Pt 15 - गुरू नानक देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 15 - Guru Nanak Dev ji (Mahalla 1) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग रामकली दखणी -- SGGS 936) ड़ाड़ै रूड़ा हरि जीउ सोई ॥ तिसु बिनु राजा अवरु न कोई ॥ ड़ाड़ै गारुड़ु तुम सुणहु हरि वसै मन माहि ॥ गुर परसादी हरि पाईऐ मतु को भरमि भुलाहि ॥ सो साहु साचा जिसु हरि धनु रासि ॥ गुरमुखि पूरा तिसु साबासि ॥ रूड़ी बाणी हरि पाइआ गुर सबदी बीचारि ॥ आपु गइआ दुखु कटिआ हरि वरु पाइआ नारि ॥४७॥

(राग रामकली दखणी -- SGGS 937) सुइना रुपा संचीऐ धनु काचा बिखु छारु ॥ साहु सदाए संचि धनु दुबिधा होइ खुआरु ॥ सचिआरी सचु संचिआ साचउ नामु अमोलु ॥ हरि निरमाइलु ऊजलो पति साची सचु बोलु ॥ साजनु मीतु सुजाणु तू तू सरवरु तू हंसु ॥ साचउ ठाकुरु मनि वसै हउ बलिहारी तिसु ॥ माइआ ममता मोहणी जिनि कीती सो जाणु ॥ बिखिआ अम्रितु एकु है बूझै पुरखु सुजाणु ॥४८॥

(राग रामकली दखणी -- SGGS 937) खिमा विहूणे खपि गए खूहणि लख असंख ॥ गणत न आवै किउ गणी खपि खपि मुए बिसंख ॥ खसमु पछाणै आपणा खूलै बंधु न पाइ ॥ सबदि महली खरा तू खिमा सचु सुख भाइ ॥ खरचु खरा धनु धिआनु तू आपे वसहि सरीरि ॥ मनि तनि मुखि जापै सदा गुण अंतरि मनि धीर ॥ हउमै खपै खपाइसी बीजउ वथु विकारु ॥ जंत उपाइ विचि पाइअनु करता अलगु अपारु ॥४९॥

(राग रामकली दखणी -- SGGS 937) स्रिसटे भेउ न जाणै कोइ ॥ स्रिसटा करै सु निहचउ होइ ॥ स्मपै कउ ईसरु धिआईऐ ॥ स्मपै पुरबि लिखे की पाईऐ ॥ स्मपै कारणि चाकर चोर ॥ स्मपै साथि न चालै होर ॥ बिनु साचे नही दरगह मानु ॥ हरि रसु पीवै छुटै निदानि ॥५०॥

(राग रामकली दखणी -- SGGS 937) हेरत हेरत हे सखी होइ रही हैरानु ॥ हउ हउ करती मै मुई सबदि रवै मनि गिआनु ॥ हार डोर कंकन घणे करि थाकी सीगारु ॥ मिलि प्रीतम सुखु पाइआ सगल गुणा गलि हारु ॥ नानक गुरमुखि पाईऐ हरि सिउ प्रीति पिआरु ॥ हरि बिनु किनि सुखु पाइआ देखहु मनि बीचारि ॥ हरि पड़णा हरि बुझणा हरि सिउ रखहु पिआरु ॥ हरि जपीऐ हरि धिआईऐ हरि का नामु अधारु ॥५१॥

(राग रामकली दखणी -- SGGS 937) लेखु न मिटई हे सखी जो लिखिआ करतारि ॥ आपे कारणु जिनि कीआ करि किरपा पगु धारि ॥ करते हथि वडिआईआ बूझहु गुर बीचारि ॥ लिखिआ फेरि न सकीऐ जिउ भावी तिउ सारि ॥ नदरि तेरी सुखु पाइआ नानक सबदु वीचारि ॥ मनमुख भूले पचि मुए उबरे गुर बीचारि ॥ जि पुरखु नदरि न आवई तिस का किआ करि कहिआ जाइ ॥ बलिहारी गुर आपणे जिनि हिरदै दिता दिखाइ ॥५२॥

(राग रामकली दखणी -- SGGS 937) पाधा पड़िआ आखीऐ बिदिआ बिचरै सहजि सुभाइ ॥ बिदिआ सोधै ततु लहै राम नाम लिव लाइ ॥ मनमुखु बिदिआ बिक्रदा बिखु खटे बिखु खाइ ॥ मूरखु सबदु न चीनई सूझ बूझ नह काइ ॥५३॥

(राग रामकली दखणी -- SGGS 938) पाधा गुरमुखि आखीऐ चाटड़िआ मति देइ ॥ नामु समालहु नामु संगरहु लाहा जग महि लेइ ॥ सची पटी सचु मनि पड़ीऐ सबदु सु सारु ॥ नानक सो पड़िआ सो पंडितु बीना जिसु राम नामु गलि हारु ॥५४॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 938) रामकली महला १ सिध गोसटि
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सिध सभा करि आसणि बैठे संत सभा जैकारो ॥ तिसु आगै रहरासि हमारी साचा अपर अपारो ॥ मसतकु काटि धरी तिसु आगै तनु मनु आगै देउ ॥ नानक संतु मिलै सचु पाईऐ सहज भाइ जसु लेउ ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 938) किआ भवीऐ सचि सूचा होइ ॥ साच सबद बिनु मुकति न कोइ ॥१॥ रहाउ ॥

(राग रामकली -- SGGS 938) कवन तुमे किआ नाउ तुमारा कउनु मारगु कउनु सुआओ ॥ साचु कहउ अरदासि हमारी हउ संत जना बलि जाओ ॥ कह बैसहु कह रहीऐ बाले कह आवहु कह जाहो ॥ नानकु बोलै सुणि बैरागी किआ तुमारा राहो ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 938) घटि घटि बैसि निरंतरि रहीऐ चालहि सतिगुर भाए ॥ सहजे आए हुकमि सिधाए नानक सदा रजाए ॥ आसणि बैसणि थिरु नाराइणु ऐसी गुरमति पाए ॥ गुरमुखि बूझै आपु पछाणै सचे सचि समाए ॥३॥

(राग रामकली -- SGGS 938) दुनीआ सागरु दुतरु कहीऐ किउ करि पाईऐ पारो ॥ चरपटु बोलै अउधू नानक देहु सचा बीचारो ॥ आपे आखै आपे समझै तिसु किआ उतरु दीजै ॥ साचु कहहु तुम पारगरामी तुझु किआ बैसणु दीजै ॥४॥

(राग रामकली -- SGGS 938) जैसे जल महि कमलु निरालमु मुरगाई नै साणे ॥ सुरति सबदि भव सागरु तरीऐ नानक नामु वखाणे ॥ रहहि इकांति एको मनि वसिआ आसा माहि निरासो ॥ अगमु अगोचरु देखि दिखाए नानकु ता का दासो ॥५॥

(राग रामकली -- SGGS 938) सुणि सुआमी अरदासि हमारी पूछउ साचु बीचारो ॥ रोसु न कीजै उतरु दीजै किउ पाईऐ गुर दुआरो ॥ इहु मनु चलतउ सच घरि बैसै नानक नामु अधारो ॥ आपे मेलि मिलाए करता लागै साचि पिआरो ॥६॥

(राग रामकली -- SGGS 938) हाटी बाटी रहहि निराले रूखि बिरखि उदिआने ॥ कंद मूलु अहारो खाईऐ अउधू बोलै गिआने ॥ तीरथि नाईऐ सुखु फलु पाईऐ मैलु न लागै काई ॥ गोरख पूतु लोहारीपा बोलै जोग जुगति बिधि साई ॥७॥

(राग रामकली -- SGGS 939) हाटी बाटी नीद न आवै पर घरि चितु न डोलाई ॥ बिनु नावै मनु टेक न टिकई नानक भूख न जाई ॥ हाटु पटणु घरु गुरू दिखाइआ सहजे सचु वापारो ॥ खंडित निद्रा अलप अहारं नानक ततु बीचारो ॥८॥

(राग रामकली -- SGGS 939) दरसनु भेख करहु जोगिंद्रा मुंद्रा झोली खिंथा ॥ बारह अंतरि एकु सरेवहु खटु दरसन इक पंथा ॥ इन बिधि मनु समझाईऐ पुरखा बाहुड़ि चोट न खाईऐ ॥ नानकु बोलै गुरमुखि बूझै जोग जुगति इव पाईऐ ॥९॥

(राग रामकली -- SGGS 939) अंतरि सबदु निरंतरि मुद्रा हउमै ममता दूरि करी ॥ कामु क्रोधु अहंकारु निवारै गुर कै सबदि सु समझ परी ॥ खिंथा झोली भरिपुरि रहिआ नानक तारै एकु हरी ॥ साचा साहिबु साची नाई परखै गुर की बात खरी ॥१०॥

(राग रामकली -- SGGS 939) ऊंधउ खपरु पंच भू टोपी ॥ कांइआ कड़ासणु मनु जागोटी ॥ सतु संतोखु संजमु है नालि ॥ नानक गुरमुखि नामु समालि ॥११॥

(राग रामकली -- SGGS 939) कवनु सु गुपता कवनु सु मुकता ॥ कवनु सु अंतरि बाहरि जुगता ॥ कवनु सु आवै कवनु सु जाइ ॥ कवनु सु त्रिभवणि रहिआ समाइ ॥१२॥

(राग रामकली -- SGGS 939) घटि घटि गुपता गुरमुखि मुकता ॥ अंतरि बाहरि सबदि सु जुगता ॥ मनमुखि बिनसै आवै जाइ ॥ नानक गुरमुखि साचि समाइ ॥१३॥

(राग रामकली -- SGGS 939) किउ करि बाधा सरपनि खाधा ॥ किउ करि खोइआ किउ करि लाधा ॥ किउ करि निरमलु किउ करि अंधिआरा ॥ इहु ततु बीचारै सु गुरू हमारा ॥१४॥

(राग रामकली -- SGGS 939) दुरमति बाधा सरपनि खाधा ॥ मनमुखि खोइआ गुरमुखि लाधा ॥ सतिगुरु मिलै अंधेरा जाइ ॥ नानक हउमै मेटि समाइ ॥१५॥

(राग रामकली -- SGGS 939) सुंन निरंतरि दीजै बंधु ॥ उडै न हंसा पड़ै न कंधु ॥ सहज गुफा घरु जाणै साचा ॥ नानक साचे भावै साचा ॥१६॥

(राग रामकली -- SGGS 939) किसु कारणि ग्रिहु तजिओ उदासी ॥ किसु कारणि इहु भेखु निवासी ॥ किसु वखर के तुम वणजारे ॥ किउ करि साथु लंघावहु पारे ॥१७॥

(राग रामकली -- SGGS 939) गुरमुखि खोजत भए उदासी ॥ दरसन कै ताई भेख निवासी ॥ साच वखर के हम वणजारे ॥ नानक गुरमुखि उतरसि पारे ॥१८॥

(राग रामकली -- SGGS 939) कितु बिधि पुरखा जनमु वटाइआ ॥ काहे कउ तुझु इहु मनु लाइआ ॥ कितु बिधि आसा मनसा खाई ॥ कितु बिधि जोति निरंतरि पाई ॥ बिनु दंता किउ खाईऐ सारु ॥ नानक साचा करहु बीचारु ॥१९॥

(राग रामकली -- SGGS 940) सतिगुर कै जनमे गवनु मिटाइआ ॥ अनहति राते इहु मनु लाइआ ॥ मनसा आसा सबदि जलाई ॥ गुरमुखि जोति निरंतरि पाई ॥ त्रै गुण मेटे खाईऐ सारु ॥ नानक तारे तारणहारु ॥२०॥

(राग रामकली -- SGGS 940) आदि कउ कवनु बीचारु कथीअले सुंन कहा घर वासो ॥ गिआन की मुद्रा कवन कथीअले घटि घटि कवन निवासो ॥ काल का ठीगा किउ जलाईअले किउ निरभउ घरि जाईऐ ॥ सहज संतोख का आसणु जाणै किउ छेदे बैराईऐ ॥ गुर कै सबदि हउमै बिखु मारै ता निज घरि होवै वासो ॥ जिनि रचि रचिआ तिसु सबदि पछाणै नानकु ता का दासो ॥२१॥

(राग रामकली -- SGGS 940) कहा ते आवै कहा इहु जावै कहा इहु रहै समाई ॥ एसु सबद कउ जो अरथावै तिसु गुर तिलु न तमाई ॥ किउ ततै अविगतै पावै गुरमुखि लगै पिआरो ॥ आपे सुरता आपे करता कहु नानक बीचारो ॥ हुकमे आवै हुकमे जावै हुकमे रहै समाई ॥ पूरे गुर ते साचु कमावै गति मिति सबदे पाई ॥२२॥

(राग रामकली -- SGGS 940) आदि कउ बिसमादु बीचारु कथीअले सुंन निरंतरि वासु लीआ ॥ अकलपत मुद्रा गुर गिआनु बीचारीअले घटि घटि साचा सरब जीआ ॥ गुर बचनी अविगति समाईऐ ततु निरंजनु सहजि लहै ॥ नानक दूजी कार न करणी सेवै सिखु सु खोजि लहै ॥ हुकमु बिसमादु हुकमि पछाणै जीअ जुगति सचु जाणै सोई ॥ आपु मेटि निरालमु होवै अंतरि साचु जोगी कहीऐ सोई ॥२३॥

(राग रामकली -- SGGS 940) अविगतो निरमाइलु उपजे निरगुण ते सरगुणु थीआ ॥ सतिगुर परचै परम पदु पाईऐ साचै सबदि समाइ लीआ ॥ एके कउ सचु एका जाणै हउमै दूजा दूरि कीआ ॥ सो जोगी गुर सबदु पछाणै अंतरि कमलु प्रगासु थीआ ॥ जीवतु मरै ता सभु किछु सूझै अंतरि जाणै सरब दइआ ॥ नानक ता कउ मिलै वडाई आपु पछाणै सरब जीआ ॥२४॥

(राग रामकली -- SGGS 940) साचौ उपजै साचि समावै साचे सूचे एक मइआ ॥ झूठे आवहि ठवर न पावहि दूजै आवा गउणु भइआ ॥ आवा गउणु मिटै गुर सबदी आपे परखै बखसि लइआ ॥ एका बेदन दूजै बिआपी नामु रसाइणु वीसरिआ ॥ सो बूझै जिसु आपि बुझाए गुर कै सबदि सु मुकतु भइआ ॥ नानक तारे तारणहारा हउमै दूजा परहरिआ ॥२५॥

(राग रामकली -- SGGS 941) मनमुखि भूलै जम की काणि ॥ पर घरु जोहै हाणे हाणि ॥ मनमुखि भरमि भवै बेबाणि ॥ वेमारगि मूसै मंत्रि मसाणि ॥ सबदु न चीनै लवै कुबाणि ॥ नानक साचि रते सुखु जाणि ॥२६॥

(राग रामकली -- SGGS 941) गुरमुखि साचे का भउ पावै ॥ गुरमुखि बाणी अघड़ु घड़ावै ॥ गुरमुखि निरमल हरि गुण गावै ॥ गुरमुखि पवित्रु परम पदु पावै ॥ गुरमुखि रोमि रोमि हरि धिआवै ॥ नानक गुरमुखि साचि समावै ॥२७॥

(राग रामकली -- SGGS 941) गुरमुखि परचै बेद बीचारी ॥ गुरमुखि परचै तरीऐ तारी ॥ गुरमुखि परचै सु सबदि गिआनी ॥ गुरमुखि परचै अंतर बिधि जानी ॥ गुरमुखि पाईऐ अलख अपारु ॥ नानक गुरमुखि मुकति दुआरु ॥२८॥

(राग रामकली -- SGGS 941) गुरमुखि अकथु कथै बीचारि ॥ गुरमुखि निबहै सपरवारि ॥ गुरमुखि जपीऐ अंतरि पिआरि ॥ गुरमुखि पाईऐ सबदि अचारि ॥ सबदि भेदि जाणै जाणाई ॥ नानक हउमै जालि समाई ॥२९॥

(राग रामकली -- SGGS 941) गुरमुखि धरती साचै साजी ॥ तिस महि ओपति खपति सु बाजी ॥ गुर कै सबदि रपै रंगु लाइ ॥ साचि रतउ पति सिउ घरि जाइ ॥ साच सबद बिनु पति नही पावै ॥ नानक बिनु नावै किउ साचि समावै ॥३०॥

(राग रामकली -- SGGS 941) गुरमुखि असट सिधी सभि बुधी ॥ गुरमुखि भवजलु तरीऐ सच सुधी ॥ गुरमुखि सर अपसर बिधि जाणै ॥ गुरमुखि परविरति नरविरति पछाणै ॥ गुरमुखि तारे पारि उतारे ॥ नानक गुरमुखि सबदि निसतारे ॥३१॥

(राग रामकली -- SGGS 941) नामे राते हउमै जाइ ॥ नामि रते सचि रहे समाइ ॥ नामि रते जोग जुगति बीचारु ॥ नामि रते पावहि मोख दुआरु ॥ नामि रते त्रिभवण सोझी होइ ॥ नानक नामि रते सदा सुखु होइ ॥३२॥

(राग रामकली -- SGGS 941) नामि रते सिध गोसटि होइ ॥ नामि रते सदा तपु होइ ॥ नामि रते सचु करणी सारु ॥ नामि रते गुण गिआन बीचारु ॥ बिनु नावै बोलै सभु वेकारु ॥ नानक नामि रते तिन कउ जैकारु ॥३३॥

(राग रामकली -- SGGS 941) पूरे गुर ते नामु पाइआ जाइ ॥ जोग जुगति सचि रहै समाइ ॥ बारह महि जोगी भरमाए संनिआसी छिअ चारि ॥ गुर कै सबदि जो मरि जीवै सो पाए मोख दुआरु ॥ बिनु सबदै सभि दूजै लागे देखहु रिदै बीचारि ॥ नानक वडे से वडभागी जिनी सचु रखिआ उर धारि ॥३४॥

(राग रामकली -- SGGS 942) गुरमुखि रतनु लहै लिव लाइ ॥ गुरमुखि परखै रतनु सुभाइ ॥ गुरमुखि साची कार कमाइ ॥ गुरमुखि साचे मनु पतीआइ ॥ गुरमुखि अलखु लखाए तिसु भावै ॥ नानक गुरमुखि चोट न खावै ॥३५॥

(राग रामकली -- SGGS 942) गुरमुखि नामु दानु इसनानु ॥ गुरमुखि लागै सहजि धिआनु ॥ गुरमुखि पावै दरगह मानु ॥ गुरमुखि भउ भंजनु परधानु ॥ गुरमुखि करणी कार कराए ॥ नानक गुरमुखि मेलि मिलाए ॥३६॥

(राग रामकली -- SGGS 942) गुरमुखि सासत्र सिम्रिति बेद ॥ गुरमुखि पावै घटि घटि भेद ॥ गुरमुखि वैर विरोध गवावै ॥ गुरमुखि सगली गणत मिटावै ॥ गुरमुखि राम नाम रंगि राता ॥ नानक गुरमुखि खसमु पछाता ॥३७॥

(राग रामकली -- SGGS 942) बिनु गुर भरमै आवै जाइ ॥ बिनु गुर घाल न पवई थाइ ॥ बिनु गुर मनूआ अति डोलाइ ॥ बिनु गुर त्रिपति नही बिखु खाइ ॥ बिनु गुर बिसीअरु डसै मरि वाट ॥ नानक गुर बिनु घाटे घाट ॥३८॥

(राग रामकली -- SGGS 942) जिसु गुरु मिलै तिसु पारि उतारै ॥ अवगण मेटै गुणि निसतारै ॥ मुकति महा सुख गुर सबदु बीचारि ॥ गुरमुखि कदे न आवै हारि ॥ तनु हटड़ी इहु मनु वणजारा ॥ नानक सहजे सचु वापारा ॥३९॥

(राग रामकली -- SGGS 942) गुरमुखि बांधिओ सेतु बिधातै ॥ लंका लूटी दैत संतापै ॥ रामचंदि मारिओ अहि रावणु ॥ भेदु बभीखण गुरमुखि परचाइणु ॥ गुरमुखि साइरि पाहण तारे ॥ गुरमुखि कोटि तेतीस उधारे ॥४०॥

(राग रामकली -- SGGS 942) गुरमुखि चूकै आवण जाणु ॥ गुरमुखि दरगह पावै माणु ॥ गुरमुखि खोटे खरे पछाणु ॥ गुरमुखि लागै सहजि धिआनु ॥ गुरमुखि दरगह सिफति समाइ ॥ नानक गुरमुखि बंधु न पाइ ॥४१॥

(राग रामकली -- SGGS 942) गुरमुखि नामु निरंजन पाए ॥ गुरमुखि हउमै सबदि जलाए ॥ गुरमुखि साचे के गुण गाए ॥ गुरमुखि साचै रहै समाए ॥ गुरमुखि साचि नामि पति ऊतम होइ ॥ नानक गुरमुखि सगल भवण की सोझी होइ ॥४२॥

(राग रामकली -- SGGS 942) कवण मूलु कवण मति वेला ॥ तेरा कवणु गुरू जिस का तू चेला ॥ कवण कथा ले रहहु निराले ॥ बोलै नानकु सुणहु तुम बाले ॥ एसु कथा का देइ बीचारु ॥ भवजलु सबदि लंघावणहारु ॥४३॥

(राग रामकली -- SGGS 943) पवन अर्मभु सतिगुर मति वेला ॥ सबदु गुरू सुरति धुनि चेला ॥ अकथ कथा ले रहउ निराला ॥ नानक जुगि जुगि गुर गोपाला ॥ एकु सबदु जितु कथा वीचारी ॥ गुरमुखि हउमै अगनि निवारी ॥४४॥

(राग रामकली -- SGGS 943) मैण के दंत किउ खाईऐ सारु ॥ जितु गरबु जाइ सु कवणु आहारु ॥ हिवै का घरु मंदरु अगनि पिराहनु ॥ कवन गुफा जितु रहै अवाहनु ॥ इत उत किस कउ जाणि समावै ॥ कवन धिआनु मनु मनहि समावै ॥४५॥

(राग रामकली -- SGGS 943) हउ हउ मै मै विचहु खोवै ॥ दूजा मेटै एको होवै ॥ जगु करड़ा मनमुखु गावारु ॥ सबदु कमाईऐ खाईऐ सारु ॥ अंतरि बाहरि एको जाणै ॥ नानक अगनि मरै सतिगुर कै भाणै ॥४६॥

(राग रामकली -- SGGS 943) सच भै राता गरबु निवारै ॥ एको जाता सबदु वीचारै ॥ सबदु वसै सचु अंतरि हीआ ॥ तनु मनु सीतलु रंगि रंगीआ ॥ कामु क्रोधु बिखु अगनि निवारे ॥ नानक नदरी नदरि पिआरे ॥४७॥

(राग रामकली -- SGGS 943) कवन मुखि चंदु हिवै घरु छाइआ ॥ कवन मुखि सूरजु तपै तपाइआ ॥ कवन मुखि कालु जोहत नित रहै ॥ कवन बुधि गुरमुखि पति रहै ॥ कवनु जोधु जो कालु संघारै ॥ बोलै बाणी नानकु बीचारै ॥४८॥

(राग रामकली -- SGGS 943) सबदु भाखत ससि जोति अपारा ॥ ससि घरि सूरु वसै मिटै अंधिआरा ॥ सुखु दुखु सम करि नामु अधारा ॥ आपे पारि उतारणहारा ॥ गुर परचै मनु साचि समाइ ॥ प्रणवति नानकु कालु न खाइ ॥४९॥

(राग रामकली -- SGGS 943) नाम ततु सभ ही सिरि जापै ॥ बिनु नावै दुखु कालु संतापै ॥ ततो ततु मिलै मनु मानै ॥ दूजा जाइ इकतु घरि आनै ॥ बोलै पवना गगनु गरजै ॥ नानक निहचलु मिलणु सहजै ॥५०॥

(राग रामकली -- SGGS 943) अंतरि सुंनं बाहरि सुंनं त्रिभवण सुंन मसुंनं ॥ चउथे सुंनै जो नरु जाणै ता कउ पापु न पुंनं ॥ घटि घटि सुंन का जाणै भेउ ॥ आदि पुरखु निरंजन देउ ॥ जो जनु नाम निरंजन राता ॥ नानक सोई पुरखु बिधाता ॥५१॥

(राग रामकली -- SGGS 943) सुंनो सुंनु कहै सभु कोई ॥ अनहत सुंनु कहा ते होई ॥ अनहत सुंनि रते से कैसे ॥ जिस ते उपजे तिस ही जैसे ॥ ओइ जनमि न मरहि न आवहि जाहि ॥ नानक गुरमुखि मनु समझाहि ॥५२॥

(राग रामकली -- SGGS 943) नउ सर सुभर दसवै पूरे ॥ तह अनहत सुंन वजावहि तूरे ॥ साचै राचे देखि हजूरे ॥ घटि घटि साचु रहिआ भरपूरे ॥ गुपती बाणी परगटु होइ ॥ नानक परखि लए सचु सोइ ॥५३॥

(राग रामकली -- SGGS 944) सहज भाइ मिलीऐ सुखु होवै ॥ गुरमुखि जागै नीद न सोवै ॥ सुंन सबदु अपर्मपरि धारै ॥ कहते मुकतु सबदि निसतारै ॥ गुर की दीखिआ से सचि राते ॥ नानक आपु गवाइ मिलण नही भ्राते ॥५४॥

(राग रामकली -- SGGS 944) कुबुधि चवावै सो कितु ठाइ ॥ किउ ततु न बूझै चोटा खाइ ॥ जम दरि बाधे कोइ न राखै ॥ बिनु सबदै नाही पति साखै ॥ किउ करि बूझै पावै पारु ॥ नानक मनमुखि न बुझै गवारु ॥५५॥

(राग रामकली -- SGGS 944) कुबुधि मिटै गुर सबदु बीचारि ॥ सतिगुरु भेटै मोख दुआर ॥ ततु न चीनै मनमुखु जलि जाइ ॥ दुरमति विछुड़ि चोटा खाइ ॥ मानै हुकमु सभे गुण गिआन ॥ नानक दरगह पावै मानु ॥५६॥

(राग रामकली -- SGGS 944) साचु वखरु धनु पलै होइ ॥ आपि तरै तारे भी सोइ ॥ सहजि रता बूझै पति होइ ॥ ता की कीमति करै न कोइ ॥ जह देखा तह रहिआ समाइ ॥ नानक पारि परै सच भाइ ॥५७॥

(राग रामकली -- SGGS 944) सु सबद का कहा वासु कथीअले जितु तरीऐ भवजलु संसारो ॥ त्रै सत अंगुल वाई कहीऐ तिसु कहु कवनु अधारो ॥ बोलै खेलै असथिरु होवै किउ करि अलखु लखाए ॥ सुणि सुआमी सचु नानकु प्रणवै अपणे मन समझाए ॥ गुरमुखि सबदे सचि लिव लागै करि नदरी मेलि मिलाए ॥ आपे दाना आपे बीना पूरै भागि समाए ॥५८॥

(राग रामकली -- SGGS 944) सु सबद कउ निरंतरि वासु अलखं जह देखा तह सोई ॥ पवन का वासा सुंन निवासा अकल कला धर सोई ॥ नदरि करे सबदु घट महि वसै विचहु भरमु गवाए ॥ तनु मनु निरमलु निरमल बाणी नामो मंनि वसाए ॥ सबदि गुरू भवसागरु तरीऐ इत उत एको जाणै ॥ चिहनु वरनु नही छाइआ माइआ नानक सबदु पछाणै ॥५९॥

(राग रामकली -- SGGS 944) त्रै सत अंगुल वाई अउधू सुंन सचु आहारो ॥ गुरमुखि बोलै ततु बिरोलै चीनै अलख अपारो ॥ त्रै गुण मेटै सबदु वसाए ता मनि चूकै अहंकारो ॥ अंतरि बाहरि एको जाणै ता हरि नामि लगै पिआरो ॥ सुखमना इड़ा पिंगुला बूझै जा आपे अलखु लखाए ॥ नानक तिहु ते ऊपरि साचा सतिगुर सबदि समाए ॥६०॥

(राग रामकली -- SGGS 944) मन का जीउ पवनु कथीअले पवनु कहा रसु खाई ॥ गिआन की मुद्रा कवन अउधू सिध की कवन कमाई ॥ बिनु सबदै रसु न आवै अउधू हउमै पिआस न जाई ॥ सबदि रते अम्रित रसु पाइआ साचे रहे अघाई ॥ कवन बुधि जितु असथिरु रहीऐ कितु भोजनि त्रिपतासै ॥ नानक दुखु सुखु सम करि जापै सतिगुर ते कालु न ग्रासै ॥६१॥

(राग रामकली -- SGGS 945) रंगि न राता रसि नही माता ॥ बिनु गुर सबदै जलि बलि ताता ॥ बिंदु न राखिआ सबदु न भाखिआ ॥ पवनु न साधिआ सचु न अराधिआ ॥ अकथ कथा ले सम करि रहै ॥ तउ नानक आतम राम कउ लहै ॥६२॥

(राग रामकली -- SGGS 945) गुर परसादी रंगे राता ॥ अम्रितु पीआ साचे माता ॥ गुर वीचारी अगनि निवारी ॥ अपिउ पीओ आतम सुखु धारी ॥ सचु अराधिआ गुरमुखि तरु तारी ॥ नानक बूझै को वीचारी ॥६३॥

(राग रामकली -- SGGS 945) इहु मनु मैगलु कहा बसीअले कहा बसै इहु पवना ॥ कहा बसै सु सबदु अउधू ता कउ चूकै मन का भवना ॥ नदरि करे ता सतिगुरु मेले ता निज घरि वासा इहु मनु पाए ॥ आपै आपु खाइ ता निरमलु होवै धावतु वरजि रहाए ॥ किउ मूलु पछाणै आतमु जाणै किउ ससि घरि सूरु समावै ॥ गुरमुखि हउमै विचहु खोवै तउ नानक सहजि समावै ॥६४॥

(राग रामकली -- SGGS 945) इहु मनु निहचलु हिरदै वसीअले गुरमुखि मूलु पछाणि रहै ॥ नाभि पवनु घरि आसणि बैसै गुरमुखि खोजत ततु लहै ॥ सु सबदु निरंतरि निज घरि आछै त्रिभवण जोति सु सबदि लहै ॥ खावै दूख भूख साचे की साचे ही त्रिपतासि रहै ॥ अनहद बाणी गुरमुखि जाणी बिरलो को अरथावै ॥ नानकु आखै सचु सुभाखै सचि रपै रंगु कबहू न जावै ॥६५॥

(राग रामकली -- SGGS 945) जा इहु हिरदा देह न होती तउ मनु कैठै रहता ॥ नाभि कमल असथ्मभु न होतो ता पवनु कवन घरि सहता ॥ रूपु न होतो रेख न काई ता सबदि कहा लिव लाई ॥ रकतु बिंदु की मड़ी न होती मिति कीमति नही पाई ॥ वरनु भेखु असरूपु न जापी किउ करि जापसि साचा ॥ नानक नामि रते बैरागी इब तब साचो साचा ॥६६॥

(राग रामकली -- SGGS 945) हिरदा देह न होती अउधू तउ मनु सुंनि रहै बैरागी ॥ नाभि कमलु असथ्मभु न होतो ता निज घरि बसतउ पवनु अनरागी ॥ रूपु न रेखिआ जाति न होती तउ अकुलीणि रहतउ सबदु सु सारु ॥ गउनु गगनु जब तबहि न होतउ त्रिभवण जोति आपे निरंकारु ॥ वरनु भेखु असरूपु सु एको एको सबदु विडाणी ॥ साच बिना सूचा को नाही नानक अकथ कहाणी ॥६७॥

(राग रामकली -- SGGS 946) कितु कितु बिधि जगु उपजै पुरखा कितु कितु दुखि बिनसि जाई ॥ हउमै विचि जगु उपजै पुरखा नामि विसरिऐ दुखु पाई ॥ गुरमुखि होवै सु गिआनु ततु बीचारै हउमै सबदि जलाए ॥ तनु मनु निरमलु निरमल बाणी साचै रहै समाए ॥ नामे नामि रहै बैरागी साचु रखिआ उरि धारे ॥ नानक बिनु नावै जोगु कदे न होवै देखहु रिदै बीचारे ॥६८॥

(राग रामकली -- SGGS 946) गुरमुखि साचु सबदु बीचारै कोइ ॥ गुरमुखि सचु बाणी परगटु होइ ॥ गुरमुखि मनु भीजै विरला बूझै कोइ ॥ गुरमुखि निज घरि वासा होइ ॥ गुरमुखि जोगी जुगति पछाणै ॥ गुरमुखि नानक एको जाणै ॥६९॥

(राग रामकली -- SGGS 946) बिनु सतिगुर सेवे जोगु न होई ॥ बिनु सतिगुर भेटे मुकति न कोई ॥ बिनु सतिगुर भेटे नामु पाइआ न जाइ ॥ बिनु सतिगुर भेटे महा दुखु पाइ ॥ बिनु सतिगुर भेटे महा गरबि गुबारि ॥ नानक बिनु गुर मुआ जनमु हारि ॥७०॥

(राग रामकली -- SGGS 946) गुरमुखि मनु जीता हउमै मारि ॥ गुरमुखि साचु रखिआ उर धारि ॥ गुरमुखि जगु जीता जमकालु मारि बिदारि ॥ गुरमुखि दरगह न आवै हारि ॥ गुरमुखि मेलि मिलाए सो जाणै ॥ नानक गुरमुखि सबदि पछाणै ॥७१॥

(राग रामकली -- SGGS 946) सबदै का निबेड़ा सुणि तू अउधू बिनु नावै जोगु न होई ॥ नामे राते अनदिनु माते नामै ते सुखु होई ॥ नामै ही ते सभु परगटु होवै नामे सोझी पाई ॥ बिनु नावै भेख करहि बहुतेरे सचै आपि खुआई ॥ सतिगुर ते नामु पाईऐ अउधू जोग जुगति ता होई ॥ करि बीचारु मनि देखहु नानक बिनु नावै मुकति न होई ॥७२॥

(राग रामकली -- SGGS 946) तेरी गति मिति तूहै जाणहि किआ को आखि वखाणै ॥ तू आपे गुपता आपे परगटु आपे सभि रंग माणै ॥ साधिक सिध गुरू बहु चेले खोजत फिरहि फुरमाणै ॥ मागहि नामु पाइ इह भिखिआ तेरे दरसन कउ कुरबाणै ॥ अबिनासी प्रभि खेलु रचाइआ गुरमुखि सोझी होई ॥ नानक सभि जुग आपे वरतै दूजा अवरु न कोई ॥७३॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 951) सलोकु मः १ ॥
सती पापु करि सतु कमाहि ॥ गुर दीखिआ घरि देवण जाहि ॥ इसतरी पुरखै खटिऐ भाउ ॥ भावै आवउ भावै जाउ ॥ सासतु बेदु न मानै कोइ ॥ आपो आपै पूजा होइ ॥ काजी होइ कै बहै निआइ ॥ फेरे तसबी करे खुदाइ ॥ वढी लै कै हकु गवाए ॥ जे को पुछै ता पड़ि सुणाए ॥ तुरक मंत्रु कनि रिदै समाहि ॥ लोक मुहावहि चाड़ी खाहि ॥ चउका दे कै सुचा होइ ॥ ऐसा हिंदू वेखहु कोइ ॥ जोगी गिरही जटा बिभूत ॥ आगै पाछै रोवहि पूत ॥ जोगु न पाइआ जुगति गवाई ॥ कितु कारणि सिरि छाई पाई ॥ नानक कलि का एहु परवाणु ॥ आपे आखणु आपे जाणु ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 951) मः १ ॥
हिंदू कै घरि हिंदू आवै ॥ सूतु जनेऊ पड़ि गलि पावै ॥ सूतु पाइ करे बुरिआई ॥ नाता धोता थाइ न पाई ॥ मुसलमानु करे वडिआई ॥ विणु गुर पीरै को थाइ न पाई ॥ राहु दसाइ ओथै को जाइ ॥ करणी बाझहु भिसति न पाइ ॥ जोगी कै घरि जुगति दसाई ॥ तितु कारणि कनि मुंद्रा पाई ॥ मुंद्रा पाइ फिरै संसारि ॥ जिथै किथै सिरजणहारु ॥ जेते जीअ तेते वाटाऊ ॥ चीरी आई ढिल न काऊ ॥ एथै जाणै सु जाइ सिञाणै ॥ होरु फकड़ु हिंदू मुसलमाणै ॥ सभना का दरि लेखा होइ ॥ करणी बाझहु तरै न कोइ ॥ सचो सचु वखाणै कोइ ॥ नानक अगै पुछ न होइ ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 952) सलोक मः १ ॥
ना सति दुखीआ ना सति सुखीआ ना सति पाणी जंत फिरहि ॥ ना सति मूंड मुडाई केसी ना सति पड़िआ देस फिरहि ॥ ना सति रुखी बिरखी पथर आपु तछावहि दुख सहहि ॥ ना सति हसती बधे संगल ना सति गाई घाहु चरहि ॥ जिसु हथि सिधि देवै जे सोई जिस नो देइ तिसु आइ मिलै ॥ नानक ता कउ मिलै वडाई जिसु घट भीतरि सबदु रवै ॥ सभि घट मेरे हउ सभना अंदरि जिसहि खुआई तिसु कउणु कहै ॥ जिसहि दिखाला वाटड़ी तिसहि भुलावै कउणु ॥ जिसहि भुलाई पंध सिरि तिसहि दिखावै कउणु ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 952) मः १ ॥
सो गिरही जो निग्रहु करै ॥ जपु तपु संजमु भीखिआ करै ॥ पुंन दान का करे सरीरु ॥ सो गिरही गंगा का नीरु ॥ बोलै ईसरु सति सरूपु ॥ परम तंत महि रेख न रूपु ॥२॥


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