भक्त सूरदास जी - बाणी शब्द, Bhagat Surdas ji - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


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(भक्त सूरदास जी -- राग सारंग -- SGGS 1253) छाडि मन हरि बिमुखन को संगु ॥

(गुरू अर्जन देव जी -- राग सारंग -- SGGS 1253) सारंग महला ५ सूरदास ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥

हरि के संग बसे हरि लोक ॥ तनु मनु अरपि सरबसु सभु अरपिओ अनद सहज धुनि झोक ॥१॥ रहाउ ॥ दरसनु पेखि भए निरबिखई पाए है सगले थोक ॥ आन बसतु सिउ काजु न कछूऐ सुंदर बदन अलोक ॥१॥ सिआम सुंदर तजि आन जु चाहत जिउ कुसटी तनि जोक ॥ सूरदास मनु प्रभि हथि लीनो दीनो इहु परलोक ॥२॥१॥८॥


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