Pt 3 - गुरू नानक देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 3 - Guru Nanak Dev ji (Mahalla 1) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग सिरीरागु -- SGGS 56) सिरीरागु महला १ ॥
जपु तपु संजमु साधीऐ तीरथि कीचै वासु ॥ पुंन दान चंगिआईआ बिनु साचे किआ तासु ॥ जेहा राधे तेहा लुणै बिनु गुण जनमु विणासु ॥१॥

मुंधे गुण दासी सुखु होइ ॥ अवगण तिआगि समाईऐ गुरमति पूरा सोइ ॥१॥ रहाउ ॥

विणु रासी वापारीआ तके कुंडा चारि ॥ मूलु न बुझै आपणा वसतु रही घर बारि ॥ विणु वखर दुखु अगला कूड़ि मुठी कूड़िआरि ॥२॥

लाहा अहिनिसि नउतना परखे रतनु वीचारि ॥ वसतु लहै घरि आपणै चलै कारजु सारि ॥ वणजारिआ सिउ वणजु करि गुरमुखि ब्रहमु बीचारि ॥३॥

संतां संगति पाईऐ जे मेले मेलणहारु ॥ मिलिआ होइ न विछुड़ै जिसु अंतरि जोति अपार ॥ सचै आसणि सचि रहै सचै प्रेम पिआर ॥४॥

जिनी आपु पछाणिआ घर महि महलु सुथाइ ॥ सचे सेती रतिआ सचो पलै पाइ ॥ त्रिभवणि सो प्रभु जाणीऐ साचो साचै नाइ ॥५॥

सा धन खरी सुहावणी जिनि पिरु जाता संगि ॥ महली महलि बुलाईऐ सो पिरु रावे रंगि ॥ सचि सुहागणि सा भली पिरि मोही गुण संगि ॥६॥

भूली भूली थलि चड़ा थलि चड़ि डूगरि जाउ ॥ बन महि भूली जे फिरा बिनु गुर बूझ न पाउ ॥ नावहु भूली जे फिरा फिरि फिरि आवउ जाउ ॥७॥

पुछहु जाइ पधाऊआ चले चाकर होइ ॥ राजनु जाणहि आपणा दरि घरि ठाक न होइ ॥ नानक एको रवि रहिआ दूजा अवरु न कोइ ॥८॥६॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 57) सिरीरागु महला १ ॥
गुर ते निरमलु जाणीऐ निरमल देह सरीरु ॥ निरमलु साचो मनि वसै सो जाणै अभ पीर ॥ सहजै ते सुखु अगलो ना लागै जम तीरु ॥१॥

भाई रे मैलु नाही निरमल जलि नाइ ॥ निरमलु साचा एकु तू होरु मैलु भरी सभ जाइ ॥१॥ रहाउ ॥

हरि का मंदरु सोहणा कीआ करणैहारि ॥ रवि ससि दीप अनूप जोति त्रिभवणि जोति अपार ॥ हाट पटण गड़ कोठड़ी सचु सउदा वापार ॥२॥

गिआन अंजनु भै भंजना देखु निरंजन भाइ ॥ गुपतु प्रगटु सभ जाणीऐ जे मनु राखै ठाइ ॥ ऐसा सतिगुरु जे मिलै ता सहजे लए मिलाइ ॥३॥

कसि कसवटी लाईऐ परखे हितु चितु लाइ ॥ खोटे ठउर न पाइनी खरे खजानै पाइ ॥ आस अंदेसा दूरि करि इउ मलु जाइ समाइ ॥४॥

सुख कउ मागै सभु को दुखु न मागै कोइ ॥ सुखै कउ दुखु अगला मनमुखि बूझ न होइ ॥ सुख दुख सम करि जाणीअहि सबदि भेदि सुखु होइ ॥५॥

बेदु पुकारे वाचीऐ बाणी ब्रहम बिआसु ॥ मुनि जन सेवक साधिका नामि रते गुणतासु ॥ सचि रते से जिणि गए हउ सद बलिहारै जासु ॥६॥

चहु जुगि मैले मलु भरे जिन मुखि नामु न होइ ॥ भगती भाइ विहूणिआ मुहु काला पति खोइ ॥ जिनी नामु विसारिआ अवगण मुठी रोइ ॥७॥

खोजत खोजत पाइआ डरु करि मिलै मिलाइ ॥ आपु पछाणै घरि वसै हउमै त्रिसना जाइ ॥ नानक निरमल ऊजले जो राते हरि नाइ ॥८॥७॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 57) सिरीरागु महला १ ॥
सुणि मन भूले बावरे गुर की चरणी लागु ॥ हरि जपि नामु धिआइ तू जमु डरपै दुख भागु ॥ दूखु घणो दोहागणी किउ थिरु रहै सुहागु ॥१॥

भाई रे अवरु नाही मै थाउ ॥ मै धनु नामु निधानु है गुरि दीआ बलि जाउ ॥१॥ रहाउ ॥

गुरमति पति साबासि तिसु तिस कै संगि मिलाउ ॥ तिसु बिनु घड़ी न जीवऊ बिनु नावै मरि जाउ ॥ मै अंधुले नामु न वीसरै टेक टिकी घरि जाउ ॥२॥

गुरू जिना का अंधुला चेले नाही ठाउ ॥ बिनु सतिगुर नाउ न पाईऐ बिनु नावै किआ सुआउ ॥ आइ गइआ पछुतावणा जिउ सुंञै घरि काउ ॥३॥

बिनु नावै दुखु देहुरी जिउ कलर की भीति ॥ तब लगु महलु न पाईऐ जब लगु साचु न चीति ॥ सबदि रपै घरु पाईऐ निरबाणी पदु नीति ॥४॥

हउ गुर पूछउ आपणे गुर पुछि कार कमाउ ॥ सबदि सलाही मनि वसै हउमै दुखु जलि जाउ ॥ सहजे होइ मिलावड़ा साचे साचि मिलाउ ॥५॥

सबदि रते से निरमले तजि काम क्रोधु अहंकारु ॥ नामु सलाहनि सद सदा हरि राखहि उर धारि ॥ सो किउ मनहु विसारीऐ सभ जीआ का आधारु ॥६॥

सबदि मरै सो मरि रहै फिरि मरै न दूजी वार ॥ सबदै ही ते पाईऐ हरि नामे लगै पिआरु ॥ बिनु सबदै जगु भूला फिरै मरि जनमै वारो वार ॥७॥

सभ सालाहै आप कउ वडहु वडेरी होइ ॥ गुर बिनु आपु न चीनीऐ कहे सुणे किआ होइ ॥ नानक सबदि पछाणीऐ हउमै करै न कोइ ॥८॥८॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 58) सिरीरागु महला १ ॥
बिनु पिर धन सीगारीऐ जोबनु बादि खुआरु ॥ ना माणे सुखि सेजड़ी बिनु पिर बादि सीगारु ॥ दूखु घणो दोहागणी ना घरि सेज भतारु ॥१॥

मन रे राम जपहु सुखु होइ ॥ बिनु गुर प्रेमु न पाईऐ सबदि मिलै रंगु होइ ॥१॥ रहाउ ॥

गुर सेवा सुखु पाईऐ हरि वरु सहजि सीगारु ॥ सचि माणे पिर सेजड़ी गूड़ा हेतु पिआरु ॥ गुरमुखि जाणि सिञाणीऐ गुरि मेली गुण चारु ॥२॥

सचि मिलहु वर कामणी पिरि मोही रंगु लाइ ॥ मनु तनु साचि विगसिआ कीमति कहणु न जाइ ॥ हरि वरु घरि सोहागणी निरमल साचै नाइ ॥३॥

मन महि मनूआ जे मरै ता पिरु रावै नारि ॥ इकतु तागै रलि मिलै गलि मोतीअन का हारु ॥ संत सभा सुखु ऊपजै गुरमुखि नाम अधारु ॥४॥

खिन महि उपजै खिनि खपै खिनु आवै खिनु जाइ ॥ सबदु पछाणै रवि रहै ना तिसु कालु संताइ ॥ साहिबु अतुलु न तोलीऐ कथनि न पाइआ जाइ ॥५॥

वापारी वणजारिआ आए वजहु लिखाइ ॥ कार कमावहि सच की लाहा मिलै रजाइ ॥ पूंजी साची गुरु मिलै ना तिसु तिलु न तमाइ ॥६॥

गुरमुखि तोलि तोलाइसी सचु तराजी तोलु ॥ आसा मनसा मोहणी गुरि ठाकी सचु बोलु ॥ आपि तुलाए तोलसी पूरे पूरा तोलु ॥७॥

कथनै कहणि न छुटीऐ ना पड़ि पुसतक भार ॥ काइआ सोच न पाईऐ बिनु हरि भगति पिआर ॥ नानक नामु न वीसरै मेले गुरु करतार ॥८॥९॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 59) सिरीरागु महला १ ॥
सतिगुरु पूरा जे मिलै पाईऐ रतनु बीचारु ॥ मनु दीजै गुर आपणे पाईऐ सरब पिआरु ॥ मुकति पदारथु पाईऐ अवगण मेटणहारु ॥१॥

भाई रे गुर बिनु गिआनु न होइ ॥ पूछहु ब्रहमे नारदै बेद बिआसै कोइ ॥१॥ रहाउ ॥

गिआनु धिआनु धुनि जाणीऐ अकथु कहावै सोइ ॥ सफलिओ बिरखु हरीआवला छाव घणेरी होइ ॥ लाल जवेहर माणकी गुर भंडारै सोइ ॥२॥

गुर भंडारै पाईऐ निरमल नाम पिआरु ॥ साचो वखरु संचीऐ पूरै करमि अपारु ॥ सुखदाता दुख मेटणो सतिगुरु असुर संघारु ॥३॥

भवजलु बिखमु डरावणो ना कंधी ना पारु ॥ ना बेड़ी ना तुलहड़ा ना तिसु वंझु मलारु ॥ सतिगुरु भै का बोहिथा नदरी पारि उतारु ॥४॥

इकु तिलु पिआरा विसरै दुखु लागै सुखु जाइ ॥ जिहवा जलउ जलावणी नामु न जपै रसाइ ॥ घटु बिनसै दुखु अगलो जमु पकड़ै पछुताइ ॥५॥

मेरी मेरी करि गए तनु धनु कलतु न साथि ॥ बिनु नावै धनु बादि है भूलो मारगि आथि ॥ साचउ साहिबु सेवीऐ गुरमुखि अकथो काथि ॥६॥

आवै जाइ भवाईऐ पइऐ किरति कमाइ ॥ पूरबि लिखिआ किउ मेटीऐ लिखिआ लेखु रजाइ ॥ बिनु हरि नाम न छुटीऐ गुरमति मिलै मिलाइ ॥७॥

तिसु बिनु मेरा को नही जिस का जीउ परानु ॥ हउमै ममता जलि बलउ लोभु जलउ अभिमानु ॥ नानक सबदु वीचारीऐ पाईऐ गुणी निधानु ॥८॥१०॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 59) सिरीरागु महला १ ॥
रे मन ऐसी हरि सिउ प्रीति करि जैसी जल कमलेहि ॥ लहरी नालि पछाड़ीऐ भी विगसै असनेहि ॥ जल महि जीअ उपाइ कै बिनु जल मरणु तिनेहि ॥१॥

मन रे किउ छूटहि बिनु पिआर ॥ गुरमुखि अंतरि रवि रहिआ बखसे भगति भंडार ॥१॥ रहाउ ॥

रे मन ऐसी हरि सिउ प्रीति करि जैसी मछुली नीर ॥ जिउ अधिकउ तिउ सुखु घणो मनि तनि सांति सरीर ॥ बिनु जल घड़ी न जीवई प्रभु जाणै अभ पीर ॥२॥

रे मन ऐसी हरि सिउ प्रीति करि जैसी चात्रिक मेह ॥ सर भरि थल हरीआवले इक बूंद न पवई केह ॥ करमि मिलै सो पाईऐ किरतु पइआ सिरि देह ॥३॥

रे मन ऐसी हरि सिउ प्रीति करि जैसी जल दुध होइ ॥ आवटणु आपे खवै दुध कउ खपणि न देइ ॥ आपे मेलि विछुंनिआ सचि वडिआई देइ ॥४॥

रे मन ऐसी हरि सिउ प्रीति करि जैसी चकवी सूर ॥ खिनु पलु नीद न सोवई जाणै दूरि हजूरि ॥ मनमुखि सोझी ना पवै गुरमुखि सदा हजूरि ॥५॥

मनमुखि गणत गणावणी करता करे सु होइ ॥ ता की कीमति ना पवै जे लोचै सभु कोइ ॥ गुरमति होइ त पाईऐ सचि मिलै सुखु होइ ॥६॥

सचा नेहु न तुटई जे सतिगुरु भेटै सोइ ॥ गिआन पदारथु पाईऐ त्रिभवण सोझी होइ ॥ निरमलु नामु न वीसरै जे गुण का गाहकु होइ ॥७॥

खेलि गए से पंखणूं जो चुगदे सर तलि ॥ घड़ी कि मुहति कि चलणा खेलणु अजु कि कलि ॥ जिसु तूं मेलहि सो मिलै जाइ सचा पिड़ु मलि ॥८॥

बिनु गुर प्रीति न ऊपजै हउमै मैलु न जाइ ॥ सोहं आपु पछाणीऐ सबदि भेदि पतीआइ ॥ गुरमुखि आपु पछाणीऐ अवर कि करे कराइ ॥९॥

मिलिआ का किआ मेलीऐ सबदि मिले पतीआइ ॥ मनमुखि सोझी ना पवै वीछुड़ि चोटा खाइ ॥ नानक दरु घरु एकु है अवरु न दूजी जाइ ॥१०॥११॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 60) सिरीरागु महला १ ॥
मनमुखि भुलै भुलाईऐ भूली ठउर न काइ ॥ गुर बिनु को न दिखावई अंधी आवै जाइ ॥ गिआन पदारथु खोइआ ठगिआ मुठा जाइ ॥१॥

बाबा माइआ भरमि भुलाइ ॥ भरमि भुली डोहागणी ना पिर अंकि समाइ ॥१॥ रहाउ ॥

भूली फिरै दिसंतरी भूली ग्रिहु तजि जाइ ॥ भूली डूंगरि थलि चड़ै भरमै मनु डोलाइ ॥ धुरहु विछुंनी किउ मिलै गरबि मुठी बिललाइ ॥२॥

विछुड़िआ गुरु मेलसी हरि रसि नाम पिआरि ॥ साचि सहजि सोभा घणी हरि गुण नाम अधारि ॥ जिउ भावै तिउ रखु तूं मै तुझ बिनु कवनु भतारु ॥३॥

अखर पड़ि पड़ि भुलीऐ भेखी बहुतु अभिमानु ॥ तीरथ नाता किआ करे मन महि मैलु गुमानु ॥ गुर बिनु किनि समझाईऐ मनु राजा सुलतानु ॥४॥

प्रेम पदारथु पाईऐ गुरमुखि ततु वीचारु ॥ सा धन आपु गवाइआ गुर कै सबदि सीगारु ॥ घर ही सो पिरु पाइआ गुर कै हेति अपारु ॥५॥

गुर की सेवा चाकरी मनु निरमलु सुखु होइ ॥ गुर का सबदु मनि वसिआ हउमै विचहु खोइ ॥ नामु पदारथु पाइआ लाभु सदा मनि होइ ॥६॥

करमि मिलै ता पाईऐ आपि न लइआ जाइ ॥ गुर की चरणी लगि रहु विचहु आपु गवाइ ॥ सचे सेती रतिआ सचो पलै पाइ ॥७॥

भुलण अंदरि सभु को अभुलु गुरू करतारु ॥ गुरमति मनु समझाइआ लागा तिसै पिआरु ॥ नानक साचु न वीसरै मेले सबदु अपारु ॥८॥१२॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 61) सिरीरागु महला १ ॥
त्रिसना माइआ मोहणी सुत बंधप घर नारि ॥ धनि जोबनि जगु ठगिआ लबि लोभि अहंकारि ॥ मोह ठगउली हउ मुई सा वरतै संसारि ॥१॥

मेरे प्रीतमा मै तुझ बिनु अवरु न कोइ ॥ मै तुझ बिनु अवरु न भावई तूं भावहि सुखु होइ ॥१॥ रहाउ ॥

नामु सालाही रंग सिउ गुर कै सबदि संतोखु ॥ जो दीसै सो चलसी कूड़ा मोहु न वेखु ॥ वाट वटाऊ आइआ नित चलदा साथु देखु ॥२॥

आखणि आखहि केतड़े गुर बिनु बूझ न होइ ॥ नामु वडाई जे मिलै सचि रपै पति होइ ॥ जो तुधु भावहि से भले खोटा खरा न कोइ ॥३॥

गुर सरणाई छुटीऐ मनमुख खोटी रासि ॥ असट धातु पातिसाह की घड़ीऐ सबदि विगासि ॥ आपे परखे पारखू पवै खजानै रासि ॥४॥

तेरी कीमति ना पवै सभ डिठी ठोकि वजाइ ॥ कहणै हाथ न लभई सचि टिकै पति पाइ ॥ गुरमति तूं सालाहणा होरु कीमति कहणु न जाइ ॥५॥

जितु तनि नामु न भावई तितु तनि हउमै वादु ॥ गुर बिनु गिआनु न पाईऐ बिखिआ दूजा सादु ॥ बिनु गुण कामि न आवई माइआ फीका सादु ॥६॥

आसा अंदरि जमिआ आसा रस कस खाइ ॥ आसा बंधि चलाईऐ मुहे मुहि चोटा खाइ ॥ अवगणि बधा मारीऐ छूटै गुरमति नाइ ॥७॥

सरबे थाई एकु तूं जिउ भावै तिउ राखु ॥ गुरमति साचा मनि वसै नामु भलो पति साखु ॥ हउमै रोगु गवाईऐ सबदि सचै सचु भाखु ॥८॥

आकासी पातालि तूं त्रिभवणि रहिआ समाइ ॥ आपे भगती भाउ तूं आपे मिलहि मिलाइ ॥ नानक नामु न वीसरै जिउ भावै तिवै रजाइ ॥९॥१३॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 62) सिरीरागु महला १ ॥
राम नामि मनु बेधिआ अवरु कि करी वीचारु ॥ सबद सुरति सुखु ऊपजै प्रभ रातउ सुख सारु ॥ जिउ भावै तिउ राखु तूं मै हरि नामु अधारु ॥१॥

मन रे साची खसम रजाइ ॥ जिनि तनु मनु साजि सीगारिआ तिसु सेती लिव लाइ ॥१॥ रहाउ ॥

तनु बैसंतरि होमीऐ इक रती तोलि कटाइ ॥ तनु मनु समधा जे करी अनदिनु अगनि जलाइ ॥ हरि नामै तुलि न पुजई जे लख कोटी करम कमाइ ॥२॥

अरध सरीरु कटाईऐ सिरि करवतु धराइ ॥ तनु हैमंचलि गालीऐ भी मन ते रोगु न जाइ ॥ हरि नामै तुलि न पुजई सभ डिठी ठोकि वजाइ ॥३॥

कंचन के कोट दतु करी बहु हैवर गैवर दानु ॥ भूमि दानु गऊआ घणी भी अंतरि गरबु गुमानु ॥ राम नामि मनु बेधिआ गुरि दीआ सचु दानु ॥४॥

मनहठ बुधी केतीआ केते बेद बीचार ॥ केते बंधन जीअ के गुरमुखि मोख दुआर ॥ सचहु ओरै सभु को उपरि सचु आचारु ॥५॥

सभु को ऊचा आखीऐ नीचु न दीसै कोइ ॥ इकनै भांडे साजिऐ इकु चानणु तिहु लोइ ॥ करमि मिलै सचु पाईऐ धुरि बखस न मेटै कोइ ॥६॥

साधु मिलै साधू जनै संतोखु वसै गुर भाइ ॥ अकथ कथा वीचारीऐ जे सतिगुर माहि समाइ ॥ पी अम्रितु संतोखिआ दरगहि पैधा जाइ ॥७॥

घटि घटि वाजै किंगुरी अनदिनु सबदि सुभाइ ॥ विरले कउ सोझी पई गुरमुखि मनु समझाइ ॥ नानक नामु न वीसरै छूटै सबदु कमाइ ॥८॥१४॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 62) सिरीरागु महला १ ॥
चिते दिसहि धउलहर बगे बंक दुआर ॥ करि मन खुसी उसारिआ दूजै हेति पिआरि ॥ अंदरु खाली प्रेम बिनु ढहि ढेरी तनु छारु ॥१॥

भाई रे तनु धनु साथि न होइ ॥ राम नामु धनु निरमलो गुरु दाति करे प्रभु सोइ ॥१॥ रहाउ ॥

राम नामु धनु निरमलो जे देवै देवणहारु ॥ आगै पूछ न होवई जिसु बेली गुरु करतारु ॥ आपि छडाए छुटीऐ आपे बखसणहारु ॥२॥

मनमुखु जाणै आपणे धीआ पूत संजोगु ॥ नारी देखि विगासीअहि नाले हरखु सु सोगु ॥ गुरमुखि सबदि रंगावले अहिनिसि हरि रसु भोगु ॥३॥

चितु चलै वितु जावणो साकत डोलि डोलाइ ॥ बाहरि ढूंढि विगुचीऐ घर महि वसतु सुथाइ ॥ मनमुखि हउमै करि मुसी गुरमुखि पलै पाइ ॥४॥

साकत निरगुणिआरिआ आपणा मूलु पछाणु ॥ रकतु बिंदु का इहु तनो अगनी पासि पिराणु ॥ पवणै कै वसि देहुरी मसतकि सचु नीसाणु ॥५॥

बहुता जीवणु मंगीऐ मुआ न लोड़ै कोइ ॥ सुख जीवणु तिसु आखीऐ जिसु गुरमुखि वसिआ सोइ ॥ नाम विहूणे किआ गणी जिसु हरि गुर दरसु न होइ ॥६॥

जिउ सुपनै निसि भुलीऐ जब लगि निद्रा होइ ॥ इउ सरपनि कै वसि जीअड़ा अंतरि हउमै दोइ ॥ गुरमति होइ वीचारीऐ सुपना इहु जगु लोइ ॥७॥

अगनि मरै जलु पाईऐ जिउ बारिक दूधै माइ ॥ बिनु जल कमल सु ना थीऐ बिनु जल मीनु मराइ ॥ नानक गुरमुखि हरि रसि मिलै जीवा हरि गुण गाइ ॥८॥१५॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 63) सिरीरागु महला १ ॥
डूंगरु देखि डरावणो पेईअड़ै डरीआसु ॥ ऊचउ परबतु गाखड़ो ना पउड़ी तितु तासु ॥ गुरमुखि अंतरि जाणिआ गुरि मेली तरीआसु ॥१॥

भाई रे भवजलु बिखमु डरांउ ॥ पूरा सतिगुरु रसि मिलै गुरु तारे हरि नाउ ॥१॥ रहाउ ॥

चला चला जे करी जाणा चलणहारु ॥ जो आइआ सो चलसी अमरु सु गुरु करतारु ॥ भी सचा सालाहणा सचै थानि पिआरु ॥२॥

दर घर महला सोहणे पके कोट हजार ॥ हसती घोड़े पाखरे लसकर लख अपार ॥ किस ही नालि न चलिआ खपि खपि मुए असार ॥३॥

सुइना रुपा संचीऐ मालु जालु जंजालु ॥ सभ जग महि दोही फेरीऐ बिनु नावै सिरि कालु ॥ पिंडु पड़ै जीउ खेलसी बदफैली किआ हालु ॥४॥

पुता देखि विगसीऐ नारी सेज भतार ॥ चोआ चंदनु लाईऐ कापड़ु रूपु सीगारु ॥ खेहू खेह रलाईऐ छोडि चलै घर बारु ॥५॥

महर मलूक कहाईऐ राजा राउ कि खानु ॥ चउधरी राउ सदाईऐ जलि बलीऐ अभिमान ॥ मनमुखि नामु विसारिआ जिउ डवि दधा कानु ॥६॥

हउमै करि करि जाइसी जो आइआ जग माहि ॥ सभु जगु काजल कोठड़ी तनु मनु देह सुआहि ॥ गुरि राखे से निरमले सबदि निवारी भाहि ॥७॥

नानक तरीऐ सचि नामि सिरि साहा पातिसाहु ॥ मै हरि नामु न वीसरै हरि नामु रतनु वेसाहु ॥ मनमुख भउजलि पचि मुए गुरमुखि तरे अथाहु ॥८॥१६॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 64) सिरीरागु महला १ घरु २ ॥
मुकामु करि घरि बैसणा नित चलणै की धोख ॥ मुकामु ता परु जाणीऐ जा रहै निहचलु लोक ॥१॥

दुनीआ कैसि मुकामे ॥ करि सिदकु करणी खरचु बाधहु लागि रहु नामे ॥१॥ रहाउ ॥

जोगी त आसणु करि बहै मुला बहै मुकामि ॥ पंडित वखाणहि पोथीआ सिध बहहि देव सथानि ॥२॥

सुर सिध गण गंधरब मुनि जन सेख पीर सलार ॥ दरि कूच कूचा करि गए अवरे भि चलणहार ॥३॥

सुलतान खान मलूक उमरे गए करि करि कूचु ॥ घड़ी मुहति कि चलणा दिल समझु तूं भि पहूचु ॥४॥

सबदाह माहि वखाणीऐ विरला त बूझै कोइ ॥ नानकु वखाणै बेनती जलि थलि महीअलि सोइ ॥५॥

अलाहु अलखु अगमु कादरु करणहारु करीमु ॥ सभ दुनी आवण जावणी मुकामु एकु रहीमु ॥६॥

मुकामु तिस नो आखीऐ जिसु सिसि न होवी लेखु ॥ असमानु धरती चलसी मुकामु ओही एकु ॥७॥

दिन रवि चलै निसि ससि चलै तारिका लख पलोइ ॥ मुकामु ओही एकु है नानका सचु बुगोइ ॥८॥१७॥

महले पहिले सतारह असटपदीआ ॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 71) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सिरीरागु महला १ घरु ३ ॥
जोगी अंदरि जोगीआ ॥ तूं भोगी अंदरि भोगीआ ॥ तेरा अंतु न पाइआ सुरगि मछि पइआलि जीउ ॥१॥

हउ वारी हउ वारणै कुरबाणु तेरे नाव नो ॥१॥ रहाउ ॥

तुधु संसारु उपाइआ ॥ सिरे सिरि धंधे लाइआ ॥ वेखहि कीता आपणा करि कुदरति पासा ढालि जीउ ॥२॥

परगटि पाहारै जापदा ॥ सभु नावै नो परतापदा ॥ सतिगुर बाझु न पाइओ सभ मोही माइआ जालि जीउ ॥३॥

सतिगुर कउ बलि जाईऐ ॥ जितु मिलिऐ परम गति पाईऐ ॥ सुरि नर मुनि जन लोचदे सो सतिगुरि दीआ बुझाइ जीउ ॥४॥

सतसंगति कैसी जाणीऐ ॥ जिथै एको नामु वखाणीऐ ॥ एको नामु हुकमु है नानक सतिगुरि दीआ बुझाइ जीउ ॥५॥

इहु जगतु भरमि भुलाइआ ॥ आपहु तुधु खुआइआ ॥ परतापु लगा दोहागणी भाग जिना के नाहि जीउ ॥६॥

दोहागणी किआ नीसाणीआ ॥ खसमहु घुथीआ फिरहि निमाणीआ ॥ मैले वेस तिना कामणी दुखी रैणि विहाइ जीउ ॥७॥

सोहागणी किआ करमु कमाइआ ॥ पूरबि लिखिआ फलु पाइआ ॥ नदरि करे कै आपणी आपे लए मिलाइ जीउ ॥८॥

हुकमु जिना नो मनाइआ ॥ तिन अंतरि सबदु वसाइआ ॥ सहीआ से सोहागणी जिन सह नालि पिआरु जीउ ॥९॥

जिना भाणे का रसु आइआ ॥ तिन विचहु भरमु चुकाइआ ॥ नानक सतिगुरु ऐसा जाणीऐ जो सभसै लए मिलाइ जीउ ॥१०॥

सतिगुरि मिलिऐ फलु पाइआ ॥ जिनि विचहु अहकरणु चुकाइआ ॥ दुरमति का दुखु कटिआ भागु बैठा मसतकि आइ जीउ ॥११॥

अम्रितु तेरी बाणीआ ॥ तेरिआ भगता रिदै समाणीआ ॥ सुख सेवा अंदरि रखिऐ आपणी नदरि करहि निसतारि जीउ ॥१२॥

सतिगुरु मिलिआ जाणीऐ ॥ जितु मिलिऐ नामु वखाणीऐ ॥ सतिगुर बाझु न पाइओ सभ थकी करम कमाइ जीउ ॥१३॥

हउ सतिगुर विटहु घुमाइआ ॥ जिनि भ्रमि भुला मारगि पाइआ ॥ नदरि करे जे आपणी आपे लए रलाइ जीउ ॥१४॥

तूं सभना माहि समाइआ ॥ तिनि करतै आपु लुकाइआ ॥ नानक गुरमुखि परगटु होइआ जा कउ जोति धरी करतारि जीउ ॥१५॥

आपे खसमि निवाजिआ ॥ जीउ पिंडु दे साजिआ ॥ आपणे सेवक की पैज रखीआ दुइ कर मसतकि धारि जीउ ॥१६॥

सभि संजम रहे सिआणपा ॥ मेरा प्रभु सभु किछु जाणदा ॥ प्रगट प्रतापु वरताइओ सभु लोकु करै जैकारु जीउ ॥१७॥

मेरे गुण अवगन न बीचारिआ ॥ प्रभि अपणा बिरदु समारिआ ॥ कंठि लाइ कै रखिओनु लगै न तती वाउ जीउ ॥१८॥

मै मनि तनि प्रभू धिआइआ ॥ जीइ इछिअड़ा फलु पाइआ ॥ साह पातिसाह सिरि खसमु तूं जपि नानक जीवै नाउ जीउ ॥१९॥

तुधु आपे आपु उपाइआ ॥ दूजा खेलु करि दिखलाइआ ॥ सभु सचो सचु वरतदा जिसु भावै तिसै बुझाइ जीउ ॥२०॥

गुर परसादी पाइआ ॥ तिथै माइआ मोहु चुकाइआ ॥ किरपा करि कै आपणी आपे लए समाइ जीउ ॥२१॥

गोपी नै गोआलीआ ॥ तुधु आपे गोइ उठालीआ ॥ हुकमी भांडे साजिआ तूं आपे भंनि सवारि जीउ ॥२२॥

जिन सतिगुर सिउ चितु लाइआ ॥ तिनी दूजा भाउ चुकाइआ ॥ निरमल जोति तिन प्राणीआ ओइ चले जनमु सवारि जीउ ॥२३॥

तेरीआ सदा सदा चंगिआईआ ॥ मै राति दिहै वडिआईआं ॥ अणमंगिआ दानु देवणा कहु नानक सचु समालि जीउ ॥२४॥१॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 74) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सिरीरागु महला १ पहरे घरु १ ॥
पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा हुकमि पइआ गरभासि ॥ उरध तपु अंतरि करे वणजारिआ मित्रा खसम सेती अरदासि ॥ खसम सेती अरदासि वखाणै उरध धिआनि लिव लागा ॥ ना मरजादु आइआ कलि भीतरि बाहुड़ि जासी नागा ॥ जैसी कलम वुड़ी है मसतकि तैसी जीअड़े पासि ॥ कहु नानक प्राणी पहिलै पहरै हुकमि पइआ गरभासि ॥१॥

दूजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा विसरि गइआ धिआनु ॥ हथो हथि नचाईऐ वणजारिआ मित्रा जिउ जसुदा घरि कानु ॥ हथो हथि नचाईऐ प्राणी मात कहै सुतु मेरा ॥ चेति अचेत मूड़ मन मेरे अंति नही कछु तेरा ॥ जिनि रचि रचिआ तिसहि न जाणै मन भीतरि धरि गिआनु ॥ कहु नानक प्राणी दूजै पहरै विसरि गइआ धिआनु ॥२॥

तीजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा धन जोबन सिउ चितु ॥ हरि का नामु न चेतही वणजारिआ मित्रा बधा छुटहि जितु ॥ हरि का नामु न चेतै प्राणी बिकलु भइआ संगि माइआ ॥ धन सिउ रता जोबनि मता अहिला जनमु गवाइआ ॥ धरम सेती वापारु न कीतो करमु न कीतो मितु ॥ कहु नानक तीजै पहरै प्राणी धन जोबन सिउ चितु ॥३॥

चउथै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा लावी आइआ खेतु ॥ जा जमि पकड़ि चलाइआ वणजारिआ मित्रा किसै न मिलिआ भेतु ॥ भेतु चेतु हरि किसै न मिलिओ जा जमि पकड़ि चलाइआ ॥ झूठा रुदनु होआ दोआलै खिन महि भइआ पराइआ ॥ साई वसतु परापति होई जिसु सिउ लाइआ हेतु ॥ कहु नानक प्राणी चउथै पहरै लावी लुणिआ खेतु ॥४॥१॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 75) सिरीरागु महला १ ॥
पहिलै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा बालक बुधि अचेतु ॥ खीरु पीऐ खेलाईऐ वणजारिआ मित्रा मात पिता सुत हेतु ॥ मात पिता सुत नेहु घनेरा माइआ मोहु सबाई ॥ संजोगी आइआ किरतु कमाइआ करणी कार कराई ॥ राम नाम बिनु मुकति न होई बूडी दूजै हेति ॥ कहु नानक प्राणी पहिलै पहरै छूटहिगा हरि चेति ॥१॥

दूजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा भरि जोबनि मै मति ॥ अहिनिसि कामि विआपिआ वणजारिआ मित्रा अंधुले नामु न चिति ॥ राम नामु घट अंतरि नाही होरि जाणै रस कस मीठे ॥ गिआनु धिआनु गुण संजमु नाही जनमि मरहुगे झूठे ॥ तीरथ वरत सुचि संजमु नाही करमु धरमु नही पूजा ॥ नानक भाइ भगति निसतारा दुबिधा विआपै दूजा ॥२॥

तीजै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा सरि हंस उलथड़े आइ ॥ जोबनु घटै जरूआ जिणै वणजारिआ मित्रा आव घटै दिनु जाइ ॥ अंति कालि पछुतासी अंधुले जा जमि पकड़ि चलाइआ ॥ सभु किछु अपुना करि करि राखिआ खिन महि भइआ पराइआ ॥ बुधि विसरजी गई सिआणप करि अवगण पछुताइ ॥ कहु नानक प्राणी तीजै पहरै प्रभु चेतहु लिव लाइ ॥३॥

चउथै पहरै रैणि कै वणजारिआ मित्रा बिरधि भइआ तनु खीणु ॥ अखी अंधु न दीसई वणजारिआ मित्रा कंनी सुणै न वैण ॥ अखी अंधु जीभ रसु नाही रहे पराकउ ताणा ॥ गुण अंतरि नाही किउ सुखु पावै मनमुख आवण जाणा ॥ खड़ु पकी कुड़ि भजै बिनसै आइ चलै किआ माणु ॥ कहु नानक प्राणी चउथै पहरै गुरमुखि सबदु पछाणु ॥४॥

ओड़कु आइआ तिन साहिआ वणजारिआ मित्रा जरु जरवाणा कंनि ॥ इक रती गुण न समाणिआ वणजारिआ मित्रा अवगण खड़सनि बंनि ॥ गुण संजमि जावै चोट न खावै ना तिसु जमणु मरणा ॥ कालु जालु जमु जोहि न साकै भाइ भगति भै तरणा ॥ पति सेती जावै सहजि समावै सगले दूख मिटावै ॥ कहु नानक प्राणी गुरमुखि छूटै साचे ते पति पावै ॥५॥२॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 83) सलोक मः १ ॥
दाती साहिब संदीआ किआ चलै तिसु नालि ॥ इक जागंदे ना लहंनि इकना सुतिआ देइ उठालि ॥१॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 83) मः १ ॥
सिदकु सबूरी सादिका सबरु तोसा मलाइकां ॥ दीदारु पूरे पाइसा थाउ नाही खाइका ॥२॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 83) सलोक मः १ ॥
फकड़ जाती फकड़ु नाउ ॥ सभना जीआ इका छाउ ॥ आपहु जे को भला कहाए ॥ नानक ता परु जापै जा पति लेखै पाए ॥१॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 83) सलोक मः १ ॥
कुदरति करि कै वसिआ सोइ ॥ वखतु वीचारे सु बंदा होइ ॥ कुदरति है कीमति नही पाइ ॥ जा कीमति पाइ त कही न जाइ ॥ सरै सरीअति करहि बीचारु ॥ बिनु बूझे कैसे पावहि पारु ॥ सिदकु करि सिजदा मनु करि मखसूदु ॥ जिह धिरि देखा तिह धिरि मउजूदु ॥१॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 85) मः १ ॥
गलीं असी चंगीआ आचारी बुरीआह ॥ मनहु कुसुधा कालीआ बाहरि चिटवीआह ॥ रीसा करिह तिनाड़ीआ जो सेवहि दरु खड़ीआह ॥ नालि खसमै रतीआ माणहि सुखि रलीआह ॥ होदै ताणि निताणीआ रहहि निमानणीआह ॥ नानक जनमु सकारथा जे तिन कै संगि मिलाह ॥२॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 91) सलोक मः १ ॥
कुबुधि डूमणी कुदइआ कसाइणि पर निंदा घट चूहड़ी मुठी क्रोधि चंडालि ॥ कारी कढी किआ थीऐ जां चारे बैठीआ नालि ॥ सचु संजमु करणी कारां नावणु नाउ जपेही ॥ नानक अगै ऊतम सेई जि पापां पंदि न देही ॥१॥


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