राग टोडी - बाणी शब्द, Raag Todi - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू रामदास जी -- SGGS 711) ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
रागु टोडी महला ४ घरु १ ॥
हरि बिनु रहि न सकै मनु मेरा ॥ मेरे प्रीतम प्रान हरि प्रभु गुरु मेले बहुरि न भवजलि फेरा ॥१॥ रहाउ ॥

मेरै हीअरै लोच लगी प्रभ केरी हरि नैनहु हरि प्रभ हेरा ॥ सतिगुरि दइआलि हरि नामु द्रिड़ाइआ हरि पाधरु हरि प्रभ केरा ॥१॥

हरि रंगी हरि नामु प्रभ पाइआ हरि गोविंद हरि प्रभ केरा ॥ हरि हिरदै मनि तनि मीठा लागा मुखि मसतकि भागु चंगेरा ॥२॥

लोभ विकार जिना मनु लागा हरि विसरिआ पुरखु चंगेरा ॥ ओइ मनमुख मूड़ अगिआनी कहीअहि तिन मसतकि भागु मंदेरा ॥३॥

बिबेक बुधि सतिगुर ते पाई गुर गिआनु गुरू प्रभ केरा ॥ जन नानक नामु गुरू ते पाइआ धुरि मसतकि भागु लिखेरा ॥४॥१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 711) टोडी महला ५ घरु १ दुपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
संतन अवर न काहू जानी ॥ बेपरवाह सदा रंगि हरि कै जा को पाखु सुआमी ॥ रहाउ ॥

ऊच समाना ठाकुर तेरो अवर न काहू तानी ॥ ऐसो अमरु मिलिओ भगतन कउ राचि रहे रंगि गिआनी ॥१॥

रोग सोग दुख जरा मरा हरि जनहि नही निकटानी ॥ निरभउ होइ रहे लिव एकै नानक हरि मनु मानी ॥२॥१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 711) टोडी महला ५ ॥
हरि बिसरत सदा खुआरी ॥ ता कउ धोखा कहा बिआपै जा कउ ओट तुहारी ॥ रहाउ ॥

बिनु सिमरन जो जीवनु बलना सरप जैसे अरजारी ॥ नव खंडन को राजु कमावै अंति चलैगो हारी ॥१॥

गुण निधान गुण तिन ही गाए जा कउ किरपा धारी ॥ सो सुखीआ धंनु उसु जनमा नानक तिसु बलिहारी ॥२॥२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 712) टोडी महला ५ घरु २ चउपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
धाइओ रे मन दह दिस धाइओ ॥ माइआ मगन सुआदि लोभि मोहिओ तिनि प्रभि आपि भुलाइओ ॥ रहाउ ॥

हरि कथा हरि जस साधसंगति सिउ इकु मुहतु न इहु मनु लाइओ ॥ बिगसिओ पेखि रंगु कसु्मभ को पर ग्रिह जोहनि जाइओ ॥१॥

चरन कमल सिउ भाउ न कीनो नह सत पुरखु मनाइओ ॥ धावत कउ धावहि बहु भाती जिउ तेली बलदु भ्रमाइओ ॥२॥

नाम दानु इसनानु न कीओ इक निमख न कीरति गाइओ ॥ नाना झूठि लाइ मनु तोखिओ नह बूझिओ अपनाइओ ॥३॥

परउपकार न कबहू कीए नही सतिगुरु सेवि धिआइओ ॥ पंच दूत रचि संगति गोसटि मतवारो मद माइओ ॥४॥

करउ बेनती साधसंगति हरि भगति वछल सुणि आइओ ॥ नानक भागि परिओ हरि पाछै राखु लाज अपुनाइओ ॥५॥१॥३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 712) टोडी महला ५ ॥
मानुखु बिनु बूझे बिरथा आइआ ॥ अनिक साज सीगार बहु करता जिउ मिरतकु ओढाइआ ॥ रहाउ ॥

धाइ धाइ क्रिपन स्रमु कीनो इकत्र करी है माइआ ॥ दानु पुंनु नही संतन सेवा कित ही काजि न आइआ ॥१॥

करि आभरण सवारी सेजा कामनि थाटु बनाइआ ॥ संगु न पाइओ अपुने भरते पेखि पेखि दुखु पाइआ ॥२॥

सारो दिनसु मजूरी करता तुहु मूसलहि छराइआ ॥ खेदु भइओ बेगारी निआई घर कै कामि न आइआ ॥३॥

भइओ अनुग्रहु जा कउ प्रभ को तिसु हिरदै नामु वसाइआ ॥ साधसंगति कै पाछै परिअउ जन नानक हरि रसु पाइआ ॥४॥२॥४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 712) टोडी महला ५ ॥
क्रिपा निधि बसहु रिदै हरि नीत ॥ तैसी बुधि करहु परगासा लागै प्रभ संगि प्रीति ॥ रहाउ ॥

दास तुमारे की पावउ धूरा मसतकि ले ले लावउ ॥ महा पतित ते होत पुनीता हरि कीरतन गुन गावउ ॥१॥

आगिआ तुमरी मीठी लागउ कीओ तुहारो भावउ ॥ जो तू देहि तही इहु त्रिपतै आन न कतहू धावउ ॥२॥

सद ही निकटि जानउ प्रभ सुआमी सगल रेण होइ रहीऐ ॥ साधू संगति होइ परापति ता प्रभु अपुना लहीऐ ॥३॥

सदा सदा हम छोहरे तुमरे तू प्रभ हमरो मीरा ॥ नानक बारिक तुम मात पिता मुखि नामु तुमारो खीरा ॥४॥३॥५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 713) टोडी महला ५ घरु २ दुपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मागउ दानु ठाकुर नाम ॥ अवरु कछू मेरै संगि न चालै मिलै क्रिपा गुण गाम ॥१॥ रहाउ ॥

राजु मालु अनेक भोग रस सगल तरवर की छाम ॥ धाइ धाइ बहु बिधि कउ धावै सगल निरारथ काम ॥१॥

बिनु गोविंद अवरु जे चाहउ दीसै सगल बात है खाम ॥ कहु नानक संत रेन मागउ मेरो मनु पावै बिस्राम ॥२॥१॥६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 713) टोडी महला ५ ॥
प्रभ जी को नामु मनहि साधारै ॥ जीअ प्रान सूख इसु मन कउ बरतनि एह हमारै ॥१॥ रहाउ ॥

नामु जाति नामु मेरी पति है नामु मेरै परवारै ॥ नामु सखाई सदा मेरै संगि हरि नामु मो कउ निसतारै ॥१॥

बिखै बिलास कहीअत बहुतेरे चलत न कछू संगारै ॥ इसटु मीतु नामु नानक को हरि नामु मेरै भंडारै ॥२॥२॥७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 713) टोडी मः ५ ॥
नीके गुण गाउ मिटही रोग ॥ मुख ऊजल मनु निरमल होई है तेरो रहै ईहा ऊहा लोगु ॥१॥ रहाउ ॥

चरन पखारि करउ गुर सेवा मनहि चरावउ भोग ॥ छोडि आपतु बादु अहंकारा मानु सोई जो होगु ॥१॥

संत टहल सोई है लागा जिसु मसतकि लिखिआ लिखोगु ॥ कहु नानक एक बिनु दूजा अवरु न करणै जोगु ॥२॥३॥८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 713) टोडी महला ५ ॥
सतिगुर आइओ सरणि तुहारी ॥ मिलै सूखु नामु हरि सोभा चिंता लाहि हमारी ॥१॥ रहाउ ॥

अवर न सूझै दूजी ठाहर हारि परिओ तउ दुआरी ॥ लेखा छोडि अलेखै छूटह हम निरगुन लेहु उबारी ॥१॥

सद बखसिंदु सदा मिहरवाना सभना देइ अधारी ॥ नानक दास संत पाछै परिओ राखि लेहु इह बारी ॥२॥४॥९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 713) टोडी महला ५ ॥
रसना गुण गोपाल निधि गाइण ॥ सांति सहजु रहसु मनि उपजिओ सगले दूख पलाइण ॥१॥ रहाउ ॥

जो मागहि सोई सोई पावहि सेवि हरि के चरण रसाइण ॥ जनम मरण दुहहू ते छूटहि भवजलु जगतु तराइण ॥१॥

खोजत खोजत ततु बीचारिओ दास गोविंद पराइण ॥ अबिनासी खेम चाहहि जे नानक सदा सिमरि नाराइण ॥२॥५॥१०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 714) टोडी महला ५ ॥
निंदकु गुर किरपा ते हाटिओ ॥ पारब्रहम प्रभ भए दइआला सिव कै बाणि सिरु काटिओ ॥१॥ रहाउ ॥

कालु जालु जमु जोहि न साकै सच का पंथा थाटिओ ॥ खात खरचत किछु निखुटत नाही राम रतनु धनु खाटिओ ॥१॥

भसमा भूत होआ खिन भीतरि अपना कीआ पाइआ ॥ आगम निगमु कहै जनु नानकु सभु देखै लोकु सबाइआ ॥२॥६॥११॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 714) टोडी मः ५ ॥
किरपन तन मन किलविख भरे ॥ साधसंगि भजनु करि सुआमी ढाकन कउ इकु हरे ॥१॥ रहाउ ॥

अनिक छिद्र बोहिथ के छुटकत थाम न जाही करे ॥ जिस का बोहिथु तिसु आराधे खोटे संगि खरे ॥१॥

गली सैल उठावत चाहै ओइ ऊहा ही है धरे ॥ जोरु सकति नानक किछु नाही प्रभ राखहु सरणि परे ॥२॥७॥१२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 714) टोडी महला ५ ॥
हरि के चरन कमल मनि धिआउ ॥ काढि कुठारु पित बात हंता अउखधु हरि को नाउ ॥१॥ रहाउ ॥

तीने ताप निवारणहारा दुख हंता सुख रासि ॥ ता कउ बिघनु न कोऊ लागै जा की प्रभ आगै अरदासि ॥१॥

संत प्रसादि बैद नाराइण करण कारण प्रभ एक ॥ बाल बुधि पूरन सुखदाता नानक हरि हरि टेक ॥२॥८॥१३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 714) टोडी महला ५ ॥
हरि हरि नामु सदा सद जापि ॥ धारि अनुग्रहु पारब्रहम सुआमी वसदी कीनी आपि ॥१॥ रहाउ ॥

जिस के से फिरि तिन ही सम्हाले बिनसे सोग संताप ॥ हाथ देइ राखे जन अपने हरि होए माई बाप ॥१॥

जीअ जंत होए मिहरवाना दया धारी हरि नाथ ॥ नानक सरनि परे दुख भंजन जा का बड परताप ॥२॥९॥१४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 714) टोडी महला ५ ॥
स्वामी सरनि परिओ दरबारे ॥ कोटि अपराध खंडन के दाते तुझ बिनु कउनु उधारे ॥१॥ रहाउ ॥

खोजत खोजत बहु परकारे सरब अरथ बीचारे ॥ साधसंगि परम गति पाईऐ माइआ रचि बंधि हारे ॥१॥

चरन कमल संगि प्रीति मनि लागी सुरि जन मिले पिआरे ॥ नानक अनद करे हरि जपि जपि सगले रोग निवारे ॥२॥१०॥१५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 715) टोडी महला ५ घरु ३ चउपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हां हां लपटिओ रे मूड़्हे कछू न थोरी ॥ तेरो नही सु जानी मोरी ॥ रहाउ ॥

आपन रामु न चीनो खिनूआ ॥ जो पराई सु अपनी मनूआ ॥१॥

नामु संगी सो मनि न बसाइओ ॥ छोडि जाहि वाहू चितु लाइओ ॥२॥

सो संचिओ जितु भूख तिसाइओ ॥ अम्रित नामु तोसा नही पाइओ ॥३॥

काम क्रोधि मोह कूपि परिआ ॥ गुर प्रसादि नानक को तरिआ ॥४॥१॥१६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 715) टोडी महला ५ ॥
हमारै एकै हरी हरी ॥ आन अवर सिञाणि न करी ॥ रहाउ ॥

वडै भागि गुरु अपुना पाइओ ॥ गुरि मो कउ हरि नामु द्रिड़ाइओ ॥१॥

हरि हरि जाप ताप ब्रत नेमा ॥ हरि हरि धिआइ कुसल सभि खेमा ॥२॥

आचार बिउहार जाति हरि गुनीआ ॥ महा अनंद कीरतन हरि सुनीआ ॥३॥

कहु नानक जिनि ठाकुरु पाइआ ॥ सभु किछु तिस के ग्रिह महि आइआ ॥४॥२॥१७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 715) टोडी महला ५ घरु ४ दुपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रूड़ो मनु हरि रंगो लोड़ै ॥ गाली हरि नीहु न होइ ॥ रहाउ ॥

हउ ढूढेदी दरसन कारणि बीथी बीथी पेखा ॥ गुर मिलि भरमु गवाइआ हे ॥१॥

इह बुधि पाई मै साधू कंनहु लेखु लिखिओ धुरि माथै ॥ इह बिधि नानक हरि नैण अलोइ ॥२॥१॥१८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 715) टोडी महला ५ ॥
गरबि गहिलड़ो मूड़ड़ो हीओ रे ॥ हीओ महराज री माइओ ॥ डीहर निआई मोहि फाकिओ रे ॥ रहाउ ॥

घणो घणो घणो सद लोड़ै बिनु लहणे कैठै पाइओ रे ॥ महराज रो गाथु वाहू सिउ लुभड़िओ निहभागड़ो भाहि संजोइओ रे ॥१॥

सुणि मन सीख साधू जन सगलो थारे सगले प्राछत मिटिओ रे ॥ जा को लहणो महराज री गाठड़ीओ जन नानक गरभासि न पउड़िओ रे ॥२॥२॥१९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 716) टोडी महला ५ घरु ५ दुपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ऐसो गुनु मेरो प्रभ जी कीन ॥ पंच दोख अरु अहं रोग इह तन ते सगल दूरि कीन ॥ रहाउ ॥

बंधन तोरि छोरि बिखिआ ते गुर को सबदु मेरै हीअरै दीन ॥ रूपु अनरूपु मोरो कछु न बीचारिओ प्रेम गहिओ मोहि हरि रंग भीन ॥१॥

पेखिओ लालनु पाट बीच खोए अनद चिता हरखे पतीन ॥ तिस ही को ग्रिहु सोई प्रभु नानक सो ठाकुरु तिस ही को धीन ॥२॥१॥२०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 716) टोडी महला ५ ॥
माई मेरे मन की प्रीति ॥ एही करम धरम जप एही राम नाम निरमल है रीति ॥ रहाउ ॥

प्रान अधार जीवन धन मोरै देखन कउ दरसन प्रभ नीति ॥ बाट घाट तोसा संगि मोरै मन अपुने कउ मै हरि सखा कीत ॥१॥

संत प्रसादि भए मन निरमल करि किरपा अपुने करि लीत ॥ सिमरि सिमरि नानक सुखु पाइआ आदि जुगादि भगतन के मीत ॥२॥२॥२१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 716) टोडी महला ५ ॥
प्रभ जी मिलु मेरे प्रान ॥ बिसरु नही निमख हीअरे ते अपने भगत कउ पूरन दान ॥ रहाउ ॥

खोवहु भरमु राखु मेरे प्रीतम अंतरजामी सुघड़ सुजान ॥ कोटि राज नाम धनु मेरै अम्रित द्रिसटि धारहु प्रभ मान ॥१॥

आठ पहर रसना गुन गावै जसु पूरि अघावहि समरथ कान ॥ तेरी सरणि जीअन के दाते सदा सदा नानक कुरबान ॥२॥३॥२२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 716) टोडी महला ५ ॥
प्रभ तेरे पग की धूरि ॥ दीन दइआल प्रीतम मनमोहन करि किरपा मेरी लोचा पूरि ॥ रहाउ ॥

दह दिस रवि रहिआ जसु तुमरा अंतरजामी सदा हजूरि ॥ जो तुमरा जसु गावहि करते से जन कबहु न मरते झूरि ॥१॥

धंध बंध बिनसे माइआ के साधू संगति मिटे बिसूर ॥ सुख स्मपति भोग इसु जीअ के बिनु हरि नानक जाने कूर ॥२॥४॥२३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 716) टोडी मः ५ ॥
माई मेरे मन की पिआस ॥ इकु खिनु रहि न सकउ बिनु प्रीतम दरसन देखन कउ धारी मनि आस ॥ रहाउ ॥

सिमरउ नामु निरंजन करते मन तन ते सभि किलविख नास ॥ पूरन पारब्रहम सुखदाते अबिनासी बिमल जा को जास ॥१॥

संत प्रसादि मेरे पूर मनोरथ करि किरपा भेटे गुणतास ॥ सांति सहज सूख मनि उपजिओ कोटि सूर नानक परगास ॥२॥५॥२४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 717) टोडी महला ५ ॥
हरि हरि पतित पावन ॥ जीअ प्रान मान सुखदाता अंतरजामी मन को भावन ॥ रहाउ ॥

सुंदरु सुघड़ु चतुरु सभ बेता रिद दास निवास भगत गुन गावन ॥ निरमल रूप अनूप सुआमी करम भूमि बीजन सो खावन ॥१॥

बिसमन बिसम भए बिसमादा आन न बीओ दूसर लावन ॥ रसना सिमरि सिमरि जसु जीवा नानक दास सदा बलि जावन ॥२॥६॥२५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 717) टोडी महला ५ ॥
माई माइआ छलु ॥ त्रिण की अगनि मेघ की छाइआ गोबिद भजन बिनु हड़ का जलु ॥ रहाउ ॥

छोडि सिआनप बहु चतुराई दुइ कर जोड़ि साध मगि चलु ॥ सिमरि सुआमी अंतरजामी मानुख देह का इहु ऊतम फलु ॥१॥

बेद बखिआन करत साधू जन भागहीन समझत नही खलु ॥ प्रेम भगति राचे जन नानक हरि सिमरनि दहन भए मल ॥२॥७॥२६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 717) टोडी महला ५ ॥
माई चरन गुर मीठे ॥ वडै भागि देवै परमेसरु कोटि फला दरसन गुर डीठे ॥ रहाउ ॥

गुन गावत अचुत अबिनासी काम क्रोध बिनसे मद ढीठे ॥ असथिर भए साच रंगि राते जनम मरन बाहुरि नही पीठे ॥१॥

बिनु हरि भजन रंग रस जेते संत दइआल जाने सभि झूठे ॥ नाम रतनु पाइओ जन नानक नाम बिहून चले सभि मूठे ॥२॥८॥२७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 717) टोडी महला ५ ॥
साधसंगि हरि हरि नामु चितारा ॥ सहजि अनंदु होवै दिनु राती अंकुरु भलो हमारा ॥ रहाउ ॥

गुरु पूरा भेटिओ बडभागी जा को अंतु न पारावारा ॥ करु गहि काढि लीओ जनु अपुना बिखु सागर संसारा ॥१॥

जनम मरन काटे गुर बचनी बहुड़ि न संकट दुआरा ॥ नानक सरनि गही सुआमी की पुनह पुनह नमसकारा ॥२॥९॥२८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 717) टोडी महला ५ ॥
माई मेरे मन को सुखु ॥ कोटि अनंद राज सुखु भुगवै हरि सिमरत बिनसै सभ दुखु ॥१॥ रहाउ ॥

कोटि जनम के किलबिख नासहि सिमरत पावन तन मन सुख ॥ देखि सरूपु पूरनु भई आसा दरसनु भेटत उतरी भुख ॥१॥

चारि पदारथ असट महा सिधि कामधेनु पारजात हरि हरि रुखु ॥ नानक सरनि गही सुख सागर जनम मरन फिरि गरभ न धुखु ॥२॥१०॥२९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 718) टोडी महला ५ ॥
हरि हरि चरन रिदै उर धारे ॥ सिमरि सुआमी सतिगुरु अपुना कारज सफल हमारे ॥१॥ रहाउ ॥

पुंन दान पूजा परमेसुर हरि कीरति ततु बीचारे ॥ गुन गावत अतुल सुखु पाइआ ठाकुर अगम अपारे ॥१॥

जो जन पारब्रहमि अपने कीने तिन का बाहुरि कछु न बीचारे ॥ नाम रतनु सुनि जपि जपि जीवा हरि नानक कंठ मझारे ॥२॥११॥३०॥

(गुरू तेग बहादुर जी -- SGGS 718) टोडी महला ९
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
कहउ कहा अपनी अधमाई ॥ उरझिओ कनक कामनी के रस नह कीरति प्रभ गाई ॥१॥ रहाउ ॥

जग झूठे कउ साचु जानि कै ता सिउ रुच उपजाई ॥ दीन बंध सिमरिओ नही कबहू होत जु संगि सहाई ॥१॥

मगन रहिओ माइआ मै निस दिनि छुटी न मन की काई ॥ कहि नानक अब नाहि अनत गति बिनु हरि की सरनाई ॥२॥१॥३१॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 718) टोडी बाणी भगतां की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
कोई बोलै निरवा कोई बोलै दूरि ॥ जल की माछुली चरै खजूरि ॥१॥

कांइ रे बकबादु लाइओ ॥ जिनि हरि पाइओ तिनहि छपाइओ ॥१॥ रहाउ ॥

पंडितु होइ कै बेदु बखानै ॥ मूरखु नामदेउ रामहि जानै ॥२॥१॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 718) कउन को कलंकु रहिओ राम नामु लेत ही ॥ पतित पवित भए रामु कहत ही ॥१॥ रहाउ ॥

राम संगि नामदेव जन कउ प्रतगिआ आई ॥ एकादसी ब्रतु रहै काहे कउ तीरथ जाईं ॥१॥

भनति नामदेउ सुक्रित सुमति भए ॥ गुरमति रामु कहि को को न बैकुंठि गए ॥२॥२॥

(भक्त नामदेव जी -- SGGS 718) तीनि छंदे खेलु आछै ॥१॥ रहाउ ॥

कु्मभार के घर हांडी आछै राजा के घर सांडी गो ॥ बामन के घर रांडी आछै रांडी सांडी हांडी गो ॥१॥

बाणीए के घर हींगु आछै भैसर माथै सींगु गो ॥ देवल मधे लीगु आछै लीगु सीगु हीगु गो ॥२॥

तेली कै घर तेलु आछै जंगल मधे बेल गो ॥ माली के घर केल आछै केल बेल तेल गो ॥३॥

संतां मधे गोबिंदु आछै गोकल मधे सिआम गो ॥ नामे मधे रामु आछै राम सिआम गोबिंद गो ॥४॥३॥


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