Pt 16 - गुरू अर्जन देव जी - सलोक बाणी शब्द, Part 16 - Guru Arjan Dev ji (Mahalla 5) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग आसा -- SGGS 403) आसा महला ५ दुपदे ॥
लूकि कमानो सोई तुम्ह पेखिओ मूड़ मुगध मुकरानी ॥ आप कमाने कउ ले बांधे फिरि पाछै पछुतानी ॥१॥

प्रभ मेरे सभ बिधि आगै जानी ॥ भ्रम के मूसे तूं राखत परदा पाछै जीअ की मानी ॥१॥ रहाउ ॥

जितु जितु लाए तितु तितु लागे किआ को करै परानी ॥ बखसि लैहु पारब्रहम सुआमी नानक सद कुरबानी ॥२॥६॥१२८॥

(राग आसा -- SGGS 403) आसा महला ५ ॥
अपुने सेवक की आपे राखै आपे नामु जपावै ॥ जह जह काज किरति सेवक की तहा तहा उठि धावै ॥१॥

सेवक कउ निकटी होइ दिखावै ॥ जो जो कहै ठाकुर पहि सेवकु ततकाल होइ आवै ॥१॥ रहाउ ॥

तिसु सेवक कै हउ बलिहारी जो अपने प्रभ भावै ॥ तिस की सोइ सुणी मनु हरिआ तिसु नानक परसणि आवै ॥२॥७॥१२९॥

(राग आसा -- SGGS 403) आसा घरु ११ महला ५
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
नटूआ भेख दिखावै बहु बिधि जैसा है ओहु तैसा रे ॥ अनिक जोनि भ्रमिओ भ्रम भीतरि सुखहि नाही परवेसा रे ॥१॥

साजन संत हमारे मीता बिनु हरि हरि आनीता रे ॥ साधसंगि मिलि हरि गुण गाए इहु जनमु पदारथु जीता रे ॥१॥ रहाउ ॥

त्रै गुण माइआ ब्रहम की कीन्ही कहहु कवन बिधि तरीऐ रे ॥ घूमन घेर अगाह गाखरी गुर सबदी पारि उतरीऐ रे ॥२॥

खोजत खोजत खोजि बीचारिओ ततु नानक इहु जाना रे ॥ सिमरत नामु निधानु निरमोलकु मनु माणकु पतीआना रे ॥३॥१॥१३०॥

(राग आसा -- SGGS 404) आसा महला ५ दुपदे ॥
गुर परसादि मेरै मनि वसिआ जो मागउ सो पावउ रे ॥ नाम रंगि इहु मनु त्रिपताना बहुरि न कतहूं धावउ रे ॥१॥

हमरा ठाकुरु सभ ते ऊचा रैणि दिनसु तिसु गावउ रे ॥ खिन महि थापि उथापनहारा तिस ते तुझहि डरावउ रे ॥१॥ रहाउ ॥

जब देखउ प्रभु अपुना सुआमी तउ अवरहि चीति न पावउ रे ॥ नानकु दासु प्रभि आपि पहिराइआ भ्रमु भउ मेटि लिखावउ रे ॥२॥२॥१३१॥

(राग आसा -- SGGS 404) आसा महला ५ ॥
चारि बरन चउहा के मरदन खटु दरसन कर तली रे ॥ सुंदर सुघर सरूप सिआने पंचहु ही मोहि छली रे ॥१॥

जिनि मिलि मारे पंच सूरबीर ऐसो कउनु बली रे ॥ जिनि पंच मारि बिदारि गुदारे सो पूरा इह कली रे ॥१॥ रहाउ ॥

वडी कोम वसि भागहि नाही मुहकम फउज हठली रे ॥ कहु नानक तिनि जनि निरदलिआ साधसंगति कै झली रे ॥२॥३॥१३२॥

(राग आसा -- SGGS 404) आसा महला ५ ॥
नीकी जीअ की हरि कथा ऊतम आन सगल रस फीकी रे ॥१॥ रहाउ ॥

बहु गुनि धुनि मुनि जन खटु बेते अवरु न किछु लाईकी रे ॥१॥

बिखारी निरारी अपारी सहजारी साधसंगि नानक पीकी रे ॥२॥४॥१३३॥

(राग आसा -- SGGS 404) आसा महला ५ ॥
हमारी पिआरी अम्रित धारी गुरि निमख न मन ते टारी रे ॥१॥ रहाउ ॥

दरसन परसन सरसन हरसन रंगि रंगी करतारी रे ॥१॥

खिनु रम गुर गम हरि दम नह जम हरि कंठि नानक उरि हारी रे ॥२॥५॥१३४॥

(राग आसा -- SGGS 404) आसा महला ५ ॥
नीकी साध संगानी ॥ रहाउ ॥ पहर मूरत पल गावत गावत गोविंद गोविंद वखानी ॥१॥

चालत बैसत सोवत हरि जसु मनि तनि चरन खटानी ॥२॥

हंउ हउरो तू ठाकुरु गउरो नानक सरनि पछानी ॥३॥६॥१३५॥

(राग आसा -- SGGS 405) रागु आसा महला ५ घरु १२
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
तिआगि सगल सिआनपा भजु पारब्रहम निरंकारु ॥ एक साचे नाम बाझहु सगल दीसै छारु ॥१॥

सो प्रभु जाणीऐ सद संगि ॥ गुर प्रसादी बूझीऐ एक हरि कै रंगि ॥१॥ रहाउ ॥

सरणि समरथ एक केरी दूजा नाही ठाउ ॥ महा भउजलु लंघीऐ सदा हरि गुण गाउ ॥२॥

जनम मरणु निवारीऐ दुखु न जम पुरि होइ ॥ नामु निधानु सोई पाए क्रिपा करे प्रभु सोइ ॥३॥

एक टेक अधारु एको एक का मनि जोरु ॥ नानक जपीऐ मिलि साधसंगति हरि बिनु अवरु न होरु ॥४॥१॥१३६॥

(राग आसा -- SGGS 405) आसा महला ५ ॥
जीउ मनु तनु प्रान प्रभ के दीए सभि रस भोग ॥ दीन बंधप जीअ दाता सरणि राखण जोगु ॥१॥

मेरे मन धिआइ हरि हरि नाउ ॥ हलति पलति सहाइ संगे एक सिउ लिव लाउ ॥१॥ रहाउ ॥

बेद सासत्र जन धिआवहि तरण कउ संसारु ॥ करम धरम अनेक किरिआ सभ ऊपरि नामु अचारु ॥२॥

कामु क्रोधु अहंकारु बिनसै मिलै सतिगुर देव ॥ नामु द्रिड़ु करि भगति हरि की भली प्रभ की सेव ॥३॥

चरण सरण दइआल तेरी तूं निमाणे माणु ॥ जीअ प्राण अधारु तेरा नानक का प्रभु ताणु ॥४॥२॥१३७॥

(राग आसा -- SGGS 405) आसा महला ५ ॥
डोलि डोलि महा दुखु पाइआ बिना साधू संग ॥ खाटि लाभु गोबिंद हरि रसु पारब्रहम इक रंग ॥१॥

हरि को नामु जपीऐ नीति ॥ सासि सासि धिआइ सो प्रभु तिआगि अवर परीति ॥१॥ रहाउ ॥

करण कारण समरथ सो प्रभु जीअ दाता आपि ॥ तिआगि सगल सिआणपा आठ पहर प्रभु जापि ॥२॥

मीतु सखा सहाइ संगी ऊच अगम अपारु ॥ चरण कमल बसाइ हिरदै जीअ को आधारु ॥३॥

करि किरपा प्रभ पारब्रहम गुण तेरा जसु गाउ ॥ सरब सूख वडी वडिआई जपि जीवै नानकु नाउ ॥४॥३॥१३८॥

(राग आसा -- SGGS 405) आसा महला ५ ॥
उदमु करउ करावहु ठाकुर पेखत साधू संगि ॥ हरि हरि नामु चरावहु रंगनि आपे ही प्रभ रंगि ॥१॥

मन महि राम नामा जापि ॥ करि किरपा वसहु मेरै हिरदै होइ सहाई आपि ॥१॥ रहाउ ॥

सुणि सुणि नामु तुमारा प्रीतम प्रभु पेखन का चाउ ॥ दइआ करहु किरम अपुने कउ इहै मनोरथु सुआउ ॥२॥

तनु धनु तेरा तूं प्रभु मेरा हमरै वसि किछु नाहि ॥ जिउ जिउ राखहि तिउ तिउ रहणा तेरा दीआ खाहि ॥३॥

जनम जनम के किलविख काटै मजनु हरि जन धूरि ॥ भाइ भगति भरम भउ नासै हरि नानक सदा हजूरि ॥४॥४॥१३९॥

(राग आसा -- SGGS 406) आसा महला ५ ॥
अगम अगोचरु दरसु तेरा सो पाए जिसु मसतकि भागु ॥ आपि क्रिपालि क्रिपा प्रभि धारी सतिगुरि बखसिआ हरि नामु ॥१॥

कलिजुगु उधारिआ गुरदेव ॥ मल मूत मूड़ जि मुघद होते सभि लगे तेरी सेव ॥१॥ रहाउ ॥

तू आपि करता सभ स्रिसटि धरता सभ महि रहिआ समाइ ॥ धरम राजा बिसमादु होआ सभ पई पैरी आइ ॥२॥

सतजुगु त्रेता दुआपरु भणीऐ कलिजुगु ऊतमो जुगा माहि ॥ अहि करु करे सु अहि करु पाए कोई न पकड़ीऐ किसै थाइ ॥३॥

हरि जीउ सोई करहि जि भगत तेरे जाचहि एहु तेरा बिरदु ॥ कर जोड़ि नानक दानु मागै अपणिआ संता देहि हरि दरसु ॥४॥५॥१४०॥

(राग आसा -- SGGS 406) रागु आसा महला ५ घरु १३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सतिगुर बचन तुम्हारे ॥ निरगुण निसतारे ॥१॥ रहाउ ॥

महा बिखादी दुसट अपवादी ते पुनीत संगारे ॥१॥

जनम भवंते नरकि पड़ंते तिन्ह के कुल उधारे ॥२॥

कोइ न जानै कोइ न मानै से परगटु हरि दुआरे ॥३॥

कवन उपमा देउ कवन वडाई नानक खिनु खिनु वारे ॥४॥१॥१४१॥

(राग आसा -- SGGS 406) आसा महला ५ ॥
बावर सोइ रहे ॥१॥ रहाउ ॥

मोह कुट्मब बिखै रस माते मिथिआ गहन गहे ॥१॥

मिथन मनोरथ सुपन आनंद उलास मनि मुखि सति कहे ॥२॥

अम्रितु नामु पदारथु संगे तिलु मरमु न लहे ॥३॥

करि किरपा राखे सतसंगे नानक सरणि आहे ॥४॥२॥१४२॥

(राग आसा -- SGGS 406) आसा महला ५ तिपदे ॥
ओहा प्रेम पिरी ॥१॥ रहाउ ॥

कनिक माणिक गज मोतीअन लालन नह नाह नही ॥१॥

राज न भाग न हुकम न साद न ॥ किछु किछु न चाही ॥२॥

चरनन सरनन संतन बंदन ॥ सुखो सुखु पाही ॥ नानक तपति हरी ॥ मिले प्रेम पिरी ॥३॥३॥१४३॥

(राग आसा -- SGGS 407) आसा महला ५ ॥
गुरहि दिखाइओ लोइना ॥१॥ रहाउ ॥

ईतहि ऊतहि घटि घटि घटि घटि तूंही तूंही मोहिना ॥१॥

कारन करना धारन धरना एकै एकै सोहिना ॥२॥

संतन परसन बलिहारी दरसन नानक सुखि सुखि सोइना ॥३॥४॥१४४॥

(राग आसा -- SGGS 407) आसा महला ५ ॥
हरि हरि नामु अमोला ॥ ओहु सहजि सुहेला ॥१॥ रहाउ ॥

संगि सहाई छोडि न जाई ओहु अगह अतोला ॥१॥

प्रीतमु भाई बापु मोरो माई भगतन का ओल्हा ॥२॥

अलखु लखाइआ गुर ते पाइआ नानक इहु हरि का चोल्हा ॥३॥५॥१४५॥

(राग आसा -- SGGS 407) आसा महला ५ ॥
आपुनी भगति निबाहि ॥ ठाकुर आइओ आहि ॥१॥ रहाउ ॥

नामु पदारथु होइ सकारथु हिरदै चरन बसाहि ॥१॥

एह मुकता एह जुगता राखहु संत संगाहि ॥२॥

नामु धिआवउ सहजि समावउ नानक हरि गुन गाहि ॥३॥६॥१४६॥

(राग आसा -- SGGS 407) आसा महला ५ ॥
ठाकुर चरण सुहावे ॥ हरि संतन पावे ॥१॥ रहाउ ॥

आपु गवाइआ सेव कमाइआ गुन रसि रसि गावे ॥१॥

एकहि आसा दरस पिआसा आन न भावे ॥२॥

दइआ तुहारी किआ जंत विचारी नानक बलि बलि जावे ॥३॥७॥१४७॥

(राग आसा -- SGGS 407) आसा महला ५ ॥
एकु सिमरि मन माही ॥१॥ रहाउ ॥

नामु धिआवहु रिदै बसावहु तिसु बिनु को नाही ॥१॥

प्रभ सरनी आईऐ सरब फल पाईऐ सगले दुख जाही ॥२॥

जीअन को दाता पुरखु बिधाता नानक घटि घटि आही ॥३॥८॥१४८॥

(राग आसा -- SGGS 407) आसा महला ५ ॥
हरि बिसरत सो मूआ ॥१॥ रहाउ ॥

नामु धिआवै सरब फल पावै सो जनु सुखीआ हूआ ॥१॥

राजु कहावै हउ करम कमावै बाधिओ नलिनी भ्रमि सूआ ॥२॥

कहु नानक जिसु सतिगुरु भेटिआ सो जनु निहचलु थीआ ॥३॥९॥१४९॥

(राग आसा -- SGGS 407) आसा महला ५ घरु १४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
ओहु नेहु नवेला ॥ अपुने प्रीतम सिउ लागि रहै ॥१॥ रहाउ ॥

जो प्रभ भावै जनमि न आवै ॥ हरि प्रेम भगति हरि प्रीति रचै ॥१॥

प्रभ संगि मिलीजै इहु मनु दीजै ॥ नानक नामु मिलै अपनी दइआ करहु ॥२॥१॥१५०॥

(राग आसा -- SGGS 408) आसा महला ५ ॥
मिलु राम पिआरे तुम बिनु धीरजु को न करै ॥१॥ रहाउ ॥

सिम्रिति सासत्र बहु करम कमाए प्रभ तुमरे दरस बिनु सुखु नाही ॥१॥

वरत नेम संजम करि थाके नानक साध सरनि प्रभ संगि वसै ॥२॥२॥१५१॥

(राग आसा -- SGGS 408) आसा महला ५ घरु १५ पड़ताल
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
बिकार माइआ मादि सोइओ सूझ बूझ न आवै ॥ पकरि केस जमि उठारिओ तद ही घरि जावै ॥१॥

लोभ बिखिआ बिखै लागे हिरि वित चित दुखाही ॥ खिन भंगुना कै मानि माते असुर जाणहि नाही ॥१॥ रहाउ ॥

बेद सासत्र जन पुकारहि सुनै नाही डोरा ॥ निपटि बाजी हारि मूका पछुताइओ मनि भोरा ॥२॥

डानु सगल गैर वजहि भरिआ दीवान लेखै न परिआ ॥ जेंह कारजि रहै ओल्हा सोइ कामु न करिआ ॥३॥

ऐसो जगु मोहि गुरि दिखाइओ तउ एक कीरति गाइआ ॥ मानु तानु तजि सिआनप सरणि नानकु आइआ ॥४॥१॥१५२॥

(राग आसा -- SGGS 408) आसा महला ५ ॥
बापारि गोविंद नाए ॥ साध संत मनाए प्रिअ पाए गुन गाए पंच नाद तूर बजाए ॥१॥ रहाउ ॥

किरपा पाए सहजाए दरसाए अब रातिआ गोविंद सिउ ॥ संत सेवि प्रीति नाथ रंगु लालन लाए ॥१॥

गुर गिआनु मनि द्रिड़ाए रहसाए नही आए सहजाए मनि निधानु पाए ॥ सभ तजी मनै की काम करा ॥ चिरु चिरु चिरु चिरु भइआ मनि बहुतु पिआस लागी ॥ हरि दरसनो दिखावहु मोहि तुम बतावहु ॥ नानक दीन सरणि आए गलि लाए ॥२॥२॥१५३॥

(राग आसा -- SGGS 408) आसा महला ५ ॥
कोऊ बिखम गार तोरै ॥ आस पिआस धोह मोह भरम ही ते होरै ॥१॥ रहाउ ॥

काम क्रोध लोभ मान इह बिआधि छोरै ॥१॥

संतसंगि नाम रंगि गुन गोविंद गावउ ॥ अनदिनो प्रभ धिआवउ ॥ भ्रम भीति जीति मिटावउ ॥ निधि नामु नानक मोरै ॥२॥३॥१५४॥

(राग आसा -- SGGS 408) आसा महला ५ ॥
कामु क्रोधु लोभु तिआगु ॥ मनि सिमरि गोबिंद नाम ॥ हरि भजन सफल काम ॥१॥ रहाउ ॥

तजि मान मोह विकार मिथिआ जपि राम राम राम ॥ मन संतना कै चरनि लागु ॥१॥

प्रभ गोपाल दीन दइआल पतित पावन पारब्रहम हरि चरण सिमरि जागु ॥ करि भगति नानक पूरन भागु ॥२॥४॥१५५॥

(राग आसा -- SGGS 409) आसा महला ५ ॥
हरख सोग बैराग अनंदी खेलु री दिखाइओ ॥१॥ रहाउ ॥

खिनहूं भै निरभै खिनहूं खिनहूं उठि धाइओ ॥ खिनहूं रस भोगन खिनहूं खिनहू तजि जाइओ ॥१॥

खिनहूं जोग ताप बहु पूजा खिनहूं भरमाइओ ॥ खिनहूं किरपा साधू संग नानक हरि रंगु लाइओ ॥२॥५॥१५६॥

(राग आसा आसावरी -- SGGS 409) रागु आसा महला ५ घरु १७ आसावरी
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
गोबिंद गोबिंद करि हां ॥ हरि हरि मनि पिआरि हां ॥ गुरि कहिआ सु चिति धरि हां ॥ अन सिउ तोरि फेरि हां ॥ ऐसे लालनु पाइओ री सखी ॥१॥ रहाउ ॥

पंकज मोह सरि हां ॥ पगु नही चलै हरि हां ॥ गहडिओ मूड़ नरि हां ॥ अनिन उपाव करि हां ॥ तउ निकसै सरनि पै री सखी ॥१॥

थिर थिर चित थिर हां ॥ बनु ग्रिहु समसरि हां ॥ अंतरि एक पिर हां ॥ बाहरि अनेक धरि हां ॥ राजन जोगु करि हां ॥ कहु नानक लोग अलोगी री सखी ॥२॥१॥१५७॥

(राग आसावरी -- SGGS 409) आसावरी महला ५ ॥
मनसा एक मानि हां ॥ गुर सिउ नेत धिआनि हां ॥ द्रिड़ु संत मंत गिआनि हां ॥ सेवा गुर चरानि हां ॥ तउ मिलीऐ गुर क्रिपानि मेरे मना ॥१॥ रहाउ ॥

टूटे अन भरानि हां ॥ रविओ सरब थानि हां ॥ लहिओ जम भइआनि हां ॥ पाइओ पेड थानि हां ॥ तउ चूकी सगल कानि ॥१॥

लहनो जिसु मथानि हां ॥ भै पावक पारि परानि हां ॥ निज घरि तिसहि थानि हां ॥ हरि रस रसहि मानि हां ॥ लाथी तिस भुखानि हां ॥ नानक सहजि समाइओ रे मना ॥२॥२॥१५८॥

(राग आसावरी -- SGGS 409) आसावरी महला ५ ॥
हरि हरि हरि गुनी हां ॥ जपीऐ सहज धुनी हां ॥ साधू रसन भनी हां ॥ छूटन बिधि सुनी हां ॥ पाईऐ वड पुनी मेरे मना ॥१॥ रहाउ ॥

खोजहि जन मुनी हां ॥ स्रब का प्रभ धनी हां ॥ दुलभ कलि दुनी हां ॥ दूख बिनासनी हां ॥ प्रभ पूरन आसनी मेरे मना ॥१॥

मन सो सेवीऐ हां ॥ अलख अभेवीऐ हां ॥ तां सिउ प्रीति करि हां ॥ बिनसि न जाइ मरि हां ॥ गुर ते जानिआ हां ॥ नानक मनु मानिआ मेरे मना ॥२॥३॥१५९॥

(राग आसावरी -- SGGS 410) आसावरी महला ५ ॥
एका ओट गहु हां ॥ गुर का सबदु कहु हां ॥ आगिआ सति सहु हां ॥ मनहि निधानु लहु हां ॥ सुखहि समाईऐ मेरे मना ॥१॥ रहाउ ॥

जीवत जो मरै हां ॥ दुतरु सो तरै हां ॥ सभ की रेनु होइ हां ॥ निरभउ कहउ सोइ हां ॥ मिटे अंदेसिआ हां ॥ संत उपदेसिआ मेरे मना ॥१॥

जिसु जन नाम सुखु हां ॥ तिसु निकटि न कदे दुखु हां ॥ जो हरि हरि जसु सुने हां ॥ सभु को तिसु मंने हां ॥ सफलु सु आइआ हां ॥ नानक प्रभ भाइआ मेरे मना ॥२॥४॥१६०॥

(राग आसावरी -- SGGS 410) आसावरी महला ५ ॥
मिलि हरि जसु गाईऐ हां ॥ परम पदु पाईऐ हां ॥ उआ रस जो बिधे हां ॥ ता कउ सगल सिधे हां ॥ अनदिनु जागिआ हां ॥ नानक बडभागिआ मेरे मना ॥१॥ रहाउ ॥

संत पग धोईऐ हां ॥ दुरमति खोईऐ हां ॥ दासह रेनु होइ हां ॥ बिआपै दुखु न कोइ हां ॥ भगतां सरनि परु हां ॥ जनमि न कदे मरु हां ॥ असथिरु से भए हां ॥ हरि हरि जिन्ह जपि लए मेरे मना ॥१॥

साजनु मीतु तूं हां ॥ नामु द्रिड़ाइ मूं हां ॥ तिसु बिनु नाहि कोइ हां ॥ मनहि अराधि सोइ हां ॥ निमख न वीसरै हां ॥ तिसु बिनु किउ सरै हां ॥ गुर कउ कुरबानु जाउ हां ॥ नानकु जपे नाउ मेरे मना ॥२॥५॥१६१॥

(राग आसावरी -- SGGS 410) आसावरी महला ५ ॥
कारन करन तूं हां ॥ अवरु ना सुझै मूं हां ॥ करहि सु होईऐ हां ॥ सहजि सुखि सोईऐ हां ॥ धीरज मनि भए हां ॥ प्रभ कै दरि पए मेरे मना ॥१॥ रहाउ ॥

साधू संगमे हां ॥ पूरन संजमे हां ॥ जब ते छुटे आप हां ॥ तब ते मिटे ताप हां ॥ किरपा धारीआ हां ॥ पति रखु बनवारीआ मेरे मना ॥१॥

इहु सुखु जानीऐ हां ॥ हरि करे सु मानीऐ हां ॥ मंदा नाहि कोइ हां ॥ संत की रेन होइ हां ॥ आपे जिसु रखै हां ॥ हरि अम्रितु सो चखै मेरे मना ॥२॥

जिस का नाहि कोइ हां ॥ तिस का प्रभू सोइ हां ॥ अंतरगति बुझै हां ॥ सभु किछु तिसु सुझै हां ॥ पतित उधारि लेहु हां ॥ नानक अरदासि एहु मेरे मना ॥३॥६॥१६२॥

(राग आसावरी -- SGGS 410) आसावरी महला ५ इकतुका ॥
ओइ परदेसीआ हां ॥ सुनत संदेसिआ हां ॥१॥ रहाउ ॥

जा सिउ रचि रहे हां ॥ सभ कउ तजि गए हां ॥ सुपना जिउ भए हां ॥ हरि नामु जिन्हि लए ॥१॥

हरि तजि अन लगे हां ॥ जनमहि मरि भगे हां ॥ हरि हरि जनि लहे हां ॥ जीवत से रहे हां ॥ जिसहि क्रिपालु होइ हां ॥ नानक भगतु सोइ ॥२॥७॥१६३॥२३२॥

(राग आसा -- SGGS 430) आसा महला ५ असटपदीआ घरु २
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
पंच मनाए पंच रुसाए ॥ पंच वसाए पंच गवाए ॥१॥

इन्ह बिधि नगरु वुठा मेरे भाई ॥ दुरतु गइआ गुरि गिआनु द्रिड़ाई ॥१॥ रहाउ ॥

साच धरम की करि दीनी वारि ॥ फरहे मुहकम गुर गिआनु बीचारि ॥२॥

नामु खेती बीजहु भाई मीत ॥ सउदा करहु गुरु सेवहु नीत ॥३॥

सांति सहज सुख के सभि हाट ॥ साह वापारी एकै थाट ॥४॥

जेजीआ डंनु को लए न जगाति ॥ सतिगुरि करि दीनी धुर की छाप ॥५॥

वखरु नामु लदि खेप चलावहु ॥ लै लाहा गुरमुखि घरि आवहु ॥६॥

सतिगुरु साहु सिख वणजारे ॥ पूंजी नामु लेखा साचु सम्हारे ॥७॥

सो वसै इतु घरि जिसु गुरु पूरा सेव ॥ अबिचल नगरी नानक देव ॥८॥१॥

(राग आसावरी -- SGGS 431) आसावरी महला ५ घरु ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मेरे मन हरि सिउ लागी प्रीति ॥ साधसंगि हरि हरि जपत निरमल साची रीति ॥१॥ रहाउ ॥

दरसन की पिआस घणी चितवत अनिक प्रकार ॥ करहु अनुग्रहु पारब्रहम हरि किरपा धारि मुरारि ॥१॥

मनु परदेसी आइआ मिलिओ साध कै संगि ॥ जिसु वखर कउ चाहता सो पाइओ नामहि रंगि ॥२॥

जेते माइआ रंग रस बिनसि जाहि खिन माहि ॥ भगत रते तेरे नाम सिउ सुखु भुंचहि सभ ठाइ ॥३॥

सभु जगु चलतउ पेखीऐ निहचलु हरि को नाउ ॥ करि मित्राई साध सिउ निहचलु पावहि ठाउ ॥४॥

मीत साजन सुत बंधपा कोऊ होत न साथ ॥ एकु निवाहू राम नाम दीना का प्रभु नाथ ॥५॥

चरन कमल बोहिथ भए लगि सागरु तरिओ तेह ॥ भेटिओ पूरा सतिगुरू साचा प्रभ सिउ नेह ॥६॥

साध तेरे की जाचना विसरु न सासि गिरासि ॥ जो तुधु भावै सो भला तेरै भाणै कारज रासि ॥७॥

सुख सागर प्रीतम मिले उपजे महा अनंद ॥ कहु नानक सभ दुख मिटे प्रभ भेटे परमानंद ॥८॥१॥२॥

(राग आसा -- SGGS 431) आसा महला ५ बिरहड़े घरु ४ छंता की जति
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
पारब्रहमु प्रभु सिमरीऐ पिआरे दरसन कउ बलि जाउ ॥१॥

जिसु सिमरत दुख बीसरहि पिआरे सो किउ तजणा जाइ ॥२॥

इहु तनु वेची संत पहि पिआरे प्रीतमु देइ मिलाइ ॥३॥

सुख सीगार बिखिआ के फीके तजि छोडे मेरी माइ ॥४॥

कामु क्रोधु लोभु तजि गए पिआरे सतिगुर चरनी पाइ ॥५॥

जो जन राते राम सिउ पिआरे अनत न काहू जाइ ॥६॥

हरि रसु जिन्ही चाखिआ पिआरे त्रिपति रहे आघाइ ॥७॥

अंचलु गहिआ साध का नानक भै सागरु पारि पराइ ॥८॥१॥३॥

(राग आसा -- SGGS 431) जनम मरण दुखु कटीऐ पिआरे जब भेटै हरि राइ ॥१॥

सुंदरु सुघरु सुजाणु प्रभु मेरा जीवनु दरसु दिखाइ ॥२॥

जो जीअ तुझ ते बीछुरे पिआरे जनमि मरहि बिखु खाइ ॥३॥

जिसु तूं मेलहि सो मिलै पिआरे तिस कै लागउ पाइ ॥४॥

जो सुखु दरसनु पेखते पिआरे मुख ते कहणु न जाइ ॥५॥

साची प्रीति न तुटई पिआरे जुगु जुगु रही समाइ ॥६॥

जो तुधु भावै सो भला पिआरे तेरी अमरु रजाइ ॥७॥

नानक रंगि रते नाराइणै पिआरे माते सहजि सुभाइ ॥८॥२॥४॥

(राग आसा -- SGGS 432) सभ बिधि तुम ही जानते पिआरे किसु पहि कहउ सुनाइ ॥१॥

तूं दाता जीआ सभना का तेरा दिता पहिरहि खाइ ॥२॥

सुखु दुखु तेरी आगिआ पिआरे दूजी नाही जाइ ॥३॥

जो तूं करावहि सो करी पिआरे अवरु किछु करणु न जाइ ॥४॥

दिनु रैणि सभ सुहावणे पिआरे जितु जपीऐ हरि नाउ ॥५॥

साई कार कमावणी पिआरे धुरि मसतकि लेखु लिखाइ ॥६॥

एको आपि वरतदा पिआरे घटि घटि रहिआ समाइ ॥७॥

संसार कूप ते उधरि लै पिआरे नानक हरि सरणाइ ॥८॥३॥२२॥१५॥२॥४२॥

(राग आसा -- SGGS 452) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु आसा महला ५ छंत घरु १ ॥
अनदो अनदु घणा मै सो प्रभु डीठा राम ॥ चाखिअड़ा चाखिअड़ा मै हरि रसु मीठा राम ॥ हरि रसु मीठा मन महि वूठा सतिगुरु तूठा सहजु भइआ ॥ ग्रिहु वसि आइआ मंगलु गाइआ पंच दुसट ओइ भागि गइआ ॥ सीतल आघाणे अम्रित बाणे साजन संत बसीठा ॥ कहु नानक हरि सिउ मनु मानिआ सो प्रभु नैणी डीठा ॥१॥

सोहिअड़े सोहिअड़े मेरे बंक दुआरे राम ॥ पाहुनड़े पाहुनड़े मेरे संत पिआरे राम ॥ संत पिआरे कारज सारे नमसकार करि लगे सेवा ॥ आपे जाञी आपे माञी आपि सुआमी आपि देवा ॥ अपणा कारजु आपि सवारे आपे धारन धारे ॥ कहु नानक सहु घर महि बैठा सोहे बंक दुआरे ॥२॥

नव निधे नउ निधे मेरे घर महि आई राम ॥ सभु किछु मै सभु किछु पाइआ नामु धिआई राम ॥ नामु धिआई सदा सखाई सहज सुभाई गोविंदा ॥ गणत मिटाई चूकी धाई कदे न विआपै मन चिंदा ॥ गोविंद गाजे अनहद वाजे अचरज सोभ बणाई ॥ कहु नानक पिरु मेरै संगे ता मै नव निधि पाई ॥३॥

सरसिअड़े सरसिअड़े मेरे भाई सभ मीता राम ॥ बिखमो बिखमु अखाड़ा मै गुर मिलि जीता राम ॥ गुर मिलि जीता हरि हरि कीता तूटी भीता भरम गड़ा ॥ पाइआ खजाना बहुतु निधाना साणथ मेरी आपि खड़ा ॥ सोई सुगिआना सो परधाना जो प्रभि अपना कीता ॥ कहु नानक जां वलि सुआमी ता सरसे भाई मीता ॥४॥१॥

(राग आसा -- SGGS 453) आसा महला ५ ॥
अकथा हरि अकथ कथा किछु जाइ न जाणी राम ॥ सुरि नर सुरि नर मुनि जन सहजि वखाणी राम ॥ सहजे वखाणी अमिउ बाणी चरण कमल रंगु लाइआ ॥ जपि एकु अलखु प्रभु निरंजनु मन चिंदिआ फलु पाइआ ॥ तजि मानु मोहु विकारु दूजा जोती जोति समाणी ॥ बिनवंति नानक गुर प्रसादी सदा हरि रंगु माणी ॥१॥

हरि संता हरि संत सजन मेरे मीत सहाई राम ॥ वडभागी वडभागी सतसंगति पाई राम ॥ वडभागी पाए नामु धिआए लाथे दूख संतापै ॥ गुर चरणी लागे भ्रम भउ भागे आपु मिटाइआ आपै ॥ करि किरपा मेले प्रभि अपुनै विछुड़ि कतहि न जाई ॥ बिनवंति नानक दासु तेरा सदा हरि सरणाई ॥२॥

हरि दरे हरि दरि सोहनि तेरे भगत पिआरे राम ॥ वारी तिन वारी जावा सद बलिहारे राम ॥ सद बलिहारे करि नमसकारे जिन भेटत प्रभु जाता ॥ घटि घटि रवि रहिआ सभ थाई पूरन पुरखु बिधाता ॥ गुरु पूरा पाइआ नामु धिआइआ जूऐ जनमु न हारे ॥ बिनवंति नानक सरणि तेरी राखु किरपा धारे ॥३॥

बेअंता बेअंत गुण तेरे केतक गावा राम ॥ तेरे चरणा तेरे चरण धूड़ि वडभागी पावा राम ॥ हरि धूड़ी न्हाईऐ मैलु गवाईऐ जनम मरण दुख लाथे ॥ अंतरि बाहरि सदा हदूरे परमेसरु प्रभु साथे ॥ मिटे दूख कलिआण कीरतन बहुड़ि जोनि न पावा ॥ बिनवंति नानक गुर सरणि तरीऐ आपणे प्रभ भावा ॥४॥२॥

(राग आसा -- SGGS 453) आसा छंत महला ५ घरु ४
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि चरन कमल मनु बेधिआ किछु आन न मीठा राम राजे ॥ मिलि संतसंगति आराधिआ हरि घटि घटे डीठा राम राजे ॥ हरि घटि घटे डीठा अम्रितो वूठा जनम मरन दुख नाठे ॥ गुण निधि गाइआ सभ दूख मिटाइआ हउमै बिनसी गाठे ॥ प्रिउ सहज सुभाई छोडि न जाई मनि लागा रंगु मजीठा ॥ हरि नानक बेधे चरन कमल किछु आन न मीठा ॥१॥

जिउ राती जलि माछुली तिउ राम रसि माते राम राजे ॥ गुर पूरै उपदेसिआ जीवन गति भाते राम राजे ॥ जीवन गति सुआमी अंतरजामी आपि लीए लड़ि लाए ॥ हरि रतन पदारथो परगटो पूरनो छोडि न कतहू जाए ॥ प्रभु सुघरु सरूपु सुजानु सुआमी ता की मिटै न दाते ॥ जल संगि राती माछुली नानक हरि माते ॥२॥

चात्रिकु जाचै बूंद जिउ हरि प्रान अधारा राम राजे ॥ मालु खजीना सुत भ्रात मीत सभहूं ते पिआरा राम राजे ॥ सभहूं ते पिआरा पुरखु निरारा ता की गति नही जाणीऐ ॥ हरि सासि गिरासि न बिसरै कबहूं गुर सबदी रंगु माणीऐ ॥ प्रभु पुरखु जगजीवनो संत रसु पीवनो जपि भरम मोह दुख डारा ॥ चात्रिकु जाचै बूंद जिउ नानक हरि पिआरा ॥३॥

मिले नराइण आपणे मानोरथो पूरा राम राजे ॥ ढाठी भीति भरम की भेटत गुरु सूरा राम राजे ॥ पूरन गुर पाए पुरबि लिखाए सभ निधि दीन दइआला ॥ आदि मधि अंति प्रभु सोई सुंदर गुर गोपाला ॥ सूख सहज आनंद घनेरे पतित पावन साधू धूरा ॥ हरि मिले नराइण नानका मानोरथो पूरा ॥४॥१॥३॥

(राग आसा -- SGGS 454) आसा महला ५ छंत घरु ६
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
सलोकु ॥ जा कउ भए क्रिपाल प्रभ हरि हरि सेई जपात ॥ नानक प्रीति लगी तिन्ह राम सिउ भेटत साध संगात ॥१॥

छंतु ॥ जल दुध निआई रीति अब दुध आच नही मन ऐसी प्रीति हरे ॥ अब उरझिओ अलि कमलेह बासन माहि मगन इकु खिनु भी नाहि टरै ॥ खिनु नाहि टरीऐ प्रीति हरीऐ सीगार हभि रस अरपीऐ ॥ जह दूखु सुणीऐ जम पंथु भणीऐ तह साधसंगि न डरपीऐ ॥ करि कीरति गोविंद गुणीऐ सगल प्राछत दुख हरे ॥ कहु नानक छंत गोविंद हरि के मन हरि सिउ नेहु करेहु ऐसी मन प्रीति हरे ॥१॥

जैसी मछुली नीर इकु खिनु भी ना धीरे मन ऐसा नेहु करेहु ॥ जैसी चात्रिक पिआस खिनु खिनु बूंद चवै बरसु सुहावे मेहु ॥ हरि प्रीति करीजै इहु मनु दीजै अति लाईऐ चितु मुरारी ॥ मानु न कीजै सरणि परीजै दरसन कउ बलिहारी ॥ गुर सुप्रसंने मिलु नाह विछुंने धन देदी साचु सनेहा ॥ कहु नानक छंत अनंत ठाकुर के हरि सिउ कीजै नेहा मन ऐसा नेहु करेहु ॥२॥

चकवी सूर सनेहु चितवै आस घणी कदि दिनीअरु देखीऐ ॥ कोकिल अंब परीति चवै सुहावीआ मन हरि रंगु कीजीऐ ॥ हरि प्रीति करीजै मानु न कीजै इक राती के हभि पाहुणिआ ॥ अब किआ रंगु लाइओ मोहु रचाइओ नागे आवण जावणिआ ॥ थिरु साधू सरणी पड़ीऐ चरणी अब टूटसि मोहु जु कितीऐ ॥ कहु नानक छंत दइआल पुरख के मन हरि लाइ परीति कब दिनीअरु देखीऐ ॥३॥

निसि कुरंक जैसे नाद सुणि स्रवणी हीउ डिवै मन ऐसी प्रीति कीजै ॥ जैसी तरुणि भतार उरझी पिरहि सिवै इहु मनु लाल दीजै ॥ मनु लालहि दीजै भोग करीजै हभि खुसीआ रंग माणे ॥ पिरु अपना पाइआ रंगु लालु बणाइआ अति मिलिओ मित्र चिराणे ॥ गुरु थीआ साखी ता डिठमु आखी पिर जेहा अवरु न दीसै ॥ कहु नानक छंत दइआल मोहन के मन हरि चरण गहीजै ऐसी मन प्रीति कीजै ॥४॥१॥४॥


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