Pt 34 - गुरू अर्जन देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 34 - Guru Arjan Dev ji (Mahalla 5) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग रामकली -- SGGS 964) मः ५ ॥
हठ मंझाहू मै माणकु लधा ॥ मुलि न घिधा मै कू सतिगुरि दिता ॥ ढूंढ वञाई थीआ थिता ॥ जनमु पदारथु नानक जिता ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 964) पउड़ी ॥
जिस कै मसतकि करमु होइ सो सेवा लागा ॥ जिसु गुर मिलि कमलु प्रगासिआ सो अनदिनु जागा ॥ लगा रंगु चरणारबिंद सभु भ्रमु भउ भागा ॥ आतमु जिता गुरमती आगंजत पागा ॥ जिसहि धिआइआ पारब्रहमु सो कलि महि तागा ॥ साधू संगति निरमला अठसठि मजनागा ॥ जिसु प्रभु मिलिआ आपणा सो पुरखु सभागा ॥ नानक तिसु बलिहारणै जिसु एवड भागा ॥१७॥

(राग रामकली -- SGGS 965) सलोक मः ५ ॥
जां पिरु अंदरि तां धन बाहरि ॥ जां पिरु बाहरि तां धन माहरि ॥ बिनु नावै बहु फेर फिराहरि ॥ सतिगुरि संगि दिखाइआ जाहरि ॥ जन नानक सचे सचि समाहरि ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 965) मः ५ ॥
आहर सभि करदा फिरै आहरु इकु न होइ ॥ नानक जितु आहरि जगु उधरै विरला बूझै कोइ ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 965) पउड़ी ॥
वडी हू वडा अपारु तेरा मरतबा ॥ रंग परंग अनेक न जापन्हि करतबा ॥ जीआ अंदरि जीउ सभु किछु जाणला ॥ सभु किछु तेरै वसि तेरा घरु भला ॥ तेरै घरि आनंदु वधाई तुधु घरि ॥ माणु महता तेजु आपणा आपि जरि ॥ सरब कला भरपूरु दिसै जत कता ॥ नानक दासनि दासु तुधु आगै बिनवता ॥१८॥

(राग रामकली -- SGGS 965) सलोक मः ५ ॥
छतड़े बाजार सोहनि विचि वपारीए ॥ वखरु हिकु अपारु नानक खटे सो धणी ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 965) महला ५ ॥
कबीरा हमरा को नही हम किस हू के नाहि ॥ जिनि इहु रचनु रचाइआ तिस ही माहि समाहि ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 965) पउड़ी ॥
सफलिउ बिरखु सुहावड़ा हरि सफल अम्रिता ॥ मनु लोचै उन्ह मिलण कउ किउ वंञै घिता ॥ वरना चिहना बाहरा ओहु अगमु अजिता ॥ ओहु पिआरा जीअ का जो खोल्है भिता ॥ सेवा करी तुसाड़ीआ मै दसिहु मिता ॥ कुरबाणी वंञा वारणै बले बलि किता ॥ दसनि संत पिआरिआ सुणहु लाइ चिता ॥ जिसु लिखिआ नानक दास तिसु नाउ अम्रितु सतिगुरि दिता ॥१९॥

(राग रामकली -- SGGS 965) सलोक महला ५ ॥
कबीर धरती साध की तसकर बैसहि गाहि ॥ धरती भारि न बिआपई उन कउ लाहू लाहि ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 965) महला ५ ॥
कबीर चावल कारणे तुख कउ मुहली लाइ ॥ संगि कुसंगी बैसते तब पूछे धरम राइ ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 965) पउड़ी ॥
आपे ही वड परवारु आपि इकातीआ ॥ आपणी कीमति आपि आपे ही जातीआ ॥ सभु किछु आपे आपि आपि उपंनिआ ॥ आपणा कीता आपि आपि वरंनिआ ॥ धंनु सु तेरा थानु जिथै तू वुठा ॥ धंनु सु तेरे भगत जिन्ही सचु तूं डिठा ॥ जिस नो तेरी दइआ सलाहे सोइ तुधु ॥ जिसु गुर भेटे नानक निरमल सोई सुधु ॥२०॥

(राग रामकली -- SGGS 966) सलोक मः ५ ॥
फरीदा भूमि रंगावली मंझि विसूला बागु ॥ जो नर पीरि निवाजिआ तिन्हा अंच न लाग ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 966) मः ५ ॥
फरीदा उमर सुहावड़ी संगि सुवंनड़ी देह ॥ विरले केई पाईअन्हि जिन्हा पिआरे नेह ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 966) पउड़ी ॥
जपु तपु संजमु दइआ धरमु जिसु देहि सु पाए ॥ जिसु बुझाइहि अगनि आपि सो नामु धिआए ॥ अंतरजामी अगम पुरखु इक द्रिसटि दिखाए ॥ साधसंगति कै आसरै प्रभ सिउ रंगु लाए ॥ अउगण कटि मुखु उजला हरि नामि तराए ॥ जनम मरण भउ कटिओनु फिरि जोनि न पाए ॥ अंध कूप ते काढिअनु लड़ु आपि फड़ाए ॥ नानक बखसि मिलाइअनु रखे गलि लाए ॥२१॥

(राग रामकली -- SGGS 966) सलोक मः ५ ॥
मुहबति जिसु खुदाइ दी रता रंगि चलूलि ॥ नानक विरले पाईअहि तिसु जन कीम न मूलि ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 966) मः ५ ॥
अंदरु विधा सचि नाइ बाहरि भी सचु डिठोमि ॥ नानक रविआ हभ थाइ वणि त्रिणि त्रिभवणि रोमि ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 966) पउड़ी ॥
आपे कीतो रचनु आपे ही रतिआ ॥ आपे होइओ इकु आपे बहु भतिआ ॥ आपे सभना मंझि आपे बाहरा ॥ आपे जाणहि दूरि आपे ही जाहरा ॥ आपे होवहि गुपतु आपे परगटीऐ ॥ कीमति किसै न पाइ तेरी थटीऐ ॥ गहिर ग्मभीरु अथाहु अपारु अगणतु तूं ॥ नानक वरतै इकु इको इकु तूं ॥२२॥१॥२॥ सुधु ॥

(राग नट नाराइन -- SGGS 978) रागु नट नाराइन महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
राम हउ किआ जाना किआ भावै ॥ मनि पिआस बहुतु दरसावै ॥१॥ रहाउ ॥

सोई गिआनी सोई जनु तेरा जिसु ऊपरि रुच आवै ॥ क्रिपा करहु जिसु पुरख बिधाते सो सदा सदा तुधु धिआवै ॥१॥

कवन जोग कवन गिआन धिआना कवन गुनी रीझावै ॥ सोई जनु सोई निज भगता जिसु ऊपरि रंगु लावै ॥२॥

साई मति साई बुधि सिआनप जितु निमख न प्रभु बिसरावै ॥ संतसंगि लगि एहु सुखु पाइओ हरि गुन सद ही गावै ॥३॥

देखिओ अचरजु महा मंगल रूप किछु आन नही दिसटावै ॥ कहु नानक मोरचा गुरि लाहिओ तह गरभ जोनि कह आवै ॥४॥१॥

(राग नट नाराइन -- SGGS 978) नट नाराइन महला ५ दुपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
उलाहनो मै काहू न दीओ ॥ मन मीठ तुहारो कीओ ॥१॥ रहाउ ॥

आगिआ मानि जानि सुखु पाइआ सुनि सुनि नामु तुहारो जीओ ॥ ईहां ऊहा हरि तुम ही तुम ही इहु गुर ते मंत्रु द्रिड़ीओ ॥१॥

जब ते जानि पाई एह बाता तब कुसल खेम सभ थीओ ॥ साधसंगि नानक परगासिओ आन नाही रे बीओ ॥२॥१॥२॥

(राग नट नाराइन -- SGGS 978) नट महला ५ ॥
जा कउ भई तुमारी धीर ॥ जम की त्रास मिटी सुखु पाइआ निकसी हउमै पीर ॥१॥ रहाउ ॥

तपति बुझानी अम्रित बानी त्रिपते जिउ बारिक खीर ॥ मात पिता साजन संत मेरे संत सहाई बीर ॥१॥

खुले भ्रम भीति मिले गोपाला हीरै बेधे हीर ॥ बिसम भए नानक जसु गावत ठाकुर गुनी गहीर ॥२॥२॥३॥

(राग नट नाराइन -- SGGS 979) नट महला ५ ॥
अपना जनु आपहि आपि उधारिओ ॥ आठ पहर जन कै संगि बसिओ मन ते नाहि बिसारिओ ॥१॥ रहाउ ॥

बरनु चिहनु नाही किछु पेखिओ दास का कुलु न बिचारिओ ॥ करि किरपा नामु हरि दीओ सहजि सुभाइ सवारिओ ॥१॥

महा बिखमु अगनि का सागरु तिस ते पारि उतारिओ ॥ पेखि पेखि नानक बिगसानो पुनह पुनह बलिहारिओ ॥२॥३॥४॥

(राग नट नाराइन -- SGGS 979) नट महला ५ ॥
हरि हरि मन महि नामु कहिओ ॥ कोटि अप्राध मिटहि खिन भीतरि ता का दुखु न रहिओ ॥१॥ रहाउ ॥

खोजत खोजत भइओ बैरागी साधू संगि लहिओ ॥ सगल तिआगि एक लिव लागी हरि हरि चरन गहिओ ॥१॥

कहत मुकत सुनते निसतारे जो जो सरनि पइओ ॥ सिमरि सिमरि सुआमी प्रभु अपुना कहु नानक अनदु भइओ ॥२॥४॥५॥

(राग नट नाराइन -- SGGS 979) नट महला ५ ॥
चरन कमल संगि लागी डोरी ॥ सुख सागर करि परम गति मोरी ॥१॥ रहाउ ॥

अंचला गहाइओ जन अपुने कउ मनु बीधो प्रेम की खोरी ॥ जसु गावत भगति रसु उपजिओ माइआ की जाली तोरी ॥१॥

पूरन पूरि रहे किरपा निधि आन न पेखउ होरी ॥ नानक मेलि लीओ दासु अपुना प्रीति न कबहू थोरी ॥२॥५॥६॥

(राग नट नाराइन -- SGGS 979) नट महला ५ ॥
मेरे मन जपु जपि हरि नाराइण ॥ कबहू न बिसरहु मन मेरे ते आठ पहर गुन गाइण ॥१॥ रहाउ ॥

साधू धूरि करउ नित मजनु सभ किलबिख पाप गवाइण ॥ पूरन पूरि रहे किरपा निधि घटि घटि दिसटि समाइणु ॥१॥

जाप ताप कोटि लख पूजा हरि सिमरण तुलि न लाइण ॥ दुइ कर जोड़ि नानकु दानु मांगै तेरे दासनि दास दसाइणु ॥२॥६॥७॥

(राग नट नाराइन -- SGGS 979) नट महला ५ ॥
मेरै सरबसु नामु निधानु ॥ करि किरपा साधू संगि मिलिओ सतिगुरि दीनो दानु ॥१॥ रहाउ ॥

सुखदाता दुख भंजनहारा गाउ कीरतनु पूरन गिआनु ॥ कामु क्रोधु लोभु खंड खंड कीन्हे बिनसिओ मूड़ अभिमानु ॥१॥

किआ गुण तेरे आखि वखाणा प्रभ अंतरजामी जानु ॥ चरन कमल सरनि सुख सागर नानकु सद कुरबानु ॥२॥७॥८॥

(राग नट नाराइन -- SGGS 980) नट महला ५ ॥
हउ वारि वारि जाउ गुर गोपाल ॥१॥ रहाउ ॥

मोहि निरगुन तुम पूरन दाते दीना नाथ दइआल ॥१॥

ऊठत बैठत सोवत जागत जीअ प्रान धन माल ॥२॥

दरसन पिआस बहुतु मनि मेरै नानक दरस निहाल ॥३॥८॥९॥

(राग नट नाराइन -- SGGS 980) नट पड़ताल महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
कोऊ है मेरो साजनु मीतु ॥ हरि नामु सुनावै नीत ॥ बिनसै दुखु बिपरीति ॥ सभु अरपउ मनु तनु चीतु ॥१॥ रहाउ ॥

कोई विरला आपन कीत ॥ संगि चरन कमल मनु सीत ॥ करि किरपा हरि जसु दीत ॥१॥

हरि भजि जनमु पदारथु जीत ॥ कोटि पतित होहि पुनीत ॥ नानक दास बलि बलि कीत ॥२॥१॥१०॥१९॥

(राग माली गउड़ा -- SGGS 986) माली गउड़ा महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रे मन टहल हरि सुख सार ॥ अवर टहला झूठीआ नित करै जमु सिरि मार ॥१॥ रहाउ ॥

जिना मसतकि लीखिआ ते मिले संगार ॥ संसारु भउजलु तारिआ हरि संत पुरख अपार ॥१॥

नित चरन सेवहु साध के तजि लोभ मोह बिकार ॥ सभ तजहु दूजी आसड़ी रखु आस इक निरंकार ॥२॥

इकि भरमि भूले साकता बिनु गुर अंध अंधार ॥ धुरि होवना सु होइआ को न मेटणहार ॥३॥

अगम रूपु गोबिंद का अनिक नाम अपार ॥ धनु धंनु ते जन नानका जिन हरि नामा उरि धार ॥४॥१॥

(राग माली गउड़ा -- SGGS 986) माली गउड़ा महला ५ ॥
राम नाम कउ नमसकार ॥ जासु जपत होवत उधार ॥१॥ रहाउ ॥

जा कै सिमरनि मिटहि धंध ॥ जा कै सिमरनि छूटहि बंध ॥ जा कै सिमरनि मूरख चतुर ॥ जा कै सिमरनि कुलह उधर ॥१॥

जा कै सिमरनि भउ दुख हरै ॥ जा कै सिमरनि अपदा टरै ॥ जा कै सिमरनि मुचत पाप ॥ जा कै सिमरनि नही संताप ॥२॥

जा कै सिमरनि रिद बिगास ॥ जा कै सिमरनि कवला दासि ॥ जा कै सिमरनि निधि निधान ॥ जा कै सिमरनि तरे निदान ॥३॥

पतित पावनु नामु हरी ॥ कोटि भगत उधारु करी ॥ हरि दास दासा दीनु सरन ॥ नानक माथा संत चरन ॥४॥२॥

(राग माली गउड़ा -- SGGS 986) माली गउड़ा महला ५ ॥
ऐसो सहाई हरि को नाम ॥ साधसंगति भजु पूरन काम ॥१॥ रहाउ ॥

बूडत कउ जैसे बेड़ी मिलत ॥ बूझत दीपक मिलत तिलत ॥ जलत अगनी मिलत नीर ॥ जैसे बारिक मुखहि खीर ॥१॥

जैसे रण महि सखा भ्रात ॥ जैसे भूखे भोजन मात ॥ जैसे किरखहि बरस मेघ ॥ जैसे पालन सरनि सेंघ ॥२॥

गरुड़ मुखि नही सरप त्रास ॥ सूआ पिंजरि नही खाइ बिलासु ॥ जैसो आंडो हिरदे माहि ॥ जैसो दानो चकी दराहि ॥३॥

बहुतु ओपमा थोर कही ॥ हरि अगम अगम अगाधि तुही ॥ ऊच मूचौ बहु अपार ॥ सिमरत नानक तरे सार ॥४॥३॥

(राग माली गउड़ा -- SGGS 987) माली गउड़ा महला ५ ॥
इही हमारै सफल काज ॥ अपुने दास कउ लेहु निवाजि ॥१॥ रहाउ ॥

चरन संतह माथ मोर ॥ नैनि दरसु पेखउ निसि भोर ॥ हसत हमरे संत टहल ॥ प्रान मनु धनु संत बहल ॥१॥

संतसंगि मेरे मन की प्रीति ॥ संत गुन बसहि मेरै चीति ॥ संत आगिआ मनहि मीठ ॥ मेरा कमलु बिगसै संत डीठ ॥२॥

संतसंगि मेरा होइ निवासु ॥ संतन की मोहि बहुतु पिआस ॥ संत बचन मेरे मनहि मंत ॥ संत प्रसादि मेरे बिखै हंत ॥३॥

मुकति जुगति एहा निधान ॥ प्रभ दइआल मोहि देवहु दान ॥ नानक कउ प्रभ दइआ धारि ॥ चरन संतन के मेरे रिदे मझारि ॥४॥४॥

(राग माली गउड़ा -- SGGS 987) माली गउड़ा महला ५ ॥
सभ कै संगी नाही दूरि ॥ करन करावन हाजरा हजूरि ॥१॥ रहाउ ॥

सुनत जीओ जासु नामु ॥ दुख बिनसे सुख कीओ बिस्रामु ॥ सगल निधि हरि हरि हरे ॥ मुनि जन ता की सेव करे ॥१॥

जा कै घरि सगले समाहि ॥ जिस ते बिरथा कोइ नाहि ॥ जीअ जंत्र करे प्रतिपाल ॥ सदा सदा सेवहु किरपाल ॥२॥

सदा धरमु जा कै दीबाणि ॥ बेमुहताज नही किछु काणि ॥ सभ किछु करना आपन आपि ॥ रे मन मेरे तू ता कउ जापि ॥३॥

साधसंगति कउ हउ बलिहार ॥ जासु मिलि होवै उधारु ॥ नाम संगि मन तनहि रात ॥ नानक कउ प्रभि करी दाति ॥४॥५॥

(राग माली गउड़ा -- SGGS 987) माली गउड़ा महला ५ दुपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि समरथ की सरना ॥ जीउ पिंडु धनु रासि मेरी प्रभ एक कारन करना ॥१॥ रहाउ ॥

सिमरि सिमरि सदा सुखु पाईऐ जीवणै का मूलु ॥ रवि रहिआ सरबत ठाई सूखमो असथूल ॥१॥

आल जाल बिकार तजि सभि हरि गुना निति गाउ ॥ कर जोड़ि नानकु दानु मांगै देहु अपना नाउ ॥२॥१॥६॥

(राग माली गउड़ा -- SGGS 988) माली गउड़ा महला ५ ॥
प्रभ समरथ देव अपार ॥ कउनु जानै चलित तेरे किछु अंतु नाही पार ॥१॥ रहाउ ॥

इक खिनहि थापि उथापदा घड़ि भंनि करनैहारु ॥ जेत कीन उपारजना प्रभु दानु देइ दातार ॥१॥

हरि सरनि आइओ दासु तेरा प्रभ ऊच अगम मुरार ॥ कढि लेहु भउजल बिखम ते जनु नानकु सद बलिहार ॥२॥२॥७॥

(राग माली गउड़ा -- SGGS 988) माली गउड़ा महला ५ ॥
मनि तनि बसि रहे गोपाल ॥ दीन बांधव भगति वछल सदा सदा क्रिपाल ॥१॥ रहाउ ॥

आदि अंते मधि तूहै प्रभ बिना नाही कोइ ॥ पूरि रहिआ सगल मंडल एकु सुआमी सोइ ॥१॥

करनि हरि जसु नेत्र दरसनु रसनि हरि गुन गाउ ॥ बलिहारि जाए सदा नानकु देहु अपणा नाउ ॥२॥३॥८॥६॥१४॥

(राग मारू -- SGGS 998) मारू महला ५ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
डरपै धरति अकासु नख्यत्रा सिर ऊपरि अमरु करारा ॥ पउणु पाणी बैसंतरु डरपै डरपै इंद्रु बिचारा ॥१॥

एका निरभउ बात सुनी ॥ सो सुखीआ सो सदा सुहेला जो गुर मिलि गाइ गुनी ॥१॥ रहाउ ॥

देहधार अरु देवा डरपहि सिध साधिक डरि मुइआ ॥ लख चउरासीह मरि मरि जनमे फिरि फिरि जोनी जोइआ ॥२॥

राजसु सातकु तामसु डरपहि केते रूप उपाइआ ॥ छल बपुरी इह कउला डरपै अति डरपै धरम राइआ ॥३॥

सगल समग्री डरहि बिआपी बिनु डर करणैहारा ॥ कहु नानक भगतन का संगी भगत सोहहि दरबारा ॥४॥१॥

(राग मारू -- SGGS 999) मारू महला ५ ॥
पांच बरख को अनाथु ध्रू बारिकु हरि सिमरत अमर अटारे ॥ पुत्र हेति नाराइणु कहिओ जमकंकर मारि बिदारे ॥१॥

मेरे ठाकुर केते अगनत उधारे ॥ मोहि दीन अलप मति निरगुण परिओ सरणि दुआरे ॥१॥ रहाउ ॥

बालमीकु सुपचारो तरिओ बधिक तरे बिचारे ॥ एक निमख मन माहि अराधिओ गजपति पारि उतारे ॥२॥

कीनी रखिआ भगत प्रहिलादै हरनाखस नखहि बिदारे ॥ बिदरु दासी सुतु भइओ पुनीता सगले कुल उजारे ॥३॥

कवन पराध बतावउ अपुने मिथिआ मोह मगनारे ॥ आइओ साम नानक ओट हरि की लीजै भुजा पसारे ॥४॥२॥

(राग मारू -- SGGS 999) मारू महला ५ ॥
वित नवित भ्रमिओ बहु भाती अनिक जतन करि धाए ॥ जो जो करम कीए हउ हउमै ते ते भए अजाए ॥१॥

अवर दिन काहू काज न लाए ॥ सो दिनु मो कउ दीजै प्रभ जीउ जा दिन हरि जसु गाए ॥१॥ रहाउ ॥

पुत्र कलत्र ग्रिह देखि पसारा इस ही महि उरझाए ॥ माइआ मद चाखि भए उदमाते हरि हरि कबहु न गाए ॥२॥

इह बिधि खोजी बहु परकारा बिनु संतन नही पाए ॥ तुम दातार वडे प्रभ सम्रथ मागन कउ दानु आए ॥३॥

तिआगिओ सगला मानु महता दास रेण सरणाए ॥ कहु नानक हरि मिलि भए एकै महा अनंद सुख पाए ॥४॥३॥

(राग मारू -- SGGS 999) मारू महला ५ ॥
कवन थान धीरिओ है नामा कवन बसतु अहंकारा ॥ कवन चिहन सुनि ऊपरि छोहिओ मुख ते सुनि करि गारा ॥१॥

सुनहु रे तू कउनु कहा ते आइओ ॥ एती न जानउ केतीक मुदति चलते खबरि न पाइओ ॥१॥ रहाउ ॥

सहन सील पवन अरु पाणी बसुधा खिमा निभराते ॥ पंच तत मिलि भइओ संजोगा इन महि कवन दुराते ॥२॥

जिनि रचि रचिआ पुरखि बिधातै नाले हउमै पाई ॥ जनम मरणु उस ही कउ है रे ओहा आवै जाई ॥३॥

बरनु चिहनु नाही किछु रचना मिथिआ सगल पसारा ॥ भणति नानकु जब खेलु उझारै तब एकै एकंकारा ॥४॥४॥

(राग मारू -- SGGS 1000) मारू महला ५ ॥
मान मोह अरु लोभ विकारा बीओ चीति न घालिओ ॥ नाम रतनु गुणा हरि बणजे लादि वखरु लै चालिओ ॥१॥

सेवक की ओड़कि निबही प्रीति ॥ जीवत साहिबु सेविओ अपना चलते राखिओ चीति ॥१॥ रहाउ ॥

जैसी आगिआ कीनी ठाकुरि तिस ते मुखु नही मोरिओ ॥ सहजु अनंदु रखिओ ग्रिह भीतरि उठि उआहू कउ दउरिओ ॥२॥

आगिआ महि भूख सोई करि सूखा सोग हरख नही जानिओ ॥ जो जो हुकमु भइओ साहिब का सो माथै ले मानिओ ॥३॥

भइओ क्रिपालु ठाकुरु सेवक कउ सवरे हलत पलाता ॥ धंनु सेवकु सफलु ओहु आइआ जिनि नानक खसमु पछाता ॥४॥५॥

(राग मारू -- SGGS 1000) मारू महला ५ ॥
खुलिआ करमु क्रिपा भई ठाकुर कीरतनु हरि हरि गाई ॥ स्रमु थाका पाए बिस्रामा मिटि गई सगली धाई ॥१॥

अब मोहि जीवन पदवी पाई ॥ चीति आइओ मनि पुरखु बिधाता संतन की सरणाई ॥१॥ रहाउ ॥

कामु क्रोधु लोभु मोहु निवारे निवरे सगल बैराई ॥ सद हजूरि हाजरु है नाजरु कतहि न भइओ दूराई ॥२॥

सुख सीतल सरधा सभ पूरी होए संत सहाई ॥ पावन पतित कीए खिन भीतरि महिमा कथनु न जाई ॥३॥

निरभउ भए सगल भै खोए गोबिद चरण ओटाई ॥ नानकु जसु गावै ठाकुर का रैणि दिनसु लिव लाई ॥४॥६॥

(राग मारू -- SGGS 1000) मारू महला ५ ॥
जो समरथु सरब गुण नाइकु तिस कउ कबहु न गावसि रे ॥ छोडि जाइ खिन भीतरि ता कउ उआ कउ फिरि फिरि धावसि रे ॥१॥

अपुने प्रभ कउ किउ न समारसि रे ॥ बैरी संगि रंग रसि रचिआ तिसु सिउ जीअरा जारसि रे ॥१॥ रहाउ ॥

जा कै नामि सुनिऐ जमु छोडै ता की सरणि न पावसि रे ॥ काढि देइ सिआल बपुरे कउ ता की ओट टिकावसि रे ॥२॥

जिस का जासु सुनत भव तरीऐ ता सिउ रंगु न लावसि रे ॥ थोरी बात अलप सुपने की बहुरि बहुरि अटकावसि रे ॥३॥

भइओ प्रसादु क्रिपा निधि ठाकुर संतसंगि पति पाई ॥ कहु नानक त्रै गुण भ्रमु छूटा जउ प्रभ भए सहाई ॥४॥७॥

(राग मारू -- SGGS 1000) मारू महला ५ ॥
अंतरजामी सभ बिधि जानै तिस ते कहा दुलारिओ ॥ हसत पाव झरे खिन भीतरि अगनि संगि लै जारिओ ॥१॥

मूड़े तै मन ते रामु बिसारिओ ॥ लूणु खाइ करहि हरामखोरी पेखत नैन बिदारिओ ॥१॥ रहाउ ॥

असाध रोगु उपजिओ तन भीतरि टरत न काहू टारिओ ॥ प्रभ बिसरत महा दुखु पाइओ इहु नानक ततु बीचारिओ ॥२॥८॥

(राग मारू -- SGGS 1001) मारू महला ५ ॥
चरन कमल प्रभ राखे चीति ॥ हरि गुण गावह नीता नीत ॥ तिसु बिनु दूजा अवरु न कोऊ ॥ आदि मधि अंति है सोऊ ॥१॥

संतन की ओट आपे आपि ॥१॥ रहाउ ॥

जा कै वसि है सगल संसारु ॥ आपे आपि आपि निरंकारु ॥ नानक गहिओ साचा सोइ ॥ सुखु पाइआ फिरि दूखु न होइ ॥२॥९॥

(राग मारू -- SGGS 1001) मारू महला ५ घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
प्रान सुखदाता जीअ सुखदाता तुम काहे बिसारिओ अगिआनथ ॥ होछा मदु चाखि होए तुम बावर दुलभ जनमु अकारथ ॥१॥

रे नर ऐसी करहि इआनथ ॥ तजि सारंगधर भ्रमि तू भूला मोहि लपटिओ दासी संगि सानथ ॥१॥ रहाउ ॥

धरणीधरु तिआगि नीच कुल सेवहि हउ हउ करत बिहावथ ॥ फोकट करम करहि अगिआनी मनमुखि अंध कहावथ ॥२॥

सति होता असति करि मानिआ जो बिनसत सो निहचलु जानथ ॥ पर की कउ अपनी करि पकरी ऐसे भूल भुलानथ ॥३॥

खत्री ब्राहमण सूद वैस सभ एकै नामि तरानथ ॥ गुरु नानकु उपदेसु कहतु है जो सुनै सो पारि परानथ ॥४॥१॥१०॥

(राग मारू -- SGGS 1001) मारू महला ५ ॥
गुपतु करता संगि सो प्रभु डहकावए मनुखाइ ॥ बिसारि हरि जीउ बिखै भोगहि तपत थम गलि लाइ ॥१॥

रे नर काइ पर ग्रिहि जाइ ॥ कुचल कठोर कामि गरधभ तुम नही सुनिओ धरम राइ ॥१॥ रहाउ ॥

बिकार पाथर गलहि बाधे निंद पोट सिराइ ॥ महा सागरु समुदु लंघना पारि न परना जाइ ॥२॥

कामि क्रोधि लोभि मोहि बिआपिओ नेत्र रखे फिराइ ॥ सीसु उठावन न कबहू मिलई महा दुतर माइ ॥३॥

सूरु मुकता ससी मुकता ब्रहम गिआनी अलिपाइ ॥ सुभावत जैसे बैसंतर अलिपत सदा निरमलाइ ॥४॥

जिसु करमु खुलिआ तिसु लहिआ पड़दा जिनि गुर पहि मंनिआ सुभाइ ॥ गुरि मंत्रु अवखधु नामु दीना जन नानक संकट जोनि न पाइ ॥५॥२॥

रे नर इन बिधि पारि पराइ ॥ धिआइ हरि जीउ होइ मिरतकु तिआगि दूजा भाउ ॥ रहाउ दूजा ॥२॥११॥

(राग मारू -- SGGS 1002) मारू महला ५ ॥
बाहरि ढूढन ते छूटि परे गुरि घर ही माहि दिखाइआ था ॥ अनभउ अचरज रूपु प्रभ पेखिआ मेरा मनु छोडि न कतहू जाइआ था ॥१॥

मानकु पाइओ रे पाइओ हरि पूरा पाइआ था ॥ मोलि अमोलु न पाइआ जाई करि किरपा गुरू दिवाइआ था ॥१॥ रहाउ ॥

अदिसटु अगोचरु पारब्रहमु मिलि साधू अकथु कथाइआ था ॥ अनहद सबदु दसम दुआरि वजिओ तह अम्रित नामु चुआइआ था ॥२॥

तोटि नाही मनि त्रिसना बूझी अखुट भंडार समाइआ था ॥ चरण चरण चरण गुर सेवे अघड़ु घड़िओ रसु पाइआ था ॥३॥

सहजे आवा सहजे जावा सहजे मनु खेलाइआ था ॥ कहु नानक भरमु गुरि खोइआ ता हरि महली महलु पाइआ था ॥४॥३॥१२॥

(राग मारू -- SGGS 1002) मारू महला ५ ॥
जिसहि साजि निवाजिआ तिसहि सिउ रुच नाहि ॥ आन रूती आन बोईऐ फलु न फूलै ताहि ॥१॥

रे मन वत्र बीजण नाउ ॥ बोइ खेती लाइ मनूआ भलो समउ सुआउ ॥१॥ रहाउ ॥

खोइ खहड़ा भरमु मन का सतिगुर सरणी जाइ ॥ करमु जिस कउ धुरहु लिखिआ सोई कार कमाइ ॥२॥

भाउ लागा गोबिद सिउ घाल पाई थाइ ॥ खेति मेरै जमिआ निखुटि न कबहू जाइ ॥३॥

पाइआ अमोलु पदारथो छोडि न कतहू जाइ ॥ कहु नानक सुखु पाइआ त्रिपति रहे आघाइ ॥४॥४॥१३॥

(राग मारू -- SGGS 1002) मारू महला ५ ॥
फूटो आंडा भरम का मनहि भइओ परगासु ॥ काटी बेरी पगह ते गुरि कीनी बंदि खलासु ॥१॥

आवण जाणु रहिओ ॥ तपत कड़ाहा बुझि गइआ गुरि सीतल नामु दीओ ॥१॥ रहाउ ॥

जब ते साधू संगु भइआ तउ छोडि गए निगहार ॥ जिस की अटक तिस ते छुटी तउ कहा करै कोटवार ॥२॥

चूका भारा करम का होए निहकरमा ॥ सागर ते कंढै चड़े गुरि कीने धरमा ॥३॥

सचु थानु सचु बैठका सचु सुआउ बणाइआ ॥ सचु पूंजी सचु वखरो नानक घरि पाइआ ॥४॥५॥१४॥

(राग मारू -- SGGS 1002) मारू महला ५ ॥
बेदु पुकारै मुख ते पंडत कामामन का माठा ॥ मोनी होइ बैठा इकांती हिरदै कलपन गाठा ॥ होइ उदासी ग्रिहु तजि चलिओ छुटकै नाही नाठा ॥१॥

जीअ की कै पहि बात कहा ॥ आपि मुकतु मो कउ प्रभु मेले ऐसो कहा लहा ॥१॥ रहाउ ॥

तपसी करि कै देही साधी मनूआ दह दिस धाना ॥ ब्रहमचारि ब्रहमचजु कीना हिरदै भइआ गुमाना ॥ संनिआसी होइ कै तीरथि भ्रमिओ उसु महि क्रोधु बिगाना ॥२॥

घूंघर बाधि भए रामदासा रोटीअन के ओपावा ॥ बरत नेम करम खट कीने बाहरि भेख दिखावा ॥ गीत नाद मुखि राग अलापे मनि नही हरि हरि गावा ॥३॥

हरख सोग लोभ मोह रहत हहि निरमल हरि के संता ॥ तिन की धूड़ि पाए मनु मेरा जा दइआ करे भगवंता ॥ कहु नानक गुरु पूरा मिलिआ तां उतरी मन की चिंता ॥४॥

मेरा अंतरजामी हरि राइआ ॥ सभु किछु जाणै मेरे जीअ का प्रीतमु बिसरि गए बकबाइआ ॥१॥ रहाउ दूजा ॥६॥१५॥

(राग मारू -- SGGS 1003) मारू महला ५ ॥
कोटि लाख सरब को राजा जिसु हिरदै नामु तुमारा ॥ जा कउ नामु न दीआ मेरै सतिगुरि से मरि जनमहि गावारा ॥१॥

मेरे सतिगुर ही पति राखु ॥ चीति आवहि तब ही पति पूरी बिसरत रलीऐ खाकु ॥१॥ रहाउ ॥

रूप रंग खुसीआ मन भोगण ते ते छिद्र विकारा ॥ हरि का नामु निधानु कलिआणा सूख सहजु इहु सारा ॥२॥

माइआ रंग बिरंग खिनै महि जिउ बादर की छाइआ ॥ से लाल भए गूड़ै रंगि राते जिन गुर मिलि हरि हरि गाइआ ॥३॥

ऊच मूच अपार सुआमी अगम दरबारा ॥ नामो वडिआई सोभा नानक खसमु पिआरा ॥४॥७॥१६॥

(राग मारू -- SGGS 1003) मारू महला ५ घरु ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ओअंकारि उतपाती ॥ कीआ दिनसु सभ राती ॥ वणु त्रिणु त्रिभवण पाणी ॥ चारि बेद चारे खाणी ॥ खंड दीप सभि लोआ ॥ एक कवावै ते सभि होआ ॥१॥

करणैहारा बूझहु रे ॥ सतिगुरु मिलै त सूझै रे ॥१॥ रहाउ ॥

त्रै गुण कीआ पसारा ॥ नरक सुरग अवतारा ॥ हउमै आवै जाई ॥ मनु टिकणु न पावै राई ॥ बाझु गुरू गुबारा ॥ मिलि सतिगुर निसतारा ॥२॥

हउ हउ करम कमाणे ॥ ते ते बंध गलाणे ॥ मेरी मेरी धारी ॥ ओहा पैरि लोहारी ॥ सो गुर मिलि एकु पछाणै ॥ जिसु होवै भागु मथाणै ॥३॥

सो मिलिआ जि हरि मनि भाइआ ॥ सो भूला जि प्रभू भुलाइआ ॥ नह आपहु मूरखु गिआनी ॥ जि करावै सु नामु वखानी ॥ तेरा अंतु न पारावारा ॥ जन नानक सद बलिहारा ॥४॥१॥१७॥

(राग मारू -- SGGS 1004) मारू महला ५ ॥
मोहनी मोहि लीए त्रै गुनीआ ॥ लोभि विआपी झूठी दुनीआ ॥ मेरी मेरी करि कै संची अंत की बार सगल ले छलीआ ॥१॥

निरभउ निरंकारु दइअलीआ ॥ जीअ जंत सगले प्रतिपलीआ ॥१॥ रहाउ ॥

एकै स्रमु करि गाडी गडहै ॥ एकहि सुपनै दामु न छडहै ॥ राजु कमाइ करी जिनि थैली ता कै संगि न चंचलि चलीआ ॥२॥

एकहि प्राण पिंड ते पिआरी ॥ एक संची तजि बाप महतारी ॥ सुत मीत भ्रात ते गुहजी ता कै निकटि न होई खलीआ ॥३॥

होइ अउधूत बैठे लाइ तारी ॥ जोगी जती पंडित बीचारी ॥ ग्रिहि मड़ी मसाणी बन महि बसते ऊठि तिना कै लागी पलीआ ॥४॥

काटे बंधन ठाकुरि जा के ॥ हरि हरि नामु बसिओ जीअ ता कै ॥ साधसंगि भए जन मुकते गति पाई नानक नदरि निहलीआ ॥५॥२॥१८॥

(राग मारू -- SGGS 1004) मारू महला ५ ॥
सिमरहु एकु निरंजन सोऊ ॥ जा ते बिरथा जात न कोऊ ॥ मात गरभ महि जिनि प्रतिपारिआ ॥ जीउ पिंडु दे साजि सवारिआ ॥ सोई बिधाता खिनु खिनु जपीऐ ॥ जिसु सिमरत अवगुण सभि ढकीऐ ॥ चरण कमल उर अंतरि धारहु ॥ बिखिआ बन ते जीउ उधारहु ॥ करण पलाह मिटहि बिललाटा ॥ जपि गोविद भरमु भउ फाटा ॥ साधसंगि विरला को पाए ॥ नानकु ता कै बलि बलि जाए ॥१॥

राम नामु मनि तनि आधारा ॥ जो सिमरै तिस का निसतारा ॥१॥ रहाउ ॥

मिथिआ वसतु सति करि मानी ॥ हितु लाइओ सठ मूड़ अगिआनी ॥ काम क्रोध लोभ मद माता ॥ कउडी बदलै जनमु गवाता ॥ अपना छोडि पराइऐ राता ॥ माइआ मद मन तन संगि जाता ॥ त्रिसन न बूझै करत कलोला ॥ ऊणी आस मिथिआ सभि बोला ॥ आवत इकेला जात इकेला ॥ हम तुम संगि झूठे सभि बोला ॥ पाइ ठगउरी आपि भुलाइओ ॥ नानक किरतु न जाइ मिटाइओ ॥२॥

पसु पंखी भूत अरु प्रेता ॥ बहु बिधि जोनी फिरत अनेता ॥ जह जानो तह रहनु न पावै ॥ थान बिहून उठि उठि फिरि धावै ॥ मनि तनि बासना बहुतु बिसथारा ॥ अहमेव मूठो बेचारा ॥ अनिक दोख अरु बहुतु सजाई ॥ ता की कीमति कहणु न जाई ॥ प्रभ बिसरत नरक महि पाइआ ॥ तह मात न बंधु न मीत न जाइआ ॥ जिस कउ होत क्रिपाल सुआमी ॥ सो जनु नानक पारगरामी ॥३॥

भ्रमत भ्रमत प्रभ सरनी आइआ ॥ दीना नाथ जगत पित माइआ ॥ प्रभ दइआल दुख दरद बिदारण ॥ जिसु भावै तिस ही निसतारण ॥ अंध कूप ते काढनहारा ॥ प्रेम भगति होवत निसतारा ॥ साध रूप अपना तनु धारिआ ॥ महा अगनि ते आपि उबारिआ ॥ जप तप संजम इस ते किछु नाही ॥ आदि अंति प्रभ अगम अगाही ॥ नामु देहि मागै दासु तेरा ॥ हरि जीवन पदु नानक प्रभु मेरा ॥४॥३॥१९॥


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