Pt 5 - गुरू रामदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 5 - Guru Ramdas ji (Mahalla 4) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग आसा -- SGGS 442) रागु आसा छंत महला ४ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जीवनो मै जीवनु पाइआ गुरमुखि भाए राम ॥ हरि नामो हरि नामु देवै मेरै प्रानि वसाए राम ॥ हरि हरि नामु मेरै प्रानि वसाए सभु संसा दूखु गवाइआ ॥ अदिसटु अगोचरु गुर बचनि धिआइआ पवित्र परम पदु पाइआ ॥ अनहद धुनि वाजहि नित वाजे गाई सतिगुर बाणी ॥ नानक दाति करी प्रभि दातै जोती जोति समाणी ॥१॥

मनमुखा मनमुखि मुए मेरी करि माइआ राम ॥ खिनु आवै खिनु जावै दुरगंध मड़ै चितु लाइआ राम ॥ लाइआ दुरगंध मड़ै चितु लागा जिउ रंगु कसु्मभ दिखाइआ ॥ खिनु पूरबि खिनु पछमि छाए जिउ चकु कुम्हिआरि भवाइआ ॥ दुखु खावहि दुखु संचहि भोगहि दुख की बिरधि वधाई ॥ नानक बिखमु सुहेला तरीऐ जा आवै गुर सरणाई ॥२॥

मेरा ठाकुरो ठाकुरु नीका अगम अथाहा राम ॥ हरि पूजी हरि पूजी चाही मेरे सतिगुर साहा राम ॥ हरि पूजी चाही नामु बिसाही गुण गावै गुण भावै ॥ नीद भूख सभ परहरि तिआगी सुंने सुंनि समावै ॥ वणजारे इक भाती आवहि लाहा हरि नामु लै जाहे ॥ नानक मनु तनु अरपि गुर आगै जिसु प्रापति सो पाए ॥३॥

रतना रतन पदारथ बहु सागरु भरिआ राम ॥ बाणी गुरबाणी लागे तिन्ह हथि चड़िआ राम ॥ गुरबाणी लागे तिन्ह हथि चड़िआ निरमोलकु रतनु अपारा ॥ हरि हरि नामु अतोलकु पाइआ तेरी भगति भरे भंडारा ॥ समुंदु विरोलि सरीरु हम देखिआ इक वसतु अनूप दिखाई ॥ गुर गोविंदु गोविंदु गुरू है नानक भेदु न भाई ॥४॥१॥८॥

(राग आसा -- SGGS 442) आसा महला ४ ॥
झिमि झिमे झिमि झिमि वरसै अम्रित धारा राम ॥ गुरमुखे गुरमुखि नदरी रामु पिआरा राम ॥ राम नामु पिआरा जगत निसतारा राम नामि वडिआई ॥ कलिजुगि राम नामु बोहिथा गुरमुखि पारि लघाई ॥ हलति पलति राम नामि सुहेले गुरमुखि करणी सारी ॥ नानक दाति दइआ करि देवै राम नामि निसतारी ॥१॥

रामो राम नामु जपिआ दुख किलविख नास गवाइआ राम ॥ गुर परचै गुर परचै धिआइआ मै हिरदै रामु रवाइआ राम ॥ रविआ रामु हिरदै परम गति पाई जा गुर सरणाई आए ॥ लोभ विकार नाव डुबदी निकली जा सतिगुरि नामु दिड़ाए ॥ जीअ दानु गुरि पूरै दीआ राम नामि चितु लाए ॥ आपि क्रिपालु क्रिपा करि देवै नानक गुर सरणाए ॥२॥

बाणी राम नाम सुणी सिधि कारज सभि सुहाए राम ॥ रोमे रोमि रोमि रोमे मै गुरमुखि रामु धिआए राम ॥ राम नामु धिआए पवितु होइ आए तिसु रूपु न रेखिआ काई ॥ रामो रामु रविआ घट अंतरि सभ त्रिसना भूख गवाई ॥ मनु तनु सीतलु सीगारु सभु होआ गुरमति रामु प्रगासा ॥ नानक आपि अनुग्रहु कीआ हम दासनि दासनि दासा ॥३॥

जिनी रामो राम नामु विसारिआ से मनमुख मूड़ अभागी राम ॥ तिन अंतरे मोहु विआपै खिनु खिनु माइआ लागी राम ॥ माइआ मलु लागी मूड़ भए अभागी जिन राम नामु नह भाइआ ॥ अनेक करम करहि अभिमानी हरि रामो नामु चोराइआ ॥ महा बिखमु जम पंथु दुहेला कालूखत मोह अंधिआरा ॥ नानक गुरमुखि नामु धिआइआ ता पाए मोख दुआरा ॥४॥

रामो राम नामु गुरू रामु गुरमुखे जाणै राम ॥ इहु मनूआ खिनु ऊभ पइआली भरमदा इकतु घरि आणै राम ॥ मनु इकतु घरि आणै सभ गति मिति जाणै हरि रामो नामु रसाए ॥ जन की पैज रखै राम नामा प्रहिलाद उधारि तराए ॥ रामो रामु रमो रमु ऊचा गुण कहतिआ अंतु न पाइआ ॥ नानक राम नामु सुणि भीने रामै नामि समाइआ ॥५॥

जिन अंतरे राम नामु वसै तिन चिंता सभ गवाइआ राम ॥ सभि अरथा सभि धरम मिले मनि चिंदिआ सो फलु पाइआ राम ॥ मन चिंदिआ फलु पाइआ राम नामु धिआइआ राम नाम गुण गाए ॥ दुरमति कबुधि गई सुधि होई राम नामि मनु लाए ॥ सफलु जनमु सरीरु सभु होआ जितु राम नामु परगासिआ ॥ नानक हरि भजु सदा दिनु राती गुरमुखि निज घरि वासिआ ॥६॥

जिन सरधा राम नामि लगी तिन्ह दूजै चितु न लाइआ राम ॥ जे धरती सभ कंचनु करि दीजै बिनु नावै अवरु न भाइआ राम ॥ राम नामु मनि भाइआ परम सुखु पाइआ अंति चलदिआ नालि सखाई ॥ राम नाम धनु पूंजी संची ना डूबै ना जाई ॥ राम नामु इसु जुग महि तुलहा जमकालु नेड़ि न आवै ॥ नानक गुरमुखि रामु पछाता करि किरपा आपि मिलावै ॥७॥

रामो राम नामु सते सति गुरमुखि जाणिआ राम ॥ सेवको गुर सेवा लागा जिनि मनु तनु अरपि चड़ाइआ राम ॥ मनु तनु अरपिआ बहुतु मनि सरधिआ गुर सेवक भाइ मिलाए ॥ दीना नाथु जीआ का दाता पूरे गुर ते पाए ॥ गुरू सिखु सिखु गुरू है एको गुर उपदेसु चलाए ॥ राम नाम मंतु हिरदै देवै नानक मिलणु सुभाए ॥८॥२॥९॥

(राग आसा -- SGGS 444) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आसा छंत महला ४ घरु २ ॥
हरि हरि करता दूख बिनासनु पतित पावनु हरि नामु जीउ ॥ हरि सेवा भाई परम गति पाई हरि ऊतमु हरि हरि कामु जीउ ॥ हरि ऊतमु कामु जपीऐ हरि नामु हरि जपीऐ असथिरु होवै ॥ जनम मरण दोवै दुख मेटे सहजे ही सुखि सोवै ॥ हरि हरि किरपा धारहु ठाकुर हरि जपीऐ आतम रामु जीउ ॥ हरि हरि करता दूख बिनासनु पतित पावनु हरि नामु जीउ ॥१॥

हरि नामु पदारथु कलिजुगि ऊतमु हरि जपीऐ सतिगुर भाइ जीउ ॥ गुरमुखि हरि पड़ीऐ गुरमुखि हरि सुणीऐ हरि जपत सुणत दुखु जाइ जीउ ॥ हरि हरि नामु जपिआ दुखु बिनसिआ हरि नामु परम सुखु पाइआ ॥ सतिगुर गिआनु बलिआ घटि चानणु अगिआनु अंधेरु गवाइआ ॥ हरि हरि नामु तिनी आराधिआ जिन मसतकि धुरि लिखि पाइ जीउ ॥ हरि नामु पदारथु कलिजुगि ऊतमु हरि जपीऐ सतिगुर भाइ जीउ ॥२॥

हरि हरि मनि भाइआ परम सुख पाइआ हरि लाहा पदु निरबाणु जीउ ॥ हरि प्रीति लगाई हरि नामु सखाई भ्रमु चूका आवणु जाणु जीउ ॥ आवण जाणा भ्रमु भउ भागा हरि हरि हरि गुण गाइआ ॥ जनम जनम के किलविख दुख उतरे हरि हरि नामि समाइआ ॥ जिन हरि धिआइआ धुरि भाग लिखि पाइआ तिन सफलु जनमु परवाणु जीउ ॥ हरि हरि मनि भाइआ परम सुख पाइआ हरि लाहा पदु निरबाणु जीउ ॥३॥

जिन्ह हरि मीठ लगाना ते जन परधाना ते ऊतम हरि हरि लोग जीउ ॥ हरि नामु वडाई हरि नामु सखाई गुर सबदी हरि रस भोग जीउ ॥ हरि रस भोग महा निरजोग वडभागी हरि रसु पाइआ ॥ से धंनु वडे सत पुरखा पूरे जिन गुरमति नामु धिआइआ ॥ जनु नानकु रेणु मंगै पग साधू मनि चूका सोगु विजोगु जीउ ॥ जिन्ह हरि मीठ लगाना ते जन परधाना ते ऊतम हरि हरि लोग जीउ ॥४॥३॥१०॥

(राग आसा -- SGGS 445) आसा महला ४ ॥
सतजुगि सभु संतोख सरीरा पग चारे धरमु धिआनु जीउ ॥ मनि तनि हरि गावहि परम सुखु पावहि हरि हिरदै हरि गुण गिआनु जीउ ॥ गुण गिआनु पदारथु हरि हरि किरतारथु सोभा गुरमुखि होई ॥ अंतरि बाहरि हरि प्रभु एको दूजा अवरु न कोई ॥ हरि हरि लिव लाई हरि नामु सखाई हरि दरगह पावै मानु जीउ ॥ सतजुगि सभु संतोख सरीरा पग चारे धरमु धिआनु जीउ ॥१॥

तेता जुगु आइआ अंतरि जोरु पाइआ जतु संजम करम कमाइ जीउ ॥ पगु चउथा खिसिआ त्रै पग टिकिआ मनि हिरदै क्रोधु जलाइ जीउ ॥ मनि हिरदै क्रोधु महा बिसलोधु निरप धावहि लड़ि दुखु पाइआ ॥ अंतरि ममता रोगु लगाना हउमै अहंकारु वधाइआ ॥ हरि हरि क्रिपा धारी मेरै ठाकुरि बिखु गुरमति हरि नामि लहि जाइ जीउ ॥ तेता जुगु आइआ अंतरि जोरु पाइआ जतु संजम करम कमाइ जीउ ॥२॥

जुगु दुआपुरु आइआ भरमि भरमाइआ हरि गोपी कान्हु उपाइ जीउ ॥ तपु तापन तापहि जग पुंन आर्मभहि अति किरिआ करम कमाइ जीउ ॥ किरिआ करम कमाइआ पग दुइ खिसकाइआ दुइ पग टिकै टिकाइ जीउ ॥ महा जुध जोध बहु कीन्हे विचि हउमै पचै पचाइ जीउ ॥ दीन दइआलि गुरु साधु मिलाइआ मिलि सतिगुर मलु लहि जाइ जीउ ॥ जुगु दुआपुरु आइआ भरमि भरमाइआ हरि गोपी कान्हु उपाइ जीउ ॥३॥

कलिजुगु हरि कीआ पग त्रै खिसकीआ पगु चउथा टिकै टिकाइ जीउ ॥ गुर सबदु कमाइआ अउखधु हरि पाइआ हरि कीरति हरि सांति पाइ जीउ ॥ हरि कीरति रुति आई हरि नामु वडाई हरि हरि नामु खेतु जमाइआ ॥ कलिजुगि बीजु बीजे बिनु नावै सभु लाहा मूलु गवाइआ ॥ जन नानकि गुरु पूरा पाइआ मनि हिरदै नामु लखाइ जीउ ॥ कलजुगु हरि कीआ पग त्रै खिसकीआ पगु चउथा टिकै टिकाइ जीउ ॥४॥४॥११॥

(राग आसा -- SGGS 446) आसा महला ४ ॥
हरि कीरति मनि भाई परम गति पाई हरि मनि तनि मीठ लगान जीउ ॥ हरि हरि रसु पाइआ गुरमति हरि धिआइआ धुरि मसतकि भाग पुरान जीउ ॥ धुरि मसतकि भागु हरि नामि सुहागु हरि नामै हरि गुण गाइआ ॥ मसतकि मणी प्रीति बहु प्रगटी हरि नामै हरि सोहाइआ ॥ जोती जोति मिली प्रभु पाइआ मिलि सतिगुर मनूआ मान जीउ ॥ हरि कीरति मनि भाई परम गति पाई हरि मनि तनि मीठ लगान जीउ ॥१॥

हरि हरि जसु गाइआ परम पदु पाइआ ते ऊतम जन परधान जीउ ॥ तिन्ह हम चरण सरेवह खिनु खिनु पग धोवह जिन हरि मीठ लगान जीउ ॥ हरि मीठा लाइआ परम सुख पाइआ मुखि भागा रती चारे ॥ गुरमति हरि गाइआ हरि हारु उरि पाइआ हरि नामा कंठि धारे ॥ सभ एक द्रिसटि समतु करि देखै सभु आतम रामु पछान जीउ ॥ हरि हरि जसु गाइआ परम पदु पाइआ ते ऊतम जन परधान जीउ ॥२॥

सतसंगति मनि भाई हरि रसन रसाई विचि संगति हरि रसु होइ जीउ ॥ हरि हरि आराधिआ गुर सबदि विगासिआ बीजा अवरु न कोइ जीउ ॥ अवरु न कोइ हरि अम्रितु सोइ जिनि पीआ सो बिधि जाणै ॥ धनु धंनु गुरू पूरा प्रभु पाइआ लगि संगति नामु पछाणै ॥ नामो सेवि नामो आराधै बिनु नामै अवरु न कोइ जीउ ॥ सतसंगति मनि भाई हरि रसन रसाई विचि संगति हरि रसु होइ जीउ ॥३॥

हरि दइआ प्रभ धारहु पाखण हम तारहु कढि लेवहु सबदि सुभाइ जीउ ॥ मोह चीकड़ि फाथे निघरत हम जाते हरि बांह प्रभू पकराइ जीउ ॥ प्रभि बांह पकराई ऊतम मति पाई गुर चरणी जनु लागा ॥ हरि हरि नामु जपिआ आराधिआ मुखि मसतकि भागु सभागा ॥ जन नानक हरि किरपा धारी मनि हरि हरि मीठा लाइ जीउ ॥ हरि दइआ प्रभ धारहु पाखण हम तारहु कढि लेवहु सबदि सुभाइ जीउ ॥४॥५॥१२॥

(राग आसा -- SGGS 447) आसा महला ४ ॥
मनि नामु जपाना हरि हरि मनि भाना हरि भगत जना मनि चाउ जीउ ॥ जो जन मरि जीवे तिन्ह अम्रितु पीवे मनि लागा गुरमति भाउ जीउ ॥ मनि हरि हरि भाउ गुरु करे पसाउ जीवन मुकतु सुखु होई ॥ जीवणि मरणि हरि नामि सुहेले मनि हरि हरि हिरदै सोई ॥ मनि हरि हरि वसिआ गुरमति हरि रसिआ हरि हरि रस गटाक पीआउ जीउ ॥ मनि नामु जपाना हरि हरि मनि भाना हरि भगत जना मनि चाउ जीउ ॥१॥

जगि मरणु न भाइआ नित आपु लुकाइआ मत जमु पकरै लै जाइ जीउ ॥ हरि अंतरि बाहरि हरि प्रभु एको इहु जीअड़ा रखिआ न जाइ जीउ ॥ किउ जीउ रखीजै हरि वसतु लोड़ीजै जिस की वसतु सो लै जाइ जीउ ॥ मनमुख करण पलाव करि भरमे सभि अउखध दारू लाइ जीउ ॥ जिस की वसतु प्रभु लए सुआमी जन उबरे सबदु कमाइ जीउ ॥ जगि मरणु न भाइआ नित आपु लुकाइआ मत जमु पकरै लै जाइ जीउ ॥२॥

धुरि मरणु लिखाइआ गुरमुखि सोहाइआ जन उबरे हरि हरि धिआनि जीउ ॥ हरि सोभा पाई हरि नामि वडिआई हरि दरगह पैधे जानि जीउ ॥ हरि दरगह पैधे हरि नामै सीधे हरि नामै ते सुखु पाइआ ॥ जनम मरण दोवै दुख मेटे हरि रामै नामि समाइआ ॥ हरि जन प्रभु रलि एको होए हरि जन प्रभु एक समानि जीउ ॥ धुरि मरणु लिखाइआ गुरमुखि सोहाइआ जन उबरे हरि हरि धिआनि जीउ ॥३॥

जगु उपजै बिनसै बिनसि बिनासै लगि गुरमुखि असथिरु होइ जीउ ॥ गुरु मंत्रु द्रिड़ाए हरि रसकि रसाए हरि अम्रितु हरि मुखि चोइ जीउ ॥ हरि अम्रित रसु पाइआ मुआ जीवाइआ फिरि बाहुड़ि मरणु न होई ॥ हरि हरि नामु अमर पदु पाइआ हरि नामि समावै सोई ॥ जन नानक नामु अधारु टेक है बिनु नावै अवरु न कोइ जीउ ॥ जगु उपजै बिनसै बिनसि बिनासै लगि गुरमुखि असथिरु होइ जीउ ॥४॥६॥१३॥

(राग आसा -- SGGS 448) आसा महला ४ छंत ॥
वडा मेरा गोविंदु अगम अगोचरु आदि निरंजनु निरंकारु जीउ ॥ ता की गति कही न जाई अमिति वडिआई मेरा गोविंदु अलख अपार जीउ ॥ गोविंदु अलख अपारु अपर्मपरु आपु आपणा जाणै ॥ किआ इह जंत विचारे कहीअहि जो तुधु आखि वखाणै ॥ जिस नो नदरि करहि तूं अपणी सो गुरमुखि करे वीचारु जीउ ॥ वडा मेरा गोविंदु अगम अगोचरु आदि निरंजनु निरंकारु जीउ ॥१॥

तूं आदि पुरखु अपर्मपरु करता तेरा पारु न पाइआ जाइ जीउ ॥ तूं घट घट अंतरि सरब निरंतरि सभ महि रहिआ समाइ जीउ ॥ घट अंतरि पारब्रहमु परमेसरु ता का अंतु न पाइआ ॥ तिसु रूपु न रेख अदिसटु अगोचरु गुरमुखि अलखु लखाइआ ॥ सदा अनंदि रहै दिनु राती सहजे नामि समाइ जीउ ॥ तूं आदि पुरखु अपर्मपरु करता तेरा पारु न पाइआ जाइ जीउ ॥२॥

तूं सति परमेसरु सदा अबिनासी हरि हरि गुणी निधानु जीउ ॥ हरि हरि प्रभु एको अवरु न कोई तूं आपे पुरखु सुजानु जीउ ॥ पुरखु सुजानु तूं परधानु तुधु जेवडु अवरु न कोई ॥ तेरा सबदु सभु तूंहै वरतहि तूं आपे करहि सु होई ॥ हरि सभ महि रविआ एको सोई गुरमुखि लखिआ हरि नामु जीउ ॥ तूं सति परमेसरु सदा अबिनासी हरि हरि गुणी निधानु जीउ ॥३॥

सभु तूंहै करता सभ तेरी वडिआई जिउ भावै तिवै चलाइ जीउ ॥ तुधु आपे भावै तिवै चलावहि सभ तेरै सबदि समाइ जीउ ॥ सभ सबदि समावै जां तुधु भावै तेरै सबदि वडिआई ॥ गुरमुखि बुधि पाईऐ आपु गवाईऐ सबदे रहिआ समाई ॥ तेरा सबदु अगोचरु गुरमुखि पाईऐ नानक नामि समाइ जीउ ॥ सभु तूंहै करता सभ तेरी वडिआई जिउ भावै तिवै चलाइ जीउ ॥४॥७॥१४॥

(राग आसा -- SGGS 448) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आसा महला ४ छंत घरु ४ ॥
हरि अम्रित भिंने लोइणा मनु प्रेमि रतंना राम राजे ॥ मनु रामि कसवटी लाइआ कंचनु सोविंना ॥ गुरमुखि रंगि चलूलिआ मेरा मनु तनो भिंना ॥ जनु नानकु मुसकि झकोलिआ सभु जनमु धनु धंना ॥१॥

हरि प्रेम बाणी मनु मारिआ अणीआले अणीआ राम राजे ॥ जिसु लागी पीर पिरम की सो जाणै जरीआ ॥ जीवन मुकति सो आखीऐ मरि जीवै मरीआ ॥ जन नानक सतिगुरु मेलि हरि जगु दुतरु तरीआ ॥२॥

हम मूरख मुगध सरणागती मिलु गोविंद रंगा राम राजे ॥ गुरि पूरै हरि पाइआ हरि भगति इक मंगा ॥ मेरा मनु तनु सबदि विगासिआ जपि अनत तरंगा ॥ मिलि संत जना हरि पाइआ नानक सतसंगा ॥३॥

दीन दइआल सुणि बेनती हरि प्रभ हरि राइआ राम राजे ॥ हउ मागउ सरणि हरि नाम की हरि हरि मुखि पाइआ ॥ भगति वछलु हरि बिरदु है हरि लाज रखाइआ ॥ जनु नानकु सरणागती हरि नामि तराइआ ॥४॥८॥१५॥

(राग आसा -- SGGS 449) आसा महला ४ ॥
गुरमुखि ढूंढि ढूढेदिआ हरि सजणु लधा राम राजे ॥ कंचन काइआ कोट गड़ विचि हरि हरि सिधा ॥ हरि हरि हीरा रतनु है मेरा मनु तनु विधा ॥ धुरि भाग वडे हरि पाइआ नानक रसि गुधा ॥१॥

पंथु दसावा नित खड़ी मुंध जोबनि बाली राम राजे ॥ हरि हरि नामु चेताइ गुर हरि मारगि चाली ॥ मेरै मनि तनि नामु आधारु है हउमै बिखु जाली ॥ जन नानक सतिगुरु मेलि हरि हरि मिलिआ बनवाली ॥२॥

गुरमुखि पिआरे आइ मिलु मै चिरी विछुंने राम राजे ॥ मेरा मनु तनु बहुतु बैरागिआ हरि नैण रसि भिंने ॥ मै हरि प्रभु पिआरा दसि गुरु मिलि हरि मनु मंने ॥ हउ मूरखु कारै लाईआ नानक हरि कमे ॥३॥

गुर अम्रित भिंनी देहुरी अम्रितु बुरके राम राजे ॥ जिना गुरबाणी मनि भाईआ अम्रिति छकि छके ॥ गुर तुठै हरि पाइआ चूके धक धके ॥ हरि जनु हरि हरि होइआ नानकु हरि इके ॥४॥९॥१६॥

(राग आसा -- SGGS 449) आसा महला ४ ॥
हरि अम्रित भगति भंडार है गुर सतिगुर पासे राम राजे ॥ गुरु सतिगुरु सचा साहु है सिख देइ हरि रासे ॥ धनु धंनु वणजारा वणजु है गुरु साहु साबासे ॥ जनु नानकु गुरु तिन्ही पाइआ जिन धुरि लिखतु लिलाटि लिखासे ॥१॥

सचु साहु हमारा तूं धणी सभु जगतु वणजारा राम राजे ॥ सभ भांडे तुधै साजिआ विचि वसतु हरि थारा ॥ जो पावहि भांडे विचि वसतु सा निकलै किआ कोई करे वेचारा ॥ जन नानक कउ हरि बखसिआ हरि भगति भंडारा ॥२॥

हम किआ गुण तेरे विथरह सुआमी तूं अपर अपारो राम राजे ॥ हरि नामु सालाहह दिनु राति एहा आस आधारो ॥ हम मूरख किछूअ न जाणहा किव पावह पारो ॥ जनु नानकु हरि का दासु है हरि दास पनिहारो ॥३॥

जिउ भावै तिउ राखि लै हम सरणि प्रभ आए राम राजे ॥ हम भूलि विगाड़ह दिनसु राति हरि लाज रखाए ॥ हम बारिक तूं गुरु पिता है दे मति समझाए ॥ जनु नानकु दासु हरि कांढिआ हरि पैज रखाए ॥४॥१०॥१७॥

(राग आसा -- SGGS 450) आसा महला ४ ॥
जिन मसतकि धुरि हरि लिखिआ तिना सतिगुरु मिलिआ राम राजे ॥ अगिआनु अंधेरा कटिआ गुर गिआनु घटि बलिआ ॥ हरि लधा रतनु पदारथो फिरि बहुड़ि न चलिआ ॥ जन नानक नामु आराधिआ आराधि हरि मिलिआ ॥१॥

जिनी ऐसा हरि नामु न चेतिओ से काहे जगि आए राम राजे ॥ इहु माणस जनमु दुल्मभु है नाम बिना बिरथा सभु जाए ॥ हुणि वतै हरि नामु न बीजिओ अगै भुखा किआ खाए ॥ मनमुखा नो फिरि जनमु है नानक हरि भाए ॥२॥

तूं हरि तेरा सभु को सभि तुधु उपाए राम राजे ॥ किछु हाथि किसै दै किछु नाही सभि चलहि चलाए ॥ जिन्ह तूं मेलहि पिआरे से तुधु मिलहि जो हरि मनि भाए ॥ जन नानक सतिगुरु भेटिआ हरि नामि तराए ॥३॥

कोई गावै रागी नादी बेदी बहु भाति करि नही हरि हरि भीजै राम राजे ॥ जिना अंतरि कपटु विकारु है तिना रोइ किआ कीजै ॥ हरि करता सभु किछु जाणदा सिरि रोग हथु दीजै ॥ जिना नानक गुरमुखि हिरदा सुधु है हरि भगति हरि लीजै ॥४॥११॥१८॥

(राग आसा -- SGGS 450) आसा महला ४ ॥
जिन अंतरि हरि हरि प्रीति है ते जन सुघड़ सिआणे राम राजे ॥ जे बाहरहु भुलि चुकि बोलदे भी खरे हरि भाणे ॥ हरि संता नो होरु थाउ नाही हरि माणु निमाणे ॥ जन नानक नामु दीबाणु है हरि ताणु सताणे ॥१॥

जिथै जाइ बहै मेरा सतिगुरू सो थानु सुहावा राम राजे ॥ गुरसिखीं सो थानु भालिआ लै धूरि मुखि लावा ॥ गुरसिखा की घाल थाइ पई जिन हरि नामु धिआवा ॥ जिन्ह नानकु सतिगुरु पूजिआ तिन हरि पूज करावा ॥२॥

गुरसिखा मनि हरि प्रीति है हरि नाम हरि तेरी राम राजे ॥ करि सेवहि पूरा सतिगुरू भुख जाइ लहि मेरी ॥ गुरसिखा की भुख सभ गई तिन पिछै होर खाइ घनेरी ॥ जन नानक हरि पुंनु बीजिआ फिरि तोटि न आवै हरि पुंन केरी ॥३॥

गुरसिखा मनि वाधाईआ जिन मेरा सतिगुरू डिठा राम राजे ॥ कोई करि गल सुणावै हरि नाम की सो लगै गुरसिखा मनि मिठा ॥ हरि दरगह गुरसिख पैनाईअहि जिन्हा मेरा सतिगुरु तुठा ॥ जन नानकु हरि हरि होइआ हरि हरि मनि वुठा ॥४॥१२॥१९॥

(राग आसा -- SGGS 451) आसा महला ४ ॥
जिन्हा भेटिआ मेरा पूरा सतिगुरू तिन हरि नामु द्रिड़ावै राम राजे ॥ तिस की त्रिसना भुख सभ उतरै जो हरि नामु धिआवै ॥ जो हरि हरि नामु धिआइदे तिन्ह जमु नेड़ि न आवै ॥ जन नानक कउ हरि क्रिपा करि नित जपै हरि नामु हरि नामि तरावै ॥१॥

जिनी गुरमुखि नामु धिआइआ तिना फिरि बिघनु न होई राम राजे ॥ जिनी सतिगुरु पुरखु मनाइआ तिन पूजे सभु कोई ॥ जिन्ही सतिगुरु पिआरा सेविआ तिन्हा सुखु सद होई ॥ जिन्हा नानकु सतिगुरु भेटिआ तिन्हा मिलिआ हरि सोई ॥२॥

जिन्हा अंतरि गुरमुखि प्रीति है तिन्ह हरि रखणहारा राम राजे ॥ तिन्ह की निंदा कोई किआ करे जिन्ह हरि नामु पिआरा ॥ जिन हरि सेती मनु मानिआ सभ दुसट झख मारा ॥ जन नानक नामु धिआइआ हरि रखणहारा ॥३॥

हरि जुगु जुगु भगत उपाइआ पैज रखदा आइआ राम राजे ॥ हरणाखसु दुसटु हरि मारिआ प्रहलादु तराइआ ॥ अहंकारीआ निंदका पिठि देइ नामदेउ मुखि लाइआ ॥ जन नानक ऐसा हरि सेविआ अंति लए छडाइआ ॥४॥१३॥२०॥

(राग आसा -- SGGS 451) आसा महला ४ छंत घरु ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मेरे मन परदेसी वे पिआरे आउ घरे ॥ हरि गुरू मिलावहु मेरे पिआरे घरि वसै हरे ॥ रंगि रलीआ माणहु मेरे पिआरे हरि किरपा करे ॥ गुरु नानकु तुठा मेरे पिआरे मेले हरे ॥१॥

मै प्रेमु न चाखिआ मेरे पिआरे भाउ करे ॥ मनि त्रिसना न बुझी मेरे पिआरे नित आस करे ॥ नित जोबनु जावै मेरे पिआरे जमु सास हिरे ॥ भाग मणी सोहागणि मेरे पिआरे नानक हरि उरि धारे ॥२॥

पिर रतिअड़े मैडे लोइण मेरे पिआरे चात्रिक बूंद जिवै ॥ मनु सीतलु होआ मेरे पिआरे हरि बूंद पीवै ॥ तनि बिरहु जगावै मेरे पिआरे नीद न पवै किवै ॥ हरि सजणु लधा मेरे पिआरे नानक गुरू लिवै ॥३॥

चड़ि चेतु बसंतु मेरे पिआरे भलीअ रुते ॥ पिर बाझड़िअहु मेरे पिआरे आंगणि धूड़ि लुते ॥ मनि आस उडीणी मेरे पिआरे दुइ नैन जुते ॥ गुरु नानकु देखि विगसी मेरे पिआरे जिउ मात सुते ॥४॥

हरि कीआ कथा कहाणीआ मेरे पिआरे सतिगुरू सुणाईआ ॥ गुर विटड़िअहु हउ घोली मेरे पिआरे जिनि हरि मेलाईआ ॥ सभि आसा हरि पूरीआ मेरे पिआरे मनि चिंदिअड़ा फलु पाइआ ॥ हरि तुठड़ा मेरे पिआरे जनु नानकु नामि समाइआ ॥५॥

पिआरे हरि बिनु प्रेमु न खेलसा ॥ किउ पाई गुरु जितु लगि पिआरा देखसा ॥ हरि दातड़े मेलि गुरू मुखि गुरमुखि मेलसा ॥ गुरु नानकु पाइआ मेरे पिआरे धुरि मसतकि लेखु सा ॥६॥१४॥२१॥

(राग गूजरी -- SGGS 492) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु गूजरी महला ४ चउपदे घरु १ ॥
हरि के जन सतिगुर सत पुरखा हउ बिनउ करउ गुर पासि ॥ हम कीरे किरम सतिगुर सरणाई करि दइआ नामु परगासि ॥१॥

मेरे मीत गुरदेव मो कउ राम नामु परगासि ॥ गुरमति नामु मेरा प्रान सखाई हरि कीरति हमरी रहरासि ॥१॥ रहाउ ॥

हरि जन के वडभाग वडेरे जिन हरि हरि सरधा हरि पिआस ॥ हरि हरि नामु मिलै त्रिपतासहि मिलि संगति गुण परगासि ॥२॥

जिन्ह हरि हरि हरि रसु नामु न पाइआ ते भागहीण जम पासि ॥ जो सतिगुर सरणि संगति नही आए ध्रिगु जीवे ध्रिगु जीवासि ॥३॥

जिन हरि जन सतिगुर संगति पाई तिन धुरि मसतकि लिखिआ लिखासि ॥ धंनु धंनु सतसंगति जितु हरि रसु पाइआ मिलि नानक नामु परगासि ॥४॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 492) गूजरी महला ४ ॥
गोविंदु गोविंदु प्रीतमु मनि प्रीतमु मिलि सतसंगति सबदि मनु मोहै ॥ जपि गोविंदु गोविंदु धिआईऐ सभ कउ दानु देइ प्रभु ओहै ॥१॥

मेरे भाई जना मो कउ गोविंदु गोविंदु गोविंदु मनु मोहै ॥ गोविंद गोविंद गोविंद गुण गावा मिलि गुर साधसंगति जनु सोहै ॥१॥ रहाउ ॥

सुख सागर हरि भगति है गुरमति कउला रिधि सिधि लागै पगि ओहै ॥ जन कउ राम नामु आधारा हरि नामु जपत हरि नामे सोहै ॥२॥

दुरमति भागहीन मति फीके नामु सुनत आवै मनि रोहै ॥ कऊआ काग कउ अम्रित रसु पाईऐ त्रिपतै विसटा खाइ मुखि गोहै ॥३॥

अम्रित सरु सतिगुरु सतिवादी जितु नातै कऊआ हंसु होहै ॥ नानक धनु धंनु वडे वडभागी जिन्ह गुरमति नामु रिदै मलु धोहै ॥४॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 493) गूजरी महला ४ ॥
हरि जन ऊतम ऊतम बाणी मुखि बोलहि परउपकारे ॥ जो जनु सुणै सरधा भगति सेती करि किरपा हरि निसतारे ॥१॥

राम मो कउ हरि जन मेलि पिआरे ॥ मेरे प्रीतम प्रान सतिगुरु गुरु पूरा हम पापी गुरि निसतारे ॥१॥ रहाउ ॥

गुरमुखि वडभागी वडभागे जिन हरि हरि नामु अधारे ॥ हरि हरि अम्रितु हरि रसु पावहि गुरमति भगति भंडारे ॥२॥

जिन दरसनु सतिगुर सत पुरख न पाइआ ते भागहीण जमि मारे ॥ से कूकर सूकर गरधभ पवहि गरभ जोनी दयि मारे महा हतिआरे ॥३॥

दीन दइआल होहु जन ऊपरि करि किरपा लेहु उबारे ॥ नानक जन हरि की सरणाई हरि भावै हरि निसतारे ॥४॥३॥

(राग गूजरी -- SGGS 493) गूजरी महला ४ ॥
होहु दइआल मेरा मनु लावहु हउ अनदिनु राम नामु नित धिआई ॥ सभि सुख सभि गुण सभि निधान हरि जितु जपिऐ दुख भुख सभ लहि जाई ॥१॥

मन मेरे मेरा राम नामु सखा हरि भाई ॥ गुरमति राम नामु जसु गावा अंति बेली दरगह लए छडाई ॥१॥ रहाउ ॥

तूं आपे दाता प्रभु अंतरजामी करि किरपा लोच मेरै मनि लाई ॥ मै मनि तनि लोच लगी हरि सेती प्रभि लोच पूरी सतिगुर सरणाई ॥२॥

माणस जनमु पुंनि करि पाइआ बिनु नावै ध्रिगु ध्रिगु बिरथा जाई ॥ नाम बिना रस कस दुखु खावै मुखु फीका थुक थूक मुखि पाई ॥३॥

जो जन हरि प्रभ हरि हरि सरणा तिन दरगह हरि हरि दे वडिआई ॥ धंनु धंनु साबासि कहै प्रभु जन कउ जन नानक मेलि लए गलि लाई ॥४॥४॥

(राग गूजरी -- SGGS 493) गूजरी महला ४ ॥
गुरमुखि सखी सहेली मेरी मो कउ देवहु दानु हरि प्रान जीवाइआ ॥ हम होवह लाले गोले गुरसिखा के जिन्हा अनदिनु हरि प्रभु पुरखु धिआइआ ॥१॥

मेरै मनि तनि बिरहु गुरसिख पग लाइआ ॥ मेरे प्रान सखा गुर के सिख भाई मो कउ करहु उपदेसु हरि मिलै मिलाइआ ॥१॥ रहाउ ॥

जा हरि प्रभ भावै ता गुरमुखि मेले जिन्ह वचन गुरू सतिगुर मनि भाइआ ॥ वडभागी गुर के सिख पिआरे हरि निरबाणी निरबाण पदु पाइआ ॥२॥

सतसंगति गुर की हरि पिआरी जिन हरि हरि नामु मीठा मनि भाइआ ॥ जिन सतिगुर संगति संगु न पाइआ से भागहीण पापी जमि खाइआ ॥३॥

आपि क्रिपालु क्रिपा प्रभु धारे हरि आपे गुरमुखि मिलै मिलाइआ ॥ जनु नानकु बोले गुण बाणी गुरबाणी हरि नामि समाइआ ॥४॥५॥

(राग गूजरी -- SGGS 494) गूजरी महला ४ ॥
जिन सतिगुरु पुरखु जिनि हरि प्रभु पाइआ मो कउ करि उपदेसु हरि मीठ लगावै ॥ मनु तनु सीतलु सभ हरिआ होआ वडभागी हरि नामु धिआवै ॥१॥

भाई रे मो कउ कोई आइ मिलै हरि नामु द्रिड़ावै ॥ मेरे प्रीतम प्रान मनु तनु सभु देवा मेरे हरि प्रभ की हरि कथा सुनावै ॥१॥ रहाउ ॥

धीरजु धरमु गुरमति हरि पाइआ नित हरि नामै हरि सिउ चितु लावै ॥ अम्रित बचन सतिगुर की बाणी जो बोलै सो मुखि अम्रितु पावै ॥२॥

निरमलु नामु जितु मैलु न लागै गुरमति नामु जपै लिव लावै ॥ नामु पदारथु जिन नर नही पाइआ से भागहीण मुए मरि जावै ॥३॥

आनद मूलु जगजीवन दाता सभ जन कउ अनदु करहु हरि धिआवै ॥ तूं दाता जीअ सभि तेरे जन नानक गुरमुखि बखसि मिलावै ॥४॥६॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates