Pt 18 - गुरू अर्जन देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 18 - Guru Arjan Dev ji (Mahalla 5) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग गूजरी -- SGGS 500) गूजरी महला ५ ॥
करि किरपा अपना दरसु दीजै जसु गावउ निसि अरु भोर ॥ केस संगि दास पग झारउ इहै मनोरथ मोर ॥१॥

ठाकुर तुझ बिनु बीआ न होर ॥ चिति चितवउ हरि रसन अराधउ निरखउ तुमरी ओर ॥१॥ रहाउ ॥

दइआल पुरख सरब के ठाकुर बिनउ करउ कर जोरि ॥ नामु जपै नानकु दासु तुमरो उधरसि आखी फोर ॥२॥११॥२०॥

(राग गूजरी -- SGGS 500) गूजरी महला ५ ॥
ब्रहम लोक अरु रुद्र लोक आई इंद्र लोक ते धाइ ॥ साधसंगति कउ जोहि न साकै मलि मलि धोवै पाइ ॥१॥

अब मोहि आइ परिओ सरनाइ ॥ गुहज पावको बहुतु प्रजारै मो कउ सतिगुरि दीओ है बताइ ॥१॥ रहाउ ॥

सिध साधिक अरु जख्य किंनर नर रही कंठि उरझाइ ॥ जन नानक अंगु कीआ प्रभि करतै जा कै कोटि ऐसी दासाइ ॥२॥१२॥२१॥

(राग गूजरी -- SGGS 500) गूजरी महला ५ ॥
अपजसु मिटै होवै जगि कीरति दरगह बैसणु पाईऐ ॥ जम की त्रास नास होइ खिन महि सुख अनद सेती घरि जाईऐ ॥१॥

जा ते घाल न बिरथी जाईऐ ॥ आठ पहर सिमरहु प्रभु अपना मनि तनि सदा धिआईऐ ॥१॥ रहाउ ॥

मोहि सरनि दीन दुख भंजन तूं देहि सोई प्रभ पाईऐ ॥ चरण कमल नानक रंगि राते हरि दासह पैज रखाईऐ ॥२॥१३॥२२॥

(राग गूजरी -- SGGS 500) गूजरी महला ५ ॥
बिस्व्मभर जीअन को दाता भगति भरे भंडार ॥ जा की सेवा निफल न होवत खिन महि करे उधार ॥१॥

मन मेरे चरन कमल संगि राचु ॥ सगल जीअ जा कउ आराधहि ताहू कउ तूं जाचु ॥१॥ रहाउ ॥

नानक सरणि तुम्हारी करते तूं प्रभ प्रान अधार ॥ होइ सहाई जिसु तूं राखहि तिसु कहा करे संसारु ॥२॥१४॥२३॥

(राग गूजरी -- SGGS 500) गूजरी महला ५ ॥
जन की पैज सवारी आप ॥ हरि हरि नामु दीओ गुरि अवखधु उतरि गइओ सभु ताप ॥१॥ रहाउ ॥

हरिगोबिंदु रखिओ परमेसरि अपुनी किरपा धारि ॥ मिटी बिआधि सरब सुख होए हरि गुण सदा बीचारि ॥१॥

अंगीकारु कीओ मेरै करतै गुर पूरे की वडिआई ॥ अबिचल नीव धरी गुर नानक नित नित चड़ै सवाई ॥२॥१५॥२४॥

(राग गूजरी -- SGGS 500) गूजरी महला ५ ॥
कबहू हरि सिउ चीतु न लाइओ ॥ धंधा करत बिहानी अउधहि गुण निधि नामु न गाइओ ॥१॥ रहाउ ॥

कउडी कउडी जोरत कपटे अनिक जुगति करि धाइओ ॥ बिसरत प्रभ केते दुख गनीअहि महा मोहनी खाइओ ॥१॥

करहु अनुग्रहु सुआमी मेरे गनहु न मोहि कमाइओ ॥ गोबिंद दइआल क्रिपाल सुख सागर नानक हरि सरणाइओ ॥२॥१६॥२५॥

(राग गूजरी -- SGGS 501) गूजरी महला ५ ॥
रसना राम राम रवंत ॥ छोडि आन बिउहार मिथिआ भजु सदा भगवंत ॥१॥ रहाउ ॥

नामु एकु अधारु भगता ईत आगै टेक ॥ करि क्रिपा गोबिंद दीआ गुर गिआनु बुधि बिबेक ॥१॥

करण कारण सम्रथ स्रीधर सरणि ता की गही ॥ मुकति जुगति रवाल साधू नानक हरि निधि लही ॥२॥१७॥२६॥

(राग गूजरी -- SGGS 501) गूजरी महला ५ घरु ४ चउपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
छाडि सगल सिआणपा साध सरणी आउ ॥ पारब्रहम परमेसरो प्रभू के गुण गाउ ॥१॥

रे चित चरण कमल अराधि ॥ सरब सूख कलिआण पावहि मिटै सगल उपाधि ॥१॥ रहाउ ॥

मात पिता सुत मीत भाई तिसु बिना नही कोइ ॥ ईत ऊत जीअ नालि संगी सरब रविआ सोइ ॥२॥

कोटि जतन उपाव मिथिआ कछु न आवै कामि ॥ सरणि साधू निरमला गति होइ प्रभ कै नामि ॥३॥

अगम दइआल प्रभू ऊचा सरणि साधू जोगु ॥ तिसु परापति नानका जिसु लिखिआ धुरि संजोगु ॥४॥१॥२७॥

(राग गूजरी -- SGGS 501) गूजरी महला ५ ॥
आपना गुरु सेवि सद ही रमहु गुण गोबिंद ॥ सासि सासि अराधि हरि हरि लहि जाइ मन की चिंद ॥१॥

मेरे मन जापि प्रभ का नाउ ॥ सूख सहज अनंद पावहि मिली निरमल थाउ ॥१॥ रहाउ ॥

साधसंगि उधारि इहु मनु आठ पहर आराधि ॥ कामु क्रोधु अहंकारु बिनसै मिटै सगल उपाधि ॥२॥

अटल अछेद अभेद सुआमी सरणि ता की आउ ॥ चरण कमल अराधि हिरदै एक सिउ लिव लाउ ॥३॥

पारब्रहमि प्रभि दइआ धारी बखसि लीन्हे आपि ॥ सरब सुख हरि नामु दीआ नानक सो प्रभु जापि ॥४॥२॥२८॥

(राग गूजरी -- SGGS 501) गूजरी महला ५ ॥
गुर प्रसादी प्रभु धिआइआ गई संका तूटि ॥ दुख अनेरा भै बिनासे पाप गए निखूटि ॥१॥

हरि हरि नाम की मनि प्रीति ॥ मिलि साध बचन गोबिंद धिआए महा निरमल रीति ॥१॥ रहाउ ॥

जाप ताप अनेक करणी सफल सिमरत नाम ॥ करि अनुग्रहु आपि राखे भए पूरन काम ॥२॥

सासि सासि न बिसरु कबहूं ब्रहम प्रभ समरथ ॥ गुण अनिक रसना किआ बखानै अगनत सदा अकथ ॥३॥

दीन दरद निवारि तारण दइआल किरपा करण ॥ अटल पदवी नाम सिमरण द्रिड़ु नानक हरि हरि सरण ॥४॥३॥२९॥

(राग गूजरी -- SGGS 502) गूजरी महला ५ ॥
अह्मबुधि बहु सघन माइआ महा दीरघ रोगु ॥ हरि नामु अउखधु गुरि नामु दीनो करण कारण जोगु ॥१॥

मनि तनि बाछीऐ जन धूरि ॥ कोटि जनम के लहहि पातिक गोबिंद लोचा पूरि ॥१॥ रहाउ ॥

आदि अंते मधि आसा कूकरी बिकराल ॥ गुर गिआन कीरतन गोबिंद रमणं काटीऐ जम जाल ॥२॥

काम क्रोध लोभ मोह मूठे सदा आवा गवण ॥ प्रभ प्रेम भगति गुपाल सिमरण मिटत जोनी भवण ॥३॥

मित्र पुत्र कलत्र सुर रिद तीनि ताप जलंत ॥ जपि राम रामा दुख निवारे मिलै हरि जन संत ॥४॥

सरब बिधि भ्रमते पुकारहि कतहि नाही छोटि ॥ हरि चरण सरण अपार प्रभ के द्रिड़ु गही नानक ओट ॥५॥४॥३०॥

(राग गूजरी -- SGGS 502) गूजरी महला ५ घरु ४ दुपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
आराधि स्रीधर सफल मूरति करण कारण जोगु ॥ गुण रमण स्रवण अपार महिमा फिरि न होत बिओगु ॥१॥

मन चरणारबिंद उपास ॥ कलि कलेस मिटंत सिमरणि काटि जमदूत फास ॥१॥ रहाउ ॥

सत्रु दहन हरि नाम कहन अवर कछु न उपाउ ॥ करि अनुग्रहु प्रभू मेरे नानक नाम सुआउ ॥२॥१॥३१॥

(राग गूजरी -- SGGS 502) गूजरी महला ५ ॥
तूं समरथु सरनि को दाता दुख भंजनु सुख राइ ॥ जाहि कलेस मिटे भै भरमा निरमल गुण प्रभ गाइ ॥१॥

गोविंद तुझ बिनु अवरु न ठाउ ॥ करि किरपा पारब्रहम सुआमी जपी तुमारा नाउ ॥ रहाउ ॥ सतिगुर सेवि लगे हरि चरनी वडै भागि लिव लागी ॥ कवल प्रगास भए साधसंगे दुरमति बुधि तिआगी ॥२॥

आठ पहर हरि के गुण गावै सिमरै दीन दैआला ॥ आपि तरै संगति सभ उधरै बिनसे सगल जंजाला ॥३॥

चरण अधारु तेरा प्रभ सुआमी ओति पोति प्रभु साथि ॥ सरनि परिओ नानक प्रभ तुमरी दे राखिओ हरि हाथ ॥४॥२॥३२॥

(राग गूजरी -- SGGS 507) गूजरी महला ५ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
राजन महि तूं राजा कहीअहि भूमन महि भूमा ॥ ठाकुर महि ठकुराई तेरी कोमन सिरि कोमा ॥१॥

पिता मेरो बडो धनी अगमा ॥ उसतति कवन करीजै करते पेखि रहे बिसमा ॥१॥ रहाउ ॥

सुखीअन महि सुखीआ तूं कहीअहि दातन सिरि दाता ॥ तेजन महि तेजवंसी कहीअहि रसीअन महि राता ॥२॥

सूरन महि सूरा तूं कहीअहि भोगन महि भोगी ॥ ग्रसतन महि तूं बडो ग्रिहसती जोगन महि जोगी ॥३॥

करतन महि तूं करता कहीअहि आचारन महि आचारी ॥ साहन महि तूं साचा साहा वापारन महि वापारी ॥४॥

दरबारन महि तेरो दरबारा सरन पालन टीका ॥ लखिमी केतक गनी न जाईऐ गनि न सकउ सीका ॥५॥

नामन महि तेरो प्रभ नामा गिआनन महि गिआनी ॥ जुगतन महि तेरी प्रभ जुगता इसनानन महि इसनानी ॥६॥

सिधन महि तेरी प्रभ सिधा करमन सिरि करमा ॥ आगिआ महि तेरी प्रभ आगिआ हुकमन सिरि हुकमा ॥७॥

जिउ बोलावहि तिउ बोलह सुआमी कुदरति कवन हमारी ॥ साधसंगि नानक जसु गाइओ जो प्रभ की अति पिआरी ॥८॥१॥८॥

(राग गूजरी -- SGGS 508) गूजरी महला ५ घरु ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
नाथ नरहर दीन बंधव पतित पावन देव ॥ भै त्रास नास क्रिपाल गुण निधि सफल सुआमी सेव ॥१॥

हरि गोपाल गुर गोबिंद ॥ चरण सरण दइआल केसव तारि जग भव सिंध ॥१॥ रहाउ ॥

काम क्रोध हरन मद मोह दहन मुरारि मन मकरंद ॥ जनम मरण निवारि धरणीधर पति राखु परमानंद ॥२॥

जलत अनिक तरंग माइआ गुर गिआन हरि रिद मंत ॥ छेदि अह्मबुधि करुणा मै चिंत मेटि पुरख अनंत ॥३॥

सिमरि समरथ पल महूरत प्रभ धिआनु सहज समाधि ॥ दीन दइआल प्रसंन पूरन जाचीऐ रज साध ॥४॥

मोह मिथन दुरंत आसा बासना बिकार ॥ रखु धरम भरम बिदारि मन ते उधरु हरि निरंकार ॥५॥

धनाढि आढि भंडार हरि निधि होत जिना न चीर ॥ खल मुगध मूड़ कटाख्य स्रीधर भए गुण मति धीर ॥६॥

जीवन मुकत जगदीस जपि मन धारि रिद परतीति ॥ जीअ दइआ मइआ सरबत्र रमणं परम हंसह रीति ॥७॥

देत दरसनु स्रवन हरि जसु रसन नाम उचार ॥ अंग संग भगवान परसन प्रभ नानक पतित उधार ॥८॥१॥२॥५॥१॥१॥२॥५७॥

(राग गूजरी -- SGGS 517) रागु गूजरी वार महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सलोकु मः ५ ॥
अंतरि गुरु आराधणा जिहवा जपि गुर नाउ ॥ नेत्री सतिगुरु पेखणा स्रवणी सुनणा गुर नाउ ॥ सतिगुर सेती रतिआ दरगह पाईऐ ठाउ ॥ कहु नानक किरपा करे जिस नो एह वथु देइ ॥ जग महि उतम काढीअहि विरले केई केइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 517) मः ५ ॥
रखे रखणहारि आपि उबारिअनु ॥ गुर की पैरी पाइ काज सवारिअनु ॥ होआ आपि दइआलु मनहु न विसारिअनु ॥ साध जना कै संगि भवजलु तारिअनु ॥ साकत निंदक दुसट खिन माहि बिदारिअनु ॥ तिसु साहिब की टेक नानक मनै माहि ॥ जिसु सिमरत सुखु होइ सगले दूख जाहि ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 518) पउड़ी ॥
अकुल निरंजन पुरखु अगमु अपारीऐ ॥ सचो सचा सचु सचु निहारीऐ ॥ कूड़ु न जापै किछु तेरी धारीऐ ॥ सभसै दे दातारु जेत उपारीऐ ॥ इकतु सूति परोइ जोति संजारीऐ ॥ हुकमे भवजल मंझि हुकमे तारीऐ ॥ प्रभ जीउ तुधु धिआए सोइ जिसु भागु मथारीऐ ॥ तेरी गति मिति लखी न जाइ हउ तुधु बलिहारीऐ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 518) सलोकु मः ५ ॥
जा तूं तुसहि मिहरवान अचिंतु वसहि मन माहि ॥ जा तूं तुसहि मिहरवान नउ निधि घर महि पाहि ॥ जा तूं तुसहि मिहरवान ता गुर का मंत्रु कमाहि ॥ जा तूं तुसहि मिहरवान ता नानक सचि समाहि ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 518) मः ५ ॥
किती बैहन्हि बैहणे मुचु वजाइनि वज ॥ नानक सचे नाम विणु किसै न रहीआ लज ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 518) पउड़ी ॥
तुधु धिआइन्हि बेद कतेबा सणु खड़े ॥ गणती गणी न जाइ तेरै दरि पड़े ॥ ब्रहमे तुधु धिआइन्हि इंद्र इंद्रासणा ॥ संकर बिसन अवतार हरि जसु मुखि भणा ॥ पीर पिकाबर सेख मसाइक अउलीए ॥ ओति पोति निरंकार घटि घटि मउलीए ॥ कूड़हु करे विणासु धरमे तगीऐ ॥ जितु जितु लाइहि आपि तितु तितु लगीऐ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 518) सलोकु मः ५ ॥
चंगिआईं आलकु करे बुरिआईं होइ सेरु ॥ नानक अजु कलि आवसी गाफल फाही पेरु ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 518) मः ५ ॥
कितीआ कुढंग गुझा थीऐ न हितु ॥ नानक तै सहि ढकिआ मन महि सचा मितु ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 518) पउड़ी ॥
हउ मागउ तुझै दइआल करि दासा गोलिआ ॥ नउ निधि पाई राजु जीवा बोलिआ ॥ अम्रित नामु निधानु दासा घरि घणा ॥ तिन कै संगि निहालु स्रवणी जसु सुणा ॥ कमावा तिन की कार सरीरु पवितु होइ ॥ पखा पाणी पीसि बिगसा पैर धोइ ॥ आपहु कछू न होइ प्रभ नदरि निहालीऐ ॥ मोहि निरगुण दिचै थाउ संत धरम सालीऐ ॥३॥

(राग गूजरी -- SGGS 518) सलोक मः ५ ॥
साजन तेरे चरन की होइ रहा सद धूरि ॥ नानक सरणि तुहारीआ पेखउ सदा हजूरि ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 518) मः ५ ॥
पतित पुनीत असंख होहि हरि चरणी मनु लाग ॥ अठसठि तीरथ नामु प्रभ जिसु नानक मसतकि भाग ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 518) पउड़ी ॥
नित जपीऐ सासि गिरासि नाउ परवदिगार दा ॥ जिस नो करे रहम तिसु न विसारदा ॥ आपि उपावणहार आपे ही मारदा ॥ सभु किछु जाणै जाणु बुझि वीचारदा ॥ अनिक रूप खिन माहि कुदरति धारदा ॥ जिस नो लाइ सचि तिसहि उधारदा ॥ जिस दै होवै वलि सु कदे न हारदा ॥ सदा अभगु दीबाणु है हउ तिसु नमसकारदा ॥४॥

(राग गूजरी -- SGGS 519) सलोक मः ५ ॥
कामु क्रोधु लोभु छोडीऐ दीजै अगनि जलाइ ॥ जीवदिआ नित जापीऐ नानक साचा नाउ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 519) मः ५ ॥
सिमरत सिमरत प्रभु आपणा सभ फल पाए आहि ॥ नानक नामु अराधिआ गुर पूरै दीआ मिलाइ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 519) पउड़ी ॥
सो मुकता संसारि जि गुरि उपदेसिआ ॥ तिस की गई बलाइ मिटे अंदेसिआ ॥ तिस का दरसनु देखि जगतु निहालु होइ ॥ जन कै संगि निहालु पापा मैलु धोइ ॥ अम्रितु साचा नाउ ओथै जापीऐ ॥ मन कउ होइ संतोखु भुखा ध्रापीऐ ॥ जिसु घटि वसिआ नाउ तिसु बंधन काटीऐ ॥ गुर परसादि किनै विरलै हरि धनु खाटीऐ ॥५॥

(राग गूजरी -- SGGS 519) सलोक मः ५ ॥
मन महि चितवउ चितवनी उदमु करउ उठि नीत ॥ हरि कीरतन का आहरो हरि देहु नानक के मीत ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 519) मः ५ ॥
द्रिसटि धारि प्रभि राखिआ मनु तनु रता मूलि ॥ नानक जो प्रभ भाणीआ मरउ विचारी सूलि ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 519) पउड़ी ॥
जीअ की बिरथा होइ सु गुर पहि अरदासि करि ॥ छोडि सिआणप सगल मनु तनु अरपि धरि ॥ पूजहु गुर के पैर दुरमति जाइ जरि ॥ साध जना कै संगि भवजलु बिखमु तरि ॥ सेवहु सतिगुर देव अगै न मरहु डरि ॥ खिन महि करे निहालु ऊणे सुभर भरि ॥ मन कउ होइ संतोखु धिआईऐ सदा हरि ॥ सो लगा सतिगुर सेव जा कउ करमु धुरि ॥६॥

(राग गूजरी -- SGGS 519) सलोक मः ५ ॥
लगड़ी सुथानि जोड़णहारै जोड़ीआ ॥ नानक लहरी लख सै आन डुबण देइ न मा पिरी ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 519) मः ५ ॥
बनि भीहावलै हिकु साथी लधमु दुख हरता हरि नामा ॥ बलि बलि जाई संत पिआरे नानक पूरन कामां ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 519) पउड़ी ॥
पाईअनि सभि निधान तेरै रंगि रतिआ ॥ न होवी पछोताउ तुध नो जपतिआ ॥ पहुचि न सकै कोइ तेरी टेक जन ॥ गुर पूरे वाहु वाहु सुख लहा चितारि मन ॥ गुर पहि सिफति भंडारु करमी पाईऐ ॥ सतिगुर नदरि निहाल बहुड़ि न धाईऐ ॥ रखै आपि दइआलु करि दासा आपणे ॥ हरि हरि हरि हरि नामु जीवा सुणि सुणे ॥७॥

(राग गूजरी -- SGGS 520) सलोक मः ५ ॥
प्रेम पटोला तै सहि दिता ढकण कू पति मेरी ॥ दाना बीना साई मैडा नानक सार न जाणा तेरी ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 520) मः ५ ॥
तैडै सिमरणि हभु किछु लधमु बिखमु न डिठमु कोई ॥ जिसु पति रखै सचा साहिबु नानक मेटि न सकै कोई ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 520) पउड़ी ॥
होवै सुखु घणा दयि धिआइऐ ॥ वंञै रोगा घाणि हरि गुण गाइऐ ॥ अंदरि वरतै ठाढि प्रभि चिति आइऐ ॥ पूरन होवै आस नाइ मंनि वसाइऐ ॥ कोइ न लगै बिघनु आपु गवाइऐ ॥ गिआन पदारथु मति गुर ते पाइऐ ॥ तिनि पाए सभे थोक जिसु आपि दिवाइऐ ॥ तूं सभना का खसमु सभ तेरी छाइऐ ॥८॥

(राग गूजरी -- SGGS 520) सलोक मः ५ ॥
नदी तरंदड़ी मैडा खोजु न खु्मभै मंझि मुहबति तेरी ॥ तउ सह चरणी मैडा हीअड़ा सीतमु हरि नानक तुलहा बेड़ी ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 520) मः ५ ॥
जिन्हा दिसंदड़िआ दुरमति वंञै मित्र असाडड़े सेई ॥ हउ ढूढेदी जगु सबाइआ जन नानक विरले केई ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 520) पउड़ी ॥
आवै साहिबु चिति तेरिआ भगता डिठिआ ॥ मन की कटीऐ मैलु साधसंगि वुठिआ ॥ जनम मरण भउ कटीऐ जन का सबदु जपि ॥ बंधन खोलन्हि संत दूत सभि जाहि छपि ॥ तिसु सिउ लाइन्हि रंगु जिस दी सभ धारीआ ॥ ऊची हूं ऊचा थानु अगम अपारीआ ॥ रैणि दिनसु कर जोड़ि सासि सासि धिआईऐ ॥ जा आपे होइ दइआलु तां भगत संगु पाईऐ ॥९॥

(राग गूजरी -- SGGS 520) सलोक मः ५ ॥
बारि विडानड़ै हुमस धुमस कूका पईआ राही ॥ तउ सह सेती लगड़ी डोरी नानक अनद सेती बनु गाही ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 520) मः ५ ॥
सची बैसक तिन्हा संगि जिन संगि जपीऐ नाउ ॥ तिन्ह संगि संगु न कीचई नानक जिना आपणा सुआउ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 520) पउड़ी ॥
सा वेला परवाणु जितु सतिगुरु भेटिआ ॥ होआ साधू संगु फिरि दूख न तेटिआ ॥ पाइआ निहचलु थानु फिरि गरभि न लेटिआ ॥ नदरी आइआ इकु सगल ब्रहमेटिआ ॥ ततु गिआनु लाइ धिआनु द्रिसटि समेटिआ ॥ सभो जपीऐ जापु जि मुखहु बोलेटिआ ॥ हुकमे बुझि निहालु सुखि सुखेटिआ ॥ परखि खजानै पाए से बहुड़ि न खोटिआ ॥१०॥

(राग गूजरी -- SGGS 520) सलोकु मः ५ ॥
विछोहे ज्मबूर खवे न वंञनि गाखड़े ॥ जे सो धणी मिलंनि नानक सुख स्मबूह सचु ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 521) मः ५ ॥
जिमी वसंदी पाणीऐ ईधणु रखै भाहि ॥ नानक सो सहु आहि जा कै आढलि हभु को ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 521) पउड़ी ॥
तेरे कीते कम तुधै ही गोचरे ॥ सोई वरतै जगि जि कीआ तुधु धुरे ॥ बिसमु भए बिसमाद देखि कुदरति तेरीआ ॥ सरणि परे तेरी दास करि गति होइ मेरीआ ॥ तेरै हथि निधानु भावै तिसु देहि ॥ जिस नो होइ दइआलु हरि नामु सेइ लेहि ॥ अगम अगोचर बेअंत अंतु न पाईऐ ॥ जिस नो होहि क्रिपालु सु नामु धिआईऐ ॥११॥

(राग गूजरी -- SGGS 521) सलोक मः ५ ॥
कड़छीआ फिरंन्हि सुआउ न जाणन्हि सुञीआ ॥ सेई मुख दिसंन्हि नानक रते प्रेम रसि ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 521) मः ५ ॥
खोजी लधमु खोजु छडीआ उजाड़ि ॥ तै सहि दिती वाड़ि नानक खेतु न छिजई ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 521) पउड़ी ॥
आराधिहु सचा सोइ सभु किछु जिसु पासि ॥ दुहा सिरिआ खसमु आपि खिन महि करे रासि ॥ तिआगहु सगल उपाव तिस की ओट गहु ॥ पउ सरणाई भजि सुखी हूं सुख लहु ॥ करम धरम ततु गिआनु संता संगु होइ ॥ जपीऐ अम्रित नामु बिघनु न लगै कोइ ॥ जिस नो आपि दइआलु तिसु मनि वुठिआ ॥ पाईअन्हि सभि निधान साहिबि तुठिआ ॥१२॥

(राग गूजरी -- SGGS 521) सलोक मः ५ ॥
लधमु लभणहारु करमु करंदो मा पिरी ॥ इको सिरजणहारु नानक बिआ न पसीऐ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 521) मः ५ ॥
पापड़िआ पछाड़ि बाणु सचावा संन्हि कै ॥ गुर मंत्रड़ा चितारि नानक दुखु न थीवई ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 521) पउड़ी ॥
वाहु वाहु सिरजणहार पाईअनु ठाढि आपि ॥ जीअ जंत मिहरवानु तिस नो सदा जापि ॥ दइआ धारी समरथि चुके बिल बिलाप ॥ नठे ताप दुख रोग पूरे गुर प्रतापि ॥ कीतीअनु आपणी रख गरीब निवाजि थापि ॥ आपे लइअनु छडाइ बंधन सगल कापि ॥ तिसन बुझी आस पुंनी मन संतोखि ध्रापि ॥ वडी हूं वडा अपार खसमु जिसु लेपु न पुंनि पापि ॥१३॥

(राग गूजरी -- SGGS 521) सलोक मः ५ ॥
जा कउ भए क्रिपाल प्रभ हरि हरि सेई जपात ॥ नानक प्रीति लगी तिन राम सिउ भेटत साध संगात ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 521) मः ५ ॥
रामु रमहु बडभागीहो जलि थलि महीअलि सोइ ॥ नानक नामि अराधिऐ बिघनु न लागै कोइ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 521) पउड़ी ॥
भगता का बोलिआ परवाणु है दरगह पवै थाइ ॥ भगता तेरी टेक रते सचि नाइ ॥ जिस नो होइ क्रिपालु तिस का दूखु जाइ ॥ भगत तेरे दइआल ओन्हा मिहर पाइ ॥ दूखु दरदु वड रोगु न पोहे तिसु माइ ॥ भगता एहु अधारु गुण गोविंद गाइ ॥ सदा सदा दिनु रैणि इको इकु धिआइ ॥ पीवति अम्रित नामु जन नामे रहे अघाइ ॥१४॥

(राग गूजरी -- SGGS 522) सलोक मः ५ ॥
कोटि बिघन तिसु लागते जिस नो विसरै नाउ ॥ नानक अनदिनु बिलपते जिउ सुंञै घरि काउ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 522) मः ५ ॥
पिरी मिलावा जा थीऐ साई सुहावी रुति ॥ घड़ी मुहतु नह वीसरै नानक रवीऐ नित ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 522) पउड़ी ॥
सूरबीर वरीआम किनै न होड़ीऐ ॥ फउज सताणी हाठ पंचा जोड़ीऐ ॥ दस नारी अउधूत देनि चमोड़ीऐ ॥ जिणि जिणि लैन्हि रलाइ एहो एना लोड़ीऐ ॥ त्रै गुण इन कै वसि किनै न मोड़ीऐ ॥ भरमु कोटु माइआ खाई कहु कितु बिधि तोड़ीऐ ॥ गुरु पूरा आराधि बिखम दलु फोड़ीऐ ॥ हउ तिसु अगै दिनु राति रहा कर जोड़ीऐ ॥१५॥

(राग गूजरी -- SGGS 522) सलोक मः ५ ॥
किलविख सभे उतरनि नीत नीत गुण गाउ ॥ कोटि कलेसा ऊपजहि नानक बिसरै नाउ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 522) मः ५ ॥
नानक सतिगुरि भेटिऐ पूरी होवै जुगति ॥ हसंदिआ खेलंदिआ पैनंदिआ खावंदिआ विचे होवै मुकति ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 522) पउड़ी ॥
सो सतिगुरु धनु धंनु जिनि भरम गड़ु तोड़िआ ॥ सो सतिगुरु वाहु वाहु जिनि हरि सिउ जोड़िआ ॥ नामु निधानु अखुटु गुरु देइ दारूओ ॥ महा रोगु बिकराल तिनै बिदारूओ ॥ पाइआ नामु निधानु बहुतु खजानिआ ॥ जिता जनमु अपारु आपु पछानिआ ॥ महिमा कही न जाइ गुर समरथ देव ॥ गुर पारब्रहम परमेसुर अपर्मपर अलख अभेव ॥१६॥

(राग गूजरी -- SGGS 522) सलोकु मः ५ ॥
उदमु करेदिआ जीउ तूं कमावदिआ सुख भुंचु ॥ धिआइदिआ तूं प्रभू मिलु नानक उतरी चिंत ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 522) मः ५ ॥
सुभ चिंतन गोबिंद रमण निरमल साधू संग ॥ नानक नामु न विसरउ इक घड़ी करि किरपा भगवंत ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 522) पउड़ी ॥
तेरा कीता होइ त काहे डरपीऐ ॥ जिसु मिलि जपीऐ नाउ तिसु जीउ अरपीऐ ॥ आइऐ चिति निहालु साहिब बेसुमार ॥ तिस नो पोहे कवणु जिसु वलि निरंकार ॥ सभु किछु तिस कै वसि न कोई बाहरा ॥ सो भगता मनि वुठा सचि समाहरा ॥ तेरे दास धिआइनि तुधु तूं रखण वालिआ ॥ सिरि सभना समरथु नदरि निहालिआ ॥१७॥

(राग गूजरी -- SGGS 523) सलोक मः ५ ॥
काम क्रोध मद लोभ मोह दुसट बासना निवारि ॥ राखि लेहु प्रभ आपणे नानक सद बलिहारि ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 523) मः ५ ॥
खांदिआ खांदिआ मुहु घठा पैनंदिआ सभु अंगु ॥ नानक ध्रिगु तिना दा जीविआ जिन सचि न लगो रंगु ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 523) पउड़ी ॥
जिउ जिउ तेरा हुकमु तिवै तिउ होवणा ॥ जह जह रखहि आपि तह जाइ खड़ोवणा ॥ नाम तेरै कै रंगि दुरमति धोवणा ॥ जपि जपि तुधु निरंकार भरमु भउ खोवणा ॥ जो तेरै रंगि रते से जोनि न जोवणा ॥ अंतरि बाहरि इकु नैण अलोवणा ॥ जिन्ही पछाता हुकमु तिन्ह कदे न रोवणा ॥ नाउ नानक बखसीस मन माहि परोवणा ॥१८॥

(राग गूजरी -- SGGS 523) सलोक मः ५ ॥
जीवदिआ न चेतिओ मुआ रलंदड़ो खाक ॥ नानक दुनीआ संगि गुदारिआ साकत मूड़ नपाक ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 523) मः ५ ॥
जीवंदिआ हरि चेतिआ मरंदिआ हरि रंगि ॥ जनमु पदारथु तारिआ नानक साधू संगि ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 523) पउड़ी ॥
आदि जुगादी आपि रखण वालिआ ॥ सचु नामु करतारु सचु पसारिआ ॥ ऊणा कही न होइ घटे घटि सारिआ ॥ मिहरवान समरथ आपे ही घालिआ ॥ जिन्ह मनि वुठा आपि से सदा सुखालिआ ॥ आपे रचनु रचाइ आपे ही पालिआ ॥ सभु किछु आपे आपि बेअंत अपारिआ ॥ गुर पूरे की टेक नानक सम्हालिआ ॥१९॥

(राग गूजरी -- SGGS 523) सलोक मः ५ ॥
आदि मधि अरु अंति परमेसरि रखिआ ॥ सतिगुरि दिता हरि नामु अम्रितु चखिआ ॥ साधा संगु अपारु अनदिनु हरि गुण रवै ॥ पाए मनोरथ सभि जोनी नह भवै ॥ सभु किछु करते हथि कारणु जो करै ॥ नानकु मंगै दानु संता धूरि तरै ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 523) मः ५ ॥
तिस नो मंनि वसाइ जिनि उपाइआ ॥ जिनि जनि धिआइआ खसमु तिनि सुखु पाइआ ॥ सफलु जनमु परवानु गुरमुखि आइआ ॥ हुकमै बुझि निहालु खसमि फुरमाइआ ॥ जिसु होआ आपि क्रिपालु सु नह भरमाइआ ॥ जो जो दिता खसमि सोई सुखु पाइआ ॥ नानक जिसहि दइआलु बुझाए हुकमु मित ॥ जिसहि भुलाए आपि मरि मरि जमहि नित ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 523) पउड़ी ॥
निंदक मारे ततकालि खिनु टिकण न दिते ॥ प्रभ दास का दुखु न खवि सकहि फड़ि जोनी जुते ॥ मथे वालि पछाड़िअनु जम मारगि मुते ॥ दुखि लगै बिललाणिआ नरकि घोरि सुते ॥ कंठि लाइ दास रखिअनु नानक हरि सते ॥२०॥

(राग गूजरी -- SGGS 524) सलोक मः ५ ॥
रामु जपहु वडभागीहो जलि थलि पूरनु सोइ ॥ नानक नामि धिआइऐ बिघनु न लागै कोइ ॥१॥

(राग गूजरी -- SGGS 524) मः ५ ॥
कोटि बिघन तिसु लागते जिस नो विसरै नाउ ॥ नानक अनदिनु बिलपते जिउ सुंञै घरि काउ ॥२॥

(राग गूजरी -- SGGS 524) पउड़ी ॥
सिमरि सिमरि दातारु मनोरथ पूरिआ ॥ इछ पुंनी मनि आस गए विसूरिआ ॥ पाइआ नामु निधानु जिस नो भालदा ॥ जोति मिली संगि जोति रहिआ घालदा ॥ सूख सहज आनंद वुठे तितु घरि ॥ आवण जाण रहे जनमु न तहा मरि ॥ साहिबु सेवकु इकु इकु द्रिसटाइआ ॥ गुर प्रसादि नानक सचि समाइआ ॥२१॥१॥२॥ सुधु

(राग देवगंधारी -- SGGS 528) देवगंधारी महला ५ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
माई गुर चरणी चितु लाईऐ ॥ प्रभु होइ क्रिपालु कमलु परगासे सदा सदा हरि धिआईऐ ॥१॥ रहाउ ॥

अंतरि एको बाहरि एको सभ महि एकु समाईऐ ॥ घटि अवघटि रविआ सभ ठाई हरि पूरन ब्रहमु दिखाईऐ ॥१॥

उसतति करहि सेवक मुनि केते तेरा अंतु न कतहू पाईऐ ॥ सुखदाते दुख भंजन सुआमी जन नानक सद बलि जाईऐ ॥२॥१॥

(राग देवगंधारी -- SGGS 528) देवगंधारी ॥
माई होनहार सो होईऐ ॥ राचि रहिओ रचना प्रभु अपनी कहा लाभु कहा खोईऐ ॥१॥ रहाउ ॥

कह फूलहि आनंद बिखै सोग कब हसनो कब रोईऐ ॥ कबहू मैलु भरे अभिमानी कब साधू संगि धोईऐ ॥१॥

कोइ न मेटै प्रभ का कीआ दूसर नाही अलोईऐ ॥ कहु नानक तिसु गुर बलिहारी जिह प्रसादि सुखि सोईऐ ॥२॥२॥

(राग देवगंधारी -- SGGS 529) देवगंधारी ॥
माई सुनत सोच भै डरत ॥ मेर तेर तजउ अभिमाना सरनि सुआमी की परत ॥१॥ रहाउ ॥

जो जो कहै सोई भल मानउ नाहि न का बोल करत ॥ निमख न बिसरउ हीए मोरे ते बिसरत जाई हउ मरत ॥१॥

सुखदाई पूरन प्रभु करता मेरी बहुतु इआनप जरत ॥ निरगुनि करूपि कुलहीण नानक हउ अनद रूप सुआमी भरत ॥२॥३॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates