Pt 6 - राग सूही - बाणी शब्द, Part 6 - Raag Suhi - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


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(भक्त कबीर जी -- SGGS 792) सूही कबीर जी ॥
थरहर क्मपै बाला जीउ ॥ ना जानउ किआ करसी पीउ ॥१॥

रैनि गई मत दिनु भी जाइ ॥ भवर गए बग बैठे आइ ॥१॥ रहाउ ॥

काचै करवै रहै न पानी ॥ हंसु चलिआ काइआ कुमलानी ॥२॥

कुआर कंनिआ जैसे करत सीगारा ॥ किउ रलीआ मानै बाझु भतारा ॥३॥

काग उडावत भुजा पिरानी ॥ कहि कबीर इह कथा सिरानी ॥४॥२॥

(भक्त कबीर जी -- SGGS 792) सूही कबीर जीउ ॥
अमलु सिरानो लेखा देना ॥ आए कठिन दूत जम लेना ॥ किआ तै खटिआ कहा गवाइआ ॥ चलहु सिताब दीबानि बुलाइआ ॥१॥

चलु दरहालु दीवानि बुलाइआ ॥ हरि फुरमानु दरगह का आइआ ॥१॥ रहाउ ॥

करउ अरदासि गाव किछु बाकी ॥ लेउ निबेरि आजु की राती ॥ किछु भी खरचु तुम्हारा सारउ ॥ सुबह निवाज सराइ गुजारउ ॥२॥

साधसंगि जा कउ हरि रंगु लागा ॥ धनु धनु सो जनु पुरखु सभागा ॥ ईत ऊत जन सदा सुहेले ॥ जनमु पदारथु जीति अमोले ॥३॥

जागतु सोइआ जनमु गवाइआ ॥ मालु धनु जोरिआ भइआ पराइआ ॥ कहु कबीर तेई नर भूले ॥ खसमु बिसारि माटी संगि रूले ॥४॥३॥

(भक्त रविदास जी -- SGGS 793) रागु सूही बाणी स्री रविदास जीउ की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सह की सार सुहागनि जानै ॥ तजि अभिमानु सुख रलीआ मानै ॥ तनु मनु देइ न अंतरु राखै ॥ अवरा देखि न सुनै अभाखै ॥१॥

सो कत जानै पीर पराई ॥ जा कै अंतरि दरदु न पाई ॥१॥ रहाउ ॥

दुखी दुहागनि दुइ पख हीनी ॥ जिनि नाह निरंतरि भगति न कीनी ॥ पुर सलात का पंथु दुहेला ॥ संगि न साथी गवनु इकेला ॥२॥

दुखीआ दरदवंदु दरि आइआ ॥ बहुतु पिआस जबाबु न पाइआ ॥ कहि रविदास सरनि प्रभ तेरी ॥ जिउ जानहु तिउ करु गति मेरी ॥३॥१॥

(भक्त रविदास जी -- SGGS 793) सूही ॥
जो दिन आवहि सो दिन जाही ॥ करना कूचु रहनु थिरु नाही ॥ संगु चलत है हम भी चलना ॥ दूरि गवनु सिर ऊपरि मरना ॥१॥

किआ तू सोइआ जागु इआना ॥ तै जीवनु जगि सचु करि जाना ॥१॥ रहाउ ॥

जिनि जीउ दीआ सु रिजकु अ्मबरावै ॥ सभ घट भीतरि हाटु चलावै ॥ करि बंदिगी छाडि मै मेरा ॥ हिरदै नामु सम्हारि सवेरा ॥२॥

जनमु सिरानो पंथु न सवारा ॥ सांझ परी दह दिस अंधिआरा ॥ कहि रविदास निदानि दिवाने ॥ चेतसि नाही दुनीआ फन खाने ॥३॥२॥

(भक्त रविदास जी -- SGGS 794) सूही ॥
ऊचे मंदर साल रसोई ॥ एक घरी फुनि रहनु न होई ॥१॥

इहु तनु ऐसा जैसे घास की टाटी ॥ जलि गइओ घासु रलि गइओ माटी ॥१॥ रहाउ ॥

भाई बंध कुट्मब सहेरा ॥ ओइ भी लागे काढु सवेरा ॥२॥

घर की नारि उरहि तन लागी ॥ उह तउ भूतु भूतु करि भागी ॥३॥

कहि रविदास सभै जगु लूटिआ ॥ हम तउ एक रामु कहि छूटिआ ॥४॥३॥

(बाबा सेख फरीद जी -- SGGS 794) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु सूही बाणी सेख फरीद जी की ॥ तपि तपि लुहि लुहि हाथ मरोरउ ॥ बावलि होई सो सहु लोरउ ॥ तै सहि मन महि कीआ रोसु ॥ मुझु अवगन सह नाही दोसु ॥१॥

तै साहिब की मै सार न जानी ॥ जोबनु खोइ पाछै पछुतानी ॥१॥ रहाउ ॥

काली कोइल तू कित गुन काली ॥ अपने प्रीतम के हउ बिरहै जाली ॥ पिरहि बिहून कतहि सुखु पाए ॥ जा होइ क्रिपालु ता प्रभू मिलाए ॥२॥

विधण खूही मुंध इकेली ॥ ना को साथी ना को बेली ॥ करि किरपा प्रभि साधसंगि मेली ॥ जा फिरि देखा ता मेरा अलहु बेली ॥३॥

वाट हमारी खरी उडीणी ॥ खंनिअहु तिखी बहुतु पिईणी ॥ उसु ऊपरि है मारगु मेरा ॥ सेख फरीदा पंथु सम्हारि सवेरा ॥४॥१॥


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