राग नट नाराइन - बाणी शब्द, Raag Natnarain - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


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(गुरू रामदास जी -- SGGS 975) रागु नट नाराइन महला ४
ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
मेरे मन जपि अहिनिसि नामु हरे ॥ कोटि कोटि दोख बहु कीने सभ परहरि पासि धरे ॥१॥ रहाउ ॥

हरि हरि नामु जपहि आराधहि सेवक भाइ खरे ॥ किलबिख दोख गए सभ नीकरि जिउ पानी मैलु हरे ॥१॥

खिनु खिनु नरु नाराइनु गावहि मुखि बोलहि नर नरहरे ॥ पंच दोख असाध नगर महि इकु खिनु पलु दूरि करे ॥२॥

वडभागी हरि नामु धिआवहि हरि के भगत हरे ॥ तिन की संगति देहि प्रभ जाचउ मै मूड़ मुगध निसतरे ॥३॥

क्रिपा क्रिपा धारि जगजीवन रखि लेवहु सरनि परे ॥ नानकु जनु तुमरी सरनाई हरि राखहु लाज हरे ॥४॥१॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 975) नट महला ४ ॥
राम जपि जन रामै नामि रले ॥ राम नामु जपिओ गुर बचनी हरि धारी हरि क्रिपले ॥१॥ रहाउ ॥

हरि हरि अगम अगोचरु सुआमी जन जपि मिलि सलल सलले ॥ हरि के संत मिलि राम रसु पाइआ हम जन कै बलि बलले ॥१॥

पुरखोतमु हरि नामु जनि गाइओ सभि दालद दुख दलले ॥ विचि देही दोख असाध पंच धातू हरि कीए खिन परले ॥२॥

हरि के संत मनि प्रीति लगाई जिउ देखै ससि कमले ॥ उनवै घनु घन घनिहरु गरजै मनि बिगसै मोर मुरले ॥३॥

हमरै सुआमी लोच हम लाई हम जीवह देखि हरि मिले ॥ जन नानक हरि अमल हरि लाए हरि मेलहु अनद भले ॥४॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 975) नट महला ४ ॥
मेरे मन जपि हरि हरि नामु सखे ॥ गुर परसादी हरि नामु धिआइओ हम सतिगुर चरन पखे ॥१॥ रहाउ ॥

ऊतम जगंनाथ जगदीसुर हम पापी सरनि रखे ॥ तुम वड पुरख दीन दुख भंजन हरि दीओ नामु मुखे ॥१॥

हरि गुन ऊच नीच हम गाए गुर सतिगुर संगि सखे ॥ जिउ चंदन संगि बसै निमु बिरखा गुन चंदन के बसखे ॥२॥

हमरे अवगन बिखिआ बिखै के बहु बार बार निमखे ॥ अवगनिआरे पाथर भारे हरि तारे संगि जनखे ॥३॥

जिन कउ तुम हरि राखहु सुआमी सभ तिन के पाप क्रिखे ॥ जन नानक के दइआल प्रभ सुआमी तुम दुसट तारे हरणखे ॥४॥३॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 976) नट महला ४ ॥
मेरे मन जपि हरि हरि राम रंगे ॥ हरि हरि क्रिपा करी जगदीसुरि हरि धिआइओ जन पगि लगे ॥१॥ रहाउ ॥

जनम जनम के भूल चूक हम अब आए प्रभ सरनगे ॥ तुम सरणागति प्रतिपालक सुआमी हम राखहु वड पापगे ॥१॥

तुमरी संगति हरि को को न उधरिओ प्रभ कीए पतित पवगे ॥ गुन गावत छीपा दुसटारिओ प्रभि राखी पैज जनगे ॥२॥

जो तुमरे गुन गावहि सुआमी हउ बलि बलि बलि तिनगे ॥ भवन भवन पवित्र सभि कीए जह धूरि परी जन पगे ॥३॥

तुमरे गुन प्रभ कहि न सकहि हम तुम वड वड पुरख वडगे ॥ जन नानक कउ दइआ प्रभ धारहु हम सेवह तुम जन पगे ॥४॥४॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 976) नट महला ४ ॥
मेरे मन जपि हरि हरि नामु मने ॥ जगंनाथि किरपा प्रभि धारी मति गुरमति नाम बने ॥१॥ रहाउ ॥

हरि जन हरि जसु हरि हरि गाइओ उपदेसि गुरू गुर सुने ॥ किलबिख पाप नाम हरि काटे जिव खेत क्रिसानि लुने ॥१॥

तुमरी उपमा तुम ही प्रभ जानहु हम कहि न सकहि हरि गुने ॥ जैसे तुम तैसे प्रभ तुम ही गुन जानहु प्रभ अपुने ॥२॥

माइआ फास बंध बहु बंधे हरि जपिओ खुल खुलने ॥ जिउ जल कुंचरु तदूऐ बांधिओ हरि चेतिओ मोख मुखने ॥३॥

सुआमी पारब्रहम परमेसरु तुम खोजहु जुग जुगने ॥ तुमरी थाह पाई नही पावै जन नानक के प्रभ वडने ॥४॥५॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 976) नट महला ४ ॥
मेरे मन कलि कीरति हरि प्रवणे ॥ हरि हरि दइआलि दइआ प्रभ धारी लगि सतिगुर हरि जपणे ॥१॥ रहाउ ॥

हरि तुम वड अगम अगोचर सुआमी सभि धिआवहि हरि रुड़णे ॥ जिन कउ तुम्हरे वड कटाख है ते गुरमुखि हरि सिमरणे ॥१॥

इहु परपंचु कीआ प्रभ सुआमी सभु जगजीवनु जुगणे ॥ जिउ सललै सलल उठहि बहु लहरी मिलि सललै सलल समणे ॥२॥

जो प्रभ कीआ सु तुम ही जानहु हम नह जाणी हरि गहणे ॥ हम बारिक कउ रिद उसतति धारहु हम करह प्रभू सिमरणे ॥३॥

तुम जल निधि हरि मान सरोवर जो सेवै सभ फलणे ॥ जनु नानकु हरि हरि हरि हरि बांछै हरि देवहु करि क्रिपणे ॥४॥६॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 977) नट नाराइन महला ४ पड़ताल
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मेरे मन सेव सफल हरि घाल ॥ ले गुर पग रेन रवाल ॥ सभि दालिद भंजि दुख दाल ॥ हरि हो हो हो नदरि निहाल ॥१॥ रहाउ ॥

हरि का ग्रिहु हरि आपि सवारिओ हरि रंग रंग महल बेअंत लाल लाल हरि लाल ॥ हरि आपनी क्रिपा करी आपि ग्रिहि आइओ हम हरि की गुर कीई है बसीठी हम हरि देखे भई निहाल निहाल निहाल निहाल ॥१॥

हरि आवते की खबरि गुरि पाई मनि तनि आनदो आनंद भए हरि आवते सुने मेरे लाल हरि लाल ॥ जनु नानकु हरि हरि मिले भए गलतान हाल निहाल निहाल ॥२॥१॥७॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 977) नट महला ४ ॥
मन मिलु संतसंगति सुभवंती ॥ सुनि अकथ कथा सुखवंती ॥ सभ किलबिख पाप लहंती ॥ हरि हो हो हो लिखतु लिखंती ॥१॥ रहाउ ॥

हरि कीरति कलजुग विचि ऊतम मति गुरमति कथा भजंती ॥ जिनि जनि सुणी मनी है जिनि जनि तिसु जन कै हउ कुरबानंती ॥१॥

हरि अकथ कथा का जिनि रसु चाखिआ तिसु जन सभ भूख लहंती ॥ नानक जन हरि कथा सुणि त्रिपते जपि हरि हरि हरि होवंती ॥२॥२॥८॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 977) नट महला ४ ॥
कोई आनि सुनावै हरि की हरि गाल ॥ तिस कउ हउ बलि बलि बाल ॥ सो हरि जनु है भल भाल ॥ हरि हो हो हो मेलि निहाल ॥१॥ रहाउ ॥

हरि का मारगु गुर संति बताइओ गुरि चाल दिखाई हरि चाल ॥ अंतरि कपटु चुकावहु मेरे गुरसिखहु निहकपट कमावहु हरि की हरि घाल निहाल निहाल निहाल ॥१॥

ते गुर के सिख मेरे हरि प्रभि भाए जिना हरि प्रभु जानिओ मेरा नालि ॥ जन नानक कउ मति हरि प्रभि दीनी हरि देखि निकटि हदूरि निहाल निहाल निहाल निहाल ॥२॥३॥९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 978) रागु नट नाराइन महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
राम हउ किआ जाना किआ भावै ॥ मनि पिआस बहुतु दरसावै ॥१॥ रहाउ ॥

सोई गिआनी सोई जनु तेरा जिसु ऊपरि रुच आवै ॥ क्रिपा करहु जिसु पुरख बिधाते सो सदा सदा तुधु धिआवै ॥१॥

कवन जोग कवन गिआन धिआना कवन गुनी रीझावै ॥ सोई जनु सोई निज भगता जिसु ऊपरि रंगु लावै ॥२॥

साई मति साई बुधि सिआनप जितु निमख न प्रभु बिसरावै ॥ संतसंगि लगि एहु सुखु पाइओ हरि गुन सद ही गावै ॥३॥

देखिओ अचरजु महा मंगल रूप किछु आन नही दिसटावै ॥ कहु नानक मोरचा गुरि लाहिओ तह गरभ जोनि कह आवै ॥४॥१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 978) नट नाराइन महला ५ दुपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
उलाहनो मै काहू न दीओ ॥ मन मीठ तुहारो कीओ ॥१॥ रहाउ ॥

आगिआ मानि जानि सुखु पाइआ सुनि सुनि नामु तुहारो जीओ ॥ ईहां ऊहा हरि तुम ही तुम ही इहु गुर ते मंत्रु द्रिड़ीओ ॥१॥

जब ते जानि पाई एह बाता तब कुसल खेम सभ थीओ ॥ साधसंगि नानक परगासिओ आन नाही रे बीओ ॥२॥१॥२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 978) नट महला ५ ॥
जा कउ भई तुमारी धीर ॥ जम की त्रास मिटी सुखु पाइआ निकसी हउमै पीर ॥१॥ रहाउ ॥

तपति बुझानी अम्रित बानी त्रिपते जिउ बारिक खीर ॥ मात पिता साजन संत मेरे संत सहाई बीर ॥१॥

खुले भ्रम भीति मिले गोपाला हीरै बेधे हीर ॥ बिसम भए नानक जसु गावत ठाकुर गुनी गहीर ॥२॥२॥३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 979) नट महला ५ ॥
अपना जनु आपहि आपि उधारिओ ॥ आठ पहर जन कै संगि बसिओ मन ते नाहि बिसारिओ ॥१॥ रहाउ ॥

बरनु चिहनु नाही किछु पेखिओ दास का कुलु न बिचारिओ ॥ करि किरपा नामु हरि दीओ सहजि सुभाइ सवारिओ ॥१॥

महा बिखमु अगनि का सागरु तिस ते पारि उतारिओ ॥ पेखि पेखि नानक बिगसानो पुनह पुनह बलिहारिओ ॥२॥३॥४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 979) नट महला ५ ॥
हरि हरि मन महि नामु कहिओ ॥ कोटि अप्राध मिटहि खिन भीतरि ता का दुखु न रहिओ ॥१॥ रहाउ ॥

खोजत खोजत भइओ बैरागी साधू संगि लहिओ ॥ सगल तिआगि एक लिव लागी हरि हरि चरन गहिओ ॥१॥

कहत मुकत सुनते निसतारे जो जो सरनि पइओ ॥ सिमरि सिमरि सुआमी प्रभु अपुना कहु नानक अनदु भइओ ॥२॥४॥५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 979) नट महला ५ ॥
चरन कमल संगि लागी डोरी ॥ सुख सागर करि परम गति मोरी ॥१॥ रहाउ ॥

अंचला गहाइओ जन अपुने कउ मनु बीधो प्रेम की खोरी ॥ जसु गावत भगति रसु उपजिओ माइआ की जाली तोरी ॥१॥

पूरन पूरि रहे किरपा निधि आन न पेखउ होरी ॥ नानक मेलि लीओ दासु अपुना प्रीति न कबहू थोरी ॥२॥५॥६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 979) नट महला ५ ॥
मेरे मन जपु जपि हरि नाराइण ॥ कबहू न बिसरहु मन मेरे ते आठ पहर गुन गाइण ॥१॥ रहाउ ॥

साधू धूरि करउ नित मजनु सभ किलबिख पाप गवाइण ॥ पूरन पूरि रहे किरपा निधि घटि घटि दिसटि समाइणु ॥१॥

जाप ताप कोटि लख पूजा हरि सिमरण तुलि न लाइण ॥ दुइ कर जोड़ि नानकु दानु मांगै तेरे दासनि दास दसाइणु ॥२॥६॥७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 979) नट महला ५ ॥
मेरै सरबसु नामु निधानु ॥ करि किरपा साधू संगि मिलिओ सतिगुरि दीनो दानु ॥१॥ रहाउ ॥

सुखदाता दुख भंजनहारा गाउ कीरतनु पूरन गिआनु ॥ कामु क्रोधु लोभु खंड खंड कीन्हे बिनसिओ मूड़ अभिमानु ॥१॥

किआ गुण तेरे आखि वखाणा प्रभ अंतरजामी जानु ॥ चरन कमल सरनि सुख सागर नानकु सद कुरबानु ॥२॥७॥८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 980) नट महला ५ ॥
हउ वारि वारि जाउ गुर गोपाल ॥१॥ रहाउ ॥

मोहि निरगुन तुम पूरन दाते दीना नाथ दइआल ॥१॥

ऊठत बैठत सोवत जागत जीअ प्रान धन माल ॥२॥

दरसन पिआस बहुतु मनि मेरै नानक दरस निहाल ॥३॥८॥९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 980) नट पड़ताल महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
कोऊ है मेरो साजनु मीतु ॥ हरि नामु सुनावै नीत ॥ बिनसै दुखु बिपरीति ॥ सभु अरपउ मनु तनु चीतु ॥१॥ रहाउ ॥

कोई विरला आपन कीत ॥ संगि चरन कमल मनु सीत ॥ करि किरपा हरि जसु दीत ॥१॥

हरि भजि जनमु पदारथु जीत ॥ कोटि पतित होहि पुनीत ॥ नानक दास बलि बलि कीत ॥२॥१॥१०॥१९॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 980) नट असटपदीआ महला ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
राम मेरे मनि तनि नामु अधारे ॥ खिनु पलु रहि न सकउ बिनु सेवा मै गुरमति नामु सम्हारे ॥१॥ रहाउ ॥

हरि हरि हरि हरि हरि मनि धिआवहु मै हरि हरि नामु पिआरे ॥ दीन दइआल भए प्रभ ठाकुर गुर कै सबदि सवारे ॥१॥

मधसूदन जगजीवन माधो मेरे ठाकुर अगम अपारे ॥ इक बिनउ बेनती करउ गुर आगै मै साधू चरन पखारे ॥२॥

सहस नेत्र नेत्र है प्रभ कउ प्रभ एको पुरखु निरारे ॥ सहस मूरति एको प्रभु ठाकुरु प्रभु एको गुरमति तारे ॥३॥

गुरमति नामु दमोदरु पाइआ हरि हरि नामु उरि धारे ॥ हरि हरि कथा बनी अति मीठी जिउ गूंगा गटक सम्हारे ॥४॥

रसना साद चखै भाइ दूजै अति फीके लोभ बिकारे ॥ जो गुरमुखि साद चखहि राम नामा सभ अन रस साद बिसारे ॥५॥

गुरमति राम नामु धनु पाइआ सुणि कहतिआ पाप निवारे ॥ धरम राइ जमु नेड़ि न आवै मेरे ठाकुर के जन पिआरे ॥६॥

सास सास सास है जेते मै गुरमति नामु सम्हारे ॥ सासु सासु जाइ नामै बिनु सो बिरथा सासु बिकारे ॥७॥

क्रिपा क्रिपा करि दीन प्रभ सरनी मो कउ हरि जन मेलि पिआरे ॥ नानक दासनि दासु कहतु है हम दासन के पनिहारे ॥८॥१॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 981) नट महला ४ ॥
राम हम पाथर निरगुनीआरे ॥ क्रिपा क्रिपा करि गुरू मिलाए हम पाहन सबदि गुर तारे ॥१॥ रहाउ ॥

सतिगुर नामु द्रिड़ाए अति मीठा मैलागरु मलगारे ॥ नामै सुरति वजी है दह दिसि हरि मुसकी मुसक गंधारे ॥१॥

तेरी निरगुण कथा कथा है मीठी गुरि नीके बचन समारे ॥ गावत गावत हरि गुन गाए गुन गावत गुरि निसतारे ॥२॥

बिबेकु गुरू गुरू समदरसी तिसु मिलीऐ संक उतारे ॥ सतिगुर मिलिऐ परम पदु पाइआ हउ सतिगुर कै बलिहारे ॥३॥

पाखंड पाखंड करि करि भरमे लोभु पाखंडु जगि बुरिआरे ॥ हलति पलति दुखदाई होवहि जमकालु खड़ा सिरि मारे ॥४॥

उगवै दिनसु आलु जालु सम्हालै बिखु माइआ के बिसथारे ॥ आई रैनि भइआ सुपनंतरु बिखु सुपनै भी दुख सारे ॥५॥

कलरु खेतु लै कूड़ु जमाइआ सभ कूड़ै के खलवारे ॥ साकत नर सभि भूख भुखाने दरि ठाढे जम जंदारे ॥६॥

मनमुख करजु चड़िआ बिखु भारी उतरै सबदु वीचारे ॥ जितने करज करज के मंगीए करि सेवक पगि लगि वारे ॥७॥

जगंनाथ सभि जंत्र उपाए नकि खीनी सभ नथहारे ॥ नानक प्रभु खिंचै तिव चलीऐ जिउ भावै राम पिआरे ॥८॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 981) नट महला ४ ॥
राम हरि अम्रित सरि नावारे ॥ सतिगुरि गिआनु मजनु है नीको मिलि कलमल पाप उतारे ॥१॥ रहाउ ॥

संगति का गुनु बहुतु अधिकाई पड़ि सूआ गनक उधारे ॥ परस नपरस भए कुबिजा कउ लै बैकुंठि सिधारे ॥१॥

अजामल प्रीति पुत्र प्रति कीनी करि नाराइण बोलारे ॥ मेरे ठाकुर कै मनि भाइ भावनी जमकंकर मारि बिदारे ॥२॥

मानुखु कथै कथि लोक सुनावै जो बोलै सो न बीचारे ॥ सतसंगति मिलै त दिड़ता आवै हरि राम नामि निसतारे ॥३॥

जब लगु जीउ पिंडु है साबतु तब लगि किछु न समारे ॥ जब घर मंदरि आगि लगानी कढि कूपु कढै पनिहारे ॥४॥

साकत सिउ मन मेलु न करीअहु जिनि हरि हरि नामु बिसारे ॥ साकत बचन बिछूआ जिउ डसीऐ तजि साकत परै परारे ॥५॥

लगि लगि प्रीति बहु प्रीति लगाई लगि साधू संगि सवारे ॥ गुर के बचन सति सति करि माने मेरे ठाकुर बहुतु पिआरे ॥६॥

पूरबि जनमि परचून कमाए हरि हरि हरि नामि पिआरे ॥ गुर प्रसादि अम्रित रसु पाइआ रसु गावै रसु वीचारे ॥७॥

हरि हरि रूप रंग सभि तेरे मेरे लालन लाल गुलारे ॥ जैसा रंगु देहि सो होवै किआ नानक जंत विचारे ॥८॥३॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 982) नट महला ४ ॥
राम गुर सरनि प्रभू रखवारे ॥ जिउ कुंचरु तदूऐ पकरि चलाइओ करि ऊपरु कढि निसतारे ॥१॥ रहाउ ॥

प्रभ के सेवक बहुतु अति नीके मनि सरधा करि हरि धारे ॥ मेरे प्रभि सरधा भगति मनि भावै जन की पैज सवारे ॥१॥

हरि हरि सेवकु सेवा लागै सभु देखै ब्रहम पसारे ॥ एकु पुरखु इकु नदरी आवै सभ एका नदरि निहारे ॥२॥

हरि प्रभु ठाकुरु रविआ सभ ठाई सभु चेरी जगतु समारे ॥ आपि दइआलु दइआ दानु देवै विचि पाथर कीरे कारे ॥३॥

अंतरि वासु बहुतु मुसकाई भ्रमि भूला मिरगु सिंङ्हारे ॥ बनु बनु ढूढि ढूढि फिरि थाकी गुरि पूरै घरि निसतारे ॥४॥

बाणी गुरू गुरू है बाणी विचि बाणी अम्रितु सारे ॥ गुरु बाणी कहै सेवकु जनु मानै परतखि गुरू निसतारे ॥५॥

सभु है ब्रहमु ब्रहमु है पसरिआ मनि बीजिआ खावारे ॥ जिउ जन चंद्रहांसु दुखिआ ध्रिसटबुधी अपुना घरु लूकी जारे ॥६॥

प्रभ कउ जनु अंतरि रिद लोचै प्रभ जन के सास निहारे ॥ क्रिपा क्रिपा करि भगति द्रिड़ाए जन पीछै जगु निसतारे ॥७॥

आपन आपि आपि प्रभु ठाकुरु प्रभु आपे स्रिसटि सवारे ॥ जन नानक आपे आपि सभु वरतै करि क्रिपा आपि निसतारे ॥८॥४॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 982) नट महला ४ ॥
राम करि किरपा लेहु उबारे ॥ जिउ पकरि द्रोपती दुसटां आनी हरि हरि लाज निवारे ॥१॥ रहाउ ॥

करि किरपा जाचिक जन तेरे इकु मागउ दानु पिआरे ॥ सतिगुर की नित सरधा लागी मो कउ हरि गुरु मेलि सवारे ॥१॥

साकत करम पाणी जिउ मथीऐ नित पाणी झोल झुलारे ॥ मिलि सतसंगति परम पदु पाइआ कढि माखन के गटकारे ॥२॥

नित नित काइआ मजनु कीआ नित मलि मलि देह सवारे ॥ मेरे सतिगुर के मनि बचन न भाए सभ फोकट चार सीगारे ॥३॥

मटकि मटकि चलु सखी सहेली मेरे ठाकुर के गुन सारे ॥ गुरमुखि सेवा मेरे प्रभ भाई मै सतिगुर अलखु लखारे ॥४॥

नारी पुरखु पुरखु सभ नारी सभु एको पुरखु मुरारे ॥ संत जना की रेनु मनि भाई मिलि हरि जन हरि निसतारे ॥५॥

ग्राम ग्राम नगर सभ फिरिआ रिद अंतरि हरि जन भारे ॥ सरधा सरधा उपाइ मिलाए मो कउ हरि गुर गुरि निसतारे ॥६॥

पवन सूतु सभु नीका करिआ सतिगुरि सबदु वीचारे ॥ निज घरि जाइ अम्रित रसु पीआ बिनु नैना जगतु निहारे ॥७॥

तउ गुन ईस बरनि नही साकउ तुम मंदर हम निक कीरे ॥ नानक क्रिपा करहु गुर मेलहु मै रामु जपत मनु धीरे ॥८॥५॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 983) नट महला ४ ॥
मेरे मन भजु ठाकुर अगम अपारे ॥ हम पापी बहु निरगुणीआरे करि किरपा गुरि निसतारे ॥१॥ रहाउ ॥

साधू पुरख साध जन पाए इक बिनउ करउ गुर पिआरे ॥ राम नामु धनु पूजी देवहु सभु तिसना भूख निवारे ॥१॥

पचै पतंगु म्रिग भ्रिंग कुंचर मीन इक इंद्री पकरि सघारे ॥ पंच भूत सबल है देही गुरु सतिगुरु पाप निवारे ॥२॥

सासत्र बेद सोधि सोधि देखे मुनि नारद बचन पुकारे ॥ राम नामु पड़हु गति पावहु सतसंगति गुरि निसतारे ॥३॥

प्रीतम प्रीति लगी प्रभ केरी जिव सूरजु कमलु निहारे ॥ मेर सुमेर मोरु बहु नाचै जब उनवै घन घनहारे ॥४॥

साकत कउ अम्रित बहु सिंचहु सभ डाल फूल बिसुकारे ॥ जिउ जिउ निवहि साकत नर सेती छेड़ि छेड़ि कढै बिखु खारे ॥५॥

संतन संत साध मिलि रहीऐ गुण बोलहि परउपकारे ॥ संतै संतु मिलै मनु बिगसै जिउ जल मिलि कमल सवारे ॥६॥

लोभ लहरि सभु सुआनु हलकु है हलकिओ सभहि बिगारे ॥ मेरे ठाकुर कै दीबानि खबरि होई गुरि गिआनु खड़गु लै मारे ॥७॥

राखु राखु राखु प्रभ मेरे मै राखहु किरपा धारे ॥ नानक मै धर अवर न काई मै सतिगुरु गुरु निसतारे ॥८॥६॥ छका १ ॥


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