥ धनु गिरही संनिआसी जोगी जि हरि चरणी चितु लाए ॥७॥

आस निरास रहै संनिआसी एकसु सिउ लिव लाए ॥ हरि रसु पीवै ता साति आवै निज घरि ताड़ी लाए ॥ मनूआ न डोलै गुरमुखि बूझै धावतु वरजि रहाए ॥ ग्रिहु सरीरु गुरमती खोजे नामु पदारथु पाए ॥८॥

ब्रहमा बिसनु महेसु सरेसट नामि रते वीचारी ॥ खाणी बाणी गगन पताली जंता जोति तुमारी ॥ सभि सुख मुकति नाम धुनि बाणी सचु नामु उर धारी ॥ नाम बिना नही छूटसि नानक साची तरु तू तारी ॥९॥७॥

(राग मारू -- SGGS 1013) मारू महला १ ॥
मात पिता संजोगि उपाए रकतु बिंदु मिलि पिंडु करे ॥ अंतरि गरभ उरधि लिव लागी सो प्रभु सारे दाति करे ॥१॥

संसारु भवजलु किउ तरै ॥ गुरमुखि नामु निरंजनु पाईऐ अफरिओ भारु अफारु टरै ॥१॥ रहाउ ॥

ते गुण विसरि गए अपराधी मै बउरा किआ करउ हरे ॥ तू दाता दइआलु सभै सिरि अहिनिसि दाति समारि करे ॥२॥

चारि पदारथ लै जगि जनमिआ सिव सकती घरि वासु धरे ॥ लागी भूख माइआ मगु जोहै मुकति पदारथु मोहि खरे ॥३॥

करण पलाव करे नही पावै इत उत ढूढत थाकि परे ॥ कामि क्रोधि अहंकारि विआपे कूड़ कुट्मब सिउ प्रीति करे ॥४॥

खावै भोगै सुणि सुणि देखै पहिरि दिखावै काल घरे ॥ बिनु गुर सबद न आपु पछाणै बिनु हरि नाम न कालु टरे ॥५॥

जेता मोहु हउमै करि भूले मेरी मेरी करते छीनि खरे ॥ तनु धनु बिनसै सहसै सहसा फिरि पछुतावै मुखि धूरि परे ॥६॥

बिरधि भइआ जोबनु तनु खिसिआ कफु कंठु बिरूधो नैनहु नीरु ढरे ॥ चरण रहे कर क्मपण लागे साकत रामु न रिदै हरे ॥७॥

सुरति गई काली हू धउले किसै न भावै रखिओ घरे ॥ बिसरत नाम ऐसे दोख लागहि जमु मारि समारे नरकि खरे ॥८॥

पूरब जनम को लेखु न मिटई जनमि मरै का कउ दोसु धरे ॥ बिनु गुर बादि जीवणु होरु मरणा बिनु गुर सबदै जनमु जरे ॥९॥

खुसी खुआर भए रस भोगण फोकट करम विकार करे ॥ नामु बिसारि लोभि मूलु खोइओ सिरि धरम राइ का डंडु परे ॥१०॥

गुरमुखि राम नाम गुण गावहि जा कउ हरि प्रभु नदरि करे ॥ ते निरमल पुरख अपर्मपर पूरे ते जग महि गुर गोविंद हरे ॥११॥

हरि सिमरहु गुर बचन समारहु संगति हरि जन भाउ करे ॥ हरि जन गुरु परधानु दुआरै नानक तिन जन की रेणु हरे ॥१२॥८॥


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