Pt 5 - संकट मोचन शब्द, Part 5 - Sankat mochan / Gurshabad sidhi / Shradha puran Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


** अलौकिक शक्ति से मदद **
(गुरू रामदास जी) (अंग 366)
रागु आसा घरु २ महला ४ ॥
किस ही धड़ा कीआ मित्र सुत नालि भाई ॥ किस ही धड़ा कीआ कुड़म सके नालि जवाई ॥ किस ही धड़ा कीआ सिकदार चउधरी नालि आपणै सुआई ॥ हमारा धड़ा हरि रहिआ समाई ॥१॥ हम हरि सिउ धड़ा कीआ मेरी हरि टेक ॥ मै हरि बिनु पखु धड़ा अवरु न कोई हउ हरि गुण गावा असंख अनेक ॥१॥ रहाउ ॥ जिन्ह सिउ धड़े करहि से जाहि ॥ झूठु धड़े करि पछोताहि ॥ थिरु न रहहि मनि खोटु कमाहि ॥ हम हरि सिउ धड़ा कीआ जिस का कोई समरथु नाहि ॥२॥

** माया से छुटकारा **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 394)
आसा महला ५ ॥
माथै त्रिकुटी द्रिसटि करूरि ॥ बोलै कउड़ा जिहबा की फूड़ि ॥ सदा भूखी पिरु जानै दूरि ॥१॥ ऐसी इसत्री इक रामि उपाई ॥ उनि सभु जगु खाइआ हम गुरि राखे मेरे भाई ॥ रहाउ ॥ पाइ ठगउली सभु जगु जोहिआ ॥ ब्रहमा बिसनु महादेउ मोहिआ ॥ गुरमुखि नामि लगे से सोहिआ ॥२॥ वरत नेम करि थाके पुनहचरना ॥ तट तीरथ भवे सभ धरना ॥ से उबरे जि सतिगुर की सरना ॥३॥ माइआ मोहि सभो जगु बाधा ॥ हउमै पचै मनमुख मूराखा ॥ गुर नानक बाह पकरि हम राखा ॥४॥२॥९६॥

** मौत का डर दूर हो **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 218)
गउड़ी महला ५ मांझ ॥
दुख भंजनु तेरा नामु जी दुख भंजनु तेरा नामु ॥ आठ पहर आराधीऐ पूरन सतिगुर गिआनु ॥१॥ रहाउ ॥ जितु घटि वसै पारब्रहमु सोई सुहावा थाउ ॥ जम कंकरु नेड़ि न आवई रसना हरि गुण गाउ ॥१॥ सेवा सुरति न जाणीआ ना जापै आराधि ॥ ओट तेरी जगजीवना मेरे ठाकुर अगम अगाधि ॥२॥ भए क्रिपाल गुसाईआ नठे सोग संताप ॥ तती वाउ न लगई सतिगुरि रखे आपि ॥३॥ गुरु नाराइणु दयु गुरु गुरु सचा सिरजणहारु ॥ गुरि तुठै सभ किछु पाइआ जन नानक सद बलिहार ॥४॥२॥१७०॥

** नौ निधियों बारह सिद्धि की प्राप्ति **
(गुरू नानक देव जी) (अंग 9)
आसा महला १ ॥
सुणि वडा आखै सभु कोइ ॥ केवडु वडा डीठा होइ ॥ कीमति पाइ न कहिआ जाइ ॥ कहणै वाले तेरे रहे समाइ ॥१॥ वडे मेरे साहिबा गहिर ग्मभीरा गुणी गहीरा ॥ कोइ न जाणै तेरा केता केवडु चीरा ॥१॥ रहाउ ॥ सभि सुरती मिलि सुरति कमाई ॥ सभ कीमति मिलि कीमति पाई ॥ गिआनी धिआनी गुर गुरहाई ॥ कहणु न जाई तेरी तिलु वडिआई ॥२॥ सभि सत सभि तप सभि चंगिआईआ ॥ सिधा पुरखा कीआ वडिआईआ ॥ तुधु विणु सिधी किनै न पाईआ ॥ करमि मिलै नाही ठाकि रहाईआ ॥३॥ आखण वाला किआ वेचारा ॥ सिफती भरे तेरे भंडारा ॥ जिसु तू देहि तिसै किआ चारा ॥ नानक सचु सवारणहारा ॥४॥२॥

** मौत यमदूत का डर खत्म हो **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 679)
धनासरी महला ५ ॥
भए क्रिपाल दइआल गोबिंदा अम्रितु रिदै सिंचाई ॥ नव निधि रिधि सिधि हरि लागि रही जन पाई ॥१॥ संतन कउ अनदु सगल ही जाई ॥ ग्रिहि बाहरि ठाकुरु भगतन का रवि रहिआ स्रब ठाई ॥१॥ रहाउ ॥ ता कउ कोइ न पहुचनहारा जा कै अंगि गुसाई ॥ जम की त्रास मिटै जिसु सिमरत नानक नामु धिआई ॥२॥२॥३३॥

** प्रभु मदद करैं **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 724)
तिलंग महला ५ घरु ३ ॥
मिहरवानु साहिबु मिहरवानु ॥ साहिबु मेरा मिहरवानु ॥ जीअ सगल कउ देइ दानु ॥ रहाउ ॥ तू काहे डोलहि प्राणीआ तुधु राखैगा सिरजणहारु ॥ जिनि पैदाइसि तू कीआ सोई देइ आधारु ॥१॥ जिनि उपाई मेदनी सोई करदा सार ॥ घटि घटि मालकु दिला का सचा परवदगारु ॥२॥ कुदरति कीम न जाणीऐ वडा वेपरवाहु ॥ करि बंदे तू बंदगी जिचरु घट महि साहु ॥३॥ तू समरथु अकथु अगोचरु जीउ पिंडु तेरी रासि ॥ रहम तेरी सुखु पाइआ सदा नानक की अरदासि ॥४॥३॥

** रिद्धि सिद्धि के लिए **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 783)
नव निधि सिधि रिधि दीने करते तोटि न आवै काई राम ॥ खात खरचत बिलछत सुखु पाइआ करते की दाति सवाई राम ॥ दाति सवाई निखुटि न जाई अंतरजामी पाइआ ॥ कोटि बिघन सगले उठि नाठे दूखु न नेड़ै आइआ ॥ सांति सहज आनंद घनेरे बिनसी भूख सबाई ॥ नानक गुण गावहि सुआमी के अचरजु जिसु वडिआई राम ॥२॥

** पुनर्जन्म से छुटकारा **
(गुरू अर्जन देव जी) (अंग 261)
पउड़ी ॥
खेलत खेलत आइओ अनिक जोनि दुख पाइ ॥ खेद मिटे साधू मिलत सतिगुर बचन समाइ ॥ खिमा गही सचु संचिओ खाइओ अम्रितु नाम ॥ खरी क्रिपा ठाकुर भई अनद सूख बिस्राम ॥ खेप निबाही बहुतु लाभ घरि आए पतिवंत ॥ खरा दिलासा गुरि दीआ आइ मिले भगवंत ॥ आपन कीआ करहि आपि आगै पाछै आपि ॥ नानक सोऊ सराहीऐ जि घटि घटि रहिआ बिआपि ॥५३॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates