Pt 9 - गुरू अमरदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 9 - Guru Amardas ji (Mahalla 3) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग वडहंसु -- SGGS 570) वडहंसु महला ३ ॥
सचा सउदा हरि नामु है सचा वापारा राम ॥ गुरमती हरि नामु वणजीऐ अति मोलु अफारा राम ॥ अति मोलु अफारा सच वापारा सचि वापारि लगे वडभागी ॥ अंतरि बाहरि भगती राते सचि नामि लिव लागी ॥ नदरि करे सोई सचु पाए गुर कै सबदि वीचारा ॥ नानक नामि रते तिन ही सुखु पाइआ साचै के वापारा ॥१॥

हंउमै माइआ मैलु है माइआ मैलु भरीजै राम ॥ गुरमती मनु निरमला रसना हरि रसु पीजै राम ॥ रसना हरि रसु पीजै अंतरु भीजै साच सबदि बीचारी ॥ अंतरि खूहटा अम्रिति भरिआ सबदे काढि पीऐ पनिहारी ॥ जिसु नदरि करे सोई सचि लागै रसना रामु रवीजै ॥ नानक नामि रते से निरमल होर हउमै मैलु भरीजै ॥२॥

पंडित जोतकी सभि पड़ि पड़ि कूकदे किसु पहि करहि पुकारा राम ॥ माइआ मोहु अंतरि मलु लागै माइआ के वापारा राम ॥ माइआ के वापारा जगति पिआरा आवणि जाणि दुखु पाई ॥ बिखु का कीड़ा बिखु सिउ लागा बिस्टा माहि समाई ॥ जो धुरि लिखिआ सोइ कमावै कोइ न मेटणहारा ॥ नानक नामि रते तिन सदा सुखु पाइआ होरि मूरख कूकि मुए गावारा ॥३॥

माइआ मोहि मनु रंगिआ मोहि सुधि न काई राम ॥ गुरमुखि इहु मनु रंगीऐ दूजा रंगु जाई राम ॥ दूजा रंगु जाई साचि समाई सचि भरे भंडारा ॥ गुरमुखि होवै सोई बूझै सचि सवारणहारा ॥ आपे मेले सो हरि मिलै होरु कहणा किछू न जाए ॥ नानक विणु नावै भरमि भुलाइआ इकि नामि रते रंगु लाए ॥४॥५॥

(राग वडहंसु -- SGGS 571) वडहंसु महला ३ ॥
ए मन मेरिआ आवा गउणु संसारु है अंति सचि निबेड़ा राम ॥ आपे सचा बखसि लए फिरि होइ न फेरा राम ॥ फिरि होइ न फेरा अंति सचि निबेड़ा गुरमुखि मिलै वडिआई ॥ साचै रंगि राते सहजे माते सहजे रहे समाई ॥ सचा मनि भाइआ सचु वसाइआ सबदि रते अंति निबेरा ॥ नानक नामि रते से सचि समाणे बहुरि न भवजलि फेरा ॥१॥

माइआ मोहु सभु बरलु है दूजै भाइ खुआई राम ॥ माता पिता सभु हेतु है हेते पलचाई राम ॥ हेते पलचाई पुरबि कमाई मेटि न सकै कोई ॥ जिनि स्रिसटि साजी सो करि वेखै तिसु जेवडु अवरु न कोई ॥ मनमुखि अंधा तपि तपि खपै बिनु सबदै सांति न आई ॥ नानक बिनु नावै सभु कोई भुला माइआ मोहि खुआई ॥२॥

एहु जगु जलता देखि कै भजि पए हरि सरणाई राम ॥ अरदासि करीं गुर पूरे आगै रखि लेवहु देहु वडाई राम ॥ रखि लेवहु सरणाई हरि नामु वडाई तुधु जेवडु अवरु न दाता ॥ सेवा लागे से वडभागे जुगि जुगि एको जाता ॥ जतु सतु संजमु करम कमावै बिनु गुर गति नही पाई ॥ नानक तिस नो सबदु बुझाए जो जाइ पवै हरि सरणाई ॥३॥

जो हरि मति देइ सा ऊपजै होर मति न काई राम ॥ अंतरि बाहरि एकु तू आपे देहि बुझाई राम ॥ आपे देहि बुझाई अवर न भाई गुरमुखि हरि रसु चाखिआ ॥ दरि साचै सदा है साचा साचै सबदि सुभाखिआ ॥ घर महि निज घरु पाइआ सतिगुरु देइ वडाई ॥ नानक जो नामि रते सेई महलु पाइनि मति परवाणु सचु साई ॥४॥६॥

(राग वडहंसु -- SGGS 582) वडहंसु महला ३ महला तीजा
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
प्रभु सचड़ा हरि सालाहीऐ कारजु सभु किछु करणै जोगु ॥ सा धन रंड न कबहू बैसई ना कदे होवै सोगु ॥ ना कदे होवै सोगु अनदिनु रस भोग सा धन महलि समाणी ॥ जिनि प्रिउ जाता करम बिधाता बोले अम्रित बाणी ॥ गुणवंतीआ गुण सारहि अपणे कंत समालहि ना कदे लगै विजोगो ॥ सचड़ा पिरु सालाहीऐ सभु किछु करणै जोगो ॥१॥

सचड़ा साहिबु सबदि पछाणीऐ आपे लए मिलाए ॥ सा धन प्रिअ कै रंगि रती विचहु आपु गवाए ॥ विचहु आपु गवाए फिरि कालु न खाए गुरमुखि एको जाता ॥ कामणि इछ पुंनी अंतरि भिंनी मिलिआ जगजीवनु दाता ॥ सबद रंगि राती जोबनि माती पिर कै अंकि समाए ॥ सचड़ा साहिबु सबदि पछाणीऐ आपे लए मिलाए ॥२॥

जिनी आपणा कंतु पछाणिआ हउ तिन पूछउ संता जाए ॥ आपु छोडि सेवा करी पिरु सचड़ा मिलै सहजि सुभाए ॥ पिरु सचा मिलै आए साचु कमाए साचि सबदि धन राती ॥ कदे न रांड सदा सोहागणि अंतरि सहज समाधी ॥ पिरु रहिआ भरपूरे वेखु हदूरे रंगु माणे सहजि सुभाए ॥ जिनी आपणा कंतु पछाणिआ हउ तिन पूछउ संता जाए ॥३॥

पिरहु विछुंनीआ भी मिलह जे सतिगुर लागह साचे पाए ॥ सतिगुरु सदा दइआलु है अवगुण सबदि जलाए ॥ अउगुण सबदि जलाए दूजा भाउ गवाए सचे ही सचि राती ॥ सचै सबदि सदा सुखु पाइआ हउमै गई भराती ॥ पिरु निरमाइलु सदा सुखदाता नानक सबदि मिलाए ॥ पिरहु विछुंनीआ भी मिलह जे सतिगुर लागह साचे पाए ॥४॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 583) वडहंसु महला ३ ॥
सुणिअहु कंत महेलीहो पिरु सेविहु सबदि वीचारि ॥ अवगणवंती पिरु न जाणई मुठी रोवै कंत विसारि ॥ रोवै कंत समालि सदा गुण सारि ना पिरु मरै न जाए ॥ गुरमुखि जाता सबदि पछाता साचै प्रेमि समाए ॥ जिनि अपणा पिरु नही जाता करम बिधाता कूड़ि मुठी कूड़िआरे ॥ सुणिअहु कंत महेलीहो पिरु सेविहु सबदि वीचारे ॥१॥

सभु जगु आपि उपाइओनु आवणु जाणु संसारा ॥ माइआ मोहु खुआइअनु मरि जमै वारो वारा ॥ मरि जमै वारो वारा वधहि बिकारा गिआन विहूणी मूठी ॥ बिनु सबदै पिरु न पाइओ जनमु गवाइओ रोवै अवगुणिआरी झूठी ॥ पिरु जगजीवनु किस नो रोईऐ रोवै कंतु विसारे ॥ सभु जगु आपि उपाइओनु आवणु जाणु संसारे ॥२॥

सो पिरु सचा सद ही साचा है ना ओहु मरै न जाए ॥ भूली फिरै धन इआणीआ रंड बैठी दूजै भाए ॥ रंड बैठी दूजै भाए माइआ मोहि दुखु पाए आव घटै तनु छीजै ॥ जो किछु आइआ सभु किछु जासी दुखु लागा भाइ दूजै ॥ जमकालु न सूझै माइआ जगु लूझै लबि लोभि चितु लाए ॥ सो पिरु साचा सद ही साचा ना ओहु मरै न जाए ॥३॥

इकि रोवहि पिरहि विछुंनीआ अंधी ना जाणै पिरु नाले ॥ गुर परसादी साचा पिरु मिलै अंतरि सदा समाले ॥ पिरु अंतरि समाले सदा है नाले मनमुखि जाता दूरे ॥ इहु तनु रुलै रुलाइआ कामि न आइआ जिनि खसमु न जाता हदूरे ॥ नानक सा धन मिलै मिलाई पिरु अंतरि सदा समाले ॥ इकि रोवहि पिरहि विछुंनीआ अंधी न जाणै पिरु है नाले ॥४॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 584) वडहंसु मः ३ ॥
रोवहि पिरहि विछुंनीआ मै पिरु सचड़ा है सदा नाले ॥ जिनी चलणु सही जाणिआ सतिगुरु सेवहि नामु समाले ॥ सदा नामु समाले सतिगुरु है नाले सतिगुरु सेवि सुखु पाइआ ॥ सबदे कालु मारि सचु उरि धारि फिरि आवण जाणु न होइआ ॥ सचा साहिबु सची नाई वेखै नदरि निहाले ॥ रोवहि पिरहु विछुंनीआ मै पिरु सचड़ा है सदा नाले ॥१॥

प्रभु मेरा साहिबु सभ दू ऊचा है किव मिलां प्रीतम पिआरे ॥ सतिगुरि मेली तां सहजि मिली पिरु राखिआ उर धारे ॥ सदा उर धारे नेहु नालि पिआरे सतिगुर ते पिरु दिसै ॥ माइआ मोह का कचा चोला तितु पैधै पगु खिसै ॥ पिर रंगि राता सो सचा चोला तितु पैधै तिखा निवारे ॥ प्रभु मेरा साहिबु सभ दू ऊचा है किउ मिला प्रीतम पिआरे ॥२॥

मै प्रभु सचु पछाणिआ होर भूली अवगणिआरे ॥ मै सदा रावे पिरु आपणा सचड़ै सबदि वीचारे ॥ सचै सबदि वीचारे रंगि राती नारे मिलि सतिगुर प्रीतमु पाइआ ॥ अंतरि रंगि राती सहजे माती गइआ दुसमनु दूखु सबाइआ ॥ अपने गुर कंउ तनु मनु दीजै तां मनु भीजै त्रिसना दूख निवारे ॥ मै पिरु सचु पछाणिआ होर भूली अवगणिआरे ॥३॥

सचड़ै आपि जगतु उपाइआ गुर बिनु घोर अंधारो ॥ आपि मिलाए आपि मिलै आपे देइ पिआरो ॥ आपे देइ पिआरो सहजि वापारो गुरमुखि जनमु सवारे ॥ धनु जग महि आइआ आपु गवाइआ दरि साचै सचिआरो ॥ गिआनि रतनि घटि चानणु होआ नानक नाम पिआरो ॥ सचड़ै आपि जगतु उपाइआ गुर बिनु घोर अंधारो ॥४॥३॥

(राग वडहंसु -- SGGS 584) वडहंसु महला ३ ॥
इहु सरीरु जजरी है इस नो जरु पहुचै आए ॥ गुरि राखे से उबरे होरु मरि जमै आवै जाए ॥ होरि मरि जमहि आवहि जावहि अंति गए पछुतावहि बिनु नावै सुखु न होई ॥ ऐथै कमावै सो फलु पावै मनमुखि है पति खोई ॥ जम पुरि घोर अंधारु महा गुबारु ना तिथै भैण न भाई ॥ इहु सरीरु जजरी है इस नो जरु पहुचै आई ॥१॥

काइआ कंचनु तां थीऐ जां सतिगुरु लए मिलाए ॥ भ्रमु माइआ विचहु कटीऐ सचड़ै नामि समाए ॥ सचै नामि समाए हरि गुण गाए मिलि प्रीतम सुखु पाए ॥ सदा अनंदि रहै दिनु राती विचहु हंउमै जाए ॥ जिनी पुरखी हरि नामि चितु लाइआ तिन कै हंउ लागउ पाए ॥ कांइआ कंचनु तां थीऐ जा सतिगुरु लए मिलाए ॥२॥

सो सचा सचु सलाहीऐ जे सतिगुरु देइ बुझाए ॥ बिनु सतिगुर भरमि भुलाणीआ किआ मुहु देसनि आगै जाए ॥ किआ देनि मुहु जाए अवगुणि पछुताए दुखो दुखु कमाए ॥ नामि रतीआ से रंगि चलूला पिर कै अंकि समाए ॥ तिसु जेवडु अवरु न सूझई किसु आगै कहीऐ जाए ॥ सो सचा सचु सलाहीऐ जे सतिगुरु देइ बुझाए ॥३॥

जिनी सचड़ा सचु सलाहिआ हंउ तिन लागउ पाए ॥ से जन सचे निरमले तिन मिलिआ मलु सभ जाए ॥ तिन मिलिआ मलु सभ जाए सचै सरि नाए सचै सहजि सुभाए ॥ नामु निरंजनु अगमु अगोचरु सतिगुरि दीआ बुझाए ॥ अनदिनु भगति करहि रंगि राते नानक सचि समाए ॥ जिनी सचड़ा सचु धिआइआ हंउ तिन कै लागउ पाए ॥४॥४॥

सलोक मः ३ ॥ सबदि रते वड हंस है सचु नामु उरि धारि ॥ सचु संग्रहहि सद सचि रहहि सचै नामि पिआरि ॥ सदा निरमल मैलु न लगई नदरि कीती करतारि ॥ नानक हउ तिन कै बलिहारणै जो अनदिनु जपहि मुरारि ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 585) मः ३ ॥
मै जानिआ वड हंसु है ता मै कीआ संगु ॥ जे जाणा बगु बपुड़ा त जनमि न देदी अंगु ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 585) मः ३ ॥
हंसा वेखि तरंदिआ बगां भि आया चाउ ॥ डुबि मुए बग बपुड़े सिरु तलि उपरि पाउ ॥३॥

(राग वडहंसु -- SGGS 586) सलोकु मः ३ ॥
भै विचि सभु आकारु है निरभउ हरि जीउ सोइ ॥ सतिगुरि सेविऐ हरि मनि वसै तिथै भउ कदे न होइ ॥ दुसमनु दुखु तिस नो नेड़ि न आवै पोहि न सकै कोइ ॥ गुरमुखि मनि वीचारिआ जो तिसु भावै सु होइ ॥ नानक आपे ही पति रखसी कारज सवारे सोइ ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 586) मः ३ ॥
इकि सजण चले इकि चलि गए रहदे भी फुनि जाहि ॥ जिनी सतिगुरु न सेविओ से आइ गए पछुताहि ॥ नानक सचि रते से न विछुड़हि सतिगुरु सेवि समाहि ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 586) सलोकु मः ३ ॥
सतिगुर की सेवा चाकरी सुखी हूं सुख सारु ॥ ऐथै मिलनि वडिआईआ दरगह मोख दुआरु ॥ सची कार कमावणी सचु पैनणु सचु नामु अधारु ॥ सची संगति सचि मिलै सचै नाइ पिआरु ॥ सचै सबदि हरखु सदा दरि सचै सचिआरु ॥ नानक सतिगुर की सेवा सो करै जिस नो नदरि करै करतारु ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 586) मः ३ ॥
होर विडाणी चाकरी ध्रिगु जीवणु ध्रिगु वासु ॥ अम्रितु छोडि बिखु लगे बिखु खटणा बिखु रासि ॥ बिखु खाणा बिखु पैनणा बिखु के मुखि गिरास ॥ ऐथै दुखो दुखु कमावणा मुइआ नरकि निवासु ॥ मनमुख मुहि मैलै सबदु न जाणनी काम करोधि विणासु ॥ सतिगुर का भउ छोडिआ मनहठि कमु न आवै रासि ॥ जम पुरि बधे मारीअहि को न सुणे अरदासि ॥ नानक पूरबि लिखिआ कमावणा गुरमुखि नामि निवासु ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 586) सलोकु मः ३ ॥
सतिगुरि मिलिऐ भुख गई भेखी भुख न जाइ ॥ दुखि लगै घरि घरि फिरै अगै दूणी मिलै सजाइ ॥ अंदरि सहजु न आइओ सहजे ही लै खाइ ॥ मनहठि जिस ते मंगणा लैणा दुखु मनाइ ॥ इसु भेखै थावहु गिरहो भला जिथहु को वरसाइ ॥ सबदि रते तिना सोझी पई दूजै भरमि भुलाइ ॥ पइऐ किरति कमावणा कहणा कछू न जाइ ॥ नानक जो तिसु भावहि से भले जिन की पति पावहि थाइ ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 587) मः ३ ॥
सतिगुरि सेविऐ सदा सुखु जनम मरण दुखु जाइ ॥ चिंता मूलि न होवई अचिंतु वसै मनि आइ ॥ अंतरि तीरथु गिआनु है सतिगुरि दीआ बुझाइ ॥ मैलु गई मनु निरमलु होआ अम्रित सरि तीरथि नाइ ॥ सजण मिले सजणा सचै सबदि सुभाइ ॥ घर ही परचा पाइआ जोती जोति मिलाइ ॥ पाखंडि जमकालु न छोडई लै जासी पति गवाइ ॥ नानक नामि रते से उबरे सचे सिउ लिव लाइ ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 587) सलोक मः ३ ॥
सजण मिले सजणा जिन सतगुर नालि पिआरु ॥ मिलि प्रीतम तिनी धिआइआ सचै प्रेमि पिआरु ॥ मन ही ते मनु मानिआ गुर कै सबदि अपारि ॥ एहि सजण मिले न विछुड़हि जि आपि मेले करतारि ॥ इकना दरसन की परतीति न आईआ सबदि न करहि वीचारु ॥ विछुड़िआ का किआ विछुड़ै जिना दूजै भाइ पिआरु ॥ मनमुख सेती दोसती थोड़ड़िआ दिन चारि ॥ इसु परीती तुटदी विलमु न होवई इतु दोसती चलनि विकार ॥ जिना अंदरि सचे का भउ नाही नामि न करहि पिआरु ॥ नानक तिन सिउ किआ कीचै दोसती जि आपि भुलाए करतारि ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 587) मः ३ ॥
इकि सदा इकतै रंगि रहहि तिन कै हउ सद बलिहारै जाउ ॥ तनु मनु धनु अरपी तिन कउ निवि निवि लागउ पाइ ॥ तिन मिलिआ मनु संतोखीऐ त्रिसना भुख सभ जाइ ॥ नानक नामि रते सुखीए सदा सचे सिउ लिव लाइ ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 588) सलोक मः ३ ॥
त्रिसना दाधी जलि मुई जलि जलि करे पुकार ॥ सतिगुर सीतल जे मिलै फिरि जलै न दूजी वार ॥ नानक विणु नावै निरभउ को नही जिचरु सबदि न करे वीचारु ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 588) मः ३ ॥
भेखी अगनि न बुझई चिंता है मन माहि ॥ वरमी मारी सापु ना मरै तिउ निगुरे करम कमाहि ॥ सतिगुरु दाता सेवीऐ सबदु वसै मनि आइ ॥ मनु तनु सीतलु सांति होइ त्रिसना अगनि बुझाइ ॥ सुखा सिरि सदा सुखु होइ जा विचहु आपु गवाइ ॥ गुरमुखि उदासी सो करे जि सचि रहै लिव लाइ ॥ चिंता मूलि न होवई हरि नामि रजा आघाइ ॥ नानक नाम बिना नह छूटीऐ हउमै पचहि पचाइ ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 588) सलोक मः ३ ॥
कलि महि जमु जंदारु है हुकमे कार कमाइ ॥ गुरि राखे से उबरे मनमुखा देइ सजाइ ॥ जमकालै वसि जगु बांधिआ तिस दा फरू न कोइ ॥ जिनि जमु कीता सो सेवीऐ गुरमुखि दुखु न होइ ॥ नानक गुरमुखि जमु सेवा करे जिन मनि सचा होइ ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 588) मः ३ ॥
एहा काइआ रोगि भरी बिनु सबदै दुखु हउमै रोगु न जाइ ॥ सतिगुरु मिलै ता निरमल होवै हरि नामो मंनि वसाइ ॥ नानक नामु धिआइआ सुखदाता दुखु विसरिआ सहजि सुभाइ ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 589) सलोकु मः ३ ॥
भगति करहि मरजीवड़े गुरमुखि भगति सदा होइ ॥ ओना कउ धुरि भगति खजाना बखसिआ मेटि न सकै कोइ ॥ गुण निधानु मनि पाइआ एको सचा सोइ ॥ नानक गुरमुखि मिलि रहे फिरि विछोड़ा कदे न होइ ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 589) मः ३ ॥
सतिगुर की सेव न कीनीआ किआ ओहु करे वीचारु ॥ सबदै सार न जाणई बिखु भूला गावारु ॥ अगिआनी अंधु बहु करम कमावै दूजै भाइ पिआरु ॥ अणहोदा आपु गणाइदे जमु मारि करे तिन खुआरु ॥ नानक किस नो आखीऐ जा आपे बखसणहारु ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 589) सलोक मः ३ ॥
रतना पारखु जो होवै सु रतना करे वीचारु ॥ रतना सार न जाणई अगिआनी अंधु अंधारु ॥ रतनु गुरू का सबदु है बूझै बूझणहारु ॥ मूरख आपु गणाइदे मरि जमहि होइ खुआरु ॥ नानक रतना सो लहै जिसु गुरमुखि लगै पिआरु ॥ सदा सदा नामु उचरै हरि नामो नित बिउहारु ॥ क्रिपा करे जे आपणी ता हरि रखा उर धारि ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 589) मः ३ ॥
सतिगुर की सेव न कीनीआ हरि नामि न लगो पिआरु ॥ मत तुम जाणहु ओइ जीवदे ओइ आपि मारे करतारि ॥ हउमै वडा रोगु है भाइ दूजै करम कमाइ ॥ नानक मनमुखि जीवदिआ मुए हरि विसरिआ दुखु पाइ ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 589) सलोक मः ३ ॥
बिनु सतिगुर सेवे जीअ के बंधना विचि हउमै करम कमाहि ॥ बिनु सतिगुर सेवे ठउर न पावही मरि जमहि आवहि जाहि ॥ बिनु सतिगुर सेवे फिका बोलणा नामु न वसै मन माहि ॥ नानक बिनु सतिगुर सेवे जम पुरि बधे मारीअनि मुहि कालै उठि जाहि ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 590) सलोकु मः ३ ॥
भगत जना कंउ आपि तुठा मेरा पिआरा आपे लइअनु जन लाइ ॥ पातिसाही भगत जना कउ दितीअनु सिरि छतु सचा हरि बणाइ ॥ सदा सुखीए निरमले सतिगुर की कार कमाइ ॥ राजे ओइ न आखीअहि भिड़ि मरहि फिरि जूनी पाहि ॥ नानक विणु नावै नकीं वढीं फिरहि सोभा मूलि न पाहि ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 590) मः ३ ॥
सुणि सिखिऐ सादु न आइओ जिचरु गुरमुखि सबदि न लागै ॥ सतिगुरि सेविऐ नामु मनि वसै विचहु भ्रमु भउ भागै ॥ जेहा सतिगुर नो जाणै तेहो होवै ता सचि नामि लिव लागै ॥ नानक नामि मिलै वडिआई हरि दरि सोहनि आगै ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 590) सलोक मः ३ ॥
नानक नामु निधानु है गुरमुखि पाइआ जाइ ॥ मनमुख घरि होदी वथु न जाणनी अंधे भउकि मुए बिललाइ ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 590) मः ३ ॥
कंचन काइआ निरमली जो सचि नामि सचि लागी ॥ निरमल जोति निरंजनु पाइआ गुरमुखि भ्रमु भउ भागी ॥ नानक गुरमुखि सदा सुखु पावहि अनदिनु हरि बैरागी ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 591) सलोक मः ३ ॥
मनमुखु काइरु करूपु है बिनु नावै नकु नाहि ॥ अनदिनु धंधै विआपिआ सुपनै भी सुखु नाहि ॥ नानक गुरमुखि होवहि ता उबरहि नाहि त बधे दुख सहाहि ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 591) मः ३ ॥
गुरमुखि सदा दरि सोहणे गुर का सबदु कमाहि ॥ अंतरि सांति सदा सुखु दरि सचै सोभा पाहि ॥ नानक गुरमुखि हरि नामु पाइआ सहजे सचि समाहि ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 591) सलोकु मः ३ ॥
सतिगुर की परतीति न आईआ सबदि न लागो भाउ ॥ ओस नो सुखु न उपजै भावै सउ गेड़ा आवउ जाउ ॥ नानक गुरमुखि सहजि मिलै सचे सिउ लिव लाउ ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 591) मः ३ ॥
ए मन ऐसा सतिगुरु खोजि लहु जितु सेविऐ जनम मरण दुखु जाइ ॥ सहसा मूलि न होवई हउमै सबदि जलाइ ॥ कूड़ै की पालि विचहु निकलै सचु वसै मनि आइ ॥ अंतरि सांति मनि सुखु होइ सच संजमि कार कमाइ ॥ नानक पूरै करमि सतिगुरु मिलै हरि जीउ किरपा करे रजाइ ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 591) सलोकु मः ३ ॥
बिनु सतिगुर सेवे जगतु मुआ बिरथा जनमु गवाइ ॥ दूजै भाइ अति दुखु लगा मरि जमै आवै जाइ ॥ विसटा अंदरि वासु है फिरि फिरि जूनी पाइ ॥ नानक बिनु नावै जमु मारसी अंति गइआ पछुताइ ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 591) मः ३ ॥
इसु जग महि पुरखु एकु है होर सगली नारि सबाई ॥ सभि घट भोगवै अलिपतु रहै अलखु न लखणा जाई ॥ पूरै गुरि वेखालिआ सबदे सोझी पाई ॥ पुरखै सेवहि से पुरख होवहि जिनी हउमै सबदि जलाई ॥ तिस का सरीकु को नही ना को कंटकु वैराई ॥ निहचल राजु है सदा तिसु केरा ना आवै ना जाई ॥ अनदिनु सेवकु सेवा करे हरि सचे के गुण गाई ॥ नानकु वेखि विगसिआ हरि सचे की वडिआई ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 592) सलोकु मः ३ ॥
जिन कंउ सतिगुरु भेटिआ से हरि कीरति सदा कमाहि ॥ अचिंतु हरि नामु तिन कै मनि वसिआ सचै सबदि समाहि ॥ कुलु उधारहि आपणा मोख पदवी आपे पाहि ॥ पारब्रहमु तिन कंउ संतुसटु भइआ जो गुर चरनी जन पाहि ॥ जनु नानकु हरि का दासु है करि किरपा हरि लाज रखाहि ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 592) मः ३ ॥
हंउमै अंदरि खड़कु है खड़के खड़कि विहाइ ॥ हंउमै वडा रोगु है मरि जमै आवै जाइ ॥ जिन कउ पूरबि लिखिआ तिना सतगुरु मिलिआ प्रभु आइ ॥ नानक गुर परसादी उबरे हउमै सबदि जलाइ ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 592) सलोकु मः ३ ॥
गुरमुखि सेव न कीनीआ हरि नामि न लगो पिआरु ॥ सबदै सादु न आइओ मरि जनमै वारो वार ॥ मनमुखि अंधु न चेतई कितु आइआ सैसारि ॥ नानक जिन कउ नदरि करे से गुरमुखि लंघे पारि ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 592) मः ३ ॥
इको सतिगुरु जागता होरु जगु सूता मोहि पिआसि ॥ सतिगुरु सेवनि जागंनि से जो रते सचि नामि गुणतासि ॥ मनमुखि अंध न चेतनी जनमि मरि होहि बिनासि ॥ नानक गुरमुखि तिनी नामु धिआइआ जिन कंउ धुरि पूरबि लिखिआसि ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 593) सलोक मः ३ ॥
जगतु अगिआनी अंधु है दूजै भाइ करम कमाइ ॥ दूजै भाइ जेते करम करे दुखु लगै तनि धाइ ॥ गुर परसादी सुखु ऊपजै जा गुर का सबदु कमाइ ॥ सची बाणी करम करे अनदिनु नामु धिआइ ॥ नानक जितु आपे लाए तितु लगे कहणा किछू न जाइ ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 593) मः ३ ॥
हम घरि नामु खजाना सदा है भगति भरे भंडारा ॥ सतगुरु दाता जीअ का सद जीवै देवणहारा ॥ अनदिनु कीरतनु सदा करहि गुर कै सबदि अपारा ॥ सबदु गुरू का सद उचरहि जुगु जुगु वरतावणहारा ॥ इहु मनूआ सदा सुखि वसै सहजे करे वापारा ॥ अंतरि गुर गिआनु हरि रतनु है मुकति करावणहारा ॥ नानक जिस नो नदरि करे सो पाए सो होवै दरि सचिआरा ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 593) सलोकु मः ३ ॥
मनहठि किनै न पाइओ सभ थके करम कमाइ ॥ मनहठि भेख करि भरमदे दुखु पाइआ दूजै भाइ ॥ रिधि सिधि सभु मोहु है नामु न वसै मनि आइ ॥ गुर सेवा ते मनु निरमलु होवै अगिआनु अंधेरा जाइ ॥ नामु रतनु घरि परगटु होआ नानक सहजि समाइ ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 593) मः ३ ॥
सबदै सादु न आइओ नामि न लगो पिआरु ॥ रसना फिका बोलणा नित नित होइ खुआरु ॥ नानक किरति पइऐ कमावणा कोइ न मेटणहारु ॥२॥

(राग वडहंसु -- SGGS 594) सलोकु मः ३ ॥
सतिगुर नो सभु को वेखदा जेता जगतु संसारु ॥ डिठै मुकति न होवई जिचरु सबदि न करे वीचारु ॥ हउमै मैलु न चुकई नामि न लगै पिआरु ॥ इकि आपे बखसि मिलाइअनु दुबिधा तजि विकार ॥ नानक इकि दरसनु देखि मरि मिले सतिगुर हेति पिआरि ॥१॥

(राग वडहंसु -- SGGS 594) मः ३ ॥
सतिगुरू न सेविओ मूरख अंध गवारि ॥ दूजै भाइ बहुतु दुखु लागा जलता करे पुकार ॥ जिन कारणि गुरू विसारिआ से न उपकरे अंती वार ॥ नानक गुरमती सुखु पाइआ बखसे बखसणहार ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 599) सोरठि महला ३ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सेवक सेव करहि सभि तेरी जिन सबदै सादु आइआ ॥ गुर किरपा ते निरमलु होआ जिनि विचहु आपु गवाइआ ॥ अनदिनु गुण गावहि नित साचे गुर कै सबदि सुहाइआ ॥१॥

मेरे ठाकुर हम बारिक सरणि तुमारी ॥ एको सचा सचु तू केवलु आपि मुरारी ॥ रहाउ ॥ जागत रहे तिनी प्रभु पाइआ सबदे हउमै मारी ॥ गिरही महि सदा हरि जन उदासी गिआन तत बीचारी ॥ सतिगुरु सेवि सदा सुखु पाइआ हरि राखिआ उर धारी ॥२॥

इहु मनूआ दह दिसि धावदा दूजै भाइ खुआइआ ॥ मनमुख मुगधु हरि नामु न चेतै बिरथा जनमु गवाइआ ॥ सतिगुरु भेटे ता नाउ पाए हउमै मोहु चुकाइआ ॥३॥

हरि जन साचे साचु कमावहि गुर कै सबदि वीचारी ॥ आपे मेलि लए प्रभि साचै साचु रखिआ उर धारी ॥ नानक नावहु गति मति पाई एहा रासि हमारी ॥४॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 600) सोरठि महला ३ ॥
भगति खजाना भगतन कउ दीआ नाउ हरि धनु सचु सोइ ॥ अखुटु नाम धनु कदे निखुटै नाही किनै न कीमति होइ ॥ नाम धनि मुख उजले होए हरि पाइआ सचु सोइ ॥१॥

मन मेरे गुर सबदी हरि पाइआ जाइ ॥ बिनु सबदै जगु भुलदा फिरदा दरगह मिलै सजाइ ॥ रहाउ ॥ इसु देही अंदरि पंच चोर वसहि कामु क्रोधु लोभु मोहु अहंकारा ॥ अम्रितु लूटहि मनमुख नही बूझहि कोइ न सुणै पूकारा ॥ अंधा जगतु अंधु वरतारा बाझु गुरू गुबारा ॥२॥

हउमै मेरा करि करि विगुते किहु चलै न चलदिआ नालि ॥ गुरमुखि होवै सु नामु धिआवै सदा हरि नामु समालि ॥ सची बाणी हरि गुण गावै नदरी नदरि निहालि ॥३॥

सतिगुर गिआनु सदा घटि चानणु अमरु सिरि बादिसाहा ॥ अनदिनु भगति करहि दिनु राती राम नामु सचु लाहा ॥ नानक राम नामि निसतारा सबदि रते हरि पाहा ॥४॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 600) सोरठि मः ३ ॥
दासनि दासु होवै ता हरि पाए विचहु आपु गवाई ॥ भगता का कारजु हरि अनंदु है अनदिनु हरि गुण गाई ॥ सबदि रते सदा इक रंगी हरि सिउ रहे समाई ॥१॥

हरि जीउ साची नदरि तुमारी ॥ आपणिआ दासा नो क्रिपा करि पिआरे राखहु पैज हमारी ॥ रहाउ ॥ सबदि सलाही सदा हउ जीवा गुरमती भउ भागा ॥ मेरा प्रभु साचा अति सुआलिउ गुरु सेविआ चितु लागा ॥ साचा सबदु सची सचु बाणी सो जनु अनदिनु जागा ॥२॥

महा ग्मभीरु सदा सुखदाता तिस का अंतु न पाइआ ॥ पूरे गुर की सेवा कीनी अचिंतु हरि मंनि वसाइआ ॥ मनु तनु निरमलु सदा सुखु अंतरि विचहु भरमु चुकाइआ ॥३॥

हरि का मारगु सदा पंथु विखड़ा को पाए गुर वीचारा ॥ हरि कै रंगि राता सबदे माता हउमै तजे विकारा ॥ नानक नामि रता इक रंगी सबदि सवारणहारा ॥४॥३॥

(राग सोरठि -- SGGS 601) सोरठि महला ३ ॥
हरि जीउ तुधु नो सदा सालाही पिआरे जिचरु घट अंतरि है सासा ॥ इकु पलु खिनु विसरहि तू सुआमी जाणउ बरस पचासा ॥ हम मूड़ मुगध सदा से भाई गुर कै सबदि प्रगासा ॥१॥

हरि जीउ तुम आपे देहु बुझाई ॥ हरि जीउ तुधु विटहु वारिआ सद ही तेरे नाम विटहु बलि जाई ॥ रहाउ ॥ हम सबदि मुए सबदि मारि जीवाले भाई सबदे ही मुकति पाई ॥ सबदे मनु तनु निरमलु होआ हरि वसिआ मनि आई ॥ सबदु गुर दाता जितु मनु राता हरि सिउ रहिआ समाई ॥२॥

सबदु न जाणहि से अंने बोले से कितु आए संसारा ॥ हरि रसु न पाइआ बिरथा जनमु गवाइआ जमहि वारो वारा ॥ बिसटा के कीड़े बिसटा माहि समाणे मनमुख मुगध गुबारा ॥३॥

आपे करि वेखै मारगि लाए भाई तिसु बिनु अवरु न कोई ॥ जो धुरि लिखिआ सु कोइ न मेटै भाई करता करे सु होई ॥ नानक नामु वसिआ मन अंतरि भाई अवरु न दूजा कोई ॥४॥४॥

(राग सोरठि -- SGGS 601) सोरठि महला ३ ॥
गुरमुखि भगति करहि प्रभ भावहि अनदिनु नामु वखाणे ॥ भगता की सार करहि आपि राखहि जो तेरै मनि भाणे ॥ तू गुणदाता सबदि पछाता गुण कहि गुणी समाणे ॥१॥

मन मेरे हरि जीउ सदा समालि ॥ अंत कालि तेरा बेली होवै सदा निबहै तेरै नालि ॥ रहाउ ॥ दुसट चउकड़ी सदा कूड़ु कमावहि ना बूझहि वीचारे ॥ निंदा दुसटी ते किनि फलु पाइआ हरणाखस नखहि बिदारे ॥ प्रहिलादु जनु सद हरि गुण गावै हरि जीउ लए उबारे ॥२॥

आपस कउ बहु भला करि जाणहि मनमुखि मति न काई ॥ साधू जन की निंदा विआपे जासनि जनमु गवाई ॥ राम नामु कदे चेतहि नाही अंति गए पछुताई ॥३॥

सफलु जनमु भगता का कीता गुर सेवा आपि लाए ॥ सबदे राते सहजे माते अनदिनु हरि गुण गाए ॥ नानक दासु कहै बेनंती हउ लागा तिन कै पाए ॥४॥५॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates