राग बैराड़ी - बाणी शब्द, Raag Bairarhi - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


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(गुरू रामदास जी -- SGGS 719) रागु बैराड़ी महला ४ घरु १ दुपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सुनि मन अकथ कथा हरि नाम ॥ रिधि बुधि सिधि सुख पावहि भजु गुरमति हरि राम राम ॥१॥ रहाउ ॥

नाना खिआन पुरान जसु ऊतम खट दरसन गावहि राम ॥ संकर क्रोड़ि तेतीस धिआइओ नही जानिओ हरि मरमाम ॥१॥

सुरि नर गण गंध्रब जसु गावहि सभ गावत जेत उपाम ॥ नानक क्रिपा करी हरि जिन कउ ते संत भले हरि राम ॥२॥१॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 719) बैराड़ी महला ४ ॥
मन मिलि संत जना जसु गाइओ ॥ हरि हरि रतनु रतनु हरि नीको गुरि सतिगुरि दानु दिवाइओ ॥१॥ रहाउ ॥

तिसु जन कउ मनु तनु सभु देवउ जिनि हरि हरि नामु सुनाइओ ॥ धनु माइआ स्मपै तिसु देवउ जिनि हरि मीतु मिलाइओ ॥१॥

खिनु किंचित क्रिपा करी जगदीसरि तब हरि हरि हरि जसु धिआइओ ॥ जन नानक कउ हरि भेटे सुआमी दुखु हउमै रोगु गवाइओ ॥२॥२॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 719) बैराड़ी महला ४ ॥
हरि जनु राम नाम गुन गावै ॥ जे कोई निंद करे हरि जन की अपुना गुनु न गवावै ॥१॥ रहाउ ॥

जो किछु करे सु आपे सुआमी हरि आपे कार कमावै ॥ हरि आपे ही मति देवै सुआमी हरि आपे बोलि बुलावै ॥१॥

हरि आपे पंच ततु बिसथारा विचि धातू पंच आपि पावै ॥ जन नानक सतिगुरु मेले आपे हरि आपे झगरु चुकावै ॥२॥३॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 720) बैराड़ी महला ४ ॥
जपि मन राम नामु निसतारा ॥ कोट कोटंतर के पाप सभि खोवै हरि भवजलु पारि उतारा ॥१॥ रहाउ ॥

काइआ नगरि बसत हरि सुआमी हरि निरभउ निरवैरु निरंकारा ॥ हरि निकटि बसत कछु नदरि न आवै हरि लाधा गुर वीचारा ॥१॥

हरि आपे साहु सराफु रतनु हीरा हरि आपि कीआ पासारा ॥ नानक जिसु क्रिपा करे सु हरि नामु विहाझे सो साहु सचा वणजारा ॥२॥४॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 720) बैराड़ी महला ४ ॥
जपि मन हरि निरंजनु निरंकारा ॥ सदा सदा हरि धिआईऐ सुखदाता जा का अंतु न पारावारा ॥१॥ रहाउ ॥

अगनि कुंट महि उरध लिव लागा हरि राखै उदर मंझारा ॥ सो ऐसा हरि सेवहु मेरे मन हरि अंति छडावणहारा ॥१॥

जा कै हिरदै बसिआ मेरा हरि हरि तिसु जन कउ करहु नमसकारा ॥ हरि किरपा ते पाईऐ हरि जपु नानक नामु अधारा ॥२॥५॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 720) बैराड़ी महला ४ ॥
जपि मन हरि हरि नामु नित धिआइ ॥ जो इछहि सोई फलु पावहि फिरि दूखु न लागै आइ ॥१॥ रहाउ ॥

सो जपु सो तपु सा ब्रत पूजा जितु हरि सिउ प्रीति लगाइ ॥ बिनु हरि प्रीति होर प्रीति सभ झूठी इक खिन महि बिसरि सभ जाइ ॥१॥

तू बेअंतु सरब कल पूरा किछु कीमति कही न जाइ ॥ नानक सरणि तुम्हारी हरि जीउ भावै तिवै छडाइ ॥२॥६॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 720) रागु बैराड़ी महला ५ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
संत जना मिलि हरि जसु गाइओ ॥ कोटि जनम के दूख गवाइओ ॥१॥ रहाउ ॥

जो चाहत सोई मनि पाइओ ॥ करि किरपा हरि नामु दिवाइओ ॥१॥

सरब सूख हरि नामि वडाई ॥ गुर प्रसादि नानक मति पाई ॥२॥१॥७॥


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