राग आसा - बाणी शब्द, Raag Asa - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


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(गुरू नानक देव जी -- SGGS 8) सो दरु रागु आसा महला १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सो दरु तेरा केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब समाले ॥ वाजे तेरे नाद अनेक असंखा केते तेरे वावणहारे ॥ केते तेरे राग परी सिउ कहीअहि केते तेरे गावणहारे ॥ गावनि तुधनो पवणु पाणी बैसंतरु गावै राजा धरमु दुआरे ॥ गावनि तुधनो चितु गुपतु लिखि जाणनि लिखि लिखि धरमु बीचारे ॥ गावनि तुधनो ईसरु ब्रहमा देवी सोहनि तेरे सदा सवारे ॥ गावनि तुधनो इंद्र इंद्रासणि बैठे देवतिआ दरि नाले ॥ गावनि तुधनो सिध समाधी अंदरि गावनि तुधनो साध बीचारे ॥ गावनि तुधनो जती सती संतोखी गावनि तुधनो वीर करारे ॥ गावनि तुधनो पंडित पड़नि रखीसुर जुगु जुगु वेदा नाले ॥ गावनि तुधनो मोहणीआ मनु मोहनि सुरगु मछु पइआले ॥ गावनि तुधनो रतन उपाए तेरे अठसठि तीरथ नाले ॥ गावनि तुधनो जोध महाबल सूरा गावनि तुधनो खाणी चारे ॥ गावनि तुधनो खंड मंडल ब्रहमंडा करि करि रखे तेरे धारे ॥ सेई तुधनो गावनि जो तुधु भावनि रते तेरे भगत रसाले ॥ होरि केते तुधनो गावनि से मै चिति न आवनि नानकु किआ बीचारे ॥ सोई सोई सदा सचु साहिबु साचा साची नाई ॥ है भी होसी जाइ न जासी रचना जिनि रचाई ॥ रंगी रंगी भाती करि करि जिनसी माइआ जिनि उपाई ॥ करि करि देखै कीता आपणा जिउ तिस दी वडिआई ॥ जो तिसु भावै सोई करसी फिरि हुकमु न करणा जाई ॥ सो पातिसाहु साहा पतिसाहिबु नानक रहणु रजाई ॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 9) आसा महला १ ॥
सुणि वडा आखै सभु कोइ ॥ केवडु वडा डीठा होइ ॥ कीमति पाइ न कहिआ जाइ ॥ कहणै वाले तेरे रहे समाइ ॥१॥

वडे मेरे साहिबा गहिर ग्मभीरा गुणी गहीरा ॥ कोइ न जाणै तेरा केता केवडु चीरा ॥१॥ रहाउ ॥

सभि सुरती मिलि सुरति कमाई ॥ सभ कीमति मिलि कीमति पाई ॥ गिआनी धिआनी गुर गुरहाई ॥ कहणु न जाई तेरी तिलु वडिआई ॥२॥

सभि सत सभि तप सभि चंगिआईआ ॥ सिधा पुरखा कीआ वडिआईआ ॥ तुधु विणु सिधी किनै न पाईआ ॥ करमि मिलै नाही ठाकि रहाईआ ॥३॥

आखण वाला किआ वेचारा ॥ सिफती भरे तेरे भंडारा ॥ जिसु तू देहि तिसै किआ चारा ॥ नानक सचु सवारणहारा ॥४॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 9) आसा महला १ ॥
आखा जीवा विसरै मरि जाउ ॥ आखणि अउखा साचा नाउ ॥ साचे नाम की लागै भूख ॥ उतु भूखै खाइ चलीअहि दूख ॥१॥

सो किउ विसरै मेरी माइ ॥ साचा साहिबु साचै नाइ ॥१॥ रहाउ ॥

साचे नाम की तिलु वडिआई ॥ आखि थके कीमति नही पाई ॥ जे सभि मिलि कै आखण पाहि ॥ वडा न होवै घाटि न जाइ ॥२॥

ना ओहु मरै न होवै सोगु ॥ देदा रहै न चूकै भोगु ॥ गुणु एहो होरु नाही कोइ ॥ ना को होआ ना को होइ ॥३॥

जेवडु आपि तेवड तेरी दाति ॥ जिनि दिनु करि कै कीती राति ॥ खसमु विसारहि ते कमजाति ॥ नानक नावै बाझु सनाति ॥४॥३॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 10) रागु आसा महला ४ सो पुरखु
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सो पुरखु निरंजनु हरि पुरखु निरंजनु हरि अगमा अगम अपारा ॥ सभि धिआवहि सभि धिआवहि तुधु जी हरि सचे सिरजणहारा ॥ सभि जीअ तुमारे जी तूं जीआ का दातारा ॥ हरि धिआवहु संतहु जी सभि दूख विसारणहारा ॥ हरि आपे ठाकुरु हरि आपे सेवकु जी किआ नानक जंत विचारा ॥१॥

तूं घट घट अंतरि सरब निरंतरि जी हरि एको पुरखु समाणा ॥ इकि दाते इकि भेखारी जी सभि तेरे चोज विडाणा ॥ तूं आपे दाता आपे भुगता जी हउ तुधु बिनु अवरु न जाणा ॥ तूं पारब्रहमु बेअंतु बेअंतु जी तेरे किआ गुण आखि वखाणा ॥ जो सेवहि जो सेवहि तुधु जी जनु नानकु तिन कुरबाणा ॥२॥

हरि धिआवहि हरि धिआवहि तुधु जी से जन जुग महि सुखवासी ॥ से मुकतु से मुकतु भए जिन हरि धिआइआ जी तिन तूटी जम की फासी ॥ जिन निरभउ जिन हरि निरभउ धिआइआ जी तिन का भउ सभु गवासी ॥ जिन सेविआ जिन सेविआ मेरा हरि जी ते हरि हरि रूपि समासी ॥ से धंनु से धंनु जिन हरि धिआइआ जी जनु नानकु तिन बलि जासी ॥३॥

तेरी भगति तेरी भगति भंडार जी भरे बिअंत बेअंता ॥ तेरे भगत तेरे भगत सलाहनि तुधु जी हरि अनिक अनेक अनंता ॥ तेरी अनिक तेरी अनिक करहि हरि पूजा जी तपु तापहि जपहि बेअंता ॥ तेरे अनेक तेरे अनेक पड़हि बहु सिम्रिति सासत जी करि किरिआ खटु करम करंता ॥ से भगत से भगत भले जन नानक जी जो भावहि मेरे हरि भगवंता ॥४॥

तूं आदि पुरखु अपर्मपरु करता जी तुधु जेवडु अवरु न कोई ॥ तूं जुगु जुगु एको सदा सदा तूं एको जी तूं निहचलु करता सोई ॥ तुधु आपे भावै सोई वरतै जी तूं आपे करहि सु होई ॥ तुधु आपे स्रिसटि सभ उपाई जी तुधु आपे सिरजि सभ गोई ॥ जनु नानकु गुण गावै करते के जी जो सभसै का जाणोई ॥५॥१॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 11) आसा महला ४ ॥
तूं करता सचिआरु मैडा सांई ॥ जो तउ भावै सोई थीसी जो तूं देहि सोई हउ पाई ॥१॥ रहाउ ॥

सभ तेरी तूं सभनी धिआइआ ॥ जिस नो क्रिपा करहि तिनि नाम रतनु पाइआ ॥ गुरमुखि लाधा मनमुखि गवाइआ ॥ तुधु आपि विछोड़िआ आपि मिलाइआ ॥१॥

तूं दरीआउ सभ तुझ ही माहि ॥ तुझ बिनु दूजा कोई नाहि ॥ जीअ जंत सभि तेरा खेलु ॥ विजोगि मिलि विछुड़िआ संजोगी मेलु ॥२॥

जिस नो तू जाणाइहि सोई जनु जाणै ॥ हरि गुण सद ही आखि वखाणै ॥ जिनि हरि सेविआ तिनि सुखु पाइआ ॥ सहजे ही हरि नामि समाइआ ॥३॥

तू आपे करता तेरा कीआ सभु होइ ॥ तुधु बिनु दूजा अवरु न कोइ ॥ तू करि करि वेखहि जाणहि सोइ ॥ जन नानक गुरमुखि परगटु होइ ॥४॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 12) आसा महला १ ॥
तितु सरवरड़ै भईले निवासा पाणी पावकु तिनहि कीआ ॥ पंकजु मोह पगु नही चालै हम देखा तह डूबीअले ॥१॥

मन एकु न चेतसि मूड़ मना ॥ हरि बिसरत तेरे गुण गलिआ ॥१॥ रहाउ ॥

ना हउ जती सती नही पड़िआ मूरख मुगधा जनमु भइआ ॥ प्रणवति नानक तिन की सरणा जिन तू नाही वीसरिआ ॥२॥३॥

(गुरू अर्जन देव जी -- SGGS 12) आसा महला ५ ॥
भई परापति मानुख देहुरीआ ॥ गोबिंद मिलण की इह तेरी बरीआ ॥ अवरि काज तेरै कितै न काम ॥ मिलु साधसंगति भजु केवल नाम ॥१॥

सरंजामि लागु भवजल तरन कै ॥ जनमु ब्रिथा जात रंगि माइआ कै ॥१॥ रहाउ ॥

जपु तपु संजमु धरमु न कमाइआ ॥ सेवा साध न जानिआ हरि राइआ ॥ कहु नानक हम नीच करमा ॥ सरणि परे की राखहु सरमा ॥२॥४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 12) रागु आसा महला १ ॥
छिअ घर छिअ गुर छिअ उपदेस ॥ गुरु गुरु एको वेस अनेक ॥१॥

बाबा जै घरि करते कीरति होइ ॥ सो घरु राखु वडाई तोइ ॥१॥ रहाउ ॥

विसुए चसिआ घड़ीआ पहरा थिती वारी माहु होआ ॥ सूरजु एको रुति अनेक ॥ नानक करते के केते वेस ॥२॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 347) ੴ सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
रागु आसा महला १ घरु १ सो दरु ॥
सो दरु तेरा केहा सो घरु केहा जितु बहि सरब सम्हाले ॥ वाजे तेरे नाद अनेक असंखा केते तेरे वावणहारे ॥ केते तेरे राग परी सिउ कहीअहि केते तेरे गावणहारे ॥ गावन्हि तुधनो पउणु पाणी बैसंतरु गावै राजा धरम दुआरे ॥ गावन्हि तुधनो चितु गुपतु लिखि जाणनि लिखि लिखि धरमु वीचारे ॥ गावन्हि तुधनो ईसरु ब्रहमा देवी सोहनि तेरे सदा सवारे ॥ गावन्हि तुधनो इंद्र इंद्रासणि बैठे देवतिआ दरि नाले ॥ गावन्हि तुधनो सिध समाधी अंदरि गावन्हि तुधनो साध बीचारे ॥ गावन्हि तुधनो जती सती संतोखी गावनि तुधनो वीर करारे ॥ गावनि तुधनो पंडित पड़े रखीसुर जुगु जुगु बेदा नाले ॥ गावनि तुधनो मोहणीआ मनु मोहनि सुरगु मछु पइआले ॥ गावन्हि तुधनो रतन उपाए तेरे जेते अठसठि तीरथ नाले ॥ गावन्हि तुधनो जोध महाबल सूरा गावन्हि तुधनो खाणी चारे ॥ गावन्हि तुधनो खंड मंडल ब्रहमंडा करि करि रखे तेरे धारे ॥ सेई तुधनो गावन्हि जो तुधु भावन्हि रते तेरे भगत रसाले ॥ होरि केते तुधनो गावनि से मै चिति न आवनि नानकु किआ बीचारे ॥ सोई सोई सदा सचु साहिबु साचा साची नाई ॥ है भी होसी जाइ न जासी रचना जिनि रचाई ॥ रंगी रंगी भाती जिनसी माइआ जिनि उपाई ॥ करि करि देखै कीता अपणा जिउ तिस दी वडिआई ॥ जो तिसु भावै सोई करसी फिरि हुकमु न करणा जाई ॥ सो पातिसाहु साहा पति साहिबु नानक रहणु रजाई ॥१॥१॥

(गुरू रामदास जी -- SGGS 348) आसा महला ४ ॥
सो पुरखु निरंजनु हरि पुरखु निरंजनु हरि अगमा अगम अपारा ॥ सभि धिआवहि सभि धिआवहि तुधु जी हरि सचे सिरजणहारा ॥ सभि जीअ तुमारे जी तूं जीआ का दातारा ॥ हरि धिआवहु संतहु जी सभि दूख विसारणहारा ॥ हरि आपे ठाकुरु हरि आपे सेवकु जी किआ नानक जंत विचारा ॥१॥

तूं घट घट अंतरि सरब निरंतरि जी हरि एको पुरखु समाणा ॥ इकि दाते इकि भेखारी जी सभि तेरे चोज विडाणा ॥ तूं आपे दाता आपे भुगता जी हउ तुधु बिनु अवरु न जाणा ॥ तूं पारब्रहमु बेअंतु बेअंतु जी तेरे किआ गुण आखि वखाणा ॥ जो सेवहि जो सेवहि तुधु जी जनु नानकु तिन्ह कुरबाणा ॥२॥

हरि धिआवहि हरि धिआवहि तुधु जी से जन जुग महि सुख वासी ॥ से मुकतु से मुकतु भए जिन्ह हरि धिआइआ जीउ तिन टूटी जम की फासी ॥ जिन निरभउ जिन्ह हरि निरभउ धिआइआ जीउ तिन का भउ सभु गवासी ॥ जिन्ह सेविआ जिन्ह सेविआ मेरा हरि जीउ ते हरि हरि रूपि समासी ॥ से धंनु से धंनु जिन हरि धिआइआ जीउ जनु नानकु तिन बलि जासी ॥३॥

तेरी भगति तेरी भगति भंडार जी भरे बेअंत बेअंता ॥ तेरे भगत तेरे भगत सलाहनि तुधु जी हरि अनिक अनेक अनंता ॥ तेरी अनिक तेरी अनिक करहि हरि पूजा जी तपु तापहि जपहि बेअंता ॥ तेरे अनेक तेरे अनेक पड़हि बहु सिम्रिति सासत जी करि किरिआ खटु करम करंता ॥ से भगत से भगत भले जन नानक जी जो भावहि मेरे हरि भगवंता ॥४॥

तूं आदि पुरखु अपर्मपरु करता जी तुधु जेवडु अवरु न कोई ॥ तूं जुगु जुगु एको सदा सदा तूं एको जी तूं निहचलु करता सोई ॥ तुधु आपे भावै सोई वरतै जी तूं आपे करहि सु होई ॥ तुधु आपे स्रिसटि सभ उपाई जी तुधु आपे सिरजि सभ गोई ॥ जनु नानकु गुण गावै करते के जी जो सभसै का जाणोई ॥५॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 348) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु आसा महला १ चउपदे घरु २ ॥
सुणि वडा आखै सभ कोई ॥ केवडु वडा डीठा होई ॥ कीमति पाइ न कहिआ जाइ ॥ कहणै वाले तेरे रहे समाइ ॥१॥

वडे मेरे साहिबा गहिर ग्मभीरा गुणी गहीरा ॥ कोई न जाणै तेरा केता केवडु चीरा ॥१॥ रहाउ ॥

सभि सुरती मिलि सुरति कमाई ॥ सभ कीमति मिलि कीमति पाई ॥ गिआनी धिआनी गुर गुर हाई ॥ कहणु न जाई तेरी तिलु वडिआई ॥२॥

सभि सत सभि तप सभि चंगिआईआ ॥ सिधा पुरखा कीआ वडिआईआं ॥ तुधु विणु सिधी किनै न पाईआ ॥ करमि मिलै नाही ठाकि रहाईआ ॥३॥

आखण वाला किआ बेचारा ॥ सिफती भरे तेरे भंडारा ॥ जिसु तूं देहि तिसै किआ चारा ॥ नानक सचु सवारणहारा ॥४॥१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 349) आसा महला १ ॥
आखा जीवा विसरै मरि जाउ ॥ आखणि अउखा साचा नाउ ॥ साचे नाम की लागै भूख ॥ तितु भूखै खाइ चलीअहि दूख ॥१॥

सो किउ विसरै मेरी माइ ॥ साचा साहिबु साचै नाइ ॥१॥ रहाउ ॥

साचे नाम की तिलु वडिआई ॥ आखि थके कीमति नही पाई ॥ जे सभि मिलि कै आखण पाहि ॥ वडा न होवै घाटि न जाइ ॥२॥

ना ओहु मरै न होवै सोगु ॥ देंदा रहै न चूकै भोगु ॥ गुणु एहो होरु नाही कोइ ॥ ना को होआ ना को होइ ॥३॥

जेवडु आपि तेवड तेरी दाति ॥ जिनि दिनु करि कै कीती राति ॥ खसमु विसारहि ते कमजाति ॥ नानक नावै बाझु सनाति ॥४॥२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 349) आसा महला १ ॥
जे दरि मांगतु कूक करे महली खसमु सुणे ॥ भावै धीरक भावै धके एक वडाई देइ ॥१॥

जाणहु जोति न पूछहु जाती आगै जाति न हे ॥१॥ रहाउ ॥

आपि कराए आपि करेइ ॥ आपि उलाम्हे चिति धरेइ ॥ जा तूं करणहारु करतारु ॥ किआ मुहताजी किआ संसारु ॥२॥

आपि उपाए आपे देइ ॥ आपे दुरमति मनहि करेइ ॥ गुर परसादि वसै मनि आइ ॥ दुखु अन्हेरा विचहु जाइ ॥३॥

साचु पिआरा आपि करेइ ॥ अवरी कउ साचु न देइ ॥ जे किसै देइ वखाणै नानकु आगै पूछ न लेइ ॥४॥३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 349) आसा महला १ ॥
ताल मदीरे घट के घाट ॥ दोलक दुनीआ वाजहि वाज ॥ नारदु नाचै कलि का भाउ ॥ जती सती कह राखहि पाउ ॥१॥

नानक नाम विटहु कुरबाणु ॥ अंधी दुनीआ साहिबु जाणु ॥१॥ रहाउ ॥

गुरू पासहु फिरि चेला खाइ ॥ तामि परीति वसै घरि आइ ॥ जे सउ वर्हिआ जीवण खाणु ॥ खसम पछाणै सो दिनु परवाणु ॥२॥

दरसनि देखिऐ दइआ न होइ ॥ लए दिते विणु रहै न कोइ ॥ राजा निआउ करे हथि होइ ॥ कहै खुदाइ न मानै कोइ ॥३॥

माणस मूरति नानकु नामु ॥ करणी कुता दरि फुरमानु ॥ गुर परसादि जाणै मिहमानु ॥ ता किछु दरगह पावै मानु ॥४॥४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 350) आसा महला १ ॥
जेता सबदु सुरति धुनि तेती जेता रूपु काइआ तेरी ॥ तूं आपे रसना आपे बसना अवरु न दूजा कहउ माई ॥१॥

साहिबु मेरा एको है ॥ एको है भाई एको है ॥१॥ रहाउ ॥

आपे मारे आपे छोडै आपे लेवै देइ ॥ आपे वेखै आपे विगसै आपे नदरि करेइ ॥२॥

जो किछु करणा सो करि रहिआ अवरु न करणा जाई ॥ जैसा वरतै तैसो कहीऐ सभ तेरी वडिआई ॥३॥

कलि कलवाली माइआ मदु मीठा मनु मतवाला पीवतु रहै ॥ आपे रूप करे बहु भांतीं नानकु बपुड़ा एव कहै ॥४॥५॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 350) आसा महला १ ॥
वाजा मति पखावजु भाउ ॥ होइ अनंदु सदा मनि चाउ ॥ एहा भगति एहो तप ताउ ॥ इतु रंगि नाचहु रखि रखि पाउ ॥१॥

पूरे ताल जाणै सालाह ॥ होरु नचणा खुसीआ मन माह ॥१॥ रहाउ ॥

सतु संतोखु वजहि दुइ ताल ॥ पैरी वाजा सदा निहाल ॥ रागु नादु नही दूजा भाउ ॥ इतु रंगि नाचहु रखि रखि पाउ ॥२॥

भउ फेरी होवै मन चीति ॥ बहदिआ उठदिआ नीता नीति ॥ लेटणि लेटि जाणै तनु सुआहु ॥ इतु रंगि नाचहु रखि रखि पाउ ॥३॥

सिख सभा दीखिआ का भाउ ॥ गुरमुखि सुणणा साचा नाउ ॥ नानक आखणु वेरा वेर ॥ इतु रंगि नाचहु रखि रखि पैर ॥४॥६॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 350) आसा महला १ ॥
पउणु उपाइ धरी सभ धरती जल अगनी का बंधु कीआ ॥ अंधुलै दहसिरि मूंडु कटाइआ रावणु मारि किआ वडा भइआ ॥१॥

किआ उपमा तेरी आखी जाइ ॥ तूं सरबे पूरि रहिआ लिव लाइ ॥१॥ रहाउ ॥

जीअ उपाइ जुगति हथि कीनी काली नथि किआ वडा भइआ ॥ किसु तूं पुरखु जोरू कउण कहीऐ सरब निरंतरि रवि रहिआ ॥२॥

नालि कुट्मबु साथि वरदाता ब्रहमा भालण स्रिसटि गइआ ॥ आगै अंतु न पाइओ ता का कंसु छेदि किआ वडा भइआ ॥३॥

रतन उपाइ धरे खीरु मथिआ होरि भखलाए जि असी कीआ ॥ कहै नानकु छपै किउ छपिआ एकी एकी वंडि दीआ ॥४॥७॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 351) आसा महला १ ॥
करम करतूति बेलि बिसथारी राम नामु फलु हूआ ॥ तिसु रूपु न रेख अनाहदु वाजै सबदु निरंजनि कीआ ॥१॥

करे वखिआणु जाणै जे कोई ॥ अम्रितु पीवै सोई ॥१॥ रहाउ ॥

जिन्ह पीआ से मसत भए है तूटे बंधन फाहे ॥ जोती जोति समाणी भीतरि ता छोडे माइआ के लाहे ॥२॥

सरब जोति रूपु तेरा देखिआ सगल भवन तेरी माइआ ॥ रारै रूपि निरालमु बैठा नदरि करे विचि छाइआ ॥३॥

बीणा सबदु वजावै जोगी दरसनि रूपि अपारा ॥ सबदि अनाहदि सो सहु राता नानकु कहै विचारा ॥४॥८॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 351) आसा महला १ ॥
मै गुण गला के सिरि भार ॥ गली गला सिरजणहार ॥ खाणा पीणा हसणा बादि ॥ जब लगु रिदै न आवहि यादि ॥१॥

तउ परवाह केही किआ कीजै ॥ जनमि जनमि किछु लीजी लीजै ॥१॥ रहाउ ॥

मन की मति मतागलु मता ॥ जो किछु बोलीऐ सभु खतो खता ॥ किआ मुहु लै कीचै अरदासि ॥ पापु पुंनु दुइ साखी पासि ॥२॥

जैसा तूं करहि तैसा को होइ ॥ तुझ बिनु दूजा नाही कोइ ॥ जेही तूं मति देहि तेही को पावै ॥ तुधु आपे भावै तिवै चलावै ॥३॥

राग रतन परीआ परवार ॥ तिसु विचि उपजै अम्रितु सार ॥ नानक करते का इहु धनु मालु ॥ जे को बूझै एहु बीचारु ॥४॥९॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 351) आसा महला १ ॥
करि किरपा अपनै घरि आइआ ता मिलि सखीआ काजु रचाइआ ॥ खेलु देखि मनि अनदु भइआ सहु वीआहण आइआ ॥१॥

गावहु गावहु कामणी बिबेक बीचारु ॥ हमरै घरि आइआ जगजीवनु भतारु ॥१॥ रहाउ ॥

गुरू दुआरै हमरा वीआहु जि होआ जां सहु मिलिआ तां जानिआ ॥ तिहु लोका महि सबदु रविआ है आपु गइआ मनु मानिआ ॥२॥

आपणा कारजु आपि सवारे होरनि कारजु न होई ॥ जितु कारजि सतु संतोखु दइआ धरमु है गुरमुखि बूझै कोई ॥३॥

भनति नानकु सभना का पिरु एको सोइ ॥ जिस नो नदरि करे सा सोहागणि होइ ॥४॥१०॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 351) आसा महला १ ॥
ग्रिहु बनु समसरि सहजि सुभाइ ॥ दुरमति गतु भई कीरति ठाइ ॥ सच पउड़ी साचउ मुखि नांउ ॥ सतिगुरु सेवि पाए निज थाउ ॥१॥

मन चूरे खटु दरसन जाणु ॥ सरब जोति पूरन भगवानु ॥१॥ रहाउ ॥

अधिक तिआस भेख बहु करै ॥ दुखु बिखिआ सुखु तनि परहरै ॥ कामु क्रोधु अंतरि धनु हिरै ॥ दुबिधा छोडि नामि निसतरै ॥२॥

सिफति सलाहणु सहज अनंद ॥ सखा सैनु प्रेमु गोबिंद ॥ आपे करे आपे बखसिंदु ॥ तनु मनु हरि पहि आगै जिंदु ॥३॥

झूठ विकार महा दुखु देह ॥ भेख वरन दीसहि सभि खेह ॥ जो उपजै सो आवै जाइ ॥ नानक असथिरु नामु रजाइ ॥४॥११॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 352) आसा महला १ ॥
एको सरवरु कमल अनूप ॥ सदा बिगासै परमल रूप ॥ ऊजल मोती चूगहि हंस ॥ सरब कला जगदीसै अंस ॥१॥

जो दीसै सो उपजै बिनसै ॥ बिनु जल सरवरि कमलु न दीसै ॥१॥ रहाउ ॥

बिरला बूझै पावै भेदु ॥ साखा तीनि कहै नित बेदु ॥ नाद बिंद की सुरति समाइ ॥ सतिगुरु सेवि परम पदु पाइ ॥२॥

मुकतो रातउ रंगि रवांतउ ॥ राजन राजि सदा बिगसांतउ ॥ जिसु तूं राखहि किरपा धारि ॥ बूडत पाहन तारहि तारि ॥३॥

त्रिभवण महि जोति त्रिभवण महि जाणिआ ॥ उलट भई घरु घर महि आणिआ ॥ अहिनिसि भगति करे लिव लाइ ॥ नानकु तिन कै लागै पाइ ॥४॥१२॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 352) आसा महला १ ॥
गुरमति साची हुजति दूरि ॥ बहुतु सिआणप लागै धूरि ॥ लागी मैलु मिटै सच नाइ ॥ गुर परसादि रहै लिव लाइ ॥१॥

है हजूरि हाजरु अरदासि ॥ दुखु सुखु साचु करते प्रभ पासि ॥१॥ रहाउ ॥

कूड़ु कमावै आवै जावै ॥ कहणि कथनि वारा नही आवै ॥ किआ देखा सूझ बूझ न पावै ॥ बिनु नावै मनि त्रिपति न आवै ॥२॥

जो जनमे से रोगि विआपे ॥ हउमै माइआ दूखि संतापे ॥ से जन बाचे जो प्रभि राखे ॥ सतिगुरु सेवि अम्रित रसु चाखे ॥३॥

चलतउ मनु राखै अम्रितु चाखै ॥ सतिगुर सेवि अम्रित सबदु भाखै ॥ साचै सबदि मुकति गति पाए ॥ नानक विचहु आपु गवाए ॥४॥१३॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 352) आसा महला १ ॥
जो तिनि कीआ सो सचु थीआ ॥ अम्रित नामु सतिगुरि दीआ ॥ हिरदै नामु नाही मनि भंगु ॥ अनदिनु नालि पिआरे संगु ॥१॥

हरि जीउ राखहु अपनी सरणाई ॥ गुर परसादी हरि रसु पाइआ नामु पदारथु नउ निधि पाई ॥१॥ रहाउ ॥

करम धरम सचु साचा नाउ ॥ ता कै सद बलिहारै जाउ ॥ जो हरि राते से जन परवाणु ॥ तिन की संगति परम निधानु ॥२॥

हरि वरु जिनि पाइआ धन नारी ॥ हरि सिउ राती सबदु वीचारी ॥ आपि तरै संगति कुल तारै ॥ सतिगुरु सेवि ततु वीचारै ॥३॥

हमरी जाति पति सचु नाउ ॥ करम धरम संजमु सत भाउ ॥ नानक बखसे पूछ न होइ ॥ दूजा मेटे एको सोइ ॥४॥१४॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 353) आसा महला १ ॥
इकि आवहि इकि जावहि आई ॥ इकि हरि राते रहहि समाई ॥ इकि धरनि गगन महि ठउर न पावहि ॥ से करमहीण हरि नामु न धिआवहि ॥१॥

गुर पूरे ते गति मिति पाई ॥ इहु संसारु बिखु वत अति भउजलु गुर सबदी हरि पारि लंघाई ॥१॥ रहाउ ॥

जिन्ह कउ आपि लए प्रभु मेलि ॥ तिन कउ कालु न साकै पेलि ॥ गुरमुखि निरमल रहहि पिआरे ॥ जिउ जल अंभ ऊपरि कमल निरारे ॥२॥

बुरा भला कहु किस नो कहीऐ ॥ दीसै ब्रहमु गुरमुखि सचु लहीऐ ॥ अकथु कथउ गुरमति वीचारु ॥ मिलि गुर संगति पावउ पारु ॥३॥

सासत बेद सिम्रिति बहु भेद ॥ अठसठि मजनु हरि रसु रेद ॥ गुरमुखि निरमलु मैलु न लागै ॥ नानक हिरदै नामु वडे धुरि भागै ॥४॥१५॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 353) आसा महला १ ॥
निवि निवि पाइ लगउ गुर अपुने आतम रामु निहारिआ ॥ करत बीचारु हिरदै हरि रविआ हिरदै देखि बीचारिआ ॥१॥

बोलहु रामु करे निसतारा ॥ गुर परसादि रतनु हरि लाभै मिटै अगिआनु होइ उजीआरा ॥१॥ रहाउ ॥

रवनी रवै बंधन नही तूटहि विचि हउमै भरमु न जाई ॥ सतिगुरु मिलै त हउमै तूटै ता को लेखै पाई ॥२॥

हरि हरि नामु भगति प्रिअ प्रीतमु सुख सागरु उर धारे ॥ भगति वछलु जगजीवनु दाता मति गुरमति हरि निसतारे ॥३॥

मन सिउ जूझि मरै प्रभु पाए मनसा मनहि समाए ॥ नानक क्रिपा करे जगजीवनु सहज भाइ लिव लाए ॥४॥१६॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 353) आसा महला १ ॥
किस कउ कहहि सुणावहि किस कउ किसु समझावहि समझि रहे ॥ किसै पड़ावहि पड़ि गुणि बूझे सतिगुर सबदि संतोखि रहे ॥१॥

ऐसा गुरमति रमतु सरीरा ॥ हरि भजु मेरे मन गहिर ग्मभीरा ॥१॥ रहाउ ॥

अनत तरंग भगति हरि रंगा ॥ अनदिनु सूचे हरि गुण संगा ॥ मिथिआ जनमु साकत संसारा ॥ राम भगति जनु रहै निरारा ॥२॥

सूची काइआ हरि गुण गाइआ ॥ आतमु चीनि रहै लिव लाइआ ॥ आदि अपारु अपर्मपरु हीरा ॥ लालि रता मेरा मनु धीरा ॥३॥

कथनी कहहि कहहि से मूए ॥ सो प्रभु दूरि नाही प्रभु तूं है ॥ सभु जगु देखिआ माइआ छाइआ ॥ नानक गुरमति नामु धिआइआ ॥४॥१७॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 354) आसा महला १ तितुका ॥
कोई भीखकु भीखिआ खाइ ॥ कोई राजा रहिआ समाइ ॥ किस ही मानु किसै अपमानु ॥ ढाहि उसारे धरे धिआनु ॥ तुझ ते वडा नाही कोइ ॥ किसु वेखाली चंगा होइ ॥१॥

मै तां नामु तेरा आधारु ॥ तूं दाता करणहारु करतारु ॥१॥ रहाउ ॥

वाट न पावउ वीगा जाउ ॥ दरगह बैसण नाही थाउ ॥ मन का अंधुला माइआ का बंधु ॥ खीन खराबु होवै नित कंधु ॥ खाण जीवण की बहुती आस ॥ लेखै तेरै सास गिरास ॥२॥

अहिनिसि अंधुले दीपकु देइ ॥ भउजल डूबत चिंत करेइ ॥ कहहि सुणहि जो मानहि नाउ ॥ हउ बलिहारै ता कै जाउ ॥ नानकु एक कहै अरदासि ॥ जीउ पिंडु सभु तेरै पासि ॥३॥

जां तूं देहि जपी तेरा नाउ ॥ दरगह बैसण होवै थाउ ॥ जां तुधु भावै ता दुरमति जाइ ॥ गिआन रतनु मनि वसै आइ ॥ नदरि करे ता सतिगुरु मिलै ॥ प्रणवति नानकु भवजलु तरै ॥४॥१८॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 354) आसा महला १ पंचपदे ॥
दुध बिनु धेनु पंख बिनु पंखी जल बिनु उतभुज कामि नाही ॥ किआ सुलतानु सलाम विहूणा अंधी कोठी तेरा नामु नाही ॥१॥

की विसरहि दुखु बहुता लागै ॥ दुखु लागै तूं विसरु नाही ॥१॥ रहाउ ॥

अखी अंधु जीभ रसु नाही कंनी पवणु न वाजै ॥ चरणी चलै पजूता आगै विणु सेवा फल लागे ॥२॥

अखर बिरख बाग भुइ चोखी सिंचित भाउ करेही ॥ सभना फलु लागै नामु एको बिनु करमा कैसे लेही ॥३॥

जेते जीअ तेते सभि तेरे विणु सेवा फलु किसै नाही ॥ दुखु सुखु भाणा तेरा होवै विणु नावै जीउ रहै नाही ॥४॥

मति विचि मरणु जीवणु होरु कैसा जा जीवा तां जुगति नाही ॥ कहै नानकु जीवाले जीआ जह भावै तह राखु तुही ॥५॥१९॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 355) आसा महला १ ॥
काइआ ब्रहमा मनु है धोती ॥ गिआनु जनेऊ धिआनु कुसपाती ॥ हरि नामा जसु जाचउ नाउ ॥ गुर परसादी ब्रहमि समाउ ॥१॥

पांडे ऐसा ब्रहम बीचारु ॥ नामे सुचि नामो पड़उ नामे चजु आचारु ॥१॥ रहाउ ॥

बाहरि जनेऊ जिचरु जोति है नालि ॥ धोती टिका नामु समालि ॥ ऐथै ओथै निबही नालि ॥ विणु नावै होरि करम न भालि ॥२॥

पूजा प्रेम माइआ परजालि ॥ एको वेखहु अवरु न भालि ॥ चीन्है ततु गगन दस दुआर ॥ हरि मुखि पाठ पड़ै बीचार ॥३॥

भोजनु भाउ भरमु भउ भागै ॥ पाहरूअरा छबि चोरु न लागै ॥ तिलकु लिलाटि जाणै प्रभु एकु ॥ बूझै ब्रहमु अंतरि बिबेकु ॥४॥

आचारी नही जीतिआ जाइ ॥ पाठ पड़ै नही कीमति पाइ ॥ असट दसी चहु भेदु न पाइआ ॥ नानक सतिगुरि ब्रहमु दिखाइआ ॥५॥२०॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 355) आसा महला १ ॥
सेवकु दासु भगतु जनु सोई ॥ ठाकुर का दासु गुरमुखि होई ॥ जिनि सिरि साजी तिनि फुनि गोई ॥ तिसु बिनु दूजा अवरु न कोई ॥१॥

साचु नामु गुर सबदि वीचारि ॥ गुरमुखि साचे साचै दरबारि ॥१॥ रहाउ ॥

सचा अरजु सची अरदासि ॥ महली खसमु सुणे साबासि ॥ सचै तखति बुलावै सोइ ॥ दे वडिआई करे सु होइ ॥२॥

तेरा ताणु तूहै दीबाणु ॥ गुर का सबदु सचु नीसाणु ॥ मंने हुकमु सु परगटु जाइ ॥ सचु नीसाणै ठाक न पाइ ॥३॥

पंडित पड़हि वखाणहि वेदु ॥ अंतरि वसतु न जाणहि भेदु ॥ गुर बिनु सोझी बूझ न होइ ॥ साचा रवि रहिआ प्रभु सोइ ॥४॥

किआ हउ आखा आखि वखाणी ॥ तूं आपे जाणहि सरब विडाणी ॥ नानक एको दरु दीबाणु ॥ गुरमुखि साचु तहा गुदराणु ॥५॥२१॥

(गुरू नानक देव जी -- SGGS 355) आसा महला १ ॥
काची गागरि देह दुहेली उपजै बिनसै दुखु पाई ॥ इहु जगु सागरु दुतरु किउ तरीऐ बिनु हरि गुर पारि न पाई ॥१॥

तुझ बिनु अवरु न कोई मेरे पिआरे तुझ बिनु अवरु न कोइ हरे ॥ सरबी रंगी रूपी तूंहै तिसु बखसे जिसु नदरि करे ॥१॥ रहाउ ॥

सासु बुरी घरि वासु न देवै पिर सिउ मिलण न देइ बुरी ॥ सखी साजनी के हउ चरन सरेवउ हरि गुर किरपा ते नदरि धरी ॥२॥

आपु बीचारि मारि मनु देखिआ तुम सा मीतु न अवरु कोई ॥ जिउ तूं राखहि तिव ही रहणा दुखु सुखु देवहि करहि सोई ॥३॥

आसा मनसा दोऊ बिनासत त्रिहु गुण आस निरास भई ॥ तुरीआवसथा गुरमुखि पाईऐ संत सभा की ओट लही ॥४॥

गिआन धिआन सगले सभि जप तप जिसु हरि हिरदै अलख अभेवा ॥ नानक राम नामि मनु राता गुरमति पाए सहज सेवा ॥५॥२२॥


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