सुचजी (महला 1), Suchaji (Mahalla 1) Path in Hindi Gurbani online


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सूही महला १ सुचजी ॥

जा तू ता मै सभु को तू साहिबु मेरी रासि जीउ ॥ तुधु अंतरि हउ सुखि वसा तूं अंतरि साबासि जीउ ॥ भाणै तखति वडाईआ भाणै भीख उदासि जीउ ॥ भाणै थल सिरि सरु वहै कमलु फुलै आकासि जीउ ॥ भाणै भवजलु लंघीऐ भाणै मंझि भरीआसि जीउ ॥ भाणै सो सहु रंगुला सिफति रता गुणतासि जीउ ॥ भाणै सहु भीहावला हउ आवणि जाणि मुईआसि जीउ ॥ तू सहु अगमु अतोलवा हउ कहि कहि ढहि पईआसि जीउ ॥ किआ मागउ किआ कहि सुणी मै दरसन भूख पिआसि जीउ ॥ गुर सबदी सहु पाइआ सचु नानक की अरदासि जीउ ॥२॥


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