राग बिहागड़ा - बाणी शब्द, Raag Bihagra - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 537) ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
रागु बिहागड़ा चउपदे महला ५ घरु २ ॥
दूतन संगरीआ ॥ भुइअंगनि बसरीआ ॥ अनिक उपरीआ ॥१॥

तउ मै हरि हरि करीआ ॥ तउ सुख सहजरीआ ॥१॥ रहाउ ॥

मिथन मोहरीआ ॥ अन कउ मेरीआ ॥ विचि घूमन घिरीआ ॥२॥

सगल बटरीआ ॥ बिरख इक तरीआ ॥ बहु बंधहि परीआ ॥३॥

थिरु साध सफरीआ ॥ जह कीरतनु हरीआ ॥ नानक सरनरीआ ॥४॥१॥

(गुरू तेग बहादुर जी -- SGGS 537) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु बिहागड़ा महला ९ ॥
हरि की गति नहि कोऊ जानै ॥ जोगी जती तपी पचि हारे अरु बहु लोग सिआने ॥१॥ रहाउ ॥

छिन महि राउ रंक कउ करई राउ रंक करि डारे ॥ रीते भरे भरे सखनावै यह ता को बिवहारे ॥१॥

अपनी माइआ आपि पसारी आपहि देखनहारा ॥ नाना रूपु धरे बहु रंगी सभ ते रहै निआरा ॥२॥

अगनत अपारु अलख निरंजन जिह सभ जगु भरमाइओ ॥ सगल भरम तजि नानक प्राणी चरनि ताहि चितु लाइओ ॥३॥१॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 537) रागु बिहागड़ा छंत महला ४ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि हरि नामु धिआईऐ मेरी जिंदुड़ीए गुरमुखि नामु अमोले राम ॥ हरि रसि बीधा हरि मनु पिआरा मनु हरि रसि नामि झकोले राम ॥ गुरमति मनु ठहराईऐ मेरी जिंदुड़ीए अनत न काहू डोले राम ॥ मन चिंदिअड़ा फलु पाइआ हरि प्रभु गुण नानक बाणी बोले राम ॥१॥

गुरमति मनि अम्रितु वुठड़ा मेरी जिंदुड़ीए मुखि अम्रित बैण अलाए राम ॥ अम्रित बाणी भगत जना की मेरी जिंदुड़ीए मनि सुणीऐ हरि लिव लाए राम ॥ चिरी विछुंना हरि प्रभु पाइआ गलि मिलिआ सहजि सुभाए राम ॥ जन नानक मनि अनदु भइआ है मेरी जिंदुड़ीए अनहत सबद वजाए राम ॥२॥

सखी सहेली मेरीआ मेरी जिंदुड़ीए कोई हरि प्रभु आणि मिलावै राम ॥ हउ मनु देवउ तिसु आपणा मेरी जिंदुड़ीए हरि प्रभ की हरि कथा सुणावै राम ॥ गुरमुखि सदा अराधि हरि मेरी जिंदुड़ीए मन चिंदिअड़ा फलु पावै राम ॥ नानक भजु हरि सरणागती मेरी जिंदुड़ीए वडभागी नामु धिआवै राम ॥३॥

करि किरपा प्रभ आइ मिलु मेरी जिंदुड़ीए गुरमति नामु परगासे राम ॥ हउ हरि बाझु उडीणीआ मेरी जिंदुड़ीए जिउ जल बिनु कमल उदासे राम ॥ गुरि पूरै मेलाइआ मेरी जिंदुड़ीए हरि सजणु हरि प्रभु पासे राम ॥ धनु धनु गुरू हरि दसिआ मेरी जिंदुड़ीए जन नानक नामि बिगासे राम ॥४॥१॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 538) रागु बिहागड़ा महला ४ ॥
अम्रितु हरि हरि नामु है मेरी जिंदुड़ीए अम्रितु गुरमति पाए राम ॥ हउमै माइआ बिखु है मेरी जिंदुड़ीए हरि अम्रिति बिखु लहि जाए राम ॥ मनु सुका हरिआ होइआ मेरी जिंदुड़ीए हरि हरि नामु धिआए राम ॥ हरि भाग वडे लिखि पाइआ मेरी जिंदुड़ीए जन नानक नामि समाए राम ॥१॥

हरि सेती मनु बेधिआ मेरी जिंदुड़ीए जिउ बालक लगि दुध खीरे राम ॥ हरि बिनु सांति न पाईऐ मेरी जिंदुड़ीए जिउ चात्रिकु जल बिनु टेरे राम ॥ सतिगुर सरणी जाइ पउ मेरी जिंदुड़ीए गुण दसे हरि प्रभ केरे राम ॥ जन नानक हरि मेलाइआ मेरी जिंदुड़ीए घरि वाजे सबद घणेरे राम ॥२॥

