राग सूही काफी - बाणी शब्द, Raag Suhi Kafi - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


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(गुरू नानक देव जी -- SGGS 751) सूही महला १ काफी घरु १०
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
माणस जनमु दुल्मभु गुरमुखि पाइआ ॥ मनु तनु होइ चुल्मभु जे सतिगुर भाइआ ॥१॥

चलै जनमु सवारि वखरु सचु लै ॥ पति पाए दरबारि सतिगुर सबदि भै ॥१॥ रहाउ ॥

मनि तनि सचु सलाहि साचे मनि भाइआ ॥ लालि रता मनु मानिआ गुरु पूरा पाइआ ॥२॥

हउ जीवा गुण सारि अंतरि तू वसै ॥ तूं वसहि मन माहि सहजे रसि रसै ॥३॥

मूरख मन समझाइ आखउ केतड़ा ॥ गुरमुखि हरि गुण गाइ रंगि रंगेतड़ा ॥४॥

नित नित रिदै समालि प्रीतमु आपणा ॥ जे चलहि गुण नालि नाही दुखु संतापणा ॥५॥

मनमुख भरमि भुलाणा ना तिसु रंगु है ॥ मरसी होइ विडाणा मनि तनि भंगु है ॥६॥

गुर की कार कमाइ लाहा घरि आणिआ ॥ गुरबाणी निरबाणु सबदि पछाणिआ ॥७॥

इक नानक की अरदासि जे तुधु भावसी ॥ मै दीजै नाम निवासु हरि गुण गावसी ॥८॥१॥३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 761) रागु सूही महला ५ असटपदीआ घरु १० काफी
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जे भुली जे चुकी साईं भी तहिंजी काढीआ ॥ जिन्हा नेहु दूजाणे लगा झूरि मरहु से वाढीआ ॥१॥

हउ ना छोडउ कंत पासरा ॥ सदा रंगीला लालु पिआरा एहु महिंजा आसरा ॥१॥ रहाउ ॥

सजणु तूहै सैणु तू मै तुझ उपरि बहु माणीआ ॥ जा तू अंदरि ता सुखे तूं निमाणी माणीआ ॥२॥

जे तू तुठा क्रिपा निधान ना दूजा वेखालि ॥ एहा पाई मू दातड़ी नित हिरदै रखा समालि ॥३॥

पाव जुलाई पंध तउ नैणी दरसु दिखालि ॥ स्रवणी सुणी कहाणीआ जे गुरु थीवै किरपालि ॥४॥

किती लख करोड़ि पिरीए रोम न पुजनि तेरिआ ॥ तू साही हू साहु हउ कहि न सका गुण तेरिआ ॥५॥

सहीआ तऊ असंख मंञहु हभि वधाणीआ ॥ हिक भोरी नदरि निहालि देहि दरसु रंगु माणीआ ॥६॥

जै डिठे मनु धीरीऐ किलविख वंञन्हि दूरे ॥ सो किउ विसरै माउ मै जो रहिआ भरपूरे ॥७॥

होइ निमाणी ढहि पई मिलिआ सहजि सुभाइ ॥ पूरबि लिखिआ पाइआ नानक संत सहाइ ॥८॥१॥४॥


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