Pt 8 - गुरू नानक देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 8 - Guru Nanak Dev ji (Mahalla 1) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग आसा काफी -- SGGS 418) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आसा काफी महला १ घरु ८ असटपदीआ ॥
जैसे गोइलि गोइली तैसे संसारा ॥ कूड़ु कमावहि आदमी बांधहि घर बारा ॥१॥

जागहु जागहु सूतिहो चलिआ वणजारा ॥१॥ रहाउ ॥

नीत नीत घर बांधीअहि जे रहणा होई ॥ पिंडु पवै जीउ चलसी जे जाणै कोई ॥२॥

ओही ओही किआ करहु है होसी सोई ॥ तुम रोवहुगे ओस नो तुम्ह कउ कउणु रोई ॥३॥

धंधा पिटिहु भाईहो तुम्ह कूड़ु कमावहु ॥ ओहु न सुणई कत ही तुम्ह लोक सुणावहु ॥४॥

जिस ते सुता नानका जागाए सोई ॥ जे घरु बूझै आपणा तां नीद न होई ॥५॥

जे चलदा लै चलिआ किछु स्मपै नाले ॥ ता धनु संचहु देखि कै बूझहु बीचारे ॥६॥

वणजु करहु मखसूदु लैहु मत पछोतावहु ॥ अउगण छोडहु गुण करहु ऐसे ततु परावहु ॥७॥

धरमु भूमि सतु बीजु करि ऐसी किरस कमावहु ॥ तां वापारी जाणीअहु लाहा लै जावहु ॥८॥

करमु होवै सतिगुरु मिलै बूझै बीचारा ॥ नामु वखाणै सुणे नामु नामे बिउहारा ॥९॥

जिउ लाहा तोटा तिवै वाट चलदी आई ॥ जो तिसु भावै नानका साई वडिआई ॥१०॥१३॥

(राग आसा -- SGGS 418) आसा महला १ ॥
चारे कुंडा ढूढीआ को नीम्ही मैडा ॥ जे तुधु भावै साहिबा तू मै हउ तैडा ॥१॥

दरु बीभा मै नीम्हि को कै करी सलामु ॥ हिको मैडा तू धणी साचा मुखि नामु ॥१॥ रहाउ ॥

सिधा सेवनि सिध पीर मागहि रिधि सिधि ॥ मै इकु नामु न वीसरै साचे गुर बुधि ॥२॥

जोगी भोगी कापड़ी किआ भवहि दिसंतर ॥ गुर का सबदु न चीन्हही ततु सारु निरंतर ॥३॥

पंडित पाधे जोइसी नित पड़्हहि पुराणा ॥ अंतरि वसतु न जाणन्ही घटि ब्रहमु लुकाणा ॥४॥

इकि तपसी बन महि तपु करहि नित तीरथ वासा ॥ आपु न चीनहि तामसी काहे भए उदासा ॥५॥

इकि बिंदु जतन करि राखदे से जती कहावहि ॥ बिनु गुर सबद न छूटही भ्रमि आवहि जावहि ॥६॥

इकि गिरही सेवक साधिका गुरमती लागे ॥ नामु दानु इसनानु द्रिड़ु हरि भगति सु जागे ॥७॥

गुर ते दरु घरु जाणीऐ सो जाइ सिञाणै ॥ नानक नामु न वीसरै साचे मनु मानै ॥८॥१४॥

(राग आसा -- SGGS 419) आसा महला १ ॥
मनसा मनहि समाइले भउजलु सचि तरणा ॥ आदि जुगादि दइआलु तू ठाकुर तेरी सरणा ॥१॥

तू दातौ हम जाचिका हरि दरसनु दीजै ॥ गुरमुखि नामु धिआईऐ मन मंदरु भीजै ॥१॥ रहाउ ॥

कूड़ा लालचु छोडीऐ तउ साचु पछाणै ॥ गुर कै सबदि समाईऐ परमारथु जाणै ॥२॥

इहु मनु राजा लोभीआ लुभतउ लोभाई ॥ गुरमुखि लोभु निवारीऐ हरि सिउ बणि आई ॥३॥

कलरि खेती बीजीऐ किउ लाहा पावै ॥ मनमुखु सचि न भीजई कूड़ु कूड़ि गडावै ॥४॥

लालचु छोडहु अंधिहो लालचि दुखु भारी ॥ साचौ साहिबु मनि वसै हउमै बिखु मारी ॥५॥

दुबिधा छोडि कुवाटड़ी मूसहुगे भाई ॥ अहिनिसि नामु सलाहीऐ सतिगुर सरणाई ॥६॥

मनमुख पथरु सैलु है ध्रिगु जीवणु फीका ॥ जल महि केता राखीऐ अभ अंतरि सूका ॥७॥

हरि का नामु निधानु है पूरै गुरि दीआ ॥ नानक नामु न वीसरै मथि अम्रितु पीआ ॥८॥१५॥

(राग आसा -- SGGS 419) आसा महला १ ॥
चले चलणहार वाट वटाइआ ॥ धंधु पिटे संसारु सचु न भाइआ ॥१॥

किआ भवीऐ किआ ढूढीऐ गुर सबदि दिखाइआ ॥ ममता मोहु विसरजिआ अपनै घरि आइआ ॥१॥ रहाउ ॥

सचि मिलै सचिआरु कूड़ि न पाईऐ ॥ सचे सिउ चितु लाइ बहुड़ि न आईऐ ॥२॥

मोइआ कउ किआ रोवहु रोइ न जाणहू ॥ रोवहु सचु सलाहि हुकमु पछाणहू ॥३॥

हुकमी वजहु लिखाइ आइआ जाणीऐ ॥ लाहा पलै पाइ हुकमु सिञाणीऐ ॥४॥

हुकमी पैधा जाइ दरगह भाणीऐ ॥ हुकमे ही सिरि मार बंदि रबाणीऐ ॥५॥

लाहा सचु निआउ मनि वसाईऐ ॥ लिखिआ पलै पाइ गरबु वञाईऐ ॥६॥

मनमुखीआ सिरि मार वादि खपाईऐ ॥ ठगि मुठी कूड़िआर बंन्हि चलाईऐ ॥७॥

साहिबु रिदै वसाइ न पछोतावही ॥ गुनहां बखसणहारु सबदु कमावही ॥८॥

नानकु मंगै सचु गुरमुखि घालीऐ ॥ मै तुझ बिनु अवरु न कोइ नदरि निहालीऐ ॥९॥१६॥

(राग आसा -- SGGS 420) आसा महला १ ॥
किआ जंगलु ढूढी जाइ मै घरि बनु हरीआवला ॥ सचि टिकै घरि आइ सबदि उतावला ॥१॥

जह देखा तह सोइ अवरु न जाणीऐ ॥ गुर की कार कमाइ महलु पछाणीऐ ॥१॥ रहाउ ॥

आपि मिलावै सचु ता मनि भावई ॥ चलै सदा रजाइ अंकि समावई ॥२॥

सचा साहिबु मनि वसै वसिआ मनि सोई ॥ आपे दे वडिआईआ दे तोटि न होई ॥३॥

अबे तबे की चाकरी किउ दरगह पावै ॥ पथर की बेड़ी जे चड़ै भर नालि बुडावै ॥४॥

आपनड़ा मनु वेचीऐ सिरु दीजै नाले ॥ गुरमुखि वसतु पछाणीऐ अपना घरु भाले ॥५॥

जमण मरणा आखीऐ तिनि करतै कीआ ॥ आपु गवाइआ मरि रहे फिरि मरणु न थीआ ॥६॥

साई कार कमावणी धुर की फुरमाई ॥ जे मनु सतिगुर दे मिलै किनि कीमति पाई ॥७॥

रतना पारखु सो धणी तिनि कीमति पाई ॥ नानक साहिबु मनि वसै सची वडिआई ॥८॥१७॥

(राग आसा -- SGGS 420) आसा महला १ ॥
जिन्ही नामु विसारिआ दूजै भरमि भुलाई ॥ मूलु छोडि डाली लगे किआ पावहि छाई ॥१॥

बिनु नावै किउ छूटीऐ जे जाणै कोई ॥ गुरमुखि होइ त छूटीऐ मनमुखि पति खोई ॥१॥ रहाउ ॥

जिन्ही एको सेविआ पूरी मति भाई ॥ आदि जुगादि निरंजना जन हरि सरणाई ॥२॥

साहिबु मेरा एकु है अवरु नही भाई ॥ किरपा ते सुखु पाइआ साचे परथाई ॥३॥

गुर बिनु किनै न पाइओ केती कहै कहाए ॥ आपि दिखावै वाटड़ीं सची भगति द्रिड़ाए ॥४॥

मनमुखु जे समझाईऐ भी उझड़ि जाए ॥ बिनु हरि नाम न छूटसी मरि नरक समाए ॥५॥

जनमि मरै भरमाईऐ हरि नामु न लेवै ॥ ता की कीमति ना पवै बिनु गुर की सेवै ॥६॥

जेही सेव कराईऐ करणी भी साई ॥ आपि करे किसु आखीऐ वेखै वडिआई ॥७॥

गुर की सेवा सो करे जिसु आपि कराए ॥ नानक सिरु दे छूटीऐ दरगह पति पाए ॥८॥१८॥

(राग आसा -- SGGS 421) आसा महला १ ॥
रूड़ो ठाकुर माहरो रूड़ी गुरबाणी ॥ वडै भागि सतिगुरु मिलै पाईऐ पदु निरबाणी ॥१॥

मै ओल्हगीआ ओल्हगी हम छोरू थारे ॥ जिउ तूं राखहि तिउ रहा मुखि नामु हमारे ॥१॥ रहाउ ॥

दरसन की पिआसा घणी भाणै मनि भाईऐ ॥ मेरे ठाकुर हाथि वडिआईआ भाणै पति पाईऐ ॥२॥

साचउ दूरि न जाणीऐ अंतरि है सोई ॥ जह देखा तह रवि रहे किनि कीमति होई ॥३॥

आपि करे आपे हरे वेखै वडिआई ॥ गुरमुखि होइ निहालीऐ इउ कीमति पाई ॥४॥

जीवदिआ लाहा मिलै गुर कार कमावै ॥ पूरबि होवै लिखिआ ता सतिगुरु पावै ॥५॥

मनमुख तोटा नित है भरमहि भरमाए ॥ मनमुखु अंधु न चेतई किउ दरसनु पाए ॥६॥

ता जगि आइआ जाणीऐ साचै लिव लाए ॥ गुर भेटे पारसु भए जोती जोति मिलाए ॥७॥

अहिनिसि रहै निरालमो कार धुर की करणी ॥ नानक नामि संतोखीआ राते हरि चरणी ॥८॥१९॥

(राग आसा -- SGGS 421) आसा महला १ ॥
केता आखणु आखीऐ ता के अंत न जाणा ॥ मै निधरिआ धर एक तूं मै ताणु सताणा ॥१॥

नानक की अरदासि है सच नामि सुहेला ॥ आपु गइआ सोझी पई गुर सबदी मेला ॥१॥ रहाउ ॥

हउमै गरबु गवाईऐ पाईऐ वीचारु ॥ साहिब सिउ मनु मानिआ दे साचु अधारु ॥२॥

अहिनिसि नामि संतोखीआ सेवा सचु साई ॥ ता कउ बिघनु न लागई चालै हुकमि रजाई ॥३॥

हुकमि रजाई जो चलै सो पवै खजानै ॥ खोटे ठवर न पाइनी रले जूठानै ॥४॥

नित नित खरा समालीऐ सचु सउदा पाईऐ ॥ खोटे नदरि न आवनी ले अगनि जलाईऐ ॥५॥

जिनी आतमु चीनिआ परमातमु सोई ॥ एको अम्रित बिरखु है फलु अम्रितु होई ॥६॥

अम्रित फलु जिनी चाखिआ सचि रहे अघाई ॥ तिंना भरमु न भेदु है हरि रसन रसाई ॥७॥

हुकमि संजोगी आइआ चलु सदा रजाई ॥ अउगणिआरे कउ गुणु नानकै सचु मिलै वडाई ॥८॥२०॥

(राग आसा -- SGGS 421) आसा महला १ ॥
मनु रातउ हरि नाइ सचु वखाणिआ ॥ लोका दा किआ जाइ जा तुधु भाणिआ ॥१॥

जउ लगु जीउ पराण सचु धिआईऐ ॥ लाहा हरि गुण गाइ मिलै सुखु पाईऐ ॥१॥ रहाउ ॥

सची तेरी कार देहि दइआल तूं ॥ हउ जीवा तुधु सालाहि मै टेक अधारु तूं ॥२॥

दरि सेवकु दरवानु दरदु तूं जाणही ॥ भगति तेरी हैरानु दरदु गवावही ॥३॥

दरगह नामु हदूरि गुरमुखि जाणसी ॥ वेला सचु परवाणु सबदु पछाणसी ॥४॥

सतु संतोखु करि भाउ तोसा हरि नामु सेइ ॥ मनहु छोडि विकार सचा सचु देइ ॥५॥

सचे सचा नेहु सचै लाइआ ॥ आपे करे निआउ जो तिसु भाइआ ॥६॥

सचे सची दाति देहि दइआलु है ॥ तिसु सेवी दिनु राति नामु अमोलु है ॥७॥

तूं उतमु हउ नीचु सेवकु कांढीआ ॥ नानक नदरि करेहु मिलै सचु वांढीआ ॥८॥२१॥

(राग आसा -- SGGS 422) आसा महला १ ॥
आवण जाणा किउ रहै किउ मेला होई ॥ जनम मरण का दुखु घणो नित सहसा दोई ॥१॥

बिनु नावै किआ जीवना फिटु ध्रिगु चतुराई ॥ सतिगुर साधु न सेविआ हरि भगति न भाई ॥१॥ रहाउ ॥

आवणु जावणु तउ रहै पाईऐ गुरु पूरा ॥ राम नामु धनु रासि देइ बिनसै भ्रमु कूरा ॥२॥

संत जना कउ मिलि रहै धनु धनु जसु गाए ॥ आदि पुरखु अपर्मपरा गुरमुखि हरि पाए ॥३॥

नटूऐ सांगु बणाइआ बाजी संसारा ॥ खिनु पलु बाजी देखीऐ उझरत नही बारा ॥४॥

हउमै चउपड़ि खेलणा झूठे अहंकारा ॥ सभु जगु हारै सो जिणै गुर सबदु वीचारा ॥५॥

जिउ अंधुलै हथि टोहणी हरि नामु हमारै ॥ राम नामु हरि टेक है निसि दउत सवारै ॥६॥

जिउ तूं राखहि तिउ रहा हरि नाम अधारा ॥ अंति सखाई पाइआ जन मुकति दुआरा ॥७॥

जनम मरण दुख मेटिआ जपि नामु मुरारे ॥ नानक नामु न वीसरै पूरा गुरु तारे ॥८॥२२॥

(राग आसा -- SGGS 432) रागु आसा महला १ पटी लिखी
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ससै सोइ स्रिसटि जिनि साजी सभना साहिबु एकु भइआ ॥ सेवत रहे चितु जिन्ह का लागा आइआ तिन्ह का सफलु भइआ ॥१॥

(राग आसा -- SGGS 432) मन काहे भूले मूड़ मना ॥ जब लेखा देवहि बीरा तउ पड़िआ ॥१॥ रहाउ ॥

(राग आसा -- SGGS 432) ईवड़ी आदि पुरखु है दाता आपे सचा सोई ॥ एना अखरा महि जो गुरमुखि बूझै तिसु सिरि लेखु न होई ॥२॥

(राग आसा -- SGGS 432) ऊड़ै उपमा ता की कीजै जा का अंतु न पाइआ ॥ सेवा करहि सेई फलु पावहि जिन्ही सचु कमाइआ ॥३॥

(राग आसा -- SGGS 432) ङंङै ङिआनु बूझै जे कोई पड़िआ पंडितु सोई ॥ सरब जीआ महि एको जाणै ता हउमै कहै न कोई ॥४॥

(राग आसा -- SGGS 432) ककै केस पुंडर जब हूए विणु साबूणै उजलिआ ॥ जम राजे के हेरू आए माइआ कै संगलि बंधि लइआ ॥५॥

(राग आसा -- SGGS 432) खखै खुंदकारु साह आलमु करि खरीदि जिनि खरचु दीआ ॥ बंधनि जा कै सभु जगु बाधिआ अवरी का नही हुकमु पइआ ॥६॥

(राग आसा -- SGGS 432) गगै गोइ गाइ जिनि छोडी गली गोबिदु गरबि भइआ ॥ घड़ि भांडे जिनि आवी साजी चाड़ण वाहै तई कीआ ॥७॥

(राग आसा -- SGGS 432) घघै घाल सेवकु जे घालै सबदि गुरू कै लागि रहै ॥ बुरा भला जे सम करि जाणै इन बिधि साहिबु रमतु रहै ॥८॥

(राग आसा -- SGGS 432) चचै चारि वेद जिनि साजे चारे खाणी चारि जुगा ॥ जुगु जुगु जोगी खाणी भोगी पड़िआ पंडितु आपि थीआ ॥९॥

(राग आसा -- SGGS 433) छछै छाइआ वरती सभ अंतरि तेरा कीआ भरमु होआ ॥ भरमु उपाइ भुलाईअनु आपे तेरा करमु होआ तिन्ह गुरू मिलिआ ॥१०॥

(राग आसा -- SGGS 433) जजै जानु मंगत जनु जाचै लख चउरासीह भीख भविआ ॥ एको लेवै एको देवै अवरु न दूजा मै सुणिआ ॥११॥

(राग आसा -- SGGS 433) झझै झूरि मरहु किआ प्राणी जो किछु देणा सु दे रहिआ ॥ दे दे वेखै हुकमु चलाए जिउ जीआ का रिजकु पइआ ॥१२॥

(राग आसा -- SGGS 433) ञंञै नदरि करे जा देखा दूजा कोई नाही ॥ एको रवि रहिआ सभ थाई एकु वसिआ मन माही ॥१३॥

(राग आसा -- SGGS 433) टटै टंचु करहु किआ प्राणी घड़ी कि मुहति कि उठि चलणा ॥ जूऐ जनमु न हारहु अपणा भाजि पड़हु तुम हरि सरणा ॥१४॥

(राग आसा -- SGGS 433) ठठै ठाढि वरती तिन अंतरि हरि चरणी जिन्ह का चितु लागा ॥ चितु लागा सेई जन निसतरे तउ परसादी सुखु पाइआ ॥१५॥

(राग आसा -- SGGS 433) डडै ड्मफु करहु किआ प्राणी जो किछु होआ सु सभु चलणा ॥ तिसै सरेवहु ता सुखु पावहु सरब निरंतरि रवि रहिआ ॥१६॥

(राग आसा -- SGGS 433) ढढै ढाहि उसारै आपे जिउ तिसु भावै तिवै करे ॥ करि करि वेखै हुकमु चलाए तिसु निसतारे जा कउ नदरि करे ॥१७॥

(राग आसा -- SGGS 433) णाणै रवतु रहै घट अंतरि हरि गुण गावै सोई ॥ आपे आपि मिलाए करता पुनरपि जनमु न होई ॥१८॥

(राग आसा -- SGGS 433) ततै तारू भवजलु होआ ता का अंतु न पाइआ ॥ ना तर ना तुलहा हम बूडसि तारि लेहि तारण राइआ ॥१९॥

(राग आसा -- SGGS 433) थथै थानि थानंतरि सोई जा का कीआ सभु होआ ॥ किआ भरमु किआ माइआ कहीऐ जो तिसु भावै सोई भला ॥२०॥

(राग आसा -- SGGS 433) ददै दोसु न देऊ किसै दोसु करमा आपणिआ ॥ जो मै कीआ सो मै पाइआ दोसु न दीजै अवर जना ॥२१॥

(राग आसा -- SGGS 433) धधै धारि कला जिनि छोडी हरि चीजी जिनि रंग कीआ ॥ तिस दा दीआ सभनी लीआ करमी करमी हुकमु पइआ ॥२२॥

(राग आसा -- SGGS 433) नंनै नाह भोग नित भोगै ना डीठा ना सम्हलिआ ॥ गली हउ सोहागणि भैणे कंतु न कबहूं मै मिलिआ ॥२३॥

(राग आसा -- SGGS 433) पपै पातिसाहु परमेसरु वेखण कउ परपंचु कीआ ॥ देखै बूझै सभु किछु जाणै अंतरि बाहरि रवि रहिआ ॥२४॥

(राग आसा -- SGGS 433) फफै फाही सभु जगु फासा जम कै संगलि बंधि लइआ ॥ गुर परसादी से नर उबरे जि हरि सरणागति भजि पइआ ॥२५॥

(राग आसा -- SGGS 433) बबै बाजी खेलण लागा चउपड़ि कीते चारि जुगा ॥ जीअ जंत सभ सारी कीते पासा ढालणि आपि लगा ॥२६॥

(राग आसा -- SGGS 434) भभै भालहि से फलु पावहि गुर परसादी जिन्ह कउ भउ पइआ ॥ मनमुख फिरहि न चेतहि मूड़े लख चउरासीह फेरु पइआ ॥२७॥

(राग आसा -- SGGS 434) ममै मोहु मरणु मधुसूदनु मरणु भइआ तब चेतविआ ॥ काइआ भीतरि अवरो पड़िआ ममा अखरु वीसरिआ ॥२८॥

(राग आसा -- SGGS 434) ययै जनमु न होवी कद ही जे करि सचु पछाणै ॥ गुरमुखि आखै गुरमुखि बूझै गुरमुखि एको जाणै ॥२९॥

(राग आसा -- SGGS 434) रारै रवि रहिआ सभ अंतरि जेते कीए जंता ॥ जंत उपाइ धंधै सभ लाए करमु होआ तिन नामु लइआ ॥३०॥

(राग आसा -- SGGS 434) ललै लाइ धंधै जिनि छोडी मीठा माइआ मोहु कीआ ॥ खाणा पीणा सम करि सहणा भाणै ता कै हुकमु पइआ ॥३१॥

(राग आसा -- SGGS 434) ववै वासुदेउ परमेसरु वेखण कउ जिनि वेसु कीआ ॥ वेखै चाखै सभु किछु जाणै अंतरि बाहरि रवि रहिआ ॥३२॥

(राग आसा -- SGGS 434) ड़ाड़ै राड़ि करहि किआ प्राणी तिसहि धिआवहु जि अमरु होआ ॥ तिसहि धिआवहु सचि समावहु ओसु विटहु कुरबाणु कीआ ॥३३॥

(राग आसा -- SGGS 434) हाहै होरु न कोई दाता जीअ उपाइ जिनि रिजकु दीआ ॥ हरि नामु धिआवहु हरि नामि समावहु अनदिनु लाहा हरि नामु लीआ ॥३४॥

(राग आसा -- SGGS 434) आइड़ै आपि करे जिनि छोडी जो किछु करणा सु करि रहिआ ॥ करे कराए सभ किछु जाणै नानक साइर इव कहिआ ॥३५॥१॥

(राग आसा -- SGGS 435) रागु आसा महला १ छंत घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मुंध जोबनि बालड़ीए मेरा पिरु रलीआला राम ॥ धन पिर नेहु घणा रसि प्रीति दइआला राम ॥ धन पिरहि मेला होइ सुआमी आपि प्रभु किरपा करे ॥ सेजा सुहावी संगि पिर कै सात सर अम्रित भरे ॥ करि दइआ मइआ दइआल साचे सबदि मिलि गुण गावओ ॥ नानका हरि वरु देखि बिगसी मुंध मनि ओमाहओ ॥१॥

मुंध सहजि सलोनड़ीए इक प्रेम बिनंती राम ॥ मै मनि तनि हरि भावै प्रभ संगमि राती राम ॥ प्रभ प्रेमि राती हरि बिनंती नामि हरि कै सुखि वसै ॥ तउ गुण पछाणहि ता प्रभु जाणहि गुणह वसि अवगण नसै ॥ तुधु बाझु इकु तिलु रहि न साका कहणि सुनणि न धीजए ॥ नानका प्रिउ प्रिउ करि पुकारे रसन रसि मनु भीजए ॥२॥

सखीहो सहेलड़ीहो मेरा पिरु वणजारा राम ॥ हरि नामो वणंजड़िआ रसि मोलि अपारा राम ॥ मोलि अमोलो सच घरि ढोलो प्रभ भावै ता मुंध भली ॥ इकि संगि हरि कै करहि रलीआ हउ पुकारी दरि खली ॥ करण कारण समरथ स्रीधर आपि कारजु सारए ॥ नानक नदरी धन सोहागणि सबदु अभ साधारए ॥३॥

हम घरि साचा सोहिलड़ा प्रभ आइअड़े मीता राम ॥ रावे रंगि रातड़िआ मनु लीअड़ा दीता राम ॥ आपणा मनु दीआ हरि वरु लीआ जिउ भावै तिउ रावए ॥ तनु मनु पिर आगै सबदि सभागै घरि अम्रित फलु पावए ॥ बुधि पाठि न पाईऐ बहु चतुराईऐ भाइ मिलै मनि भाणे ॥ नानक ठाकुर मीत हमारे हम नाही लोकाणे ॥४॥१॥

(राग आसा -- SGGS 436) आसा महला १ ॥
अनहदो अनहदु वाजै रुण झुणकारे राम ॥ मेरा मनो मेरा मनु राता लाल पिआरे राम ॥ अनदिनु राता मनु बैरागी सुंन मंडलि घरु पाइआ ॥ आदि पुरखु अपर्मपरु पिआरा सतिगुरि अलखु लखाइआ ॥ आसणि बैसणि थिरु नाराइणु तितु मनु राता वीचारे ॥ नानक नामि रते बैरागी अनहद रुण झुणकारे ॥१॥

तितु अगम तितु अगम पुरे कहु कितु बिधि जाईऐ राम ॥ सचु संजमो सारि गुणा गुर सबदु कमाईऐ राम ॥ सचु सबदु कमाईऐ निज घरि जाईऐ पाईऐ गुणी निधाना ॥ तितु साखा मूलु पतु नही डाली सिरि सभना परधाना ॥ जपु तपु करि करि संजम थाकी हठि निग्रहि नही पाईऐ ॥ नानक सहजि मिले जगजीवन सतिगुर बूझ बुझाईऐ ॥२॥

गुरु सागरो रतनागरु तितु रतन घणेरे राम ॥ करि मजनो सपत सरे मन निरमल मेरे राम ॥ निरमल जलि न्हाए जा प्रभ भाए पंच मिले वीचारे ॥ कामु करोधु कपटु बिखिआ तजि सचु नामु उरि धारे ॥ हउमै लोभ लहरि लब थाके पाए दीन दइआला ॥ नानक गुर समानि तीरथु नही कोई साचे गुर गोपाला ॥३॥

हउ बनु बनो देखि रही त्रिणु देखि सबाइआ राम ॥ त्रिभवणो तुझहि कीआ सभु जगतु सबाइआ राम ॥ तेरा सभु कीआ तूं थिरु थीआ तुधु समानि को नाही ॥ तूं दाता सभ जाचिक तेरे तुधु बिनु किसु सालाही ॥ अणमंगिआ दानु दीजै दाते तेरी भगति भरे भंडारा ॥ राम नाम बिनु मुकति न होई नानकु कहै वीचारा ॥४॥२॥

(राग आसा -- SGGS 437) आसा महला १ ॥
मेरा मनो मेरा मनु राता राम पिआरे राम ॥ सचु साहिबो आदि पुरखु अपर्मपरो धारे राम ॥ अगम अगोचरु अपर अपारा पारब्रहमु परधानो ॥ आदि जुगादी है भी होसी अवरु झूठा सभु मानो ॥ करम धरम की सार न जाणै सुरति मुकति किउ पाईऐ ॥ नानक गुरमुखि सबदि पछाणै अहिनिसि नामु धिआईऐ ॥१॥

मेरा मनो मेरा मनु मानिआ नामु सखाई राम ॥ हउमै ममता माइआ संगि न जाई राम ॥ माता पित भाई सुत चतुराई संगि न स्मपै नारे ॥ साइर की पुत्री परहरि तिआगी चरण तलै वीचारे ॥ आदि पुरखि इकु चलतु दिखाइआ जह देखा तह सोई ॥ नानक हरि की भगति न छोडउ सहजे होइ सु होई ॥२॥

मेरा मनो मेरा मनु निरमलु साचु समाले राम ॥ अवगण मेटि चले गुण संगम नाले राम ॥ अवगण परहरि करणी सारी दरि सचै सचिआरो ॥ आवणु जावणु ठाकि रहाए गुरमुखि ततु वीचारो ॥ साजनु मीतु सुजाणु सखा तूं सचि मिलै वडिआई ॥ नानक नामु रतनु परगासिआ ऐसी गुरमति पाई ॥३॥

सचु अंजनो अंजनु सारि निरंजनि राता राम ॥ मनि तनि रवि रहिआ जगजीवनो दाता राम ॥ जगजीवनु दाता हरि मनि राता सहजि मिलै मेलाइआ ॥ साध सभा संता की संगति नदरि प्रभू सुखु पाइआ ॥ हरि की भगति रते बैरागी चूके मोह पिआसा ॥ नानक हउमै मारि पतीणे विरले दास उदासा ॥४॥३॥

(राग आसा -- SGGS 438) रागु आसा महला १ छंत घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
तूं सभनी थाई जिथै हउ जाई साचा सिरजणहारु जीउ ॥ सभना का दाता करम बिधाता दूख बिसारणहारु जीउ ॥ दूख बिसारणहारु सुआमी कीता जा का होवै ॥ कोट कोटंतर पापा केरे एक घड़ी महि खोवै ॥ हंस सि हंसा बग सि बगा घट घट करे बीचारु जीउ ॥ तूं सभनी थाई जिथै हउ जाई साचा सिरजणहारु जीउ ॥१॥

जिन्ह इक मनि धिआइआ तिन्ह सुखु पाइआ ते विरले संसारि जीउ ॥ तिन जमु नेड़ि न आवै गुर सबदु कमावै कबहु न आवहि हारि जीउ ॥ ते कबहु न हारहि हरि हरि गुण सारहि तिन्ह जमु नेड़ि न आवै ॥ जमणु मरणु तिन्हा का चूका जो हरि लागे पावै ॥ गुरमति हरि रसु हरि फलु पाइआ हरि हरि नामु उर धारि जीउ ॥ जिन्ह इक मनि धिआइआ तिन्ह सुखु पाइआ ते विरले संसारि जीउ ॥२॥

जिनि जगतु उपाइआ धंधै लाइआ तिसै विटहु कुरबाणु जीउ ॥ ता की सेव करीजै लाहा लीजै हरि दरगह पाईऐ माणु जीउ ॥ हरि दरगह मानु सोई जनु पावै जो नरु एकु पछाणै ॥ ओहु नव निधि पावै गुरमति हरि धिआवै नित हरि गुण आखि वखाणै ॥ अहिनिसि नामु तिसै का लीजै हरि ऊतमु पुरखु परधानु जीउ ॥ जिनि जगतु उपाइआ धंधै लाइआ हउ तिसै विटहु कुरबानु जीउ ॥३॥

नामु लैनि सि सोहहि तिन सुख फल होवहि मानहि से जिणि जाहि जीउ ॥ तिन फल तोटि न आवै जा तिसु भावै जे जुग केते जाहि जीउ ॥ जे जुग केते जाहि सुआमी तिन फल तोटि न आवै ॥ तिन्ह जरा न मरणा नरकि न परणा जो हरि नामु धिआवै ॥ हरि हरि करहि सि सूकहि नाही नानक पीड़ न खाहि जीउ ॥ नामु लैन्हि सि सोहहि तिन्ह सुख फल होवहि मानहि से जिणि जाहि जीउ ॥४॥१॥४॥

(राग आसा -- SGGS 438) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आसा महला १ छंत घरु ३ ॥
तूं सुणि हरणा कालिआ की वाड़ीऐ राता राम ॥ बिखु फलु मीठा चारि दिन फिरि होवै ताता राम ॥ फिरि होइ ताता खरा माता नाम बिनु परतापए ॥ ओहु जेव साइर देइ लहरी बिजुल जिवै चमकए ॥ हरि बाझु राखा कोइ नाही सोइ तुझहि बिसारिआ ॥ सचु कहै नानकु चेति रे मन मरहि हरणा कालिआ ॥१॥

भवरा फूलि भवंतिआ दुखु अति भारी राम ॥ मै गुरु पूछिआ आपणा साचा बीचारी राम ॥ बीचारि सतिगुरु मुझै पूछिआ भवरु बेली रातओ ॥ सूरजु चड़िआ पिंडु पड़िआ तेलु तावणि तातओ ॥ जम मगि बाधा खाहि चोटा सबद बिनु बेतालिआ ॥ सचु कहै नानकु चेति रे मन मरहि भवरा कालिआ ॥२॥

मेरे जीअड़िआ परदेसीआ कितु पवहि जंजाले राम ॥ साचा साहिबु मनि वसै की फासहि जम जाले राम ॥ मछुली विछुंनी नैण रुंनी जालु बधिकि पाइआ ॥ संसारु माइआ मोहु मीठा अंति भरमु चुकाइआ ॥ भगति करि चितु लाइ हरि सिउ छोडि मनहु अंदेसिआ ॥ सचु कहै नानकु चेति रे मन जीअड़िआ परदेसीआ ॥३॥

नदीआ वाह विछुंनिआ मेला संजोगी राम ॥ जुगु जुगु मीठा विसु भरे को जाणै जोगी राम ॥ कोई सहजि जाणै हरि पछाणै सतिगुरू जिनि चेतिआ ॥ बिनु नाम हरि के भरमि भूले पचहि मुगध अचेतिआ ॥ हरि नामु भगति न रिदै साचा से अंति धाही रुंनिआ ॥ सचु कहै नानकु सबदि साचै मेलि चिरी विछुंनिआ ॥४॥१॥५॥

(राग आसा -- SGGS 462) ੴ सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
आसा महला १ ॥
वार सलोका नालि सलोक भी महले पहिले के लिखे टुंडे अस राजै की धुनी ॥
सलोकु मः १ ॥
बलिहारी गुर आपणे दिउहाड़ी सद वार ॥ जिनि माणस ते देवते कीए करत न लागी वार ॥१॥

(राग आसा -- SGGS 463) मः १ ॥
नानक गुरू न चेतनी मनि आपणै सुचेत ॥ छुटे तिल बूआड़ जिउ सुंञे अंदरि खेत ॥ खेतै अंदरि छुटिआ कहु नानक सउ नाह ॥ फलीअहि फुलीअहि बपुड़े भी तन विचि सुआह ॥३॥

(राग आसा -- SGGS 463) पउड़ी ॥
आपीन्है आपु साजिओ आपीन्है रचिओ नाउ ॥ दुयी कुदरति साजीऐ करि आसणु डिठो चाउ ॥ दाता करता आपि तूं तुसि देवहि करहि पसाउ ॥ तूं जाणोई सभसै दे लैसहि जिंदु कवाउ ॥ करि आसणु डिठो चाउ ॥१॥

(राग आसा -- SGGS 463) सलोकु मः १ ॥
सचे तेरे खंड सचे ब्रहमंड ॥ सचे तेरे लोअ सचे आकार ॥ सचे तेरे करणे सरब बीचार ॥ सचा तेरा अमरु सचा दीबाणु ॥ सचा तेरा हुकमु सचा फुरमाणु ॥ सचा तेरा करमु सचा नीसाणु ॥ सचे तुधु आखहि लख करोड़ि ॥ सचै सभि ताणि सचै सभि जोरि ॥ सची तेरी सिफति सची सालाह ॥ सची तेरी कुदरति सचे पातिसाह ॥ नानक सचु धिआइनि सचु ॥ जो मरि जमे सु कचु निकचु ॥१॥

(राग आसा -- SGGS 463) मः १ ॥
वडी वडिआई जा वडा नाउ ॥ वडी वडिआई जा सचु निआउ ॥ वडी वडिआई जा निहचल थाउ ॥ वडी वडिआई जाणै आलाउ ॥ वडी वडिआई बुझै सभि भाउ ॥ वडी वडिआई जा पुछि न दाति ॥ वडी वडिआई जा आपे आपि ॥ नानक कार न कथनी जाइ ॥ कीता करणा सरब रजाइ ॥२॥

(राग आसा -- SGGS 463) पउड़ी ॥
नानक जीअ उपाइ कै लिखि नावै धरमु बहालिआ ॥ ओथै सचे ही सचि निबड़ै चुणि वखि कढे जजमालिआ ॥ थाउ न पाइनि कूड़िआर मुह काल्है दोजकि चालिआ ॥ तेरै नाइ रते से जिणि गए हारि गए सि ठगण वालिआ ॥ लिखि नावै धरमु बहालिआ ॥२॥

(राग आसा -- SGGS 463) सलोक मः १ ॥
विसमादु नाद विसमादु वेद ॥ विसमादु जीअ विसमादु भेद ॥ विसमादु रूप विसमादु रंग ॥ विसमादु नागे फिरहि जंत ॥ विसमादु पउणु विसमादु पाणी ॥ विसमादु अगनी खेडहि विडाणी ॥ विसमादु धरती विसमादु खाणी ॥ विसमादु सादि लगहि पराणी ॥ विसमादु संजोगु विसमादु विजोगु ॥ विसमादु भुख विसमादु भोगु ॥ विसमादु सिफति विसमादु सालाह ॥ विसमादु उझड़ विसमादु राह ॥ विसमादु नेड़ै विसमादु दूरि ॥ विसमादु देखै हाजरा हजूरि ॥ वेखि विडाणु रहिआ विसमादु ॥ नानक बुझणु पूरै भागि ॥१॥

(राग आसा -- SGGS 464) मः १ ॥
कुदरति दिसै कुदरति सुणीऐ कुदरति भउ सुख सारु ॥ कुदरति पाताली आकासी कुदरति सरब आकारु ॥ कुदरति वेद पुराण कतेबा कुदरति सरब वीचारु ॥ कुदरति खाणा पीणा पैन्हणु कुदरति सरब पिआरु ॥ कुदरति जाती जिनसी रंगी कुदरति जीअ जहान ॥ कुदरति नेकीआ कुदरति बदीआ कुदरति मानु अभिमानु ॥ कुदरति पउणु पाणी बैसंतरु कुदरति धरती खाकु ॥ सभ तेरी कुदरति तूं कादिरु करता पाकी नाई पाकु ॥ नानक हुकमै अंदरि वेखै वरतै ताको ताकु ॥२॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates