Pt 2 - राग मारू - बाणी शब्द, Part 2 - Raag Maru - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1002) मारू महला ५ ॥
बाहरि ढूढन ते छूटि परे गुरि घर ही माहि दिखाइआ था ॥ अनभउ अचरज रूपु प्रभ पेखिआ मेरा मनु छोडि न कतहू जाइआ था ॥१॥

मानकु पाइओ रे पाइओ हरि पूरा पाइआ था ॥ मोलि अमोलु न पाइआ जाई करि किरपा गुरू दिवाइआ था ॥१॥ रहाउ ॥

अदिसटु अगोचरु पारब्रहमु मिलि साधू अकथु कथाइआ था ॥ अनहद सबदु दसम दुआरि वजिओ तह अम्रित नामु चुआइआ था ॥२॥

तोटि नाही मनि त्रिसना बूझी अखुट भंडार समाइआ था ॥ चरण चरण चरण गुर सेवे अघड़ु घड़िओ रसु पाइआ था ॥३॥

सहजे आवा सहजे जावा सहजे मनु खेलाइआ था ॥ कहु नानक भरमु गुरि खोइआ ता हरि महली महलु पाइआ था ॥४॥३॥१२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1002) मारू महला ५ ॥
जिसहि साजि निवाजिआ तिसहि सिउ रुच नाहि ॥ आन रूती आन बोईऐ फलु न फूलै ताहि ॥१॥

रे मन वत्र बीजण नाउ ॥ बोइ खेती लाइ मनूआ भलो समउ सुआउ ॥१॥ रहाउ ॥

खोइ खहड़ा भरमु मन का सतिगुर सरणी जाइ ॥ करमु जिस कउ धुरहु लिखिआ सोई कार कमाइ ॥२॥

भाउ लागा गोबिद सिउ घाल पाई थाइ ॥ खेति मेरै जमिआ निखुटि न कबहू जाइ ॥३॥

पाइआ अमोलु पदारथो छोडि न कतहू जाइ ॥ कहु नानक सुखु पाइआ त्रिपति रहे आघाइ ॥४॥४॥१३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1002) मारू महला ५ ॥
फूटो आंडा भरम का मनहि भइओ परगासु ॥ काटी बेरी पगह ते गुरि कीनी बंदि खलासु ॥१॥

आवण जाणु रहिओ ॥ तपत कड़ाहा बुझि गइआ गुरि सीतल नामु दीओ ॥१॥ रहाउ ॥

जब ते साधू संगु भइआ तउ छोडि गए निगहार ॥ जिस की अटक तिस ते छुटी तउ कहा करै कोटवार ॥२॥

चूका भारा करम का होए निहकरमा ॥ सागर ते कंढै चड़े गुरि कीने धरमा ॥३॥

सचु थानु सचु बैठका सचु सुआउ बणाइआ ॥ सचु पूंजी सचु वखरो नानक घरि पाइआ ॥४॥५॥१४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1002) मारू महला ५ ॥
बेदु पुकारै मुख ते पंडत कामामन का माठा ॥ मोनी होइ बैठा इकांती हिरदै कलपन गाठा ॥ होइ उदासी ग्रिहु तजि चलिओ छुटकै नाही नाठा ॥१॥

जीअ की कै पहि बात कहा ॥ आपि मुकतु मो कउ प्रभु मेले ऐसो कहा लहा ॥१॥ रहाउ ॥

तपसी करि कै देही साधी मनूआ दह दिस धाना ॥ ब्रहमचारि ब्रहमचजु कीना हिरदै भइआ गुमाना ॥ संनिआसी होइ कै तीरथि भ्रमिओ उसु महि क्रोधु बिगाना ॥२॥

घूंघर बाधि भए रामदासा रोटीअन के ओपावा ॥ बरत नेम करम खट कीने बाहरि भेख दिखावा ॥ गीत नाद मुखि राग अलापे मनि नही हरि हरि गावा ॥३॥

हरख सोग लोभ मोह रहत हहि निरमल हरि के संता ॥ तिन की धूड़ि पाए मनु मेरा जा दइआ करे भगवंता ॥ कहु नानक गुरु पूरा मिलिआ तां उतरी मन की चिंता ॥४॥

मेरा अंतरजामी हरि राइआ ॥ सभु किछु जाणै मेरे जीअ का प्रीतमु बिसरि गए बकबाइआ ॥१॥ रहाउ दूजा ॥६॥१५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1003) मारू महला ५ ॥
कोटि लाख सरब को राजा जिसु हिरदै नामु तुमारा ॥ जा कउ नामु न दीआ मेरै सतिगुरि से मरि जनमहि गावारा ॥१॥

मेरे सतिगुर ही पति राखु ॥ चीति आवहि तब ही पति पूरी बिसरत रलीऐ खाकु ॥१॥ रहाउ ॥

रूप रंग खुसीआ मन भोगण ते ते छिद्र विकारा ॥ हरि का नामु निधानु कलिआणा सूख सहजु इहु सारा ॥२॥

माइआ रंग बिरंग खिनै महि जिउ बादर की छाइआ ॥ से लाल भए गूड़ै रंगि राते जिन गुर मिलि हरि हरि गाइआ ॥३॥

ऊच मूच अपार सुआमी अगम दरबारा ॥ नामो वडिआई सोभा नानक खसमु पिआरा ॥४॥७॥१६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1003) मारू महला ५ घरु ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ओअंकारि उतपाती ॥ कीआ दिनसु सभ राती ॥ वणु त्रिणु त्रिभवण पाणी ॥ चारि बेद चारे खाणी ॥ खंड दीप सभि लोआ ॥ एक कवावै ते सभि होआ ॥१॥

करणैहारा बूझहु रे ॥ सतिगुरु मिलै त सूझै रे ॥१॥ रहाउ ॥

त्रै गुण कीआ पसारा ॥ नरक सुरग अवतारा ॥ हउमै आवै जाई ॥ मनु टिकणु न पावै राई ॥ बाझु गुरू गुबारा ॥ मिलि सतिगुर निसतारा ॥२॥

हउ हउ करम कमाणे ॥ ते ते बंध गलाणे ॥ मेरी मेरी धारी ॥ ओहा पैरि लोहारी ॥ सो गुर मिलि एकु पछाणै ॥ जिसु होवै भागु मथाणै ॥३॥

सो मिलिआ जि हरि मनि भाइआ ॥ सो भूला जि प्रभू भुलाइआ ॥ नह आपहु मूरखु गिआनी ॥ जि करावै सु नामु वखानी ॥ तेरा अंतु न पारावारा ॥ जन नानक सद बलिहारा ॥४॥१॥१७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1004) मारू महला ५ ॥
मोहनी मोहि लीए त्रै गुनीआ ॥ लोभि विआपी झूठी दुनीआ ॥ मेरी मेरी करि कै संची अंत की बार सगल ले छलीआ ॥१॥

निरभउ निरंकारु दइअलीआ ॥ जीअ जंत सगले प्रतिपलीआ ॥१॥ रहाउ ॥

एकै स्रमु करि गाडी गडहै ॥ एकहि सुपनै दामु न छडहै ॥ राजु कमाइ करी जिनि थैली ता कै संगि न चंचलि चलीआ ॥२॥

एकहि प्राण पिंड ते पिआरी ॥ एक संची तजि बाप महतारी ॥ सुत मीत भ्रात ते गुहजी ता कै निकटि न होई खलीआ ॥३॥

होइ अउधूत बैठे लाइ तारी ॥ जोगी जती पंडित बीचारी ॥ ग्रिहि मड़ी मसाणी बन महि बसते ऊठि तिना कै लागी पलीआ ॥४॥

काटे बंधन ठाकुरि जा के ॥ हरि हरि नामु बसिओ जीअ ता कै ॥ साधसंगि भए जन मुकते गति पाई नानक नदरि निहलीआ ॥५॥२॥१८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1004) मारू महला ५ ॥
सिमरहु एकु निरंजन सोऊ ॥ जा ते बिरथा जात न कोऊ ॥ मात गरभ महि जिनि प्रतिपारिआ ॥ जीउ पिंडु दे साजि सवारिआ ॥ सोई बिधाता खिनु खिनु जपीऐ ॥ जिसु सिमरत अवगुण सभि ढकीऐ ॥ चरण कमल उर अंतरि धारहु ॥ बिखिआ बन ते जीउ उधारहु ॥ करण पलाह मिटहि बिललाटा ॥ जपि गोविद भरमु भउ फाटा ॥ साधसंगि विरला को पाए ॥ नानकु ता कै बलि बलि जाए ॥१॥

राम नामु मनि तनि आधारा ॥ जो सिमरै तिस का निसतारा ॥१॥ रहाउ ॥

मिथिआ वसतु सति करि मानी ॥ हितु लाइओ सठ मूड़ अगिआनी ॥ काम क्रोध लोभ मद माता ॥ कउडी बदलै जनमु गवाता ॥ अपना छोडि पराइऐ राता ॥ माइआ मद मन तन संगि जाता ॥ त्रिसन न बूझै करत कलोला ॥ ऊणी आस मिथिआ सभि बोला ॥ आवत इकेला जात इकेला ॥ हम तुम संगि झूठे सभि बोला ॥ पाइ ठगउरी आपि भुलाइओ ॥ नानक किरतु न जाइ मिटाइओ ॥२॥

पसु पंखी भूत अरु प्रेता ॥ बहु बिधि जोनी फिरत अनेता ॥ जह जानो तह रहनु न पावै ॥ थान बिहून उठि उठि फिरि धावै ॥ मनि तनि बासना बहुतु बिसथारा ॥ अहमेव मूठो बेचारा ॥ अनिक दोख अरु बहुतु सजाई ॥ ता की कीमति कहणु न जाई ॥ प्रभ बिसरत नरक महि पाइआ ॥ तह मात न बंधु न मीत न जाइआ ॥ जिस कउ होत क्रिपाल सुआमी ॥ सो जनु नानक पारगरामी ॥३॥

भ्रमत भ्रमत प्रभ सरनी आइआ ॥ दीना नाथ जगत पित माइआ ॥ प्रभ दइआल दुख दरद बिदारण ॥ जिसु भावै तिस ही निसतारण ॥ अंध कूप ते काढनहारा ॥ प्रेम भगति होवत निसतारा ॥ साध रूप अपना तनु धारिआ ॥ महा अगनि ते आपि उबारिआ ॥ जप तप संजम इस ते किछु नाही ॥ आदि अंति प्रभ अगम अगाही ॥ नामु देहि मागै दासु तेरा ॥ हरि जीवन पदु नानक प्रभु मेरा ॥४॥३॥१९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1005) मारू महला ५ ॥
कत कउ डहकावहु लोगा मोहन दीन किरपाई ॥१॥

ऐसी जानि पाई ॥ सरणि सूरो गुर दाता राखै आपि वडाई ॥१॥ रहाउ ॥

भगता का आगिआकारी सदा सदा सुखदाई ॥२॥

अपने कउ किरपा करीअहु इकु नामु धिआई ॥३॥

नानकु दीनु नामु मागै दुतीआ भरमु चुकाई ॥४॥४॥२०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1005) मारू महला ५ ॥
मेरा ठाकुरु अति भारा ॥ मोहि सेवकु बेचारा ॥१॥

मोहनु लालु मेरा प्रीतम मन प्राना ॥ मो कउ देहु दाना ॥१॥ रहाउ ॥

सगले मै देखे जोई ॥ बीजउ अवरु न कोई ॥२॥

जीअन प्रतिपालि समाहै ॥ है होसी आहे ॥३॥

दइआ मोहि कीजै देवा ॥ नानक लागो सेवा ॥४॥५॥२१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1005) मारू महला ५ ॥
पतित उधारन तारन बलि बलि बले बलि जाईऐ ॥ ऐसा कोई भेटै संतु जितु हरि हरे हरि धिआईऐ ॥१॥

मो कउ कोइ न जानत कहीअत दासु तुमारा ॥ एहा ओट आधारा ॥१॥ रहाउ ॥

सरब धारन प्रतिपारन इक बिनउ दीना ॥ तुमरी बिधि तुम ही जानहु तुम जल हम मीना ॥२॥

पूरन बिसथीरन सुआमी आहि आइओ पाछै ॥ सगलो भू मंडल खंडल प्रभ तुम ही आछै ॥३॥

अटल अखइओ देवा मोहन अलख अपारा ॥ दानु पावउ संता संगु नानक रेनु दासारा ॥४॥६॥२२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1006) मारू महला ५ ॥
त्रिपति आघाए संता ॥ गुर जाने जिन मंता ॥ ता की किछु कहनु न जाई ॥ जा कउ नाम बडाई ॥१॥

लालु अमोला लालो ॥ अगह अतोला नामो ॥१॥ रहाउ ॥

अविगत सिउ मानिआ मानो ॥ गुरमुखि ततु गिआनो ॥ पेखत सगल धिआनो ॥ तजिओ मन ते अभिमानो ॥२॥

निहचलु तिन का ठाणा ॥ गुर ते महलु पछाणा ॥ अनदिनु गुर मिलि जागे ॥ हरि की सेवा लागे ॥३॥

पूरन त्रिपति अघाए ॥ सहज समाधि सुभाए ॥ हरि भंडारु हाथि आइआ ॥ नानक गुर ते पाइआ ॥४॥७॥२३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1006) मारू महला ५ घरु ६ दुपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
छोडि सगल सिआणपा मिलि साध तिआगि गुमानु ॥ अवरु सभु किछु मिथिआ रसना राम राम वखानु ॥१॥

मेरे मन करन सुणि हरि नामु ॥ मिटहि अघ तेरे जनम जनम के कवनु बपुरो जामु ॥१॥ रहाउ ॥

दूख दीन न भउ बिआपै मिलै सुख बिस्रामु ॥ गुर प्रसादि नानकु बखानै हरि भजनु ततु गिआनु ॥२॥१॥२४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1006) मारू महला ५ ॥
जिनी नामु विसारिआ से होत देखे खेह ॥ पुत्र मित्र बिलास बनिता तूटते ए नेह ॥१॥

मेरे मन नामु नित नित लेह ॥ जलत नाही अगनि सागर सूखु मनि तनि देह ॥१॥ रहाउ ॥

बिरख छाइआ जैसे बिनसत पवन झूलत मेह ॥ हरि भगति द्रिड़ु मिलु साध नानक तेरै कामि आवत एह ॥२॥२॥२५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1006) मारू महला ५ ॥
पुरखु पूरन सुखह दाता संगि बसतो नीत ॥ मरै न आवै न जाइ बिनसै बिआपत उसन न सीत ॥१॥

मेरे मन नाम सिउ करि प्रीति ॥ चेति मन महि हरि हरि निधाना एह निरमल रीति ॥१॥ रहाउ ॥

क्रिपाल दइआल गोपाल गोबिद जो जपै तिसु सीधि ॥ नवल नवतन चतुर सुंदर मनु नानक तिसु संगि बीधि ॥२॥३॥२६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1006) मारू महला ५ ॥
चलत बैसत सोवत जागत गुर मंत्रु रिदै चितारि ॥ चरण सरण भजु संगि साधू भव सागर उतरहि पारि ॥१॥

मेरे मन नामु हिरदै धारि ॥ करि प्रीति मनु तनु लाइ हरि सिउ अवर सगल विसारि ॥१॥ रहाउ ॥

जीउ मनु तनु प्राण प्रभ के तू आपन आपु निवारि ॥ गोविद भजु सभि सुआरथ पूरे नानक कबहु न हारि ॥२॥४॥२७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1007) मारू महला ५ ॥
तजि आपु बिनसी तापु रेण साधू थीउ ॥ तिसहि परापति नामु तेरा करि क्रिपा जिसु दीउ ॥१॥

मेरे मन नामु अम्रितु पीउ ॥ आन साद बिसारि होछे अमरु जुगु जुगु जीउ ॥१॥ रहाउ ॥

नामु इक रस रंग नामा नामि लागी लीउ ॥ मीतु साजनु सखा बंधपु हरि एकु नानक कीउ ॥२॥५॥२८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1007) मारू महला ५ ॥
प्रतिपालि माता उदरि राखै लगनि देत न सेक ॥ सोई सुआमी ईहा राखै बूझु बुधि बिबेक ॥१॥

मेरे मन नाम की करि टेक ॥ तिसहि बूझु जिनि तू कीआ प्रभु करण कारण एक ॥१॥ रहाउ ॥

चेति मन महि तजि सिआणप छोडि सगले भेख ॥ सिमरि हरि हरि सदा नानक तरे कई अनेक ॥२॥६॥२९॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1007) मारू महला ५ ॥
पतित पावन नामु जा को अनाथ को है नाथु ॥ महा भउजल माहि तुलहो जा को लिखिओ माथ ॥१॥

डूबे नाम बिनु घन साथ ॥ करण कारणु चिति न आवै दे करि राखै हाथ ॥१॥ रहाउ ॥

साधसंगति गुण उचारण हरि नाम अम्रित पाथ ॥ करहु क्रिपा मुरारि माधउ सुणि नानक जीवै गाथ ॥२॥७॥३०॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1007) मारू अंजुली महला ५ घरु ७
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
संजोगु विजोगु धुरहु ही हूआ ॥ पंच धातु करि पुतला कीआ ॥ साहै कै फुरमाइअड़ै जी देही विचि जीउ आइ पइआ ॥१॥

जिथै अगनि भखै भड़हारे ॥ ऊरध मुख महा गुबारे ॥ सासि सासि समाले सोई ओथै खसमि छडाइ लइआ ॥२॥

विचहु गरभै निकलि आइआ ॥ खसमु विसारि दुनी चितु लाइआ ॥ आवै जाइ भवाईऐ जोनी रहणु न कितही थाइ भइआ ॥३॥

मिहरवानि रखि लइअनु आपे ॥ जीअ जंत सभि तिस के थापे ॥ जनमु पदारथु जिणि चलिआ नानक आइआ सो परवाणु थिआ ॥४॥१॥३१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 1008) मारू महला ५ ॥
वैदो न वाई भैणो न भाई एको सहाई रामु हे ॥१॥

कीता जिसो होवै पापां मलो धोवै सो सिमरहु परधानु हे ॥२॥

घटि घटे वासी सरब निवासी असथिरु जा का थानु हे ॥३॥

आवै न जावै संगे समावै पूरन जा का कामु हे ॥४॥

भगत जना का राखणहारा ॥ संत जीवहि जपि प्रान अधारा ॥ करन कारन समरथु सुआमी नानकु तिसु कुरबानु हे ॥५॥२॥३२॥

(गुरू तेग बहादुर जी -- SGGS 1008) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मारू महला ९ ॥
हरि को नामु सदा सुखदाई ॥ जा कउ सिमरि अजामलु उधरिओ गनिका हू गति पाई ॥१॥ रहाउ ॥

पंचाली कउ राज सभा महि राम नाम सुधि आई ॥ ता को दूखु हरिओ करुणा मै अपनी पैज बढाई ॥१॥

जिह नर जसु किरपा निधि गाइओ ता कउ भइओ सहाई ॥ कहु नानक मै इही भरोसै गही आनि सरनाई ॥२॥१॥

(गुरू तेग बहादुर जी -- SGGS 1008) मारू महला ९ ॥
अब मै कहा करउ री माई ॥ सगल जनमु बिखिअन सिउ खोइआ सिमरिओ नाहि कन्हाई ॥१॥ रहाउ ॥

काल फास जब गर महि मेली तिह सुधि सभ बिसराई ॥ राम नाम बिनु या संकट महि को अब होत सहाई ॥१॥

जो स्मपति अपनी करि मानी छिन महि भई पराई ॥ कहु नानक यह सोच रही मनि हरि जसु कबहू न गाई ॥२॥२॥

(गुरू तेग बहादुर जी -- SGGS 1008) मारू महला ९ ॥
माई मै मन को मानु न तिआगिओ ॥ माइआ के मदि जनमु सिराइओ राम भजनि नही लागिओ ॥१॥ रहाउ ॥

जम को डंडु परिओ सिर ऊपरि तब सोवत तै जागिओ ॥ कहा होत अब कै पछुताए छूटत नाहिन भागिओ ॥१॥

इह चिंता उपजी घट महि जब गुर चरनन अनुरागिओ ॥ सुफलु जनमु नानक तब हूआ जउ प्रभ जस महि पागिओ ॥२॥३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1008) मारू असटपदीआ महला १ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
बेद पुराण कथे सुणे हारे मुनी अनेका ॥ अठसठि तीरथ बहु घणा भ्रमि थाके भेखा ॥ साचो साहिबु निरमलो मनि मानै एका ॥१॥

तू अजरावरु अमरु तू सभ चालणहारी ॥ नामु रसाइणु भाइ लै परहरि दुखु भारी ॥१॥ रहाउ ॥

हरि पड़ीऐ हरि बुझीऐ गुरमती नामि उधारा ॥ गुरि पूरै पूरी मति है पूरै सबदि बीचारा ॥ अठसठि तीरथ हरि नामु है किलविख काटणहारा ॥२॥

जलु बिलोवै जलु मथै ततु लोड़ै अंधु अगिआना ॥ गुरमती दधि मथीऐ अम्रितु पाईऐ नामु निधाना ॥ मनमुख ततु न जाणनी पसू माहि समाना ॥३॥

हउमै मेरा मरी मरु मरि जमै वारो वार ॥ गुर कै सबदे जे मरै फिरि मरै न दूजी वार ॥ गुरमती जगजीवनु मनि वसै सभि कुल उधारणहार ॥४॥

सचा वखरु नामु है सचा वापारा ॥ लाहा नामु संसारि है गुरमती वीचारा ॥ दूजै भाइ कार कमावणी नित तोटा सैसारा ॥५॥

साची संगति थानु सचु सचे घर बारा ॥ सचा भोजनु भाउ सचु सचु नामु अधारा ॥ सची बाणी संतोखिआ सचा सबदु वीचारा ॥६॥

रस भोगण पातिसाहीआ दुख सुख संघारा ॥ मोटा नाउ धराईऐ गलि अउगण भारा ॥ माणस दाति न होवई तू दाता सारा ॥७॥

अगम अगोचरु तू धणी अविगतु अपारा ॥ गुर सबदी दरु जोईऐ मुकते भंडारा ॥ नानक मेलु न चूकई साचे वापारा ॥८॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1009) मारू महला १ ॥
बिखु बोहिथा लादिआ दीआ समुंद मंझारि ॥ कंधी दिसि न आवई ना उरवारु न पारु ॥ वंझी हाथि न खेवटू जलु सागरु असरालु ॥१॥

बाबा जगु फाथा महा जालि ॥ गुर परसादी उबरे सचा नामु समालि ॥१॥ रहाउ ॥

सतिगुरू है बोहिथा सबदि लंघावणहारु ॥ तिथै पवणु न पावको ना जलु ना आकारु ॥ तिथै सचा सचि नाइ भवजल तारणहारु ॥२॥

गुरमुखि लंघे से पारि पए सचे सिउ लिव लाइ ॥ आवा गउणु निवारिआ जोती जोति मिलाइ ॥ गुरमती सहजु ऊपजै सचे रहै समाइ ॥३॥

सपु पिड़ाई पाईऐ बिखु अंतरि मनि रोसु ॥ पूरबि लिखिआ पाईऐ किस नो दीजै दोसु ॥ गुरमुखि गारड़ु जे सुणे मंने नाउ संतोसु ॥४॥

मागरमछु फहाईऐ कुंडी जालु वताइ ॥ दुरमति फाथा फाहीऐ फिरि फिरि पछोताइ ॥ जमण मरणु न सुझई किरतु न मेटिआ जाइ ॥५॥

हउमै बिखु पाइ जगतु उपाइआ सबदु वसै बिखु जाइ ॥ जरा जोहि न सकई सचि रहै लिव लाइ ॥ जीवन मुकतु सो आखीऐ जिसु विचहु हउमै जाइ ॥६॥

धंधै धावत जगु बाधिआ ना बूझै वीचारु ॥ जमण मरणु विसारिआ मनमुख मुगधु गवारु ॥ गुरि राखे से उबरे सचा सबदु वीचारि ॥७॥

सूहटु पिंजरि प्रेम कै बोलै बोलणहारु ॥ सचु चुगै अम्रितु पीऐ उडै त एका वार ॥ गुरि मिलिऐ खसमु पछाणीऐ कहु नानक मोख दुआरु ॥८॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1010) मारू महला १ ॥
सबदि मरै ता मारि मरु भागो किसु पहि जाउ ॥ जिस कै डरि भै भागीऐ अम्रितु ता को नाउ ॥ मारहि राखहि एकु तू बीजउ नाही थाउ ॥१॥

बाबा मै कुचीलु काचउ मतिहीन ॥ नाम बिना को कछु नही गुरि पूरै पूरी मति कीन ॥१॥ रहाउ ॥

अवगणि सुभर गुण नही बिनु गुण किउ घरि जाउ ॥ सहजि सबदि सुखु ऊपजै बिनु भागा धनु नाहि ॥ जिन कै नामु न मनि वसै से बाधे दूख सहाहि ॥२॥

जिनी नामु विसारिआ से कितु आए संसारि ॥ आगै पाछै सुखु नही गाडे लादे छारु ॥ विछुड़िआ मेला नही दूखु घणो जम दुआरि ॥३॥

अगै किआ जाणा नाहि मै भूले तू समझाइ ॥ भूले मारगु जो दसे तिस कै लागउ पाइ ॥ गुर बिनु दाता को नही कीमति कहणु न जाइ ॥४॥

साजनु देखा ता गलि मिला साचु पठाइओ लेखु ॥ मुखि धिमाणै धन खड़ी गुरमुखि आखी देखु ॥ तुधु भावै तू मनि वसहि नदरी करमि विसेखु ॥५॥

भूख पिआसो जे भवै किआ तिसु मागउ देइ ॥ बीजउ सूझै को नही मनि तनि पूरनु देइ ॥ जिनि कीआ तिनि देखिआ आपि वडाई देइ ॥६॥

नगरी नाइकु नवतनो बालकु लील अनूपु ॥ नारि न पुरखु न पंखणू साचउ चतुरु सरूपु ॥ जो तिसु भावै सो थीऐ तू दीपकु तू धूपु ॥७॥

गीत साद चाखे सुणे बाद साद तनि रोगु ॥ सचु भावै साचउ चवै छूटै सोग विजोगु ॥ नानक नामु न वीसरै जो तिसु भावै सु होगु ॥८॥३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1010) मारू महला १ ॥
साची कार कमावणी होरि लालच बादि ॥ इहु मनु साचै मोहिआ जिहवा सचि सादि ॥ बिनु नावै को रसु नही होरि चलहि बिखु लादि ॥१॥

ऐसा लाला मेरे लाल को सुणि खसम हमारे ॥ जिउ फुरमावहि तिउ चला सचु लाल पिआरे ॥१॥ रहाउ ॥

अनदिनु लाले चाकरी गोले सिरि मीरा ॥ गुर बचनी मनु वेचिआ सबदि मनु धीरा ॥ गुर पूरे साबासि है काटै मन पीरा ॥२॥

लाला गोला धणी को किआ कहउ वडिआईऐ ॥ भाणै बखसे पूरा धणी सचु कार कमाईऐ ॥ विछुड़िआ कउ मेलि लए गुर कउ बलि जाईऐ ॥३॥

लाले गोले मति खरी गुर की मति नीकी ॥ साची सुरति सुहावणी मनमुख मति फीकी ॥ मनु तनु तेरा तू प्रभू सचु धीरक धुर की ॥४॥

साचै बैसणु उठणा सचु भोजनु भाखिआ ॥ चिति सचै वितो सचा साचा रसु चाखिआ ॥ साचै घरि साचै रखे गुर बचनि सुभाखिआ ॥५॥

मनमुख कउ आलसु घणो फाथे ओजाड़ी ॥ फाथा चुगै नित चोगड़ी लगि बंधु विगाड़ी ॥ गुर परसादी मुकतु होइ साचे निज ताड़ी ॥६॥

अनहति लाला बेधिआ प्रभ हेति पिआरी ॥ बिनु साचे जीउ जलि बलउ झूठे वेकारी ॥ बादि कारा सभि छोडीआ साची तरु तारी ॥७॥

जिनी नामु विसारिआ तिना ठउर न ठाउ ॥ लालै लालचु तिआगिआ पाइआ हरि नाउ ॥ तू बखसहि ता मेलि लैहि नानक बलि जाउ ॥८॥४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1011) मारू महला १ ॥
लालै गारबु छोडिआ गुर कै भै सहजि सुभाई ॥ लालै खसमु पछाणिआ वडी वडिआई ॥ खसमि मिलिऐ सुखु पाइआ कीमति कहणु न जाई ॥१॥

लाला गोला खसम का खसमै वडिआई ॥ गुर परसादी उबरे हरि की सरणाई ॥१॥ रहाउ ॥

लाले नो सिरि कार है धुरि खसमि फुरमाई ॥ लालै हुकमु पछाणिआ सदा रहै रजाई ॥ आपे मीरा बखसि लए वडी वडिआई ॥२॥

आपि सचा सभु सचु है गुर सबदि बुझाई ॥ तेरी सेवा सो करे जिस नो लैहि तू लाई ॥ बिनु सेवा किनै न पाइआ दूजै भरमि खुआई ॥३॥

सो किउ मनहु विसारीऐ नित देवै चड़ै सवाइआ ॥ जीउ पिंडु सभु तिस दा साहु तिनै विचि पाइआ ॥ जा क्रिपा करे ता सेवीऐ सेवि सचि समाइआ ॥४॥

लाला सो जीवतु मरै मरि विचहु आपु गवाए ॥ बंधन तूटहि मुकति होइ त्रिसना अगनि बुझाए ॥ सभ महि नामु निधानु है गुरमुखि को पाए ॥५॥

लाले विचि गुणु किछु नही लाला अवगणिआरु ॥ तुधु जेवडु दाता को नही तू बखसणहारु ॥ तेरा हुकमु लाला मंने एह करणी सारु ॥६॥

गुरु सागरु अम्रित सरु जो इछे सो फलु पाए ॥ नामु पदारथु अमरु है हिरदै मंनि वसाए ॥ गुर सेवा सदा सुखु है जिस नो हुकमु मनाए ॥७॥

सुइना रुपा सभ धातु है माटी रलि जाई ॥ बिनु नावै नालि न चलई सतिगुरि बूझ बुझाई ॥ नानक नामि रते से निरमले साचै रहे समाई ॥८॥५॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1012) मारू महला १ ॥
हुकमु भइआ रहणा नही धुरि फाटे चीरै ॥ एहु मनु अवगणि बाधिआ सहु देह सरीरै ॥ पूरै गुरि बखसाईअहि सभि गुनह फकीरै ॥१॥

किउ रहीऐ उठि चलणा बुझु सबद बीचारा ॥ जिसु तू मेलहि सो मिलै धुरि हुकमु अपारा ॥१॥ रहाउ ॥

जिउ तू राखहि तिउ रहा जो देहि सु खाउ ॥ जिउ तू चलावहि तिउ चला मुखि अम्रित नाउ ॥ मेरे ठाकुर हथि वडिआईआ मेलहि मनि चाउ ॥२॥

कीता किआ सालाहीऐ करि देखै सोई ॥ जिनि कीआ सो मनि वसै मै अवरु न कोई ॥ सो साचा सालाहीऐ साची पति होई ॥३॥

पंडितु पड़ि न पहुचई बहु आल जंजाला ॥ पाप पुंन दुइ संगमे खुधिआ जमकाला ॥ विछोड़ा भउ वीसरै पूरा रखवाला ॥४॥

जिन की लेखै पति पवै से पूरे भाई ॥ पूरे पूरी मति है सची वडिआई ॥ देदे तोटि न आवई लै लै थकि पाई ॥५॥

खार समुद्रु ढंढोलीऐ इकु मणीआ पावै ॥ दुइ दिन चारि सुहावणा माटी तिसु खावै ॥ गुरु सागरु सति सेवीऐ दे तोटि न आवै ॥६॥

मेरे प्रभ भावनि से ऊजले सभ मैलु भरीजै ॥ मैला ऊजलु ता थीऐ पारस संगि भीजै ॥ वंनी साचे लाल की किनि कीमति कीजै ॥७॥

भेखी हाथ न लभई तीरथि नही दाने ॥ पूछउ बेद पड़ंतिआ मूठी विणु माने ॥ नानक कीमति सो करे पूरा गुरु गिआने ॥८॥६॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1012) मारू महला १ ॥
मनमुखु लहरि घरु तजि विगूचै अवरा के घर हेरै ॥ ग्रिह धरमु गवाए सतिगुरु न भेटै दुरमति घूमन घेरै ॥ दिसंतरु भवै पाठ पड़ि थाका त्रिसना होइ वधेरै ॥ काची पिंडी सबदु न चीनै उदरु भरै जैसे ढोरै ॥१॥

बाबा ऐसी रवत रवै संनिआसी ॥ गुर कै सबदि एक लिव लागी तेरै नामि रते त्रिपतासी ॥१॥ रहाउ ॥

घोली गेरू रंगु चड़ाइआ वसत्र भेख भेखारी ॥ कापड़ फारि बनाई खिंथा झोली माइआधारी ॥ घरि घरि मागै जगु परबोधै मनि अंधै पति हारी ॥ भरमि भुलाणा सबदु न चीनै जूऐ बाजी हारी ॥२॥

अंतरि अगनि न गुर बिनु बूझै बाहरि पूअर तापै ॥ गुर सेवा बिनु भगति न होवी किउ करि चीनसि आपै ॥ निंदा करि करि नरक निवासी अंतरि आतम जापै ॥ अठसठि तीरथ भरमि विगूचहि किउ मलु धोपै पापै ॥३॥

छाणी खाकु बिभूत चड़ाई माइआ का मगु जोहै ॥ अंतरि बाहरि एकु न जाणै साचु कहे ते छोहै ॥ पाठु पड़ै मुखि झूठो बोलै निगुरे की मति ओहै ॥ नामु न जपई किउ सुखु पावै बिनु नावै किउ सोहै ॥४॥

मूंडु मुडाइ जटा सिख बाधी मोनि रहै अभिमाना ॥ मनूआ डोलै दह दिस धावै बिनु रत आतम गिआना ॥ अम्रितु छोडि महा बिखु पीवै माइआ का देवाना ॥ किरतु न मिटई हुकमु न बूझै पसूआ माहि समाना ॥५॥

हाथ कमंडलु कापड़ीआ मनि त्रिसना उपजी भारी ॥ इसत्री तजि करि कामि विआपिआ चितु लाइआ पर नारी ॥ सिख करे करि सबदु न चीनै ल्मपटु है बाजारी ॥ अंतरि बिखु बाहरि निभराती ता जमु करे खुआरी ॥६॥

सो संनिआसी जो सतिगुर सेवै विचहु आपु गवाए ॥ छादन भोजन की आस न करई अचिंतु मिलै सो पाए ॥ बकै न बोलै खिमा धनु संग्रहै तामसु नामि जलाए ॥ धनु गिरही संनिआसी जोगी जि हरि चरणी चितु लाए ॥७॥

आस निरास रहै संनिआसी एकसु सिउ लिव लाए ॥ हरि रसु पीवै ता साति आवै निज घरि ताड़ी लाए ॥ मनूआ न डोलै गुरमुखि बूझै धावतु वरजि रहाए ॥ ग्रिहु सरीरु गुरमती खोजे नामु पदारथु पाए ॥८॥

ब्रहमा बिसनु महेसु सरेसट नामि रते वीचारी ॥ खाणी बाणी गगन पताली जंता जोति तुमारी ॥ सभि सुख मुकति नाम धुनि बाणी सचु नामु उर धारी ॥ नाम बिना नही छूटसि नानक साची तरु तू तारी ॥९॥७॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 1013) मारू महला १ ॥
मात पिता संजोगि उपाए रकतु बिंदु मिलि पिंडु करे ॥ अंतरि गरभ उरधि लिव लागी सो प्रभु सारे दाति करे ॥१॥

संसारु भवजलु किउ तरै ॥ गुरमुखि नामु निरंजनु पाईऐ अफरिओ भारु अफारु टरै ॥१॥ रहाउ ॥

ते गुण विसरि गए अपराधी मै बउरा किआ करउ हरे ॥ तू दाता दइआलु सभै सिरि अहिनिसि दाति समारि करे ॥२॥

चारि पदारथ लै जगि जनमिआ सिव सकती घरि वासु धरे ॥ लागी भूख माइआ मगु जोहै मुकति पदारथु मोहि खरे ॥३॥

करण पलाव करे नही पावै इत उत ढूढत थाकि परे ॥ कामि क्रोधि अहंकारि विआपे कूड़ कुट्मब सिउ प्रीति करे ॥४॥

खावै भोगै सुणि सुणि देखै पहिरि दिखावै काल घरे ॥ बिनु गुर सबद न आपु पछाणै बिनु हरि नाम न कालु टरे ॥५॥

जेता मोहु हउमै करि भूले मेरी मेरी करते छीनि खरे ॥ तनु धनु बिनसै सहसै सहसा फिरि पछुतावै मुखि धूरि परे ॥६॥

बिरधि भइआ जोबनु तनु खिसिआ कफु कंठु बिरूधो नैनहु नीरु ढरे ॥ चरण रहे कर क्मपण लागे साकत रामु न रिदै हरे ॥७॥

सुरति गई काली हू धउले किसै न भावै रखिओ घरे ॥ बिसरत नाम ऐसे दोख लागहि जमु मारि समारे नरकि खरे ॥८॥

पूरब जनम को लेखु न मिटई जनमि मरै का कउ दोसु धरे ॥ बिनु गुर बादि जीवणु होरु मरणा बिनु गुर सबदै जनमु जरे ॥९॥

खुसी खुआर भए रस भोगण फोकट करम विकार करे ॥ नामु बिसारि लोभि मूलु खोइओ सिरि धरम राइ का डंडु परे ॥१०॥

गुरमुखि राम नाम गुण गावहि जा कउ हरि प्रभु नदरि करे ॥ ते निरमल पुरख अपर्मपर पूरे ते जग महि गुर गोविंद हरे ॥११॥

हरि सिमरहु गुर बचन समारहु संगति हरि जन भाउ करे ॥ हरि जन गुरु परधानु दुआरै नानक तिन जन की रेणु हरे ॥१२॥८॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates