Pt 3 - सोलहे, Part 3 - Solhe (Mahalla 1 3 4 5) Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


मारू महला ३ ॥
सो सचु सेविहु सिरजणहारा ॥ सबदे दूख निवारणहारा ॥ अगमु अगोचरु कीमति नही पाई आपे अगम अथाहा हे ॥१॥ आपे सचा सचु वरताए ॥ इकि जन साचै आपे लाए ॥ साचो सेवहि साचु कमावहि नामे सचि समाहा हे ॥२॥ धुरि भगता मेले आपि मिलाए ॥ सची भगती आपे लाए ॥ साची बाणी सदा गुण गावै इसु जनमै का लाहा हे ॥३॥ गुरमुखि वणजु करहि परु आपु पछाणहि ॥ एकस बिनु को अवरु न जाणहि ॥ सचा साहु सचे वणजारे पूंजी नामु विसाहा हे ॥४॥ आपे साजे स्रिसटि उपाए ॥ विरले कउ गुर सबदु बुझाए ॥ सतिगुरु सेवहि से जन साचे काटे जम का फाहा हे ॥५॥ भंनै घड़े सवारे साजे ॥ माइआ मोहि दूजै जंत पाजे ॥ मनमुख फिरहि सदा अंधु कमावहि जम का जेवड़ा गलि फाहा हे ॥६॥ आपे बखसे गुर सेवा लाए ॥ गुरमती नामु मंनि वसाए ॥ अनदिनु नामु धिआए साचा इसु जग महि नामो लाहा हे ॥७॥ आपे सचा सची नाई ॥ गुरमुखि देवै मंनि वसाई ॥ जिन मनि वसिआ से जन सोहहि तिन सिरि चूका काहा हे ॥८॥ अगम अगोचरु कीमति नही पाई ॥ गुर परसादी मंनि वसाई ॥ सदा सबदि सालाही गुणदाता लेखा कोइ न मंगै ताहा हे ॥९॥ ब्रहमा बिसनु रुद्रु तिस की सेवा ॥ अंतु न पावहि अलख अभेवा ॥ जिन कउ नदरि करहि तू अपणी गुरमुखि अलखु लखाहा हे ॥१०॥ पूरै सतिगुरि सोझी पाई ॥ एको नामु मंनि वसाई ॥ नामु जपी तै नामु धिआई महलु पाइ गुण गाहा हे ॥११॥ सेवक सेवहि मंनि हुकमु अपारा ॥ मनमुख हुकमु न जाणहि सारा ॥ हुकमे मंने हुकमे वडिआई हुकमे वेपरवाहा हे ॥१२॥ गुर परसादी हुकमु पछाणै ॥ धावतु राखै इकतु घरि आणै ॥ नामे राता सदा बैरागी नामु रतनु मनि ताहा हे ॥१३॥ सभ जग महि वरतै एको सोई ॥ गुर परसादी परगटु होई ॥ सबदु सलाहहि से जन निरमल निज घरि वासा ताहा हे ॥१४॥ सदा भगत तेरी सरणाई ॥ अगम अगोचर कीमति नही पाई ॥ जिउ तुधु भावहि तिउ तू राखहि गुरमुखि नामु धिआहा हे ॥१५॥ सदा सदा तेरे गुण गावा ॥ सचे साहिब तेरै मनि भावा ॥ नानकु साचु कहै बेनंती सचु देवहु सचि समाहा हे ॥१६॥१॥१०॥

मारू महला ३ ॥
सतिगुरु सेवनि से वडभागी ॥ अनदिनु साचि नामि लिव लागी ॥ सदा सुखदाता रविआ घट अंतरि सबदि सचै ओमाहा हे ॥१॥ नदरि करे ता गुरू मिलाए ॥ हरि का नामु मंनि वसाए ॥ हरि मनि वसिआ सदा सुखदाता सबदे मनि ओमाहा हे ॥२॥ क्रिपा करे ता मेलि मिलाए ॥ हउमै ममता सबदि जलाए ॥ सदा मुकतु रहै इक रंगी नाही किसै नालि काहा हे ॥३॥ बिनु सतिगुर सेवे घोर अंधारा ॥ बिनु सबदै कोइ न पावै पारा ॥ जो सबदि राते महा बैरागी सो सचु सबदे लाहा हे ॥४॥ दुखु सुखु करतै धुरि लिखि पाइआ ॥ दूजा भाउ आपि वरताइआ ॥ गुरमुखि होवै सु अलिपतो वरतै मनमुख का किआ वेसाहा हे ॥५॥ से मनमुख जो सबदु न पछाणहि ॥ गुर के भै की सार न जाणहि ॥ भै बिनु किउ निरभउ सचु पाईऐ जमु काढि लएगा साहा हे ॥६॥ अफरिओ जमु मारिआ न जाई ॥ गुर कै सबदे नेड़ि न आई ॥ सबदु सुणे ता दूरहु भागै मतु मारे हरि जीउ वेपरवाहा हे ॥७॥ हरि जीउ की है सभ सिरकारा ॥ एहु जमु किआ करे विचारा ॥ हुकमी बंदा हुकमु कमावै हुकमे कढदा साहा हे ॥८॥ गुरमुखि साचै कीआ अकारा ॥ गुरमुखि पसरिआ सभु पासारा ॥ गुरमुखि होवै सो सचु बूझै सबदि सचै सुखु ताहा हे ॥९॥ गुरमुखि जाता करमि बिधाता ॥ जुग चारे गुर सबदि पछाता ॥ गुरमुखि मरै न जनमै गुरमुखि गुरमुखि सबदि समाहा हे ॥१०॥ गुरमुखि नामि सबदि सालाहे ॥ अगम अगोचर वेपरवाहे ॥ एक नामि जुग चारि उधारे सबदे नाम विसाहा हे ॥११॥ गुरमुखि सांति सदा सुखु पाए ॥ गुरमुखि हिरदै नामु वसाए ॥ गुरमुखि होवै सो नामु बूझै काटे दुरमति फाहा हे ॥१२॥ गुरमुखि उपजै साचि समावै ॥ ना मरि जमै न जूनी पावै ॥ गुरमुखि सदा रहहि रंगि राते अनदिनु लैदे लाहा हे ॥१३॥ गुरमुखि भगत सोहहि दरबारे ॥ सची बाणी सबदि सवारे ॥ अनदिनु गुण गावै दिनु राती सहज सेती घरि जाहा हे ॥१४॥ सतिगुरु पूरा सबदु सुणाए ॥ अनदिनु भगति करहु लिव लाए ॥ हरि गुण गावहि सद ही निरमल निरमल गुण पातिसाहा हे ॥१५॥ गुण का दाता सचा सोई ॥ गुरमुखि विरला बूझै कोई ॥ नानक जनु नामु सलाहे बिगसै सो नामु बेपरवाहा हे ॥१६॥२॥११॥

मारू महला ३ ॥
हरि जीउ सेविहु अगम अपारा ॥ तिस दा अंतु न पाईऐ पारावारा ॥ गुर परसादि रविआ घट अंतरि तितु घटि मति अगाहा हे ॥१॥ सभ महि वरतै एको सोई ॥ गुर परसादी परगटु होई ॥ सभना प्रतिपाल करे जगजीवनु देदा रिजकु स्मबाहा हे ॥२॥ पूरै सतिगुरि बूझि बुझाइआ ॥ हुकमे ही सभु जगतु उपाइआ ॥ हुकमु मंने सोई सुखु पाए हुकमु सिरि साहा पातिसाहा हे ॥३॥ सचा सतिगुरु सबदु अपारा ॥ तिस दै सबदि निसतरै संसारा ॥ आपे करता करि करि वेखै देदा सास गिराहा हे ॥४॥ कोटि मधे किसहि बुझाए ॥ गुर कै सबदि रते रंगु लाए ॥ हरि सालाहहि सदा सुखदाता हरि बखसे भगति सलाहा हे ॥५॥ सतिगुरु सेवहि से जन साचे ॥ जो मरि जमहि काचनि काचे ॥ अगम अगोचरु वेपरवाहा भगति वछलु अथाहा हे ॥६॥ सतिगुरु पूरा साचु द्रिड़ाए ॥ सचै सबदि सदा गुण गाए ॥ गुणदाता वरतै सभ अंतरि सिरि सिरि लिखदा साहा हे ॥७॥ सदा हदूरि गुरमुखि जापै ॥ सबदे सेवै सो जनु ध्रापै ॥ अनदिनु सेवहि सची बाणी सबदि सचै ओमाहा हे ॥८॥ अगिआनी अंधा बहु करम द्रिड़ाए ॥ मनहठि करम फिरि जोनी पाए ॥ बिखिआ कारणि लबु लोभु कमावहि दुरमति का दोराहा हे ॥९॥ पूरा सतिगुरु भगति द्रिड़ाए ॥ गुर कै सबदि हरि नामि चितु लाए ॥ मनि तनि हरि रविआ घट अंतरि मनि भीनै भगति सलाहा हे ॥१०॥ मेरा प्रभु साचा असुर संघारणु ॥ गुर कै सबदि भगति निसतारणु ॥ मेरा प्रभु साचा सद ही साचा सिरि साहा पातिसाहा हे ॥११॥ से भगत सचे तेरै मनि भाए ॥ दरि कीरतनु करहि गुर सबदि सुहाए ॥ साची बाणी अनदिनु गावहि निरधन का नामु वेसाहा हे ॥१२॥ जिन आपे मेलि विछोड़हि नाही ॥ गुर कै सबदि सदा सालाही ॥ सभना सिरि तू एको साहिबु सबदे नामु सलाहा हे ॥१३॥ बिनु सबदै तुधुनो कोई न जाणी ॥ तुधु आपे कथी अकथ कहाणी ॥ आपे सबदु सदा गुरु दाता हरि नामु जपि स्मबाहा हे ॥१४॥ तू आपे करता सिरजणहारा ॥ तेरा लिखिआ कोइ न मेटणहारा ॥ गुरमुखि नामु देवहि तू आपे सहसा गणत न ताहा हे ॥१५॥ भगत सचे तेरै दरवारे ॥ सबदे सेवनि भाइ पिआरे ॥ नानक नामि रते बैरागी नामे कारजु सोहा हे ॥१६॥३॥१२॥

मारू महला ३ ॥
मेरै प्रभि साचै इकु खेलु रचाइआ ॥ कोइ न किस ही जेहा उपाइआ ॥ आपे फरकु करे वेखि विगसै सभि रस देही माहा हे ॥१॥ वाजै पउणु तै आपि वजाए ॥ सिव सकती देही महि पाए ॥ गुर परसादी उलटी होवै गिआन रतनु सबदु ताहा हे ॥२॥ अंधेरा चानणु आपे कीआ ॥ एको वरतै अवरु न बीआ ॥ गुर परसादी आपु पछाणै कमलु बिगसै बुधि ताहा हे ॥३॥ अपणी गहण गति आपे जाणै ॥ होरु लोकु सुणि सुणि आखि वखाणै ॥ गिआनी होवै सु गुरमुखि बूझै साची सिफति सलाहा हे ॥४॥ देही अंदरि वसतु अपारा ॥ आपे कपट खुलावणहारा ॥ गुरमुखि सहजे अम्रितु पीवै त्रिसना अगनि बुझाहा हे ॥५॥ सभि रस देही अंदरि पाए ॥ विरले कउ गुरु सबदु बुझाए ॥ अंदरु खोजे सबदु सालाहे बाहरि काहे जाहा हे ॥६॥ विणु चाखे सादु किसै न आइआ ॥ गुर कै सबदि अम्रितु पीआइआ ॥ अम्रितु पी अमरा पदु होए गुर कै सबदि रसु ताहा हे ॥७॥ आपु पछाणै सो सभि गुण जाणै ॥ गुर कै सबदि हरि नामु वखाणै ॥ अनदिनु नामि रता दिनु राती माइआ मोहु चुकाहा हे ॥८॥ गुर सेवा ते सभु किछु पाए ॥ हउमै मेरा आपु गवाए ॥ आपे क्रिपा करे सुखदाता गुर कै सबदे सोहा हे ॥९॥ गुर का सबदु अम्रित है बाणी ॥ अनदिनु हरि का नामु वखाणी ॥ हरि हरि सचा वसै घट अंतरि सो घटु निरमलु ताहा हे ॥१०॥ सेवक सेवहि सबदि सलाहहि ॥ सदा रंगि राते हरि गुण गावहि ॥ आपे बखसे सबदि मिलाए परमल वासु मनि ताहा हे ॥११॥ सबदे अकथु कथे सालाहे ॥ मेरे प्रभ साचे वेपरवाहे ॥ आपे गुणदाता सबदि मिलाए सबदै का रसु ताहा हे ॥१२॥ मनमुखु भूला ठउर न पाए ॥ जो धुरि लिखिआ सु करम कमाए ॥ बिखिआ राते बिखिआ खोजै मरि जनमै दुखु ताहा हे ॥१३॥ आपे आपि आपि सालाहे ॥ तेरे गुण प्रभ तुझ ही माहे ॥ तू आपि सचा तेरी बाणी सची आपे अलखु अथाहा हे ॥१४॥ बिनु गुर दाते कोइ न पाए ॥ लख कोटी जे करम कमाए ॥ गुर किरपा ते घट अंतरि वसिआ सबदे सचु सालाहा हे ॥१५॥ से जन मिले धुरि आपि मिलाए ॥ साची बाणी सबदि सुहाए ॥ नानक जनु गुण गावै नित साचे गुण गावह गुणी समाहा हे ॥१६॥४॥१३॥

मारू महला ३ ॥
निहचलु एकु सदा सचु सोई ॥ पूरे गुर ते सोझी होई ॥ हरि रसि भीने सदा धिआइनि गुरमति सीलु संनाहा हे ॥१॥ अंदरि रंगु सदा सचिआरा ॥ गुर कै सबदि हरि नामि पिआरा ॥ नउ निधि नामु वसिआ घट अंतरि छोडिआ माइआ का लाहा हे ॥२॥ रईअति राजे दुरमति दोई ॥ बिनु सतिगुर सेवे एकु न होई ॥ एकु धिआइनि सदा सुखु पाइनि निहचलु राजु तिनाहा हे ॥३॥ आवणु जाणा रखै न कोई ॥ जमणु मरणु तिसै ते होई ॥ गुरमुखि साचा सदा धिआवहु गति मुकति तिसै ते पाहा हे ॥४॥ सचु संजमु सतिगुरू दुआरै ॥ हउमै क्रोधु सबदि निवारै ॥ सतिगुरु सेवि सदा सुखु पाईऐ सीलु संतोखु सभु ताहा हे ॥५॥ हउमै मोहु उपजै संसारा ॥ सभु जगु बिनसै नामु विसारा ॥ बिनु सतिगुर सेवे नामु न पाईऐ नामु सचा जगि लाहा हे ॥६॥ सचा अमरु सबदि सुहाइआ ॥ पंच सबद मिलि वाजा वाइआ ॥ सदा कारजु सचि नामि सुहेला बिनु सबदै कारजु केहा हे ॥७॥ खिन महि हसै खिन महि रोवै ॥ दूजी दुरमति कारजु न होवै ॥ संजोगु विजोगु करतै लिखि पाए किरतु न चलै चलाहा हे ॥८॥ जीवन मुकति गुर सबदु कमाए ॥ हरि सिउ सद ही रहै समाए ॥ गुर किरपा ते मिलै वडिआई हउमै रोगु न ताहा हे ॥९॥ रस कस खाए पिंडु वधाए ॥ भेख करै गुर सबदु न कमाए ॥ अंतरि रोगु महा दुखु भारी बिसटा माहि समाहा हे ॥१०॥ बेद पड़हि पड़ि बादु वखाणहि ॥ घट महि ब्रहमु तिसु सबदि न पछाणहि ॥ गुरमुखि होवै सु ततु बिलोवै रसना हरि रसु ताहा हे ॥११॥ घरि वथु छोडहि बाहरि धावहि ॥ मनमुख अंधे सादु न पावहि ॥ अन रस राती रसना फीकी बोले हरि रसु मूलि न ताहा हे ॥१२॥ मनमुख देही भरमु भतारो ॥ दुरमति मरै नित होइ खुआरो ॥ कामि क्रोधि मनु दूजै लाइआ सुपनै सुखु न ताहा हे ॥१३॥ कंचन देही सबदु भतारो ॥ अनदिनु भोग भोगे हरि सिउ पिआरो ॥ महला अंदरि गैर महलु पाए भाणा बुझि समाहा हे ॥१४॥ आपे देवै देवणहारा ॥ तिसु आगै नही किसै का चारा ॥ आपे बखसे सबदि मिलाए तिस दा सबदु अथाहा हे ॥१५॥ जीउ पिंडु सभु है तिसु केरा ॥ सचा साहिबु ठाकुरु मेरा ॥ नानक गुरबाणी हरि पाइआ हरि जपु जापि समाहा हे ॥१६॥५॥१४॥

मारू महला ३ ॥
गुरमुखि नाद बेद बीचारु ॥ गुरमुखि गिआनु धिआनु आपारु ॥ गुरमुखि कार करे प्रभ भावै गुरमुखि पूरा पाइदा ॥१॥ गुरमुखि मनूआ उलटि परावै ॥ गुरमुखि बाणी नादु वजावै ॥ गुरमुखि सचि रते बैरागी निज घरि वासा पाइदा ॥२॥ गुर की साखी अम्रित भाखी ॥ सचै सबदे सचु सुभाखी ॥ सदा सचि रंगि राता मनु मेरा सचे सचि समाइदा ॥३॥ गुरमुखि मनु निरमलु सत सरि नावै ॥ मैलु न लागै सचि समावै ॥ सचो सचु कमावै सद ही सची भगति द्रिड़ाइदा ॥४॥ गुरमुखि सचु बैणी गुरमुखि सचु नैणी ॥ गुरमुखि सचु कमावै करणी ॥ सद ही सचु कहै दिनु राती अवरा सचु कहाइदा ॥५॥ गुरमुखि सची ऊतम बाणी ॥ गुरमुखि सचो सचु वखाणी ॥ गुरमुखि सद सेवहि सचो सचा गुरमुखि सबदु सुणाइदा ॥६॥ गुरमुखि होवै सु सोझी पाए ॥ हउमै माइआ भरमु गवाए ॥ गुर की पउड़ी ऊतम ऊची दरि सचै हरि गुण गाइदा ॥७॥ गुरमुखि सचु संजमु करणी सारु ॥ गुरमुखि पाए मोख दुआरु ॥ भाइ भगति सदा रंगि राता आपु गवाइ समाइदा ॥८॥ गुरमुखि होवै मनु खोजि सुणाए ॥ सचै नामि सदा लिव लाए ॥ जो तिसु भावै सोई करसी जो सचे मनि भाइदा ॥९॥ जा तिसु भावै सतिगुरू मिलाए ॥ जा तिसु भावै ता मंनि वसाए ॥ आपणै भाणै सदा रंगि राता भाणै मंनि वसाइदा ॥१०॥ मनहठि करम करे सो छीजै ॥ बहुते भेख करे नही भीजै ॥ बिखिआ राते दुखु कमावहि दुखे दुखि समाइदा ॥११॥ गुरमुखि होवै सु सुखु कमाए ॥ मरण जीवण की सोझी पाए ॥ मरणु जीवणु जो सम करि जाणै सो मेरे प्रभ भाइदा ॥१२॥ गुरमुखि मरहि सु हहि परवाणु ॥ आवण जाणा सबदु पछाणु ॥ मरै न जमै ना दुखु पाए मन ही मनहि समाइदा ॥१३॥ से वडभागी जिनी सतिगुरु पाइआ ॥ हउमै विचहु मोहु चुकाइआ ॥ मनु निरमलु फिरि मैलु न लागै दरि सचै सोभा पाइदा ॥१४॥ आपे करे कराए आपे ॥ आपे वेखै थापि उथापे ॥ गुरमुखि सेवा मेरे प्रभ भावै सचु सुणि लेखै पाइदा ॥१५॥ गुरमुखि सचो सचु कमावै ॥ गुरमुखि निरमलु मैलु न लावै ॥ नानक नामि रते वीचारी नामे नामि समाइदा ॥१६॥१॥१५॥

मारू महला ३ ॥
आपे स्रिसटि हुकमि सभ साजी ॥ आपे थापि उथापि निवाजी ॥ आपे निआउ करे सभु साचा साचे साचि मिलाइदा ॥१॥ काइआ कोटु है आकारा ॥ माइआ मोहु पसरिआ पासारा ॥ बिनु सबदै भसमै की ढेरी खेहू खेह रलाइदा ॥२॥ काइआ कंचन कोटु अपारा ॥ जिसु विचि रविआ सबदु अपारा ॥ गुरमुखि गावै सदा गुण साचे मिलि प्रीतम सुखु पाइदा ॥३॥ काइआ हरि मंदरु हरि आपि सवारे ॥ तिसु विचि हरि जीउ वसै मुरारे ॥ गुर कै सबदि वणजनि वापारी नदरी आपि मिलाइदा ॥४॥ सो सूचा जि करोधु निवारे ॥ सबदे बूझै आपु सवारे ॥ आपे करे कराए करता आपे मंनि वसाइदा ॥५॥ निरमल भगति है निराली ॥ मनु तनु धोवहि सबदि वीचारी ॥ अनदिनु सदा रहै रंगि राता करि किरपा भगति कराइदा ॥६॥ इसु मन मंदर महि मनूआ धावै ॥ सुखु पलरि तिआगि महा दुखु पावै ॥ बिनु सतिगुर भेटे ठउर न पावै आपे खेलु कराइदा ॥७॥ आपि अपर्मपरु आपि वीचारी ॥ आपे मेले करणी सारी ॥ किआ को कार करे वेचारा आपे बखसि मिलाइदा ॥८॥ आपे सतिगुरु मेले पूरा ॥ सचै सबदि महाबल सूरा ॥ आपे मेले दे वडिआई सचे सिउ चितु लाइदा ॥९॥ घर ही अंदरि साचा सोई ॥ गुरमुखि विरला बूझै कोई ॥ नामु निधानु वसिआ घट अंतरि रसना नामु धिआइदा ॥१०॥ दिसंतरु भवै अंतरु नही भाले ॥ माइआ मोहि बधा जमकाले ॥ जम की फासी कबहू न तूटै दूजै भाइ भरमाइदा ॥११॥ जपु तपु संजमु होरु कोई नाही ॥ जब लगु गुर का सबदु न कमाही ॥ गुर कै सबदि मिलिआ सचु पाइआ सचे सचि समाइदा ॥१२॥ काम करोधु सबल संसारा ॥ बहु करम कमावहि सभु दुख का पसारा ॥ सतिगुर सेवहि से सुखु पावहि सचै सबदि मिलाइदा ॥१३॥ पउणु पाणी है बैसंतरु ॥ माइआ मोहु वरतै सभ अंतरि ॥ जिनि कीते जा तिसै पछाणहि माइआ मोहु चुकाइदा ॥१४॥ इकि माइआ मोहि गरबि विआपे ॥ हउमै होइ रहे है आपे ॥ जमकालै की खबरि न पाई अंति गइआ पछुताइदा ॥१५॥ जिनि उपाए सो बिधि जाणै ॥ गुरमुखि देवै सबदु पछाणै ॥ नानक दासु कहै बेनंती सचि नामि चितु लाइदा ॥१६॥२॥१६॥

मारू महला ३ ॥
आदि जुगादि दइआपति दाता ॥ पूरे गुर कै सबदि पछाता ॥ तुधुनो सेवहि से तुझहि समावहि तू आपे मेलि मिलाइदा ॥१॥ अगम अगोचरु कीमति नही पाई ॥ जीअ जंत तेरी सरणाई ॥ जिउ तुधु भावै तिवै चलावहि तू आपे मारगि पाइदा ॥२॥ है भी साचा होसी सोई ॥ आपे साजे अवरु न कोई ॥ सभना सार करे सुखदाता आपे रिजकु पहुचाइदा ॥३॥ अगम अगोचरु अलख अपारा ॥ कोइ न जाणै तेरा परवारा ॥ आपणा आपु पछाणहि आपे गुरमती आपि बुझाइदा ॥४॥ पाताल पुरीआ लोअ आकारा ॥ तिसु विचि वरतै हुकमु करारा ॥ हुकमे साजे हुकमे ढाहे हुकमे मेलि मिलाइदा ॥५॥ हुकमै बूझै सु हुकमु सलाहे ॥ अगम अगोचर वेपरवाहे ॥ जेही मति देहि सो होवै तू आपे सबदि बुझाइदा ॥६॥ अनदिनु आरजा छिजदी जाए ॥ रैणि दिनसु दुइ साखी आए ॥ मनमुखु अंधु न चेतै मूड़ा सिर ऊपरि कालु रूआइदा ॥७॥ मनु तनु सीतलु गुर चरणी लागा ॥ अंतरि भरमु गइआ भउ भागा ॥ सदा अनंदु सचे गुण गावहि सचु बाणी बोलाइदा ॥८॥ जिनि तू जाता करम बिधाता ॥ पूरै भागि गुर सबदि पछाता ॥ जति पति सचु सचा सचु सोई हउमै मारि मिलाइदा ॥९॥ मनु कठोरु दूजै भाइ लागा ॥ भरमे भूला फिरै अभागा ॥ करमु होवै ता सतिगुरु सेवे सहजे ही सुखु पाइदा ॥१०॥ लख चउरासीह आपि उपाए ॥ मानस जनमि गुर भगति द्रिड़ाए ॥ बिनु भगती बिसटा विचि वासा बिसटा विचि फिरि पाइदा ॥११॥ करमु होवै गुरु भगति द्रिड़ाए ॥ विणु करमा किउ पाइआ जाए ॥ आपे करे कराए करता जिउ भावै तिवै चलाइदा ॥१२॥ सिम्रिति सासत अंतु न जाणै ॥ मूरखु अंधा ततु न पछाणै ॥ आपे करे कराए करता आपे भरमि भुलाइदा ॥१३॥ सभु किछु आपे आपि कराए ॥ आपे सिरि सिरि धंधै लाए ॥ आपे थापि उथापे वेखै गुरमुखि आपि बुझाइदा ॥१४॥ सचा साहिबु गहिर ग्मभीरा ॥ सदा सलाही ता मनु धीरा ॥ अगम अगोचरु कीमति नही पाई गुरमुखि मंनि वसाइदा ॥१५॥ आपि निरालमु होर धंधै लोई ॥ गुर परसादी बूझै कोई ॥ नानक नामु वसै घट अंतरि गुरमती मेलि मिलाइदा ॥१६॥३॥१७॥

मारू महला ३ ॥
जुग छतीह कीओ गुबारा ॥ तू आपे जाणहि सिरजणहारा ॥ होर किआ को कहै कि आखि वखाणै तू आपे कीमति पाइदा ॥१॥ ओअंकारि सभ स्रिसटि उपाई ॥ सभु खेलु तमासा तेरी वडिआई ॥ आपे वेक करे सभि साचा आपे भंनि घड़ाइदा ॥२॥ बाजीगरि इक बाजी पाई ॥ पूरे गुर ते नदरी आई ॥ सदा अलिपतु रहै गुर सबदी साचे सिउ चितु लाइदा ॥३॥ बाजहि बाजे धुनि आकारा ॥ आपि वजाए वजावणहारा ॥ घटि घटि पउणु वहै इक रंगी मिलि पवणै सभ वजाइदा ॥४॥ करता करे सु निहचउ होवै ॥ गुर कै सबदे हउमै खोवै ॥ गुर परसादी किसै दे वडिआई नामो नामु धिआइदा ॥५॥ गुर सेवे जेवडु होरु लाहा नाही ॥ नामु मंनि वसै नामो सालाही ॥ नामो नामु सदा सुखदाता नामो लाहा पाइदा ॥६॥ बिनु नावै सभ दुखु संसारा ॥ बहु करम कमावहि वधहि विकारा ॥ नामु न सेवहि किउ सुखु पाईऐ बिनु नावै दुखु पाइदा ॥७॥ आपि करे तै आपि कराए ॥ गुर परसादी किसै बुझाए ॥ गुरमुखि होवहि से बंधन तोड़हि मुकती कै घरि पाइदा ॥८॥ गणत गणै सो जलै संसारा ॥ सहसा मूलि न चुकै विकारा ॥ गुरमुखि होवै सु गणत चुकाए सचे सचि समाइदा ॥९॥ जे सचु देइ त पाए कोई ॥ गुर परसादी परगटु होई ॥ सचु नामु सालाहे रंगि राता गुर किरपा ते सुखु पाइदा ॥१०॥ जपु तपु संजमु नामु पिआरा ॥ किलविख काटे काटणहारा ॥ हरि कै नामि तनु मनु सीतलु होआ सहजे सहजि समाइदा ॥११॥ अंतरि लोभु मनि मैलै मलु लाए ॥ मैले करम करे दुखु पाए ॥ कूड़ो कूड़ु करे वापारा कूड़ु बोलि दुखु पाइदा ॥१२॥ निरमल बाणी को मंनि वसाए ॥ गुर परसादी सहसा जाए ॥ गुर कै भाणै चलै दिनु राती नामु चेति सुखु पाइदा ॥१३॥ आपि सिरंदा सचा सोई ॥ आपि उपाइ खपाए सोई ॥ गुरमुखि होवै सु सदा सलाहे मिलि साचे सुखु पाइदा ॥१४॥ अनेक जतन करे इंद्री वसि न होई ॥ कामि करोधि जलै सभु कोई ॥ सतिगुर सेवे मनु वसि आवै मन मारे मनहि समाइदा ॥१५॥ मेरा तेरा तुधु आपे कीआ ॥ सभि तेरे जंत तेरे सभि जीआ ॥ नानक नामु समालि सदा तू गुरमती मंनि वसाइदा ॥१६॥४॥१८॥

मारू महला ३ ॥
हरि जीउ दाता अगम अथाहा ॥ ओसु तिलु न तमाइ वेपरवाहा ॥ तिस नो अपड़ि न सकै कोई आपे मेलि मिलाइदा ॥१॥ जो किछु करै सु निहचउ होई ॥ तिसु बिनु दाता अवरु न कोई ॥ जिस नो नाम दानु करे सो पाए गुर सबदी मेलाइदा ॥२॥ चउदह भवण तेरे हटनाले ॥ सतिगुरि दिखाए अंतरि नाले ॥ नावै का वापारी होवै गुर सबदी को पाइदा ॥३॥ सतिगुरि सेविऐ सहज अनंदा ॥ हिरदै आइ वुठा गोविंदा ॥ सहजे भगति करे दिनु राती आपे भगति कराइदा ॥४॥ सतिगुर ते विछुड़े तिनी दुखु पाइआ ॥ अनदिनु मारीअहि दुखु सबाइआ ॥ मथे काले महलु न पावहि दुख ही विचि दुखु पाइदा ॥५॥ सतिगुरु सेवहि से वडभागी ॥ सहज भाइ सची लिव लागी ॥ सचो सचु कमावहि सद ही सचै मेलि मिलाइदा ॥६॥ जिस नो सचा देइ सु पाए ॥ अंतरि साचु भरमु चुकाए ॥ सचु सचै का आपे दाता जिसु देवै सो सचु पाइदा ॥७॥ आपे करता सभना का सोई ॥ जिस नो आपि बुझाए बूझै कोई ॥ आपे बखसे दे वडिआई आपे मेलि मिलाइदा ॥८॥ हउमै करदिआ जनमु गवाइआ ॥ आगै मोहु न चूकै माइआ ॥ अगै जमकालु लेखा लेवै जिउ तिल घाणी पीड़ाइदा ॥९॥ पूरै भागि गुर सेवा होई ॥ नदरि करे ता सेवे कोई ॥ जमकालु तिसु नेड़ि न आवै महलि सचै सुखु पाइदा ॥१०॥ तिन सुखु पाइआ जो तुधु भाए ॥ पूरै भागि गुर सेवा लाए ॥ तेरै हथि है सभ वडिआई जिसु देवहि सो पाइदा ॥११॥ अंदरि परगासु गुरू ते पाए ॥ नामु पदारथु मंनि वसाए ॥ गिआन रतनु सदा घटि चानणु अगिआन अंधेरु गवाइदा ॥१२॥ अगिआनी अंधे दूजै लागे ॥ बिनु पाणी डुबि मूए अभागे ॥ चलदिआ घरु दरु नदरि न आवै जम दरि बाधा दुखु पाइदा ॥१३॥ बिनु सतिगुर सेवे मुकति न होई ॥ गिआनी धिआनी पूछहु कोई ॥ सतिगुरु सेवे तिसु मिलै वडिआई दरि सचै सोभा पाइदा ॥१४॥ सतिगुर नो सेवे तिसु आपि मिलाए ॥ ममता काटि सचि लिव लाए ॥ सदा सचु वणजहि वापारी नामो लाहा पाइदा ॥१५॥ आपे करे कराए करता ॥ सबदि मरै सोई जनु मुकता ॥ नानक नामु वसै मन अंतरि नामो नामु धिआइदा ॥१६॥५॥१९॥

मारू महला ३ ॥
जो तुधु करणा सो करि पाइआ ॥ भाणे विचि को विरला आइआ ॥ भाणा मंने सो सुखु पाए भाणे विचि सुखु पाइदा ॥१॥ गुरमुखि तेरा भाणा भावै ॥ सहजे ही सुखु सचु कमावै ॥ भाणे नो लोचै बहुतेरी आपणा भाणा आपि मनाइदा ॥२॥ तेरा भाणा मंने सु मिलै तुधु आए ॥ जिसु भाणा भावै सो तुझहि समाए ॥ भाणे विचि वडी वडिआई भाणा किसहि कराइदा ॥३॥ जा तिसु भावै ता गुरू मिलाए ॥ गुरमुखि नामु पदारथु पाए ॥ तुधु आपणै भाणै सभ स्रिसटि उपाई जिस नो भाणा देहि तिसु भाइदा ॥४॥ मनमुखु अंधु करे चतुराई ॥ भाणा न मंने बहुतु दुखु पाई ॥ भरमे भूला आवै जाए घरु महलु न कबहू पाइदा ॥५॥ सतिगुरु मेले दे वडिआई ॥ सतिगुर की सेवा धुरि फुरमाई ॥ सतिगुर सेवे ता नामु पाए नामे ही सुखु पाइदा ॥६॥ सभ नावहु उपजै नावहु छीजै ॥ गुर किरपा ते मनु तनु भीजै ॥ रसना नामु धिआए रसि भीजै रस ही ते रसु पाइदा ॥७॥ महलै अंदरि महलु को पाए ॥ गुर कै सबदि सचि चितु लाए ॥ जिस नो सचु देइ सोई सचु पाए सचे सचि मिलाइदा ॥८॥ नामु विसारि मनि तनि दुखु पाइआ ॥ माइआ मोहु सभु रोगु कमाइआ ॥ बिनु नावै मनु तनु है कुसटी नरके वासा पाइदा ॥९॥ नामि रते तिन निरमल देहा ॥ निरमल हंसा सदा सुखु नेहा ॥ नामु सलाहि सदा सुखु पाइआ निज घरि वासा पाइदा ॥१०॥ सभु को वणजु करे वापारा ॥ विणु नावै सभु तोटा संसारा ॥ नागो आइआ नागो जासी विणु नावै दुखु पाइदा ॥११॥ जिस नो नामु देइ सो पाए ॥ गुर कै सबदि हरि मंनि वसाए ॥ गुर किरपा ते नामु वसिआ घट अंतरि नामो नामु धिआइदा ॥१२॥ नावै नो लोचै जेती सभ आई ॥ नाउ तिना मिलै धुरि पुरबि कमाई ॥ जिनी नाउ पाइआ से वडभागी गुर कै सबदि मिलाइदा ॥१३॥ काइआ कोटु अति अपारा ॥ तिसु विचि बहि प्रभु करे वीचारा ॥ सचा निआउ सचो वापारा निहचलु वासा पाइदा ॥१४॥ अंतर घर बंके थानु सुहाइआ ॥ गुरमुखि विरलै किनै थानु पाइआ ॥ इतु साथि निबहै सालाहे सचे हरि सचा मंनि वसाइदा ॥१५॥ मेरै करतै इक बणत बणाई ॥ इसु देही विचि सभ वथु पाई ॥ नानक नामु वणजहि रंगि राते गुरमुखि को नामु पाइदा ॥१६॥६॥२०॥

मारू महला ३ ॥
काइआ कंचनु सबदु वीचारा ॥ तिथै हरि वसै जिस दा अंतु न पारावारा ॥ अनदिनु हरि सेविहु सची बाणी हरि जीउ सबदि मिलाइदा ॥१॥ हरि चेतहि तिन बलिहारै जाउ ॥ गुर कै सबदि तिन मेलि मिलाउ ॥ तिन की धूरि लाई मुखि मसतकि सतसंगति बहि गुण गाइदा ॥२॥ हरि के गुण गावा जे हरि प्रभ भावा ॥ अंतरि हरि नामु सबदि सुहावा ॥ गुरबाणी चहु कुंडी सुणीऐ साचै नामि समाइदा ॥३॥ सो जनु साचा जि अंतरु भाले ॥ गुर कै सबदि हरि नदरि निहाले ॥ गिआन अंजनु पाए गुर सबदी नदरी नदरि मिलाइदा ॥४॥ वडै भागि इहु सरीरु पाइआ ॥ माणस जनमि सबदि चितु लाइआ ॥ बिनु सबदै सभु अंध अंधेरा गुरमुखि किसहि बुझाइदा ॥५॥ इकि कितु आए जनमु गवाए ॥ मनमुख लागे दूजै भाए ॥ एह वेला फिरि हाथि न आवै पगि खिसिऐ पछुताइदा ॥६॥ गुर कै सबदि पवित्रु सरीरा ॥ तिसु विचि वसै सचु गुणी गहीरा ॥ सचो सचु वेखै सभ थाई सचु सुणि मंनि वसाइदा ॥७॥ हउमै गणत गुर सबदि निवारे ॥ हरि जीउ हिरदै रखहु उर धारे ॥ गुर कै सबदि सदा सालाहे मिलि साचे सुखु पाइदा ॥८॥ सो चेते जिसु आपि चेताए ॥ गुर कै सबदि वसै मनि आए ॥ आपे वेखै आपे बूझै आपै आपु समाइदा ॥९॥ जिनि मन विचि वथु पाई सोई जाणै ॥ गुर कै सबदे आपु पछाणै ॥ आपु पछाणै सोई जनु निरमलु बाणी सबदु सुणाइदा ॥१०॥ एह काइआ पवितु है सरीरु ॥ गुर सबदी चेतै गुणी गहीरु ॥ अनदिनु गुण गावै रंगि राता गुण कहि गुणी समाइदा ॥११॥ एहु सरीरु सभ मूलु है माइआ ॥ दूजै भाइ भरमि भुलाइआ ॥ हरि न चेतै सदा दुखु पाए बिनु हरि चेते दुखु पाइदा ॥१२॥ जि सतिगुरु सेवे सो परवाणु ॥ काइआ हंसु निरमलु दरि सचै जाणु ॥ हरि सेवे हरि मंनि वसाए सोहै हरि गुण गाइदा ॥१३॥ बिनु भागा गुरु सेविआ न जाइ ॥ मनमुख भूले मुए बिललाइ ॥ जिन कउ नदरि होवै गुर केरी हरि जीउ आपि मिलाइदा ॥१४॥ काइआ कोटु पके हटनाले ॥ गुरमुखि लेवै वसतु समाले ॥ हरि का नामु धिआइ दिनु राती ऊतम पदवी पाइदा ॥१५॥ आपे सचा है सुखदाता ॥ पूरे गुर कै सबदि पछाता ॥ नानक नामु सलाहे साचा पूरै भागि को पाइदा ॥१६॥७॥२१॥

मारू महला ३ ॥
निरंकारि आकारु उपाइआ ॥ माइआ मोहु हुकमि बणाइआ ॥ आपे खेल करे सभि करता सुणि साचा मंनि वसाइदा ॥१॥ माइआ माई त्रै गुण परसूति जमाइआ ॥ चारे बेद ब्रहमे नो फुरमाइआ ॥ वर्हे माह वार थिती करि इसु जग महि सोझी पाइदा ॥२॥ गुर सेवा ते करणी सार ॥ राम नामु राखहु उरि धार ॥ गुरबाणी वरती जग अंतरि इसु बाणी ते हरि नामु पाइदा ॥३॥ वेदु पड़ै अनदिनु वाद समाले ॥ नामु न चेतै बधा जमकाले ॥ दूजै भाइ सदा दुखु पाए त्रै गुण भरमि भुलाइदा ॥४॥ गुरमुखि एकसु सिउ लिव लाए ॥ त्रिबिधि मनसा मनहि समाए ॥ साचै सबदि सदा है मुकता माइआ मोहु चुकाइदा ॥५॥ जो धुरि राते से हुणि राते ॥ गुर परसादी सहजे माते ॥ सतिगुरु सेवि सदा प्रभु पाइआ आपै आपु मिलाइदा ॥६॥ माइआ मोहि भरमि न पाए ॥ दूजै भाइ लगा दुखु पाए ॥ सूहा रंगु दिन थोड़े होवै इसु जादे बिलम न लाइदा ॥७॥ एहु मनु भै भाइ रंगाए ॥ इतु रंगि साचे माहि समाए ॥ पूरै भागि को इहु रंगु पाए गुरमती रंगु चड़ाइदा ॥८॥ मनमुखु बहुतु करे अभिमानु ॥ दरगह कब ही न पावै मानु ॥ दूजै लागे जनमु गवाइआ बिनु बूझे दुखु पाइदा ॥९॥ मेरै प्रभि अंदरि आपु लुकाइआ ॥ गुर परसादी हरि मिलै मिलाइआ ॥ सचा प्रभु सचा वापारा नामु अमोलकु पाइदा ॥१०॥ इसु काइआ की कीमति किनै न पाई ॥ मेरै ठाकुरि इह बणत बणाई ॥ गुरमुखि होवै सु काइआ सोधै आपहि आपु मिलाइदा ॥११॥ काइआ विचि तोटा काइआ विचि लाहा ॥ गुरमुखि खोजे वेपरवाहा ॥ गुरमुखि वणजि सदा सुखु पाए सहजे सहजि मिलाइदा ॥१२॥ सचा महलु सचे भंडारा ॥ आपे देवै देवणहारा ॥ गुरमुखि सालाहे सुखदाते मनि मेले कीमति पाइदा ॥१३॥ काइआ विचि वसतु कीमति नही पाई ॥ गुरमुखि आपे दे वडिआई ॥ जिस दा हटु सोई वथु जाणै गुरमुखि देइ न पछोताइदा ॥१४॥ हरि जीउ सभ महि रहिआ समाई ॥ गुर परसादी पाइआ जाई ॥ आपे मेलि मिलाए आपे सबदे सहजि समाइदा ॥१५॥ आपे सचा सबदि मिलाए ॥ सबदे विचहु भरमु चुकाए ॥ नानक नामि मिलै वडिआई नामे ही सुखु पाइदा ॥१६॥८॥२२॥

मारू महला ३ ॥
अगम अगोचर वेपरवाहे ॥ आपे मिहरवान अगम अथाहे ॥ अपड़ि कोइ न सकै तिस नो गुर सबदी मेलाइआ ॥१॥ तुधुनो सेवहि जो तुधु भावहि ॥ गुर कै सबदे सचि समावहि ॥ अनदिनु गुण रवहि दिनु राती रसना हरि रसु भाइआ ॥२॥ सबदि मरहि से मरणु सवारहि ॥ हरि के गुण हिरदै उर धारहि ॥ जनमु सफलु हरि चरणी लागे दूजा भाउ चुकाइआ ॥३॥ हरि जीउ मेले आपि मिलाए ॥ गुर कै सबदे आपु गवाए ॥ अनदिनु सदा हरि भगती राते इसु जग महि लाहा पाइआ ॥४॥ तेरे गुण कहा मै कहणु न जाई ॥ अंतु न पारा कीमति नही पाई ॥ आपे दइआ करे सुखदाता गुण महि गुणी समाइआ ॥५॥ इसु जग महि मोहु है पासारा ॥ मनमुखु अगिआनी अंधु अंधारा ॥ धंधै धावतु जनमु गवाइआ बिनु नावै दुखु पाइआ ॥६॥ करमु होवै ता सतिगुरु पाए ॥ हउमै मैलु सबदि जलाए ॥ मनु निरमलु गिआनु रतनु चानणु अगिआनु अंधेरु गवाइआ ॥७॥ तेरे नाम अनेक कीमति नही पाई ॥ सचु नामु हरि हिरदै वसाई ॥ कीमति कउणु करे प्रभ तेरी तू आपे सहजि समाइआ ॥८॥ नामु अमोलकु अगम अपारा ॥ ना को होआ तोलणहारा ॥ आपे तोले तोलि तोलाए गुर सबदी मेलि तोलाइआ ॥९॥ सेवक सेवहि करहि अरदासि ॥ तू आपे मेलि बहालहि पासि ॥ सभना जीआ का सुखदाता पूरै करमि धिआइआ ॥१०॥ जतु सतु संजमु जि सचु कमावै ॥ इहु मनु निरमलु जि हरि गुण गावै ॥ इसु बिखु महि अम्रितु परापति होवै हरि जीउ मेरे भाइआ ॥११॥ जिस नो बुझाए सोई बूझै ॥ हरि गुण गावै अंदरु सूझै ॥ हउमै मेरा ठाकि रहाए सहजे ही सचु पाइआ ॥१२॥ बिनु करमा होर फिरै घनेरी ॥ मरि मरि जमै चुकै न फेरी ॥ बिखु का राता बिखु कमावै सुखु न कबहू पाइआ ॥१३॥ बहुते भेख करे भेखधारी ॥ बिनु सबदै हउमै किनै न मारी ॥ जीवतु मरै ता मुकति पाए सचै नाइ समाइआ ॥१४॥ अगिआनु त्रिसना इसु तनहि जलाए ॥ तिस दी बूझै जि गुर सबदु कमाए ॥ तनु मनु सीतलु क्रोधु निवारे हउमै मारि समाइआ ॥१५॥ सचा साहिबु सची वडिआई ॥ गुर परसादी विरलै पाई ॥ नानकु एक कहै बेनंती नामे नामि समाइआ ॥१६॥१॥२३॥

मारू महला ३ ॥
नदरी भगता लैहु मिलाए ॥ भगत सलाहनि सदा लिव लाए ॥ तउ सरणाई उबरहि करते आपे मेलि मिलाइआ ॥१॥ पूरै सबदि भगति सुहाई ॥ अंतरि सुखु तेरै मनि भाई ॥ मनु तनु सची भगती राता सचे सिउ चितु लाइआ ॥२॥ हउमै विचि सद जलै सरीरा ॥ करमु होवै भेटे गुरु पूरा ॥ अंतरि अगिआनु सबदि बुझाए सतिगुर ते सुखु पाइआ ॥३॥ मनमुखु अंधा अंधु कमाए ॥ बहु संकट जोनी भरमाए ॥ जम का जेवड़ा कदे न काटै अंते बहु दुखु पाइआ ॥४॥ आवण जाणा सबदि निवारे ॥ सचु नामु रखै उर धारे ॥ गुर कै सबदि मरै मनु मारे हउमै जाइ समाइआ ॥५॥ आवण जाणै परज विगोई ॥ बिनु सतिगुर थिरु कोइ न होई ॥ अंतरि जोति सबदि सुखु वसिआ जोती जोति मिलाइआ ॥६॥ पंच दूत चितवहि विकारा ॥ माइआ मोह का एहु पसारा ॥ सतिगुरु सेवे ता मुकतु होवै पंच दूत वसि आइआ ॥७॥ बाझु गुरू है मोहु गुबारा ॥ फिरि फिरि डुबै वारो वारा ॥ सतिगुर भेटे सचु द्रिड़ाए सचु नामु मनि भाइआ ॥८॥ साचा दरु साचा दरवारा ॥ सचे सेवहि सबदि पिआरा ॥ सची धुनि सचे गुण गावा सचे माहि समाइआ ॥९॥ घरै अंदरि को घरु पाए ॥ गुर कै सबदे सहजि सुभाए ॥ ओथै सोगु विजोगु न विआपै सहजे सहजि समाइआ ॥१०॥ दूजै भाइ दुसटा का वासा ॥ भउदे फिरहि बहु मोह पिआसा ॥ कुसंगति बहहि सदा दुखु पावहि दुखो दुखु कमाइआ ॥११॥ सतिगुर बाझहु संगति न होई ॥ बिनु सबदे पारु न पाए कोई ॥ सहजे गुण रवहि दिनु राती जोती जोति मिलाइआ ॥१२॥ काइआ बिरखु पंखी विचि वासा ॥ अम्रितु चुगहि गुर सबदि निवासा ॥ उडहि न मूले न आवहि न जाही निज घरि वासा पाइआ ॥१३॥ काइआ सोधहि सबदु वीचारहि ॥ मोह ठगउरी भरमु निवारहि ॥ आपे क्रिपा करे सुखदाता आपे मेलि मिलाइआ ॥१४॥ सद ही नेड़ै दूरि न जाणहु ॥ गुर कै सबदि नजीकि पछाणहु ॥ बिगसै कमलु किरणि परगासै परगटु करि देखाइआ ॥१५॥ आपे करता सचा सोई ॥ आपे मारि जीवाले अवरु न कोई ॥ नानक नामु मिलै वडिआई आपु गवाइ सुखु पाइआ ॥१६॥२॥२४॥


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