मनमुखि हउमै विछुड़े मेरी जिंदुड़ीए बिखु बाधे हउमै जाले राम ॥ जिउ पंखी कपोति आपु बन्हाइआ मेरी जिंदुड़ीए तिउ मनमुख सभि वसि काले राम ॥ जो मोहि माइआ चितु लाइदे मेरी जिंदुड़ीए से मनमुख मूड़ बिताले राम ॥ जन त्राहि त्राहि सरणागती मेरी जिंदुड़ीए गुर नानक हरि रखवाले राम ॥३॥

हरि जन हरि लिव उबरे मेरी जिंदुड़ीए धुरि भाग वडे हरि पाइआ राम ॥ हरि हरि नामु पोतु है मेरी जिंदुड़ीए गुर खेवट सबदि तराइआ राम ॥ हरि हरि पुरखु दइआलु है मेरी जिंदुड़ीए गुर सतिगुर मीठ लगाइआ राम ॥ करि किरपा सुणि बेनती हरि हरि जन नानक नामु धिआइआ राम ॥४॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 539) बिहागड़ा महला ४ ॥
जगि सुक्रितु कीरति नामु है मेरी जिंदुड़ीए हरि कीरति हरि मनि धारे राम ॥ हरि हरि नामु पवितु है मेरी जिंदुड़ीए जपि हरि हरि नामु उधारे राम ॥ सभ किलविख पाप दुख कटिआ मेरी जिंदुड़ीए मलु गुरमुखि नामि उतारे राम ॥ वड पुंनी हरि धिआइआ जन नानक हम मूरख मुगध निसतारे राम ॥१॥

जो हरि नामु धिआइदे मेरी जिंदुड़ीए तिना पंचे वसगति आए राम ॥ अंतरि नव निधि नामु है मेरी जिंदुड़ीए गुरु सतिगुरु अलखु लखाए राम ॥ गुरि आसा मनसा पूरीआ मेरी जिंदुड़ीए हरि मिलिआ भुख सभ जाए राम ॥ धुरि मसतकि हरि प्रभि लिखिआ मेरी जिंदुड़ीए जन नानक हरि गुण गाए राम ॥२॥

हम पापी बलवंचीआ मेरी जिंदुड़ीए परद्रोही ठग माइआ राम ॥ वडभागी गुरु पाइआ मेरी जिंदुड़ीए गुरि पूरै गति मिति पाइआ राम ॥ गुरि अम्रितु हरि मुखि चोइआ मेरी जिंदुड़ीए फिरि मरदा बहुड़ि जीवाइआ राम ॥ जन नानक सतिगुर जो मिले मेरी जिंदुड़ीए तिन के सभ दुख गवाइआ राम ॥३॥

अति ऊतमु हरि नामु है मेरी जिंदुड़ीए जितु जपिऐ पाप गवाते राम ॥ पतित पवित्र गुरि हरि कीए मेरी जिंदुड़ीए चहु कुंडी चहु जुगि जाते राम ॥ हउमै मैलु सभ उतरी मेरी जिंदुड़ीए हरि अम्रिति हरि सरि नाते राम ॥ अपराधी पापी उधरे मेरी जिंदुड़ीए जन नानक खिनु हरि राते राम ॥४॥३॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 539) बिहागड़ा महला ४ ॥
हउ बलिहारी तिन्ह कउ मेरी जिंदुड़ीए जिन्ह हरि हरि नामु अधारो राम ॥ गुरि सतिगुरि नामु द्रिड़ाइआ मेरी जिंदुड़ीए बिखु भउजलु तारणहारो राम ॥ जिन इक मनि हरि धिआइआ मेरी जिंदुड़ीए तिन संत जना जैकारो राम ॥ नानक हरि जपि सुखु पाइआ मेरी जिंदुड़ीए सभि दूख निवारणहारो राम ॥१॥

सा रसना धनु धंनु है मेरी जिंदुड़ीए गुण गावै हरि प्रभ केरे राम ॥ ते स्रवन भले सोभनीक हहि मेरी जिंदुड़ीए हरि कीरतनु सुणहि हरि तेरे राम ॥ सो सीसु भला पवित्र पावनु है मेरी जिंदुड़ीए जो जाइ लगै गुर पैरे राम ॥ गुर विटहु नानकु वारिआ मेरी जिंदुड़ीए जिनि हरि हरि नामु चितेरे राम ॥२॥

ते नेत्र भले परवाणु हहि मेरी जिंदुड़ीए जो साधू सतिगुरु देखहि राम ॥ ते हसत पुनीत पवित्र हहि मेरी जिंदुड़ीए जो हरि जसु हरि हरि लेखहि राम ॥ तिसु जन के पग नित पूजीअहि मेरी जिंदुड़ीए जो मारगि धरम चलेसहि राम ॥ नानकु तिन विटहु वारिआ मेरी जिंदुड़ीए हरि सुणि हरि नामु मनेसहि राम ॥३॥

धरति पातालु आकासु है मेरी जिंदुड़ीए सभ हरि हरि नामु धिआवै राम ॥ पउणु पाणी बैसंतरो मेरी जिंदुड़ीए नित हरि हरि हरि जसु गावै राम ॥ वणु त्रिणु सभु आकारु है मेरी जिंदुड़ीए मुखि हरि हरि नामु धिआवै राम ॥ नानक ते हरि दरि पैन्हाइआ मेरी जिंदुड़ीए जो गुरमुखि भगति मनु लावै राम ॥४॥४॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 540) बिहागड़ा महला ४ ॥
जिन हरि हरि नामु न चेतिओ मेरी जिंदुड़ीए ते मनमुख मूड़ इआणे राम ॥ जो मोहि माइआ चितु लाइदे मेरी जिंदुड़ीए से अंति गए पछुताणे राम ॥ हरि दरगह ढोई ना लहन्हि मेरी जिंदुड़ीए जो मनमुख पापि लुभाणे राम ॥ जन नानक गुर मिलि उबरे मेरी जिंदुड़ीए हरि जपि हरि नामि समाणे राम ॥१॥

सभि जाइ मिलहु सतिगुरू कउ मेरी जिंदुड़ीए जो हरि हरि नामु द्रिड़ावै राम ॥ हरि जपदिआ खिनु ढिल न कीजई मेरी जिंदुड़ीए मतु कि जापै साहु आवै कि न आवै राम ॥ सा वेला सो मूरतु सा घड़ी सो मुहतु सफलु है मेरी जिंदुड़ीए जितु हरि मेरा चिति आवै राम ॥ जन नानक नामु धिआइआ मेरी जिंदुड़ीए जमकंकरु नेड़ि न आवै राम ॥२॥

हरि वेखै सुणै नित सभु किछु मेरी जिंदुड़ीए सो डरै जिनि पाप कमते राम ॥ जिसु अंतरु हिरदा सुधु है मेरी जिंदुड़ीए तिनि जनि सभि डर सुटि घते राम ॥ हरि निरभउ नामि पतीजिआ मेरी जिंदुड़ीए सभि झख मारनु दुसट कुपते राम ॥ गुरु पूरा नानकि सेविआ मेरी जिंदुड़ीए जिनि पैरी आणि सभि घते राम ॥३॥

सो ऐसा हरि नित सेवीऐ मेरी जिंदुड़ीए जो सभ दू साहिबु वडा राम ॥ जिन्ही इक मनि इकु अराधिआ मेरी जिंदुड़ीए तिना नाही किसै दी किछु चडा राम ॥ गुर सेविऐ हरि महलु पाइआ मेरी जिंदुड़ीए झख मारनु सभि निंदक घंडा राम ॥ जन नानक नामु धिआइआ मेरी जिंदुड़ीए धुरि मसतकि हरि लिखि छडा राम ॥४॥५॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 541) बिहागड़ा महला ४ ॥
सभि जीअ तेरे तूं वरतदा मेरे हरि प्रभ तूं जाणहि जो जीइ कमाईऐ राम ॥ हरि अंतरि बाहरि नालि है मेरी जिंदुड़ीए सभ वेखै मनि मुकराईऐ राम ॥ मनमुखा नो हरि दूरि है मेरी जिंदुड़ीए सभ बिरथी घाल गवाईऐ राम ॥ जन नानक गुरमुखि धिआइआ मेरी जिंदुड़ीए हरि हाजरु नदरी आईऐ राम ॥१॥

से भगत से सेवक मेरी जिंदुड़ीए जो प्रभ मेरे मनि भाणे राम ॥ से हरि दरगह पैनाइआ मेरी जिंदुड़ीए अहिनिसि साचि समाणे राम ॥ तिन कै संगि मलु उतरै मेरी जिंदुड़ीए रंगि राते नदरि नीसाणे राम ॥ नानक की प्रभ बेनती मेरी जिंदुड़ीए मिलि साधू संगि अघाणे राम ॥२॥

हे रसना जपि गोबिंदो मेरी जिंदुड़ीए जपि हरि हरि त्रिसना जाए राम ॥ जिसु दइआ करे मेरा पारब्रहमु मेरी जिंदुड़ीए तिसु मनि नामु वसाए राम ॥ जिसु भेटे पूरा सतिगुरू मेरी जिंदुड़ीए सो हरि धनु निधि पाए राम ॥ वडभागी संगति मिलै मेरी जिंदुड़ीए नानक हरि गुण गाए राम ॥३॥

थान थनंतरि रवि रहिआ मेरी जिंदुड़ीए पारब्रहमु प्रभु दाता राम ॥ ता का अंतु न पाईऐ मेरी जिंदुड़ीए पूरन पुरखु बिधाता राम ॥ सरब जीआ प्रतिपालदा मेरी जिंदुड़ीए जिउ बालक पित माता राम ॥ सहस सिआणप नह मिलै मेरी जिंदुड़ीए जन नानक गुरमुखि जाता राम ॥४॥६॥ छका १ ॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 541) बिहागड़ा महला ५ छंत घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि का एकु अच्मभउ देखिआ मेरे लाल जीउ जो करे सु धरम निआए राम ॥ हरि रंगु अखाड़ा पाइओनु मेरे लाल जीउ आवणु जाणु सबाए राम ॥ आवणु त जाणा तिनहि कीआ जिनि मेदनि सिरजीआ ॥ इकना मेलि सतिगुरु महलि बुलाए इकि भरमि भूले फिरदिआ ॥ अंतु तेरा तूंहै जाणहि तूं सभ महि रहिआ समाए ॥ सचु कहै नानकु सुणहु संतहु हरि वरतै धरम निआए ॥१॥

आवहु मिलहु सहेलीहो मेरे लाल जीउ हरि हरि नामु अराधे राम ॥ करि सेवहु पूरा सतिगुरू मेरे लाल जीउ जम का मारगु साधे राम ॥ मारगु बिखड़ा साधि गुरमुखि हरि दरगह सोभा पाईऐ ॥ जिन कउ बिधातै धुरहु लिखिआ तिन्हा रैणि दिनु लिव लाईऐ ॥ हउमै ममता मोहु छुटा जा संगि मिलिआ साधे ॥ जनु कहै नानकु मुकतु होआ हरि हरि नामु अराधे ॥२॥

कर जोड़िहु संत इकत्र होइ मेरे लाल जीउ अबिनासी पुरखु पूजेहा राम ॥ बहु बिधि पूजा खोजीआ मेरे लाल जीउ इहु मनु तनु सभु अरपेहा राम ॥ मनु तनु धनु सभु प्रभू केरा किआ को पूज चड़ावए ॥ जिसु होइ क्रिपालु दइआलु सुआमी सो प्रभ अंकि समावए ॥ भागु मसतकि होइ जिस कै तिसु गुर नालि सनेहा ॥ जनु कहै नानकु मिलि साधसंगति हरि हरि नामु पूजेहा ॥३॥

दह दिस खोजत हम फिरे मेरे लाल जीउ हरि पाइअड़ा घरि आए राम ॥ हरि मंदरु हरि जीउ साजिआ मेरे लाल जीउ हरि तिसु महि रहिआ समाए राम ॥ सरबे समाणा आपि सुआमी गुरमुखि परगटु होइआ ॥ मिटिआ अधेरा दूखु नाठा अमिउ हरि रसु चोइआ ॥ जहा देखा तहा सुआमी पारब्रहमु सभ ठाए ॥ जनु कहै नानकु सतिगुरि मिलाइआ हरि पाइअड़ा घरि आए ॥४॥१॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 542) रागु बिहागड़ा महला ५ ॥
अति प्रीतम मन मोहना घट सोहना प्रान अधारा राम ॥ सुंदर सोभा लाल गोपाल दइआल की अपर अपारा राम ॥ गोपाल दइआल गोबिंद लालन मिलहु कंत निमाणीआ ॥ नैन तरसन दरस परसन नह नीद रैणि विहाणीआ ॥ गिआन अंजन नाम बिंजन भए सगल सीगारा ॥ नानकु पइअंपै संत ज्मपै मेलि कंतु हमारा ॥१॥

लाख उलाहने मोहि हरि जब लगु नह मिलै राम ॥ मिलन कउ करउ उपाव किछु हमारा नह चलै राम ॥ चल चित बित अनित प्रिअ बिनु कवन बिधी न धीजीऐ ॥ खान पान सीगार बिरथे हरि कंत बिनु किउ जीजीऐ ॥ आसा पिआसी रैनि दिनीअरु रहि न सकीऐ इकु तिलै ॥ नानकु पइअ्मपै संत दासी तउ प्रसादि मेरा पिरु मिलै ॥२॥

सेज एक प्रिउ संगि दरसु न पाईऐ राम ॥ अवगन मोहि अनेक कत महलि बुलाईऐ राम ॥ निरगुनि निमाणी अनाथि बिनवै मिलहु प्रभ किरपा निधे ॥ भ्रम भीति खोईऐ सहजि सोईऐ प्रभ पलक पेखत नव निधे ॥ ग्रिहि लालु आवै महलु पावै मिलि संगि मंगलु गाईऐ ॥ नानकु पइअ्मपै संत सरणी मोहि दरसु दिखाईऐ ॥३॥

संतन कै परसादि हरि हरि पाइआ राम ॥ इछ पुंनी मनि सांति तपति बुझाइआ राम ॥ सफला सु दिनस रैणे सुहावी अनद मंगल रसु घना ॥ प्रगटे गुपाल गोबिंद लालन कवन रसना गुण भना ॥ भ्रम लोभ मोह बिकार थाके मिलि सखी मंगलु गाइआ ॥ नानकु पइअ्मपै संत ज्मपै जिनि हरि हरि संजोगि मिलाइआ ॥४॥२॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 543) बिहागड़ा महला ५ ॥
करि किरपा गुर पारब्रहम पूरे अनदिनु नामु वखाणा राम ॥ अम्रित बाणी उचरा हरि जसु मिठा लागै तेरा भाणा राम ॥ करि दइआ मइआ गोपाल गोबिंद कोइ नाही तुझ बिना ॥ समरथ अगथ अपार पूरन जीउ तनु धनु तुम्ह मना ॥ मूरख मुगध अनाथ चंचल बलहीन नीच अजाणा ॥ बिनवंति नानक सरणि तेरी रखि लेहु आवण जाणा ॥१॥

साधह सरणी पाईऐ हरि जीउ गुण गावह हरि नीता राम ॥ धूरि भगतन की मनि तनि लगउ हरि जीउ सभ पतित पुनीता राम ॥ पतिता पुनीता होहि तिन्ह संगि जिन्ह बिधाता पाइआ ॥ नाम राते जीअ दाते नित देहि चड़हि सवाइआ ॥ रिधि सिधि नव निधि हरि जपि जिनी आतमु जीता ॥ बिनवंति नानकु वडभागि पाईअहि साध साजन मीता ॥२॥

जिनी सचु वणंजिआ हरि जीउ से पूरे साहा राम ॥ बहुतु खजाना तिंन पहि हरि जीउ हरि कीरतनु लाहा राम ॥ कामु क्रोधु न लोभु बिआपै जो जन प्रभ सिउ रातिआ ॥ एकु जानहि एकु मानहि राम कै रंगि मातिआ ॥ लगि संत चरणी पड़े सरणी मनि तिना ओमाहा ॥ बिनवंति नानकु जिन नामु पलै सेई सचे साहा ॥३॥

नानक सोई सिमरीऐ हरि जीउ जा की कल धारी राम ॥ गुरमुखि मनहु न वीसरै हरि जीउ करता पुरखु मुरारी राम ॥ दूखु रोगु न भउ बिआपै जिन्ही हरि हरि धिआइआ ॥ संत प्रसादि तरे भवजलु पूरबि लिखिआ पाइआ ॥ वजी वधाई मनि सांति आई मिलिआ पुरखु अपारी ॥ बिनवंति नानकु सिमरि हरि हरि इछ पुंनी हमारी ॥४॥३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 544) बिहागड़ा महला ५ घरु २
ੴ सति नामु गुरप्रसादि ॥
वधु सुखु रैनड़ीए प्रिअ प्रेमु लगा ॥ घटु दुख नीदड़ीए परसउ सदा पगा ॥ पग धूरि बांछउ सदा जाचउ नाम रसि बैरागनी ॥ प्रिअ रंगि राती सहज माती महा दुरमति तिआगनी ॥ गहि भुजा लीन्ही प्रेम भीनी मिलनु प्रीतम सच मगा ॥ बिनवंति नानक धारि किरपा रहउ चरणह संगि लगा ॥१॥

मेरी सखी सहेलड़ीहो प्रभ कै चरणि लगह ॥ मनि प्रिअ प्रेमु घणा हरि की भगति मंगह ॥ हरि भगति पाईऐ प्रभु धिआईऐ जाइ मिलीऐ हरि जना ॥ मानु मोहु बिकारु तजीऐ अरपि तनु धनु इहु मना ॥ बड पुरख पूरन गुण स्मपूरन भ्रम भीति हरि हरि मिलि भगह ॥ बिनवंति नानक सुणि मंत्रु सखीए हरि नामु नित नित नित जपह ॥२॥

हरि नारि सुहागणे सभि रंग माणे ॥ रांड न बैसई प्रभ पुरख चिराणे ॥ नह दूख पावै प्रभ धिआवै धंनि ते बडभागीआ ॥ सुख सहजि सोवहि किलबिख खोवहि नाम रसि रंगि जागीआ ॥ मिलि प्रेम रहणा हरि नामु गहणा प्रिअ बचन मीठे भाणे ॥ बिनवंति नानक मन इछ पाई हरि मिले पुरख चिराणे ॥३॥

तितु ग्रिहि सोहिलड़े कोड अनंदा ॥ मनि तनि रवि रहिआ प्रभ परमानंदा ॥ हरि कंत अनंत दइआल स्रीधर गोबिंद पतित उधारणो ॥ प्रभि क्रिपा धारी हरि मुरारी भै सिंधु सागर तारणो ॥ जो सरणि आवै तिसु कंठि लावै इहु बिरदु सुआमी संदा ॥ बिनवंति नानक हरि कंतु मिलिआ सदा केल करंदा ॥४॥१॥४॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 544) बिहागड़ा महला ५ ॥
हरि चरण सरोवर तह करहु निवासु मना ॥ करि मजनु हरि सरे सभि किलबिख नासु मना ॥ करि सदा मजनु गोबिंद सजनु दुख अंधेरा नासे ॥ जनम मरणु न होइ तिस कउ कटै जम के फासे ॥ मिलु साधसंगे नाम रंगे तहा पूरन आसो ॥ बिनवंति नानक धारि किरपा हरि चरण कमल निवासो ॥१॥

तह अनद बिनोद सदा अनहद झुणकारो राम ॥ मिलि गावहि संत जना प्रभ का जैकारो राम ॥ मिलि संत गावहि खसम भावहि हरि प्रेम रस रंगि भिंनीआ ॥ हरि लाभु पाइआ आपु मिटाइआ मिले चिरी विछुंनिआ ॥ गहि भुजा लीने दइआ कीन्हे प्रभ एक अगम अपारो ॥ बिनवंति नानक सदा निरमल सचु सबदु रुण झुणकारो ॥२॥

सुणि वडभागीआ हरि अम्रित बाणी राम ॥ जिन कउ करमि लिखी तिसु रिदै समाणी राम ॥ अकथ कहाणी तिनी जाणी जिसु आपि प्रभु किरपा करे ॥ अमरु थीआ फिरि न मूआ कलि कलेसा दुख हरे ॥ हरि सरणि पाई तजि न जाई प्रभ प्रीति मनि तनि भाणी ॥ बिनवंति नानक सदा गाईऐ पवित्र अम्रित बाणी ॥३॥

मन तन गलतु भए किछु कहणु न जाई राम ॥ जिस ते उपजिअड़ा तिनि लीआ समाई राम ॥ मिलि ब्रहम जोती ओति पोती उदकु उदकि समाइआ ॥ जलि थलि महीअलि एकु रविआ नह दूजा द्रिसटाइआ ॥ बणि त्रिणि त्रिभवणि पूरि पूरन कीमति कहणु न जाई ॥ बिनवंति नानक आपि जाणै जिनि एह बणत बणाई ॥४॥२॥५॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 545) बिहागड़ा महला ५ ॥
खोजत संत फिरहि प्रभ प्राण अधारे राम ॥ ताणु तनु खीन भइआ बिनु मिलत पिआरे राम ॥ प्रभ मिलहु पिआरे मइआ धारे करि दइआ लड़ि लाइ लीजीऐ ॥ देहि नामु अपना जपउ सुआमी हरि दरस पेखे जीजीऐ ॥ समरथ पूरन सदा निहचल ऊच अगम अपारे ॥ बिनवंति नानक धारि किरपा मिलहु प्रान पिआरे ॥१॥

जप तप बरत कीने पेखन कउ चरणा राम ॥ तपति न कतहि बुझै बिनु सुआमी सरणा राम ॥ प्रभ सरणि तेरी काटि बेरी संसारु सागरु तारीऐ ॥ अनाथ निरगुनि कछु न जाना मेरा गुणु अउगणु न बीचारीऐ ॥ दीन दइआल गोपाल प्रीतम समरथ कारण करणा ॥ नानक चात्रिक हरि बूंद मागै जपि जीवा हरि हरि चरणा ॥२॥

अमिअ सरोवरो पीउ हरि हरि नामा राम ॥ संतह संगि मिलै जपि पूरन कामा राम ॥ सभ काम पूरन दुख बिदीरन हरि निमख मनहु न बीसरै ॥ आनंद अनदिनु सदा साचा सरब गुण जगदीसरै ॥ अगणत ऊच अपार ठाकुर अगम जा को धामा ॥ बिनवंति नानक मेरी इछ पूरन मिले स्रीरंग रामा ॥३॥

कई कोटिक जग फला सुणि गावनहारे राम ॥ हरि हरि नामु जपत कुल सगले तारे राम ॥ हरि नामु जपत सोहंत प्राणी ता की महिमा कित गना ॥ हरि बिसरु नाही प्रान पिआरे चितवंति दरसनु सद मना ॥ सुभ दिवस आए गहि कंठि लाए प्रभ ऊच अगम अपारे ॥ बिनवंति नानक सफलु सभु किछु प्रभ मिले अति पिआरे ॥४॥३॥६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 546) बिहागड़ा महला ५ छंत ॥
अन काए रातड़िआ वाट दुहेली राम ॥ पाप कमावदिआ तेरा कोइ न बेली राम ॥ कोए न बेली होइ तेरा सदा पछोतावहे ॥ गुन गुपाल न जपहि रसना फिरि कदहु से दिह आवहे ॥ तरवर विछुंने नह पात जुड़ते जम मगि गउनु इकेली ॥ बिनवंत नानक बिनु नाम हरि के सदा फिरत दुहेली ॥१॥

तूं वलवंच लूकि करहि सभ जाणै जाणी राम ॥ लेखा धरम भइआ तिल पीड़े घाणी राम ॥ किरत कमाणे दुख सहु पराणी अनिक जोनि भ्रमाइआ ॥ महा मोहनी संगि राता रतन जनमु गवाइआ ॥ इकसु हरि के नाम बाझहु आन काज सिआणी ॥ बिनवंत नानक लेखु लिखिआ भरमि मोहि लुभाणी ॥२॥

बीचु न कोइ करे अक्रितघणु विछुड़ि पइआ ॥ आए खरे कठिन जमकंकरि पकड़ि लइआ ॥ पकड़े चलाइआ अपणा कमाइआ महा मोहनी रातिआ ॥ गुन गोविंद गुरमुखि न जपिआ तपत थम्ह गलि लातिआ ॥ काम क्रोधि अहंकारि मूठा खोइ गिआनु पछुतापिआ ॥ बिनवंत नानक संजोगि भूला हरि जापु रसन न जापिआ ॥३॥

तुझ बिनु को नाही प्रभ राखनहारा राम ॥ पतित उधारण हरि बिरदु तुमारा राम ॥ पतित उधारन सरनि सुआमी क्रिपा निधि दइआला ॥ अंध कूप ते उधरु करते सगल घट प्रतिपाला ॥ सरनि तेरी कटि महा बेड़ी इकु नामु देहि अधारा ॥ बिनवंत नानक कर देइ राखहु गोबिंद दीन दइआरा ॥४॥

सो दिनु सफलु गणिआ हरि प्रभू मिलाइआ राम ॥ सभि सुख परगटिआ दुख दूरि पराइआ राम ॥ सुख सहज अनद बिनोद सद ही गुन गुपाल नित गाईऐ ॥ भजु साधसंगे मिले रंगे बहुड़ि जोनि न धाईऐ ॥ गहि कंठि लाए सहजि सुभाए आदि अंकुरु आइआ ॥ बिनवंत नानक आपि मिलिआ बहुड़ि कतहू न जाइआ ॥५॥४॥७॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 547) बिहागड़ा महला ५ छंत ॥
सुनहु बेनंतीआ सुआमी मेरे राम ॥ कोटि अप्राध भरे भी तेरे चेरे राम ॥ दुख हरन किरपा करन मोहन कलि कलेसह भंजना ॥ सरनि तेरी रखि लेहु मेरी सरब मै निरंजना ॥ सुनत पेखत संगि सभ कै प्रभ नेरहू ते नेरे ॥ अरदासि नानक सुनि सुआमी रखि लेहु घर के चेरे ॥१॥

तू समरथु सदा हम दीन भेखारी राम ॥ माइआ मोहि मगनु कढि लेहु मुरारी राम ॥ लोभि मोहि बिकारि बाधिओ अनिक दोख कमावने ॥ अलिपत बंधन रहत करता कीआ अपना पावने ॥ करि अनुग्रहु पतित पावन बहु जोनि भ्रमते हारी ॥ बिनवंति नानक दासु हरि का प्रभ जीअ प्रान अधारी ॥२॥

तू समरथु वडा मेरी मति थोरी राम ॥ पालहि अकिरतघना पूरन द्रिसटि तेरी राम ॥ अगाधि बोधि अपार करते मोहि नीचु कछू न जाना ॥ रतनु तिआगि संग्रहन कउडी पसू नीचु इआना ॥ तिआगि चलती महा चंचलि दोख करि करि जोरी ॥ नानक सरनि समरथ सुआमी पैज राखहु मोरी ॥३॥

जा ते वीछुड़िआ तिनि आपि मिलाइआ राम ॥ साधू संगमे हरि गुण गाइआ राम ॥ गुण गाइ गोविद सदा नीके कलिआण मै परगट भए ॥ सेजा सुहावी संगि प्रभ कै आपणे प्रभ करि लए ॥ छोडि चिंत अचिंत होए बहुड़ि दूखु न पाइआ ॥ नानक दरसनु पेखि जीवे गोविंद गुण निधि गाइआ ॥४॥५॥८॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 547) बिहागड़ा महला ५ छंत ॥
बोलि सुधरमीड़िआ मोनि कत धारी राम ॥ तू नेत्री देखि चलिआ माइआ बिउहारी राम ॥ संगि तेरै कछु न चालै बिना गोबिंद नामा ॥ देस वेस सुवरन रूपा सगल ऊणे कामा ॥ पुत्र कलत्र न संगि सोभा हसत घोरि विकारी ॥ बिनवंत नानक बिनु साधसंगम सभ मिथिआ संसारी ॥१॥

राजन किउ सोइआ तू नीद भरे जागत कत नाही राम ॥ माइआ झूठु रुदनु केते बिललाही राम ॥ बिललाहि केते महा मोहन बिनु नाम हरि के सुखु नही ॥ सहस सिआणप उपाव थाके जह भावत तह जाही ॥ आदि अंते मधि पूरन सरबत्र घटि घटि आही ॥ बिनवंत नानक जिन साधसंगमु से पति सेती घरि जाही ॥२॥

नरपति जाणि ग्रहिओ सेवक सिआणे राम ॥ सरपर वीछुड़णा मोहे पछुताणे राम ॥ हरिचंदउरी देखि भूला कहा असथिति पाईऐ ॥ बिनु नाम हरि के आन रचना अहिला जनमु गवाईऐ ॥ हउ हउ करत न त्रिसन बूझै नह कांम पूरन गिआने ॥ बिनवंति नानक बिनु नाम हरि के केतिआ पछुताने ॥३॥

धारि अनुग्रहो अपना करि लीना राम ॥ भुजा गहि काढि लीओ साधू संगु दीना राम ॥ साधसंगमि हरि अराधे सगल कलमल दुख जले ॥ महा धरम सुदान किरिआ संगि तेरै से चले ॥ रसना अराधै एकु सुआमी हरि नामि मनु तनु भीना ॥ नानक जिस नो हरि मिलाए सो सरब गुण परबीना ॥४॥६॥९॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 548) बिहागड़े की वार महला ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
(गुरू अमरदास जी -- SGGS 548) सलोक मः ३ ॥
गुर सेवा ते सुखु पाईऐ होर थै सुखु न भालि ॥ गुर कै सबदि मनु भेदीऐ सदा वसै हरि नालि ॥ नानक नामु तिना कउ मिलै जिन हरि वेखै नदरि निहालि ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 548) मः ३ ॥
सिफति खजाना बखस है जिसु बखसै सो खरचै खाइ ॥ सतिगुर बिनु हथि न आवई सभ थके करम कमाइ ॥ नानक मनमुखु जगतु धनहीणु है अगै भुखा कि खाइ ॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 548) पउड़ी ॥
सभ तेरी तू सभस दा सभ तुधु उपाइआ ॥ सभना विचि तू वरतदा तू सभनी धिआइआ ॥ तिस दी तू भगति थाइ पाइहि जो तुधु मनि भाइआ ॥ जो हरि प्रभ भावै सो थीऐ सभि करनि तेरा कराइआ ॥ सलाहिहु हरि सभना ते वडा जो संत जनां की पैज रखदा आइआ ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 548) सलोक मः ३ ॥
नानक गिआनी जगु जीता जगि जीता सभु कोइ ॥ नामे कारज सिधि है सहजे होइ सु होइ ॥ गुरमति मति अचलु है चलाइ न सकै कोइ ॥ भगता का हरि अंगीकारु करे कारजु सुहावा होइ ॥ मनमुख मूलहु भुलाइअनु विचि लबु लोभु अहंकारु ॥ झगड़ा करदिआ अनदिनु गुदरै सबदि न करै वीचारु ॥ सुधि मति करतै हिरि लई बोलनि सभु विकारु ॥ दितै कितै न संतोखीअनि अंतरि त्रिसना बहुतु अग्यानु अंधारु ॥ नानक मनमुखा नालहु तुटीआ भली जिना माइआ मोहि पिआरु ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 549) मः ३ ॥
तिन्ह भउ संसा किआ करे जिन सतिगुरु सिरि करतारु ॥ धुरि तिन की पैज रखदा आपे रखणहारु ॥ मिलि प्रीतम सुखु पाइआ सचै सबदि वीचारि ॥ नानक सुखदाता सेविआ आपे परखणहारु ॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 549) पउड़ी ॥
जीअ जंत सभि तेरिआ तू सभना रासि ॥ जिस नो तू देहि तिसु सभु किछु मिलै कोई होरु सरीकु नाही तुधु पासि ॥ तू इको दाता सभस दा हरि पहि अरदासि ॥ जिस दी तुधु भावै तिस दी तू मंनि लैहि सो जनु साबासि ॥ सभु तेरा चोजु वरतदा दुखु सुखु तुधु पासि ॥२॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 549) सलोक मः ३ ॥
गुरमुखि सचै भावदे दरि सचै सचिआर ॥ साजन मनि आनंदु है गुर का सबदु वीचार ॥ अंतरि सबदु वसाइआ दुखु कटिआ चानणु कीआ करतारि ॥ नानक रखणहारा रखसी आपणी किरपा धारि ॥१॥

(गुरू अमरदास जी -- SGGS 549) मः ३ ॥
गुर की सेवा चाकरी भै रचि कार कमाइ ॥ जेहा सेवै तेहो होवै जे चलै तिसै रजाइ ॥ नानक सभु किछु आपि है अवरु न दूजी जाइ ॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 549) पउड़ी ॥
तेरी वडिआई तूहै जाणदा तुधु जेवडु अवरु न कोई ॥ तुधु जेवडु होरु सरीकु होवै ता आखीऐ तुधु जेवडु तूहै होई ॥ जिनि तू सेविआ तिनि सुखु पाइआ होरु तिस दी रीस करे किआ कोई ॥ तू भंनण घड़ण समरथु दातारु हहि तुधु अगै मंगण नो हथ जोड़ि खली सभ होई ॥ तुधु जेवडु दातारु मै कोई नदरि न आवई तुधु सभसै नो दानु दिता खंडी वरभंडी पाताली पुरई सभ लोई ॥३॥


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