पहरे, Pehre (Mahalla 1 4 5) Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सिरीरागु महला १ पहरे घरु १ ॥

पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा हुकमि पइआ गरभासि ॥ उरध तपु अंतरि करे वणजारिआ मित्रा खसम सेती अरदासि ॥ खसम सेती अरदासि वखाणै उरध धिआनि लिव लागा ॥ ना मरजादु आइआ कलि भीतरि बाहुड़ि जासी नागा ॥ जैसी कलम वुड़ी है मसतकि तैसी जीअड़े पासि ॥ कहु नानक प्राणी पहिलै पहरै हुकमि पइआ गरभासि ॥१॥

दूजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा विसरि गइआ धिआनु ॥ हथो हथि नचाईऐ वणजारिआ मित्रा जिउ जसुदा घरि कानु ॥ हथो हथि नचाईऐ प्राणी मात कहै सुतु मेरा ॥ चेति अचेत मूड़ मन मेरे अंति नही कछु तेरा ॥ जिनि रचि रचिआ तिसहि न जाणै मन भीतरि धरि गिआनु ॥ कहु नानक प्राणी दूजै पहरै विसरि गइआ धिआनु ॥२॥

तीजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा धन जोबन सिउ चितु ॥ हरि का नामु न चेतही वणजारिआ मित्रा बधा छुटहि जितु ॥ हरि का नामु न चेतै प्राणी बिकलु भइआ संगि माइआ ॥ धन सिउ रता जोबनि मता अहिला जनमु गवाइआ ॥ धरम सेती वापारु न कीतो करमु न कीतो मितु ॥ कहु नानक तीजै पहरै प्राणी धन जोबन सिउ चितु ॥३॥

चउथै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा लावी आइआ खेतु ॥ जा जमि पकड़ि चलाइआ वणजारिआ मित्रा किसै न मिलिआ भेतु ॥ भेतु चेतु हरि किसै न मिलिओ जा जमि पकड़ि चलाइआ ॥ झूठा रुदनु होआ दोआलै खिन महि भइआ पराइआ ॥ साई वसतु परापति होई जिसु सिउ लाइआ हेतु ॥ कहु नानक प्राणी चउथै पहरै लावी लुणिआ खेतु ॥४॥१॥

सिरीरागु महला १ ॥

पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा बालक बुधि अचेतु ॥ खीरु पीऐ खेलाईऐ वणजारिआ मित्रा मात पिता सुत हेतु ॥ मात पिता सुत नेहु घनेरा माइआ मोहु सबाई ॥ संजोगी आइआ किरतु कमाइआ करणी कार कराई ॥ राम नाम बिनु मुकति न होई बूडी दूजै हेति ॥ कहु नानक प्राणी पहिलै पहरै छूटहिगा हरि चेति ॥१॥

दूजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा भरि जोबनि मै मति ॥ अहिनिसि कामि विआपिआ वणजारिआ मित्रा अंधुले नामु न चिति ॥ राम नामु घट अंतरि नाही होरि जाणै रस कस मीठे ॥ गिआनु धिआनु गुण संजमु नाही जनमि मरहुगे झूठे ॥ तीरथ वरत सुचि संजमु नाही करमु धरमु नही पूजा ॥ नानक भाइ भगति निसतारा दुबिधा विआपै दूजा ॥२॥

तीजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा सरि हंस उलथड़े आइ ॥ जोबनु घटै जरूआ जिणै वणजारिआ मित्रा आव घटै दिनु जाइ ॥ अंति कालि पछुतासी अंधुले जा जमि पकड़ि चलाइआ ॥ सभु किछु अपुना करि करि राखिआ खिन महि भइआ पराइआ ॥ बुधि विसरजी गई सिआणप करि अवगण पछुताइ ॥ कहु नानक प्राणी तीजै पहरै प्रभु चेतहु लिव लाइ ॥३॥

चउथै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा बिरधि भइआ तनु खीणु ॥ अखी अंधु न दीसई वणजारिआ मित्रा कंनी सुणै न वैण ॥ अखी अंधु जीभ रसु नाही रहे पराकउ ताणा ॥ गुण अंतरि नाही किउ सुखु पावै मनमुख आवण जाणा ॥ खड़ु पकी कुड़ि भजै बिनसै आइ चलै किआ माणु ॥ कहु नानक प्राणी चउथै पहरै गुरमुखि सबदु पछाणु ॥४॥

ओड़कु आइआ तिन साहिआ वणजारिआ मित्रा जरु जरवाणा कंनि ॥ इक रती गुण न समाणिआ वणजारिआ मित्रा अवगण खड़सनि बंनि ॥ गुण संजमि जावै चोट न खावै ना तिसु जमणु मरणा ॥ कालु जालु जमु जोहि न साकै भाइ भगति भै तरणा ॥ पति सेती जावै सहजि समावै सगले दूख मिटावै ॥ कहु नानक प्राणी गुरमुखि छूटै साचे ते पति पावै ॥५॥२॥

सिरीरागु महला ४ ॥

पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा हरि पाइआ उदर मंझारि ॥ हरि धिआवै हरि उचरै वणजारिआ मित्रा हरि हरि नामु समारि ॥ हरि हरि नामु जपे आराधे विचि अगनी हरि जपि जीविआ ॥ बाहरि जनमु भइआ मुखि लागा सरसे पिता मात थीविआ ॥ जिस की वसतु तिसु चेतहु प्राणी करि हिरदै गुरमुखि बीचारि ॥ कहु नानक प्राणी पहिलै पहरै हरि जपीऐ किरपा धारि ॥१॥

दूजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा मनु लागा दूजै भाइ ॥ मेरा मेरा करि पालीऐ वणजारिआ मित्रा ले मात पिता गलि लाइ ॥ लावै मात पिता सदा गल सेती मनि जाणै खटि खवाए ॥ जो देवै तिसै न जाणै मूड़ा दिते नो लपटाए ॥ कोई गुरमुखि होवै सु करै वीचारु हरि धिआवै मनि लिव लाइ ॥ कहु नानक दूजै पहरै प्राणी तिसु कालु न कबहूं खाइ ॥२॥

तीजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा मनु लगा आलि जंजालि ॥ धनु चितवै धनु संचवै वणजारिआ मित्रा हरि नामा हरि न समालि ॥ हरि नामा हरि हरि कदे न समालै जि होवै अंति सखाई ॥ इहु धनु स्मपै माइआ झूठी अंति छोडि चलिआ पछुताई ॥ जिस नो किरपा करे गुरु मेले सो हरि हरि नामु समालि ॥ कहु नानक तीजै पहरै प्राणी से जाइ मिले हरि नालि ॥३॥

चउथै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा हरि चलण वेला आदी ॥ करि सेवहु पूरा सतिगुरू वणजारिआ मित्रा सभ चली रैणि विहादी ॥ हरि सेवहु खिनु खिनु ढिल मूलि न करिहु जितु असथिरु जुगु जुगु होवहु ॥ हरि सेती सद माणहु रलीआ जनम मरण दुख खोवहु ॥ गुर सतिगुर सुआमी भेदु न जाणहु जितु मिलि हरि भगति सुखांदी ॥ कहु नानक प्राणी चउथै पहरै सफलिओ रैणि भगता दी ॥४॥१॥३॥

सिरीरागु महला ५ ॥

पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा धरि पाइता उदरै माहि ॥ दसी मासी मानसु कीआ वणजारिआ मित्रा करि मुहलति करम कमाहि ॥ मुहलति करि दीनी करम कमाणे जैसा लिखतु धुरि पाइआ ॥ मात पिता भाई सुत बनिता तिन भीतरि प्रभू संजोइआ ॥ करम सुकरम कराए आपे इसु जंतै वसि किछु नाहि ॥ कहु नानक प्राणी पहिलै पहरै धरि पाइता उदरै माहि ॥१॥

दूजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा भरि जुआनी लहरी देइ ॥ बुरा भला न पछाणई वणजारिआ मित्रा मनु मता अहमेइ ॥ बुरा भला न पछाणै प्राणी आगै पंथु करारा ॥ पूरा सतिगुरु कबहूं न सेविआ सिरि ठाढे जम जंदारा ॥ धरम राइ जब पकरसि बवरे तब किआ जबाबु करेइ ॥ कहु नानक दूजै पहरै प्राणी भरि जोबनु लहरी देइ ॥२॥

तीजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा बिखु संचै अंधु अगिआनु ॥ पुत्रि कलत्रि मोहि लपटिआ वणजारिआ मित्रा अंतरि लहरि लोभानु ॥ अंतरि लहरि लोभानु परानी सो प्रभु चिति न आवै ॥ साधसंगति सिउ संगु न कीआ बहु जोनी दुखु पावै ॥ सिरजनहारु विसारिआ सुआमी इक निमख न लगो धिआनु ॥ कहु नानक प्राणी तीजै पहरै बिखु संचे अंधु अगिआनु ॥३॥

चउथै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा दिनु नेड़ै आइआ सोइ ॥ गुरमुखि नामु समालि तूं वणजारिआ मित्रा तेरा दरगह बेली होइ ॥ गुरमुखि नामु समालि पराणी अंते होइ सखाई ॥ इहु मोहु माइआ तेरै संगि न चालै झूठी प्रीति लगाई ॥ सगली रैणि गुदरी अंधिआरी सेवि सतिगुरु चानणु होइ ॥ कहु नानक प्राणी चउथै पहरै दिनु नेड़ै आइआ सोइ ॥४॥

लिखिआ आइआ गोविंद का वणजारिआ मित्रा उठि चले कमाणा साथि ॥ इक रती बिलम न देवनी वणजारिआ मित्रा ओनी तकड़े पाए हाथ ॥ लिखिआ आइआ पकड़ि चलाइआ मनमुख सदा दुहेले ॥ जिनी पूरा सतिगुरु सेविआ से दरगह सदा सुहेले ॥ करम धरती सरीरु जुग अंतरि जो बोवै सो खाति ॥ कहु नानक भगत सोहहि दरवारे मनमुख सदा भवाति ॥५॥१॥४॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates