Pt 10 - गुरू अमरदास जी - सलोक बाणी शब्द, Part 10 - Guru Amardas ji (Mahalla 3) - Slok Bani Quotes Shabad Path in Hindi Gurbani online


100+ गुरबाणी पाठ (हिंदी) सुन्दर गुटका साहिब (Download PDF) Daily Updates


(राग सोरठि -- SGGS 601) सोरठि महला ३ ॥
सो सिखु सखा बंधपु है भाई जि गुर के भाणे विचि आवै ॥ आपणै भाणै जो चलै भाई विछुड़ि चोटा खावै ॥ बिनु सतिगुर सुखु कदे न पावै भाई फिरि फिरि पछोतावै ॥१॥

हरि के दास सुहेले भाई ॥ जनम जनम के किलबिख दुख काटे आपे मेलि मिलाई ॥ रहाउ ॥ इहु कुट्मबु सभु जीअ के बंधन भाई भरमि भुला सैंसारा ॥ बिनु गुर बंधन टूटहि नाही गुरमुखि मोख दुआरा ॥ करम करहि गुर सबदु न पछाणहि मरि जनमहि वारो वारा ॥२॥

हउ मेरा जगु पलचि रहिआ भाई कोइ न किस ही केरा ॥ गुरमुखि महलु पाइनि गुण गावनि निज घरि होइ बसेरा ॥ ऐथै बूझै सु आपु पछाणै हरि प्रभु है तिसु केरा ॥३॥

सतिगुरू सदा दइआलु है भाई विणु भागा किआ पाईऐ ॥ एक नदरि करि वेखै सभ ऊपरि जेहा भाउ तेहा फलु पाईऐ ॥ नानक नामु वसै मन अंतरि विचहु आपु गवाईऐ ॥४॥६॥

(राग सोरठि -- SGGS 602) सोरठि महला ३ चौतुके ॥
सची भगति सतिगुर ते होवै सची हिरदै बाणी ॥ सतिगुरु सेवे सदा सुखु पाए हउमै सबदि समाणी ॥ बिनु गुर साचे भगति न होवी होर भूली फिरै इआणी ॥ मनमुखि फिरहि सदा दुखु पावहि डूबि मुए विणु पाणी ॥१॥

भाई रे सदा रहहु सरणाई ॥ आपणी नदरि करे पति राखै हरि नामो दे वडिआई ॥ रहाउ ॥ पूरे गुर ते आपु पछाता सबदि सचै वीचारा ॥ हिरदै जगजीवनु सद वसिआ तजि कामु क्रोधु अहंकारा ॥ सदा हजूरि रविआ सभ ठाई हिरदै नामु अपारा ॥ जुगि जुगि बाणी सबदि पछाणी नाउ मीठा मनहि पिआरा ॥२॥

सतिगुरु सेवि जिनि नामु पछाता सफल जनमु जगि आइआ ॥ हरि रसु चाखि सदा मनु त्रिपतिआ गुण गावै गुणी अघाइआ ॥ कमलु प्रगासि सदा रंगि राता अनहद सबदु वजाइआ ॥ तनु मनु निरमलु निरमल बाणी सचे सचि समाइआ ॥३॥

राम नाम की गति कोइ न बूझै गुरमति रिदै समाई ॥ गुरमुखि होवै सु मगु पछाणै हरि रसि रसन रसाई ॥ जपु तपु संजमु सभु गुर ते होवै हिरदै नामु वसाई ॥ नानक नामु समालहि से जन सोहनि दरि साचै पति पाई ॥४॥७॥

(राग सोरठि -- SGGS 602) सोरठि मः ३ दुतुके ॥
सतिगुर मिलिऐ उलटी भई भाई जीवत मरै ता बूझ पाइ ॥ सो गुरू सो सिखु है भाई जिसु जोती जोति मिलाइ ॥१॥

मन रे हरि हरि सेती लिव लाइ ॥ मन हरि जपि मीठा लागै भाई गुरमुखि पाए हरि थाइ ॥ रहाउ ॥ बिनु गुर प्रीति न ऊपजै भाई मनमुखि दूजै भाइ ॥ तुह कुटहि मनमुख करम करहि भाई पलै किछू न पाइ ॥२॥

गुर मिलिऐ नामु मनि रविआ भाई साची प्रीति पिआरि ॥ सदा हरि के गुण रवै भाई गुर कै हेति अपारि ॥३॥

आइआ सो परवाणु है भाई जि गुर सेवा चितु लाइ ॥ नानक नामु हरि पाईऐ भाई गुर सबदी मेलाइ ॥४॥८॥

(राग सोरठि -- SGGS 603) सोरठि महला ३ घरु १ ॥
तिही गुणी त्रिभवणु विआपिआ भाई गुरमुखि बूझ बुझाइ ॥ राम नामि लगि छूटीऐ भाई पूछहु गिआनीआ जाइ ॥१॥

मन रे त्रै गुण छोडि चउथै चितु लाइ ॥ हरि जीउ तेरै मनि वसै भाई सदा हरि के गुण गाइ ॥ रहाउ ॥ नामै ते सभि ऊपजे भाई नाइ विसरिऐ मरि जाइ ॥ अगिआनी जगतु अंधु है भाई सूते गए मुहाइ ॥२॥

गुरमुखि जागे से उबरे भाई भवजलु पारि उतारि ॥ जग महि लाहा हरि नामु है भाई हिरदै रखिआ उर धारि ॥३॥

गुर सरणाई उबरे भाई राम नामि लिव लाइ ॥ नानक नाउ बेड़ा नाउ तुलहड़ा भाई जितु लगि पारि जन पाइ ॥४॥९॥

(राग सोरठि -- SGGS 603) सोरठि महला ३ घरु १ ॥
सतिगुरु सुख सागरु जग अंतरि होर थै सुखु नाही ॥ हउमै जगतु दुखि रोगि विआपिआ मरि जनमै रोवै धाही ॥१॥

प्राणी सतिगुरु सेवि सुखु पाइ ॥ सतिगुरु सेवहि ता सुखु पावहि नाहि त जाहिगा जनमु गवाइ ॥ रहाउ ॥ त्रै गुण धातु बहु करम कमावहि हरि रस सादु न आइआ ॥ संधिआ तरपणु करहि गाइत्री बिनु बूझे दुखु पाइआ ॥२॥

सतिगुरु सेवे सो वडभागी जिस नो आपि मिलाए ॥ हरि रसु पी जन सदा त्रिपतासे विचहु आपु गवाए ॥३॥

इहु जगु अंधा सभु अंधु कमावै बिनु गुर मगु न पाए ॥ नानक सतिगुरु मिलै त अखी वेखै घरै अंदरि सचु पाए ॥४॥१०॥

(राग सोरठि -- SGGS 603) सोरठि महला ३ ॥
बिनु सतिगुर सेवे बहुता दुखु लागा जुग चारे भरमाई ॥ हम दीन तुम जुगु जुगु दाते सबदे देहि बुझाई ॥१॥

हरि जीउ क्रिपा करहु तुम पिआरे ॥ सतिगुरु दाता मेलि मिलावहु हरि नामु देवहु आधारे ॥ रहाउ ॥ मनसा मारि दुबिधा सहजि समाणी पाइआ नामु अपारा ॥ हरि रसु चाखि मनु निरमलु होआ किलबिख काटणहारा ॥२॥

सबदि मरहु फिरि जीवहु सद ही ता फिरि मरणु न होई ॥ अम्रितु नामु सदा मनि मीठा सबदे पावै कोई ॥३॥

दातै दाति रखी हथि अपणै जिसु भावै तिसु देई ॥ नानक नामि रते सुखु पाइआ दरगह जापहि सेई ॥४॥११॥

(राग सोरठि -- SGGS 604) सोरठि महला ३ ॥
सतिगुर सेवे ता सहज धुनि उपजै गति मति तद ही पाए ॥ हरि का नामु सचा मनि वसिआ नामे नामि समाए ॥१॥

बिनु सतिगुर सभु जगु बउराना ॥ मनमुखि अंधा सबदु न जाणै झूठै भरमि भुलाना ॥ रहाउ ॥ त्रै गुण माइआ भरमि भुलाइआ हउमै बंधन कमाए ॥ जमणु मरणु सिर ऊपरि ऊभउ गरभ जोनि दुखु पाए ॥२॥

त्रै गुण वरतहि सगल संसारा हउमै विचि पति खोई ॥ गुरमुखि होवै चउथा पदु चीनै राम नामि सुखु होई ॥३॥

त्रै गुण सभि तेरे तू आपे करता जो तू करहि सु होई ॥ नानक राम नामि निसतारा सबदे हउमै खोई ॥४॥१२॥

(राग सोरठि -- SGGS 637) सोरठि महला ३ घरु १ तितुकी
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
भगता दी सदा तू रखदा हरि जीउ धुरि तू रखदा आइआ ॥ प्रहिलाद जन तुधु राखि लए हरि जीउ हरणाखसु मारि पचाइआ ॥ गुरमुखा नो परतीति है हरि जीउ मनमुख भरमि भुलाइआ ॥१॥

हरि जी एह तेरी वडिआई ॥ भगता की पैज रखु तू सुआमी भगत तेरी सरणाई ॥ रहाउ ॥ भगता नो जमु जोहि न साकै कालु न नेड़ै जाई ॥ केवल राम नामु मनि वसिआ नामे ही मुकति पाई ॥ रिधि सिधि सभ भगता चरणी लागी गुर कै सहजि सुभाई ॥२॥

मनमुखा नो परतीति न आवी अंतरि लोभ सुआउ ॥ गुरमुखि हिरदै सबदु न भेदिओ हरि नामि न लागा भाउ ॥ कूड़ कपट पाजु लहि जासी मनमुख फीका अलाउ ॥३॥

भगता विचि आपि वरतदा प्रभ जी भगती हू तू जाता ॥ माइआ मोह सभ लोक है तेरी तू एको पुरखु बिधाता ॥ हउमै मारि मनसा मनहि समाणी गुर कै सबदि पछाता ॥४॥

अचिंत कम करहि प्रभ तिन के जिन हरि का नामु पिआरा ॥ गुर परसादि सदा मनि वसिआ सभि काज सवारणहारा ॥ ओना की रीस करे सु विगुचै जिन हरि प्रभु है रखवारा ॥५॥

बिनु सतिगुर सेवे किनै न पाइआ मनमुखि भउकि मुए बिललाई ॥ आवहि जावहि ठउर न पावहि दुख महि दुखि समाई ॥ गुरमुखि होवै सु अम्रितु पीवै सहजे साचि समाई ॥६॥

बिनु सतिगुर सेवे जनमु न छोडै जे अनेक करम करै अधिकाई ॥ वेद पड़हि तै वाद वखाणहि बिनु हरि पति गवाई ॥ सचा सतिगुरु साची जिसु बाणी भजि छूटहि गुर सरणाई ॥७॥

जिन हरि मनि वसिआ से दरि साचे दरि साचै सचिआरा ॥ ओना दी सोभा जुगि जुगि होई कोइ न मेटणहारा ॥ नानक तिन कै सद बलिहारै जिन हरि राखिआ उरि धारा ॥८॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 638) सोरठि महला ३ दुतुकी ॥
निगुणिआ नो आपे बखसि लए भाई सतिगुर की सेवा लाइ ॥ सतिगुर की सेवा ऊतम है भाई राम नामि चितु लाइ ॥१॥

हरि जीउ आपे बखसि मिलाइ ॥ गुणहीण हम अपराधी भाई पूरै सतिगुरि लए रलाइ ॥ रहाउ ॥ कउण कउण अपराधी बखसिअनु पिआरे साचै सबदि वीचारि ॥ भउजलु पारि उतारिअनु भाई सतिगुर बेड़ै चाड़ि ॥२॥

मनूरै ते कंचन भए भाई गुरु पारसु मेलि मिलाइ ॥ आपु छोडि नाउ मनि वसिआ भाई जोती जोति मिलाइ ॥३॥

हउ वारी हउ वारणै भाई सतिगुर कउ सद बलिहारै जाउ ॥ नामु निधानु जिनि दिता भाई गुरमति सहजि समाउ ॥४॥

गुर बिनु सहजु न ऊपजै भाई पूछहु गिआनीआ जाइ ॥ सतिगुर की सेवा सदा करि भाई विचहु आपु गवाइ ॥५॥

गुरमती भउ ऊपजै भाई भउ करणी सचु सारु ॥ प्रेम पदारथु पाईऐ भाई सचु नामु आधारु ॥६॥

जो सतिगुरु सेवहि आपणा भाई तिन कै हउ लागउ पाइ ॥ जनमु सवारी आपणा भाई कुलु भी लई बखसाइ ॥७॥

सचु बाणी सचु सबदु है भाई गुर किरपा ते होइ ॥ नानक नामु हरि मनि वसै भाई तिसु बिघनु न लागै कोइ ॥८॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 639) सोरठि महला ३ ॥
हरि जीउ सबदे जापदा भाई पूरै भागि मिलाइ ॥ सदा सुखु सोहागणी भाई अनदिनु रतीआ रंगु लाइ ॥१॥

हरि जी तू आपे रंगु चड़ाइ ॥ गावहु गावहु रंगि रातिहो भाई हरि सेती रंगु लाइ ॥ रहाउ ॥ गुर की कार कमावणी भाई आपु छोडि चितु लाइ ॥ सदा सहजु फिरि दुखु न लगई भाई हरि आपि वसै मनि आइ ॥२॥

पिर का हुकमु न जाणई भाई सा कुलखणी कुनारि ॥ मनहठि कार कमावणी भाई विणु नावै कूड़िआरि ॥३॥

से गावहि जिन मसतकि भागु है भाई भाइ सचै बैरागु ॥ अनदिनु राते गुण रवहि भाई निरभउ गुर लिव लागु ॥४॥

सभना मारि जीवालदा भाई सो सेवहु दिनु राति ॥ सो किउ मनहु विसारीऐ भाई जिस दी वडी है दाति ॥५॥

मनमुखि मैली डुमणी भाई दरगह नाही थाउ ॥ गुरमुखि होवै त गुण रवै भाई मिलि प्रीतम साचि समाउ ॥६॥

एतु जनमि हरि न चेतिओ भाई किआ मुहु देसी जाइ ॥ किड़ी पवंदी मुहाइओनु भाई बिखिआ नो लोभाइ ॥७॥

नामु समालहि सुखि वसहि भाई सदा सुखु सांति सरीर ॥ नानक नामु समालि तू भाई अपर्मपर गुणी गहीर ॥८॥३॥

(राग सोरठि -- SGGS 643) सलोकु मः ३ ॥
हउमै जलते जलि मुए भ्रमि आए दूजै भाइ ॥ पूरै सतिगुरि राखि लीए आपणै पंनै पाइ ॥ इहु जगु जलता नदरी आइआ गुर कै सबदि सुभाइ ॥ सबदि रते से सीतल भए नानक सचु कमाइ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 643) मः ३ ॥
सफलिओ सतिगुरु सेविआ धंनु जनमु परवाणु ॥ जिना सतिगुरु जीवदिआ मुइआ न विसरै सेई पुरख सुजाण ॥ कुलु उधारे आपणा सो जनु होवै परवाणु ॥ गुरमुखि मुए जीवदे परवाणु हहि मनमुख जनमि मराहि ॥ नानक मुए न आखीअहि जि गुर कै सबदि समाहि ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 643) सलोकु मः ३ ॥
पूरबि लिखिआ कमावणा जि करतै आपि लिखिआसु ॥ मोह ठगउली पाईअनु विसरिआ गुणतासु ॥ मतु जाणहु जगु जीवदा दूजै भाइ मुइआसु ॥ जिनी गुरमुखि नामु न चेतिओ से बहणि न मिलनी पासि ॥ दुखु लागा बहु अति घणा पुतु कलतु न साथि कोई जासि ॥ लोका विचि मुहु काला होआ अंदरि उभे सास ॥ मनमुखा नो को न विसही चुकि गइआ वेसासु ॥ नानक गुरमुखा नो सुखु अगला जिना अंतरि नाम निवासु ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 643) मः ३ ॥
से सैण से सजणा जि गुरमुखि मिलहि सुभाइ ॥ सतिगुर का भाणा अनदिनु करहि से सचि रहे समाइ ॥ दूजै भाइ लगे सजण न आखीअहि जि अभिमानु करहि वेकार ॥ मनमुख आप सुआरथी कारजु न सकहि सवारि ॥ नानक पूरबि लिखिआ कमावणा कोइ न मेटणहारु ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 643) सलोकु मः ३ ॥
माइआ ममता मोहणी जिनि विणु दंता जगु खाइआ ॥ मनमुख खाधे गुरमुखि उबरे जिनी सचि नामि चितु लाइआ ॥ बिनु नावै जगु कमला फिरै गुरमुखि नदरी आइआ ॥ धंधा करतिआ निहफलु जनमु गवाइआ सुखदाता मनि न वसाइआ ॥ नानक नामु तिना कउ मिलिआ जिन कउ धुरि लिखि पाइआ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 644) मः ३ ॥
घर ही महि अम्रितु भरपूरु है मनमुखा सादु न पाइआ ॥ जिउ कसतूरी मिरगु न जाणै भ्रमदा भरमि भुलाइआ ॥ अम्रितु तजि बिखु संग्रहै करतै आपि खुआइआ ॥ गुरमुखि विरले सोझी पई तिना अंदरि ब्रहमु दिखाइआ ॥ तनु मनु सीतलु होइआ रसना हरि सादु आइआ ॥ सबदे ही नाउ ऊपजै सबदे मेलि मिलाइआ ॥ बिनु सबदै सभु जगु बउराना बिरथा जनमु गवाइआ ॥ अम्रितु एको सबदु है नानक गुरमुखि पाइआ ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 644) सलोकु मः ३ ॥
जिउ तनु कोलू पीड़ीऐ रतु न भोरी डेहि ॥ जीउ वंञै चउ खंनीऐ सचे संदड़ै नेहि ॥ नानक मेलु न चुकई राती अतै डेह ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 644) मः ३ ॥
सजणु मैडा रंगुला रंगु लाए मनु लेइ ॥ जिउ माजीठै कपड़े रंगे भी पाहेहि ॥ नानक रंगु न उतरै बिआ न लगै केह ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 644) सलोकु मः ३ ॥
सतिगुर की सेवा सफलु है जे को करे चितु लाइ ॥ मनि चिंदिआ फलु पावणा हउमै विचहु जाइ ॥ बंधन तोड़ै मुकति होइ सचे रहै समाइ ॥ इसु जग महि नामु अलभु है गुरमुखि वसै मनि आइ ॥ नानक जो गुरु सेवहि आपणा हउ तिन बलिहारै जाउ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 644) मः ३ ॥
मनमुख मंनु अजितु है दूजै लगै जाइ ॥ तिस नो सुखु सुपनै नही दुखे दुखि विहाइ ॥ घरि घरि पड़ि पड़ि पंडित थके सिध समाधि लगाइ ॥ इहु मनु वसि न आवई थके करम कमाइ ॥ भेखधारी भेख करि थके अठिसठि तीरथ नाइ ॥ मन की सार न जाणनी हउमै भरमि भुलाइ ॥ गुर परसादी भउ पइआ वडभागि वसिआ मनि आइ ॥ भै पइऐ मनु वसि होआ हउमै सबदि जलाइ ॥ सचि रते से निरमले जोती जोति मिलाइ ॥ सतिगुरि मिलिऐ नाउ पाइआ नानक सुखि समाइ ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 645) सलोकु मः ३ ॥
सतिगुर ते जो मुह फिरे से बधे दुख सहाहि ॥ फिरि फिरि मिलणु न पाइनी जमहि तै मरि जाहि ॥ सहसा रोगु न छोडई दुख ही महि दुख पाहि ॥ नानक नदरी बखसि लेहि सबदे मेलि मिलाहि ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 645) मः ३ ॥
जो सतिगुर ते मुह फिरे तिना ठउर न ठाउ ॥ जिउ छुटड़ि घरि घरि फिरै दुहचारणि बदनाउ ॥ नानक गुरमुखि बखसीअहि से सतिगुर मेलि मिलाउ ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 645) सलोकु मः ३ ॥
थालै विचि तै वसतू पईओ हरि भोजनु अम्रितु सारु ॥ जितु खाधै मनु त्रिपतीऐ पाईऐ मोख दुआरु ॥ इहु भोजनु अलभु है संतहु लभै गुर वीचारि ॥ एह मुदावणी किउ विचहु कढीऐ सदा रखीऐ उरि धारि ॥ एह मुदावणी सतिगुरू पाई गुरसिखा लधी भालि ॥ नानक जिसु बुझाए सु बुझसी हरि पाइआ गुरमुखि घालि ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 645) मः ३ ॥
जो धुरि मेले से मिलि रहे सतिगुर सिउ चितु लाइ ॥ आपि विछोड़ेनु से विछुड़े दूजै भाइ खुआइ ॥ नानक विणु करमा किआ पाईऐ पूरबि लिखिआ कमाइ ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 645) सलोकु मः ३ ॥
विणु नावै सभि भरमदे नित जगि तोटा सैसारि ॥ मनमुखि करम कमावणे हउमै अंधु गुबारु ॥ गुरमुखि अम्रितु पीवणा नानक सबदु वीचारि ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 646) मः ३ ॥
सहजे जागै सहजे सोवै ॥ गुरमुखि अनदिनु उसतति होवै ॥ मनमुख भरमै सहसा होवै ॥ अंतरि चिंता नीद न सोवै ॥ गिआनी जागहि सवहि सुभाइ ॥ नानक नामि रतिआ बलि जाउ ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 646) सलोक मः ३ ॥
अंतरि गिआनु न आइओ जितु किछु सोझी पाइ ॥ विणु डिठा किआ सालाहीऐ अंधा अंधु कमाइ ॥ नानक सबदु पछाणीऐ नामु वसै मनि आइ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 646) मः ३ ॥
इका बाणी इकु गुरु इको सबदु वीचारि ॥ सचा सउदा हटु सचु रतनी भरे भंडार ॥ गुर किरपा ते पाईअनि जे देवै देवणहारु ॥ सचा सउदा लाभु सदा खटिआ नामु अपारु ॥ विखु विचि अम्रितु प्रगटिआ करमि पीआवणहारु ॥ नानक सचु सलाहीऐ धंनु सवारणहारु ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 646) सलोकु मः ३ ॥
सेखा चउचकिआ चउवाइआ एहु मनु इकतु घरि आणि ॥ एहड़ तेहड़ छडि तू गुर का सबदु पछाणु ॥ सतिगुर अगै ढहि पउ सभु किछु जाणै जाणु ॥ आसा मनसा जलाइ तू होइ रहु मिहमाणु ॥ सतिगुर कै भाणै भी चलहि ता दरगह पावहि माणु ॥ नानक जि नामु न चेतनी तिन धिगु पैनणु धिगु खाणु ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 646) मः ३ ॥
हरि गुण तोटि न आवई कीमति कहणु न जाइ ॥ नानक गुरमुखि हरि गुण रवहि गुण महि रहै समाइ ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 647) सलोकु मः ३ ॥
परथाइ साखी महा पुरख बोलदे साझी सगल जहानै ॥ गुरमुखि होइ सु भउ करे आपणा आपु पछाणै ॥ गुर परसादी जीवतु मरै ता मन ही ते मनु मानै ॥ जिन कउ मन की परतीति नाही नानक से किआ कथहि गिआनै ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 647) मः ३ ॥
गुरमुखि चितु न लाइओ अंति दुखु पहुता आइ ॥ अंदरहु बाहरहु अंधिआं सुधि न काई पाइ ॥ पंडित तिन की बरकती सभु जगतु खाइ जो रते हरि नाइ ॥ जिन गुर कै सबदि सलाहिआ हरि सिउ रहे समाइ ॥ पंडित दूजै भाइ बरकति न होवई ना धनु पलै पाइ ॥ पड़ि थके संतोखु न आइओ अनदिनु जलत विहाइ ॥ कूक पूकार न चुकई ना संसा विचहु जाइ ॥ नानक नाम विहूणिआ मुहि कालै उठि जाइ ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 647) सलोकु मः ३ ॥
पंडित मैलु न चुकई जे वेद पड़ै जुग चारि ॥ त्रै गुण माइआ मूलु है विचि हउमै नामु विसारि ॥ पंडित भूले दूजै लागे माइआ कै वापारि ॥ अंतरि त्रिसना भुख है मूरख भुखिआ मुए गवार ॥ सतिगुरि सेविऐ सुखु पाइआ सचै सबदि वीचारि ॥ अंदरहु त्रिसना भुख गई सचै नाइ पिआरि ॥ नानक नामि रते सहजे रजे जिना हरि रखिआ उरि धारि ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 647) मः ३ ॥
मनमुख हरि नामु न सेविआ दुखु लगा बहुता आइ ॥ अंतरि अगिआनु अंधेरु है सुधि न काई पाइ ॥ मनहठि सहजि न बीजिओ भुखा कि अगै खाइ ॥ नामु निधानु विसारिआ दूजै लगा जाइ ॥ नानक गुरमुखि मिलहि वडिआईआ जे आपे मेलि मिलाइ ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 647) सलोकु मः ३ ॥
हसती सिरि जिउ अंकसु है अहरणि जिउ सिरु देइ ॥ मनु तनु आगै राखि कै ऊभी सेव करेइ ॥ इउ गुरमुखि आपु निवारीऐ सभु राजु स्रिसटि का लेइ ॥ नानक गुरमुखि बुझीऐ जा आपे नदरि करेइ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 648) मः ३ ॥
जिन गुरमुखि नामु धिआइआ आए ते परवाणु ॥ नानक कुल उधारहि आपणा दरगह पावहि माणु ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 648) सलोकु मः ३ ॥
नानक नामु न चेतनी अगिआनी अंधुले अवरे करम कमाहि ॥ जम दरि बधे मारीअहि फिरि विसटा माहि पचाहि ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 648) मः ३ ॥
नानक सतिगुरु सेवहि आपणा से जन सचे परवाणु ॥ हरि कै नाइ समाइ रहे चूका आवणु जाणु ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 648) सलोकु मः ३ ॥
बिनु करमै नाउ न पाईऐ पूरै करमि पाइआ जाइ ॥ नानक नदरि करे जे आपणी ता गुरमति मेलि मिलाइ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 648) सलोकु मः ३ ॥
नानक नावहु घुथिआ हलतु पलतु सभु जाइ ॥ जपु तपु संजमु सभु हिरि लइआ मुठी दूजै भाइ ॥ जम दरि बधे मारीअहि बहुती मिलै सजाइ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 649) मः ३ ॥
संता नालि वैरु कमावदे दुसटा नालि मोहु पिआरु ॥ अगै पिछै सुखु नही मरि जमहि वारो वार ॥ त्रिसना कदे न बुझई दुबिधा होइ खुआरु ॥ मुह काले तिना निंदका तितु सचै दरबारि ॥ नानक नाम विहूणिआ ना उरवारि न पारि ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 649) सलोकु मः ३ ॥
सतिगुर की सेवा गाखड़ी सिरु दीजै आपु गवाइ ॥ सबदि मरहि फिरि ना मरहि ता सेवा पवै सभ थाइ ॥ पारस परसिऐ पारसु होवै सचि रहै लिव लाइ ॥ जिसु पूरबि होवै लिखिआ तिसु सतिगुरु मिलै प्रभु आइ ॥ नानक गणतै सेवकु ना मिलै जिसु बखसे सो पवै थाइ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 649) मः ३ ॥
महलु कुमहलु न जाणनी मूरख अपणै सुआइ ॥ सबदु चीनहि ता महलु लहहि जोती जोति समाइ ॥ सदा सचे का भउ मनि वसै ता सभा सोझी पाइ ॥ सतिगुरु अपणै घरि वरतदा आपे लए मिलाइ ॥ नानक सतिगुरि मिलिऐ सभ पूरी पई जिस नो किरपा करे रजाइ ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 649) सलोकु मः ३ ॥
ब्रहमु बिंदै तिस दा ब्रहमतु रहै एक सबदि लिव लाइ ॥ नव निधी अठारह सिधी पिछै लगीआ फिरहि जो हरि हिरदै सदा वसाइ ॥ बिनु सतिगुर नाउ न पाईऐ बुझहु करि वीचारु ॥ नानक पूरै भागि सतिगुरु मिलै सुखु पाए जुग चारि ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 649) मः ३ ॥
किआ गभरू किआ बिरधि है मनमुख त्रिसना भुख न जाइ ॥ गुरमुखि सबदे रतिआ सीतलु होए आपु गवाइ ॥ अंदरु त्रिपति संतोखिआ फिरि भुख न लगै आइ ॥ नानक जि गुरमुखि करहि सो परवाणु है जो नामि रहे लिव लाइ ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 650) सलोकु मः ३ ॥
गुर बिनु गिआनु न होवई ना सुखु वसै मनि आइ ॥ नानक नाम विहूणे मनमुखी जासनि जनमु गवाइ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 650) मः ३ ॥
सिध साधिक नावै नो सभि खोजदे थकि रहे लिव लाइ ॥ बिनु सतिगुर किनै न पाइओ गुरमुखि मिलै मिलाइ ॥ बिनु नावै पैनणु खाणु सभु बादि है धिगु सिधी धिगु करमाति ॥ सा सिधि सा करमाति है अचिंतु करे जिसु दाति ॥ नानक गुरमुखि हरि नामु मनि वसै एहा सिधि एहा करमाति ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 650) सलोकु मः ३ ॥
पड़णा गुड़णा संसार की कार है अंदरि त्रिसना विकारु ॥ हउमै विचि सभि पड़ि थके दूजै भाइ खुआरु ॥ सो पड़िआ सो पंडितु बीना गुर सबदि करे वीचारु ॥ अंदरु खोजै ततु लहै पाए मोख दुआरु ॥ गुण निधानु हरि पाइआ सहजि करे वीचारु ॥ धंनु वापारी नानका जिसु गुरमुखि नामु अधारु ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 650) मः ३ ॥
विणु मनु मारे कोइ न सिझई वेखहु को लिव लाइ ॥ भेखधारी तीरथी भवि थके ना एहु मनु मारिआ जाइ ॥ गुरमुखि एहु मनु जीवतु मरै सचि रहै लिव लाइ ॥ नानक इसु मन की मलु इउ उतरै हउमै सबदि जलाइ ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 651) सलोकु मः ३ ॥
जनम जनम की इसु मन कउ मलु लागी काला होआ सिआहु ॥ खंनली धोती उजली न होवई जे सउ धोवणि पाहु ॥ गुर परसादी जीवतु मरै उलटी होवै मति बदलाहु ॥ नानक मैलु न लगई ना फिरि जोनी पाहु ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 651) मः ३ ॥
चहु जुगी कलि काली कांढी इक उतम पदवी इसु जुग माहि ॥ गुरमुखि हरि कीरति फलु पाईऐ जिन कउ हरि लिखि पाहि ॥ नानक गुर परसादी अनदिनु भगति हरि उचरहि हरि भगती माहि समाहि ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 651) सलोकु मः ३ ॥
रे जन उथारै दबिओहु सुतिआ गई विहाइ ॥ सतिगुर का सबदु सुणि न जागिओ अंतरि न उपजिओ चाउ ॥ सरीरु जलउ गुण बाहरा जो गुर कार न कमाइ ॥ जगतु जलंदा डिठु मै हउमै दूजै भाइ ॥ नानक गुर सरणाई उबरे सचु मनि सबदि धिआइ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 651) मः ३ ॥
सबदि रते हउमै गई सोभावंती नारि ॥ पिर कै भाणै सदा चलै ता बनिआ सीगारु ॥ सेज सुहावी सदा पिरु रावै हरि वरु पाइआ नारि ॥ ना हरि मरै न कदे दुखु लागै सदा सुहागणि नारि ॥ नानक हरि प्रभ मेलि लई गुर कै हेति पिआरि ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 651) सलोकु मः ३ ॥
गुर सेवा ते सुखु ऊपजै फिरि दुखु न लगै आइ ॥ जमणु मरणा मिटि गइआ कालै का किछु न बसाइ ॥ हरि सेती मनु रवि रहिआ सचे रहिआ समाइ ॥ नानक हउ बलिहारी तिंन कउ जो चलनि सतिगुर भाइ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 651) मः ३ ॥
बिनु सबदै सुधु न होवई जे अनेक करै सीगार ॥ पिर की सार न जाणई दूजै भाइ पिआरु ॥ सा कुसुध सा कुलखणी नानक नारी विचि कुनारि ॥२॥

(राग सोरठि -- SGGS 653) सलोकु मः ३ ॥
ए मन हरि जी धिआइ तू इक मनि इक चिति भाइ ॥ हरि कीआ सदा सदा वडिआईआ देइ न पछोताइ ॥ हउ हरि कै सद बलिहारणै जितु सेविऐ सुखु पाइ ॥ नानक गुरमुखि मिलि रहै हउमै सबदि जलाइ ॥१॥

(राग सोरठि -- SGGS 653) मः ३ ॥
आपे सेवा लाइअनु आपे बखस करेइ ॥ सभना का मा पिउ आपि है आपे सार करेइ ॥ नानक नामु धिआइनि तिन निज घरि वासु है जुगु जुगु सोभा होइ ॥२॥

(राग धनासरी -- SGGS 663) धनासरी महला ३ घरु २ चउपदे
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥
इहु धनु अखुटु न निखुटै न जाइ ॥ पूरै सतिगुरि दीआ दिखाइ ॥ अपुने सतिगुर कउ सद बलि जाई ॥ गुर किरपा ते हरि मंनि वसाई ॥१॥

से धनवंत हरि नामि लिव लाइ ॥ गुरि पूरै हरि धनु परगासिआ हरि किरपा ते वसै मनि आइ ॥ रहाउ ॥ अवगुण काटि गुण रिदै समाइ ॥ पूरे गुर कै सहजि सुभाइ ॥ पूरे गुर की साची बाणी ॥ सुख मन अंतरि सहजि समाणी ॥२॥

एकु अचरजु जन देखहु भाई ॥ दुबिधा मारि हरि मंनि वसाई ॥ नामु अमोलकु न पाइआ जाइ ॥ गुर परसादि वसै मनि आइ ॥३॥

सभ महि वसै प्रभु एको सोइ ॥ गुरमती घटि परगटु होइ ॥ सहजे जिनि प्रभु जाणि पछाणिआ ॥ नानक नामु मिलै मनु मानिआ ॥४॥१॥

(राग धनासरी -- SGGS 664) धनासरी महला ३ ॥
हरि नामु धनु निरमलु अति अपारा ॥ गुर कै सबदि भरे भंडारा ॥ नाम धन बिनु होर सभ बिखु जाणु ॥ माइआ मोहि जलै अभिमानु ॥१॥

गुरमुखि हरि रसु चाखै कोइ ॥ तिसु सदा अनंदु होवै दिनु राती पूरै भागि परापति होइ ॥ रहाउ ॥ सबदु दीपकु वरतै तिहु लोइ ॥ जो चाखै सो निरमलु होइ ॥ निरमल नामि हउमै मलु धोइ ॥ साची भगति सदा सुखु होइ ॥२॥

जिनि हरि रसु चाखिआ सो हरि जनु लोगु ॥ तिसु सदा हरखु नाही कदे सोगु ॥ आपि मुकतु अवरा मुकतु करावै ॥ हरि नामु जपै हरि ते सुखु पावै ॥३॥

बिनु सतिगुर सभ मुई बिललाइ ॥ अनदिनु दाझहि साति न पाइ ॥ सतिगुरु मिलै सभु त्रिसन बुझाए ॥ नानक नामि सांति सुखु पाए ॥४॥२॥

(राग धनासरी -- SGGS 664) धनासरी महला ३ ॥
सदा धनु अंतरि नामु समाले ॥ जीअ जंत जिनहि प्रतिपाले ॥ मुकति पदारथु तिन कउ पाए ॥ हरि कै नामि रते लिव लाए ॥१॥

गुर सेवा ते हरि नामु धनु पावै ॥ अंतरि परगासु हरि नामु धिआवै ॥ रहाउ ॥ इहु हरि रंगु गूड़ा धन पिर होइ ॥ सांति सीगारु रावे प्रभु सोइ ॥ हउमै विचि प्रभु कोइ न पाए ॥ मूलहु भुला जनमु गवाए ॥२॥

गुर ते साति सहज सुखु बाणी ॥ सेवा साची नामि समाणी ॥ सबदि मिलै प्रीतमु सदा धिआए ॥ साच नामि वडिआई पाए ॥३॥

आपे करता जुगि जुगि सोइ ॥ नदरि करे मेलावा होइ ॥ गुरबाणी ते हरि मंनि वसाए ॥ नानक साचि रते प्रभि आपि मिलाए ॥४॥३॥

(राग धनासरी -- SGGS 664) धनासरी महला ३ तीजा ॥
जगु मैला मैलो होइ जाइ ॥ आवै जाइ दूजै लोभाइ ॥ दूजै भाइ सभ परज विगोई ॥ मनमुखि चोटा खाइ अपुनी पति खोई ॥१॥

गुर सेवा ते जनु निरमलु होइ ॥ अंतरि नामु वसै पति ऊतम होइ ॥ रहाउ ॥ गुरमुखि उबरे हरि सरणाई ॥ राम नामि राते भगति द्रिड़ाई ॥ भगति करे जनु वडिआई पाए ॥ साचि रते सुख सहजि समाए ॥२॥

साचे का गाहकु विरला को जाणु ॥ गुर कै सबदि आपु पछाणु ॥ साची रासि साचा वापारु ॥ सो धंनु पुरखु जिसु नामि पिआरु ॥३॥

तिनि प्रभि साचै इकि सचि लाए ॥ ऊतम बाणी सबदु सुणाए ॥ प्रभ साचे की साची कार ॥ नानक नामि सवारणहार ॥४॥४॥


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