Pt 12 - गुरू नानक देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 12 - Guru Nanak Dev ji (Mahalla 1) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग तिलंग -- SGGS 722) तिलंग महला १ ॥
जैसी मै आवै खसम की बाणी तैसड़ा करी गिआनु वे लालो ॥ पाप की जंञ लै काबलहु धाइआ जोरी मंगै दानु वे लालो ॥ सरमु धरमु दुइ छपि खलोए कूड़ु फिरै परधानु वे लालो ॥ काजीआ बामणा की गल थकी अगदु पड़ै सैतानु वे लालो ॥ मुसलमानीआ पड़हि कतेबा कसट महि करहि खुदाइ वे लालो ॥ जाति सनाती होरि हिदवाणीआ एहि भी लेखै लाइ वे लालो ॥ खून के सोहिले गावीअहि नानक रतु का कुंगू पाइ वे लालो ॥१॥

साहिब के गुण नानकु गावै मास पुरी विचि आखु मसोला ॥ जिनि उपाई रंगि रवाई बैठा वेखै वखि इकेला ॥ सचा सो साहिबु सचु तपावसु सचड़ा निआउ करेगु मसोला ॥ काइआ कपड़ु टुकु टुकु होसी हिदुसतानु समालसी बोला ॥ आवनि अठतरै जानि सतानवै होरु भी उठसी मरद का चेला ॥ सच की बाणी नानकु आखै सचु सुणाइसी सच की बेला ॥२॥३॥५॥

(राग तिलंग -- SGGS 724) तिलंग महला १ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जिनि कीआ तिनि देखिआ किआ कहीऐ रे भाई ॥ आपे जाणै करे आपि जिनि वाड़ी है लाई ॥१॥

राइसा पिआरे का राइसा जितु सदा सुखु होई ॥ रहाउ ॥ जिनि रंगि कंतु न राविआ सा पछो रे ताणी ॥ हाथ पछोड़ै सिरु धुणै जब रैणि विहाणी ॥२॥

पछोतावा ना मिलै जब चूकैगी सारी ॥ ता फिरि पिआरा रावीऐ जब आवैगी वारी ॥३॥

कंतु लीआ सोहागणी मै ते वधवी एह ॥ से गुण मुझै न आवनी कै जी दोसु धरेह ॥४॥

जिनी सखी सहु राविआ तिन पूछउगी जाए ॥ पाइ लगउ बेनती करउ लेउगी पंथु बताए ॥५॥

हुकमु पछाणै नानका भउ चंदनु लावै ॥ गुण कामण कामणि करै तउ पिआरे कउ पावै ॥६॥

जो दिलि मिलिआ सु मिलि रहिआ मिलिआ कहीऐ रे सोई ॥ जे बहुतेरा लोचीऐ बाती मेलु न होई ॥७॥

धातु मिलै फुनि धातु कउ लिव लिवै कउ धावै ॥ गुर परसादी जाणीऐ तउ अनभउ पावै ॥८॥

पाना वाड़ी होइ घरि खरु सार न जाणै ॥ रसीआ होवै मुसक का तब फूलु पछाणै ॥९॥

अपिउ पीवै जो नानका भ्रमु भ्रमि समावै ॥ सहजे सहजे मिलि रहै अमरा पदु पावै ॥१०॥१॥

(राग सूही -- SGGS 728) ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥
रागु सूही महला १ चउपदे घरु १
भांडा धोइ बैसि धूपु देवहु तउ दूधै कउ जावहु ॥ दूधु करम फुनि सुरति समाइणु होइ निरास जमावहु ॥१॥

जपहु त एको नामा ॥ अवरि निराफल कामा ॥१॥ रहाउ ॥

इहु मनु ईटी हाथि करहु फुनि नेत्रउ नीद न आवै ॥ रसना नामु जपहु तब मथीऐ इन बिधि अम्रितु पावहु ॥२॥

मनु स्मपटु जितु सत सरि नावणु भावन पाती त्रिपति करे ॥ पूजा प्राण सेवकु जे सेवे इन्ह बिधि साहिबु रवतु रहै ॥३॥

कहदे कहहि कहे कहि जावहि तुम सरि अवरु न कोई ॥ भगति हीणु नानकु जनु ज्मपै हउ सालाही सचा सोई ॥४॥१॥

(राग सूही -- SGGS 728) सूही महला १ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
अंतरि वसै न बाहरि जाइ ॥ अम्रितु छोडि काहे बिखु खाइ ॥१॥

ऐसा गिआनु जपहु मन मेरे ॥ होवहु चाकर साचे केरे ॥१॥ रहाउ ॥

गिआनु धिआनु सभु कोई रवै ॥ बांधनि बांधिआ सभु जगु भवै ॥२॥

सेवा करे सु चाकरु होइ ॥ जलि थलि महीअलि रवि रहिआ सोइ ॥३॥

हम नही चंगे बुरा नही कोइ ॥ प्रणवति नानकु तारे सोइ ॥४॥१॥२॥

(राग सूही -- SGGS 729) सूही महला १ घरु ६
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
उजलु कैहा चिलकणा घोटिम कालड़ी मसु ॥ धोतिआ जूठि न उतरै जे सउ धोवा तिसु ॥१॥

सजण सेई नालि मै चलदिआ नालि चलंन्हि ॥ जिथै लेखा मंगीऐ तिथै खड़े दिसंनि ॥१॥ रहाउ ॥

कोठे मंडप माड़ीआ पासहु चितवीआहा ॥ ढठीआ कमि न आवन्ही विचहु सखणीआहा ॥२॥

बगा बगे कपड़े तीरथ मंझि वसंन्हि ॥ घुटि घुटि जीआ खावणे बगे ना कहीअन्हि ॥३॥

सिमल रुखु सरीरु मै मैजन देखि भुलंन्हि ॥ से फल कमि न आवन्ही ते गुण मै तनि हंन्हि ॥४॥

अंधुलै भारु उठाइआ डूगर वाट बहुतु ॥ अखी लोड़ी ना लहा हउ चड़ि लंघा कितु ॥५॥

चाकरीआ चंगिआईआ अवर सिआणप कितु ॥ नानक नामु समालि तूं बधा छुटहि जितु ॥६॥१॥३॥

(राग सूही -- SGGS 729) सूही महला १ ॥
जप तप का बंधु बेड़ुला जितु लंघहि वहेला ॥ ना सरवरु ना ऊछलै ऐसा पंथु सुहेला ॥१॥

तेरा एको नामु मंजीठड़ा रता मेरा चोला सद रंग ढोला ॥१॥ रहाउ ॥

साजन चले पिआरिआ किउ मेला होई ॥ जे गुण होवहि गंठड़ीऐ मेलेगा सोई ॥२॥

मिलिआ होइ न वीछुड़ै जे मिलिआ होई ॥ आवा गउणु निवारिआ है साचा सोई ॥३॥

हउमै मारि निवारिआ सीता है चोला ॥ गुर बचनी फलु पाइआ सह के अम्रित बोला ॥४॥

नानकु कहै सहेलीहो सहु खरा पिआरा ॥ हम सह केरीआ दासीआ साचा खसमु हमारा ॥५॥२॥४॥

(राग सूही -- SGGS 729) सूही महला १ ॥
जिन कउ भांडै भाउ तिना सवारसी ॥ सूखी करै पसाउ दूख विसारसी ॥ सहसा मूले नाहि सरपर तारसी ॥१॥

तिन्हा मिलिआ गुरु आइ जिन कउ लीखिआ ॥ अम्रितु हरि का नाउ देवै दीखिआ ॥ चालहि सतिगुर भाइ भवहि न भीखिआ ॥२॥

जा कउ महलु हजूरि दूजे निवै किसु ॥ दरि दरवाणी नाहि मूले पुछ तिसु ॥ छुटै ता कै बोलि साहिब नदरि जिसु ॥३॥

घले आणे आपि जिसु नाही दूजा मतै कोइ ॥ ढाहि उसारे साजि जाणै सभ सोइ ॥ नाउ नानक बखसीस नदरी करमु होइ ॥४॥३॥५॥

(राग सूही -- SGGS 730) सूही महला १ ॥
भांडा हछा सोइ जो तिसु भावसी ॥ भांडा अति मलीणु धोता हछा न होइसी ॥ गुरू दुआरै होइ सोझी पाइसी ॥ एतु दुआरै धोइ हछा होइसी ॥ मैले हछे का वीचारु आपि वरताइसी ॥ मतु को जाणै जाइ अगै पाइसी ॥ जेहे करम कमाइ तेहा होइसी ॥ अम्रितु हरि का नाउ आपि वरताइसी ॥ चलिआ पति सिउ जनमु सवारि वाजा वाइसी ॥ माणसु किआ वेचारा तिहु लोक सुणाइसी ॥ नानक आपि निहाल सभि कुल तारसी ॥१॥४॥६॥

(राग सूही -- SGGS 730) सूही महला १ ॥
जोगी होवै जोगवै भोगी होवै खाइ ॥ तपीआ होवै तपु करे तीरथि मलि मलि नाइ ॥१॥

तेरा सदड़ा सुणीजै भाई जे को बहै अलाइ ॥१॥ रहाउ ॥

जैसा बीजै सो लुणे जो खटे सो खाइ ॥ अगै पुछ न होवई जे सणु नीसाणै जाइ ॥२॥

तैसो जैसा काढीऐ जैसी कार कमाइ ॥ जो दमु चिति न आवई सो दमु बिरथा जाइ ॥३॥

इहु तनु वेची बै करी जे को लए विकाइ ॥ नानक कमि न आवई जितु तनि नाही सचा नाउ ॥४॥५॥७॥

(राग सूही -- SGGS 730) सूही महला १ घरु ७
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
जोगु न खिंथा जोगु न डंडै जोगु न भसम चड़ाईऐ ॥ जोगु न मुंदी मूंडि मुडाइऐ जोगु न सिंङी वाईऐ ॥ अंजन माहि निरंजनि रहीऐ जोग जुगति इव पाईऐ ॥१॥

गली जोगु न होई ॥ एक द्रिसटि करि समसरि जाणै जोगी कहीऐ सोई ॥१॥ रहाउ ॥

जोगु न बाहरि मड़ी मसाणी जोगु न ताड़ी लाईऐ ॥ जोगु न देसि दिसंतरि भविऐ जोगु न तीरथि नाईऐ ॥ अंजन माहि निरंजनि रहीऐ जोग जुगति इव पाईऐ ॥२॥

सतिगुरु भेटै ता सहसा तूटै धावतु वरजि रहाईऐ ॥ निझरु झरै सहज धुनि लागै घर ही परचा पाईऐ ॥ अंजन माहि निरंजनि रहीऐ जोग जुगति इव पाईऐ ॥३॥

नानक जीवतिआ मरि रहीऐ ऐसा जोगु कमाईऐ ॥ वाजे बाझहु सिंङी वाजै तउ निरभउ पदु पाईऐ ॥ अंजन माहि निरंजनि रहीऐ जोग जुगति तउ पाईऐ ॥४॥१॥८॥

(राग सूही -- SGGS 730) सूही महला १ ॥
कउण तराजी कवणु तुला तेरा कवणु सराफु बुलावा ॥ कउणु गुरू कै पहि दीखिआ लेवा कै पहि मुलु करावा ॥१॥

मेरे लाल जीउ तेरा अंतु न जाणा ॥ तूं जलि थलि महीअलि भरिपुरि लीणा तूं आपे सरब समाणा ॥१॥ रहाउ ॥

मनु ताराजी चितु तुला तेरी सेव सराफु कमावा ॥ घट ही भीतरि सो सहु तोली इन बिधि चितु रहावा ॥२॥

आपे कंडा तोलु तराजी आपे तोलणहारा ॥ आपे देखै आपे बूझै आपे है वणजारा ॥३॥

अंधुला नीच जाति परदेसी खिनु आवै तिलु जावै ॥ ता की संगति नानकु रहदा किउ करि मूड़ा पावै ॥४॥२॥९॥

(राग सूही -- SGGS 750) रागु सूही असटपदीआ महला १ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सभि अवगण मै गुणु नही कोई ॥ किउ करि कंत मिलावा होई ॥१॥

ना मै रूपु न बंके नैणा ॥ ना कुल ढंगु न मीठे बैणा ॥१॥ रहाउ ॥

सहजि सीगार कामणि करि आवै ॥ ता सोहागणि जा कंतै भावै ॥२॥

ना तिसु रूपु न रेखिआ काई ॥ अंति न साहिबु सिमरिआ जाई ॥३॥

सुरति मति नाही चतुराई ॥ करि किरपा प्रभ लावहु पाई ॥४॥

खरी सिआणी कंत न भाणी ॥ माइआ लागी भरमि भुलाणी ॥५॥

हउमै जाई ता कंत समाई ॥ तउ कामणि पिआरे नव निधि पाई ॥६॥

अनिक जनम बिछुरत दुखु पाइआ ॥ करु गहि लेहु प्रीतम प्रभ राइआ ॥७॥

भणति नानकु सहु है भी होसी ॥ जै भावै पिआरा तै रावेसी ॥८॥१॥

(राग सूही -- SGGS 751) सूही महला १ घरु ९
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
कचा रंगु कसु्मभ का थोड़ड़िआ दिन चारि जीउ ॥ विणु नावै भ्रमि भुलीआ ठगि मुठी कूड़िआरि जीउ ॥ सचे सेती रतिआ जनमु न दूजी वार जीउ ॥१॥

रंगे का किआ रंगीऐ जो रते रंगु लाइ जीउ ॥ रंगण वाला सेवीऐ सचे सिउ चितु लाइ जीउ ॥१॥ रहाउ ॥

चारे कुंडा जे भवहि बिनु भागा धनु नाहि जीउ ॥ अवगणि मुठी जे फिरहि बधिक थाइ न पाहि जीउ ॥ गुरि राखे से उबरे सबदि रते मन माहि जीउ ॥२॥

चिटे जिन के कपड़े मैले चित कठोर जीउ ॥ तिन मुखि नामु न ऊपजै दूजै विआपे चोर जीउ ॥ मूलु न बूझहि आपणा से पसूआ से ढोर जीउ ॥३॥

नित नित खुसीआ मनु करे नित नित मंगै सुख जीउ ॥ करता चिति न आवई फिरि फिरि लगहि दुख जीउ ॥ सुख दुख दाता मनि वसै तितु तनि कैसी भुख जीउ ॥४॥

बाकी वाला तलबीऐ सिरि मारे जंदारु जीउ ॥ लेखा मंगै देवणा पुछै करि बीचारु जीउ ॥ सचे की लिव उबरै बखसे बखसणहारु जीउ ॥५॥

अन को कीजै मितड़ा खाकु रलै मरि जाइ जीउ ॥ बहु रंग देखि भुलाइआ भुलि भुलि आवै जाइ जीउ ॥ नदरि प्रभू ते छुटीऐ नदरी मेलि मिलाइ जीउ ॥६॥

गाफल गिआन विहूणिआ गुर बिनु गिआनु न भालि जीउ ॥ खिंचोताणि विगुचीऐ बुरा भला दुइ नालि जीउ ॥ बिनु सबदै भै रतिआ सभ जोही जमकालि जीउ ॥७॥

जिनि करि कारणु धारिआ सभसै देइ आधारु जीउ ॥ सो किउ मनहु विसारीऐ सदा सदा दातारु जीउ ॥ नानक नामु न वीसरै निधारा आधारु जीउ ॥८॥१॥२॥

(राग सूही काफी -- SGGS 751) सूही महला १ काफी घरु १०
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
माणस जनमु दुल्मभु गुरमुखि पाइआ ॥ मनु तनु होइ चुल्मभु जे सतिगुर भाइआ ॥१॥

चलै जनमु सवारि वखरु सचु लै ॥ पति पाए दरबारि सतिगुर सबदि भै ॥१॥ रहाउ ॥

मनि तनि सचु सलाहि साचे मनि भाइआ ॥ लालि रता मनु मानिआ गुरु पूरा पाइआ ॥२॥

हउ जीवा गुण सारि अंतरि तू वसै ॥ तूं वसहि मन माहि सहजे रसि रसै ॥३॥

मूरख मन समझाइ आखउ केतड़ा ॥ गुरमुखि हरि गुण गाइ रंगि रंगेतड़ा ॥४॥

नित नित रिदै समालि प्रीतमु आपणा ॥ जे चलहि गुण नालि नाही दुखु संतापणा ॥५॥

मनमुख भरमि भुलाणा ना तिसु रंगु है ॥ मरसी होइ विडाणा मनि तनि भंगु है ॥६॥

गुर की कार कमाइ लाहा घरि आणिआ ॥ गुरबाणी निरबाणु सबदि पछाणिआ ॥७॥

इक नानक की अरदासि जे तुधु भावसी ॥ मै दीजै नाम निवासु हरि गुण गावसी ॥८॥१॥३॥

(राग सूही -- SGGS 752) सूही महला १ ॥
जिउ आरणि लोहा पाइ भंनि घड़ाईऐ ॥ तिउ साकतु जोनी पाइ भवै भवाईऐ ॥१॥

बिनु बूझे सभु दुखु दुखु कमावणा ॥ हउमै आवै जाइ भरमि भुलावणा ॥१॥ रहाउ ॥

तूं गुरमुखि रखणहारु हरि नामु धिआईऐ ॥ मेलहि तुझहि रजाइ सबदु कमाईऐ ॥२॥

तूं करि करि वेखहि आपि देहि सु पाईऐ ॥ तू देखहि थापि उथापि दरि बीनाईऐ ॥३॥

देही होवगि खाकु पवणु उडाईऐ ॥ इहु किथै घरु अउताकु महलु न पाईऐ ॥४॥

दिहु दीवी अंध घोरु घबु मुहाईऐ ॥ गरबि मुसै घरु चोरु किसु रूआईऐ ॥५॥

गुरमुखि चोरु न लागि हरि नामि जगाईऐ ॥ सबदि निवारी आगि जोति दीपाईऐ ॥६॥

लालु रतनु हरि नामु गुरि सुरति बुझाईऐ ॥ सदा रहै निहकामु जे गुरमति पाईऐ ॥७॥

राति दिहै हरि नाउ मंनि वसाईऐ ॥ नानक मेलि मिलाइ जे तुधु भाईऐ ॥८॥२॥४॥

(राग सूही -- SGGS 752) सूही महला १ ॥
मनहु न नामु विसारि अहिनिसि धिआईऐ ॥ जिउ राखहि किरपा धारि तिवै सुखु पाईऐ ॥१॥

मै अंधुले हरि नामु लकुटी टोहणी ॥ रहउ साहिब की टेक न मोहै मोहणी ॥१॥ रहाउ ॥

जह देखउ तह नालि गुरि देखालिआ ॥ अंतरि बाहरि भालि सबदि निहालिआ ॥२॥

सेवी सतिगुर भाइ नामु निरंजना ॥ तुधु भावै तिवै रजाइ भरमु भउ भंजना ॥३॥

जनमत ही दुखु लागै मरणा आइ कै ॥ जनमु मरणु परवाणु हरि गुण गाइ कै ॥४॥

हउ नाही तू होवहि तुध ही साजिआ ॥ आपे थापि उथापि सबदि निवाजिआ ॥५॥

देही भसम रुलाइ न जापी कह गइआ ॥ आपे रहिआ समाइ सो विसमादु भइआ ॥६॥

तूं नाही प्रभ दूरि जाणहि सभ तू है ॥ गुरमुखि वेखि हदूरि अंतरि भी तू है ॥७॥

मै दीजै नाम निवासु अंतरि सांति होइ ॥ गुण गावै नानक दासु सतिगुरु मति देइ ॥८॥३॥५॥

(राग सूही -- SGGS 762) रागु सूही महला १ कुचजी
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मंञु कुचजी अमावणि डोसड़े हउ किउ सहु रावणि जाउ जीउ ॥ इक दू इकि चड़ंदीआ कउणु जाणै मेरा नाउ जीउ ॥ जिन्ही सखी सहु राविआ से अ्मबी छावड़ीएहि जीउ ॥ से गुण मंञु न आवनी हउ कै जी दोस धरेउ जीउ ॥ किआ गुण तेरे विथरा हउ किआ किआ घिना तेरा नाउ जीउ ॥ इकतु टोलि न अ्मबड़ा हउ सद कुरबाणै तेरै जाउ जीउ ॥ सुइना रुपा रंगुला मोती तै माणिकु जीउ ॥ से वसतू सहि दितीआ मै तिन्ह सिउ लाइआ चितु जीउ ॥ मंदर मिटी संदड़े पथर कीते रासि जीउ ॥ हउ एनी टोली भुलीअसु तिसु कंत न बैठी पासि जीउ ॥ अ्मबरि कूंजा कुरलीआ बग बहिठे आइ जीउ ॥ सा धन चली साहुरै किआ मुहु देसी अगै जाइ जीउ ॥ सुती सुती झालु थीआ भुली वाटड़ीआसु जीउ ॥ तै सह नालहु मुतीअसु दुखा कूं धरीआसु जीउ ॥ तुधु गुण मै सभि अवगणा इक नानक की अरदासि जीउ ॥ सभि राती सोहागणी मै डोहागणि काई राति जीउ ॥१॥

(राग सूही -- SGGS 762) सूही महला १ सुचजी ॥
जा तू ता मै सभु को तू साहिबु मेरी रासि जीउ ॥ तुधु अंतरि हउ सुखि वसा तूं अंतरि साबासि जीउ ॥ भाणै तखति वडाईआ भाणै भीख उदासि जीउ ॥ भाणै थल सिरि सरु वहै कमलु फुलै आकासि जीउ ॥ भाणै भवजलु लंघीऐ भाणै मंझि भरीआसि जीउ ॥ भाणै सो सहु रंगुला सिफति रता गुणतासि जीउ ॥ भाणै सहु भीहावला हउ आवणि जाणि मुईआसि जीउ ॥ तू सहु अगमु अतोलवा हउ कहि कहि ढहि पईआसि जीउ ॥ किआ मागउ किआ कहि सुणी मै दरसन भूख पिआसि जीउ ॥ गुर सबदी सहु पाइआ सचु नानक की अरदासि जीउ ॥२॥

(राग सूही -- SGGS 763) रागु सूही छंत महला १ घरु १
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
भरि जोबनि मै मत पेईअड़ै घरि पाहुणी बलि राम जीउ ॥ मैली अवगणि चिति बिनु गुर गुण न समावनी बलि राम जीउ ॥ गुण सार न जाणी भरमि भुलाणी जोबनु बादि गवाइआ ॥ वरु घरु दरु दरसनु नही जाता पिर का सहजु न भाइआ ॥ सतिगुर पूछि न मारगि चाली सूती रैणि विहाणी ॥ नानक बालतणि राडेपा बिनु पिर धन कुमलाणी ॥१॥

बाबा मै वरु देहि मै हरि वरु भावै तिस की बलि राम जीउ ॥ रवि रहिआ जुग चारि त्रिभवण बाणी जिस की बलि राम जीउ ॥ त्रिभवण कंतु रवै सोहागणि अवगणवंती दूरे ॥ जैसी आसा तैसी मनसा पूरि रहिआ भरपूरे ॥ हरि की नारि सु सरब सुहागणि रांड न मैलै वेसे ॥ नानक मै वरु साचा भावै जुगि जुगि प्रीतम तैसे ॥२॥

बाबा लगनु गणाइ हं भी वंञा साहुरै बलि राम जीउ ॥ साहा हुकमु रजाइ सो न टलै जो प्रभु करै बलि राम जीउ ॥ किरतु पइआ करतै करि पाइआ मेटि न सकै कोई ॥ जाञी नाउ नरह निहकेवलु रवि रहिआ तिहु लोई ॥ माइ निरासी रोइ विछुंनी बाली बालै हेते ॥ नानक साच सबदि सुख महली गुर चरणी प्रभु चेते ॥३॥

बाबुलि दितड़ी दूरि ना आवै घरि पेईऐ बलि राम जीउ ॥ रहसी वेखि हदूरि पिरि रावी घरि सोहीऐ बलि राम जीउ ॥ साचे पिर लोड़ी प्रीतम जोड़ी मति पूरी परधाने ॥ संजोगी मेला थानि सुहेला गुणवंती गुर गिआने ॥ सतु संतोखु सदा सचु पलै सचु बोलै पिर भाए ॥ नानक विछुड़ि ना दुखु पाए गुरमति अंकि समाए ॥४॥१॥

(राग सूही -- SGGS 764) रागु सूही महला १ छंतु घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हम घरि साजन आए ॥ साचै मेलि मिलाए ॥ सहजि मिलाए हरि मनि भाए पंच मिले सुखु पाइआ ॥ साई वसतु परापति होई जिसु सेती मनु लाइआ ॥ अनदिनु मेलु भइआ मनु मानिआ घर मंदर सोहाए ॥ पंच सबद धुनि अनहद वाजे हम घरि साजन आए ॥१॥

आवहु मीत पिआरे ॥ मंगल गावहु नारे ॥ सचु मंगलु गावहु ता प्रभ भावहु सोहिलड़ा जुग चारे ॥ अपनै घरि आइआ थानि सुहाइआ कारज सबदि सवारे ॥ गिआन महा रसु नेत्री अंजनु त्रिभवण रूपु दिखाइआ ॥ सखी मिलहु रसि मंगलु गावहु हम घरि साजनु आइआ ॥२॥

मनु तनु अम्रिति भिंना ॥ अंतरि प्रेमु रतंना ॥ अंतरि रतनु पदारथु मेरै परम ततु वीचारो ॥ जंत भेख तू सफलिओ दाता सिरि सिरि देवणहारो ॥ तू जानु गिआनी अंतरजामी आपे कारणु कीना ॥ सुनहु सखी मनु मोहनि मोहिआ तनु मनु अम्रिति भीना ॥३॥

आतम रामु संसारा ॥ साचा खेलु तुम्हारा ॥ सचु खेलु तुम्हारा अगम अपारा तुधु बिनु कउणु बुझाए ॥ सिध साधिक सिआणे केते तुझ बिनु कवणु कहाए ॥ कालु बिकालु भए देवाने मनु राखिआ गुरि ठाए ॥ नानक अवगण सबदि जलाए गुण संगमि प्रभु पाए ॥४॥१॥२॥

(राग सूही -- SGGS 764) रागु सूही महला १ घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आवहु सजणा हउ देखा दरसनु तेरा राम ॥ घरि आपनड़ै खड़ी तका मै मनि चाउ घनेरा राम ॥ मनि चाउ घनेरा सुणि प्रभ मेरा मै तेरा भरवासा ॥ दरसनु देखि भई निहकेवल जनम मरण दुखु नासा ॥ सगली जोति जाता तू सोई मिलिआ भाइ सुभाए ॥ नानक साजन कउ बलि जाईऐ साचि मिले घरि आए ॥१॥

घरि आइअड़े साजना ता धन खरी सरसी राम ॥ हरि मोहिअड़ी साच सबदि ठाकुर देखि रहंसी राम ॥ गुण संगि रहंसी खरी सरसी जा रावी रंगि रातै ॥ अवगण मारि गुणी घरु छाइआ पूरै पुरखि बिधातै ॥ तसकर मारि वसी पंचाइणि अदलु करे वीचारे ॥ नानक राम नामि निसतारा गुरमति मिलहि पिआरे ॥२॥

वरु पाइअड़ा बालड़ीए आसा मनसा पूरी राम ॥ पिरि राविअड़ी सबदि रली रवि रहिआ नह दूरी राम ॥ प्रभु दूरि न होई घटि घटि सोई तिस की नारि सबाई ॥ आपे रसीआ आपे रावे जिउ तिस दी वडिआई ॥ अमर अडोलु अमोलु अपारा गुरि पूरै सचु पाईऐ ॥ नानक आपे जोग सजोगी नदरि करे लिव लाईऐ ॥३॥

पिरु उचड़ीऐ माड़ड़ीऐ तिहु लोआ सिरताजा राम ॥ हउ बिसम भई देखि गुणा अनहद सबद अगाजा राम ॥ सबदु वीचारी करणी सारी राम नामु नीसाणो ॥ नाम बिना खोटे नही ठाहर नामु रतनु परवाणो ॥ पति मति पूरी पूरा परवाना ना आवै ना जासी ॥ नानक गुरमुखि आपु पछाणै प्रभ जैसे अविनासी ॥४॥१॥३॥

(राग सूही -- SGGS 765) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु सूही छंत महला १ घरु ४ ॥
जिनि कीआ तिनि देखिआ जगु धंधड़ै लाइआ ॥ दानि तेरै घटि चानणा तनि चंदु दीपाइआ ॥ चंदो दीपाइआ दानि हरि कै दुखु अंधेरा उठि गइआ ॥ गुण जंञ लाड़े नालि सोहै परखि मोहणीऐ लइआ ॥ वीवाहु होआ सोभ सेती पंच सबदी आइआ ॥ जिनि कीआ तिनि देखिआ जगु धंधड़ै लाइआ ॥१॥

हउ बलिहारी साजना मीता अवरीता ॥ इहु तनु जिन सिउ गाडिआ मनु लीअड़ा दीता ॥ लीआ त दीआ मानु जिन्ह सिउ से सजन किउ वीसरहि ॥ जिन्ह दिसि आइआ होहि रलीआ जीअ सेती गहि रहहि ॥ सगल गुण अवगणु न कोई होहि नीता नीता ॥ हउ बलिहारी साजना मीता अवरीता ॥२॥

गुणा का होवै वासुला कढि वासु लईजै ॥ जे गुण होवन्हि साजना मिलि साझ करीजै ॥ साझ करीजै गुणह केरी छोडि अवगण चलीऐ ॥ पहिरे पट्मबर करि अड्मबर आपणा पिड़ु मलीऐ ॥ जिथै जाइ बहीऐ भला कहीऐ झोलि अम्रितु पीजै ॥ गुणा का होवै वासुला कढि वासु लईजै ॥३॥

आपि करे किसु आखीऐ होरु करे न कोई ॥ आखण ता कउ जाईऐ जे भूलड़ा होई ॥ जे होइ भूला जाइ कहीऐ आपि करता किउ भुलै ॥ सुणे देखे बाझु कहिऐ दानु अणमंगिआ दिवै ॥ दानु देइ दाता जगि बिधाता नानका सचु सोई ॥ आपि करे किसु आखीऐ होरु करे न कोई ॥४॥१॥४॥

(राग सूही -- SGGS 766) सूही महला १ ॥
मेरा मनु राता गुण रवै मनि भावै सोई ॥ गुर की पउड़ी साच की साचा सुखु होई ॥ सुखि सहजि आवै साच भावै साच की मति किउ टलै ॥ इसनानु दानु सुगिआनु मजनु आपि अछलिओ किउ छलै ॥ परपंच मोह बिकार थाके कूड़ु कपटु न दोई ॥ मेरा मनु राता गुण रवै मनि भावै सोई ॥१॥

साहिबु सो सालाहीऐ जिनि कारणु कीआ ॥ मैलु लागी मनि मैलिऐ किनै अम्रितु पीआ ॥ मथि अम्रितु पीआ इहु मनु दीआ गुर पहि मोलु कराइआ ॥ आपनड़ा प्रभु सहजि पछाता जा मनु साचै लाइआ ॥ तिसु नालि गुण गावा जे तिसु भावा किउ मिलै होइ पराइआ ॥ साहिबु सो सालाहीऐ जिनि जगतु उपाइआ ॥२॥

आइ गइआ की न आइओ किउ आवै जाता ॥ प्रीतम सिउ मनु मानिआ हरि सेती राता ॥ साहिब रंगि राता सच की बाता जिनि बि्मब का कोटु उसारिआ ॥ पंच भू नाइको आपि सिरंदा जिनि सच का पिंडु सवारिआ ॥ हम अवगणिआरे तू सुणि पिआरे तुधु भावै सचु सोई ॥ आवण जाणा ना थीऐ साची मति होई ॥३॥

अंजनु तैसा अंजीऐ जैसा पिर भावै ॥ समझै सूझै जाणीऐ जे आपि जाणावै ॥ आपि जाणावै मारगि पावै आपे मनूआ लेवए ॥ करम सुकरम कराए आपे कीमति कउण अभेवए ॥ तंतु मंतु पाखंडु न जाणा रामु रिदै मनु मानिआ ॥ अंजनु नामु तिसै ते सूझै गुर सबदी सचु जानिआ ॥४॥

साजन होवनि आपणे किउ पर घर जाही ॥ साजन राते सच के संगे मन माही ॥ मन माहि साजन करहि रलीआ करम धरम सबाइआ ॥ अठसठि तीरथ पुंन पूजा नामु साचा भाइआ ॥ आपि साजे थापि वेखै तिसै भाणा भाइआ ॥ साजन रांगि रंगीलड़े रंगु लालु बणाइआ ॥५॥

अंधा आगू जे थीऐ किउ पाधरु जाणै ॥ आपि मुसै मति होछीऐ किउ राहु पछाणै ॥ किउ राहि जावै महलु पावै अंध की मति अंधली ॥ विणु नाम हरि के कछु न सूझै अंधु बूडौ धंधली ॥ दिनु राति चानणु चाउ उपजै सबदु गुर का मनि वसै ॥ कर जोड़ि गुर पहि करि बिनंती राहु पाधरु गुरु दसै ॥६॥

मनु परदेसी जे थीऐ सभु देसु पराइआ ॥ किसु पहि खोल्हउ गंठड़ी दूखी भरि आइआ ॥ दूखी भरि आइआ जगतु सबाइआ कउणु जाणै बिधि मेरीआ ॥ आवणे जावणे खरे डरावणे तोटि न आवै फेरीआ ॥ नाम विहूणे ऊणे झूणे ना गुरि सबदु सुणाइआ ॥ मनु परदेसी जे थीऐ सभु देसु पराइआ ॥७॥

गुर महली घरि आपणै सो भरपुरि लीणा ॥ सेवकु सेवा तां करे सच सबदि पतीणा ॥ सबदे पतीजै अंकु भीजै सु महलु महला अंतरे ॥ आपि करता करे सोई प्रभु आपि अंति निरंतरे ॥ गुर सबदि मेला तां सुहेला बाजंत अनहद बीणा ॥ गुर महली घरि आपणै सो भरिपुरि लीणा ॥८॥

कीता किआ सालाहीऐ करि वेखै सोई ॥ ता की कीमति ना पवै जे लोचै कोई ॥ कीमति सो पावै आपि जाणावै आपि अभुलु न भुलए ॥ जै जै कारु करहि तुधु भावहि गुर कै सबदि अमुलए ॥ हीणउ नीचु करउ बेनंती साचु न छोडउ भाई ॥ नानक जिनि करि देखिआ देवै मति साई ॥९॥२॥५॥

(राग सूही -- SGGS 786) मः १ ॥
सूहा रंगु सुपनै निसी बिनु तागे गलि हारु ॥ सचा रंगु मजीठ का गुरमुखि ब्रहम बीचारु ॥ नानक प्रेम महा रसी सभि बुरिआईआ छारु ॥२॥

(राग सूही -- SGGS 788) सलोक मः १ ॥
वाहु खसम तू वाहु जिनि रचि रचना हम कीए ॥ सागर लहरि समुंद सर वेलि वरस वराहु ॥ आपि खड़ोवहि आपि करि आपीणै आपाहु ॥ गुरमुखि सेवा थाइ पवै उनमनि ततु कमाहु ॥ मसकति लहहु मजूरीआ मंगि मंगि खसम दराहु ॥ नानक पुर दर वेपरवाह तउ दरि ऊणा नाहि को सचा वेपरवाहु ॥१॥

(राग सूही -- SGGS 788) महला १ ॥
उजल मोती सोहणे रतना नालि जुड़ंनि ॥ तिन जरु वैरी नानका जि बुढे थीइ मरंनि ॥२॥

(राग सूही -- SGGS 789) सलोक मः १ ॥
नानक इहु तनु जालि जिनि जलिऐ नामु विसारिआ ॥ पउदी जाइ परालि पिछै हथु न अ्मबड़ै तितु निवंधै तालि ॥१॥

(राग सूही -- SGGS 789) मः १ ॥
नानक मन के कम फिटिआ गणत न आवही ॥ किती लहा सहम जा बखसे ता धका नही ॥२॥

(राग सूही -- SGGS 789) सलोक मः १ ॥
नानक बदरा माल का भीतरि धरिआ आणि ॥ खोटे खरे परखीअनि साहिब कै दीबाणि ॥१॥

(राग सूही -- SGGS 789) मः १ ॥
नावण चले तीरथी मनि खोटै तनि चोर ॥ इकु भाउ लथी नातिआ दुइ भा चड़ीअसु होर ॥ बाहरि धोती तूमड़ी अंदरि विसु निकोर ॥ साध भले अणनातिआ चोर सि चोरा चोर ॥२॥

(राग सूही -- SGGS 789) सलोक मः १ ॥
दुइ दीवे चउदह हटनाले ॥ जेते जीअ तेते वणजारे ॥ खुल्हे हट होआ वापारु ॥ जो पहुचै सो चलणहारु ॥ धरमु दलालु पाए नीसाणु ॥ नानक नामु लाहा परवाणु ॥ घरि आए वजी वाधाई ॥ सच नाम की मिली वडिआई ॥१॥

(राग सूही -- SGGS 789) मः १ ॥
राती होवनि कालीआ सुपेदा से वंन ॥ दिहु बगा तपै घणा कालिआ काले वंन ॥ अंधे अकली बाहरे मूरख अंध गिआनु ॥ नानक नदरी बाहरे कबहि न पावहि मानु ॥२॥

(राग सूही -- SGGS 790) सलोक मः १ ॥
चोरा जारा रंडीआ कुटणीआ दीबाणु ॥ वेदीना की दोसती वेदीना का खाणु ॥ सिफती सार न जाणनी सदा वसै सैतानु ॥ गदहु चंदनि खउलीऐ भी साहू सिउ पाणु ॥ नानक कूड़ै कतिऐ कूड़ा तणीऐ ताणु ॥ कूड़ा कपड़ु कछीऐ कूड़ा पैनणु माणु ॥१॥


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