Pt 5 - राग माझ - बाणी शब्द, Part 5 - Raag Majh - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू नानक देव जी -- SGGS 143) पउड़ी ॥
आपे कुदरति साजि कै आपे करे बीचारु ॥ इकि खोटे इकि खरे आपे परखणहारु ॥ खरे खजानै पाईअहि खोटे सटीअहि बाहर वारि ॥ खोटे सची दरगह सुटीअहि किसु आगै करहि पुकार ॥ सतिगुर पिछै भजि पवहि एहा करणी सारु ॥ सतिगुरु खोटिअहु खरे करे सबदि सवारणहारु ॥ सची दरगह मंनीअनि गुर कै प्रेम पिआरि ॥ गणत तिना दी को किआ करे जो आपि बखसे करतारि ॥१२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 143) सलोकु मः १ ॥
हम जेर जिमी दुनीआ पीरा मसाइका राइआ ॥ मे रवदि बादिसाहा अफजू खुदाइ ॥ एक तूही एक तुही ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 143) मः १ ॥
न देव दानवा नरा ॥ न सिध साधिका धरा ॥ असति एक दिगरि कुई ॥ एक तुई एक तुई ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 144) मः १ ॥
न दादे दिहंद आदमी ॥ न सपत जेर जिमी ॥ असति एक दिगरि कुई ॥ एक तुई एक तुई ॥३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 144) मः १ ॥
न सूर ससि मंडलो ॥ न सपत दीप नह जलो ॥ अंन पउण थिरु न कुई ॥ एकु तुई एकु तुई ॥४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 144) मः १ ॥
न रिजकु दसत आ कसे ॥ हमा रा एकु आस वसे ॥ असति एकु दिगर कुई ॥ एक तुई एकु तुई ॥५॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 144) मः १ ॥
परंदए न गिराह जर ॥ दरखत आब आस कर ॥ दिहंद सुई ॥ एक तुई एक तुई ॥६॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 144) मः १ ॥
नानक लिलारि लिखिआ सोइ ॥ मेटि न साकै कोइ ॥ कला धरै हिरै सुई ॥ एकु तुई एकु तुई ॥७॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 144) पउड़ी ॥
सचा तेरा हुकमु गुरमुखि जाणिआ ॥ गुरमती आपु गवाइ सचु पछाणिआ ॥ सचु तेरा दरबारु सबदु नीसाणिआ ॥ सचा सबदु वीचारि सचि समाणिआ ॥ मनमुख सदा कूड़िआर भरमि भुलाणिआ ॥ विसटा अंदरि वासु सादु न जाणिआ ॥ विणु नावै दुखु पाइ आवण जाणिआ ॥ नानक पारखु आपि जिनि खोटा खरा पछाणिआ ॥१३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 144) सलोकु मः १ ॥
सीहा बाजा चरगा कुहीआ एना खवाले घाह ॥ घाहु खानि तिना मासु खवाले एहि चलाए राह ॥ नदीआ विचि टिबे देखाले थली करे असगाह ॥ कीड़ा थापि देइ पातिसाही लसकर करे सुआह ॥ जेते जीअ जीवहि लै साहा जीवाले ता कि असाह ॥ नानक जिउ जिउ सचे भावै तिउ तिउ देइ गिराह ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 144) मः १ ॥
इकि मासहारी इकि त्रिणु खाहि ॥ इकना छतीह अम्रित पाहि ॥ इकि मिटीआ महि मिटीआ खाहि ॥ इकि पउण सुमारी पउण सुमारि ॥ इकि निरंकारी नाम आधारि ॥ जीवै दाता मरै न कोइ ॥ नानक मुठे जाहि नाही मनि सोइ ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 144) पउड़ी ॥
पूरे गुर की कार करमि कमाईऐ ॥ गुरमती आपु गवाइ नामु धिआईऐ ॥ दूजी कारै लगि जनमु गवाईऐ ॥ विणु नावै सभ विसु पैझै खाईऐ ॥ सचा सबदु सालाहि सचि समाईऐ ॥ विणु सतिगुरु सेवे नाही सुखि निवासु फिरि फिरि आईऐ ॥ दुनीआ खोटी रासि कूड़ु कमाईऐ ॥ नानक सचु खरा सालाहि पति सिउ जाईऐ ॥१४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 144) सलोकु मः १ ॥
तुधु भावै ता वावहि गावहि तुधु भावै जलि नावहि ॥ जा तुधु भावहि ता करहि बिभूता सिंङी नादु वजावहि ॥ जा तुधु भावै ता पड़हि कतेबा मुला सेख कहावहि ॥ जा तुधु भावै ता होवहि राजे रस कस बहुतु कमावहि ॥ जा तुधु भावै तेग वगावहि सिर मुंडी कटि जावहि ॥ जा तुधु भावै जाहि दिसंतरि सुणि गला घरि आवहि ॥ जा तुधु भावै नाइ रचावहि तुधु भाणे तूं भावहि ॥ नानकु एक कहै बेनंती होरि सगले कूड़ु कमावहि ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 145) मः १ ॥
जा तूं वडा सभि वडिआंईआ चंगै चंगा होई ॥ जा तूं सचा ता सभु को सचा कूड़ा कोइ न कोई ॥ आखणु वेखणु बोलणु चलणु जीवणु मरणा धातु ॥ हुकमु साजि हुकमै विचि रखै नानक सचा आपि ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 145) पउड़ी ॥
सतिगुरु सेवि निसंगु भरमु चुकाईऐ ॥ सतिगुरु आखै कार सु कार कमाईऐ ॥ सतिगुरु होइ दइआलु त नामु धिआईऐ ॥ लाहा भगति सु सारु गुरमुखि पाईऐ ॥ मनमुखि कूड़ु गुबारु कूड़ु कमाईऐ ॥ सचे दै दरि जाइ सचु चवांईऐ ॥ सचै अंदरि महलि सचि बुलाईऐ ॥ नानक सचु सदा सचिआरु सचि समाईऐ ॥१५॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 145) सलोकु मः १ ॥
कलि काती राजे कासाई धरमु पंख करि उडरिआ ॥ कूड़ु अमावस सचु चंद्रमा दीसै नाही कह चड़िआ ॥ हउ भालि विकुंनी होई ॥ आधेरै राहु न कोई ॥ विचि हउमै करि दुखु रोई ॥ कहु नानक किनि बिधि गति होई ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 145) मः ३ ॥
कलि कीरति परगटु चानणु संसारि ॥ गुरमुखि कोई उतरै पारि ॥ जिस नो नदरि करे तिसु देवै ॥ नानक गुरमुखि रतनु सो लेवै ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 145) पउड़ी ॥
भगता तै सैसारीआ जोड़ु कदे न आइआ ॥ करता आपि अभुलु है न भुलै किसै दा भुलाइआ ॥ भगत आपे मेलिअनु जिनी सचो सचु कमाइआ ॥ सैसारी आपि खुआइअनु जिनी कूड़ु बोलि बोलि बिखु खाइआ ॥ चलण सार न जाणनी कामु करोधु विसु वधाइआ ॥ भगत करनि हरि चाकरी जिनी अनदिनु नामु धिआइआ ॥ दासनि दास होइ कै जिनी विचहु आपु गवाइआ ॥ ओना खसमै कै दरि मुख उजले सचै सबदि सुहाइआ ॥१६॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 145) सलोकु मः १ ॥
सबाही सालाह जिनी धिआइआ इक मनि ॥ सेई पूरे साह वखतै उपरि लड़ि मुए ॥ दूजै बहुते राह मन कीआ मती खिंडीआ ॥ बहुतु पए असगाह गोते खाहि न निकलहि ॥ तीजै मुही गिराह भुख तिखा दुइ भउकीआ ॥ खाधा होइ सुआह भी खाणे सिउ दोसती ॥ चउथै आई ऊंघ अखी मीटि पवारि गइआ ॥ भी उठि रचिओनु वादु सै वर्हिआ की पिड़ बधी ॥ सभे वेला वखत सभि जे अठी भउ होइ ॥ नानक साहिबु मनि वसै सचा नावणु होइ ॥१॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 146) मः २ ॥
सेई पूरे साह जिनी पूरा पाइआ ॥ अठी वेपरवाह रहनि इकतै रंगि ॥ दरसनि रूपि अथाह विरले पाईअहि ॥ करमि पूरै पूरा गुरू पूरा जा का बोलु ॥ नानक पूरा जे करे घटै नाही तोलु ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 146) पउड़ी ॥
जा तूं ता किआ होरि मै सचु सुणाईऐ ॥ मुठी धंधै चोरि महलु न पाईऐ ॥ एनै चिति कठोरि सेव गवाईऐ ॥ जितु घटि सचु न पाइ सु भंनि घड़ाईऐ ॥ किउ करि पूरै वटि तोलि तुलाईऐ ॥ कोइ न आखै घटि हउमै जाईऐ ॥ लईअनि खरे परखि दरि बीनाईऐ ॥ सउदा इकतु हटि पूरै गुरि पाईऐ ॥१७॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 146) सलोक मः २ ॥
अठी पहरी अठ खंड नावा खंडु सरीरु ॥ तिसु विचि नउ निधि नामु एकु भालहि गुणी गहीरु ॥ करमवंती सालाहिआ नानक करि गुरु पीरु ॥ चउथै पहरि सबाह कै सुरतिआ उपजै चाउ ॥ तिना दरीआवा सिउ दोसती मनि मुखि सचा नाउ ॥ ओथै अम्रितु वंडीऐ करमी होइ पसाउ ॥ कंचन काइआ कसीऐ वंनी चड़ै चड़ाउ ॥ जे होवै नदरि सराफ की बहुड़ि न पाई ताउ ॥ सती पहरी सतु भला बहीऐ पड़िआ पासि ॥ ओथै पापु पुंनु बीचारीऐ कूड़ै घटै रासि ॥ ओथै खोटे सटीअहि खरे कीचहि साबासि ॥ बोलणु फादलु नानका दुखु सुखु खसमै पासि ॥१॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 146) मः २ ॥
पउणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु ॥ दिनसु राति दुइ दाई दाइआ खेलै सगल जगतु ॥ चंगिआईआ बुरिआईआ वाचे धरमु हदूरि ॥ करमी आपो आपणी के नेड़ै के दूरि ॥ जिनी नामु धिआइआ गए मसकति घालि ॥ नानक ते मुख उजले होर केती छुटी नालि ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 146) पउड़ी ॥
सचा भोजनु भाउ सतिगुरि दसिआ ॥ सचे ही पतीआइ सचि विगसिआ ॥ सचै कोटि गिरांइ निज घरि वसिआ ॥ सतिगुरि तुठै नाउ प्रेमि रहसिआ ॥ सचै दै दीबाणि कूड़ि न जाईऐ ॥ झूठो झूठु वखाणि सु महलु खुआईऐ ॥ सचै सबदि नीसाणि ठाक न पाईऐ ॥ सचु सुणि बुझि वखाणि महलि बुलाईऐ ॥१८॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 147) सलोकु मः १ ॥
पहिरा अगनि हिवै घरु बाधा भोजनु सारु कराई ॥ सगले दूख पाणी करि पीवा धरती हाक चलाई ॥ धरि ताराजी अंबरु तोली पिछै टंकु चड़ाई ॥ एवडु वधा मावा नाही सभसै नथि चलाई ॥ एता ताणु होवै मन अंदरि करी भि आखि कराई ॥ जेवडु साहिबु तेवड दाती दे दे करे रजाई ॥ नानक नदरि करे जिसु उपरि सचि नामि वडिआई ॥१॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 147) मः २ ॥
आखणु आखि न रजिआ सुनणि न रजे कंन ॥ अखी देखि न रजीआ गुण गाहक इक वंन ॥ भुखिआ भुख न उतरै गली भुख न जाइ ॥ नानक भुखा ता रजै जा गुण कहि गुणी समाइ ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 147) पउड़ी ॥
विणु सचे सभु कूड़ु कूड़ु कमाईऐ ॥ विणु सचे कूड़िआरु बंनि चलाईऐ ॥ विणु सचे तनु छारु छारु रलाईऐ ॥ विणु सचे सभ भुख जि पैझै खाईऐ ॥ विणु सचे दरबारु कूड़ि न पाईऐ ॥ कूड़ै लालचि लगि महलु खुआईऐ ॥ सभु जगु ठगिओ ठगि आईऐ जाईऐ ॥ तन महि त्रिसना अगि सबदि बुझाईऐ ॥१९॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 147) सलोक मः १ ॥
नानक गुरु संतोखु रुखु धरमु फुलु फल गिआनु ॥ रसि रसिआ हरिआ सदा पकै करमि धिआनि ॥ पति के साद खादा लहै दाना कै सिरि दानु ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 147) मः १ ॥
सुइने का बिरखु पत परवाला फुल जवेहर लाल ॥ तितु फल रतन लगहि मुखि भाखित हिरदै रिदै निहालु ॥ नानक करमु होवै मुखि मसतकि लिखिआ होवै लेखु ॥ अठिसठि तीरथ गुर की चरणी पूजै सदा विसेखु ॥ हंसु हेतु लोभु कोपु चारे नदीआ अगि ॥ पवहि दझहि नानका तरीऐ करमी लगि ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 147) पउड़ी ॥
जीवदिआ मरु मारि न पछोताईऐ ॥ झूठा इहु संसारु किनि समझाईऐ ॥ सचि न धरे पिआरु धंधै धाईऐ ॥ कालु बुरा खै कालु सिरि दुनीआईऐ ॥ हुकमी सिरि जंदारु मारे दाईऐ ॥ आपे देइ पिआरु मंनि वसाईऐ ॥ मुहतु न चसा विलमु भरीऐ पाईऐ ॥ गुर परसादी बुझि सचि समाईऐ ॥२०॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 147) सलोकु मः १ ॥
तुमी तुमा विसु अकु धतूरा निमु फलु ॥ मनि मुखि वसहि तिसु जिसु तूं चिति न आवही ॥ नानक कहीऐ किसु हंढनि करमा बाहरे ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 147) मः १ ॥
मति पंखेरू किरतु साथि कब उतम कब नीच ॥ कब चंदनि कब अकि डालि कब उची परीति ॥ नानक हुकमि चलाईऐ साहिब लगी रीति ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 148) पउड़ी ॥
केते कहहि वखाण कहि कहि जावणा ॥ वेद कहहि वखिआण अंतु न पावणा ॥ पड़िऐ नाही भेदु बुझिऐ पावणा ॥ खटु दरसन कै भेखि किसै सचि समावणा ॥ सचा पुरखु अलखु सबदि सुहावणा ॥ मंने नाउ बिसंख दरगह पावणा ॥ खालक कउ आदेसु ढाढी गावणा ॥ नानक जुगु जुगु एकु मंनि वसावणा ॥२१॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 148) सलोकु महला २ ॥
मंत्री होइ अठूहिआ नागी लगै जाइ ॥ आपण हथी आपणै दे कूचा आपे लाइ ॥ हुकमु पइआ धुरि खसम का अती हू धका खाइ ॥ गुरमुख सिउ मनमुखु अड़ै डुबै हकि निआइ ॥ दुहा सिरिआ आपे खसमु वेखै करि विउपाइ ॥ नानक एवै जाणीऐ सभ किछु तिसहि रजाइ ॥१॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 148) महला २ ॥
नानक परखे आप कउ ता पारखु जाणु ॥ रोगु दारू दोवै बुझै ता वैदु सुजाणु ॥ वाट न करई मामला जाणै मिहमाणु ॥ मूलु जाणि गला करे हाणि लाए हाणु ॥ लबि न चलई सचि रहै सो विसटु परवाणु ॥ सरु संधे आगास कउ किउ पहुचै बाणु ॥ अगै ओहु अगमु है वाहेदड़ु जाणु ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 148) पउड़ी ॥
नारी पुरख पिआरु प्रेमि सीगारीआ ॥ करनि भगति दिनु राति न रहनी वारीआ ॥ महला मंझि निवासु सबदि सवारीआ ॥ सचु कहनि अरदासि से वेचारीआ ॥ सोहनि खसमै पासि हुकमि सिधारीआ ॥ सखी कहनि अरदासि मनहु पिआरीआ ॥ बिनु नावै ध्रिगु वासु फिटु सु जीविआ ॥ सबदि सवारीआसु अम्रितु पीविआ ॥२२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 148) सलोकु मः १ ॥
मारू मीहि न त्रिपतिआ अगी लहै न भुख ॥ राजा राजि न त्रिपतिआ साइर भरे किसुक ॥ नानक सचे नाम की केती पुछा पुछ ॥१॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 148) महला २ ॥
निहफलं तसि जनमसि जावतु ब्रहम न बिंदते ॥ सागरं संसारसि गुर परसादी तरहि के ॥ करण कारण समरथु है कहु नानक बीचारि ॥ कारणु करते वसि है जिनि कल रखी धारि ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 148) पउड़ी ॥
खसमै कै दरबारि ढाढी वसिआ ॥ सचा खसमु कलाणि कमलु विगसिआ ॥ खसमहु पूरा पाइ मनहु रहसिआ ॥ दुसमन कढे मारि सजण सरसिआ ॥ सचा सतिगुरु सेवनि सचा मारगु दसिआ ॥ सचा सबदु बीचारि कालु विधउसिआ ॥ ढाढी कथे अकथु सबदि सवारिआ ॥ नानक गुण गहि रासि हरि जीउ मिले पिआरिआ ॥२३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 149) सलोकु मः १ ॥
खतिअहु जमे खते करनि त खतिआ विचि पाहि ॥ धोते मूलि न उतरहि जे सउ धोवण पाहि ॥ नानक बखसे बखसीअहि नाहि त पाही पाहि ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 149) मः १ ॥
नानक बोलणु झखणा दुख छडि मंगीअहि सुख ॥ सुखु दुखु दुइ दरि कपड़े पहिरहि जाइ मनुख ॥ जिथै बोलणि हारीऐ तिथै चंगी चुप ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 149) पउड़ी ॥
चारे कुंडा देखि अंदरु भालिआ ॥ सचै पुरखि अलखि सिरजि निहालिआ ॥ उझड़ि भुले राह गुरि वेखालिआ ॥ सतिगुर सचे वाहु सचु समालिआ ॥ पाइआ रतनु घराहु दीवा बालिआ ॥ सचै सबदि सलाहि सुखीए सच वालिआ ॥ निडरिआ डरु लगि गरबि सि गालिआ ॥ नावहु भुला जगु फिरै बेतालिआ ॥२४॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 149) सलोकु मः ३ ॥
भै विचि जमै भै मरै भी भउ मन महि होइ ॥ नानक भै विचि जे मरै सहिला आइआ सोइ ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 149) मः ३ ॥
भै विणु जीवै बहुतु बहुतु खुसीआ खुसी कमाइ ॥ नानक भै विणु जे मरै मुहि कालै उठि जाइ ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 149) पउड़ी ॥
सतिगुरु होइ दइआलु त सरधा पूरीऐ ॥ सतिगुरु होइ दइआलु न कबहूं झूरीऐ ॥ सतिगुरु होइ दइआलु ता दुखु न जाणीऐ ॥ सतिगुरु होइ दइआलु ता हरि रंगु माणीऐ ॥ सतिगुरु होइ दइआलु ता जम का डरु केहा ॥ सतिगुरु होइ दइआलु ता सद ही सुखु देहा ॥ सतिगुरु होइ दइआलु ता नव निधि पाईऐ ॥ सतिगुरु होइ दइआलु त सचि समाईऐ ॥२५॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 149) सलोकु मः १ ॥
सिरु खोहाइ पीअहि मलवाणी जूठा मंगि मंगि खाही ॥ फोलि फदीहति मुहि लैनि भड़ासा पाणी देखि सगाही ॥ भेडा वागी सिरु खोहाइनि भरीअनि हथ सुआही ॥ माऊ पीऊ किरतु गवाइनि टबर रोवनि धाही ॥ ओना पिंडु न पतलि किरिआ न दीवा मुए किथाऊ पाही ॥ अठसठि तीरथ देनि न ढोई ब्रहमण अंनु न खाही ॥ सदा कुचील रहहि दिनु राती मथै टिके नाही ॥ झुंडी पाइ बहनि निति मरणै दड़ि दीबाणि न जाही ॥ लकी कासे हथी फुमण अगो पिछी जाही ॥ ना ओइ जोगी ना ओइ जंगम ना ओइ काजी मुंला ॥ दयि विगोए फिरहि विगुते फिटा वतै गला ॥ जीआ मारि जीवाले सोई अवरु न कोई रखै ॥ दानहु तै इसनानहु वंजे भसु पई सिरि खुथै ॥ पाणी विचहु रतन उपंने मेरु कीआ माधाणी ॥ अठसठि तीरथ देवी थापे पुरबी लगै बाणी ॥ नाइ निवाजा नातै पूजा नावनि सदा सुजाणी ॥ मुइआ जीवदिआ गति होवै जां सिरि पाईऐ पाणी ॥ नानक सिरखुथे सैतानी एना गल न भाणी ॥ वुठै होइऐ होइ बिलावलु जीआ जुगति समाणी ॥ वुठै अंनु कमादु कपाहा सभसै पड़दा होवै ॥ वुठै घाहु चरहि निति सुरही सा धन दही विलोवै ॥ तितु घिइ होम जग सद पूजा पइऐ कारजु सोहै ॥ गुरू समुंदु नदी सभि सिखी नातै जितु वडिआई ॥ नानक जे सिरखुथे नावनि नाही ता सत चटे सिरि छाई ॥१॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 150) मः २ ॥
अगी पाला कि करे सूरज केही राति ॥ चंद अनेरा कि करे पउण पाणी किआ जाति ॥ धरती चीजी कि करे जिसु विचि सभु किछु होइ ॥ नानक ता पति जाणीऐ जा पति रखै सोइ ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 150) पउड़ी ॥
तुधु सचे सुबहानु सदा कलाणिआ ॥ तूं सचा दीबाणु होरि आवण जाणिआ ॥ सचु जि मंगहि दानु सि तुधै जेहिआ ॥ सचु तेरा फुरमानु सबदे सोहिआ ॥ मंनिऐ गिआनु धिआनु तुधै ते पाइआ ॥ करमि पवै नीसानु न चलै चलाइआ ॥ तूं सचा दातारु नित देवहि चड़हि सवाइआ ॥ नानकु मंगै दानु जो तुधु भाइआ ॥२६॥

(गुरू अंगद देव जी -- SGGS 150) सलोकु मः २ ॥
दीखिआ आखि बुझाइआ सिफती सचि समेउ ॥ तिन कउ किआ उपदेसीऐ जिन गुरु नानक देउ ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 150) मः १ ॥
आपि बुझाए सोई बूझै ॥ जिसु आपि सुझाए तिसु सभु किछु सूझै ॥ कहि कहि कथना माइआ लूझै ॥ हुकमी सगल करे आकार ॥ आपे जाणै सरब वीचार ॥ अखर नानक अखिओ आपि ॥ लहै भराति होवै जिसु दाति ॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 150) पउड़ी ॥
हउ ढाढी वेकारु कारै लाइआ ॥ राति दिहै कै वार धुरहु फुरमाइआ ॥ ढाढी सचै महलि खसमि बुलाइआ ॥ सची सिफति सालाह कपड़ा पाइआ ॥ सचा अम्रित नामु भोजनु आइआ ॥ गुरमती खाधा रजि तिनि सुखु पाइआ ॥ ढाढी करे पसाउ सबदु वजाइआ ॥ नानक सचु सालाहि पूरा पाइआ ॥२७॥ सुधु


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