Pt 5 - गुरू अमरदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 5 - Guru Amardas ji (Mahalla 3) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग गउड़ी बैरागणि -- SGGS 162) गउड़ी बैरागणि महला ३ ॥
पेईअड़ै दिन चारि है हरि हरि लिखि पाइआ ॥ सोभावंती नारि है गुरमुखि गुण गाइआ ॥ पेवकड़ै गुण समलै साहुरै वासु पाइआ ॥ गुरमुखि सहजि समाणीआ हरि हरि मनि भाइआ ॥१॥

ससुरै पेईऐ पिरु वसै कहु कितु बिधि पाईऐ ॥ आपि निरंजनु अलखु है आपे मेलाईऐ ॥१॥ रहाउ ॥

आपे ही प्रभु देहि मति हरि नामु धिआईऐ ॥ वडभागी सतिगुरु मिलै मुखि अम्रितु पाईऐ ॥ हउमै दुबिधा बिनसि जाइ सहजे सुखि समाईऐ ॥ सभु आपे आपि वरतदा आपे नाइ लाईऐ ॥२॥

मनमुखि गरबि न पाइओ अगिआन इआणे ॥ सतिगुर सेवा ना करहि फिरि फिरि पछुताणे ॥ गरभ जोनी वासु पाइदे गरभे गलि जाणे ॥ मेरे करते एवै भावदा मनमुख भरमाणे ॥३॥

मेरै हरि प्रभि लेखु लिखाइआ धुरि मसतकि पूरा ॥ हरि हरि नामु धिआइआ भेटिआ गुरु सूरा ॥ मेरा पिता माता हरि नामु है हरि बंधपु बीरा ॥ हरि हरि बखसि मिलाइ प्रभ जनु नानकु कीरा ॥४॥३॥१७॥३७॥

(राग गउड़ी बैरागणि -- SGGS 163) गउड़ी बैरागणि महला ३ ॥
सतिगुर ते गिआनु पाइआ हरि ततु बीचारा ॥ मति मलीण परगटु भई जपि नामु मुरारा ॥ सिवि सकति मिटाईआ चूका अंधिआरा ॥ धुरि मसतकि जिन कउ लिखिआ तिन हरि नामु पिआरा ॥१॥

हरि कितु बिधि पाईऐ संत जनहु जिसु देखि हउ जीवा ॥ हरि बिनु चसा न जीवती गुर मेलिहु हरि रसु पीवा ॥१॥ रहाउ ॥

हउ हरि गुण गावा नित हरि सुणी हरि हरि गति कीनी ॥ हरि रसु गुर ते पाइआ मेरा मनु तनु लीनी ॥ धनु धनु गुरु सत पुरखु है जिनि भगति हरि दीनी ॥ जिसु गुर ते हरि पाइआ सो गुरु हम कीनी ॥२॥

गुणदाता हरि राइ है हम अवगणिआरे ॥ पापी पाथर डूबदे गुरमति हरि तारे ॥ तूं गुणदाता निरमला हम अवगणिआरे ॥ हरि सरणागति राखि लेहु मूड़ मुगध निसतारे ॥३॥

सहजु अनंदु सदा गुरमती हरि हरि मनि धिआइआ ॥ सजणु हरि प्रभु पाइआ घरि सोहिला गाइआ ॥ हरि दइआ धारि प्रभ बेनती हरि हरि चेताइआ ॥ जन नानकु मंगै धूड़ि तिन जिन सतिगुरु पाइआ ॥४॥४॥१८॥३८॥

(राग गउड़ी गुआरेरी -- SGGS 229) रागु गउड़ी गुआरेरी महला ३ असटपदीआ
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
मन का सूतकु दूजा भाउ ॥ भरमे भूले आवउ जाउ ॥१॥

मनमुखि सूतकु कबहि न जाइ ॥ जिचरु सबदि न भीजै हरि कै नाइ ॥१॥ रहाउ ॥

सभो सूतकु जेता मोहु आकारु ॥ मरि मरि जमै वारो वार ॥२॥

सूतकु अगनि पउणै पाणी माहि ॥ सूतकु भोजनु जेता किछु खाहि ॥३॥

सूतकि करम न पूजा होइ ॥ नामि रते मनु निरमलु होइ ॥४॥

सतिगुरु सेविऐ सूतकु जाइ ॥ मरै न जनमै कालु न खाइ ॥५॥

सासत सिम्रिति सोधि देखहु कोइ ॥ विणु नावै को मुकति न होइ ॥६॥

जुग चारे नामु उतमु सबदु बीचारि ॥ कलि महि गुरमुखि उतरसि पारि ॥७॥

साचा मरै न आवै जाइ ॥ नानक गुरमुखि रहै समाइ ॥८॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 229) गउड़ी महला ३ ॥
गुरमुखि सेवा प्रान अधारा ॥ हरि जीउ राखहु हिरदै उर धारा ॥ गुरमुखि सोभा साच दुआरा ॥१॥

पंडित हरि पड़ु तजहु विकारा ॥ गुरमुखि भउजलु उतरहु पारा ॥१॥ रहाउ ॥

गुरमुखि विचहु हउमै जाइ ॥ गुरमुखि मैलु न लागै आइ ॥ गुरमुखि नामु वसै मनि आइ ॥२॥

गुरमुखि करम धरम सचि होई ॥ गुरमुखि अहंकारु जलाए दोई ॥ गुरमुखि नामि रते सुखु होई ॥३॥

आपणा मनु परबोधहु बूझहु सोई ॥ लोक समझावहु सुणे न कोई ॥ गुरमुखि समझहु सदा सुखु होई ॥४॥

मनमुखि ड्मफु बहुतु चतुराई ॥ जो किछु कमावै सु थाइ न पाई ॥ आवै जावै ठउर न काई ॥५॥

मनमुख करम करे बहुतु अभिमाना ॥ बग जिउ लाइ बहै नित धिआना ॥ जमि पकड़िआ तब ही पछुताना ॥६॥

बिनु सतिगुर सेवे मुकति न होई ॥ गुर परसादी मिलै हरि सोई ॥ गुरु दाता जुग चारे होई ॥७॥

गुरमुखि जाति पति नामे वडिआई ॥ साइर की पुत्री बिदारि गवाई ॥ नानक बिनु नावै झूठी चतुराई ॥८॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 230) गउड़ी मः ३ ॥
इसु जुग का धरमु पड़हु तुम भाई ॥ पूरै गुरि सभ सोझी पाई ॥ ऐथै अगै हरि नामु सखाई ॥१॥

राम पड़हु मनि करहु बीचारु ॥ गुर परसादी मैलु उतारु ॥१॥ रहाउ ॥

वादि विरोधि न पाइआ जाइ ॥ मनु तनु फीका दूजै भाइ ॥ गुर कै सबदि सचि लिव लाइ ॥२॥

हउमै मैला इहु संसारा ॥ नित तीरथि नावै न जाइ अहंकारा ॥ बिनु गुर भेटे जमु करे खुआरा ॥३॥

सो जनु साचा जि हउमै मारै ॥ गुर कै सबदि पंच संघारै ॥ आपि तरै सगले कुल तारै ॥४॥

माइआ मोहि नटि बाजी पाई ॥ मनमुख अंध रहे लपटाई ॥ गुरमुखि अलिपत रहे लिव लाई ॥५॥

बहुते भेख करै भेखधारी ॥ अंतरि तिसना फिरै अहंकारी ॥ आपु न चीनै बाजी हारी ॥६॥

कापड़ पहिरि करे चतुराई ॥ माइआ मोहि अति भरमि भुलाई ॥ बिनु गुर सेवे बहुतु दुखु पाई ॥७॥

नामि रते सदा बैरागी ॥ ग्रिही अंतरि साचि लिव लागी ॥ नानक सतिगुरु सेवहि से वडभागी ॥८॥३॥

(राग गउड़ी -- SGGS 230) गउड़ी महला ३ ॥
ब्रहमा मूलु वेद अभिआसा ॥ तिस ते उपजे देव मोह पिआसा ॥ त्रै गुण भरमे नाही निज घरि वासा ॥१॥

हम हरि राखे सतिगुरू मिलाइआ ॥ अनदिनु भगति हरि नामु द्रिड़ाइआ ॥१॥ रहाउ ॥

त्रै गुण बाणी ब्रहम जंजाला ॥ पड़ि वादु वखाणहि सिरि मारे जमकाला ॥ ततु न चीनहि बंनहि पंड पराला ॥२॥

मनमुख अगिआनि कुमारगि पाए ॥ हरि नामु बिसारिआ बहु करम द्रिड़ाए ॥ भवजलि डूबे दूजै भाए ॥३॥

माइआ का मुहताजु पंडितु कहावै ॥ बिखिआ राता बहुतु दुखु पावै ॥ जम का गलि जेवड़ा नित कालु संतावै ॥४॥

गुरमुखि जमकालु नेड़ि न आवै ॥ हउमै दूजा सबदि जलावै ॥ नामे राते हरि गुण गावै ॥५॥

माइआ दासी भगता की कार कमावै ॥ चरणी लागै ता महलु पावै ॥ सद ही निरमलु सहजि समावै ॥६॥

हरि कथा सुणहि से धनवंत दिसहि जुग माही ॥ तिन कउ सभि निवहि अनदिनु पूज कराही ॥ सहजे गुण रवहि साचे मन माही ॥७॥

पूरै सतिगुरि सबदु सुणाइआ ॥ त्रै गुण मेटे चउथै चितु लाइआ ॥ नानक हउमै मारि ब्रहम मिलाइआ ॥८॥४॥

(राग गउड़ी -- SGGS 231) गउड़ी महला ३ ॥
ब्रहमा वेदु पड़ै वादु वखाणै ॥ अंतरि तामसु आपु न पछाणै ॥ ता प्रभु पाए गुर सबदु वखाणै ॥१॥

गुर सेवा करउ फिरि कालु न खाइ ॥ मनमुख खाधे दूजै भाइ ॥१॥ रहाउ ॥

गुरमुखि प्राणी अपराधी सीधे ॥ गुर कै सबदि अंतरि सहजि रीधे ॥ मेरा प्रभु पाइआ गुर कै सबदि सीधे ॥२॥

सतिगुरि मेले प्रभि आपि मिलाए ॥ मेरे प्रभ साचे कै मनि भाए ॥ हरि गुण गावहि सहजि सुभाए ॥३॥

बिनु गुर साचे भरमि भुलाए ॥ मनमुख अंधे सदा बिखु खाए ॥ जम डंडु सहहि सदा दुखु पाए ॥४॥

जमूआ न जोहै हरि की सरणाई ॥ हउमै मारि सचि लिव लाई ॥ सदा रहै हरि नामि लिव लाई ॥५॥

सतिगुरु सेवहि से जन निरमल पविता ॥ मन सिउ मनु मिलाइ सभु जगु जीता ॥ इन बिधि कुसलु तेरै मेरे मीता ॥६॥

सतिगुरू सेवे सो फलु पाए ॥ हिरदै नामु विचहु आपु गवाए ॥ अनहद बाणी सबदु वजाए ॥७॥

सतिगुर ते कवनु कवनु न सीधो मेरे भाई ॥ भगती सीधे दरि सोभा पाई ॥ नानक राम नामि वडिआई ॥८॥५॥

(राग गउड़ी -- SGGS 231) गउड़ी महला ३ ॥
त्रै गुण वखाणै भरमु न जाइ ॥ बंधन न तूटहि मुकति न पाइ ॥ मुकति दाता सतिगुरु जुग माहि ॥१॥

गुरमुखि प्राणी भरमु गवाइ ॥ सहज धुनि उपजै हरि लिव लाइ ॥१॥ रहाउ ॥

त्रै गुण कालै की सिरि कारा ॥ नामु न चेतहि उपावणहारा ॥ मरि जमहि फिरि वारो वारा ॥२॥

अंधे गुरू ते भरमु न जाई ॥ मूलु छोडि लागे दूजै भाई ॥ बिखु का माता बिखु माहि समाई ॥३॥

माइआ करि मूलु जंत्र भरमाए ॥ हरि जीउ विसरिआ दूजै भाए ॥ जिसु नदरि करे सो परम गति पाए ॥४॥

अंतरि साचु बाहरि साचु वरताए ॥ साचु न छपै जे को रखै छपाए ॥ गिआनी बूझहि सहजि सुभाए ॥५॥

गुरमुखि साचि रहिआ लिव लाए ॥ हउमै माइआ सबदि जलाए ॥ मेरा प्रभु साचा मेलि मिलाए ॥६॥

सतिगुरु दाता सबदु सुणाए ॥ धावतु राखै ठाकि रहाए ॥ पूरे गुर ते सोझी पाए ॥७॥

आपे करता स्रिसटि सिरजि जिनि गोई ॥ तिसु बिनु दूजा अवरु न कोई ॥ नानक गुरमुखि बूझै कोई ॥८॥६॥

(राग गउड़ी -- SGGS 232) गउड़ी महला ३ ॥
नामु अमोलकु गुरमुखि पावै ॥ नामो सेवे नामि सहजि समावै ॥ अम्रितु नामु रसना नित गावै ॥ जिस नो क्रिपा करे सो हरि रसु पावै ॥१॥

अनदिनु हिरदै जपउ जगदीसा ॥ गुरमुखि पावउ परम पदु सूखा ॥१॥ रहाउ ॥

हिरदै सूखु भइआ परगासु ॥ गुरमुखि गावहि सचु गुणतासु ॥ दासनि दास नित होवहि दासु ॥ ग्रिह कुट्मब महि सदा उदासु ॥२॥

जीवन मुकतु गुरमुखि को होई ॥ परम पदारथु पावै सोई ॥ त्रै गुण मेटे निरमलु होई ॥ सहजे साचि मिलै प्रभु सोई ॥३॥

मोह कुट्मब सिउ प्रीति न होइ ॥ जा हिरदै वसिआ सचु सोइ ॥ गुरमुखि मनु बेधिआ असथिरु होइ ॥ हुकमु पछाणै बूझै सचु सोइ ॥४॥

तूं करता मै अवरु न कोइ ॥ तुझु सेवी तुझ ते पति होइ ॥ किरपा करहि गावा प्रभु सोइ ॥ नाम रतनु सभ जग महि लोइ ॥५॥

गुरमुखि बाणी मीठी लागी ॥ अंतरु बिगसै अनदिनु लिव लागी ॥ सहजे सचु मिलिआ परसादी ॥ सतिगुरु पाइआ पूरै वडभागी ॥६॥

हउमै ममता दुरमति दुख नासु ॥ जब हिरदै राम नाम गुणतासु ॥ गुरमुखि बुधि प्रगटी प्रभ जासु ॥ जब हिरदै रविआ चरण निवासु ॥७॥

जिसु नामु देइ सोई जनु पाए ॥ गुरमुखि मेले आपु गवाए ॥ हिरदै साचा नामु वसाए ॥ नानक सहजे साचि समाए ॥८॥७॥

(राग गउड़ी -- SGGS 232) गउड़ी महला ३ ॥
मन ही मनु सवारिआ भै सहजि सुभाइ ॥ सबदि मनु रंगिआ लिव लाइ ॥ निज घरि वसिआ प्रभ की रजाइ ॥१॥

सतिगुरु सेविऐ जाइ अभिमानु ॥ गोविदु पाईऐ गुणी निधानु ॥१॥ रहाउ ॥

मनु बैरागी जा सबदि भउ खाइ ॥ मेरा प्रभु निरमला सभ तै रहिआ समाइ ॥ गुर किरपा ते मिलै मिलाइ ॥२॥

हरि दासन को दासु सुखु पाए ॥ मेरा हरि प्रभु इन बिधि पाइआ जाए ॥ हरि किरपा ते राम गुण गाए ॥३॥

ध्रिगु बहु जीवणु जितु हरि नामि न लगै पिआरु ॥ ध्रिगु सेज सुखाली कामणि मोह गुबारु ॥ तिन सफलु जनमु जिन नामु अधारु ॥४॥

ध्रिगु ध्रिगु ग्रिहु कुट्मबु जितु हरि प्रीति न होइ ॥ सोई हमारा मीतु जो हरि गुण गावै सोइ ॥ हरि नाम बिना मै अवरु न कोइ ॥५॥

सतिगुर ते हम गति पति पाई ॥ हरि नामु धिआइआ दूखु सगल मिटाई ॥ सदा अनंदु हरि नामि लिव लाई ॥६॥

गुरि मिलिऐ हम कउ सरीर सुधि भई ॥ हउमै त्रिसना सभ अगनि बुझई ॥ बिनसे क्रोध खिमा गहि लई ॥७॥

हरि आपे क्रिपा करे नामु देवै ॥ गुरमुखि रतनु को विरला लेवै ॥ नानकु गुण गावै हरि अलख अभेवै ॥८॥८॥

(राग गउड़ी बैरागणि -- SGGS 233) ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
रागु गउड़ी बैरागणि महला ३ ॥
सतिगुर ते जो मुह फेरे ते वेमुख बुरे दिसंनि ॥ अनदिनु बधे मारीअनि फिरि वेला ना लहंनि ॥१॥

हरि हरि राखहु क्रिपा धारि ॥ सतसंगति मेलाइ प्रभ हरि हिरदै हरि गुण सारि ॥१॥ रहाउ ॥

से भगत हरि भावदे जो गुरमुखि भाइ चलंनि ॥ आपु छोडि सेवा करनि जीवत मुए रहंनि ॥२॥

जिस दा पिंडु पराण है तिस की सिरि कार ॥ ओहु किउ मनहु विसारीऐ हरि रखीऐ हिरदै धारि ॥३॥

नामि मिलिऐ पति पाईऐ नामि मंनिऐ सुखु होइ ॥ सतिगुर ते नामु पाईऐ करमि मिलै प्रभु सोइ ॥४॥

सतिगुर ते जो मुहु फेरे ओइ भ्रमदे ना टिकंनि ॥ धरति असमानु न झलई विचि विसटा पए पचंनि ॥५॥

इहु जगु भरमि भुलाइआ मोह ठगउली पाइ ॥ जिना सतिगुरु भेटिआ तिन नेड़ि न भिटै माइ ॥६॥

सतिगुरु सेवनि सो सोहणे हउमै मैलु गवाइ ॥ सबदि रते से निरमले चलहि सतिगुर भाइ ॥७॥

हरि प्रभ दाता एकु तूं तूं आपे बखसि मिलाइ ॥ जनु नानकु सरणागती जिउ भावै तिवै छडाइ ॥८॥१॥९॥

(राग गउड़ी पूरबी -- SGGS 243) रागु गउड़ी पूरबी छंत महला ३
ੴ सतिनामु करता पुरखु गुरप्रसादि ॥
सा धन बिनउ करे जीउ हरि के गुण सारे ॥ खिनु पलु रहि न सकै जीउ बिनु हरि पिआरे ॥ बिनु हरि पिआरे रहि न साकै गुर बिनु महलु न पाईऐ ॥ जो गुरु कहै सोई परु कीजै तिसना अगनि बुझाईऐ ॥ हरि साचा सोई तिसु बिनु अवरु न कोई बिनु सेविऐ सुखु न पाए ॥ नानक सा धन मिलै मिलाई जिस नो आपि मिलाए ॥१॥

धन रैणि सुहेलड़ीए जीउ हरि सिउ चितु लाए ॥ सतिगुरु सेवे भाउ करे जीउ विचहु आपु गवाए ॥ विचहु आपु गवाए हरि गुण गाए अनदिनु लागा भाओ ॥ सुणि सखी सहेली जीअ की मेली गुर कै सबदि समाओ ॥ हरि गुण सारी ता कंत पिआरी नामे धरी पिआरो ॥ नानक कामणि नाह पिआरी राम नामु गलि हारो ॥२॥

धन एकलड़ी जीउ बिनु नाह पिआरे ॥ दूजै भाइ मुठी जीउ बिनु गुर सबद करारे ॥ बिनु सबद पिआरे कउणु दुतरु तारे माइआ मोहि खुआई ॥ कूड़ि विगुती ता पिरि मुती सा धन महलु न पाई ॥ गुर सबदे राती सहजे माती अनदिनु रहै समाए ॥ नानक कामणि सदा रंगि राती हरि जीउ आपि मिलाए ॥३॥

ता मिलीऐ हरि मेले जीउ हरि बिनु कवणु मिलाए ॥ बिनु गुर प्रीतम आपणे जीउ कउणु भरमु चुकाए ॥ गुरु भरमु चुकाए इउ मिलीऐ माए ता सा धन सुखु पाए ॥ गुर सेवा बिनु घोर अंधारु बिनु गुर मगु न पाए ॥ कामणि रंगि राती सहजे माती गुर कै सबदि वीचारे ॥ नानक कामणि हरि वरु पाइआ गुर कै भाइ पिआरे ॥४॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 244) गउड़ी महला ३ ॥
पिर बिनु खरी निमाणी जीउ बिनु पिर किउ जीवा मेरी माई ॥ पिर बिनु नीद न आवै जीउ कापड़ु तनि न सुहाई ॥ कापरु तनि सुहावै जा पिर भावै गुरमती चितु लाईऐ ॥ सदा सुहागणि जा सतिगुरु सेवे गुर कै अंकि समाईऐ ॥ गुर सबदै मेला ता पिरु रावी लाहा नामु संसारे ॥ नानक कामणि नाह पिआरी जा हरि के गुण सारे ॥१॥

सा धन रंगु माणे जीउ आपणे नालि पिआरे ॥ अहिनिसि रंगि राती जीउ गुर सबदु वीचारे ॥ गुर सबदु वीचारे हउमै मारे इन बिधि मिलहु पिआरे ॥ सा धन सोहागणि सदा रंगि राती साचै नामि पिआरे ॥ अपुने गुर मिलि रहीऐ अम्रितु गहीऐ दुबिधा मारि निवारे ॥ नानक कामणि हरि वरु पाइआ सगले दूख विसारे ॥२॥

कामणि पिरहु भुली जीउ माइआ मोहि पिआरे ॥ झूठी झूठि लगी जीउ कूड़ि मुठी कूड़िआरे ॥ कूड़ु निवारे गुरमति सारे जूऐ जनमु न हारे ॥ गुर सबदु सेवे सचि समावै विचहु हउमै मारे ॥ हरि का नामु रिदै वसाए ऐसा करे सीगारो ॥ नानक कामणि सहजि समाणी जिसु साचा नामु अधारो ॥३॥

मिलु मेरे प्रीतमा जीउ तुधु बिनु खरी निमाणी ॥ मै नैणी नीद न आवै जीउ भावै अंनु न पाणी ॥ पाणी अंनु न भावै मरीऐ हावै बिनु पिर किउ सुखु पाईऐ ॥ गुर आगै करउ बिनंती जे गुर भावै जिउ मिलै तिवै मिलाईऐ ॥ आपे मेलि लए सुखदाता आपि मिलिआ घरि आए ॥ नानक कामणि सदा सुहागणि ना पिरु मरै न जाए ॥४॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 245) गउड़ी महला ३ ॥
कामणि हरि रसि बेधी जीउ हरि कै सहजि सुभाए ॥ मनु मोहनि मोहि लीआ जीउ दुबिधा सहजि समाए ॥ दुबिधा सहजि समाए कामणि वरु पाए गुरमती रंगु लाए ॥ इहु सरीरु कूड़ि कुसति भरिआ गल ताई पाप कमाए ॥ गुरमुखि भगति जितु सहज धुनि उपजै बिनु भगती मैलु न जाए ॥ नानक कामणि पिरहि पिआरी विचहु आपु गवाए ॥१॥

कामणि पिरु पाइआ जीउ गुर कै भाइ पिआरे ॥ रैणि सुखि सुती जीउ अंतरि उरि धारे ॥ अंतरि उरि धारे मिलीऐ पिआरे अनदिनु दुखु निवारे ॥ अंतरि महलु पिरु रावे कामणि गुरमती वीचारे ॥ अम्रितु नामु पीआ दिन राती दुबिधा मारि निवारे ॥ नानक सचि मिली सोहागणि गुर कै हेति अपारे ॥२॥

आवहु दइआ करे जीउ प्रीतम अति पिआरे ॥ कामणि बिनउ करे जीउ सचि सबदि सीगारे ॥ सचि सबदि सीगारे हउमै मारे गुरमुखि कारज सवारे ॥ जुगि जुगि एको सचा सोई बूझै गुर बीचारे ॥ मनमुखि कामि विआपी मोहि संतापी किसु आगै जाइ पुकारे ॥ नानक मनमुखि थाउ न पाए बिनु गुर अति पिआरे ॥३॥

मुंध इआणी भोली निगुणीआ जीउ पिरु अगम अपारा ॥ आपे मेलि मिलीऐ जीउ आपे बखसणहारा ॥ अवगण बखसणहारा कामणि कंतु पिआरा घटि घटि रहिआ समाई ॥ प्रेम प्रीति भाइ भगती पाईऐ सतिगुरि बूझ बुझाई ॥ सदा अनंदि रहै दिन राती अनदिनु रहै लिव लाई ॥ नानक सहजे हरि वरु पाइआ सा धन नउ निधि पाई ॥४॥३॥

(राग गउड़ी -- SGGS 245) गउड़ी महला ३ ॥
माइआ सरु सबलु वरतै जीउ किउ करि दुतरु तरिआ जाइ ॥ राम नामु करि बोहिथा जीउ सबदु खेवटु विचि पाइ ॥ सबदु खेवटु विचि पाए हरि आपि लघाए इन बिधि दुतरु तरीऐ ॥ गुरमुखि भगति परापति होवै जीवतिआ इउ मरीऐ ॥ खिन महि राम नामि किलविख काटे भए पवितु सरीरा ॥ नानक राम नामि निसतारा कंचन भए मनूरा ॥१॥

इसतरी पुरख कामि विआपे जीउ राम नाम की बिधि नही जाणी ॥ मात पिता सुत भाई खरे पिआरे जीउ डूबि मुए बिनु पाणी ॥ डूबि मुए बिनु पाणी गति नही जाणी हउमै धातु संसारे ॥ जो आइआ सो सभु को जासी उबरे गुर वीचारे ॥ गुरमुखि होवै राम नामु वखाणै आपि तरै कुल तारे ॥ नानक नामु वसै घट अंतरि गुरमति मिले पिआरे ॥२॥

राम नाम बिनु को थिरु नाही जीउ बाजी है संसारा ॥ द्रिड़ु भगति सची जीउ राम नामु वापारा ॥ राम नामु वापारा अगम अपारा गुरमती धनु पाईऐ ॥ सेवा सुरति भगति इह साची विचहु आपु गवाईऐ ॥ हम मति हीण मूरख मुगध अंधे सतिगुरि मारगि पाए ॥ नानक गुरमुखि सबदि सुहावे अनदिनु हरि गुण गाए ॥३॥

आपि कराए करे आपि जीउ आपे सबदि सवारे ॥ आपे सतिगुरु आपि सबदु जीउ जुगु जुगु भगत पिआरे ॥ जुगु जुगु भगत पिआरे हरि आपि सवारे आपे भगती लाए ॥ आपे दाना आपे बीना आपे सेव कराए ॥ आपे गुणदाता अवगुण काटे हिरदै नामु वसाए ॥ नानक सद बलिहारी सचे विटहु आपे करे कराए ॥४॥४॥

(राग गउड़ी -- SGGS 246) गउड़ी महला ३ ॥
गुर की सेवा करि पिरा जीउ हरि नामु धिआए ॥ मंञहु दूरि न जाहि पिरा जीउ घरि बैठिआ हरि पाए ॥ घरि बैठिआ हरि पाए सदा चितु लाए सहजे सति सुभाए ॥ गुर की सेवा खरी सुखाली जिस नो आपि कराए ॥ नामो बीजे नामो जमै नामो मंनि वसाए ॥ नानक सचि नामि वडिआई पूरबि लिखिआ पाए ॥१॥

हरि का नामु मीठा पिरा जीउ जा चाखहि चितु लाए ॥ रसना हरि रसु चाखु मुये जीउ अन रस साद गवाए ॥ सदा हरि रसु पाए जा हरि भाए रसना सबदि सुहाए ॥ नामु धिआए सदा सुखु पाए नामि रहै लिव लाए ॥ नामे उपजै नामे बिनसै नामे सचि समाए ॥ नानक नामु गुरमती पाईऐ आपे लए लवाए ॥२॥

एह विडाणी चाकरी पिरा जीउ धन छोडि परदेसि सिधाए ॥ दूजै किनै सुखु न पाइओ पिरा जीउ बिखिआ लोभि लुभाए ॥ बिखिआ लोभि लुभाए भरमि भुलाए ओहु किउ करि सुखु पाए ॥ चाकरी विडाणी खरी दुखाली आपु वेचि धरमु गवाए ॥ माइआ बंधन टिकै नाही खिनु खिनु दुखु संताए ॥ नानक माइआ का दुखु तदे चूकै जा गुर सबदी चितु लाए ॥३॥

मनमुख मुगध गावारु पिरा जीउ सबदु मनि न वसाए ॥ माइआ का भ्रमु अंधु पिरा जीउ हरि मारगु किउ पाए ॥ किउ मारगु पाए बिनु सतिगुर भाए मनमुखि आपु गणाए ॥ हरि के चाकर सदा सुहेले गुर चरणी चितु लाए ॥ जिस नो हरि जीउ करे किरपा सदा हरि के गुण गाए ॥ नानक नामु रतनु जगि लाहा गुरमुखि आपि बुझाए ॥४॥५॥७॥

(राग गउड़ी -- SGGS 311) सलोक महला ३ ॥
गउड़ी रागि सुलखणी जे खसमै चिति करेइ ॥ भाणै चलै सतिगुरू कै ऐसा सीगारु करेइ ॥ सचा सबदु भतारु है सदा सदा रावेइ ॥ जिउ उबली मजीठै रंगु गहगहा तिउ सचे नो जीउ देइ ॥ रंगि चलूलै अति रती सचे सिउ लगा नेहु ॥ कूड़ु ठगी गुझी ना रहै कूड़ु मुलमा पलेटि धरेहु ॥ कूड़ी करनि वडाईआ कूड़े सिउ लगा नेहु ॥ नानक सचा आपि है आपे नदरि करेइ ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 312) महला ३ ॥
हउमै जगतु भुलाइआ दुरमति बिखिआ बिकार ॥ सतिगुरु मिलै त नदरि होइ मनमुख अंध अंधिआर ॥ नानक आपे मेलि लए जिस नो सबदि लाए पिआरु ॥३॥

(राग गउड़ी -- SGGS 313) मः ३ ॥
माइआधारी अति अंना बोला ॥ सबदु न सुणई बहु रोल घचोला ॥ गुरमुखि जापै सबदि लिव लाइ ॥ हरि नामु सुणि मंने हरि नामि समाइ ॥ जो तिसु भावै सु करे कराइआ ॥ नानक वजदा जंतु वजाइआ ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 314) मः ३ ॥
मनमुखु अहंकारी महलु न जाणै खिनु आगै खिनु पीछै ॥ सदा बुलाईऐ महलि न आवै किउ करि दरगह सीझै ॥ सतिगुर का महलु विरला जाणै सदा रहै कर जोड़ि ॥ आपणी क्रिपा करे हरि मेरा नानक लए बहोड़ि ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 314) सलोकु मः ३ ॥
जिनि गुरु गोपिआ आपणा तिसु ठउर न ठाउ ॥ हलतु पलतु दोवै गए दरगह नाही थाउ ॥ ओह वेला हथि न आवई फिरि सतिगुर लगहि पाइ ॥ सतिगुर की गणतै घुसीऐ दुखे दुखि विहाइ ॥ सतिगुरु पुरखु निरवैरु है आपे लए जिसु लाइ ॥ नानक दरसनु जिना वेखालिओनु तिना दरगह लए छडाइ ॥१॥

(राग गउड़ी -- SGGS 314) मः ३ ॥
मनमुखु अगिआनु दुरमति अहंकारी ॥ अंतरि क्रोधु जूऐ मति हारी ॥ कूड़ु कुसतु ओहु पाप कमावै ॥ किआ ओहु सुणै किआ आखि सुणावै ॥ अंना बोला खुइ उझड़ि पाइ ॥ मनमुखु अंधा आवै जाइ ॥ बिनु सतिगुर भेटे थाइ न पाइ ॥ नानक पूरबि लिखिआ कमाइ ॥२॥

(राग गउड़ी -- SGGS 317) सलोक मः ३ ॥
गुरमुखि गिआनु बिबेक बुधि होइ ॥ हरि गुण गावै हिरदै हारु परोइ ॥ पवितु पावनु परम बीचारी ॥ जि ओसु मिलै तिसु पारि उतारी ॥ अंतरि हरि नामु बासना समाणी ॥ हरि दरि सोभा महा उतम बाणी ॥ जि पुरखु सुणै सु होइ निहालु ॥ नानक सतिगुर मिलिऐ पाइआ नामु धनु मालु ॥१॥

(राग आसा -- SGGS 360) रागु आसा घरु २ महला ३
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
हरि दरसनु पावै वडभागि ॥ गुर कै सबदि सचै बैरागि ॥ खटु दरसनु वरतै वरतारा ॥ गुर का दरसनु अगम अपारा ॥१॥

गुर कै दरसनि मुकति गति होइ ॥ साचा आपि वसै मनि सोइ ॥१॥ रहाउ ॥

गुर दरसनि उधरै संसारा ॥ जे को लाए भाउ पिआरा ॥ भाउ पिआरा लाए विरला कोइ ॥ गुर कै दरसनि सदा सुखु होइ ॥२॥

गुर कै दरसनि मोख दुआरु ॥ सतिगुरु सेवै परवार साधारु ॥ निगुरे कउ गति काई नाही ॥ अवगणि मुठे चोटा खाही ॥३॥

गुर कै सबदि सुखु सांति सरीर ॥ गुरमुखि ता कउ लगै न पीर ॥ जमकालु तिसु नेड़ि न आवै ॥ नानक गुरमुखि साचि समावै ॥४॥१॥४०॥

(राग आसा -- SGGS 361) आसा महला ३ ॥
सबदि मुआ विचहु आपु गवाइ ॥ सतिगुरु सेवे तिलु न तमाइ ॥ निरभउ दाता सदा मनि होइ ॥ सची बाणी पाए भागि कोइ ॥१॥

गुण संग्रहु विचहु अउगुण जाहि ॥ पूरे गुर कै सबदि समाहि ॥१॥ रहाउ ॥

गुणा का गाहकु होवै सो गुण जाणै ॥ अम्रित सबदि नामु वखाणै ॥ साची बाणी सूचा होइ ॥ गुण ते नामु परापति होइ ॥२॥

गुण अमोलक पाए न जाहि ॥ मनि निरमल साचै सबदि समाहि ॥ से वडभागी जिन्ह नामु धिआइआ ॥ सदा गुणदाता मंनि वसाइआ ॥३॥

जो गुण संग्रहै तिन्ह बलिहारै जाउ ॥ दरि साचै साचे गुण गाउ ॥ आपे देवै सहजि सुभाइ ॥ नानक कीमति कहणु न जाइ ॥४॥२॥४१॥

(राग आसा -- SGGS 361) आसा महला ३ ॥
सतिगुर विचि वडी वडिआई ॥ चिरी विछुंने मेलि मिलाई ॥ आपे मेले मेलि मिलाए ॥ आपणी कीमति आपे पाए ॥१॥

हरि की कीमति किन बिधि होइ ॥ हरि अपर्मपरु अगम अगोचरु गुर कै सबदि मिलै जनु कोइ ॥१॥ रहाउ ॥

गुरमुखि कीमति जाणै कोइ ॥ विरले करमि परापति होइ ॥ ऊची बाणी ऊचा होइ ॥ गुरमुखि सबदि वखाणै कोइ ॥२॥

विणु नावै दुखु दरदु सरीरि ॥ सतिगुरु भेटे ता उतरै पीर ॥ बिनु गुर भेटे दुखु कमाइ ॥ मनमुखि बहुती मिलै सजाइ ॥३॥

हरि का नामु मीठा अति रसु होइ ॥ पीवत रहै पीआए सोइ ॥ गुर किरपा ते हरि रसु पाए ॥ नानक नामि रते गति पाए ॥४॥३॥४२॥

(राग आसा -- SGGS 361) आसा महला ३ ॥
मेरा प्रभु साचा गहिर ग्मभीर ॥ सेवत ही सुखु सांति सरीर ॥ सबदि तरे जन सहजि सुभाइ ॥ तिन कै हम सद लागह पाइ ॥१॥

जो मनि राते हरि रंगु लाइ ॥ तिन का जनम मरण दुखु लाथा ते हरि दरगह मिले सुभाइ ॥१॥ रहाउ ॥

सबदु चाखै साचा सादु पाए ॥ हरि का नामु मंनि वसाए ॥ हरि प्रभु सदा रहिआ भरपूरि ॥ आपे नेड़ै आपे दूरि ॥२॥

आखणि आखै बकै सभु कोइ ॥ आपे बखसि मिलाए सोइ ॥ कहणै कथनि न पाइआ जाइ ॥ गुर परसादि वसै मनि आइ ॥३॥

गुरमुखि विचहु आपु गवाइ ॥ हरि रंगि राते मोहु चुकाइ ॥ अति निरमलु गुर सबद वीचार ॥ नानक नामि सवारणहार ॥४॥४॥४३॥

(राग आसा -- SGGS 362) आसा महला ३ ॥
दूजै भाइ लगे दुखु पाइआ ॥ बिनु सबदै बिरथा जनमु गवाइआ ॥ सतिगुरु सेवै सोझी होइ ॥ दूजै भाइ न लागै कोइ ॥१॥

मूलि लागे से जन परवाणु ॥ अनदिनु राम नामु जपि हिरदै गुर सबदी हरि एको जाणु ॥१॥ रहाउ ॥

डाली लागै निहफलु जाइ ॥ अंधीं कमी अंध सजाइ ॥ मनमुखु अंधा ठउर न पाइ ॥ बिसटा का कीड़ा बिसटा माहि पचाइ ॥२॥

गुर की सेवा सदा सुखु पाए ॥ संतसंगति मिलि हरि गुण गाए ॥ नामे नामि करे वीचारु ॥ आपि तरै कुल उधरणहारु ॥३॥

गुर की बाणी नामि वजाए ॥ नानक महलु सबदि घरु पाए ॥ गुरमति सत सरि हरि जलि नाइआ ॥ दुरमति मैलु सभु दुरतु गवाइआ ॥४॥५॥४४॥

(राग आसा -- SGGS 362) आसा महला ३ ॥
मनमुख मरहि मरि मरणु विगाड़हि ॥ दूजै भाइ आतम संघारहि ॥ मेरा मेरा करि करि विगूता ॥ आतमु न चीन्है भरमै विचि सूता ॥१॥

मरु मुइआ सबदे मरि जाइ ॥ उसतति निंदा गुरि सम जाणाई इसु जुग महि लाहा हरि जपि लै जाइ ॥१॥ रहाउ ॥

नाम विहूण गरभ गलि जाइ ॥ बिरथा जनमु दूजै लोभाइ ॥ नाम बिहूणी दुखि जलै सबाई ॥ सतिगुरि पूरै बूझ बुझाई ॥२॥

मनु चंचलु बहु चोटा खाइ ॥ एथहु छुड़किआ ठउर न पाइ ॥ गरभ जोनि विसटा का वासु ॥ तितु घरि मनमुखु करे निवासु ॥३॥

अपुने सतिगुर कउ सदा बलि जाई ॥ गुरमुखि जोती जोति मिलाई ॥ निरमल बाणी निज घरि वासा ॥ नानक हउमै मारे सदा उदासा ॥४॥६॥४५॥


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