भक्त नामदेव जी - बाणी शब्द, Bhagat Namdev ji - Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग गउड़ी चेती -- SGGS 345) रागु गउड़ी चेती बाणी नामदेउ जीउ की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
देवा पाहन तारीअले ॥ राम कहत जन कस न तरे ॥१॥ रहाउ ॥

तारीले गनिका बिनु रूप कुबिजा बिआधि अजामलु तारीअले ॥ चरन बधिक जन तेऊ मुकति भए ॥ हउ बलि बलि जिन राम कहे ॥१॥

दासी सुत जनु बिदरु सुदामा उग्रसैन कउ राज दीए ॥ जप हीन तप हीन कुल हीन क्रम हीन नामे के सुआमी तेऊ तरे ॥२॥१॥

(राग आसा -- SGGS 485) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आसा बाणी स्री नामदेउ जी की एक अनेक बिआपक पूरक जत देखउ तत सोई ॥ माइआ चित्र बचित्र बिमोहित बिरला बूझै कोई ॥१॥

सभु गोबिंदु है सभु गोबिंदु है गोबिंद बिनु नही कोई ॥ सूतु एकु मणि सत सहंस जैसे ओति पोति प्रभु सोई ॥१॥ रहाउ ॥

जल तरंग अरु फेन बुदबुदा जल ते भिंन न होई ॥ इहु परपंचु पारब्रहम की लीला बिचरत आन न होई ॥२॥

मिथिआ भरमु अरु सुपन मनोरथ सति पदारथु जानिआ ॥ सुक्रित मनसा गुर उपदेसी जागत ही मनु मानिआ ॥३॥

कहत नामदेउ हरि की रचना देखहु रिदै बीचारी ॥ घट घट अंतरि सरब निरंतरि केवल एक मुरारी ॥४॥१॥

(राग आसा -- SGGS 485) आसा ॥
आनीले कु्मभ भराईले ऊदक ठाकुर कउ इसनानु करउ ॥ बइआलीस लख जी जल महि होते बीठलु भैला काइ करउ ॥१॥

जत्र जाउ तत बीठलु भैला ॥ महा अनंद करे सद केला ॥१॥ रहाउ ॥

आनीले फूल परोईले माला ठाकुर की हउ पूज करउ ॥ पहिले बासु लई है भवरह बीठल भैला काइ करउ ॥२॥

आनीले दूधु रीधाईले खीरं ठाकुर कउ नैवेदु करउ ॥ पहिले दूधु बिटारिओ बछरै बीठलु भैला काइ करउ ॥३॥

ईभै बीठलु ऊभै बीठलु बीठल बिनु संसारु नही ॥ थान थनंतरि नामा प्रणवै पूरि रहिओ तूं सरब मही ॥४॥२॥

(राग आसा -- SGGS 485) आसा ॥
मनु मेरो गजु जिहबा मेरी काती ॥ मपि मपि काटउ जम की फासी ॥१॥

कहा करउ जाती कह करउ पाती ॥ राम को नामु जपउ दिन राती ॥१॥ रहाउ ॥

रांगनि रांगउ सीवनि सीवउ ॥ राम नाम बिनु घरीअ न जीवउ ॥२॥

भगति करउ हरि के गुन गावउ ॥ आठ पहर अपना खसमु धिआवउ ॥३॥

सुइने की सूई रुपे का धागा ॥ नामे का चितु हरि सउ लागा ॥४॥३॥

(राग आसा -- SGGS 485) आसा ॥
सापु कुंच छोडै बिखु नही छाडै ॥ उदक माहि जैसे बगु धिआनु माडै ॥१॥

काहे कउ कीजै धिआनु जपंना ॥ जब ते सुधु नाही मनु अपना ॥१॥ रहाउ ॥

सिंघच भोजनु जो नरु जानै ॥ ऐसे ही ठगदेउ बखानै ॥२॥

नामे के सुआमी लाहि ले झगरा ॥ राम रसाइन पीओ रे दगरा ॥३॥४॥

(राग आसा -- SGGS 486) आसा ॥
पारब्रहमु जि चीन्हसी आसा ते न भावसी ॥ रामा भगतह चेतीअले अचिंत मनु राखसी ॥१॥

कैसे मन तरहिगा रे संसारु सागरु बिखै को बना ॥ झूठी माइआ देखि कै भूला रे मना ॥१॥ रहाउ ॥

छीपे के घरि जनमु दैला गुर उपदेसु भैला ॥ संतह कै परसादि नामा हरि भेटुला ॥२॥५॥

(राग गूजरी -- SGGS 525) गूजरी स्री नामदेव जी के पदे घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जौ राजु देहि त कवन बडाई ॥ जौ भीख मंगावहि त किआ घटि जाई ॥१॥

तूं हरि भजु मन मेरे पदु निरबानु ॥ बहुरि न होइ तेरा आवन जानु ॥१॥ रहाउ ॥

सभ तै उपाई भरम भुलाई ॥ जिस तूं देवहि तिसहि बुझाई ॥२॥

सतिगुरु मिलै त सहसा जाई ॥ किसु हउ पूजउ दूजा नदरि न आई ॥३॥

एकै पाथर कीजै भाउ ॥ दूजै पाथर धरीऐ पाउ ॥ जे ओहु देउ त ओहु भी देवा ॥ कहि नामदेउ हम हरि की सेवा ॥४॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 525) गूजरी घरु १ ॥
मलै न लाछै पार मलो परमलीओ बैठो री आई ॥ आवत किनै न पेखिओ कवनै जाणै री बाई ॥१॥

कउणु कहै किणि बूझीऐ रमईआ आकुलु री बाई ॥१॥ रहाउ ॥

जिउ आकासै पंखीअलो खोजु निरखिओ न जाई ॥ जिउ जल माझै माछलो मारगु पेखणो न जाई ॥२॥

जिउ आकासै घड़ूअलो म्रिग त्रिसना भरिआ ॥ नामे चे सुआमी बीठलो जिनि तीनै जरिआ ॥३॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 656) रागु सोरठि बाणी भगत नामदे जी की घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जब देखा तब गावा ॥ तउ जन धीरजु पावा ॥१॥

नादि समाइलो रे सतिगुरु भेटिले देवा ॥१॥ रहाउ ॥

जह झिलि मिलि कारु दिसंता ॥ तह अनहद सबद बजंता ॥ जोती जोति समानी ॥ मै गुर परसादी जानी ॥२॥

रतन कमल कोठरी ॥ चमकार बीजुल तही ॥ नेरै नाही दूरि ॥ निज आतमै रहिआ भरपूरि ॥३॥

जह अनहत सूर उज्यारा ॥ तह दीपक जलै छंछारा ॥ गुर परसादी जानिआ ॥ जनु नामा सहज समानिआ ॥४॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 657) घरु ४ सोरठि ॥
पाड़ पड़ोसणि पूछि ले नामा का पहि छानि छवाई हो ॥ तो पहि दुगणी मजूरी दैहउ मो कउ बेढी देहु बताई हो ॥१॥

री बाई बेढी देनु न जाई ॥ देखु बेढी रहिओ समाई ॥ हमारै बेढी प्रान अधारा ॥१॥ रहाउ ॥

बेढी प्रीति मजूरी मांगै जउ कोऊ छानि छवावै हो ॥ लोग कुट्मब सभहु ते तोरै तउ आपन बेढी आवै हो ॥२॥

ऐसो बेढी बरनि न साकउ सभ अंतर सभ ठांई हो ॥ गूंगै महा अम्रित रसु चाखिआ पूछे कहनु न जाई हो ॥३॥

बेढी के गुण सुनि री बाई जलधि बांधि ध्रू थापिओ हो ॥ नामे के सुआमी सीअ बहोरी लंक भभीखण आपिओ हो ॥४॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 657) सोरठि घरु ३ ॥
अणमड़िआ मंदलु बाजै ॥ बिनु सावण घनहरु गाजै ॥ बादल बिनु बरखा होई ॥ जउ ततु बिचारै कोई ॥१॥

मो कउ मिलिओ रामु सनेही ॥ जिह मिलिऐ देह सुदेही ॥१॥ रहाउ ॥

मिलि पारस कंचनु होइआ ॥ मुख मनसा रतनु परोइआ ॥ निज भाउ भइआ भ्रमु भागा ॥ गुर पूछे मनु पतीआगा ॥२॥

जल भीतरि कु्मभ समानिआ ॥ सभ रामु एकु करि जानिआ ॥ गुर चेले है मनु मानिआ ॥ जन नामै ततु पछानिआ ॥३॥३॥

(राग धनासरी -- SGGS 692) धनासरी बाणी भगत नामदेव जी की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गहरी करि कै नीव खुदाई ऊपरि मंडप छाए ॥ मारकंडे ते को अधिकाई जिनि त्रिण धरि मूंड बलाए ॥१॥

हमरो करता रामु सनेही ॥ काहे रे नर गरबु करत हहु बिनसि जाइ झूठी देही ॥१॥ रहाउ ॥

मेरी मेरी कैरउ करते दुरजोधन से भाई ॥ बारह जोजन छत्रु चलै था देही गिरझन खाई ॥२॥

सरब सोइन की लंका होती रावन से अधिकाई ॥ कहा भइओ दरि बांधे हाथी खिन महि भई पराई ॥३॥

दुरबासा सिउ करत ठगउरी जादव ए फल पाए ॥ क्रिपा करी जन अपुने ऊपर नामदेउ हरि गुन गाए ॥४॥१॥

(राग धनासरी -- SGGS 693) दस बैरागनि मोहि बसि कीन्ही पंचहु का मिट नावउ ॥ सतरि दोइ भरे अम्रित सरि बिखु कउ मारि कढावउ ॥१॥

पाछै बहुरि न आवनु पावउ ॥ अम्रित बाणी घट ते उचरउ आतम कउ समझावउ ॥१॥ रहाउ ॥

बजर कुठारु मोहि है छीनां करि मिंनति लगि पावउ ॥ संतन के हम उलटे सेवक भगतन ते डरपावउ ॥२॥

इह संसार ते तब ही छूटउ जउ माइआ नह लपटावउ ॥ माइआ नामु गरभ जोनि का तिह तजि दरसनु पावउ ॥३॥

इतु करि भगति करहि जो जन तिन भउ सगल चुकाईऐ ॥ कहत नामदेउ बाहरि किआ भरमहु इह संजम हरि पाईऐ ॥४॥२॥

(राग धनासरी -- SGGS 693) मारवाड़ि जैसे नीरु बालहा बेलि बालहा करहला ॥ जिउ कुरंक निसि नादु बालहा तिउ मेरै मनि रामईआ ॥१॥

तेरा नामु रूड़ो रूपु रूड़ो अति रंग रूड़ो मेरो रामईआ ॥१॥ रहाउ ॥

जिउ धरणी कउ इंद्रु बालहा कुसम बासु जैसे भवरला ॥ जिउ कोकिल कउ अ्मबु बालहा तिउ मेरै मनि रामईआ ॥२॥

चकवी कउ जैसे सूरु बालहा मान सरोवर हंसुला ॥ जिउ तरुणी कउ कंतु बालहा तिउ मेरै मनि रामईआ ॥३॥

बारिक कउ जैसे खीरु बालहा चात्रिक मुख जैसे जलधरा ॥ मछुली कउ जैसे नीरु बालहा तिउ मेरै मनि रामईआ ॥४॥

साधिक सिध सगल मुनि चाहहि बिरले काहू डीठुला ॥ सगल भवण तेरो नामु बालहा तिउ नामे मनि बीठुला ॥५॥३॥

(राग धनासरी -- SGGS 693) पहिल पुरीए पुंडरक वना ॥ ता चे हंसा सगले जनां ॥ क्रिस्ना ते जानऊ हरि हरि नाचंती नाचना ॥१॥

पहिल पुरसाबिरा ॥ अथोन पुरसादमरा ॥ असगा अस उसगा ॥ हरि का बागरा नाचै पिंधी महि सागरा ॥१॥ रहाउ ॥

नाचंती गोपी जंना ॥ नईआ ते बैरे कंना ॥ तरकु न चा ॥ भ्रमीआ चा ॥ केसवा बचउनी अईए मईए एक आन जीउ ॥२॥

पिंधी उभकले संसारा ॥ भ्रमि भ्रमि आए तुम चे दुआरा ॥ तू कुनु रे ॥ मै जी ॥ नामा ॥ हो जी ॥ आला ते निवारणा जम कारणा ॥३॥४॥

(राग धनासरी -- SGGS 694) पतित पावन माधउ बिरदु तेरा ॥ धंनि ते वै मुनि जन जिन धिआइओ हरि प्रभु मेरा ॥१॥

मेरै माथै लागी ले धूरि गोबिंद चरनन की ॥ सुरि नर मुनि जन तिनहू ते दूरि ॥१॥ रहाउ ॥

दीन का दइआलु माधौ गरब परहारी ॥ चरन सरन नामा बलि तिहारी ॥२॥५॥

(राग टोडी -- SGGS 718) टोडी बाणी भगतां की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
कोई बोलै निरवा कोई बोलै दूरि ॥ जल की माछुली चरै खजूरि ॥१॥

कांइ रे बकबादु लाइओ ॥ जिनि हरि पाइओ तिनहि छपाइओ ॥१॥ रहाउ ॥

पंडितु होइ कै बेदु बखानै ॥ मूरखु नामदेउ रामहि जानै ॥२॥१॥

(राग टोडी -- SGGS 718) कउन को कलंकु रहिओ राम नामु लेत ही ॥ पतित पवित भए रामु कहत ही ॥१॥ रहाउ ॥

राम संगि नामदेव जन कउ प्रतगिआ आई ॥ एकादसी ब्रतु रहै काहे कउ तीरथ जाईं ॥१॥

भनति नामदेउ सुक्रित सुमति भए ॥ गुरमति रामु कहि को को न बैकुंठि गए ॥२॥२॥

(राग टोडी -- SGGS 718) तीनि छंदे खेलु आछै ॥१॥ रहाउ ॥

कु्मभार के घर हांडी आछै राजा के घर सांडी गो ॥ बामन के घर रांडी आछै रांडी सांडी हांडी गो ॥१॥

बाणीए के घर हींगु आछै भैसर माथै सींगु गो ॥ देवल मधे लीगु आछै लीगु सीगु हीगु गो ॥२॥

तेली कै घर तेलु आछै जंगल मधे बेल गो ॥ माली के घर केल आछै केल बेल तेल गो ॥३॥

संतां मधे गोबिंदु आछै गोकल मधे सिआम गो ॥ नामे मधे रामु आछै राम सिआम गोबिंद गो ॥४॥३॥

(राग तिलंग -- SGGS 727) नामदेव जी ॥
मै अंधुले की टेक तेरा नामु खुंदकारा ॥ मै गरीब मै मसकीन तेरा नामु है अधारा ॥१॥ रहाउ ॥

करीमां रहीमां अलाह तू गनीं ॥ हाजरा हजूरि दरि पेसि तूं मनीं ॥१॥

दरीआउ तू दिहंद तू बिसीआर तू धनी ॥ देहि लेहि एकु तूं दिगर को नही ॥२॥

तूं दानां तूं बीनां मै बीचारु किआ करी ॥ नामे चे सुआमी बखसंद तूं हरी ॥३॥१॥२॥

(राग तिलंग -- SGGS 727) हले यारां हले यारां खुसिखबरी ॥ बलि बलि जांउ हउ बलि बलि जांउ ॥ नीकी तेरी बिगारी आले तेरा नाउ ॥१॥ रहाउ ॥

कुजा आमद कुजा रफती कुजा मे रवी ॥ द्वारिका नगरी रासि बुगोई ॥१॥

खूबु तेरी पगरी मीठे तेरे बोल ॥ द्वारिका नगरी काहे के मगोल ॥२॥

चंदीं हजार आलम एकल खानां ॥ हम चिनी पातिसाह सांवले बरनां ॥३॥

असपति गजपति नरह नरिंद ॥ नामे के स्वामी मीर मुकंद ॥४॥२॥३॥

(राग बिलावलु -- SGGS 857) बिलावलु बाणी भगत नामदेव जी की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सफल जनमु मो कउ गुर कीना ॥ दुख बिसारि सुख अंतरि लीना ॥१॥

गिआन अंजनु मो कउ गुरि दीना ॥ राम नाम बिनु जीवनु मन हीना ॥१॥ रहाउ ॥

नामदेइ सिमरनु करि जानां ॥ जगजीवन सिउ जीउ समानां ॥२॥१॥

(राग गोंड -- SGGS 873) रागु गोंड बाणी नामदेउ जी की घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
असुमेध जगने ॥ तुला पुरख दाने ॥ प्राग इसनाने ॥१॥

तउ न पुजहि हरि कीरति नामा ॥ अपुने रामहि भजु रे मन आलसीआ ॥१॥ रहाउ ॥

गइआ पिंडु भरता ॥ बनारसि असि बसता ॥ मुखि बेद चतुर पड़ता ॥२॥

सगल धरम अछिता ॥ गुर गिआन इंद्री द्रिड़ता ॥ खटु करम सहित रहता ॥३॥

सिवा सकति स्मबादं ॥ मन छोडि छोडि सगल भेदं ॥ सिमरि सिमरि गोबिंदं ॥ भजु नामा तरसि भव सिंधं ॥४॥१॥

(राग गोंड -- SGGS 873) गोंड ॥
नाद भ्रमे जैसे मिरगाए ॥ प्रान तजे वा को धिआनु न जाए ॥१॥

ऐसे रामा ऐसे हेरउ ॥ रामु छोडि चितु अनत न फेरउ ॥१॥ रहाउ ॥

जिउ मीना हेरै पसूआरा ॥ सोना गढते हिरै सुनारा ॥२॥

जिउ बिखई हेरै पर नारी ॥ कउडा डारत हिरै जुआरी ॥३॥

जह जह देखउ तह तह रामा ॥ हरि के चरन नित धिआवै नामा ॥४॥२॥

(राग गोंड -- SGGS 873) गोंड ॥
मो कउ तारि ले रामा तारि ले ॥ मै अजानु जनु तरिबे न जानउ बाप बीठुला बाह दे ॥१॥ रहाउ ॥

नर ते सुर होइ जात निमख मै सतिगुर बुधि सिखलाई ॥ नर ते उपजि सुरग कउ जीतिओ सो अवखध मै पाई ॥१॥

जहा जहा धूअ नारदु टेके नैकु टिकावहु मोहि ॥ तेरे नाम अविल्मबि बहुतु जन उधरे नामे की निज मति एह ॥२॥३॥

(राग गोंड -- SGGS 874) गोंड ॥
मोहि लागती तालाबेली ॥ बछरे बिनु गाइ अकेली ॥१॥

पानीआ बिनु मीनु तलफै ॥ ऐसे राम नामा बिनु बापुरो नामा ॥१॥ रहाउ ॥

जैसे गाइ का बाछा छूटला ॥ थन चोखता माखनु घूटला ॥२॥

नामदेउ नाराइनु पाइआ ॥ गुरु भेटत अलखु लखाइआ ॥३॥

जैसे बिखै हेत पर नारी ॥ ऐसे नामे प्रीति मुरारी ॥४॥

जैसे तापते निरमल घामा ॥ तैसे राम नामा बिनु बापुरो नामा ॥५॥४॥

(राग गोंड -- SGGS 874) रागु गोंड बाणी नामदेउ जीउ की घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि हरि करत मिटे सभि भरमा ॥ हरि को नामु लै ऊतम धरमा ॥ हरि हरि करत जाति कुल हरी ॥ सो हरि अंधुले की लाकरी ॥१॥

हरए नमसते हरए नमह ॥ हरि हरि करत नही दुखु जमह ॥१॥ रहाउ ॥

हरि हरनाकस हरे परान ॥ अजैमल कीओ बैकुंठहि थान ॥ सूआ पड़ावत गनिका तरी ॥ सो हरि नैनहु की पूतरी ॥२॥

हरि हरि करत पूतना तरी ॥ बाल घातनी कपटहि भरी ॥ सिमरन द्रोपद सुत उधरी ॥ गऊतम सती सिला निसतरी ॥३॥

केसी कंस मथनु जिनि कीआ ॥ जीअ दानु काली कउ दीआ ॥ प्रणवै नामा ऐसो हरी ॥ जासु जपत भै अपदा टरी ॥४॥१॥५॥

(राग गोंड -- SGGS 874) गोंड ॥
भैरउ भूत सीतला धावै ॥ खर बाहनु उहु छारु उडावै ॥१॥

हउ तउ एकु रमईआ लैहउ ॥ आन देव बदलावनि दैहउ ॥१॥ रहाउ ॥

सिव सिव करते जो नरु धिआवै ॥ बरद चढे डउरू ढमकावै ॥२॥

महा माई की पूजा करै ॥ नर सै नारि होइ अउतरै ॥३॥

तू कहीअत ही आदि भवानी ॥ मुकति की बरीआ कहा छपानी ॥४॥

गुरमति राम नाम गहु मीता ॥ प्रणवै नामा इउ कहै गीता ॥५॥२॥६॥

(राग बिलावलु गोंड -- SGGS 874) बिलावलु गोंड ॥
आजु नामे बीठलु देखिआ मूरख को समझाऊ रे ॥ रहाउ ॥ पांडे तुमरी गाइत्री लोधे का खेतु खाती थी ॥ लै करि ठेगा टगरी तोरी लांगत लांगत जाती थी ॥१॥

पांडे तुमरा महादेउ धउले बलद चड़िआ आवतु देखिआ था ॥ मोदी के घर खाणा पाका वा का लड़का मारिआ था ॥२॥

पांडे तुमरा रामचंदु सो भी आवतु देखिआ था ॥ रावन सेती सरबर होई घर की जोइ गवाई थी ॥३॥

हिंदू अंन्हा तुरकू काणा ॥ दुहां ते गिआनी सिआणा ॥ हिंदू पूजै देहुरा मुसलमाणु मसीति ॥ नामे सोई सेविआ जह देहुरा न मसीति ॥४॥३॥७॥

(राग रामकली -- SGGS 972) बाणी नामदेउ जीउ की रामकली घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आनीले कागदु काटीले गूडी आकास मधे भरमीअले ॥ पंच जना सिउ बात बतऊआ चीतु सु डोरी राखीअले ॥१॥

मनु राम नामा बेधीअले ॥ जैसे कनिक कला चितु मांडीअले ॥१॥ रहाउ ॥

आनीले कु्मभु भराईले ऊदक राज कुआरि पुरंदरीए ॥ हसत बिनोद बीचार करती है चीतु सु गागरि राखीअले ॥२॥

मंदरु एकु दुआर दस जा के गऊ चरावन छाडीअले ॥ पांच कोस पर गऊ चरावत चीतु सु बछरा राखीअले ॥३॥

कहत नामदेउ सुनहु तिलोचन बालकु पालन पउढीअले ॥ अंतरि बाहरि काज बिरूधी चीतु सु बारिक राखीअले ॥४॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 972) बेद पुरान सासत्र आनंता गीत कबित न गावउगो ॥ अखंड मंडल निरंकार महि अनहद बेनु बजावउगो ॥१॥

बैरागी रामहि गावउगो ॥ सबदि अतीत अनाहदि राता आकुल कै घरि जाउगो ॥१॥ रहाउ ॥

इड़ा पिंगुला अउरु सुखमना पउनै बंधि रहाउगो ॥ चंदु सूरजु दुइ सम करि राखउ ब्रहम जोति मिलि जाउगो ॥२॥

तीरथ देखि न जल महि पैसउ जीअ जंत न सतावउगो ॥ अठसठि तीरथ गुरू दिखाए घट ही भीतरि न्हाउगो ॥३॥

पंच सहाई जन की सोभा भलो भलो न कहावउगो ॥ नामा कहै चितु हरि सिउ राता सुंन समाधि समाउगो ॥४॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 973) माइ न होती बापु न होता करमु न होती काइआ ॥ हम नही होते तुम नही होते कवनु कहां ते आइआ ॥१॥

राम कोइ न किस ही केरा ॥ जैसे तरवरि पंखि बसेरा ॥१॥ रहाउ ॥

चंदु न होता सूरु न होता पानी पवनु मिलाइआ ॥ सासतु न होता बेदु न होता करमु कहां ते आइआ ॥२॥

खेचर भूचर तुलसी माला गुर परसादी पाइआ ॥ नामा प्रणवै परम ततु है सतिगुर होइ लखाइआ ॥३॥३॥

(राग रामकली -- SGGS 973) रामकली घरु २ ॥
बानारसी तपु करै उलटि तीरथ मरै अगनि दहै काइआ कलपु कीजै ॥ असुमेध जगु कीजै सोना गरभ दानु दीजै राम नाम सरि तऊ न पूजै ॥१॥

छोडि छोडि रे पाखंडी मन कपटु न कीजै ॥ हरि का नामु नित नितहि लीजै ॥१॥ रहाउ ॥

गंगा जउ गोदावरि जाईऐ कु्मभि जउ केदार न्हाईऐ गोमती सहस गऊ दानु कीजै ॥ कोटि जउ तीरथ करै तनु जउ हिवाले गारै राम नाम सरि तऊ न पूजै ॥२॥

असु दान गज दान सिहजा नारी भूमि दान ऐसो दानु नित नितहि कीजै ॥ आतम जउ निरमाइलु कीजै आप बराबरि कंचनु दीजै राम नाम सरि तऊ न पूजै ॥३॥

मनहि न कीजै रोसु जमहि न दीजै दोसु निरमल निरबाण पदु चीन्हि लीजै ॥ जसरथ राइ नंदु राजा मेरा राम चंदु प्रणवै नामा ततु रसु अम्रितु पीजै ॥४॥४॥

(राग माली गउड़ा -- SGGS 988) माली गउड़ा बाणी भगत नामदेव जी की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
धनि धंनि ओ राम बेनु बाजै ॥ मधुर मधुर धुनि अनहत गाजै ॥१॥ रहाउ ॥

धनि धनि मेघा रोमावली ॥ धनि धनि क्रिसन ओढै कांबली ॥१॥

धनि धनि तू माता देवकी ॥ जिह ग्रिह रमईआ कवलापती ॥२॥

धनि धनि बन खंड बिंद्राबना ॥ जह खेलै स्री नाराइना ॥३॥

बेनु बजावै गोधनु चरै ॥ नामे का सुआमी आनद करै ॥४॥१॥

(राग माली गउड़ा -- SGGS 988) मेरो बापु माधउ तू धनु केसौ सांवलीओ बीठुलाइ ॥१॥ रहाउ ॥

कर धरे चक्र बैकुंठ ते आए गज हसती के प्रान उधारीअले ॥ दुहसासन की सभा द्रोपती अ्मबर लेत उबारीअले ॥१॥

गोतम नारि अहलिआ तारी पावन केतक तारीअले ॥ ऐसा अधमु अजाति नामदेउ तउ सरनागति आईअले ॥२॥२॥

(राग माली गउड़ा -- SGGS 988) सभै घट रामु बोलै रामा बोलै ॥ राम बिना को बोलै रे ॥१॥ रहाउ ॥

एकल माटी कुंजर चीटी भाजन हैं बहु नाना रे ॥ असथावर जंगम कीट पतंगम घटि घटि रामु समाना रे ॥१॥

एकल चिंता राखु अनंता अउर तजहु सभ आसा रे ॥ प्रणवै नामा भए निहकामा को ठाकुरु को दासा रे ॥२॥३॥

(राग मारू -- SGGS 1105) कबीर का सबदु रागु मारू बाणी नामदेउ जी की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
चारि मुकति चारै सिधि मिलि कै दूलह प्रभ की सरनि परिओ ॥ मुकति भइओ चउहूं जुग जानिओ जसु कीरति माथै छत्रु धरिओ ॥१॥

राजा राम जपत को को न तरिओ ॥ गुर उपदेसि साध की संगति भगतु भगतु ता को नामु परिओ ॥१॥ रहाउ ॥

संख चक्र माला तिलकु बिराजित देखि प्रतापु जमु डरिओ ॥ निरभउ भए राम बल गरजित जनम मरन संताप हिरिओ ॥२॥

अ्मबरीक कउ दीओ अभै पदु राजु भभीखन अधिक करिओ ॥ नउ निधि ठाकुरि दई सुदामै ध्रूअ अटलु अजहू न टरिओ ॥३॥

भगत हेति मारिओ हरनाखसु नरसिंघ रूप होइ देह धरिओ ॥ नामा कहै भगति बसि केसव अजहूं बलि के दुआर खरो ॥४॥१॥

(राग भैरउ -- SGGS 1163) भैरउ बाणी नामदेउ जीउ की घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रे जिहबा करउ सत खंड ॥ जामि न उचरसि स्री गोबिंद ॥१॥

रंगी ले जिहबा हरि कै नाइ ॥ सुरंग रंगीले हरि हरि धिआइ ॥१॥ रहाउ ॥

मिथिआ जिहबा अवरें काम ॥ निरबाण पदु इकु हरि को नामु ॥२॥

असंख कोटि अन पूजा करी ॥ एक न पूजसि नामै हरी ॥३॥

प्रणवै नामदेउ इहु करणा ॥ अनंत रूप तेरे नाराइणा ॥४॥१॥

(राग भैरउ -- SGGS 1163) पर धन पर दारा परहरी ॥ ता कै निकटि बसै नरहरी ॥१॥

जो न भजंते नाराइणा ॥ तिन का मै न करउ दरसना ॥१॥ रहाउ ॥

जिन कै भीतरि है अंतरा ॥ जैसे पसु तैसे ओइ नरा ॥२॥

प्रणवति नामदेउ नाकहि बिना ॥ ना सोहै बतीस लखना ॥३॥२॥

(राग भैरउ -- SGGS 1163) दूधु कटोरै गडवै पानी ॥ कपल गाइ नामै दुहि आनी ॥१॥

दूधु पीउ गोबिंदे राइ ॥ दूधु पीउ मेरो मनु पतीआइ ॥ नाही त घर को बापु रिसाइ ॥१॥ रहाउ ॥

सोइन कटोरी अम्रित भरी ॥ लै नामै हरि आगै धरी ॥२॥

एकु भगतु मेरे हिरदे बसै ॥ नामे देखि नराइनु हसै ॥३॥

दूधु पीआइ भगतु घरि गइआ ॥ नामे हरि का दरसनु भइआ ॥४॥३॥

(राग भैरउ -- SGGS 1164) मै बउरी मेरा रामु भतारु ॥ रचि रचि ता कउ करउ सिंगारु ॥१॥

भले निंदउ भले निंदउ भले निंदउ लोगु ॥ तनु मनु राम पिआरे जोगु ॥१॥ रहाउ ॥

बादु बिबादु काहू सिउ न कीजै ॥ रसना राम रसाइनु पीजै ॥२॥

अब जीअ जानि ऐसी बनि आई ॥ मिलउ गुपाल नीसानु बजाई ॥३॥

उसतति निंदा करै नरु कोई ॥ नामे स्रीरंगु भेटल सोई ॥४॥४॥

(राग भैरउ -- SGGS 1164) कबहू खीरि खाड घीउ न भावै ॥ कबहू घर घर टूक मगावै ॥ कबहू कूरनु चने बिनावै ॥१॥

जिउ रामु राखै तिउ रहीऐ रे भाई ॥ हरि की महिमा किछु कथनु न जाई ॥१॥ रहाउ ॥

कबहू तुरे तुरंग नचावै ॥ कबहू पाइ पनहीओ न पावै ॥२॥

कबहू खाट सुपेदी सुवावै ॥ कबहू भूमि पैआरु न पावै ॥३॥

भनति नामदेउ इकु नामु निसतारै ॥ जिह गुरु मिलै तिह पारि उतारै ॥४॥५॥

(राग भैरउ -- SGGS 1164) हसत खेलत तेरे देहुरे आइआ ॥ भगति करत नामा पकरि उठाइआ ॥१॥

हीनड़ी जाति मेरी जादिम राइआ ॥ छीपे के जनमि काहे कउ आइआ ॥१॥ रहाउ ॥

लै कमली चलिओ पलटाइ ॥ देहुरै पाछै बैठा जाइ ॥२॥

जिउ जिउ नामा हरि गुण उचरै ॥ भगत जनां कउ देहुरा फिरै ॥३॥६॥

(राग भैरउ -- SGGS 1164) भैरउ नामदेउ जीउ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जैसी भूखे प्रीति अनाज ॥ त्रिखावंत जल सेती काज ॥ जैसी मूड़ कुट्मब पराइण ॥ ऐसी नामे प्रीति नराइण ॥१॥

नामे प्रीति नाराइण लागी ॥ सहज सुभाइ भइओ बैरागी ॥१॥ रहाउ ॥

जैसी पर पुरखा रत नारी ॥ लोभी नरु धन का हितकारी ॥ कामी पुरख कामनी पिआरी ॥ ऐसी नामे प्रीति मुरारी ॥२॥

साई प्रीति जि आपे लाए ॥ गुर परसादी दुबिधा जाए ॥ कबहु न तूटसि रहिआ समाइ ॥ नामे चितु लाइआ सचि नाइ ॥३॥

जैसी प्रीति बारिक अरु माता ॥ ऐसा हरि सेती मनु राता ॥ प्रणवै नामदेउ लागी प्रीति ॥ गोबिदु बसै हमारै चीति ॥४॥१॥७॥

(राग भैरउ -- SGGS 1164) घर की नारि तिआगै अंधा ॥ पर नारी सिउ घालै धंधा ॥ जैसे सि्मबलु देखि सूआ बिगसाना ॥ अंत की बार मूआ लपटाना ॥१॥

पापी का घरु अगने माहि ॥ जलत रहै मिटवै कब नाहि ॥१॥ रहाउ ॥

हरि की भगति न देखै जाइ ॥ मारगु छोडि अमारगि पाइ ॥ मूलहु भूला आवै जाइ ॥ अम्रितु डारि लादि बिखु खाइ ॥२॥

जिउ बेस्वा के परै अखारा ॥ कापरु पहिरि करहि सींगारा ॥ पूरे ताल निहाले सास ॥ वा के गले जम का है फास ॥३॥

जा के मसतकि लिखिओ करमा ॥ सो भजि परि है गुर की सरना ॥ कहत नामदेउ इहु बीचारु ॥ इन बिधि संतहु उतरहु पारि ॥४॥२॥८॥

(राग भैरउ -- SGGS 1165) संडा मरका जाइ पुकारे ॥ पड़ै नही हम ही पचि हारे ॥ रामु कहै कर ताल बजावै चटीआ सभै बिगारे ॥१॥

राम नामा जपिबो करै ॥ हिरदै हरि जी को सिमरनु धरै ॥१॥ रहाउ ॥

बसुधा बसि कीनी सभ राजे बिनती करै पटरानी ॥ पूतु प्रहिलादु कहिआ नही मानै तिनि तउ अउरै ठानी ॥२॥

दुसट सभा मिलि मंतर उपाइआ करसह अउध घनेरी ॥ गिरि तर जल जुआला भै राखिओ राजा रामि माइआ फेरी ॥३॥

काढि खड़गु कालु भै कोपिओ मोहि बताउ जु तुहि राखै ॥ पीत पीतांबर त्रिभवण धणी थ्मभ माहि हरि भाखै ॥४॥

हरनाखसु जिनि नखह बिदारिओ सुरि नर कीए सनाथा ॥ कहि नामदेउ हम नरहरि धिआवह रामु अभै पद दाता ॥५॥३॥९॥

(राग भैरउ -- SGGS 1165) सुलतानु पूछै सुनु बे नामा ॥ देखउ राम तुम्हारे कामा ॥१॥

नामा सुलताने बाधिला ॥ देखउ तेरा हरि बीठुला ॥१॥ रहाउ ॥

बिसमिलि गऊ देहु जीवाइ ॥ नातरु गरदनि मारउ ठांइ ॥२॥

बादिसाह ऐसी किउ होइ ॥ बिसमिलि कीआ न जीवै कोइ ॥३॥

मेरा कीआ कछू न होइ ॥ करि है रामु होइ है सोइ ॥४॥

बादिसाहु चड़्हिओ अहंकारि ॥ गज हसती दीनो चमकारि ॥५॥

रुदनु करै नामे की माइ ॥ छोडि रामु की न भजहि खुदाइ ॥६॥

न हउ तेरा पूंगड़ा न तू मेरी माइ ॥ पिंडु पड़ै तउ हरि गुन गाइ ॥७॥

करै गजिंदु सुंड की चोट ॥ नामा उबरै हरि की ओट ॥८॥

काजी मुलां करहि सलामु ॥ इनि हिंदू मेरा मलिआ मानु ॥९॥

बादिसाह बेनती सुनेहु ॥ नामे सर भरि सोना लेहु ॥१०॥

मालु लेउ तउ दोजकि परउ ॥ दीनु छोडि दुनीआ कउ भरउ ॥११॥

पावहु बेड़ी हाथहु ताल ॥ नामा गावै गुन गोपाल ॥१२॥

गंग जमुन जउ उलटी बहै ॥ तउ नामा हरि करता रहै ॥१३॥

सात घड़ी जब बीती सुणी ॥ अजहु न आइओ त्रिभवण धणी ॥१४॥

पाखंतण बाज बजाइला ॥ गरुड़ चड़्हे गोबिंद आइला ॥१५॥

अपने भगत परि की प्रतिपाल ॥ गरुड़ चड़्हे आए गोपाल ॥१६॥

कहहि त धरणि इकोडी करउ ॥ कहहि त ले करि ऊपरि धरउ ॥१७॥

कहहि त मुई गऊ देउ जीआइ ॥ सभु कोई देखै पतीआइ ॥१८॥

नामा प्रणवै सेल मसेल ॥ गऊ दुहाई बछरा मेलि ॥१९॥

दूधहि दुहि जब मटुकी भरी ॥ ले बादिसाह के आगे धरी ॥२०॥

बादिसाहु महल महि जाइ ॥ अउघट की घट लागी आइ ॥२१॥

काजी मुलां बिनती फुरमाइ ॥ बखसी हिंदू मै तेरी गाइ ॥२२॥

नामा कहै सुनहु बादिसाह ॥ इहु किछु पतीआ मुझै दिखाइ ॥२३॥

इस पतीआ का इहै परवानु ॥ साचि सीलि चालहु सुलितान ॥२४॥

नामदेउ सभ रहिआ समाइ ॥ मिलि हिंदू सभ नामे पहि जाहि ॥२५॥

जउ अब की बार न जीवै गाइ ॥ त नामदेव का पतीआ जाइ ॥२६॥

नामे की कीरति रही संसारि ॥ भगत जनां ले उधरिआ पारि ॥२७॥

सगल कलेस निंदक भइआ खेदु ॥ नामे नाराइन नाही भेदु ॥२८॥१॥१०॥

(राग भैरउ -- SGGS 1166) घरु २ ॥
जउ गुरदेउ त मिलै मुरारि ॥ जउ गुरदेउ त उतरै पारि ॥ जउ गुरदेउ त बैकुंठ तरै ॥ जउ गुरदेउ त जीवत मरै ॥१॥

सति सति सति सति सति गुरदेव ॥ झूठु झूठु झूठु झूठु आन सभ सेव ॥१॥ रहाउ ॥

जउ गुरदेउ त नामु द्रिड़ावै ॥ जउ गुरदेउ न दह दिस धावै ॥ जउ गुरदेउ पंच ते दूरि ॥ जउ गुरदेउ न मरिबो झूरि ॥२॥

जउ गुरदेउ त अम्रित बानी ॥ जउ गुरदेउ त अकथ कहानी ॥ जउ गुरदेउ त अम्रित देह ॥ जउ गुरदेउ नामु जपि लेहि ॥३॥

जउ गुरदेउ भवन त्रै सूझै ॥ जउ गुरदेउ ऊच पद बूझै ॥ जउ गुरदेउ त सीसु अकासि ॥ जउ गुरदेउ सदा साबासि ॥४॥

जउ गुरदेउ सदा बैरागी ॥ जउ गुरदेउ पर निंदा तिआगी ॥ जउ गुरदेउ बुरा भला एक ॥ जउ गुरदेउ लिलाटहि लेख ॥५॥

जउ गुरदेउ कंधु नही हिरै ॥ जउ गुरदेउ देहुरा फिरै ॥ जउ गुरदेउ त छापरि छाई ॥ जउ गुरदेउ सिहज निकसाई ॥६॥

जउ गुरदेउ त अठसठि नाइआ ॥ जउ गुरदेउ तनि चक्र लगाइआ ॥ जउ गुरदेउ त दुआदस सेवा ॥ जउ गुरदेउ सभै बिखु मेवा ॥७॥

जउ गुरदेउ त संसा टूटै ॥ जउ गुरदेउ त जम ते छूटै ॥ जउ गुरदेउ त भउजल तरै ॥ जउ गुरदेउ त जनमि न मरै ॥८॥

जउ गुरदेउ अठदस बिउहार ॥ जउ गुरदेउ अठारह भार ॥ बिनु गुरदेउ अवर नही जाई ॥ नामदेउ गुर की सरणाई ॥९॥१॥२॥११॥

(राग भैरउ -- SGGS 1167) नामदेव ॥
आउ कलंदर केसवा ॥ करि अबदाली भेसवा ॥ रहाउ ॥ जिनि आकास कुलह सिरि कीनी कउसै सपत पयाला ॥ चमर पोस का मंदरु तेरा इह बिधि बने गुपाला ॥१॥

छपन कोटि का पेहनु तेरा सोलह सहस इजारा ॥ भार अठारह मुदगरु तेरा सहनक सभ संसारा ॥२॥

देही महजिदि मनु मउलाना सहज निवाज गुजारै ॥ बीबी कउला सउ काइनु तेरा निरंकार आकारै ॥३॥

भगति करत मेरे ताल छिनाए किह पहि करउ पुकारा ॥ नामे का सुआमी अंतरजामी फिरे सगल बेदेसवा ॥४॥१॥

(राग बसंत -- SGGS 1195) बसंतु बाणी नामदेउ जी की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
साहिबु संकटवै सेवकु भजै ॥ चिरंकाल न जीवै दोऊ कुल लजै ॥१॥

तेरी भगति न छोडउ भावै लोगु हसै ॥ चरन कमल मेरे हीअरे बसैं ॥१॥ रहाउ ॥

जैसे अपने धनहि प्रानी मरनु मांडै ॥ तैसे संत जनां राम नामु न छाडैं ॥२॥

गंगा गइआ गोदावरी संसार के कामा ॥ नाराइणु सुप्रसंन होइ त सेवकु नामा ॥३॥१॥

(राग बसंत -- SGGS 1196) लोभ लहरि अति नीझर बाजै ॥ काइआ डूबै केसवा ॥१॥

संसारु समुंदे तारि गोबिंदे ॥ तारि लै बाप बीठुला ॥१॥ रहाउ ॥

अनिल बेड़ा हउ खेवि न साकउ ॥ तेरा पारु न पाइआ बीठुला ॥२॥

होहु दइआलु सतिगुरु मेलि तू मो कउ ॥ पारि उतारे केसवा ॥३॥

नामा कहै हउ तरि भी न जानउ ॥ मो कउ बाह देहि बाह देहि बीठुला ॥४॥२॥

(राग बसंत -- SGGS 1196) सहज अवलि धूड़ि मणी गाडी चालती ॥ पीछै तिनका लै करि हांकती ॥१॥

जैसे पनकत थ्रूटिटि हांकती ॥ सरि धोवन चाली लाडुली ॥१॥ रहाउ ॥

धोबी धोवै बिरह बिराता ॥ हरि चरन मेरा मनु राता ॥२॥

भणति नामदेउ रमि रहिआ ॥ अपने भगत पर करि दइआ ॥३॥३॥

(राग सारंग -- SGGS 1252) सारंग बाणी नामदेउ जी की ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
काएं रे मन बिखिआ बन जाइ ॥ भूलौ रे ठगमूरी खाइ ॥१॥ रहाउ ॥

जैसे मीनु पानी महि रहै ॥ काल जाल की सुधि नही लहै ॥ जिहबा सुआदी लीलित लोह ॥ ऐसे कनिक कामनी बाधिओ मोह ॥१॥

जिउ मधु माखी संचै अपार ॥ मधु लीनो मुखि दीनी छारु ॥ गऊ बाछ कउ संचै खीरु ॥ गला बांधि दुहि लेइ अहीरु ॥२॥

माइआ कारनि स्रमु अति करै ॥ सो माइआ लै गाडै धरै ॥ अति संचै समझै नही मूड़्ह ॥ धनु धरती तनु होइ गइओ धूड़ि ॥३॥

काम क्रोध त्रिसना अति जरै ॥ साधसंगति कबहू नही करै ॥ कहत नामदेउ ता ची आणि ॥ निरभै होइ भजीऐ भगवान ॥४॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1252) बदहु की न होड माधउ मो सिउ ॥ ठाकुर ते जनु जन ते ठाकुरु खेलु परिओ है तो सिउ ॥१॥ रहाउ ॥

आपन देउ देहुरा आपन आप लगावै पूजा ॥ जल ते तरंग तरंग ते है जलु कहन सुनन कउ दूजा ॥१॥

आपहि गावै आपहि नाचै आपि बजावै तूरा ॥ कहत नामदेउ तूं मेरो ठाकुरु जनु ऊरा तू पूरा ॥२॥२॥

(राग सारंग -- SGGS 1252) दास अनिंन मेरो निज रूप ॥ दरसन निमख ताप त्रई मोचन परसत मुकति करत ग्रिह कूप ॥१॥ रहाउ ॥

मेरी बांधी भगतु छडावै बांधै भगतु न छूटै मोहि ॥ एक समै मो कउ गहि बांधै तउ फुनि मो पै जबाबु न होइ ॥१॥

मै गुन बंध सगल की जीवनि मेरी जीवनि मेरे दास ॥ नामदेव जा के जीअ ऐसी तैसो ता कै प्रेम प्रगास ॥२॥३॥

(राग मलार -- SGGS 1292) रागु मलार बाणी भगत नामदेव जीउ की ॥
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सेवीले गोपाल राइ अकुल निरंजन ॥ भगति दानु दीजै जाचहि संत जन ॥१॥ रहाउ ॥

जां चै घरि दिग दिसै सराइचा बैकुंठ भवन चित्रसाला सपत लोक सामानि पूरीअले ॥ जां चै घरि लछिमी कुआरी चंदु सूरजु दीवड़े कउतकु कालु बपुड़ा कोटवालु सु करा सिरी ॥ सु ऐसा राजा स्री नरहरी ॥१॥

जां चै घरि कुलालु ब्रहमा चतुर मुखु डांवड़ा जिनि बिस्व संसारु राचीले ॥ जां कै घरि ईसरु बावला जगत गुरू तत सारखा गिआनु भाखीले ॥ पापु पुंनु जां चै डांगीआ दुआरै चित्र गुपतु लेखीआ ॥ धरम राइ परुली प्रतिहारु ॥ सो ऐसा राजा स्री गोपालु ॥२॥

जां चै घरि गण गंधरब रिखी बपुड़े ढाढीआ गावंत आछै ॥ सरब सासत्र बहु रूपीआ अनगरूआ आखाड़ा मंडलीक बोल बोलहि काछे ॥ चउर ढूल जां चै है पवणु ॥ चेरी सकति जीति ले भवणु ॥ अंड टूक जा चै भसमती ॥ सो ऐसा राजा त्रिभवण पती ॥३॥

जां चै घरि कूरमा पालु सहस्र फनी बासकु सेज वालूआ ॥ अठारह भार बनासपती मालणी छिनवै करोड़ी मेघ माला पाणीहारीआ ॥ नख प्रसेव जा चै सुरसरी ॥ सपत समुंद जां चै घड़थली ॥ एते जीअ जां चै वरतणी ॥ सो ऐसा राजा त्रिभवण धणी ॥४॥

जां चै घरि निकट वरती अरजनु ध्रू प्रहलादु अ्मबरीकु नारदु नेजै सिध बुध गण गंधरब बानवै हेला ॥ एते जीअ जां चै हहि घरी ॥ सरब बिआपिक अंतर हरी ॥ प्रणवै नामदेउ तां ची आणि ॥ सगल भगत जा चै नीसाणि ॥५॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1292) मलार ॥
मो कउ तूं न बिसारि तू न बिसारि ॥ तू न बिसारे रामईआ ॥१॥ रहाउ ॥

आलावंती इहु भ्रमु जो है मुझ ऊपरि सभ कोपिला ॥ सूदु सूदु करि मारि उठाइओ कहा करउ बाप बीठुला ॥१॥

मूए हूए जउ मुकति देहुगे मुकति न जानै कोइला ॥ ए पंडीआ मो कउ ढेढ कहत तेरी पैज पिछंउडी होइला ॥२॥

तू जु दइआलु क्रिपालु कहीअतु हैं अतिभुज भइओ अपारला ॥ फेरि दीआ देहुरा नामे कउ पंडीअन कउ पिछवारला ॥३॥२॥

(राग कानड़ा -- SGGS 1318) रागु कानड़ा बाणी नामदेव जीउ की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ऐसो राम राइ अंतरजामी ॥ जैसे दरपन माहि बदन परवानी ॥१॥ रहाउ ॥

बसै घटा घट लीप न छीपै ॥ बंधन मुकता जातु न दीसै ॥१॥

पानी माहि देखु मुखु जैसा ॥ नामे को सुआमी बीठलु ऐसा ॥२॥१॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1350) प्रभाती बाणी भगत नामदेव जी की
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मन की बिरथा मनु ही जानै कै बूझल आगै कहीऐ ॥ अंतरजामी रामु रवांई मै डरु कैसे चहीऐ ॥१॥

बेधीअले गोपाल गोसाई ॥ मेरा प्रभु रविआ सरबे ठाई ॥१॥ रहाउ ॥

मानै हाटु मानै पाटु मानै है पासारी ॥ मानै बासै नाना भेदी भरमतु है संसारी ॥२॥

गुर कै सबदि एहु मनु राता दुबिधा सहजि समाणी ॥ सभो हुकमु हुकमु है आपे निरभउ समतु बीचारी ॥३॥

जो जन जानि भजहि पुरखोतमु ता ची अबिगतु बाणी ॥ नामा कहै जगजीवनु पाइआ हिरदै अलख बिडाणी ॥४॥१॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1351) प्रभाती ॥
आदि जुगादि जुगादि जुगो जुगु ता का अंतु न जानिआ ॥ सरब निरंतरि रामु रहिआ रवि ऐसा रूपु बखानिआ ॥१॥

गोबिदु गाजै सबदु बाजै ॥ आनद रूपी मेरो रामईआ ॥१॥ रहाउ ॥

बावन बीखू बानै बीखे बासु ते सुख लागिला ॥ सरबे आदि परमलादि कासट चंदनु भैइला ॥२॥

तुम्ह चे पारसु हम चे लोहा संगे कंचनु भैइला ॥ तू दइआलु रतनु लालु नामा साचि समाइला ॥३॥२॥

(राग प्रभाती -- SGGS 1351) प्रभाती ॥
अकुल पुरख इकु चलितु उपाइआ ॥ घटि घटि अंतरि ब्रहमु लुकाइआ ॥१॥

जीअ की जोति न जानै कोई ॥ तै मै कीआ सु मालूमु होई ॥१॥ रहाउ ॥

जिउ प्रगासिआ माटी कु्मभेउ ॥ आप ही करता बीठुलु देउ ॥२॥

जीअ का बंधनु करमु बिआपै ॥ जो किछु कीआ सु आपै आपै ॥३॥

प्रणवति नामदेउ इहु जीउ चितवै सु लहै ॥ अमरु होइ सद आकुल रहै ॥४॥३॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates