Pt 6 - संकट मोचन शब्द, Part 6 - Sankat mochan / Gurshabad sidhi / Shradha puran Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


** शत्रु के नाश के लिए **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 630)
सोरठि महला ५ ॥
नालि नराइणु मेरै ॥ जमदूतु न आवै नेरै ॥ कंठि लाइ प्रभ राखै ॥ सतिगुर की सचु साखै ॥१॥ गुरि पूरै पूरी कीती ॥ दुसमन मारि विडारे सगले दास कउ सुमति दीती ॥१॥ रहाउ ॥ प्रभि सगले थान वसाए ॥ सुखि सांदि फिरि आए ॥ नानक प्रभ सरणाए ॥ जिनि सगले रोग मिटाए ॥२॥२४॥८८॥

** शत्रु से रक्षा **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 825)
बिलावलु महला ५ ॥
सुलही ते नाराइण राखु ॥ सुलही का हाथु कही न पहुचै सुलही होइ मूआ नापाकु ॥१॥ रहाउ ॥ काढि कुठारु खसमि सिरु काटिआ खिन महि होइ गइआ है खाकु ॥ मंदा चितवत चितवत पचिआ जिनि रचिआ तिनि दीना धाकु ॥१॥ पुत्र मीत धनु किछू न रहिओ सु छोडि गइआ सभ भाई साकु ॥ कहु नानक तिसु प्रभ बलिहारी जिनि जन का कीनो पूरन वाकु ॥२॥१८॥१०४॥

** दुश्मनों से रक्षा करना **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 190)
गउड़ी महला ५ ॥
राखि लीआ गुरि पूरै आपि ॥ मनमुख कउ लागो संतापु ॥१॥ गुरू गुरू जपि मीत हमारे ॥ मुख ऊजल होवहि दरबारे ॥१॥ रहाउ ॥ गुर के चरण हिरदै वसाइ ॥ दुख दुसमन तेरी हतै बलाइ ॥२॥ गुर का सबदु तेरै संगि सहाई ॥ दइआल भए सगले जीअ भाई ॥३॥ गुरि पूरै जब किरपा करी ॥ भनति नानक मेरी पूरी परी ॥४॥५४॥१२३॥

** दुष्टों का नाश **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 714)
टोडी महला ५ ॥
निंदकु गुर किरपा ते हाटिओ ॥ पारब्रहम प्रभ भए दइआला सिव कै बाणि सिरु काटिओ ॥१॥ रहाउ ॥ कालु जालु जमु जोहि न साकै सच का पंथा थाटिओ ॥ खात खरचत किछु निखुटत नाही राम रतनु धनु खाटिओ ॥१॥ भसमा भूत होआ खिन भीतरि अपना कीआ पाइआ ॥ आगम निगमु कहै जनु नानकु सभु देखै लोकु सबाइआ ॥२॥६॥११॥

** पाप का नाश **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 673)
धनासरी महला ५ ॥
तुम दाते ठाकुर प्रतिपालक नाइक खसम हमारे ॥ निमख निमख तुम ही प्रतिपालहु हम बारिक तुमरे धारे ॥१॥ जिहवा एक कवन गुन कहीऐ ॥ बेसुमार बेअंत सुआमी तेरो अंतु न किन ही लहीऐ ॥१॥ रहाउ ॥ कोटि पराध हमारे खंडहु अनिक बिधी समझावहु ॥ हम अगिआन अलप मति थोरी तुम आपन बिरदु रखावहु ॥२॥ तुमरी सरणि तुमारी आसा तुम ही सजन सुहेले ॥ राखहु राखनहार दइआला नानक घर के गोले ॥३॥१२॥

** निन्दक दोषी को सजा **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 373)
आसा महला ५ ॥
अरड़ावै बिललावै निंदकु ॥ पारब्रहमु परमेसरु बिसरिआ अपणा कीता पावै निंदकु ॥१॥ रहाउ ॥ जे कोई उस का संगी होवै नाले लए सिधावै ॥ अणहोदा अजगरु भारु उठाए निंदकु अगनी माहि जलावै ॥१॥ परमेसर कै दुआरै जि होइ बितीतै सु नानकु आखि सुणावै ॥ भगत जना कउ सदा अनंदु है हरि कीरतनु गाइ बिगसावै ॥२॥१०॥

** अभिमानी का घमंड टूटे **
(गुरू नानक देव जी) (अंग 722)
तिलंग महला १ ॥
जैसी मै आवै खसम की बाणी तैसड़ा करी गिआनु वे लालो ॥ पाप की जंञ लै काबलहु धाइआ जोरी मंगै दानु वे लालो ॥ सरमु धरमु दुइ छपि खलोए कूड़ु फिरै परधानु वे लालो ॥ काजीआ बामणा की गल थकी अगदु पड़ै सैतानु वे लालो ॥ मुसलमानीआ पड़हि कतेबा कसट महि करहि खुदाइ वे लालो ॥ जाति सनाती होरि हिदवाणीआ एहि भी लेखै लाइ वे लालो ॥ खून के सोहिले गावीअहि नानक रतु का कुंगू पाइ वे लालो ॥१॥

** छाया दूर हो **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 749)
सूही महला ५ ॥
जिस के सिर ऊपरि तूं सुआमी सो दुखु कैसा पावै ॥ बोलि न जाणै माइआ मदि माता मरणा चीति न आवै ॥१॥ मेरे राम राइ तूं संता का संत तेरे ॥ तेरे सेवक कउ भउ किछु नाही जमु नही आवै नेरे ॥१॥ रहाउ ॥ जो तेरै रंगि राते सुआमी तिन्ह का जनम मरण दुखु नासा ॥ तेरी बखस न मेटै कोई सतिगुर का दिलासा ॥२॥ नामु धिआइनि सुख फल पाइनि आठ पहर आराधहि ॥ तेरी सरणि तेरै भरवासै पंच दुसट लै साधहि ॥३॥ गिआनु धिआनु किछु करमु न जाणा सार न जाणा तेरी ॥ सभ ते वडा सतिगुरु नानकु जिनि कल राखी मेरी ॥४॥१०॥५७॥

** दोषियों को दंड मिले **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 826)
बिलावलु महला ५ ॥
पारब्रहम प्रभ भए क्रिपाल ॥ कारज सगल सवारे सतिगुर जपि जपि साधू भए निहाल ॥१॥ रहाउ ॥ अंगीकारु कीआ प्रभि अपनै दोखी सगले भए रवाल ॥ कंठि लाइ राखे जन अपने उधरि लीए लाइ अपनै पाल ॥१॥ सही सलामति मिलि घरि आए निंदक के मुख होए काल ॥ कहु नानक मेरा सतिगुरु पूरा गुर प्रसादि प्रभ भए निहाल ॥२॥२७॥११३॥

** शत्रुओं का नाश **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 681)
धनासरी महला ५ ॥
दूत दुसमन सभि तुझ ते निवरहि प्रगट प्रतापु तुमारा ॥ जो जो तेरे भगत दुखाए ओहु ततकाल तुम मारा ॥१॥ निरखउ तुमरी ओरि हरि नीत ॥ मुरारि सहाइ होहु दास कउ करु गहि उधरहु मीत ॥ रहाउ ॥ सुणी बेनती ठाकुरि मेरै खसमाना करि आपि ॥ नानक अनद भए दुख भागे सदा सदा हरि जापि ॥२॥१३॥४४॥

** भूत प्रेत की छाया दूर हो **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 813)
बिलावलु महला ५ ॥
महा तपति ते भई सांति परसत पाप नाठे ॥ अंध कूप महि गलत थे काढे दे हाथे ॥१॥ ओइ हमारे साजना हम उन की रेन ॥ जिन भेटत होवत सुखी जीअ दानु देन ॥१॥ रहाउ ॥ परा पूरबला लीखिआ मिलिआ अब आइ ॥ बसत संगि हरि साध कै पूरन आसाइ ॥२॥ भै बिनसे तिहु लोक के पाए सुख थान ॥ दइआ करी समरथ गुरि बसिआ मनि नाम ॥३॥ नानक की तू टेक प्रभ तेरा आधार ॥ करण कारण समरथ प्रभ हरि अगम अपार ॥४॥१९॥४९॥

** छाया दूर हो **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 867)
गोंड महला ५ ॥
नामु निरंजनु नीरि नराइण ॥ रसना सिमरत पाप बिलाइण ॥१॥ रहाउ ॥ नाराइण सभ माहि निवास ॥ नाराइण घटि घटि परगास ॥ नाराइण कहते नरकि न जाहि ॥ नाराइण सेवि सगल फल पाहि ॥१॥ नाराइण मन माहि अधार ॥ नाराइण बोहिथ संसार ॥ नाराइण कहत जमु भागि पलाइण ॥ नाराइण दंत भाने डाइण ॥२॥ नाराइण सद सद बखसिंद ॥ नाराइण कीने सूख अनंद ॥ नाराइण प्रगट कीनो परताप ॥ नाराइण संत को माई बाप ॥३॥ नाराइण साधसंगि नराइण ॥ बारं बार नराइण गाइण ॥ बसतु अगोचर गुर मिलि लही ॥ नाराइण ओट नानक दास गही ॥४॥१७॥१९॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates