मुंदावणी (महला 5), Mundavni (Mahalla 5) Path in Hindi Gurbani online


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मुंदावणी महला ५ ॥

थाल विचि तिंनि वसतू पईओ सतु संतोखु वीचारो ॥ अम्रित नामु ठाकुर का पइओ जिस का सभसु अधारो ॥ जे को खावै जे को भुंचै तिस का होइ उधारो ॥ एह वसतु तजी नह जाई नित नित रखु उरि धारो ॥ तम संसारु चरन लगि तरीऐ सभु नानक ब्रहम पसारो ॥१॥


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