गुरू अंगद देव जी - सलोक बाणी शब्द, Guru Angad Dev ji (Mahalla 2) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग सिरीरागु -- SGGS 83) मः २ ॥
जिसु पिआरे सिउ नेहु तिसु आगै मरि चलीऐ ॥ ध्रिगु जीवणु संसारि ता कै पाछै जीवणा ॥२॥

(राग सिरीरागु -- SGGS 89) सलोक मः २ ॥
जो सिरु सांई ना निवै सो सिरु दीजै डारि ॥ नानक जिसु पिंजर महि बिरहा नही सो पिंजरु लै जारि ॥१॥

(राग माझ -- SGGS 138) मः २ ॥
देंदे थावहु दिता चंगा मनमुखि ऐसा जाणीऐ ॥ सुरति मति चतुराई ता की किआ करि आखि वखाणीऐ ॥ अंतरि बहि कै करम कमावै सो चहु कुंडी जाणीऐ ॥ जो धरमु कमावै तिसु धरम नाउ होवै पापि कमाणै पापी जाणीऐ ॥ तूं आपे खेल करहि सभि करते किआ दूजा आखि वखाणीऐ ॥ जिचरु तेरी जोति तिचरु जोती विचि तूं बोलहि विणु जोती कोई किछु करिहु दिखा सिआणीऐ ॥ नानक गुरमुखि नदरी आइआ हरि इको सुघड़ु सुजाणीऐ ॥२॥

(राग माझ -- SGGS 139) सलोकु मः २ ॥
अखी बाझहु वेखणा विणु कंना सुनणा ॥ पैरा बाझहु चलणा विणु हथा करणा ॥ जीभै बाझहु बोलणा इउ जीवत मरणा ॥ नानक हुकमु पछाणि कै तउ खसमै मिलणा ॥१॥

(राग माझ -- SGGS 139) मः २ ॥
दिसै सुणीऐ जाणीऐ साउ न पाइआ जाइ ॥ रुहला टुंडा अंधुला किउ गलि लगै धाइ ॥ भै के चरण कर भाव के लोइण सुरति करेइ ॥ नानकु कहै सिआणीए इव कंत मिलावा होइ ॥२॥

(राग माझ -- SGGS 146) मः २ ॥
सेई पूरे साह जिनी पूरा पाइआ ॥ अठी वेपरवाह रहनि इकतै रंगि ॥ दरसनि रूपि अथाह विरले पाईअहि ॥ करमि पूरै पूरा गुरू पूरा जा का बोलु ॥ नानक पूरा जे करे घटै नाही तोलु ॥२॥

(राग माझ -- SGGS 146) सलोक मः २ ॥
अठी पहरी अठ खंड नावा खंडु सरीरु ॥ तिसु विचि नउ निधि नामु एकु भालहि गुणी गहीरु ॥ करमवंती सालाहिआ नानक करि गुरु पीरु ॥ चउथै पहरि सबाह कै सुरतिआ उपजै चाउ ॥ तिना दरीआवा सिउ दोसती मनि मुखि सचा नाउ ॥ ओथै अम्रितु वंडीऐ करमी होइ पसाउ ॥ कंचन काइआ कसीऐ वंनी चड़ै चड़ाउ ॥ जे होवै नदरि सराफ की बहुड़ि न पाई ताउ ॥ सती पहरी सतु भला बहीऐ पड़िआ पासि ॥ ओथै पापु पुंनु बीचारीऐ कूड़ै घटै रासि ॥ ओथै खोटे सटीअहि खरे कीचहि साबासि ॥ बोलणु फादलु नानका दुखु सुखु खसमै पासि ॥१॥

(राग माझ -- SGGS 146) मः २ ॥
पउणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु ॥ दिनसु राति दुइ दाई दाइआ खेलै सगल जगतु ॥ चंगिआईआ बुरिआईआ वाचे धरमु हदूरि ॥ करमी आपो आपणी के नेड़ै के दूरि ॥ जिनी नामु धिआइआ गए मसकति घालि ॥ नानक ते मुख उजले होर केती छुटी नालि ॥२॥

(राग माझ -- SGGS 147) मः २ ॥
आखणु आखि न रजिआ सुनणि न रजे कंन ॥ अखी देखि न रजीआ गुण गाहक इक वंन ॥ भुखिआ भुख न उतरै गली भुख न जाइ ॥ नानक भुखा ता रजै जा गुण कहि गुणी समाइ ॥२॥

(राग माझ -- SGGS 148) सलोकु महला २ ॥
मंत्री होइ अठूहिआ नागी लगै जाइ ॥ आपण हथी आपणै दे कूचा आपे लाइ ॥ हुकमु पइआ धुरि खसम का अती हू धका खाइ ॥ गुरमुख सिउ मनमुखु अड़ै डुबै हकि निआइ ॥ दुहा सिरिआ आपे खसमु वेखै करि विउपाइ ॥ नानक एवै जाणीऐ सभ किछु तिसहि रजाइ ॥१॥

(राग माझ -- SGGS 148) महला २ ॥
नानक परखे आप कउ ता पारखु जाणु ॥ रोगु दारू दोवै बुझै ता वैदु सुजाणु ॥ वाट न करई मामला जाणै मिहमाणु ॥ मूलु जाणि गला करे हाणि लाए हाणु ॥ लबि न चलई सचि रहै सो विसटु परवाणु ॥ सरु संधे आगास कउ किउ पहुचै बाणु ॥ अगै ओहु अगमु है वाहेदड़ु जाणु ॥२॥

(राग माझ -- SGGS 148) महला २ ॥
निहफलं तसि जनमसि जावतु ब्रहम न बिंदते ॥ सागरं संसारसि गुर परसादी तरहि के ॥ करण कारण समरथु है कहु नानक बीचारि ॥ कारणु करते वसि है जिनि कल रखी धारि ॥२॥

(राग माझ -- SGGS 150) मः २ ॥
अगी पाला कि करे सूरज केही राति ॥ चंद अनेरा कि करे पउण पाणी किआ जाति ॥ धरती चीजी कि करे जिसु विचि सभु किछु होइ ॥ नानक ता पति जाणीऐ जा पति रखै सोइ ॥२॥

(राग माझ -- SGGS 150) सलोकु मः २ ॥
दीखिआ आखि बुझाइआ सिफती सचि समेउ ॥ तिन कउ किआ उपदेसीऐ जिन गुरु नानक देउ ॥१॥

(राग आसा -- SGGS 463) महला २ ॥
जे सउ चंदा उगवहि सूरज चड़हि हजार ॥ एते चानण होदिआं गुर बिनु घोर अंधार ॥२॥

(राग आसा -- SGGS 463) महला २ ॥
इहु जगु सचै की है कोठड़ी सचे का विचि वासु ॥ इकन्हा हुकमि समाइ लए इकन्हा हुकमे करे विणासु ॥ इकन्हा भाणै कढि लए इकन्हा माइआ विचि निवासु ॥ एव भि आखि न जापई जि किसै आणे रासि ॥ नानक गुरमुखि जाणीऐ जा कउ आपि करे परगासु ॥३॥

(राग आसा -- SGGS 466) महला २ ॥
हउमै एहा जाति है हउमै करम कमाहि ॥ हउमै एई बंधना फिरि फिरि जोनी पाहि ॥ हउमै किथहु ऊपजै कितु संजमि इह जाइ ॥ हउमै एहो हुकमु है पइऐ किरति फिराहि ॥ हउमै दीरघ रोगु है दारू भी इसु माहि ॥ किरपा करे जे आपणी ता गुर का सबदु कमाहि ॥ नानकु कहै सुणहु जनहु इतु संजमि दुख जाहि ॥२॥

(राग आसा -- SGGS 469) मः २ ॥
जोग सबदं गिआन सबदं बेद सबदं ब्राहमणह ॥ खत्री सबदं सूर सबदं सूद्र सबदं परा क्रितह ॥ सरब सबदं एक सबदं जे को जाणै भेउ ॥ नानकु ता का दासु है सोई निरंजन देउ ॥३॥

(राग आसा -- SGGS 469) मः २ ॥
एक क्रिसनं सरब देवा देव देवा त आतमा ॥ आतमा बासुदेवस्यि जे को जाणै भेउ ॥ नानकु ता का दासु है सोई निरंजन देउ ॥४॥

(राग आसा -- SGGS 474) सलोकु महला २ ॥
एह किनेही आसकी दूजै लगै जाइ ॥ नानक आसकु कांढीऐ सद ही रहै समाइ ॥ चंगै चंगा करि मंने मंदै मंदा होइ ॥ आसकु एहु न आखीऐ जि लेखै वरतै सोइ ॥१॥

(राग आसा -- SGGS 474) महला २ ॥
सलामु जबाबु दोवै करे मुंढहु घुथा जाइ ॥ नानक दोवै कूड़ीआ थाइ न काई पाइ ॥२॥

(राग आसा -- SGGS 474) सलोकु महला २ ॥
चाकरु लगै चाकरी नाले गारबु वादु ॥ गला करे घणेरीआ खसम न पाए सादु ॥ आपु गवाइ सेवा करे ता किछु पाए मानु ॥ नानक जिस नो लगा तिसु मिलै लगा सो परवानु ॥१॥

(राग आसा -- SGGS 474) महला २ ॥
जो जीइ होइ सु उगवै मुह का कहिआ वाउ ॥ बीजे बिखु मंगै अम्रितु वेखहु एहु निआउ ॥२॥

(राग आसा -- SGGS 474) महला २ ॥
नालि इआणे दोसती कदे न आवै रासि ॥ जेहा जाणै तेहो वरतै वेखहु को निरजासि ॥ वसतू अंदरि वसतु समावै दूजी होवै पासि ॥ साहिब सेती हुकमु न चलै कही बणै अरदासि ॥ कूड़ि कमाणै कूड़ो होवै नानक सिफति विगासि ॥३॥

(राग आसा -- SGGS 474) महला २ ॥
नालि इआणे दोसती वडारू सिउ नेहु ॥ पाणी अंदरि लीक जिउ तिस दा थाउ न थेहु ॥४॥

(राग आसा -- SGGS 474) महला २ ॥
होइ इआणा करे कमु आणि न सकै रासि ॥ जे इक अध चंगी करे दूजी भी वेरासि ॥५॥

(राग आसा -- SGGS 474) सलोकु महला २ ॥
एह किनेही दाति आपस ते जो पाईऐ ॥ नानक सा करमाति साहिब तुठै जो मिलै ॥१॥

(राग आसा -- SGGS 475) महला २ ॥
एह किनेही चाकरी जितु भउ खसम न जाइ ॥ नानक सेवकु काढीऐ जि सेती खसम समाइ ॥२॥

(राग आसा -- SGGS 475) महला २ ॥
आपे साजे करे आपि जाई भि रखै आपि ॥ तिसु विचि जंत उपाइ कै देखै थापि उथापि ॥ किस नो कहीऐ नानका सभु किछु आपे आपि ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 653) मः २ ॥
नकि नथ खसम हथ किरतु धके दे ॥ जहा दाणे तहां खाणे नानका सचु हे ॥२॥

(राग सूही -- SGGS 787) सलोकु मः २ ॥
जिनी चलणु जाणिआ से किउ करहि विथार ॥ चलण सार न जाणनी काज सवारणहार ॥१॥

(राग सूही -- SGGS 787) मः २ ॥
राति कारणि धनु संचीऐ भलके चलणु होइ ॥ नानक नालि न चलई फिरि पछुतावा होइ ॥२॥

(राग सूही -- SGGS 787) मः २ ॥
बधा चटी जो भरे ना गुणु ना उपकारु ॥ सेती खुसी सवारीऐ नानक कारजु सारु ॥३॥

(राग सूही -- SGGS 787) मः २ ॥
मनहठि तरफ न जिपई जे बहुता घाले ॥ तरफ जिणै सत भाउ दे जन नानक सबदु वीचारे ॥४॥

(राग सूही -- SGGS 788) सलोक महला २ ॥
जिना भउ तिन्ह नाहि भउ मुचु भउ निभविआह ॥ नानक एहु पटंतरा तितु दीबाणि गइआह ॥१॥

(राग सूही -- SGGS 788) मः २ ॥
तुरदे कउ तुरदा मिलै उडते कउ उडता ॥ जीवते कउ जीवता मिलै मूए कउ मूआ ॥ नानक सो सालाहीऐ जिनि कारणु कीआ ॥२॥

(राग सूही -- SGGS 791) महला २ ॥
नानक तिना बसंतु है जिन्ह घरि वसिआ कंतु ॥ जिन के कंत दिसापुरी से अहिनिसि फिरहि जलंत ॥२॥

(राग सूही -- SGGS 791) मः २ ॥
पहिल बसंतै आगमनि तिस का करहु बीचारु ॥ नानक सो सालाहीऐ जि सभसै दे आधारु ॥२॥

(राग सूही -- SGGS 791) मः २ ॥
मिलिऐ मिलिआ ना मिलै मिलै मिलिआ जे होइ ॥ अंतर आतमै जो मिलै मिलिआ कहीऐ सोइ ॥३॥

(राग सूही -- SGGS 791) सलोक मः २ ॥
किस ही कोई कोइ मंञु निमाणी इकु तू ॥ किउ न मरीजै रोइ जा लगु चिति न आवही ॥१॥

(राग सूही -- SGGS 792) मः २ ॥
जां सुखु ता सहु राविओ दुखि भी सम्हालिओइ ॥ नानकु कहै सिआणीए इउ कंत मिलावा होइ ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 954) मः २ ॥
जपु तपु सभु किछु मंनिऐ अवरि कारा सभि बादि ॥ नानक मंनिआ मंनीऐ बुझीऐ गुर परसादि ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 954) सलोक मः २ ॥
नानक अंधा होइ कै रतना परखण जाइ ॥ रतना सार न जाणई आवै आपु लखाइ ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 954) मः २ ॥
रतना केरी गुथली रतनी खोली आइ ॥ वखर तै वणजारिआ दुहा रही समाइ ॥ जिन गुणु पलै नानका माणक वणजहि सेइ ॥ रतना सार न जाणनी अंधे वतहि लोइ ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 954) सलोक मः २ ॥
अंधे कै राहि दसिऐ अंधा होइ सु जाइ ॥ होइ सुजाखा नानका सो किउ उझड़ि पाइ ॥ अंधे एहि न आखीअनि जिन मुखि लोइण नाहि ॥ अंधे सेई नानका खसमहु घुथे जाहि ॥१॥

(राग रामकली -- SGGS 954) मः २ ॥
साहिबि अंधा जो कीआ करे सुजाखा होइ ॥ जेहा जाणै तेहो वरतै जे सउ आखै कोइ ॥ जिथै सु वसतु न जापई आपे वरतउ जाणि ॥ नानक गाहकु किउ लए सकै न वसतु पछाणि ॥२॥

(राग रामकली -- SGGS 954) मः २ ॥
सो किउ अंधा आखीऐ जि हुकमहु अंधा होइ ॥ नानक हुकमु न बुझई अंधा कहीऐ सोइ ॥३॥

(राग रामकली -- SGGS 955) सलोक मः २ ॥
नानक चिंता मति करहु चिंता तिस ही हेइ ॥ जल महि जंत उपाइअनु तिना भि रोजी देइ ॥ ओथै हटु न चलई ना को किरस करेइ ॥ सउदा मूलि न होवई ना को लए न देइ ॥ जीआ का आहारु जीअ खाणा एहु करेइ ॥ विचि उपाए साइरा तिना भि सार करेइ ॥ नानक चिंता मत करहु चिंता तिस ही हेइ ॥१॥

(राग मारू -- SGGS 1093) सलोक मः २ ॥
आपे जाणै करे आपि आपे आणै रासि ॥ तिसै अगै नानका खलिइ कीचै अरदासि ॥१॥

सलोक महला २ ॥
गुरु कुंजी पाहू निवलु मनु कोठा तनु छति ॥ नानक गुर बिनु मन का ताकु न उघड़ै अवर न कुंजी हथि ॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1238) सलोक महला २ ॥
आपि उपाए नानका आपे रखै वेक ॥ मंदा किस नो आखीऐ जां सभना साहिबु एकु ॥ सभना साहिबु एकु है वेखै धंधै लाइ ॥ किसै थोड़ा किसै अगला खाली कोई नाहि ॥ आवहि नंगे जाहि नंगे विचे करहि विथार ॥ नानक हुकमु न जाणीऐ अगै काई कार ॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1238) सलोक महला २ ॥
साह चले वणजारिआ लिखिआ देवै नालि ॥ लिखे उपरि हुकमु होइ लईऐ वसतु सम्हालि ॥ वसतु लई वणजारई वखरु बधा पाइ ॥ केई लाहा लै चले इकि चले मूलु गवाइ ॥ थोड़ा किनै न मंगिओ किसु कहीऐ साबासि ॥ नदरि तिना कउ नानका जि साबतु लाए रासि ॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1238) सलोक महला २ ॥
जिन वडिआई तेरे नाम की ते रते मन माहि ॥ नानक अम्रितु एकु है दूजा अम्रितु नाहि ॥ नानक अम्रितु मनै माहि पाईऐ गुर परसादि ॥ तिन्ही पीता रंग सिउ जिन्ह कउ लिखिआ आदि ॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1239) महला २ ॥
कीता किआ सालाहीऐ करे सोइ सालाहि ॥ नानक एकी बाहरा दूजा दाता नाहि ॥ करता सो सालाहीऐ जिनि कीता आकारु ॥ दाता सो सालाहीऐ जि सभसै दे आधारु ॥ नानक आपि सदीव है पूरा जिसु भंडारु ॥ वडा करि सालाहीऐ अंतु न पारावारु ॥२॥

(राग सारंग -- SGGS 1239) सलोक महला २ ॥
तिसु सिउ कैसा बोलणा जि आपे जाणै जाणु ॥ चीरी जा की ना फिरै साहिबु सो परवाणु ॥ चीरी जिस की चलणा मीर मलक सलार ॥ जो तिसु भावै नानका साई भली कार ॥ जिन्हा चीरी चलणा हथि तिन्हा किछु नाहि ॥ साहिब का फुरमाणु होइ उठी करलै पाहि ॥ जेहा चीरी लिखिआ तेहा हुकमु कमाहि ॥ घले आवहि नानका सदे उठी जाहि ॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1239) महला २ ॥
सिफति जिना कउ बखसीऐ सेई पोतेदार ॥ कुंजी जिन कउ दितीआ तिन्हा मिले भंडार ॥ जह भंडारी हू गुण निकलहि ते कीअहि परवाणु ॥ नदरि तिन्हा कउ नानका नामु जिन्हा नीसाणु ॥२॥

(राग सारंग -- SGGS 1243) सलोक मः २ ॥
कथा कहाणी बेदीं आणी पापु पुंनु बीचारु ॥ दे दे लैणा लै लै देणा नरकि सुरगि अवतार ॥ उतम मधिम जातीं जिनसी भरमि भवै संसारु ॥ अम्रित बाणी ततु वखाणी गिआन धिआन विचि आई ॥ गुरमुखि आखी गुरमुखि जाती सुरतीं करमि धिआई ॥ हुकमु साजि हुकमै विचि रखै हुकमै अंदरि वेखै ॥ नानक अगहु हउमै तुटै तां को लिखीऐ लेखै ॥१॥

(राग सारंग -- SGGS 1245) मः २ ॥
जैसा करै कहावै तैसा ऐसी बनी जरूरति ॥ होवहि लिंङ झिंङ नह होवहि ऐसी कहीऐ सूरति ॥ जो ओसु इछे सो फलु पाए तां नानक कहीऐ मूरति ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1279) मः २ ॥
वैदा वैदु सुवैदु तू पहिलां रोगु पछाणु ॥ ऐसा दारू लोड़ि लहु जितु वंञै रोगा घाणि ॥ जितु दारू रोग उठिअहि तनि सुखु वसै आइ ॥ रोगु गवाइहि आपणा त नानक वैदु सदाइ ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1280) सलोक मः २ ॥
सावणु आइआ हे सखी कंतै चिति करेहु ॥ नानक झूरि मरहि दोहागणी जिन्ह अवरी लागा नेहु ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1280) मः २ ॥
सावणु आइआ हे सखी जलहरु बरसनहारु ॥ नानक सुखि सवनु सोहागणी जिन्ह सह नालि पिआरु ॥२॥

(राग मलार -- SGGS 1288) सलोक मः २ ॥
नाउ फकीरै पातिसाहु मूरख पंडितु नाउ ॥ अंधे का नाउ पारखू एवै करे गुआउ ॥ इलति का नाउ चउधरी कूड़ी पूरे थाउ ॥ नानक गुरमुखि जाणीऐ कलि का एहु निआउ ॥१॥

(राग मलार -- SGGS 1290) मः २ ॥
नानक दुनीआ कीआं वडिआईआं अगी सेती जालि ॥ एनी जलीईं नामु विसारिआ इक न चलीआ नालि ॥२॥


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates